मुस्लिम NATO की पहली मीटिंग में ऐसा ऐलान, बुरे फंसे नेतन्याहू!

फिदान ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू की नीतियां क्षेत्र इजराइल यहूदी समुदाय और पूरी दुनिया के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और क्षेत्र में चल रहे कब्जे को खत्म करने के पक्ष में नहीं है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पहली रणनीतिक बैठक सोमवार को इस्तांबुल में हुई। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस, रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना रहा। इसी दौरान तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इजराइल और प्रधानमंत्री बेंजमीन नेतन्याहू पर बेहद तीखा हमला बोला। फिदान ने न नेतन्याहू को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा कि नेतन्याहू और उनकी विचारधारा से जुड़ी ताकतें सिर्फ तुर्की के लिए ही नहीं बल्कि पूरी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि इसे केवल तुर्की की समस्या मानना बड़ी गलती होगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नेतन्याहू के खतरे के खिलाफ कारवाई करनी चाहिए।
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फिदान ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू की नीतियां क्षेत्र इजराइल यहूदी समुदाय और पूरी दुनिया के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और क्षेत्र में चल रहे कब्जे को खत्म करने के पक्ष में नहीं है। फिदान के मुताबिक मौजूदा नीतियां क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ा रही हैं। फिदान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब तुर्की और इजराइल के बीच रिश्तों में लगातार तनाव देखने को मिल रहा है। इससे पहले भी फिदान इजराइल की सैन्य और क्षेत्रीय नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। अप्रैल 2026 में उन्होंने इजराइल पर सुरक्षा के नाम पर क्षेत्र में जमीन पर कब्जा बढ़ाने का आरोप लगाया था और नेतन्याहू सरकार को दुनिया के लिए समस्या बताया था। इस्ता तांबुल बैठक के बाद विधान ने हालांकि एक अहम बात साफ की। उन्होंने कहा कि मक्का रक्षा गठबंधन किसी एक देश के खिलाफ नहीं। गठबंधन का आधार देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने जैसा सिद्धांत है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के दूसरे देश निर्धारित शर्तों और मानकों के तहत इसमें शामिल हो सकते हैं।
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पाकिस्तान सऊदी के साथ तुर्की की नई रणनीति धुरी। जी हां, 7 अगस्त को मक्का में हुए समझौते के तहत तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। समझौते में एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों के खिलाफ हमला माना गया। अब इस्तांबुल की पहली बैठक में साझेदारी को स्थंगत रूप से देने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। तीनों देशों ने रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक, हथियारों के उत्पादन और सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी सहयोग की दिशा तय की है। सऊदी अरब में इस गठबंधन के लिए सचिवालय स्थापित किया जाएगा और शुरुआती 3 साल के लिए महासचिव पाकिस्तान से होगा। यानी एक तरफ मक्का डिफेंस अलायंस क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नए ढांचे के तौर पर सामने आ रहा है तो दूसरी तरफ इसी मंच से तुर्की ने इजराइल और नेतन्या के खिलाफ अपना सबसे सख्त संदेश दिया है।
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