Janmashtami Festival पर जानें क्यों 'Krishna' से पहले 'Radha' का नाम लेना माना जाता है बेहद शुभ

Radha Krishna
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जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण से पहले राधा रानी का नाम लेने के पीछे गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक कारण छिपा हुआ है। शास्त्रों के अनुसार राधा रानी को भगवान कृष्ण की आत्मा और शक्ति माना गया है, जिनके बिना कृष्ण भक्ति अधूरी मानी जाती है। राधा नाम का जाप करने से साधक को श्रीकृष्ण की विशेष कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।

आज यानी 4 सितंबर को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे रहते हैं, हालांकि कान्हा का स्मरण राधा रानी का नाम लिए बिना पूरा नहीं माना जाता है। कई बार आपने लोगों के मुंह से सुना होगा,  'राधे-कृष्ण', 'राधे-राधे' या 'राधा-कृष्ण'। 

क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण का नाम लेने से पहले राधा का नाम क्यों लिया जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और अद्भुत रहस्य छिपा है। आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।

राधा नाम से प्रसन्न होते हैं श्रीकृष्ण

धार्मिक ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी का नाम लेने से प्रसन्न होते हैं और हमेशा भक्तों पर कृपा बरसाते है। श्रीकृष्ण ने स्वंय राधा को अपनी आत्म बताया है और कहा कि राधा उन्हीं में वास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति माना जाता है। जैसा कि सूर्य और उसकी किरणें कभी अलग नहीं होती है, वैसे ही राधा और कृष्ण भी एक-दूसरे के पूरक माने जाते है। राधा-कृष्ण का प्रेम साधारण नहीं है, बल्कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। 

माना जाता है कि जब भी कोई साधक राधा नाम जपता है, तो उसे श्रीकृष्ण की कृपा जरुर प्राप्त होती है।

राधा नाम में छिपा है प्रेम और भक्ति का भाव 

असल में राधा-कृष्ण की कथा में राधा को निष्काम और पूर्ण प्रेम का प्रतीक माना गया है। उनका प्रेम किसी सांससारिक अपेक्षा से जुड़ा नहीं था, इसी कारण से कृष्ण भक्ति में राधा नाम को विशेष महत्व दिया है।

राधा की कृपा से ही मिलते हैं कृष्ण

धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा रानी भगवान कृष्ण की सबसे प्रिय हैं। जो साधक राधा नाम का स्मरण करता है, उस पर राधा-रानी की विशेष कृपा रहती है और इनके माध्यम से श्रीकृष्ण आपकी इच्छाओं को पूरा करते हैं। कई धार्मिक कथाओं में इस बात का भी वर्णन किया है कि श्रीकृष्ण ने राधा रानी को स्वंय ये वरदान दिया है कि उनका नाम हमेशा कृष्ण से पहले लिया जाता है।

जो भक्त राधा रानी की भक्ति करेगा, वो उसकी पुकार सबसे पहले सुनेंगे। इस भाव के कारण वृंदावन और बरसाना की गलियों में आज भी श्रद्धालु अभिवादन के तौर पर 'राधे-राधे' कहते हैं। 

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