परमाणु हमला...NATO देश का मोदी पर होश उड़ाने वाला खुलासा, हिली दुनिया!

पोलैंड के डिप्टी विदेश मंत्री ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही वह आदमी थे जिन्होंने पुतिन को परमाणु हमला करने से रोका।
साल 2022 का आखिरी महीना पूरी दुनिया कांप रही थी। खबरें आ रही थी कि व्लादमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए न्यूक्लियर बटन दबाने वाले हैं। अमेरिका से लेकर यूरोप तक सब बेबस थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस वक्त पर्दे के पीछे एक ऐसी फोन कॉल हुई जिसने इतिहास बदल दिया। एक ऐसा नेता जिसकी बात पुतिन टाल नहीं सके और अभी-अभी एक नाटो देश के मंत्री ने वो सच दुनिया के सामने कबूला जिसे अब तक राज रखा गया था। पोलैंड के डिप्टी विदेश मंत्री ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही वह आदमी थे जिन्होंने पुतिन को परमाणु हमला करने से रोका। दरअसल नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। मौका था भारत पोलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक का। मंच पर थे पोलैंड के डिप्टी विदेश मंत्री और उन्होंने जो कहा उसने पूरी दुनिया की हेडलाइन बदल दी। उन्होंने दावा किया कि साल 2022 के अंत में जब यूक्रेन युद्ध सबसे खतरनाक मोड़ पर था तब पुतिन टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपंस के इस्तेमाल पर विचार कर रहे थे। लेकिन पीएम मोदी ने हस्तक्षेप किया पुलिस मंत्री के शब्दों में कि पुतिन दुनिया के जिन गिने-चुने नेताओं की बात गंभीरता से सुनते हैं, उनमें पीएम मोदी शामिल थे।
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पीएम मोदी एक सम्मानित वैश्विक नेता हैं और उन्होंने पुतिन पर दबाव डालकर परमाणु तबाही को रोका। तब दुनिया को लगा था कि यह सिर्फ एक बयान है। लेकिन पोलैंड के इस खुलासे से पता चला कि पीएम मोदी सिर्फ मंचों पर बोल नहीं रहे थे। बल्कि बैक चैनल डिप्लोमेसी के जरिए रूस को चिता रहे थे। उस समय रूस युद्ध के मैदान में दबाव महसूस कर रहा था और पश्चिमी खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर थी कि पुतिन परमाणु हमला कर सकते हैं। उस नाजुक घड़ी में भारत ने अपनी सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल किया। लेकिन सवाल उठता है कि अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी की बात अनसुनी करने वाले पुतिन पीएम मोदी की बात क्यों सुनते हैं? इसके पीछे के तीन बड़े कारण हैं। पुराना और अटूट रिश्ता। भारत और रूस पूर्व सोवियत संघ का रिश्ता दशकों पुराना है। भारत ने कभी भी रूस की मुश्किल घड़ी में उसका साथ नहीं छोड़ा। दूसरा है स्वतंत्र विदेश नीति। भारत अकेला एक बड़ा देश है जिसने पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाए और ना ही रूस की खुलेआम निंदा की।
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भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा जो रूस की अर्थव्यवस्था के लिए लाइफ लाइन बना। तीसरा है विश्वास की शक्ति। पुतिन जानते हैं कि भारत पक्षपाती नहीं है। पीएम मोदी पुतिन से भी मिलते हैं और जेलस्की से भी। हाल ही में पीएम मोदी ने कीव यात्रा में साबित किया कि भारत एक सच्चा पीस ब्रोकर है। अब यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया जब यूक्रेन युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश करने वाला है। पोलैंड जैसे नाटो देश का भारत की तारीफ करना बहुत बड़ी बात है। पोलैंड ने ना केवल पीएम मोदी की तारीफ की बल्कि यूएससी में भारत की परमानेंट सीट का भी समर्थन किया। यह दिखाता है कि दुनिया अब मान चुकी है कि ग्लोबल क्राइसिस का समाधान वाशिंगटन या ब्रूसल्स में नहीं बल्कि दिल्ली में होगा। भारत की न्यूट्रल छवि ही उसकी सबसे बड़ी ताकत अब बन चुकी है। खैर आज भारत दुनिया का वो इकलौता देश है जो रूस और यूक्रेन दोनों को एक मेज पर ला सकता है।
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