Middle East Crisis | रणनीतिक जलमार्ग में हाहाकार! होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ फूँका, ईरान के परमाणु प्लांट पर अमेरिकी मिसाइल स्ट्राइक

Middle East Crisis
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रेनू तिवारी । Jul 20 2026 11:18AM

यह घटना ओमान के तट के पास हुई; ब्रिटिश समुद्री अधिकारियों ने आग लगने की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव और खतरनाक दौर में पहुँच गया है।

मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध अब दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले समुद्री रास्तों और संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों तक फैल गया है। सोमवार तड़के दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज़ में भीषण आग लग गई। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही चरम पर चल रहे सैन्य तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है। ब्रिटिश सेना की विंग 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स' (UKMTO) ने इस आग की पुष्टि करते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।

यह घटना ओमान के तट के पास हुई; ब्रिटिश समुद्री अधिकारियों ने आग लगने की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव और खतरनाक दौर में पहुँच गया है। दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियाँ तेज़ कर रहे हैं, जिनका असर अब मध्य पूर्व में क्षेत्रीय शिपिंग, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों के बुनियादी ढाँचे पर पड़ रहा है।

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ब्रिटिश सेना द्वारा संचालित 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स' (UKMTO) ने ओमान के पास पानी में जहाज़ में आग लगने के बाद अलर्ट जारी किया। अधिकारियों ने अभी तक यह पता नहीं लगाया है कि आग किस वजह से लगी या क्या यह घटना चल रहे टकराव से जुड़ी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री 'चोकपॉइंट' (संकरे समुद्री रास्ते) में से एक है।

हाल के हफ़्तों में, अमेरिकी सेना ने कमर्शियल जहाज़ों को सलाह दी है कि वे इस जलडमरूमध्य से गुज़रते समय ओमान के तट के करीब के रास्तों का इस्तेमाल करें। हालाँकि, ईरान उन रास्तों का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों को निशाना बनाता रहा है। उसका कहना है कि इस जलमार्ग से होने वाले आवागमन पर उसका नियंत्रण होना चाहिए; शांति के समय में दुनिया के कुल व्यापारिक तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता है।

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टकराव के एक और खतरनाक दौर में पहुँचने पर अमेरिका ने नए हमले किए

अमेरिका ने सोमवार तड़के ईरान पर एक और दौर के हवाई हमले किए। यह लगातार नौवीं रात है जब सैन्य अभियान जारी है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन ताज़ा हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाज़ों और आम नाविकों को धमकाने के लिए किया जा रहा है।

सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा, "इन हमलों से ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना जारी रहेगा जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाज़ों और आम नाविकों पर हमले के लिए किया जाता है।"

यह ताज़ा तनाव तब बढ़ा है जब वाशिंगटन ने एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की घोषणा की और साथ ही ईरान ने जॉर्डन की ओर नए मिसाइल हमले किए। इससे यह डर पैदा हो गया है कि यह टकराव पूरे क्षेत्र में और फैल सकता है।

अमेरिकी सैनिक की मौत

अमेरिकी सेना ने बताया कि शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को गिराने के बाद उसे "नियंत्रित तरीके से नष्ट" (controlled detonation) करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इससे पहले, वाशिंगटन ने जॉर्डन में हुए हमले के लिए ईरान समर्थित ताकतों को ज़िम्मेदार ठहराया था, जिसमें अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। उस हमले के बाद सेना का एक जवान लापता हो गया था। रविवार को सेना ने बताया कि "पहचान न हो पाने वाले अवशेष" मिले हैं और उनकी जांच की जा रही है। इस नई मौत के साथ, संघर्ष शुरू होने के बाद से मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या 17 हो गई है।

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अमेरिका ने सैन्य ठिकानों के अलावा भी अपने हमले का दायरा बढ़ाया

हमलों का यह नया दौर दूसरे हफ़्ते में प्रवेश कर चुका है, जिसमें अमेरिका ईरान के अंदर बुनियादी ढांचों पर भी हमले कर रहा है। हाल के ऑपरेशनों में सैन्य ठिकानों के अलावा पुलों और बिजली सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है। रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा जारी फुटेज में लड़ाकू विमानों को हमले करते हुए और नौसैनिक प्लेटफॉर्म से छोड़ी गई टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों को इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया। कुछ लक्ष्य पहाड़ी इलाकों में स्थित लग रहे थे, जहाँ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के मिसाइल बेस और अन्य रणनीतिक सैन्य बुनियादी ढांचे होने की जानकारी है।

बन रहे परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया गया

सरकारी टेलीविज़न के अनुसार, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि अमेरिकी हमलों में से एक हमला देश के दक्षिण-पश्चिम में डारखोविन में बन रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्र की निर्माण साइट पर हुआ। साइट की हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि ज़मीन साफ़ करने का काम तो हुआ था, लेकिन 9 जुलाई तक मुख्य निर्माण कार्य सीमित ही था। ईरान ने पहले यह जानकारी नहीं दी थी कि उस जगह पर हमला हुआ है।

बाद में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने साफ़ किया कि वह संयंत्र अभी निर्माण के शुरुआती चरण में था और हालिया निरीक्षण के दौरान वहाँ कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। 

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ईरान के मिसाइल हमलों से पूरे मिडिल ईस्ट में अलर्ट जारी

जैसे ही अमेरिका ने अपना हवाई अभियान तेज़ किया, ईरान ने मिडिल ईस्ट में कई अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोनों की एक और खेप दागी। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत ने आने वाले खतरों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट किए, जबकि इज़राइल ने चेतावनी दी कि जॉर्डन की ओर बढ़ रही मिसाइलें इज़राइली इलाके के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं।

जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने बिना किसी जान-माल के नुकसान के कई ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। बाद में जॉर्डन सरकार ने हमलों का औपचारिक विरोध करने के लिए ईरान के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब किया।

इज़राइल ने भी निवासियों को मलबे के अपने इलाके में आने की संभावना के बारे में चेतावनी दी, क्योंकि ईरानी मिसाइलें जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा की ओर दागी गई थीं। इलात के अधिकारियों ने कहा कि गिरते मलबे को आबादी वाले इलाकों तक पहुँचने से रोकने के लिए दो इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी गईं।

कुवैत में डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले की खबर

कुवैत ने कहा कि उसके बिजली उत्पादन और पानी को खारापन-मुक्त करने वाले (डिसेलिनेशन) प्लांट में से एक पर दो दिनों में दूसरी बार हमला हुआ, जिससे प्लांट में आग लग गई। देश के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि इस घटना के बावजूद राष्ट्रीय पावर ग्रिड स्थिर रहा। इस हमले ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं क्योंकि कुवैत का लगभग 90 प्रतिशत पीने का पानी डिसेलिनेशन प्लांट के ज़रिए ही सप्लाई किया जाता है।

क्षेत्रीय नेताओं ने ईरान पर आम नागरिकों के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने आम नागरिकों के लिए बनी सुविधाओं पर ईरान के हमलों की कड़ी आलोचना की है। GCC के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी ने तेहरान पर पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाकर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, आम नागरिकों के बुनियादी ढाँचे जैसे पुल, बिजली स्टेशन और पानी की सुविधाओं को आम तौर पर सैन्य हमलों से सुरक्षित रखा जाता है। हालाँकि, अगर ऐसी जगहों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो, तो वे यह सुरक्षा खो सकती हैं। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हमले संतुलित होने चाहिए और आम नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुँचना चाहिए।

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