West Asia में तनाव से कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के आसार

पश्चिम एशिया में गहराते संकट और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 117 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अथवा ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किसी भी व्यवधान से भाव 120 डॉलर तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और साप्ताहिक भंडार आंकड़े भी बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।
पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर अगले सप्ताह भी जारी रहने की आशंका है। इससे आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं बनी हुई हैं। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मौद्रिक नीति संबंधी फैसला बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
विश्लेषकों ने यह राय जताई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बीच निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की आशंकाओं और अमेरिका के साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर रहेगी। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन अपने साप्ताहिक भंडार के अनुमान जारी करेंगे।
इसके अलावा, कुशिंग में कच्चे तेल का भंडार और 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक भी बाजार के लिए अहम रहेगी। रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘निकट अवधि में कीमतों का रुख तेजी का है, लेकिन यह काफी हद तक खबरों से प्रभावित होगा। कारोबारियों को कीमतों में तेज उछाल के पीछे भागने से बचना चाहिए और आगे की दिशा की पुष्टि के लिए वैश्विक घटनाक्रम, फेडरल रिजर्व के संकेतों तथा साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे या होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन में किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
वहीं, तनाव कम करने की दिशा में ठोस प्रगति होने पर कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी अरब के आसपास हमलों में तेजी आने से बाजार का ध्यान ऊर्जा बुनियादी ढांचे और निर्यात की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर फिर केंद्रित हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, जिसमें नतांज के पास स्थित परमाणु प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, को निशाना बनाने की योजना तैयार किए जाने संबंधी खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है।
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