Milan Pradhan के खिलाफ 12 अक्टूबर तक न हो कार्रवाई, Nandigram उपचुनाव पर High Court सख्त

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अभिनय आकाश । Sep 24 2026 3:21PM

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलान प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव ठीक से लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत ने पुलिस को 2007 के एक मामले में 12 अक्टूबर तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उक्त मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं माना जाएगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिर कहा कि गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलान प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव ठीक से लड़ने की इजाज़त दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें 2007 के उस मामले में गिरफ्तार नहीं माना जाएगा जिसमें निचली अदालत ने उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म होगा। कोर्ट प्रधान के वकील की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को 2007 के एक और आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया है, जबकि 22 सितंबर को हाई कोर्ट के सामने 11 मामलों का ज़िक्र किया गया था। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य ने ऐसा कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रधान को प्रोडक्शन वारंट दिया गया था। जज ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूर्वी मेदिनीपुर ज़िले के खेजुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज 2007 के केस नंबर 45 के सिलसिले में 12 अक्टूबर तक प्रधान के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न करें, और कहा कि उस आपराधिक मामले में उन्हें गिरफ़्तार नहीं माना जाएगा।

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अदालत ने कहा यह हैरानी की बात है कि उक्त आपराधिक मामला 2007 का है और जांच अधिकारी ने 19 सितंबर को याचिकाकर्ता को 'गिरफ़्तार दिखाया' (shown arrest) मानने का अनुरोध किया।" जस्टिस भट्टाचार्य ने अतिरिक्त एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से यह भी कहा कि वे प्रधान को चुनाव लड़ने दें। 22 सितंबर को जस्टिस भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से मौखिक रूप से कहा था कि कांग्रेस उम्मीदवार को नंदीग्राम उपचुनाव ठीक से लड़ने दिया जाए, बशर्ते उन्हें उन पांच आपराधिक मामलों में ज़मानत मिल जाए जिनमें उन्हें गिरफ़्तार किया गया था। गुरुवार को कोर्ट ने गौर किया कि प्रधान को 22 सितंबर के बाद खेजुरी पुलिस स्टेशन वाले मामले में गिरफ़्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सवाल किया कि 22 सितंबर के आदेश के बाद प्रधान को एक और मामले में क्यों आरोपी बनाया गया, जबकि राज्य ने बताया था कि उनके खिलाफ़ पाँच आपराधिक मामले लंबित हैं। 2007 में पूर्वी मेदिनीपुर ज़िले के नंदीग्राम और खेजुरी पुलिस स्टेशनों में प्रधान के खिलाफ़ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।

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प्रधान ने अपने खिलाफ़ दर्ज छह अन्य मामलों में सख़्त कार्रवाई से सुरक्षा की मांग करते हुए एक अर्ज़ी दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए, 22 सितंबर को हाई कोर्ट को राज्य ने बताया था कि उनमें से पाँच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे और छठे मामले में उनकी ज़रूरत नहीं थी। कोर्ट को यह भी बताया गया था कि प्रधान को पाँच अन्य आपराधिक मामलों के सिलसिले में गिरफ़्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

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