Delhi Police ने CSC Wallet से साइबर ठगी करने वाले 3 शातिरों को UP से पकड़ा

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

उत्तरी दिल्ली पुलिस ने 72 वर्षीय बुजुर्ग से करीब दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में तीन आरोपियों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बिजली कनेक्शन में नाम सुधार और सौर ऊर्जा के नाम पर पीड़ित को एपीके फाइल भेजकर बैंक खाता खाली कर दिया था। पुलिस जांच में इन खातों से ढाई करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई है।

नयी दिल्ली, तीन सितंबर उत्तर दिल्ली पुलिस ने 72 वर्षीय बुजुर्ग के साथ करीब दो लाख रुपये की साइबर ठगी करने के आरोप में ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (सीएससी) वॉलेट संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि आरोपियों की पहचान आशीष कुमार (24), अमित कुमार (23) और उमेश चंद (37) के रूप में हुई है और उन्हें उत्तर प्रदेश के क्रमश: शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी जिलों से पकड़ा गया है। उत्तर दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निहारिका भट्ट ने कहा कि अबतक की जांच में बरामद खातों के माध्यम से 2.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का पता चला है, जबकि विभिन्न राज्यों से पांच साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें इनसे जुड़ी हुई हैं।

पुलिस के अनुसार, ये गिरफ्तारियां दिल्ली निवासी बुजुर्ग व्यक्ति के साथ हुई ठगी की जांच के दौरान हुई है। पीड़ित ने सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और अपने मौजूदा टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के बिजली कनेक्शन पर नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की थी। पुलिस ने कहा कि 18 जुलाई को, पीड़ित को एक व्यक्ति का फोन आया और उसने खुद को बिजली कनेक्शन में नाम बदलने की प्रक्रिया से जुड़ा बताया और पीड़ित को 13 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने को कहा।

पुलिस के मुताबिक, फोन करने वाले ने व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी और पीड़ित को इसे डाउनलोड करने और भुगतान करने को कहा। पुलिस ने बताया कि इसके बाद जालसाज़ों ने पीड़ित का फोन हैक करके उनके बैंक खाते से 1.99 लाख रुपये उड़ा लिए। बाद में एक ई- प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।

डीसीपी ने कहा कि एक टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईएमईआई विवरण, आईपी लॉग और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण किया और लगभग 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों और संबंधित उपकरणों पर निगरानी रखी। भट्ट ने कहा कि तकनीकी जांच से पुलिस टीम शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी तक पहुंची, जहां से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जांच में यह सामने आया कि ठगी गई रकम को एक ‘पेमेंट गेटवे’ के माध्यम से एक सीएससी व्यापारी के खाते में भेजा गया और इसके बाद उसे बाद में आशीष कुमार जनसेवा केंद्र के नाम पर पंजीकृत सीएससी वॉलेट में स्थानांतरित कर दिया गया।

अधिकारी ने बताया कि आशीष के नाम पर सीएससी लाइसेंस था, लेकिन वह केंद्र का संचालन नहीं कर रहा था और उसने अमित कुमार के साथ अपना ‘वॉलेट आईडी’ और पासवर्ड साझा किया था। डीसीपी ने बताया कि अमित ने सीएससी वॉलेट, पासवर्ड और बैंक खाते हासिल किए तथा उनसे जुड़े मोबाइल नंबरों को फर्जी नंबरों से बदल दिया। इसके अलावा, पोर्टिंग के दौरान ग्राहकों को जारी किए गए सिम कार्ड भी उसने अपने पास रख लिए और उनका दुरुपयोग सीएससी वॉलेट संचालित करने तथा धोखाधड़ी वाले लेन-देन को अंजाम देने में किया।

पुलिस के मुताबिक, उसने उमेश को वॉलेट विवरण दिया और जमा राशि पर पांच प्रतिशत कमीशन पर यह सौदा हुआ। उमेश ने एक अन्य सहयोगी, राम दास के साथ विवरण साझा किया। अधिकारी ने कहा कि आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड, नौ पासबुक, छह चेक बुक, 15 डेबिट/क्रेडिट कार्ड और एक बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन बरामद की गई।

पुलिस ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़