Delhi का Green Budget पेश, CM Rekha Gupta बोलीं- कूड़े के पहाड़ होंगे खत्म,लगेंगे 35 लाख पौधे; खर्च होंगे 22,236 करोड़

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 के बजट को 'हरित बजट' घोषित किया है, जिसमें सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण के लिए कुल 22,236 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस बजट में प्रदूषण नियंत्रण, 35 लाख पौधे लगाने और अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता को दोगुना करने जैसी प्रमुख पहलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को 2026-27 के बजट को हरित बजट बताते हुए सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस पहल के लिए पूरे बजट का 21 प्रतिशत आवंटित किया गया है। बजट के अनुसार, कुल परिव्यय का 21.44 प्रतिशत यानी 22,236 करोड़ रुपये हरित विकास पहल के लिए आवंटित किए गए हैं। पर्यावरण और वन क्षेत्रों के लिए 822 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के 505 करोड़ रुपये से 62.7 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार शहरी वनों, पार्कों और हरित क्षेत्रों के विकास के माध्यम से राजधानी का हरित दिल्ली का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम दिल्ली पार्क एंड गार्डन सोसायटी के लिए अलग से 25 करोड़ रुपये आवंटित कर रहे हैं।” गुप्ता ने कहा कि अगले चार साल में दिल्ली में पीपल, आम और नीम जैसे 35 लाख स्वदेशी पौधे लगाए जाएंगे और नए वन क्षेत्रों का भी विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विकास के लिए 130 करोड़ रुपये और वन्यजीव संरक्षण के लिए 44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन उपायों के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना शुरू कर रही है, जिसमें यांत्रिक स्वीपर, एंटी-स्मॉग गन और वॉटर स्प्रिंकलर शामिल होंगे।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष रूप से 204 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। वित्त विभाग का प्रभार भी संभाल रहीं गुप्ता ने यह भी कहा कि सरकार विश्व बैंक के सहयोग से उन्नत तकनीकी समाधान और निगरानी प्रणालियों को लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। निगरानी प्रणालियों (एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र-आईसीसीसी), युद्धकक्ष संचालन, मोबाइल ऐप और वास्तविक समय में ट्रैकिंग के लिए अतिरिक्त दो करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हरित बजट पेश करते हुए गुप्ता ने कहा कि सरकार अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता को वर्तमान 7,000 टन से बढ़ाकर 15,000 टन प्रतिदिन करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नरेला, ओखला, गाजीपुर और तेहखंड में स्थित अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों के विस्तार के लिए प्रावधान किए गए हैं। गुप्ता ने कहा, हमने पुराने कूड़े के पहाड़ को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, गाजीपुर में 16 प्रतिशत, भलस्वा में 54 प्रतिशत और ओखला में 68 प्रतिशत की कमी आई है। यह शहर में कचरा प्रबंधन के तरीके में एक स्पष्ट और ठोस बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले लगभग 1,500 टन गोबर अपशिष्ट को भी संसाधित करके ऊर्जा में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ हम ई-कचरा प्रबंधन के लिए सुनियोजित योजना भी शुरू कर रहे हैं।
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