RTI नियमों की अनदेखी पर CIC सख्त, MCD को 10 हफ्ते में मांगी एक्शन रिपोर्ट

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केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली नगर निगम को आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में हो रही लगातार देरी और लापरवाही पर कड़ी चेतावनी दी है। सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने निगम आयुक्त को व्यवस्थागत सुधार करने और 10 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। आयोग ने साफ किया कि वैधानिक कर्तव्यों की जानबूझकर अनदेखी पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नयी दिल्ली, तीन सितंबर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने चेतावनी दी है कि वैधानिक कर्तव्यों का शुरुआत से ही जानबूझकर किया गया उल्लंघन सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। आयोग ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा आरटीआई मामलों से निपटने के तरीके में बार-बार आने वाली कमियों पर भी चिंता जताई है। सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने आरटीआई अधिनियम की धारा 25(5) के तहत निगम आयुक्त को जारी एक विस्तृत परामर्श में कहा कि सीआईसी ने एमसीडी और उसके अधीनस्थ कार्यालयों से संबंधित ‘‘हजारों द्वितीय अपीलों और शिकायतों’’ पर फैसला करते समय सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (पीआईओ) और प्रथम अपीलीय अधिकारियों (एफएए) के आचरण के बार-बार दोहराए जाने पर गौर किया।

तिवारी ने कहा कि ये तौर-तरीके आरटीआई अधिनियम की मूल भावना और प्रावधानों के असंगत थे तथा इनमें ‘‘सुधारात्मक कार्रवाइयों की आवश्यकता है’’। उन्होंने कहा कि ‘‘इन कमियों का लगातार दोहराया जाना सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक उचित संस्थागत समीक्षा की मांग करता है’’। उन्होंने कहा कि इन कमियों के बार-बार होने की वजह से सक्षम अधिकारी द्वारा इनकी उचित संस्थागत समीक्षा की जानी चाहिए।

आयुक्त ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि किसी भी सरकारी संस्था में आरटीआई प्रशासन के तहत ‘कानूनी कर्तव्यों को पूरा करने में लगातार विफलता को एक व्यवस्थागत विशेषता’ नहीं बनने दिया जा सकता। पहचान की गई खामियों में कानूनी समय-सीमा के भीतर जवाब न देना, ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों और पहली अपीलों का निपटारा न करना, सीआईसी की ओर से नोटिस मिलने के बाद ही जवाब देना और सुनवाई के दौरान ही पहली बार जवाबों का खुलासा करना शामिल था। सीआईसी ने सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद ही जवाब देने को ‘खास तौर पर गलत’ बताया।

उनका कहना था कि इससे ऐसा लगता है कि कानूनी नियमों का पालन अपनी मूल कानूनी ज़िम्मेदारी के तहत नहीं, बल्कि आयोग के दखल के बाद किया जा रहा है। आयोग ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान आखिरी समय में जानकारी देने से अपील करने वालों को जवाब की पड़ताल करने और उसमें कमियों पर सवाल उठाने का बहुत कम या कोई उचित मौका नहीं मिल पाता। आयोग ने ऐसे मामलों की ओर भी ध्यान दिलाया जिनमें पीआईओ की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी, एफएए के आदेशों में कमियां थीं, और लिखित जवाब ‘अस्पष्ट, अधूरे या रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे’ थे।

हालांकि, सीआईसी ने साफ़ किया कि इस चरण में वह एक संस्था के तौर पर निगम के ख़िलाफ़ जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण आचरण का कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं कर रहा है। आयोग ने ज़्यादा सक्रियता से जानकारी सार्वजनिक करने, आरटीआई के लंबित मामलों की निगरानी करने, ऑनलाइन आरटीआई प्रणाली की समीक्षा करने और अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण देने की सिफ़ारिश की। साथ ही, आयोग ने निगम आयुक्त से 10 सप्ताह के अंदर इस बारे में की गई कार्रवाई या अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी।

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