Jammu Kashmir के डिग्री कॉलेजों से हटीं 4,767 आपत्तिजनक किताबें, 21 लाख से अधिक का हुआ था Review

उच्च शिक्षा विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों की लाइब्रेरी में मौजूद करीब 22 लाख पुस्तकों की पड़ताल के बाद 4,767 किताबों को प्रचलन से बाहर कर दिया है। विधानसभा में दिए लिखित जवाब के अनुसार इनमें 518 प्रतिबंधित प्रकाशन भी शामिल हैं। घाटी से सबसे अधिक 4,474 जबकि जम्मू संभाग से 293 किताबें हटाई गई हैं।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के कॉलेजों से लगभग 22 लाख पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच के बाद प्रतिबंधित पुस्तकों समेत 4,700 से अधिक ऐसी किताबें हटा दी हैं, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री थी। लंगेट से अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के विधायक खुर्शीद अहमद शेख के विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि अब तक 21,81,582 पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच की जा चुकी है। उच्च शिक्षा विभाग ने अपने जवाब में कहा कि इनमें से 9,32,941 पुस्तकों और प्रकाशनों की जम्मू संभाग में, जबकि 12,48,641 की कश्मीर संभाग में जांच की गई।
सरकार ने बताया कि उसने 518 प्रतिबंधित प्रकाशनों समेत 4,767 पुस्तकों को प्रचलन से हटा दिया है। इसने बताया कि जम्मू क्षेत्र में 293 किताबें हटाई गई हैं, जबकि कश्मीर घाटी से 4,474 किताबें हटाई गई हैं। सरकार ने कॉलेजों के निदेशक को विशेषज्ञ जांच के लिए 1,752 किताबें भी भेजी हैं, जिनमें जम्मू की 538 और कश्मीर की 1,214 किताबें शामिल हैं।
इसने कहा कि कॉलेजों में उपलब्ध किताबों की जांच के लिए आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करने के वास्ते स्पष्ट और निष्पक्ष मानदंड अपनाया गया है। हालांकि, सरकार ने कहा कि आपत्तिजनक किताबों और सामग्री की जांच कर इन्हें हटाने की प्रक्रिया विभाग में अभी जारी है। सरकार ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का कारण यह है कि उच्च शिक्षण संस्थान उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के केंद्र हैं और उनसे एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देने की उम्मीद की जाती है जो संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिम्मेदार नागरिकता और भारत की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता के प्रति सम्मान को बनाए रखे।
यह जांच शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों की ओर से जुलाई में जारी किए गए उन आदेशों के बाद की गई है, जिनमें सभी किताबों की जांच करने को कहा गया था। ये आदेश आपत्तिजनक सामग्री वाली दो किताबों की खरीद को लेकर हुए विवाद के बाद जारी किये गये थे।
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