भारत आ रहे जहाज पर ड्रोन से हमला, इंजन रूम में आग, फिर ट्रंप ने...

हमले के बाद जहाज के इंजन वाले हिस्से में आग लग गई जिसे चालक दल ने समय रहते नियंत्रित कर लिया। जहाज पर सवार सभी लोग सुरक्षित बताए गए हैं और किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान की भी सूचना नहीं है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव बेहद चरम पर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग पर भी एक बार फिर से साफ दिखाई देने लगा है। इसी बीच कतर से भारत के लिए रवाना हुए एलएनजी से लदे एक विशाल जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। इस घटना ने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल गैस के कारोबार को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी है। एलएनजीसी अल रकायट नाम का एलएनजी जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से गुजरात की ओर रवाना हो रहा था। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पहुंचा तभी उस पर संदिग्ध ड्रोन हमला किया गया।
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शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमले के बाद जहाज के इंजन वाले हिस्से में आग लग गई जिसे चालक दल ने समय रहते नियंत्रित कर लिया। जहाज पर सवार सभी लोग सुरक्षित बताए गए हैं और किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान की भी सूचना नहीं है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव बेहद चरम पर है। हाल के दिनों में इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण यह इलाका एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया। अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है जबकि ईरान भी लगातार चेतावनी देता रहा है कि अगर नुकसान पहुंचाया गया तो क्षेत्र में समुद्री आवाजाही प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस ताजा हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन या देश ने नहीं ली है।
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कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कतर की ओर से ईरान पर संदेह जताई जाने की बात कही गई है जबकि ईरान ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है। फिलहाल हमले के पीछे की वास्तविक वजह और हमलावरों की पहचान को लेकर जांच जारी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। जानकार मानते हैं कि ऐसे हमलों का उद्देश्य किसी एक जहाज को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग पर दबाव बनाना भी हो सकता है। होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक पांचवा हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलएनजी की आपूर्ति होती है। कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देशों का अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। अगर होरमुज में तनाव लगातार बढ़ता है या जहाजों पर हमलों की घटनाएं जारी रहती हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और आयात लागत बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है। जहाज पर हुए हमले की जांच जारी है और विभिन्न देशों की नौसेनाएं क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किस दिशा में जाता है और क्या दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग पर हालात सामान्य हो पाते हैं या नहीं। ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से तनाव तेज हो गया है और युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। स्टेट ऑफ होरमुज में तीन तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीने में हुआ सीजफायर टूटने की कगार पर पहुंच गया है। इस हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर बड़ा हमला बोल दिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की दी गई ढील को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल देखा गया है। आपको बता दें कि यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई को सुपुर्दे खाक करने से पहले उनका जनाजा देश की जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा जा रहा है।
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