Kaspersky की रिपोर्ट: छोटे कारोबारों पर Backdoor मालवेयर अटैक 52 प्रतिशत बढ़े

साइबर सुरक्षा फर्म कैस्परस्की की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में भारतीय छोटी और मझोली कंपनियों पर बैकडोर मालवेयर के 4.52 लाख हमले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा बीते साल की समान अवधि के 2.97 लाख मामलों से काफी अधिक है। सर्वेक्षण में शामिल 86 फीसदी एमएसएमई ने पिछले एक साल में किसी न किसी साइबर घटना का सामना करने की बात स्वीकारी है।
भारत में छोटी और मझोली कंपनियों की कंप्यूटर प्रणाली पर ‘बैकडोर’ मालवेयर हमले 2026 की पहली छमाही में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 52.1 प्रतिशत बढ़े। साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। कैस्परस्की सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून, 2026 के दौरान बैकडोर के 4.52 लाख मामले सामने आए, जबकि 2025 की पहली छमाही में इनकी संख्या 2.97 लाख थी।
पिछले साल की दूसरी छमाही में ऐसे 4.08 लाख मामले दर्ज किए गए थे। बैकडोर एक ऐसा गुप्त रास्ता है, जिसके जरिये साइबर हमलावर कंप्यूटर या नेटवर्क की सामान्य सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर उसमें प्रवेश कर सकते हैं। एक बार पहुंच बनाने के बाद वे डेटा चुरा सकते हैं, नेटवर्क के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं या आगे और साइबर हमले कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल (आरडीपी) के जरिये कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचने के लिए किए गए प्रयासों की संख्या 37.38 लाख रही। यह औसतन प्रतिदिन करीब 20,650 प्रयास है। हालांकि, यह संख्या 2025 की पहली छमाही के मुकाबले 26.3 प्रतिशत कम रही।
सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाकर किए जाने वाले हमलों का पता चलने के मामलों में भी 35.1 प्रतिशत की कमी आई और इनकी संख्या 4.63 लाख रही। हालांकि, कैस्परस्की ने कहा कि ऐसे हमले छोटे और मझोले कारोबार या कंपनियों के लिए अब भी बड़े साइबर खतरों में शामिल हैं। कंपनी के वैश्विक सर्वेक्षण में फिशिंग, मालवेयर और रैनसमवेयर के साथ इन्हें भी सबसे नुकसानदेह साइबर घटनाओं में गिना गया।
फिशिंग में धोखाधड़ी वाले ईमेल या संदेशों के जरिये लोगों से पासवर्ड और बैंक संबंधी संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जाती है। रैनसमवेयर ऐसा मालवेयर है, जो कंप्यूटर में मौजूद फाइल को लॉक या एन्क्रिप्ट कर देता है और उन्हें दोबारा उपलब्ध कराने के बदले ‘पैसा’ मांगा जाता है। ये निष्कर्ष ऐसे समय आए हैं, जब भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) ने 15 अक्टूबर को एक गंभीर चेतावनी जारी की थी।
इसमें कहा गया था कि परीक्षण के दौर से गुजर रहे कृत्रिम मेधा (एआई) एजेंट भारतीय संगठनों के वास्तविक कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच गए थे और उन्होंने गोपनीय रिकॉर्ड पढ़े थे। प्रभावित संगठनों में से किसी को भी इस पहुंच का पता नहीं चला था। कैस्परस्की के 18 देशों के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों के बीच किए गए सर्वेक्षण में भारत भी शामिल था।
इसमें पाया गया कि 86 प्रतिशत छोटी और मझोली कंपनियों को पिछले एक साल में कम से कम एक साइबर घटना का सामना करना पड़ा। सर्वेक्षण में शामिल 22 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वित्तीय नुकसान को ऐसी घटनाओं का प्रमुख परिणाम बताया। कैस्परस्की के दक्षिण एशिया में उपभोक्ता कारोबार प्रमुख पुरुषोत्तम भाटिया ने कहा, ‘‘बैकडोर हमलावर को शुरुआती सेंधमारी के काफी समय बाद तक किसी कारोबार की प्रणाली में बने रहने का रास्ता देता है।
इसमें 52 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि भारतीय छोटे और मझोले कारोबार को अब केवल एक बार निशाना बनाने के बजाय लंबे समय तक पहुंच बनाए रखने के ठिकाने के रूप में देखा जा रहा है।’’
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