Chaitra Navratri पर सोमवार का महासंयोग, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये एक चीज़, Mahakal करेंगे हर इच्छा पूरी

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चैत्र नवरात्रि के दौरान सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस शुभ अवसर पर शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद या बिल्व पत्र जैसी विशेष सामग्री अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर कर अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं।

चैत्र नवरात्रि का पर्व पूरे देशभर भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। 23 मार्च यानी नवरात्र के पांचवे दिन और सोमवार का संयोग बेहद ही शुभ माना जा रहा है। नवरात्र का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। इस बार यह दिन सामान्य नहीं है, क्योंकि इस दिन सोमवार का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो महादेव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नवरात्र के दौरान पड़ने वाले सोमवार को बहुत कल्याणकारी माना गया है। अगर आप किसी समस्या से लंबे समय से परेशान हैं, तो इस खास मौके पर शिवलिंग पर विशेष सामग्री चढ़ाएं।

शक्ति और शिव का मिलन

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति का प्रतीक हैं। दूसरी ओरस सोमवार का दिन भगवान शिव को अति प्रिय है। ऐसे में इस दिन शिव-शक्ति की एक साथ विधिवत रुप से पूजा करें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन छोटा-सा उपाय करने से भी आपको दोगुना फल प्राप्त होता है, क्योंकि शिव के बिना शक्ति अधूरी मानी जाती है।

शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये सामग्री

कच्चा दूध और काले तिल

यदि आपका चंद्रमा कमजोर है या मन अशांत रहता है, तो चांदी के लोटे में कच्चा दूध और थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर जरुर चढ़ाएं। ऐसा करने से मानसिक तनाव कम हो जाता है। इसके साथ ही आपको चंद्र दोष से भी राहत मिलता है।

शहद और गंगाजल

आर्थिक तंगी से परेशान जातक, इस सोमवार को शिवलिंग पर शहद चढ़ाएं और फिर गंगाजल से अभिषेक करें। इस उपाय के करने से धन के नए मार्ग बन जाते हैं। इसके साथ ही आपके घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।

बिल्व पत्र और अक्षत

आपको 5 या 11  अखंडित बिल्व पत्र पर चंदन से 'राम' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और साथ में बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें। ऐसा करने से महादेव आपकी हर इच्छा को जरुर पूरा करेंगे। ऐसा करने से आपको शिव-पार्वती की कृपा मिलती है।

पूजा मंत्र (Puja Mantra)

- ॐ मृत्युंजयमहादेवं त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै:॥

- ॐ नमः शिवाय शान्ताय तेजसे सर्वाधिष्टानाय सर्वसमर्थाय सर्वविलाय महेश्वराये नमः शिवाय ॐ॥

वंदे सूर्य शशांक वह्नि नयनं वंदे मुकुंद प्रियं, वंदे भक्त जनाश्रयं च वरदं वंदे शिवं शंकरम्॥

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