US Mid Term Elections: क्या सीनेट गंवाने जा रहे हैं ट्रंप? रिपब्लिकन्स का वो 6 मजबूत किला, जहां दिख रहा 'ब्लू वेव' का खौफ

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को भारी विरोध झेलना पड़ रहा है। चुनावी सर्वेक्षणों में ट्रंप काफी पीछे हैं और जनता में असंतोष बढ़ रहा है। इस बदलाव से टेक्सास और कैनसस जैसे मजबूत रिपब्लिकन गढ़ों में भी सीनेट सीटें हाथ से फिसलने का खतरा है।
अमेरिका की राजनीति में क्या यह मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी बाजी? अमेरिकी लोगों की जुबान में कहें तो क्या यह आखिरी इलेक्शन गेम? मिड टर्म इलेक्शन से दो हफ्ते पहले यह सवाल अमेरिकी मीडिया में इसीलिए चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि ट्रंप चुनाव पूर्व हुए ज्यादातर सर्वेक्षण में पीछे हैं। 10 में से नौ चुनावी सर्वे में पीछे 70% अमेरिकी ट्रंप के खिलाफ। अमेरिका में बहुप्रतीक्षित मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इस बार चुनावी बयार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के पूरी तरह खिलाफ बहती नजर आ रही है। ईरान के साथ छिड़े युद्ध और आसमान छूती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने अमेरिकी जनता के गुस्से को भड़का दिया है, जिसका सीधा असर ट्रंप की गिरती लोकप्रियता पर दिख रहा है। 3 नवंबर के मतदान से ठीक पहले अमेरिकी राजनीति में एक अप्रत्याशित ब्लू वेव उठ खड़ी हुई है। महज कुछ महीने पहले तक जनता से कटे नजर आ रहे डेमोक्रेट्स ने अब पासा पूरी तरह पलट दिया है और कई सीनेट सीटों को कड़े रणक्षेत्र में बदल दिया है। इस बदलाव ने अमेरिकी सीनेट के हाथ से फिसलने की वास्तविक संभावना पैदा कर दी है, जहां फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का 53-47 के बेहद मामूली अंतर से कब्जा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सीनेट में यह संभावित तख्तापलट उन 6 राज्यों के दम पर तय होता दिख रहा है, आयोवा, अलास्का, टेक्सास, मिसिसिपी, कंसास और नेब्रास्का जिन्हें रिपब्लिकन्स का अभेद्य किला माना जाता था। जैसा कि न्यूज आउटलेट एक्सिओस ने रेखांकित किया है। आम चुनावी वर्षों में रिपब्लिकन्स को इन राज्यों की तरफ मुड़कर देखने की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब समीकरण इस कदर बदल चुके हैं कि ये तथाकथित 'सुरक्षित सीटें' ही ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई हैं। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर इन 6 राज्यों में क्या चल रहा है और कैसे ये सीटें सत्ता का खेल पलटने वाली है।
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ईरान पर हमले ने बिगाड़ दिया गेम
मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप को लेकर यह चुनावी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। क्योंकि पिछले 8 महीने से ट्रंप अमेरिकी जनता को यह कहते हुए ईरान पर हमले कर रहे थे कि इसमें अमेरिका का सबसे बड़ा फायदा होने वाला है। पिछले 8 महीने में अलग-अलग मौकों पर डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान से जंग के बेहिसब फायदे गिना। मिडिल ईस्ट में ईरान अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है। ईरान के पास न्यूक्लियर बम अमेरिका के लिए खतरा है। ईरान से कट्टरपंथी सरकार का खात्मा अमेरिकी हित में। ईरान की हार के बाद दुनिया में अमेरिका की धौंस बढ़ेगी और ईरान कमजोर होगा तो अमेरिका में तेल गैस सस्ता हो जाएगा। तेल, गैस और इससे बड़ी महंगाई को ट्रंप ईरान वॉर की छोटी कीमत बता रहे हैं। लेकिन अमेरिकी जनता का हाल इस छोटी कीमत से कितना बेहाल हुआ है, इसे कुछ आंकड़ों से समझिए। पेट्रोल की कीमत 4.35 प्रति कैलन पहुंच गई है। डीजल $6.30 प्रति कैलन, गैस $5 प्रति गैलन और इसका असर यह कि एक से $2 प्रति कैलन ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ईंधन खर्च बढ़ने से महंगाई अमेरिका में चरम पर। वैसे ईरान जंग के बदले इस तेल गैस की महंगाई जिसे ट्रंप एक बहुत छोटी सी कीमत कह रहे थे। उसका हिसाब अमेरिकी जनता महीनों से पूछ रही है। चुनाव प्रचार से पहले ही अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ट्रंप से लोग पूछ रहे हैं कि ईरान पर हमले से आखिर हासिल क्या होगा?
टेक्सास
1961 तक, 'लोन स्टार स्टेट' (टेक्सास) पूरी तरह से डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ था। 1961 में जब जॉन टॉवर ने अमेरिकी सीनेट के लिए एक विशेष चुनाव जीता, तब इस राज्य का झुकाव रिपब्लिकन पार्टी की ओर होने लगा। गौरतलब है कि 1988 में लॉयड बेंटसेन, टेक्सास से अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले आखिरी डेमोक्रेट थे। तब से टेक्सास को एक सुरक्षित रिपब्लिकन राज्य माना जाता रहा है, जिससे यहाँ से जीतने की डेमोक्रेट्स की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालाँकि, यह मध्यावधि चुनाव वह मौका हो सकता है जिसका डेमोक्रेट्स को लंबे समय से इंतज़ार था। नए पोलिंग के अनुसार, टेक्सास में सीनेट की दौड़ के लिए डेमोक्रेट जेम्स टालारिको और रिपब्लिकन केन पैक्सटन के बीच कड़ी टक्कर है। पैक्सटन, जिन्होंने प्राइमरी चुनाव में मौजूदा सीनेटर जॉन कॉर्निन (जो ट्रम्प के सहयोगी हैं) को हराया था, राज्य के अटॉर्नी जनरल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई घोटालों में घिरे रहे हैं। 2023 में टेक्सास हाउस ने उन पर महाभियोग चलाया था और वे लगभग अपने पद से हटा दिए गए होते, लेकिन राज्य सीनेट में बहुत कम अंतर से उनके पक्ष में वोट पड़ा, जिससे वे बच गए। चुनाव प्रचार के बीच पैक्सटन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुबई में नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पार्टी में उन्हें अपनी विवाहेतर प्रेमिका और दो ऐसे पुरुषों के साथ देखा गया, जिन पर संघीय स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी (फेडरल हेल्थकेयर फ्रॉड) का आरोप था और जिन्हें कानून से भागने वाला (भगोड़ा) माना जाता था।
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अलास्का
पिछले तीन दशकों में डेमोक्रेट्स ने अलास्का में सीनेट का केवल एक चुनाव जीता है। हालाँकि, यह साल उनके लिए अहम हो सकता है। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि मैरी पेल्टोला, जो पहले ही दो बार पूरे राज्य में जीत हासिल कर चुकी हैं, सीनेटर डैन सुलिवन को कड़ी टक्कर दे रही हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला है कि अलास्का के लोगों के लिए खर्च कम करने का काम कौन बेहतर तरीके से करेगा, और साथ ही अमेरिकी कैपिटल में वहां के अहम मछली पकड़ने वाले उद्योग तथा तेल और गैस उद्योग का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। पिछले हफ्ते हुई बहस के दौरान यह मुकाबला व्यक्तिगत हो गया; सुलिवन ने पेल्टोला के चरित्र पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने स्टाफ के साथ बुरा बर्ताव किया था। इसके जवाब में डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेटर पर झूठ बोलने और बेईमानी करने का आरोप लगाया। रिपब्लिकन उम्मीदवार के लिए स्थिति तब और जटिल हो गई जब पता चला कि बैलेट पेपर पर एक और 'डैन सुलिवन' का नाम भी है, जिससे उनके समर्थकों के वोट बंट सकते हैं।
कैनसस
कैनसस एक 'रूबी रेड' (पूरी तरह से रिपब्लिकन समर्थक) राज्य है। पिछले 94 सालों से यहाँ रिपब्लिकन पार्टी को ही वोट मिलते रहे हैं। हालाँकि, अब ऐसी प्रबल संभावना दिख रही है कि डेमोक्रेट्स इस राज्य में बाजी पलट सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना पोल' और एमर्सन कॉलेज पोलिंग दोनों के अनुसार, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन (जो एक मेगाचर्च के पादरी हैं) और रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल के बीच कांटे की टक्कर है। पेशे से डॉक्टर, मार्शल को अर्थव्यवस्था और ईरान युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के कारण भी उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे उन्होंने मेडिकल बिल बकाया होने पर सैकड़ों मरीजों के खिलाफ मुकदमा कर दिया था। आर्थिक हालात मार्शल के लिए एक और बाधा हैं। खेती पर निर्भर इस राज्य में डीजल की बढ़ती कीमतों से कई मतदाता नाराज हैं। कंसास के पशुपालक इस बात से भी नाराज हैं कि ट्रम्प ने किराने की दुकानों में आयातित बीफ (गोमांस) बिकने की अनुमति दे दी है। किसान ट्रम्प के उन आव्रजन छापों (इमिग्रेशन रेड्स) से भी परेशान हैं, जिनकी वजह से उनके यहाँ काम करने वाले मजदूर चले गए हैं। कंसास फार्म ब्यूरो के अध्यक्ष ग्लेन ब्रुन्को ने 'पोलिटिको' को बताया, लोगों में काफी निराशा और गुस्सा है। इन सब वजहों से, रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में पासा पलटने के हालात बन गए हैं। क्या ऐसा होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन रिपब्लिकनों का मानना है कि चुनाव सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक समर्थकों के उत्साह को जरूरत से ज्यादा आंका जा रहा है।
मिसिसिपी
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, दक्षिणी राज्य मिसिसिपी अब एक चुनावी अखाड़ा बन गया है। कई जानकारों का मानना है कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलोम (जो मिसिसिपी के 16वें सर्किट के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं) के पास मौजूदा GOP सीनेटर सिंडी हाइड-स्मिथ को हराने का अच्छा मौका है। आलोचकों का कहना है कि हाइड-स्मिथ के साथ कुछ विवाद जुड़े हुए हैं। नवंबर 2018 में, उन्होंने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था जब उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी सार्वजनिक फांसी देखने के लिए बुलाया जाए, तो वह सबसे आगे की सीट पर बैठना चाहेंगी। वह ट्रम्प की कट्टर समर्थक रही हैं, जो चुनावों में उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि टैरिफ (आयात शुल्क) की वजह से राज्य के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा, वह ट्रम्प के उस "एक बड़े, बेहतरीन बिल" पर पूरी तरह चुप रही हैं, जिसके लागू होने से उनके क्षेत्र के कई लोगों को 'मेडिकेड' (स्वास्थ्य सुविधा) और 'SNAP' (खाद्य सहायता) जैसी सरकारी सुविधाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोलोम इस स्थिति का फायदा उठाकर चुनावों में हाइड-स्मिथ को हरा पाते हैं या नहीं।
नेब्रास्का
नेब्रास्का एक ऐसा राज्य है, जिसका पूरे राज्य स्तर पर रिपब्लिकन उम्मीदवारों को चुनने का लंबा इतिहास रहा है। हालाँकि, निर्दलीय उम्मीदवार डैन ओसबोर्न इस साल इस चलन को बदलने की उम्मीद कर रहे हैं। वे मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर पीट रिकेट्स को चुनौती दे रहे हैं। यह मुकाबला इतना कड़ा होने के आसार हैं, जैसा कि दशकों से इस पक्के रिपब्लिकन राज्य में देखने को नहीं मिला है। गौरतलब है कि पेशे से एक इंडस्ट्रियल मैकेनिक, ऑसबोर्न ने 2024 में एक अन्य रिपब्लिकन मौजूदा सीनेटर, डेब फिशर के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसमें वे हार गए थे। पोल बताते हैं कि ऑसबोर्न, रिकेट्स को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में हैं। क्या वे जीत हासिल कर पाएंगे? यह हमें 3 नवंबर को पता चलेगा।
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