Pakistan में प्रति 1,000 लोगों पर सिर्फ 22 कार, फिर भी Public Transport हाशिए पर

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ANI
अभिनय आकाश । Oct 24 2026 6:34PM

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, 'बसकारो' (BusCaro) और 'पाकिस्तान एंड काउंटिंग मोबिलिटी इंडेक्स' से पता चलता है कि इस इंडेक्स में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 0.5% से भी कम है। वहीं, निजी मोटरसाइकिल, कार और रिक्शों की हिस्सेदारी 98.7% है, जो देश के परिवहन क्षेत्र में निजी वाहनों के दबदबे को दिखाती है।

पाकिस्तान को अपनी परिवहन नीति में बड़ा बदलाव करने की जरूरत है। इसमें निजी वाहनों के बजाय किफायती सार्वजनिक बस सेवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि सीमित पहुंच, यात्रा की बढ़ती लागत और खराब बुनियादी ढांचे के कारण शहरी आवागमन में लगातार बाधाएं आ रही हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, 'बसकारो' (BusCaro) और 'पाकिस्तान एंड काउंटिंग मोबिलिटी इंडेक्स' से पता चलता है कि इस इंडेक्स में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 0.5% से भी कम है। वहीं, निजी मोटरसाइकिल, कार और रिक्शों की हिस्सेदारी 98.7% है, जो देश के परिवहन क्षेत्र में निजी वाहनों के दबदबे को दिखाती है। इंडेक्स में पाया गया कि मई से सितंबर के बीच आठ तरह के परिवहन साधनों में एक किलोमीटर की यात्रा का औसत खर्च 7.9% घटकर 10.48 रुपये से 9.65 रुपये हो गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ये आंकड़े पाकिस्तान की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की बुनियादी कमियों को छिपा नहीं सकते, खासकर तब जब वहां प्रति 1,000 लोगों में से केवल 22 लोग ही कार खरीदने की हैसियत रखते हैं।

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ऑटो विशेषज्ञ मशूद अली खान ने कहा कि पाकिस्तान को यूरोप, चीन और भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से सीखना चाहिए, जहाँ पब्लिक मोबिलिटी सिस्टम रिहायशी और कमर्शियल इलाकों को ज्यादा बेहतर तरीके से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को निजी वाहनों का इस्तेमाल छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए सुविधाजनक रूट, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर सेवाएं बहुत जरूरी हैं। खान ने संघीय सरकार और प्रांतों से आग्रह किया कि वे बस सेवाओं का विस्तार करने और इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ने के लिए एक ठोस, दीर्घकालिक रणनीति बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आयातित वाहनों और पुर्जों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के बजाय, देश के भीतर ही इलेक्ट्रिक बसें बनाने की सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां एक बड़ी रुकावट बनी हुई हैं। खान ने विशेष रूप से देश के आर्थिक केंद्र कराची की आलोचना की, जहाँ खराब सड़कें और अपर्याप्त ट्रांसपोर्ट सुविधाओं के कारण लोगों का रोज आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, उन्होंने संघीय और प्रांतीय अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी का भी जिक्र किया, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है और लागत बढ़ सकती है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, खान का अनुमान है कि पाकिस्तान में अभी लगभग 2,000 बसें हैं, जबकि सालाना मांग 18,000 से 20,000 वाहनों तक पहुंच सकती है। यह देश में ही बसों के निर्माण और रोजगार पैदा करने का एक बड़ा मौका है।
 

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