Kakatiya स्थापत्य का अद्भुत नमूना Telangana का Gollala Gudi अब राष्ट्रीय स्मारक, ASI ने दी मान्यता

ASI के डीजी यदुबीर सिंह रावत ने बताया कि मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इससे पहले 6 मार्च 2026 को सरकार ने इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का इरादा सार्वजनिक किया था। तय दो महीने की अवधि में प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं मिली।
तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में स्थित प्राचीन 'गोल्लाला गुड़ी' मंदिर को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अधिसूचना जारी होने के बाद मंदिर अब देश की संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित है। ASI के डीजी यदुबीर सिंह रावत ने बताया कि मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इससे पहले 6 मार्च 2026 को सरकार ने इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का इरादा सार्वजनिक किया था। तय दो महीने की अवधि में प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं मिली। इसके बाद प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 4(3) के तहत इसे राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया गया।
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काकतीय स्थापत्य का शानदार नमूना
रावत ने बताया कि गोल्लाला गुड़ी की खासियत इसकी 'त्रिकुटलाया' वास्तुशैली है। पूर्व दिशा की ओर खुलने वाले विशाल मंडप के चारों ओर तीन गर्भगृह है। केंद्रीय गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। ऊंची जगती पर पशु आकृतियों और फूल-पत्तियों की बारीक नक्काशी है। प्रवेश द्वारों और छत के नीचे जालीदार नक्काशी के साथ हंसों की कतारें बनी है।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा 31 अगस्त, 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, केंद्र सरकार ने 'प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958' की धारा 4 की उप-धारा (3) के तहत इस प्राचीन स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया। नोटिफिकेशन (संख्या S.O. 4802(E)) में कहा गया है कि सरकार ने पहले 6 मार्च, 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें उस नोटिफिकेशन के साथ लगे साइट प्लान और शेड्यूल में बताए गए स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का इरादा जताया गया था।
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पिछला नोटिफिकेशन 'भारत के राजपत्र' (Gazette of India) में प्रकाशित किया गया था। साथ ही, अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (1) के तहत ज़रूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए, सरकार के इस इरादे की सूचना प्राचीन स्मारक के पास एक प्रमुख स्थान पर लगाई गई थी। मंत्रालय ने बताया कि राजपत्र नोटिफिकेशन की प्रतियां 6 मार्च, 2026 को जनता के लिए उपलब्ध कराई गई थीं और इस प्रस्तावित घोषणा पर जनता की ओर से कोई आपत्ति नहीं मिली थी। इसके बाद, केंद्र सरकार ने अधिनियम के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस प्राचीन स्मारक को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर दिया।
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