Election Commission ने Supreme Court में SIR फैसले का किया बचाव

निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय में विशेष गहन पुनरीक्षण कराने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कानून के अनुसार शुरू हुई थी। आयोग के अनुसार इससे जुड़े तीनों आदेश सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। इसके साथ ही आयोग ने मतदाता सूची के फॉर्म छह में किसी भी तरह के संशोधन से साफ इनकार किया है।
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कानून के अनुसार शुरू की गई थी और इसे लागू करने से संबंधित तीनों आदेश आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूर किए थे। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए निर्धारित फॉर्म छह में किसी भी बदलाव से इनकार करते हुए कहा कि कानून और इस फॉर्म में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग ने उन याचिकाओं के जवाब में यह बात कही, जिनमें आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग ने दो निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए, जिनमें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह में कथित ‘बदलाव’ भी शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में दाखिल उसके जवाबी हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। आयोग ने कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी एसआईआर संबंधी आदेशों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों सहित आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद पर कामकाज करने से रोका नहीं जा सकता, क्योंकि कानून की नजर में समाचार पत्रों की खबरों को साक्ष्य नहीं माना जाता।
इससे पहले, पांच अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह निर्वाचन आयोग के सभी फैसलों की जांच करेगा और कानून के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले फैसलों को रद्द कर देगा। न्यायालय ने इस मामले में केंद्र और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किए थे। ये याचिकाएं ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की 25 सितंबर की एक खबर के बाद दायर की गई थीं।
खबर में कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर लिखित रूप में आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। इस दावे के बाद विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने विरोध प्रदर्शन किए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
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