शेयर बाजार में Black Monday! Donald Trump के बयान से मचा बवाल, Sensex और Nifty बुरी तरह लुढ़के

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Ankit Jaiswal । Jul 8 2026 6:53PM

डोनाल्ड ट्रंप के बयान से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका के चलते शेयर बाजार बुरी तरह लुढ़क गया, जहाँ सेंसेक्स 76,503 और निफ्टी 23,882 के स्तर पर बंद हुआ। इस बड़ी गिरावट से न केवल निवेशकों की 8 लाख करोड़ की संपत्ति घटी, बल्कि कच्चे तेल में तेजी और रुपये में कमजोरी ने आर्थिक चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

सुबह बाजार ने सामान्य कारोबार के साथ शुरुआत की थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ माहौल पूरी तरह बदल गया। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े तनाव ने दुनियाभर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार के अंत तक बिकवाली इतनी तेज हो गई कि प्रमुख सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूटकर बंद हुए।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 517 अंक फिसलकर 23,882.05 के स्तर पर आ गया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस गिरावट से निवेशकों की करीब 8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 471 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

बता दें कि बाजार में बिकवाली उस समय और तेज हो गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका तेज हो गई। निवेशकों को डर है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने, आयात बिल पर दबाव आने और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता भी बाजार में साफ दिखाई दी है।

बाजार में लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के शेयर दबाव में रहे। बैंकिंग, उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस समेत अधिकांश क्षेत्रों में तेज बिकवाली देखने को मिली। पूरे कारोबार के दौरान निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया है।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने घरेलू बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। उनके मुताबिक, महंगाई बढ़ने की आशंका और भारत तथा अमेरिका दोनों देशों में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से निवेशकों की चिंता और बढ़ी है। साथ ही कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों को लेकर भी बाजार सतर्क बना हुआ है।

इस बीच अमेरिकी सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। रुपया डॉलर के मुकाबले 95.50 के स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे विदेशी निवेश और आयात लागत को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक की अगली मौद्रिक नीति, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं हुआ तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर कुछ समय तक जारी रह सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता और सोच-समझकर निवेश करना सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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