China This Week | 1.29 करोड़ छात्रों का भविष्य तय करने वाला महा-इम्तिहान और फीफा में चीन की 'अदृश्य' एंट्री!

अपनी किताब 'द हाइएस्ट एग्जाम: हाउ द गाओकाओ शेप्स चाइना (2025)' में लेखकों होंगबिन ली, रुइक्स्यू जिया और क्लेयर कूसिन्यू ने लिखा है, 'गाओकाओ चीन में समाज और उससे भी ज़्यादा अहम, सरकार के सामने अपनी काबिलियत साबित करने के कुछ चुनिंदा मौकों में से एक है। सच तो यह है कि चीन में शायद ही कोई ऐसा हो जो देश की शिक्षा व्यवस्था से अछूता रहा हो।
पिछले हफ्ते चीन में दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें रिकॉर्ड 1.29 करोड़ (12.9 मिलियन) छात्र शामिल हुए। इस सालाना कॉलेज प्रवेश परीक्षा को 'गाओकाओ' (Gaokao) कहा जाता है। दो से चार दिनों तक चलने वाले इस महा-इम्तिहान को बिना किसी बाधा के पूरा कराने के लिए सरकार ने जमीन-आसमान एक कर दिया। सरकारी मीडिया 'सिन्हुआ' के अनुसार, छात्रों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए बसों के रूट बदले गए, परीक्षा केंद्रों के आसपास निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई और शांति बनाए रखने के लिए कई सख्त इंतजाम किए गए। भारत में चीनी दूतावास की आधिकारिक प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया X पर इसे भारत के JEE और NEET को एक साथ मिला देने जैसी परीक्षा बताया। उनके इस पोस्ट के आते ही इंटरनेट पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। लोगों ने इस पोस्ट की टाइमिंग को भारत में हाल ही में हुए NEET और CBSE परीक्षाओं के विवादों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। इसी हफ्ते फीफा विश्व कप (FIFA World Cup) का भी रोमांचक आगाज हुआ। भले ही चीन की फुटबॉल टीम इस वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बन पाई, लेकिन मैदान से लेकर बाजार तक चीनी कंपनियों और उनके प्रोडक्ट्स का ही जलवा रहा। खासकर, मशहूर 'लाबुबु' (Labubu) डॉल्स के रूप में सजे वर्ल्ड कप के शुभंकर (mascots) हर तरफ छाए रहे। इसके साथ ही, इस हफ्ते चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उत्तर कोरिया की पहली विदेश यात्रा भी सुर्खियों में रही, जो रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से बेहद खास है। हमने इसके मायने और वैश्विक राजनीति पर इसके असर का गहराई से विश्लेषण किया है। दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने चीन को एक बड़ा झटका देते हुए उसकी दिग्गज कंपनियों जैसे कि कार निर्माता BYD और ई-कॉमर्स की महारथी अलीबाबा को आधिकारिक तौर पर "चीनी सैन्य कंपनियों" की ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। अमेरिका के इस कड़े कदम पर चीनी सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। आइए, अब इन तमाम बड़ी खबरों को सिलसिलेवार ढंग से विस्तार के साथ समझते हैं।
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चीन में कैसे कंडक्ट होती है गाओकाओ परीक्षा
इस परीक्षा को चीनी छात्र के स्कूली जीवन के सबसे अहम हिस्सों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी से तय होता है कि वे देश के बेहतरीन कॉलेजों में दाखिला ले पाएंगे या नहीं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, "निष्पक्षता बनाए रखने के लिए गाओकाओ परीक्षा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। कहा जाता है कि परीक्षा के सवाल तैयार करने वाले शिक्षकों को लगभग एक महीने तक सुरक्षित जगहों पर रखा जाता है। अक्सर परीक्षा के पेपर कड़ी सुरक्षा वाली जगहों पर छापे जाते हैं, जिनमें जेलें भी शामिल हैं; यहाँ पेपर लीक होने से रोकने के लिए कचरा निपटान और ड्रेनेज सिस्टम पर कड़ी नज़र रखी जाती है।" आवाजाही पर नज़र रखने के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग और हथियारों से लैस सुरक्षा काफिलों का भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियाँ नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, BBC के अनुसार, सालों बाद पता चला कि 2002 और 2009 के बीच शेडोंग प्रांत में पहचान की चोरी (identity theft) के 242 मामले सामने आए थे, जिनमें कुछ छात्रों ने योग्य उम्मीदवारों की जगह ले ली थी। 2018 में, परीक्षा में ग्रेड से छेड़छाड़ के आरोपों के कारण दो वरिष्ठ अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया था। आम तौर पर, इस परीक्षा पर आरोप लगते रहे हैं कि अमीर परिवारों और बेहतर इलाकों में रहने वाले लोग इसमें कुछ हद तक हेर-फेर करते हैं। कुल मिलाकर, यह प्रक्रिया ठीक से काम कर रही है, लेकिन इससे छात्रों पर अच्छा प्रदर्शन करने का भारी दबाव भी पड़ता है। चीन में गाओकाओ सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ने का एक अनोखा मौका है। अपनी किताब 'द हाइएस्ट एग्जाम: हाउ द गाओकाओ शेप्स चाइना (2025)' में लेखकों होंगबिन ली, रुइक्स्यू जिया और क्लेयर कूसिन्यू ने लिखा है, "गाओकाओ चीन में समाज और उससे भी ज़्यादा अहम, सरकार के सामने अपनी काबिलियत साबित करने के कुछ चुनिंदा मौकों में से एक है। सच तो यह है कि चीन में शायद ही कोई ऐसा हो जो देश की शिक्षा व्यवस्था से अछूता रहा हो।
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FIFA वर्ल्ड कप में चीन की सीमित मौजूदगी
सालों से ग्लोबल स्तर पर एक अहम ताकत होने और ओलंपिक जैसे इंटरनेशनल स्पोर्ट्स इवेंट्स में दबदबा बनाए रखने के बावजूद, फुटबॉल के सबसे बड़े इवेंट में चीन की मौजूदगी खास तौर पर नज़र नहीं आई है। इसकी नेशनल फुटबॉल टीम ने आखिरी बार 2002 में क्वालीफाई किया था, जब जापान और साउथ कोरिया ने मिलकर वर्ल्ड कप की मेज़बानी की थी। लेकिन उनके न होने के बावजूद, इस 'खूबसूरत खेल' से चीन के दूसरे जुड़ाव भी हैं; कहा जाता है कि देश में इस खेल को काफी पसंद किया जाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वजह चीनी रेफरी मा निंग की मौजूदगी है, जिनके सोशल मीडिया पर बहुत सारे फ़ॉलोअर्स हैं और उन्हें बड़े चीनी ब्रांड्स से स्पॉन्सरशिप भी मिली है। और दूसरी वजह, ज़ाहिर है, खुद चीनी ब्रांड्स हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने जून की शुरुआत में इस इवेंट पर चीनी मैन्युफैक्चरिंग के असर के बारे में रिपोर्ट दी। इसमें बीजिंग की रिटेल कंपनी 'ऑल स्टार पार्टनर' का कई राष्ट्रीय टीमों के लिए आधिकारिक लाइसेंसिंग अधिकार हासिल करने से लेकर, आधिकारिक टेक्नोलॉजी पार्टनर के तौर पर बीजिंग की ही कंपनी 'लेनोवो' तक शामिल थी।
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अमेरिका ने BYD और अलीबाबा को माना 'चीनी सैन्य कंपनियां'
इसी हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीन की दिग्गज कंपनियों को एक आधिकारिक लिस्ट में शामिल कर दिया है। इस लिस्ट में ई-कॉमर्स की महारथी Alibaba, इंटरनेट सर्च इंजन Baidu और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने वाली मशहूर कंपनी BYD शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी सरजमीं पर "चीनी सैन्य कंपनियों" के रूप में काम कर रही हैं। इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह लिस्ट चीनी कंपनियों को "गलत और अनुचित तरीके से दबाने" की कोशिश है। इसके साथ ही चीन ने अमेरिका से अपनी इस "गलत हरकत को तुरंत सुधारने" का आग्रह किया है। वहीं दूसरी ओर, प्रभावित चीनी कंपनियों ने भी अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।
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