खामनेई के जनाजे से पहले मोदी ने ईरान फोन घुमाया, क्या बात कर ली?

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इलाके में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनी रहे। इसके लिए लगातार कोशिशें जारी हैं। साथ ही समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे यह भी बेहद अहम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया के ताजा हालात पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत के दौरान ईरान के राष्ट्रपति प्रदेशयान ने हाल के घटनाक्रम और आगे की रणनीति की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को दी। इसके जवाब में पीएम मोदी ने क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया और कहा कि सभी विवादों का हल सिर्फ बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकल सकता है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इलाके में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनी रहे। इसके लिए लगातार कोशिशें जारी हैं। साथ ही समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे यह भी बेहद अहम है। इस बातचीत में पीएम मोदी ने समुद्री रास्तों पर जोर दिया। बातचीत का बड़ा मुद्दा एक तरह से होर्मुज रहा।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए और देखा जाए तो इसकी वजह भी बेहद अहम है। दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी होमस से होकर गुजरता है। भारत भी अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी रास्ते के जरिए मंगाता है। हालिया संघर्ष के दौरान यही चिंता सबसे बड़ी थी क्योंकि ईरान की ओर से कई बार हुरमुस बंद करने की चेतावनी दी गई थी। इसी वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समुद्री रस्ते पर टिकी हुई थी। इस दौरान भारत आने जाने वाले जहाजों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई। कई भारतीय जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा के साथ सफर करना पड़ा। और सबसे बड़ी बात भारत ने इस पूरे संकट के दौरान सिर्फ बयान नहीं दिए बल्कि लगातार ईरान के साथ संपर्क बनाए रखा। प्रधानमंत्री मोदी संघर्ष के बाद दूसरी बार ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से बात कर चुके हैं।
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वहीं विदेश मंत्री जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची के बीच कई बार बातचीत हुई। इसके अलावा ब्रिक्स में विदेश मंत्रियों, ऊर्जा मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठकों में भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद जारी रहा। हालांकि ईरान की ओर से भी जारी बयान के मुताबिक राष्ट्रपति विदेशयान ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को लेकर भारत के रुख और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुनिया को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जहां ताकत के बजाय बातचीत और कूटनीति से समस्याओं का समाधान निकले।
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