Delhi High Court ने Karni Sena प्रमुख की प्रदर्शन अर्जी पर आदेश देने से किया इनकार

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जंतर-मंतर पर 6 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोई भी आदेश पारित करने से मना कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवश्यक पक्ष होने के कारण दिल्ली पुलिस के वकील को सुने बिना कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

नयी दिल्ली, तीन सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ‘क्षत्रिय करणी सेना’ के अध्यक्ष राज शेखावत की याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में अधिसूचित किए गए ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026’ के विरोध में शेखावत को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस के वकील को सुने बिना इस याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं कर सकता।

दिल्ली पुलिस के वकील सुनवाई के दौरान उपलब्ध नहीं थे। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने सुझाव दिया कि यदि आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए पुलिस उस दिन विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रही है, तो याचिकाकर्ता छह सितंबर की तारीख को बदल दे। अदालत ने यह भी पूछा कि इस तारीख (छह सितंबर) में ऐसा क्या खास है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि पुलिस किसी विशेष तारीख पर सहमत नहीं है, तो तारीख बदल दें। किसी तारीख में ऐसा कुछ भी खास या अनिवार्य नहीं है।’’ जब याचिकाकर्ता के वकील ने तात्कालिकता का हवाला देते हुए अदालत से आदेश पारित करने का आग्रह किया, तो अदालत ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस के वकील की अनुपस्थिति में कोई निर्देश नहीं दे सकती, क्योंकि पुलिस इस याचिका में एक आवश्यक पक्ष है। इस पर, वकील ने कहा कि वे विरोध प्रदर्शन की तारीख बदलने पर विचार कर सकते हैं।

इसके साथ ही अदालत ने इस मामले को सात सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। वर्तमान में, यह ‘‘शांतिपूर्ण’’ विरोध प्रदर्शन छह सितंबर को सुबह 10 बजे से अपराह्न बजे तक जंतर-मंतर पर होना तय है। शेखावत ने दिल्ली पुलिस के 28 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें विरोध प्रदर्शन की अनुमति संबंधी अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने साथ ही, यह भी अनुरोध किया है कि उनकी अर्जी पर फिर से विचार किया जाए और 24 घंटे के भीतर ठोस कारणों के साथ नया आदेश जारी किया जाए। उन्होंने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का मकसद आरक्षण नीतियों और नए यूजीसी प्रारूप से जुड़े मामलों पर अपने विचार और शिकायतें जाहिर करना था। यह विरोध प्रदर्शन 2026 के नियमों को वापस लेने की मांग के लिए किया जाना है।

याचिका के अनुसार, पुलिस के पत्राचार में कहा गया था कि प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की तैयारियां चल रही हैं और सुरक्षा इंतज़ामों, कानून-व्यवस्था एवं यातायात से जुड़ी बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि यह इनकार कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में प्रस्तावित है, जबकि प्रदर्शन छह सितंबर को होना है। इसमें यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता साफ तौर पर यह भरोसा दिलाने को तैयार हैं कि जंतर-मंतर से कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा और कोई भी प्रतिभागी भारत मंडपम या शिखर सम्मेलन से जुड़े किसी भी सुरक्षा मार्ग की ओर नहीं जाएगा।

इससे पहले, शेखावत ने खुद को नजरबंद बताए जाने का दावा करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। हालांकि, पुलिस ने अदालत में स्पष्ट किया था कि शेखावत को नजरबंद नहीं रखा गया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि शेखावत कहीं भी आने-जाने के लिए आज़ाद हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि शेखावत यूजीसी नियमों को लेकर देशव्यापी जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

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