Bihar Flood: गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पार, 11 जिलों में 16 लाख लोग बेहाल

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बिहार में लगातार बारिश और गंगा समेत कई नदियों के उफान से 11 जिलों की आबादी गंभीर बाढ़ संकट में घिर गई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 50.53 मीटर पर पहुंच गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की 34 टीमें तैनात की हैं।

(तस्वीरों के साथ) पटना, पांच सितंबर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और राज्य के 11 जिलों में 16 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश के बीच शनिवार सुबह पटना के गांधी घाट और पंडारक में गंगा नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर ‘उच्चतम बाढ़ स्तर’ को पार कर गया। आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।

गंगा और उसकी सहायक नदी पुनपुन का जलस्तर बढ़ने से पटना के ग्रामीण इलाकों में कई जगह पानी भर गया, जिससे रेल और सड़क यातायात बाधित हुआ, जबकि शहर के निचले इलाके जलमग्न हो गए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को भागलपुर एवं नौगछिया के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अधिकारियों को समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं करने, पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने और त्वरित बचाव के उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभावित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो।’’ मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में से एक पटना में 2.32 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए। स्थानीय सांसद रवि शंकर प्रसाद ने उन ग्रामीण इलाकों का दौरा किया जो गंगा और पुनपुन नदियों के पानी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

प्रसाद ने अपने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात करके उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में कोई ढिलाई न बरती जाए और भोजन, दवाइयों व अन्य जरूरी चीजों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पूर्वी मध्य रेलवे ने उन ट्रेन की सूची जारी की जिन्हें रद्द किया गया है या उनके मार्ग में परिवर्तन किया गया है। अथमलगोला प्रखंड में एनएच-31 पानी में डूब गया, जिससे गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।

जल संसाधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे गंगा नदी दो स्थानों पर उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बह रही थी, जिससे राजधानी के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। लोगों से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

बुलेटिन के अनुसार, बिहार में कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक, बलतारा में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन तथा दरौली में घाघरा नदी शामिल हैं। जल संसाधन विभाग ने बताया कि शनिवार सुबह 10 बजे पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर चार घंटे में 10 सेंटीमीटर बढ़कर 50.53 मीटर स्तर पर पहुंच गया।

यह ‘अब तक के सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर’ से एक सेंटीमीटर अधिक है। विभाग के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा का पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर था, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था। विभाग ने कहा, ‘‘पूर्वानुमान है कि रविवार सुबह आठ बजे तक गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर और बढ़कर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है।

लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।’’ विभाग ने बताया कि पटना के पंडारक में पांच सितंबर को सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 43.78 मीटर दर्ज किया गया, जबकि वहां पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 43.73 मीटर था जो 16 अगस्त, 2021 को दर्ज किया गया था। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण 11 जिलों के 16 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया शामिल हैं।

विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को एहतियाती कदम उठाने, नदी के पास रहने वाले लोगों को सतर्क करने और बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष दलों की लगातार गश्त सुनिश्चित करने को कहा है। राज्य और पड़ोसी नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार में सितंबर में अब तक 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 12,300 पॉलीथीन शीट और 2,250 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। लोगों की निकासी और आवागमन के लिए 858 नावें संचालित की जा रही हैं।

इसके अलावा बाढ़ प्रभावित जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के सात दल तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने तथा आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पटना में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

सरकार पूरी तरह से हालात से अवगत है। सभी यह प्रयास कर रहे हैं कि इस आपदा के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नेपाल में आई आपदा और लगातार बारिश के बाद से ये हालात हैं।’’ इस बीच, पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शनिवार को पटना के दानापुर दियारा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की और कथित तौर पर उन्हें आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई।

उन्होंने प्रशासन से राहत कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, दवाइयां, नावें, पीने का पानी, राहत शिविर और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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