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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: CJP की हवा कैसे निकली? Rahul Gandhi की राजनीति Congress पर क्यों पड़ रही भारी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-did-cjp-deflate-why-is-rahul-gandhi-politics-overshadowing-congress]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने इस सप्ताह कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस की रणनीति पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। कॉकरोच जनता पार्टी पर नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जुलाई अगस्त के दौरान इन्होंने अच्छे दिन देखे लेकिन कांठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। उन्होंने कहा कि वह लगातार ब्लैकमेल की रणनीति अपना रहे थे। लेकिन इस बार सरकार पूरी तरीके से तैयार थी और यही कारण है कि यह लोग जो दिल्ली में करना चाहते थे उसमें कामयाब नहीं हुए।</p><p>उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को ठीक से समझे बिना विदेशी दबाव बनाने की यह राजनीति आखिर क्यों चल रही है? क्या किसी राजनीतिक दल या किसी संगठन के आंदोलन के दौरान लगाये गये आरोपों को ही सच मानकर भारत को कटघरे में खड़ा कर देना इन सांसदों का नया शगल बन गया है? अगर इन्हें वाकई लोकतंत्र और नागरिकों की आजादी की इतनी चिंता है, तो यह चिंता हर देश के मामले में एक जैसी क्यों नहीं दिखती? आखिर भारत के मामले में ही इनका लोकतांत्रिक प्रेम क्यों उमड़ने लगता है? क्या भारत को नसीहत देना और उसके आंतरिक मामलों में दखल देना ही इनकी राजनीति का असली मकसद है?</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/ram-sharan-nautiyal-rejoins-congress-in-delhi-in-presence-of-kumari-selja" target="_blank" rel="noopener">Congress में लौटे Ram Sharan Nautiyal, कुमारी शैलजा ने किया स्वागत, BJP पर साधा निशाना</a></p><p>उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता पलटने का ख्वाब देख रहे हैं उन्हें भी समझना होगा कि भारत की ताकत किसी एक सरकार में नहीं, बल्कि उस करोड़ों भारतीयों के जनादेश में है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव मजबूत की है। इस देश को न विदेशी मंचों पर बैठकर भाषण देने वाले कुछ नेता चला सकते हैं, न सोशल मीडिया पर शोर मचाकर खुद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा रखवाला बताने वाले लोग! भारत की छवि को झूठे आरोपों, आधी-अधूरी जानकारी और राजनीतिक एजेंडे के सहारे चोट पहुंचाने का सपना देखने वालों को समझना होगा कि भारत कोई कमजोर देश नहीं, जिसकी साख चंद बयानों से मिटा दी जाए। भारत पर उंगली उठाने से पहले अपने तथ्यों की जांच करो, आरोप लगाने से पहले सबूत जुटाओ और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने से पहले यह समझो कि भारत का भविष्य तय करने का अधिकार भारतीय जनता के पास है, किसी विदेशी नेता या सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञ के पास नहीं! सवाल पूछने हैं तो पूछिए, लेकिन सवालों की आड़ में देश की संस्थाओं को बदनाम करने का ठेका मत लीजिए। क्योंकि भारत की असली ताकत तिरंगे के नीचे खड़े करोड़ों लोगों का विश्वास, स्वाभिमान और अपने देश का फैसला खुद करने का अधिकार है।</p><p>कांग्रेस की रणनीति को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि फिलहाल राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी को अपना कंपीटीटर मान रहे हैं और कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा ना हो इसलिए वह लगातार मैदान में बैठने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक को लगता है कि वोट चोरी हो रही है तो सबसे पहले इंडिया ब्लॉक शासित राज्य सरकारों को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके अलावा नीरज दुबे ने यह भी कहा कि फिलहाल राहुल गांधी किसी ने किसी तरीके से चर्चा के केंद्र में रहना चाहते हैं और यही कारण है कि फिलहाल वह एक जूता दिखाने की कोशिश कर रही है।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 18:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-did-cjp-deflate-why-is-rahul-gandhi-politics-overshadowing-congress</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Misra-Masood क्या बचा पाएंगे UP Congress का वजूद? CJP Protest का क्या असर होगा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/can-misra-and-masood-save-the-existence-of-the-up-congress]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हो रही राजनीति पर चर्चा की। साथ-साथ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने जो बदलाव किए हैं उससे भी संबंधित सवाल पूछे। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि राजनीति के लिए फिलहाल संवैधानिक संस्थाओं को भी विपक्ष की ओर से नहीं छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और ऐसे में सुप्रीम कोर्ट पर हर किसी को भरोसा रखना चाहिए।</p><p>नीरज दुबे ने कहा कि चुनाव आयोग ने कई सुधार हाल के दिनों में किए हैं। यह अच्छी बात है कि विपक्ष ने इसको लेकर दबाव बनाया और चुनाव आयोग ने वह सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है और चुनाव आयोग भी वही कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब से जंतर मंतर का आंदोलन हुआ है तब से विपक्ष को भी लगने लगा है कि यह सरकार झुक सकती है और हमें लगातार इसको लेकर झुकाने की तैयारी करनी चाहिए। हालांकि नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि डूसू चुनाव या पंजाब विश्वविद्यालय के चुनाव को हम देखें तो वहां भाजपा समर्थित संगठन को जीत मिली। विपक्ष के जो विद्यार्थी संगठन है, उसे हार का सामना करना पड़ा जिसका मतलब साफ है कि अभी भी देश के युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। ऐसे में विपक्ष को युवाओं के बीच भ्रम फैलाने से बचना चाहिए।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/dharmendra-yadav-urges-congress-to-discuss-up-seat-sharing-with-akhilesh-yadav" target="_blank" rel="noopener">Seat Sharing पर Congress सीधे SP चीफ Akhilesh Yadav से करे बात, Dharmendra Yadav ने दी नसीहत</a></p><p>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि देश तरक्की कर रहा है। लेकिन विपक्ष लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। जो राजक तत्व है, जो आंदोलनजीवी हैं, वह हमेशा इसी तरीके की बातें करते रहेंगे ताकि देश के लोगों में भ्रम रहे। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को एक सफलता मिली जिसके बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हर बार उसे सफलता मिल जाए। कांग्रेस को भी यही लगता है कि जब सीजेपी को समर्थन मिल गया तो हम क्यों पीछे रहे? इसलिए कांग्रेस भी इस तरह की चीज कर रही है। फिलहाल सीजेपी और कांग्रेस के बीच ही लड़ाई साफ तौर पर देखने को मिल रही है।</p><p>उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के भीतर हुए बदलाव पर हमने नीरज कुमार दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस घूम फिर कर एक परिवार पर ही आ जाती है और उत्तर प्रदेश में भी हमने देखा कि वह एक परिवार के ही व्यक्ति को पार्टी की कमान सौंप दी है। जिस व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी उनके क्षेत्र में मजबूत चुनौती दी थी, उसे चुनाव से 4 महीने पहले हटाने का क्या मतलब है? आप किसी दूसरे पार्टी से नेता को लेकर आते हैं और उसे प्रभारी बनाते हैं। प्रभारी के जरिए आप रिपोर्ट लेते हैं और तब फैसला आप लेते हैं। ऐसे में आप खुद अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के भरोसे पर खड़े नहीं उतर रहे हैं। इमरान मसूद के बयान की वजह से आपके गठबंधन के सहयोगी अखिलेश यादव आपसे नाराज है। बावजूद इसके आप इमरान मसूद को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 19:44:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/can-misra-and-masood-save-the-existence-of-the-up-congress</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Gyanesh Kumar के चलते बंपर वोटिंग के पुराने रिकॉर्ड टूट रहे हैं, फिर Vote Chori कैसे हो गयी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/with-gyanesh-kumar-at-helm-public-is-breaking-old-records-for-massive-voter-turnout]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इस सप्ताह हमें बहुत से पाठकों/दर्शकों की ओर से अनुरोध आये कि चुनाव आयोग को लेकर उठे विवाद पर हम पूरी स्थिति का विश्लेषण करें इसलिए तमाम सवालों के जवाब देने वाला यह कार्यक्रम आपके समक्ष लेकर प्रस्तुत हुए हैं।</p><p>देखा जाये तो चुनाव आयोग के भीतर दो निर्वाचन आयुक्तों की असहमति सामने आते ही ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, मानो आयोग के भीतर मतभेद होना अपने आप में चुनावी कदाचार का प्रमाण हो। यह तर्क न संवैधानिक व्यवस्था समझता है, न संस्थागत कार्यप्रणाली और न ही चुनाव आयोग का इतिहास। तीन सदस्यीय चुनाव आयोग कोई ऐसी संस्था नहीं है जहां हर मुद्दे पर तीनों सदस्य एक ही राय बोलें। कानून खुद मानता है कि मतभेद हो सकते हैं और यदि सर्वसम्मति न बने तो बहुमत से फैसला होगा।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/india-alliance-opposition-unity-sp-congress-tussle-up-politics-shivpal-yadav" target="_blank" rel="noopener">Delhi में एकजुट दिखने वाले दल UP में आपस में लड़ रहे, INDIA Bloc की यह कैसी एकता है?</a></p><p>यानी सवाल यह नहीं है कि आयोग के भीतर किसी ने असहमति जताई या नहीं। असली सवाल है कि अंतिम निर्णय किस प्रक्रिया से हुआ, क्या वह कानून के मुताबिक हुआ और क्या चुनाव निष्पक्ष रूप से सम्पन्न हुए?</p><p>साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि वर्ष 1993 में चुनाव आयोग को स्थायी रूप से तीन सदस्यीय संस्था बनाए जाने के बाद से ही उसके भीतर मतभेद सामने आते रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन और निर्वाचन आयुक्त एम.एस. गिल तथा जी.वी.जी. कृष्णमूर्ति के बीच तीखे मतभेद हुए थे। शेषन ने दोनों आयुक्तों की नियुक्ति तक को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वर्ष 1995 में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तीनों सदस्यों की निर्णय प्रक्रिया में समान भूमिका है।</p><p>साल 2009 में मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी और राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। बाद में चावला स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त बने।</p><p>2019 में निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता की शिकायतों पर आयोग के बहुमत से अलग राय दर्ज की थी। उन्होंने अपने असहमति नोटों को अंतिम आदेशों में दर्ज नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी और 2020 में आयोग से इस्तीफा दे दिया।</p><p>तो आज यदि दो निर्वाचन आयुक्त किसी प्रक्रिया पर टिप्पणी या आपत्ति दर्ज करते हैं, तो इसे अपने आप में संवैधानिक संकट घोषित कर देना इतिहास और कानून दोनों की अनदेखी है।</p><p>इस बार हुआ क्या है? यदि इसको देखें तो तस्वीर साफ है कि भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कुछ निर्णयों पर पिछले दस महीनों में कम-से-कम 14 बार आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज कीं। आयोग ने इन टिप्पणियों को आंतरिक विचार-विमर्श और संस्थागत नियंत्रण-व्यवस्था का हिस्सा बताया है तथा कहा है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।</p><p>यहां एक बात बेहद महत्वपूर्ण है कि असहमति दर्ज करना और कदाचार करना दो अलग बातें हैं। यदि किसी संस्था में सवाल पूछने की अनुमति ही न हो तो वह संस्था मजबूत नहीं होती। लेकिन सवाल पूछे जाने के बाद कानून के मुताबिक अंतिम फैसला हो, उसका रिकॉर्ड रहे और उस फैसले को चुनौती देने की वैधानिक व्यवस्था हो, तो मतभेद को भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।</p><p>सवाल उठता है कि चुनाव आयोग के काम का मूल्यांकन आंकड़ों से क्यों न हो? अब जरा चुनावी भागीदारी के आंकड़े देखिए।</p><p>बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 1951 के बाद राज्य में सबसे अधिक था। महिला मतदाताओं की भागीदारी 71.78 प्रतिशत रही। चुनाव में कोई पुनर्मतदान नहीं हुआ और आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जोड़ने या हटाने के संबंध में कोई अपील प्राप्त नहीं हुई।</p><p>2026 में तमिलनाडु में लगभग 85.05 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। केरल में 78.03 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले विधानसभा चुनाव से अधिक था। असम में 85.38 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ। दोनों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश ने विधानसभा चुनावों में अपने अब तक के सर्वोच्च मतदान का रिकॉर्ड बनाया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में मतदान 91 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गया और निर्वाचन आयोग के अपडेटेड आंकड़ों में यह 92.72 प्रतिशत तक दर्ज हुआ।</p><p>यदि चुनाव आयोग मतदाताओं को मतदान से रोकने के लिए इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम काट रहा था, तो बिहार में रिकॉर्ड मतदान कैसे हुआ? तमिलनाडु में करीब 85 प्रतिशत मतदान कैसे हुआ? केरल में 78 प्रतिशत, असम में 85 प्रतिशत से ज्यादा, पुडुचेरी में करीब 90 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 90 प्रतिशत से ऊपर मतदान कैसे पहुंच गया?</p><p>यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं काटा गया। लेकिन यह जरूर बताता है कि केवल नाम हटाए जाने के आंकड़े को लेकर पूरे चुनाव को ही चोरी या साजिश घोषित कर देना तथ्यों से कहीं आगे की छलांग है।</p><p>सवाल उठता है कि नाम काटे गए तो कितनों ने चुनौती दी? देखा जाये तो यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और यहां आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की बजाय ईमानदारी से देखना चाहिए।</p><p>बिहार की बात करें तो अंतिम सूची में लगभग 47 लाख की कमी आई लेकिन चुनाव आयोग के अनुसार शून्य अपील की गयी। तमिलनाडु में पुनरीक्षण के दौरान 97.37 लाख नाम हटे और अंतिम सूची में शुद्ध कमी लगभग 74.07 लाख रही। वहां दावों-आपत्तियों के दौरान 27.53 लाख पात्र मतदाता जोड़े गए। वहीं केरल में 8.57 लाख नाम हटे और लगभग 4.01 लाख विभिन्न प्रकार के आवेदन आये जिनमें समावेशन और सुधार के आग्रह थे। असम में अंतिम सूची में 2.43 लाख नाम कम हुए और वहां भी दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी हुई। पश्चिम बंगाल में 27.16 लाख मतदाता न्यायिक निर्णय के बाद हटाए गए। इनमें से 22.21 लाख, यानी लगभग 82 प्रतिशत ने पुनः शामिल किए जाने के लिए अपील की। बंगाल का आंकड़ा यह भी दर्शाता है कि पूरी प्रक्रिया में चुनौती देने का रास्ता मौजूद था और बड़ी संख्या में लोगों ने उसका इस्तेमाल किया।</p><p>यहां एक और सवाल यह उठता है कि गैर-नागरिक को वोट का अधिकार देने पर कुछ पार्टियां क्यों तुली रहती हैं? जबकि भारत में चुनावी कानून इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है। चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार भारत का नागरिक न होने वाला व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हो सकता। यहां तक कि जिसने किसी दूसरे देश की नागरिकता ले ली हो, वह भी भारतीय मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हो सकता।</p><p>यह सिद्धांत केवल भारत की विशेषता नहीं है। अमेरिका में संघीय चुनावों में गैर-नागरिक मतदान नहीं कर सकते। कनाडा में संघीय चुनाव के लिए कनाडाई नागरिक होना अनिवार्य है। ब्रिटेन में संसदीय चुनावों के लिए ब्रिटिश, आयरिश या पात्र राष्ट्रमंडल नागरिकों की श्रेणियां निर्धारित हैं। साथ ही यहां पश्चिम बंगाल से सामने आये उदाहरण को भी देखना चाहिए। पश्चिम बंगाल की सरकार ने कुछ समय पहले खुलासा किया था कि सरकारी योजनाओं का लाभ गैर भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में ले रहे थे।</p><p>इसके साथ ही ज्ञानेश कुमार का रिकॉर्ड भी बहस का हिस्सा होना चाहिए। ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल संवर्ग के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रहे हैं और 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने। इससे पहले उन्होंने केरल सरकार में जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और कई विभागों में सचिव जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। केंद्र में उन्होंने रक्षा उत्पादन मंत्रालय में संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव तथा सहकारिता मंत्रालय के सचिव के रूप में काम किया।</p><p>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से अभियांत्रिकी की पढ़ाई के अलावा उन्होंने व्यावसायिक वित्त और पर्यावरणीय अर्थशास्त्र का भी अध्ययन किया। चुनाव आयुक्त बनने के बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव जैसी विशाल चुनावी प्रक्रिया में भूमिका निभाई और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त बने। साथ ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर ने उनके प्रशासनिक और चुनावी योगदान के लिए उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान भी दिया। इस पूरे रिकॉर्ड को नजरअंदाज करके केवल वर्तमान राजनीतिक विवाद के आधार पर किसी अधिकारी की पूरी सार्वजनिक सेवा पर फैसला सुना देना भी उचित नहीं है।</p><p>जहां तक राहुल गांधी की राजनीति का सवाल है तो वह लगातार इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों को “ब्लैक बॉक्स” बताते हुए उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर मतदाता चोरी और चुनावी हेरफेर के आरोप लगाए तथा बाद में चुनाव आयोग को भविष्य में जवाबदेही की चेतावनी भी दी। देखा जाये तो यहां आलोचना करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्ष को चुनाव आयोग से सवाल पूछने, आंकड़े मांगने और न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है। लेकिन बहस का अगला चरण होना चाहिए कि दस्तावेज कहां हैं, प्रमाण क्या है, शिकायत किस निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज हुई, कितने मामलों में जांच हुई और कितने मामलों में आरोप सही पाए गए? इसलिए बहस को व्यक्ति बनाम व्यक्ति बनाने की बजाय प्रमाण बनाम आरोप बनाना ज्यादा जरूरी है।</p><p>इस तरह चुनाव आयोग से सवाल पूछना गलत नहीं है; लेकिन आयोग के भीतर मतभेद को कदाचार का प्रमाण बताना गलत है। और सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के चुनाव आयोग का मूल्यांकन नारों से नहीं, चुनाव के वास्तविक आंकड़ों से कीजिए। बिहार में 67.13 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान, तमिलनाडु में करीब 85 प्रतिशत, केरल में 78.03 प्रतिशत, असम में 85.38 प्रतिशत, पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 90 प्रतिशत से ऊपर की भागीदारी इस बात का ठोस संकेत है कि करोड़ों भारतीय मतदाता चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।</p><p>विपक्ष को भी एक बार अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। लोकतंत्र में हार या राजनीतिक असफलता के बाद दूसरों पर उसका ठीकरा फोड़ना सबसे आसान है। अक्सर देखने में आता है कि चुनाव में हार के बाद विपक्षी दल अपनी कमियों की समीक्षा करने की बजाय सिस्टम को ही दोषी ठहराने लगते हैं। इसे एक कमजोर विद्यार्थी के उदाहरण से समझिए। परीक्षा में नंबर कम आने के बाद एक विद्यार्थी अगर यह सोचने की बजाय कि उसने पढ़ाई में कहां कमी छोड़ी, शिक्षक, प्रश्नपत्र, परीक्षा व्यवस्था, समय और यहां तक कि अपनी किस्मत को दोष देने लगे, तो बहाने शायद उसे उस क्षण राहत दे दें, लेकिन अगली परीक्षा में उसकी स्थिति नहीं बदलेंगे। सुधार के लिए उसे आखिरकार अपनी किताब खोलनी ही पड़ेगी।</p><p>राजनीति में भी यही सिद्धांत लागू होता है। अगर किसी दल को लगातार मतदाताओं का समर्थन नहीं मिल रहा, तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जनता उससे दूर क्यों जा रही है? संगठन कहां कमजोर है, जमीन पर कार्यकर्ता कितना सक्रिय है, उम्मीदवारों का चयन कैसा है, नीतियों और नारों का जनता पर क्या असर है और क्या मतदाता उस दल पर भरोसा कर रहा है। इन सवालों के जवाब खोजने की बजाय हर चुनाव के बाद ईवीएम, चुनाव आयोग, मतदाता सूची और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर देना आसान जरूर है, लेकिन इससे अपनी राजनीतिक कमियों का इलाज नहीं होता।</p><p>चुनाव आयोग से सवाल पूछिए, उसकी गलतियां सामने लाइए, जहां किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया हो वहां आवाज उठाइए और जहां अनियमितता का प्रमाण हो वहां कार्रवाई की मांग कीजिए। लेकिन हर असहमति को साजिश और हर चुनावी नतीजे को चोरी बताने की राजनीति अंततः उसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती है, जिसके सहारे सत्ता में आने की लड़ाई लड़ी जाती है।</p><p>इसलिए अब वक्त विपक्ष के लिए भी आत्ममंथन का है। हर हार का कारण चुनाव आयोग नहीं हो सकता, हर असफलता का कारण ईवीएम नहीं हो सकती और हर राजनीतिक कमजोरी के पीछे कोई संवैधानिक साजिश नहीं हो सकती। कभी-कभी समस्या सामने वाले की व्यवस्था में नहीं, अपनी तैयारी में भी होती है।</p><p>-नीरज कुमार दुबे</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:04:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/with-gyanesh-kumar-at-helm-public-is-breaking-old-records-for-massive-voter-turnout</link>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: UCC, UPI और Nandigram पर जमकर हो रही राजनीति, उलझ गया सभी दलों का गणित!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/intense-politics-is-playing-out-over-the-ucc-upi-and-nandigram-throwing-the-political]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह UCC, पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव, UPI पेमेंट पर MDR आदि मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। UCC पर उन्होंने कहा कि देश में इस समय समान नागरिक संहिता को लेकर जमकर बहस हो रही है। इसके पक्ष और विपक्ष में तमाम तरह के तर्क दिये जा रहे हैं। कोई इसे अपने धर्म के खिलाफ बता रहा है तो कोई कह रहा है कि इससे हमारी संस्कृति और पहचान को खतरा हो जायेगा। आश्चर्यजनक बात यह है कि अभी केंद्र सरकार ने समान नागरिक संहिता संबंधी कानून का मसौदा प्रस्ताव देश के समक्ष नहीं रखा है। यानि किसी को पता नहीं है कि समान नागरिक संहिता में क्या-क्या प्रावधान होंगे लेकिन फिर भी बिना कुछ जाने समझे लोग इससे भयभीत हो रहे हैं और दूसरों के बीच भी भ्रम फैला रहे हैं</p><p>नीरज दुबे ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर इसे लागू करना आसान नहीं होगा इसलिए इसे राज्यवर लागू करने की कोशिश भाजपा सरकार करेंगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इसे लागू कर दिया गया है और वहां से कोई शिकायत नहीं मिल रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि 370 हो या राम मंदिर बनना हो या समान नागरिक संहिता, यह भाजपा के कोर मुद्दे रहे हैं और भाजपा इनमें से दो को पहले पूरा कर चुकी है। यूनिफॉर्म सिविल कोड अभी बाकी है जिसे भाजपा शासित राज्यों में पहले लागू किया जा सकता है, जैसा कि अमित शाह के बयान से समझ में भी आता है। लेकिन इसको लेकर अभी से ही बिना मसौदा पढ़े भ्रम फैलाने की जो कोशिश हो रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। बिहार में जदयू की अपनी राजनीति है और वह उसे हिसाब से आगे बढ़ेगी।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/what-benefits-does-india-derive-from-the-brics-summit" target="_blank" rel="noopener">ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत को क्या लाभ?</a></p><p>बंगाल पर उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर एक छात्र राजनीति की साहसी नायिका से लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने और वर्तमान समय में घोर राजनीतिक व कानूनी संकटों से घिरने तक की एक बड़ी दास्तान है। जो ‘दीदी’ कभी सड़कों पर वामपंथ के 34 साल के किले को ढहाने के लिए जानी जाती थीं, वे आज अपनी राजनीतिक यात्रा के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों में ममता बनर्जी पर मुश्किलों के पहाड़ टूटने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं- पहला, ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में लगा, जहाँ उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हार का सामना करना पड़ा और राज्य में भाजपा की सरकार बनी। खुद ममता बनर्जी को भी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी के हाथों करारी हार झेलनी पड़ी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ममता ने अपने शासन में जैसा किया है, वैसा ही उन्हें राजनीतिक तोर पर देखने को मिल रहा है।</p><p>UPI पेमेंट को लेकर हो रहे बवाल पर उन्होंने कहा कि झूठ की गूंज एक्सप्रेस चलाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन इस निर्णय के लिए सरकार पर अमेरिकी दबाव में झुकने, घुटने टेकने जैसे आरोप लगा रहा है। विपक्ष सोशल मीडिया पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क को मोदी टैक्स बताकर इसे तत्काल वापस लेने की मांग कर रहा है। 2000 से ऊपर के कारोबारी भुगतान के इस 0.4 प्रतिशत शुल्क पर विपक्ष के झूठ की गूंज सोशल मीडिया से लेकर व्यापारियों तक पहुंच चुकी है। नीरज दुबे ने कहा कि कोई भी सेवा हमेशा के लिए फ्री में नहीं रखा जा सकता है। हालांकि, सरकार ने जो कदम उठाए है उससे आम आदमी को ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:27:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/intense-politics-is-playing-out-over-the-ucc-upi-and-nandigram-throwing-the-political</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: UP में किसे मिलेगा जाटों का साथ? Rahul Gandhi की 2024 वाली रणनीति!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/who-will-secure-the-support-of-the-jats-in-up-rahul-gandhi-strategy-for-2024]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने भाजपा की सोशल मीडिया पर सक्रियता और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चर्चा की। साथ ही साथ उत्तर प्रदेश की जाट पॉलिटिक्स पर भी हमने प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से सवाल पूछे। भाजपा में हुए बदलाव और सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि हाल में ही देखे तो दिल्ली में जो प्रोटेस्ट हुआ, अगर वह इतना कामयाब हुआ तो उसमें सोशल मीडिया का बड़ा हाथ था। यही कारण है कि भाजपा ने भी अपने सोशल मीडिया टीम में बड़े बदलाव किए हैं और उसका असर अब हमें लगातार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है ताकि उन्हें बताया जा सके कि मोदी सरकार में क्या काम हुए हैं और उससे पहले क्या स्थितियां थी।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि हाल के दिनों में देखें तो भाजपा सोशल मीडिया पर पिछड़ती हुई दिखाई दे रही थी जिसका फायदा विपक्षी दल भी खूब उठा रहे थे। लेकिन अब भाजपा ने समय को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलाव को करने के बाद एक आक्रामक नीति अपनाने की ओर बढ़ रही है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सिंगर अंकित बालियान के मर्डर के बाद से जारी जाट राजनीति पर भी नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि अखिलेश यादव हर कीमत पर उत्तर प्रदेश चुनाव को जाति पर ले जाना चाहते हैं जबकि भाजपा इसे हिंदुत्व पर रखना चाहती हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/subhash-chandra-insolvency-case-nclt-repayment-plan-borrower-guarantor-loan-waiver" target="_blank">22000 करोड़ का कर्ज लिया और सिर्फ 6.5 करोड़ की वापसी? लोन माफी के आरोपों के बीच Essel Group के Subhash Chandra ने खुद खोला पूरा राज</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि यह सभी को पता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी वहां की कानून व्यवस्था है। यही कारण है कि अंकित बालियान मर्डर केस को उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को जोड़ा जा रहा है। साथ ही साथ अखिलेश यादव जाट वोटो को साधने की कोशिश कर रही कर रहे हैं। उन्हें पता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका कुछ खास जनाधार नहीं है। मुसलमान वोट उनको मिल जाएंगे लेकिन जब तक मुसलमान के साथ किसी और समुदाय का वोट उन्हें ना मिले, तब तक वह कामयाब नहीं हो सकते हैं और इसीलिए वह जाट समुदाय को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी जाट समुदाय के बड़े नेता है और उन पर निशाना साधकर अखिलेश यादव ने बड़ी गलती कर दी थी। शायद इस वजह से अब इस मुद्दे को वह जाट समाज से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि किसी की अगर हत्या होती है वह दुखद है और सरकार आरोपियों को हर हाल में सामने लाएगी और न्याय के कटघरे में खड़ा करेगी।&nbsp;</div><div><br></div><div>राहुल गांधी के द्वारा शुद्धिकरण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी काफी दिनों के बाद यह मुद्दा उठा रहे हैं। सवाल यह भी है कि वह इतने दिनों तक क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आरोप लगाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन अगर उनके आरोप में दम है तो उनके कार्यकर्ता खुद क्यों नहीं गए एफआईआर दर्ज कराने। नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष को फिलहाल कोई बड़ा मुद्दा नहीं मिल रहा है इसलिए वह हर मामले को जाति का रंग देना चाहती है ताकि चुनाव में फायदा हो सके। उत्तर प्रदेश उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। इसी को लेकर राहुल गांधी 2024 वाला माहौल बना रहे हैं। लेकिन इस बार वह कामयाब होंगे इसकी संभावना बेहद कम है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 18:16:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/who-will-secure-the-support-of-the-jats-in-up-rahul-gandhi-strategy-for-2024</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: नई टीम से Gen Z को साधेगी BJP, क्या Vande Mataram को लेकर बैकफुट पर है Congress?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/bjp-to-woo-gen-z-with-a-new-team-is-congress-on-the-back-foot-over-vande-mataram]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने भाजपा की नई टीम और वंदे मातरम विवाद पर चर्चा की। हमेशा की तरह इसमें मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने बीजेपी की नई टीम को लेकर साफ तौर पर कहा कि यह टीम पार्टी के लिए भविष्य में लगातार काम करेगी। विनोद तावडे के उत्तर प्रदेश के प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी दिए जाने को भी उन्होंने बहुत बड़ा कदम बताया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विनोद तावडे योगी आदित्यनाथ और दिल्ली के बीच में एक ब्रिज का काम करेंगे। विनोद तावडे जमीनी नेता है। मीडिया से दूर रहते हैं और अपना काम शांति से भी करते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दुबे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संगठन में लंबे समय से चल रही कवायद को अंजाम देते हुए अपनी नई राष्ट्रीय टीम सामने रख दी है। इस टीम में अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और चुनावी जरूरतों का ऐसा मिश्रण तैयार किया गया है, जिसमें पार्टी के पुराने दिग्गजों से लेकर नए चेहरों तक को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन इस पूरी कवायद में दो फैसले राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। एक तो अमित मालवीय को आईटी सेल प्रमुख की जिम्मेदारी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर भाजपा के शीर्ष संगठन में वापसी हुई है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/uscirf-vs-rss-allegations-mandate-and-the-litmus-test-for-india-us-relations" target="_blank">USCIRF बनाम RSS: आरोप, अधिकार-सीमा और भारत-अमेरिका संबंधों की अग्निपरीक्षा</a></h3><div>उन्होंने कहा कि आईटी और सोशल मीडिया सेल की कमान अब छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को दी गई है। वहीं अनिल बलूनी मीडिया प्रभारी की अपनी जिम्मेदारी पर कायम हैं। यानी भाजपा ने डिजिटल मोर्चे पर चेहरे में बदलाव किया है, लेकिन मीडिया प्रबंधन के मौजूदा ढांचे में निरंतरता बनाए रखी है। इस बदलाव को केवल संगठनात्मक फेरबदल मानना मुश्किल है। यह संकेत है कि नितिन नबीन डिजिटल और राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई में नई रणनीति और नए चेहरों के साथ उतरना चाहते हैं। साथ ही चूंकि नितिन नबीन छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रभारी रह चुके हैं ऐसे में वह जानते हैं कि उस राज्य के किस नेता की कार्यक्षमता का उपयोग कहां पर करना पार्टी के लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि 16 राष्ट्रीय सचिवों की सूची में भी व्यापक क्षेत्रीय संतुलन दिखाई देता है। कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, डॉ. भोला सिंह, डॉ. प्रदीप वर्मा, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, आम आदमी पार्टी से भाजपा में आये डॉ. संदीप पाठक और फांगनॉन कोन्याक, संगीता यादव, अनिल एंटनी, डॉ. एम. वेंकटेशन, मनोज तिग्गा, सिद्धार्थ शंभू, डॉ. स्वदेश सिंह, मृगांका देब बर्मन, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। इनमें दक्षिण, पूर्वोत्तर, पूर्वी भारत, हिंदी पट्टी और शहरी राजनीतिक पृष्ठभूमि, सभी को जगह मिली है। नई टीम के अन्य हिस्से भी राजनीतिक संकेत दे रहे हैं। केंद्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुग और केंद्रीय कार्यालय सचिव महेंद्र पांडे बनाए गए हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>वन्दे मातरम् विवाद पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी गलतियों से सीख नहीं पा रही है। बार-बार वह बीजेपी को फ्रंट फुट पर आकर बल्लेबाजी करने का मौका दे रही है। वंदे मातरम का विरोध करना साफ तौर पर यह देश के खिलाफ है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति कर रही है कांग्रेस एक समुदाय के लोगों के लिए ही आगे बढ़ रही है। यह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। जनता सब देख रही है। राहुल गांधी को इस बात को भी समझना होगा कि इस देश में हर वर्ग के लोग हैं और जो भी कानून संसद द्वारा पारित किया जाते हैं। उसका सम्मान करना चाहिए क्योंकि आप संविधान का किताब लेकर लगातार लोगों के बीच जाते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/bjp-to-woo-gen-z-with-a-new-team-is-congress-on-the-back-foot-over-vande-mataram</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Punjab Politics में शुरू हुआ गजब का खेल, उधर संसद में चल रहा है आंकड़ों का गेम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/remarkable-game-has-begun-in-punjab-politics-while-a-numbers-game-is-playing-out-in-parliament]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पंजाब की राजनीति और संसद में चल रहे हंगामे पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। पंजाब को लेकर हमने नीरज दुबे पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि पंजाब में फिलहाल के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो कई चीजें एक साथ चल रही है। सबसे पहले उन्होंने कहा कि हमने देखा कि सुखबीर बादल जो कि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष हैं, उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होती है। इसके बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक बार फिर से पंजाब में अकाली दल और भाजपा एक साथ आ सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों में पुराना गठबंधन रहा है। हालांकि, किसान आंदोलन के समय दोनों अलग-अलग हुए थे। लेकिन अब ऐसा लगता है कि अकाली दल को यह समझ में आ गया है कि बिना गठबंधन उसे फायदा होने वाले नहीं है। इसलिए शायद अब भाजपा के साथ एक बार फिर से समीकरण को बैठाने की कोशिश की जा रही है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि पंजाब की परिस्थितियों को देखें तो ग्रामीण क्षेत्रों में बीजेपी के लिए स्थितियां अभी भी अनुकूल नहीं है। यहां पर अकाली दल मजबूत है। दूसरी ओर अकाली दल को बीजेपी की वजह से शहरी वोट मिल जाते हैं। ऐसे में दोनों गठबंधनों के लिए यह पहले कारगर हुआ करता था। एक बार फिर से कुछ इसी तरीके की उम्मीद की जा रही है। प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद अकाली दल की स्थितियां सामान्य नहीं है। पार्टी में टूट भी हुई। सुखबीर सिंह बादल पर बेअदबी का आरोप भी लगा। तो ऐसे कई मामले हुए जो कि अकाली दल के लिए काफी चुनौतियां लेकर आई। हालांकि अब अकाली दल अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाना चाहता है और शायद इसी वजह से भाजपा के साथ एक बार गठबंधन की फिर से चर्चा तेज हो गई है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/daljit-singh-cheema-demands-white-paper-on-punjab-employment-crisis" target="_blank">Punjab में रोजगार स्थिति पर श्वेत पत्र लाए AAP सरकार: SAD नेता Daljit Singh Cheema</a></h3><div>कांग्रेस को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि भले ही राहुल गांधी कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर अच्छी बातें कर रहे हैं लेकिन अमरिंदर सिंह ने कह दिया है कि वह भाजपा के साथ है और आगे भी रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के भीतर मचे घमासान पर भी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए स्थितियां अनुकूल दिखाई नहीं दे रही है। कांग्रेस आज से तीन-चार महीने पहले पंजाब में सत्ता के करीब दिखाई दे रही थी क्योंकि आम आदमी पार्टी का कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा है। लेकिन अब कांग्रेस के भीतर आपस में ही गुटबाजी शुरू हो गई है। चरणजीत सिंह चन्नी और वहां के प्रदेश अध्यक्ष राजा वरिंग के बीच लगातार आर पार चल रहा है। भूपेश बघेल प्रभारी के तौर पर आज तक सफल नहीं हो पाए हैं। ऐसे में पंजाब में कितने सफल होंगे इस पर सब की निगाहें रहने वाली है।&nbsp;</div><div><br></div><div>संसद को लेकर नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि सरकार पूरी तरीके से डीलिमिटेशन बिल को लेकर आगे बढ़ रही है। लगातार अमित शाह इसी को लेकर बैठक कर रहे हैं। विपक्ष उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से विपक्ष उनके बयान की मांग कर रहा है। हालांकि सरकार इसको लेकर बहुत ज्यादा प्रेशर में नहीं है। सरकार को जो बिल जरूरी लग रहे हैं, उसे वह पास कर ले रही है। हालांकि, लोकतंत्र के लिए बिल्कुल अच्छी चीज नहीं है। बिना बहस के कोई बिल पास हो जाए यह ठीक नहीं लगता। इसीलिए सरकार डीलिमिटेशन बिल और महिला आरक्षण बिल को लेकर एक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है ताकि एक अच्छा संदेश जाए। हमने देखा किस तरीके से सरकार की ओर से कांग्रेस नेताओं से संपर्क किया गया। हालांकि कांग्रेस नेता अभी भी अपने रुख पर अड़े हुए हैं। देखना है कि अगले सप्ताह में किस तरीके से संसद में कार्यवाही हमें देखने को मिलती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 15:56:39 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/remarkable-game-has-begun-in-punjab-politics-while-a-numbers-game-is-playing-out-in-parliament</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: PM ने गाली देने वालों को किया माफ, क्या Gen Z भी अब मोदी मोदी के नारे लगाएंगे?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/pm-forgives-those-who-hurled-abuse-will-gen-z-also-start-chanting-modi-modi-now]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माफी वाले वीडियो और संसद में जारी हंगामे पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे से हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जिन लोगों ने उन्हें गाली दिया था उनको माफ किए जाने पर सवाल पूछा। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाते हुए इन बच्चों को माफ किया। बच्चे इस देश के भविष्य हैं। लेकिन बच्चों को भी अपने संस्कार खुद के भीतर रखना चाहिए।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल आधी रात को इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल रहे हैं। नीरज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री को पता है कि जो जेन जी हैं, वह किस समय सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव होते है। इसलिए वह रात को 11:00 बजे अपना वीडियो डालते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके से इस प्रदर्शन के बाद जो विशाल हृदय दिखाया है, वह अपने आप में काबिले तारीफ है। प्रधानमंत्री ने सभी को माफ कर दिया। हालांकि उनके मां तक को गाली दिया गया था।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/no-regular-fir-registered-against-minor-who-used-abusive-language-towards-pm-modi-delhi-police" target="_blank">PM Modi को अपशब्द कहने वाली नाबालिग पर नहीं दर्ज हुई रेगुलर FIR, दिल्ली पुलिस का खुलासा, पीएम की माफी के बाद मिली नई जिंदगी</a></h3><div>नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरीके से छात्रों पर जो लाठी चार्ज हुआ या फिर जो पैलेट गन चला, उसको लेकर जो हंगामा हो रहा है इस पर भी सोचने की जरूरत है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरीके से छात्र संसद तक पहुंच गए थे, अगर यह प्रवेश कर जाते तो पूरे विश्व में किस तरीके का भारत की तस्वीर जाती। यह अपने आप में शर्मनाक रहता। उन्होंने कहा कि जो लोग आज लाठी चार्ज या फिर पैलेट गन को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, वह उस दिन साफ तौर पर कहते कि इस देश का सुरक्षा व्यवस्था खत्म हो गया है तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। लेकिन कहीं ना कहीं इसको लेकर सियासत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी मौके पर मौजूद होता है, वही पैलेट गन या फिर किसी तरीके के कार्यवाही का आदेश देता है। उससे गृह मंत्री या प्रधानमंत्री का कोई लेना देना नहीं होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>हमने संसद में जारी हंगामे को लेकर भी नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि देखिए ऐसा है कि हम बार-बार कहते रहे हैं कि संसद सत्र में विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करता है और उसमें उसे कामयाबी भी मिलती है। फिलहाल जो छात्र आंदोलन हुआ, उसमें विपक्ष को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता दिख रहा है। इसलिए वह संसद को बार-बार डिस्टर्ब करने की कोशिश कर रहे हैं। संसद को डिस्टर्ब करने का एक बड़ा मकसद डीलिमिटेशन बिल आना है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:45:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/pm-forgives-those-who-hurled-abuse-will-gen-z-also-start-chanting-modi-modi-now</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Sonam Wangchuk को मिला विपक्ष का साथ, क्या Monsoon sesssion है वजह?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/sonam-wangchuk-gains-opposition-support-is-the-monsoon-session-the-reason]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन और मानसून सत्र पर बातचीत की है। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। नीरज कुमार दुबे ने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा प्रदर्शन पर कहा कि यह प्रदर्शन बिना किसी एजेंडा के है। इसका कोई नेतृत्व करने वाला नहीं है। ऐसे में इस प्रोटेस्ट का क्या होगा, यह हमें देखना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार से अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है, संसद सत्र आने के साथ ही विपक्ष के लोग अब मंच साझा करने लगे हैं। ऐसे में क्या सरकार पर कोई दबाव बनता है इस पर भी हम सब की निगाहें रह सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>हालांकि, आज कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और धर्मेंद्र प्रधान को हटाने समेत अपनी मांगें उनके सामने रखीं। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ट्वीट किया कि आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से हमारी बातचीत चल रही है। बैठक अच्छे माहौल में हुई। उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ शुरुआती बातचीत विस्तार से हुई और शाम करीब 4 बजे उन्होंने मुझे एक लिखित ज्ञापन सौंपा। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपना धरना खत्म करने और हालात सामान्य करने में प्रशासन की मदद करने का आग्रह किया है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/scientist-or-activist-the-real-story-of-sonam-wangchuk" target="_blank">पिता का अनशन तुड़वाने दिल्ली से खुद इंदिरा चलकर आईं, क्या है सोनम वांगचुक का असली सच?</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि हां, नीट पेपर लीक का मुद्दा बहुत बड़ा था। लेकिन सरकार ने बाद में जो परीक्षा हुई उसे सफलतापूर्वक करने में कामयाबी हासिल की है। लेकिन यह दोबारा ना हो, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही अगर जो लोग भी नीट पेपर लीक में दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ रही थी। अगर उन्हें कुछ हो जाता तो वह सरकार पर जिम्मेदारी आ जाती। ऐसे में कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन ने जो कदम उठाया वह उस वक्त की जरूरत बन गई थी।&nbsp;</div><div><br></div><div>मानसून सत्र को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार का सत्र हंगामेदार रह सकता है। कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर विपक्ष सरकार को घरने की कोशिश करेगा और साथ ही साथ उन्होंने कहा कि यह मानसून सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक रहने वाला है क्योंकि इसमें ऐसे कई बिल सामने आएंगे जो की सरकार के लिए बेहद जरूरी होंगे। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार-पलटवार का तो दौड़ रहेगा ही, साथ ही साथ हम यह भी देखेंगे की कई विपक्षी दलों के सांसद एनडीए का हिस्सा बनेंगे जबकि कुछ विधेयकों पर इंडिया गठबंधन में भारी फुट भी पड़ सकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 18:42:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/sonam-wangchuk-gains-opposition-support-is-the-monsoon-session-the-reason</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bankipur, Datiya में BJP ने कोई गलती की या विवाद खड़ा करना पार्टी की रणनीति थी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/did-the-bjp-make-mistake-in-datiya-or-was-stirring-up-a-controversy-part-of-the-party-strategy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभा साक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने उत्तर प्रदेश में राम मंदिर और भाजपा से जुड़े विवाद साथ ही साथ उपचुनाव को लेकर टिकट बंटवारे को लेकर बवाल और संसद सत्र पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे मौजूद रहे। राम मंदिर को लेकर नीरज कुमार ने कहा कि इससे आस्था कमजोर होती है। लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हां, आस्था के नाम पर जो खिलवाड़ हुआ है, उसकी वजह से राजनीतिक तौर पर भाजपा का नुकसान हो सकता है और यही कारण है कि हम देख रहे हैं कि फिलहाल योगी आदित्यनाथ एग्रेसिव तरीके से हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के लिए संघर्ष किया, उन्हीं को ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंप गई थी। लेकिन व्यवस्थाओं को वह लोग संभालने में नाकाम रहे तभी इस तरह की चीज हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अब लोगों का ट्रस्ट जीतने के लिए फिर से कम कर रहा है। सरकार और प्रशासन में लगातार दोबारा इस तरह की चीज ना हो, उस दिशा में काम करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष की ओर से जिस तरीके से बयान आ रहा है यह सिर्फ और सिर्फ राजनीति है। क्योंकि हमने देखा है कि विपक्ष राम को काल्पनिक मानता था और वह अब राम मंदिर के लिए बोल रहा है। उन्होंने कहा कि जिसको राम में भरोसा नहीं, वह इस तरह की बातें करें तो यह शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि हां, राम मंदिर बना है और ऐसे में मंदिरों का प्रशासन जो है, वह सरकार के पास नहीं है लेकिन इस घटनाक्रम से सरकार सचेत हुई है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/suvendu-adhikari-makes-a-major-statement-regarding-the-kolkata-airport-mosque" target="_blank">Kolkata Airport मस्जिद पर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, कहा- National Security सबसे ऊपर।</a></h3><div>बांकीपुर उपचुनाव के लिए उम्मीदवार के बदलाव और दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने पर भी हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि बांकीपुर से उम्मीदवार बनाए गए अभिषेक को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही है, जाहिर सी बात है कि इसमें पार्टी की चूक हुई है। अगर अभिषेक सिन्हा किसी विवाद से जुड़े थे, उनका परिवार किसी विवाद से जुड़ा था तो फिर टिकट देने से पहले पार्टी ने ऐसा जांच क्यों नहीं किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी समय रहते सचेत हो गई, उम्मीदवार को बदलकर बहुत बड़े नुकसान होने से बचा लिया गया। दूसरी ओर नरोत्तम मिश्रा को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि जिस तरीके की चीजें दतिया में हुई है, वह बीजेपी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। नरोत्तम मिश्रा बड़े नेता है लेकिन चुनाव हर कोई लड़ना चाहता है। किसी को टिकट न मिले इसकी वजह से उसको दर्द होता है। समर्थकों का उत्साह काम होता है। लेकिन समर्थक इस तरह की चीजें ना करें, इसको रोकना उस नेता के जिम्मेदारी है जिसके लिए समर्थक सड़क पर निकले हैं। नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और उम्मीद है कि वह पार्टी के लिए लगातार खड़े रहेंगे।</div><div><br></div><div>संसद सत्र को लेकर नीरज दुबे ने कहा की उम्मीद है कि यह हंगामेदार हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर सरकार की ओर से भी कई अहम बिल लाने की तैयारी है। देखना दिलचस्प होगा कि संसद का सत्र कैसा होता है। लेकिन हमारी नजर संसद का सत्र शुरू होने से एक-दो दिन पहले आने वाली खबरों पर भी होगी कि क्या कोई ऐसी खबर तो नहीं आ रही है जिसकी वजह से संसद में और ज्यादा बवाल बढ़ सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:56:53 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/did-the-bjp-make-mistake-in-datiya-or-was-stirring-up-a-controversy-part-of-the-party-strategy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Rahul Gandhi के नेतृत्व में कैसा होगा Mamata, Thackeray, Sharad Pawar का भविष्य]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-will-the-future-hold-for-mamata-thackeray-and-sharad-pawar-under-rahul-leadership]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने अलग-अलग राजनीतिक विषयों पर चर्चा की। हमने राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के नतीजे पर भी प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से बातचीत की है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी में मची में उथल-पुथल पर भी नीरज दुबे से सवाल पूछे। नीरज दुबे ने मोदी सरकार के मिशन 360 प्लस पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हमने देखा कि कैसे बजट सत्र के दौरान सरकार का बिल गिर गया था। लेकिन उसे सरकार ने अपने दिल पर ले लिया था और यही कारण है कि अब मानसून सत्र या उससे पहले जो बिल गिरा था, उसको सरकार हर हाल में पास कराने की तैयारी में है और यही कारण है कि अलग-अलग पार्टियों में सांसदों को लेकर भगदड़ मची हुई है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने दावा किया कि सरकार उस बिल में कुछ संशोधन भी करने जा रही है। इसका मतलब साफ है कि एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके भी सरकार के साथ बिल के पक्ष में खड़ी हो सकती है। फिलहाल एमके स्टालिन राहुल गांधी से लगातार दूरी बनाए हुए हैं। कांग्रेस और डीएमके के बीच रिश्ते लगातार तनाव भरे बने हुए है। तृणमूल कांग्रेस में टूट का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके सांसद पहले ही एक पार्टी में विलय की घोषणा कर चुके हैं और एनडीए के साथ खड़े रहने की बात कह चुके हैं। वहीं शिवसेना यूबीटी परेशान है। उसके भी सांसदों को एनडीए की ओर से साधने की कोशिश की जा रही है। यह भी अपने आप में बड़ी वजह है कि फिलहाल राजनीति में उथल-पुथल जबरदस्त मची हुई है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rahul-gandhi-congratulates-cm-vijay-says-i-stand-with-you-a-new-political-equation-in-tamil-nadu" target="_blank">राहुल गांधी ने CM Vijay को दी बधाई, बोले 'मैं आपके साथ खड़ा हूँ', तमिलनाडु में नया समीकरण?</a></h3><div>वहीं, ओमप्रकाश राजभर के दावों से जुड़े सवाल पर नीरज दुबे ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि समाजवादी पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट चुनाव से पहले होने जा रही है। उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं। अगर चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार होती है उसके बाद सपा में टूट की संभावना बन सकती है। लेकिन अभी इसकी संभावना बेहद कम है। कई सपा के सांसद और विधायक ऐसे हैं जो अपने करीबियों को टिकट दिलवाना चाहते हैं। ऐसे में वह फिलहाल किसी भी कीमत पर टूटने को तैयार नहीं होंगे। हां, यह कहा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी में अभी अंतर्कलह है। फिलहाल रामगोपाल यादव हाशिए पर चल रहे हैं जबकि शिवपाल यादव को महत्व मिलने लगा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में अभी देखें तो एनडीए को ताकत मिल रही है। इंडिया ब्लॉक कमजोर हो रहा है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि हाल में ही हमने इंडिया ब्लॉक की एकजुटता को लेकर एक बैठक देखी थी। लेकिन उस बैठक के कुछ ही दिनों बाद झारखंड में राज्यसभा के चुनाव हुए इंडिया ब्लॉक का कुनबा पूरी तरीके से बिखर गया। एनडीए समर्थित उम्मीदवार चुनाव जीत गए और इंडिया ब्लॉक के राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हो गए। राहुल गांधी ने अपने भाषण को जारी कर दिया। इससे भी इंडिया ब्लॉक के नेताओं में उनको लेकर नाराजगी होने लगी है। वर्तमान में देखी तो इंडिया ब्लॉक के नेता कांग्रेस के मोनोपोली को बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में देखना होगा कि इंडिया ब्लॉक फिलहाल कितने दिन टिक पाता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:40:20 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-will-the-future-hold-for-mamata-thackeray-and-sharad-pawar-under-rahul-leadership</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Mamata Banerjee, Abhishek Banerjee, TMC से किसी को सहानुभूति क्यों नहीं हो रही?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-no-one-sympathizing-with-mamata-banerjee-abhishek-banerjee-or-the-tmc]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने तृणमूल कांग्रेस में जारी उठापटक पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। इसके अलावा हमने इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन की हुई बैठकों पर भी चर्चा की। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे ने सिर्फ वहां की राजनीति को प्रभावित नहीं किया है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी परिवर्तन के दौर में पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी का भी कांग्रेस के लिए हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी भी कोई विचारधारा के नाम पर नहीं बनी थी। सिर्फ लेफ्ट की सरकार को हटाना तृणमूल कांग्रेस का मकसद था और आज जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में नहीं है तो वह पार्टी अब पूरी तरीके से टूटती हुई दिखाई दे रही है। इसका एक कारण यह भी है कि 15 सालों में तृणमूल सरकार के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और शायद अब वहां की जनता तृणमूल कांग्रेस से कोई बदला लेने के मूड में दिखाई दे रही है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने इतने सालों तक राज किया है तो इसका बड़ा कारण यह भी है कि कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस ने द्वारा धमका कर वोट नहीं देने दिया जिसका फायदा हमेशा उसे पार्टी को हुआ और वह पार्टी सरकार में बनी रही।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/tmc-rebel-mps-merge-with-ncpi-political-crisis" target="_blank">गुमनाम पार्टी में क्यों शामिल हुए TMC के नामी सांसद? दलबदल विरोधी नारे वाला दल क्यों बना तृणमूल के बागियों का नया ठिकाना?</a></h3><div>दुबे ने कहा कि आज तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के साथ उसके विलय की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन कभी यही ममता बनर्जी थीं जो कांग्रेस को भाव नहीं देती थीं। यही ममता बनर्जी थी जो 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कहा करती थीं कि कांग्रेस को तो 40 सीटे भी नहीं आएंगी। लेकिन आज बदली हुई परिस्थितियों में ममता बनर्जी मजबूर हुई हैं। ममता बनर्जी के साथ दिखाई देने वाले नेताओं को भी आज विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है और यह साफ तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को यह लग रहा है कि अगर वह ममता बनर्जी के साथ या अभिषेक बनर्जी के साथ खड़े रहे तो उनके लिए जनता के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि विपक्षी एकता को बहुत ज्यादा नुकसान न पहुंचे इसलिए यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें इंडिया गठबंधन के तमाम नेता शामिल हुए थे। लेकिन आप देखिए कि इस बैठक में उमर अब्दुल्ला शामिल हुए थे। लेकिन बैठक से निकलने के बाद ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। इसके अलावा नीरज दुबे ने कहा कि उस बैठक में जितने भी दल शामिल हुए थे, उन सब ने कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ा। कांग्रेस पर कई आप भी लगाए हैं। वहीं, एनडीए की बैठक को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि जब भी दिल्ली में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है और अलग-अलग राज्यों से नेता दिल्ली आते हैं। तब इस तरह की बैठकें होती रहती हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सहयोगों को हमेशा साथ रखने की कोशिश करते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है जो चुनावी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:29:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-no-one-sympathizing-with-mamata-banerjee-abhishek-banerjee-or-the-tmc</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: ममता बनर्जी ने जो बोया वो काटा, MLAs के बाद MPs का विद्रोह TMC को खत्म कर देगा!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/mamata-banerjee-is-reaping-what-she-sowed-the-rebellion-by-mps]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह के. अन्नामलाई के भाजपा से इस्तीफे, टीएमसी विभाजन और इंडिया ब्लॉक की बैठक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इसा दौरान प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे मौजूद रहे। अन्नामलाई को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नया भूचाल उस समय आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देकर अपने नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा कर दी। यह फैसला तमिलनाडु की जमी हुई राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देने वाला एक बड़ा संदेश है। अन्नामलाई ने जिस साफगोई, साहस और वैचारिक दृढ़ता के साथ अपने फैसले को सामने रखा है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब किसी दल के सीमित दायरे में नहीं, बल्कि तमिल समाज की व्यापक आकांक्षाओं के प्रतिनिधि के रूप में उभरना चाहते हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने भाजपा नेतृत्व के सामने दो स्पष्ट विकल्प रखे थे। एक तो उन्हें पर्याप्त स्वायत्तता और अधिकारों के साथ कम से कम सात वर्षों तक प्रदेश नेतृत्व दिया जाए, या फिर उन्हें स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने दी जाए। यह मांग उनके आत्मविश्वास और दूरदृष्टि दोनों को दर्शाती है। साथ ही इस्तीफे का ऐलान करने से पहले दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से उनकी मुलाकात तथा पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें मनाने की कोशिश इस बात का प्रमाण है कि अन्नामलाई की अहमियत से भाजपा नेतृत्व वाकिफ है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/fracture-in-trinamool-congress-and-mamatas-growing-concerns" target="_blank">तृणमूल कांग्रेस में टूट और ममता की बढ़ती चिन्ताएं</a></h3><div>दुबे ने कहा कि वैसे तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति भी अन्नामलाई के लिए अवसर लेकर आई है। हालिया विधानसभा चुनावों में द्रविड दलों को झटके लगे और अभिनेता विजय की पार्टी ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की। इससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से बाहर विकल्प तलाश रही है। अन्नामलाई का मानना है कि राष्ट्रीय दलों के लिए यहां सीमित राजनीतिक जगह है, इसलिए एक मजबूत क्षेत्रीय विकल्प ही जनता की आकांक्षाओं को सही दिशा दे सकता है। उनकी यह समझ राजनीतिक रूप से बेहद व्यावहारिक और दूरदर्शी मानी जा रही है। बहरहाल, यह स्पष्ट है कि अन्नामलाई ने केवल पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा देने की चुनौती स्वीकार की है। उनकी राजनीति में साहस है, वैचारिक स्पष्टता है और बदलाव की बेचैनी भी है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों के भीतर जिस तेजी से घटनाक्रम बदला है, उसने तृणमूल कांग्रेस और उसकी संस्थापक ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी बंगाल की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाली तृणमूल कांग्रेस आज अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब खुली बगावत में बदल चुका है। महज 13 दिनों के भीतर घटनाओं की ऐसी श्रृंखला सामने आई, जिसने 28 वर्ष पुरानी पार्टी को विभाजन की कगार पर पहुंचा दिया।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की स्थापना ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर की थी। इसके बाद उन्होंने वाम मोर्चे के लंबे शासन के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा किया और 2011 में ऐतिहासिक जीत हासिल कर बंगाल की सत्ता पर कब्जा जमाया। 2016 और 2021 के चुनावों में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली हार ने पार्टी की राजनीतिक जमीन हिला दी। सबसे बड़ा झटका यह था कि ममता बनर्जी को अपने पारंपरिक गढ़ भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही विधानसभा में टीएमसी की संख्या घटकर केवल 80 विधायकों तक सिमट गई।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसका स्पष्ट वैचारिक आधार न होना रहा है। वाम विरोध की राजनीति ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया, लेकिन सत्ता मिलने के बाद संगठनात्मक एकता कमजोर पड़ती गई। अब जब चुनावी हार ने पार्टी की शक्ति कम कर दी है, तो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और उत्तराधिकार की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। फिर भी ममता बनर्जी को राजनीति से बाहर मान लेना जल्दबाजी होगी। बंगाल की राजनीति में उनका संघर्ष, जनाधार और राजनीतिक अनुभव अभी भी उन्हें एक मजबूत नेता बनाता है। लेकिन यह भी सच है कि तृणमूल कांग्रेस अब अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है और आने वाले समय में यह तय होगा कि पार्टी इस संकट से उबर पाएगी या बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:39:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/mamata-banerjee-is-reaping-what-she-sowed-the-rebellion-by-mps</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: West Bengal में कानून का राज स्थापित करने में कैसे सफल हुए CM Suvendu Adhikari]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-cm-suvendu-adhikari-succeeded-in-establishing-the-rule-of-law-in-west-bengal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े मुद्दों के अलावा उत्तर प्रदेश की राजनीति संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। उन्होंने कहा कि शुभेन्दु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के गुंडाराज पर लगाम लगती दिखाई देने लगी है। इसका सबसे बड़ा फायदा झारखंड समेत सीमावर्ती राज्यों और पश्चिम बंगाल के बीच सफर करने वाले ट्रक चालकों को होता दिख रहा है। वर्षों से जिन मार्गों पर ‘भाइपो टैक्स’ और ‘डंडा टैक्स’ के नाम पर टीएमसी समर्थित गुंडों द्वारा अवैध वसूली की जाती थी, वहां अब माहौल तेजी से बदल रहा है।&nbsp;</div><div><br></div><div>दुबे ने कहा कि ट्रक चालकों का कहना है कि जो लोग पहले बांस की बैरिकेडिंग लगाकर जबरन उगाही करते थे, वह अब कार्रवाई के डर से अपने बिलों में छिप गए हैं। सीमा पार करते समय नकद वसूली, धमकी, घंटों रोककर उत्पीड़न और वाहन को क्षति पहुँचाने जैसी घटनाओं में अचानक कमी आई है, जिससे लंबे समय बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमा से गुजरने वाले वाणिज्यिक वाहनों के चालकों के लिए पिछले कई दशकों से सफर केवल लंबी दूरी तय करने का मामला नहीं था, बल्कि रास्ते भर अवैध वसूली, धमकियों और देरी का सामना करने की मजबूरी भी थी। सीमा पार करते ही कई ट्रक चालकों को गिरोहों द्वारा लगाए गए अवैध नाकों, बांस की बैरिकेडिंग और डंडों से लैस लोगों का सामना करना पड़ता था। इन स्थानों पर नकद वसूली आम बात थी और विरोध करने पर चालकों को घंटों रोके रखना, गालियां देना, गाड़ी के शीशे तोड़ देना या टायर पंचर कर देना जैसी घटनाएं भी सामने आती थीं। अब हालात में अचानक बदलाव दिखाई दे रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/gangster-akash-singh-was-paraded-on-the-streets-in-his-underwear-by-the-bengal-police" target="_blank">Yogi राज की तरह Bengal में भी गैंगस्टरों पर टूट रहा पुलिस का कहर, Gangster Akash Singh को Police ने कच्छे में सड़कों पर घुमाया</a></h3><div>उन्होंने कहा कि बहरहाल, राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और गुंडाराज पर सख्ती से अंकुश लगाने की दिशा में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी द्वारा उठाए गए कदमों की आम लोगों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच व्यापक सराहना हो रही है। ट्रक चालकों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय बाद उन्हें सड़कों पर भयमुक्त माहौल महसूस हो रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रशासनिक सख्ती जारी रही तो पश्चिम बंगाल में व्यापार, परिवहन और निवेश का माहौल और बेहतर होगा तथा आम नागरिकों का शासन व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।</div><div><br></div><div>उत्तर प्रदेश की राजनीति पर दुबे ने कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने एक बार फिर बसपा प्रमुख मायावती के करीब जाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चूंकि कांग्रेस इस समय समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है, इसलिए उसके शीर्ष नेता खुलकर मायावती से संपर्क नहीं कर सकते थे। ऐसे में कांग्रेस से जुड़े कुछ दलित नेताओं के माध्यम से मायावती तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन मायावती ने इस प्रयास को पूरी तरह विफल कर दिया। लखनऊ स्थित अपने आवास पर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को उन्होंने मिलने का समय तक नहीं दिया। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए यह स्थिति इसलिए भी असहज हो गई क्योंकि उसी समय राहुल गांधी रायबरेली और अमेठी के दौरे पर थे तथा दलित समाज से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे। हम आपको याद दिला दें कि राहुल गांधी पहले भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने मायावती को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि उन्होंने मायावती को मुख्यमंत्री पद तक की पेशकश की थी, लेकिन बसपा प्रमुख ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया और लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन को अपेक्षाकृत अच्छा परिणाम मिला। अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस के भीतर फिर यह सोच मजबूत होती दिखाई दे रही है कि बसपा को साथ लाए बिना भाजपा के खिलाफ व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करना कठिन होगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:30:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-cm-suvendu-adhikari-succeeded-in-establishing-the-rule-of-law-in-west-bengal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Yogi, Dhami, Sawant, Bhupendra Patel क्या फिर से सत्ता में वापसी कर पाएँगे?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-yogi-dhami-sawant-and-bhupendra-patel-be-able-to-return-to-power]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने आगे की राजनीति और होने वाले चुनावों पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी नतीजे के बाद भाजपा गदगद है। बीजेपी का उत्साह चरम पर है और आने वाले उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर के चुनाव में भी बीजेपी के इस उत्साह को हम देख सकते हैं। बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाली है क्योंकि 2027 में कई ऐसे राज्यों में चुनाव है जहां बीजेपी सत्ता में है और वहां पर सत्ता बनाए रखने की चुनौती उसके पास रहने वाली है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने यह भी कहा कि बीजेपी एक चुनावी मिशन की तरह काम करती है। एक राज्य में चुनाव संपन्न होने के बाद वह अपने अगले लक्ष्य को लेकर तैयारियां शुरू कर देती है। उन्होंने इस दावा किया कि जो सूत्र बता रहे हैं उसके मुताबिक बीजेपी पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा, गुजरात जैसे राज्यों के लिए चुनावी रणनीति बनाने की शुरुआत कर चुकी है और वहां पर कार्यकर्ताओं कोई कलेक्शन देश देने की कोशिश की जा रही है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/cm-yogi-shift-systemplan-for-namaz" target="_blank">'प्यार से नहीं माने तो दूसरा तरीका अपनाएंगे...', सड़कों पर Namaz को लेकर CM Yogi का 'Shift System' प्लान</a></h3><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता की कमान संभालते ही चुनावी वादों पर अमल की दिशा में कदम बढ़ाने तो शुरू कर ही दिये हैं साथ ही राज्य की राजनीति और प्रशासन में तेज बदलावों का दौर भी शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें राज्य की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को उनके गढ़ में पराजित कर सत्ता तक पहुंचे सुवेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के केवल 48 घंटे के भीतर लगभग डेढ़ दर्जन बड़े निर्णयों की घोषणा कर यह संकेत दे दिया कि नई सरकार प्रशासनिक, राजनीतिक और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर व्यापक बदलाव चाहती है।</div><div><br></div><div>नई सरकार के शुरुआती फैसलों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर सख्ती प्रमुख रही। सरकार ने स्पष्ट किया कि सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर नमाज की अनुमति नहीं होगी तथा धार्मिक गतिविधियां निर्धारित परिसरों तक सीमित रहेंगी। कोलकाता के रेड रोड क्षेत्र में सार्वजनिक नमाज पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी नियंत्रण लगाया गया है। सरकार ने पत्थरबाजी की घटनाओं पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के साथ पूर्वी भारत में अपना वर्चस्व स्थापित करने के बाद भाजपा की नजर अब 2027 में होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है, जिनमें गुजरात, गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश प्रमुख हैं। पार्टी ने इन राज्यों में चुनाव की तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अगले वर्ष के चुनावी अभियान के लिए जमीनी स्तर पर काम प्रारंभ कर दिया है। भाजपा के एक सूत्र ने कहा, “पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद अब पार्टी का ध्यान अगले वर्ष सात राज्यों में होने वाले चुनावों पर केंद्रित हो गया है। कुछ स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जिन्हें अब और तेज किया जाएगा।” पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश का दौरा कर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं और इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों व नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की है। वह जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करेंगे, जहां अगले वर्ष गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के साथ चुनाव होने हैं। हम आपको बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा की सरकार है, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश भाजपा की गतिविधियों का केंद्र रहने वाला है। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, तमाम केंद्रीय मंत्रियों सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अब लगातार यूपी के दौरे होते रहेंगे जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बना रहे। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में खासा नुकसान उठाना पड़ा था इसलिए भाजपा नेतृत्व उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को लेकर खासा सतर्क है। माना जा रहा है कि यूपी के मामलों को सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देखेंगे ताकि राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा की हैट्रिक में कोई कमी नहीं रह जाये।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 19:16:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-yogi-dhami-sawant-and-bhupendra-patel-be-able-to-return-to-power</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: भगवा उफान, विजय का तूफान, कांग्रेस का घमासान क्या राजनीतिक संदेश दे रहे हैं?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/saffron-surge-storm-of-vijay-congress-internal-turmoil-what-political-messages-are-they-conveying]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति और असम तथा तमिलनाडु के मुद्दे पर चर्चा की। हमने साफ तौर पर नीरज दुबे से पूछा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए चुनौतियां क्या है? नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना है। चुनाव तक तो पश्चिम बंगाल में कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन उसके बाद जो हिंसा हुई है उसको निष्कर्ष तक पहुंचाना शुभेंदु अधिकारी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। नीरज दुबे ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में उसे काले इतिहास को पीछा छोड़कर पश्चिम बंगाल को तरक्की के रास्ते पर आगे ले जाना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में सरकार के लिए विकास के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी रहने वाली है। हालांकि, भाजपा सरकार की पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा भी होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल के नतीजे काफी मायने रखते हैं। यही कारण है कि अमित शाह ने भी इसको लेकर साफ तौर पर संकेत दे दिया घुसपैठियों को बाहर करना बीजेपी की भी प्राथमिकता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में जब बीजेपी की सरकार बनी है। ऐसे में घुसपैठियों को बाहर करने की भी कोशिश बीजेपी की ओर से की जा सकती है। शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो जनता के प्रति अपने कृतज्ञता व्यक्त की, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए कितना महत्वपूर्ण है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/fortunes-of-jhalmuri-vendor-who-have-become-medium-for-political-discourse-are-set-to-turn-around" target="_blank">राजनीतिक विमर्श का जरिया बनी झालमुढ़ी वालों के फिरेंगे दिन</a></h3><div>उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भी हमने देखा कि शुभेंदु अधिकारी लगातार योगी मॉडल फॉलो करने की बात कर रहे थे, ऐसे में शुभेंदु अधिकारी पर फिलहाल पूरे देश की नजर रहने वाली है कि वह किस तरीके से पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ाते हैं। इससे साथ ही उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जो कर रहीं है वह सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए कर रही हैं। अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए कर रही है और 2029 में इंडिया ब्लॉक के भीतर किस तरीके से उठा पटक देखने को मिलेगी यह भी अभी से ही साफ तौर पर देखने को मिल गया है। नीरज दुबे ने कहा कि भले ही ममता बनर्जी फिलहाल इंडिया ब्लॉक की बात कर रही हैं लेकिन उन्होंने चुनाव से पहले कांग्रेस को अपने आसपास भटकने नहीं दिया था चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव हो। कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी ने गठबंधन से सीधे तौर पर इंकार कर दिया था। हालांकि, आज ममता बनर्जी राजनीतिक परिस्थितियों बदलने के बाद कांग्रेस के साथ खड़ी होती दिखाई दे रही है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने साफ और कहा कि पश्चिम बंगाल में बदलाव का चुनाव था और वह बदलाव आ चुका है। लव एंड ऑर्डर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के खाली खजाने को कैसे भरा जाए, यह भी भाजपा के सामने चुनौती होगी। निवेश लाना, आदमी की जिंदगी में सुधार लाना बीजेपी को जल्द से जल्द दुरुस्त करना होगा। इसके साथ नीरज दुबे ने कहा कि विजय के लिए तमिलनाडु में सत्ता तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा। भले ही उन्हें कांग्रेस का गठबंधन सहयोग मिल गया लेकिन अभी भी वह बहुमत के आंकड़ो तक नहीं पहुंच पाए थे जिससे की साफ तौर पर जाहिर होता है कि उनके लिए मुख्यमंत्री का पद काफी काटों भरा रहने वाला है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के पास पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी को खड़ा करने का मौका था। लेकिन आपने तृणमूल कांग्रेस से हाथ मिलाकर उसे जगह को खाता कर दिया है। दूसरी ओर आपने तमिलनाडु में डीएमके के साथ धोखा किया। आप विजय के साथ चले गए। यह कहीं ना कहीं गठबंधन धर्म का एक तरीके से अपमान होता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:00:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/saffron-surge-storm-of-vijay-congress-internal-turmoil-what-political-messages-are-they-conveying</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bengal, Tamil Nadu, Assam, Keralam, Puducherry के चुनाव परिणामों का विश्लेषण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/analysis-of-election-results-in-bengal-tamil-nadu-assam-kerala-and-puducherry]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण किया गया। प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने सवालों के जवाब दिये। उल्लेखनीय है कि तीन राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में NDA की सरकार बन रही है जबकि केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की और तमिलनाडु में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। नीरज दुबे ने कहा कि देखा जाये तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस प्रचंड सफलता के केंद्र में अमित शाह की रणनीति और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है। इस चुनाव में उन्होंने केवल एक स्टार प्रचारक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि पूरे अभियान के मुख्य रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। यह जीत सिर्फ एक लहर का परिणाम नहीं, बल्कि महीनों की सूक्ष्म योजना, संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर किए गए सतत प्रयासों का फल भी है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने आगे कहा कि इस चुनाव में कई ऐसे चेहरे भी उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें “साइलेंट हीरो” कहा जा रहा है। शुभेन्दु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति ने भाजपा को मजबूत आधार दिया। इसके साथ ही मंगल पाण्डेय को राज्य प्रभारी बनाना भी एक सोचा-समझा कदम था। इन सबके पीछे अमित शाह की स्पष्ट रणनीतिक सोच काम कर रही थी, जिसमें स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देना शामिल था।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/sanatan-not-bjp-won-in-west-bengal-it-is-wrong-to-call-hindu-unity-a-politics-of-polarization" target="_blank">Jan Gan Man: West Bengal में BJP की नहीं सनातन की जीत हुई, हिंदू एकता को ध्रुवीकरण की राजनीति कहना गलत</a></h3><div>उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कट-मनी, भ्रष्टाचार और खराब शासन के आरोप लगाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का वादा कर मतदाताओं को आकर्षित किया। बहरहाल, अमित शाह के बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने जिस शिद्दत के साथ बंगाल में मेहनत की और खुद पूरे चुनाव अभियान का नेतृत्व किया उससे समय रहते चूक या गलतियों की संभावनाएं खत्म हो गयीं और आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भगवा राज आ गया।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार से वहां के स्थानीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी थी और यह चुनावी नतीजे में देखने को भी मिल रहा है। इसके साथ ही नीरज कुमार दुबे ने चुनाव आयोग द्वारा चुनाव के दौरान की गई व्यवस्थाओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग भयमुक्त वातावरण में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है जिसके बाद से यह बदलाव हमें देखने को मिल रहा है। नीरज दुबे ने इस बात पर भी जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के बाद भाजपा के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां होंगी।</div><div><br></div><div>असम को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इसमें किसी को कोई हैरानी नहीं है। असम में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है। हालांकि वह अपने गठबंधन के सहयोगियों को भी साथ रखेंगी। हिमंत बिस्वा सरमा असम में एक बार फिर से भाजपा के लिए बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं। तमिलनाडु में हुए बड़े उलट फेर पर नीरज दुबे ने कहा कि वहां द्रविड़ राजनीति का अंत होता दिखाई दे रहा है। विजय में लोगों को संभावनाएं दिखाई दी और यही कारण है कि पहले ही चुनाव में विजय की पार्टी ने जबरदस्ती सफलता हासिल की है। उनकी पार्टी बहुमत के करीब है और कुछ पार्टी उन्हें समर्थन दे सकती है। इसके बाद विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं।</div><div><br></div><div>केरलम को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस के लिए यह संजीवनी का काम करेगा। केरल में कांग्रेस की जीत से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की पार्टी में उपयोगिता और बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस के लिए चुनौतियां भी ज्यादा रहने वाली है। कांग्रेस किसको मुख्यमंत्री बनाएगी, यह भी देखने वाली बात है क्योंकि वहां कई मुख्यमंत्री की उम्मीदवार है। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि देश से वामपंथी राजनीति का अंत होता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले 50 साल में यह पहला मौका है जब लेफ्ट की सरकार किसी राज्य में नहीं है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:14:34 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/analysis-of-election-results-in-bengal-tamil-nadu-assam-kerala-and-puducherry</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Women Reservation Bill पर विपक्ष में पड़ी फूट? जानें Parliament में फेल होने का पूरा Game Plan]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-there-a-split-in-the-opposition-over-the-women-reservation-bill]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद सत्र को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे से हमने पहला सवाल तो यही पूछा कि जो कुछ भी महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के साथ लोकसभा में हुआ उसको लेकर आप क्या कहेंगे क्योंकि भाजपा जबरदस्त तरीके से विपक्ष को महिला विरोधी बताने में जुटी हुई है। नीरज दुबे ने कहा कि 12 साल हो गए लेकिन यह पहला मौका है जब संसद में मोदी सरकार का कोई बिल पास नहीं हो पाया है। इससे यह साफ हो गया है कि महिला आरक्षण को लेकर पक्ष में कौन है और कौन नहीं है। एक तस्वीर इसको लेकर साफ हो गई है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/tamil-nadu-politics-karti-chidambaram-predicts-landslide-and-one-sided-victory-for-dmk-alliance" target="_blank">Tamil Nadu Politics: कार्ति चिदंबरम की भविष्यवाणी, DMK Alliance को मिलेगी शानदार और एकतरफा जीत</a></h3><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद में बिल के गिरने के बाद से महिला सड़कों पर हैं। महिलाओं में आक्रोश है और यही कारण है कि विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच भी इस बात की चिंता शुरू हो गई है कि क्या हमने कोई सही कदम उठाया या नहीं। दावा किया जा रहा है सूत्रों के हवाले से की कई नेताओं ने बीजेपी को यह बताया है कि हम तो इसके लिए तैयार थे। लेकिन पार्टी का लाइन कुछ अलग था। साथ ही साथ नीरज कुमार दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस के भी कई ऐसे नेता थे जो इस बिल के पक्ष में थे। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि प्रियंका गांधी खुद इस बिल का समर्थन करना चाहती थीं लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि इस विधेयक को लेकर विपक्षी खेमे में कई गुट सामने आ चुके हैं।</div><div><br></div><div>इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि सरकार 2029 चुनाव में ही महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संकल्पित है और इसको लेकर सरकार विधि विकल्प देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ तौर पर हर हाल में इस विधेयक को लेकर काफी प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं और उन्होंने कैबिनेट की बैठक में इसके पास नहीं होने पर चिंता भी जताई है। लेकिन मोदी सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा जा रहा है कि महिलाओं को यह हक मिलकर रहेगा और यह सरकार महिलाओं को उनका हक देकर भी रहेगी। सरकार पर जो विपक्ष आरोप लगा रहा है कि एकतरफा और मनमाना फैसला लिया गया। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों को पत्र लिखा था।</div><div><br></div><div>संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की यह हार मोदी सरकार के लिए एक बड़ी&nbsp; राजनीतिक असहजता के रूप में देखी जा रही है। साथ ही यह घटना न केवल एकजुट विपक्ष की ताकत का संकेत देती है, बल्कि संविधान जैसे गंभीर विषयों पर व्यापक और गंभीर संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। इस पराजय ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/jairam-ramesh-attacks-women-reservation-bill-says-it-was-a-case-of-bjp-patronage" target="_blank">महिला आरक्षण Bill पर Jairam Ramesh का हमला, यह BJP के संरक्षण का मामला था</a></h3><div><br></div><div>हम आपको बता दें कि विधेयक की प्रस्तुति और उसकी संरचना ने भी कई सवाल खड़े किए। सबसे अधिक विवाद इस बात को लेकर हुआ कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे दो अलग विषयों को एक साथ क्यों जोड़ा गया। विपक्ष ने इसे एक रणनीतिक चाल बताया, जिसका उद्देश्य एक मुद्दे की आड़ में दूसरे को आगे बढ़ाना था। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम पारदर्शिता के विपरीत है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:51:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-there-a-split-in-the-opposition-over-the-women-reservation-bill</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: West Bengal, Tamilnadu Elections में क्या हैं जमीनी हालात, बदलाव होगा या नहीं?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-is-ground-situation-in-bengal-and-tamil-nadu-elections-will-there-be-any-change-or-not]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। पश्चिम बंगाल को लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि इस बार राज्य में भाजपा के लिए एक अलग माहौल बन रहा है। भाजपा इस बार राज्य में सीधे तौर पर ममता बनर्जी को चुनौती देती हुई नजर आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का जिस तरीके से बयान आ रहा है, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि वह एक अतिरिक्त दबाव में हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि हमने देखा है कि हाल फिलहाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी प्रचार के दौरान जो भीड़ जुट रही है। उससे भाजपा पूरी तरीके से गदगद है। भाजपा ने वहां अपनी पूरी ताकत लगा रखी है। भाजपा इस बार बयानों पर नहीं बल्कि लोगों के बीच जाकर उन्हें वोट देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यह अपने आप में भाजपा के लिए बदली हुई रणनीति है। भाजपा अपनी पिछली गलतियों से सीख कर इस बार बंगाल का चुनाव में लड़ती हुई दिखाई दे रही है। इसके अलावा नीरज दुबे ने कहा साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार पिछले 15 वर्षों से हैं। ऐसे में उसके खिलाफ कुछ माहौल भी बने हैं। भाजपा उसका भी फायदा उठाने की कोशिश में है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/election-campaign-intensifies-in-bengal-bjp-manifesto-released" target="_blank">बंगाल में आक्रामक हुआ चुनाव प्रचार, जारी हुआ भाजपा संकल्प पत्र</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि इस बार भाजपा इस चुनाव को मोदी बना ममता बनर्जी नहीं होने देना चाहती। यही कारण है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेता ममता बनर्जी का नाम तक नहीं रहता है और ममता बनर्जी जो भी सवाल करती है या जो भी आरोप लगाती हैं, वहां के स्थानीय नेता ही वही की भाषा में उसका जवाब भी देता है। सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व बंगाल में बीजेपी का विजन क्या होगा, उसको लेकर बात करता है। बंगाल में किस तरीके से चीजों को आगे बढ़ाया जाएगा उसकी बात की जाती है और लोगों को यह भरोसा दिला जाता है कि आपको डरना नहीं है। आपके घर से बाहर आना है और वोट डालने जाना है।&nbsp;</div><div><br></div><div>तमिलनाडु चुनाव को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां डीएमके और एआईएडीएम के काफी बड़ी और स्थानीय पार्टी है। कांग्रेस डीएमके के साथ गठबंधन में है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी एआईएडीएम के साथ गठबंधन में है। ऐसे में उन्हें दो क्षेत्रीय दलों का साख दांव पर लगा हुआ है। एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएम के दो टर्म से सस्ता सस्ता में है। ऐसे में उसके खिलाफ कुछ नकारात्मक चीज जरूर हुई होगी। एआईएडीएमके को उसी से फायदे की उम्मीद है। एआईएडीएमके के में कोई भी प्रभावशाली नेता दिखाई नहीं देता है। इसलिए पार्टी कितनी मजबूत है, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि बीजेपी जो चुनाव लड़ रही है, वह काफी कम सीटों पलट रही है। ऐसे में भाजपा के लिए वहां अपने दम पर करने का कुछ भी नहीं है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:54:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-is-ground-situation-in-bengal-and-tamil-nadu-elections-will-there-be-any-change-or-not</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Raghav Chadha से AAP ने क्यों बनाई दूरी? क्या है Arvind Kejriwal की मजबूरी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-has-aap-distanced-itself-from-raghav-chadha-what-is-arvind-kejriwal-compulsion]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राघव चड्ढा और मालदा घटनाक्रम पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। राघव चड्ढा के प्रकरण में नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि आखिर असली मामला क्या है यह तो या अरविंद केजरीवाल बता सकते हैं या राघव चड्ढा बता सकते हैं। लेकिन 2024 के आखिर तक दोनों के रिश्ते बेहद करीबी के रिश्ते थे और दोनों का एक दूसरे पर विश्वास भी बहुत था। लेकिन यह दूरियां क्यों आई, इस पर सवाल लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच की दूरी पिछले एक-डेढ़ सालों से लगातार दिख रही थी। फिलहाल देखें तो मनीष सिसोदिया हो या अरविंद केजरीवाल हो इन पर जिस तरीके से आरोप लगाए गए थे। केजरीवाल और बाकी पार्टी के नेताओं पर लगे आरोपों से राघव चड्ढा अपनी दूरियां बनाने लगे थे।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि मीडिया क्षेत्र में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। क्या राघव चड्ढा से केजरीवाल कुछ और चाहते थे और राघव चड्ढा ने उसे पूरा नहीं किया। यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं और इसी वजह से शायद केजरीवाल और राघव चड्ढा की दूरी हुई। नीरज दुबे ने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा ने पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए पार्टी से जुड़े मुद्दे नहीं उठाई। लेकिन क्या आम आदमी पार्टी के तमाम सांसद इस तरीके के मुद्दे उठाते हैं? राघव चढ़ा जो मुद्दे उठा रहे थे वह तो आम आदमी के मुद्दे नहीं थे? क्या इस तरह के सवाल भी आम आदमी पार्टी का कोई सांसद उठना है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/raghav-chadha-took-aim-at-kejriwal-with-his-book-writing-never-outshine-the-master" target="_blank">Raghav Chadha का किताब से Kejriwal पर निशाना? लिखा- Never Outshine The Master</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं जो राजनीति को नहीं समझते, नहीं जानते। लेकिन वह राघव चड्ढा का समर्थन कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि राघव चड्ढा ने आम लोगों से जुड़े हुए मुद्दे उठाए हैं। हर मुद्दे उठाए हैं वह पंजाब के लोगों के भी बोलते रहे हैं। वह दिल्ली के लोगों के भी मुद्दे उठाते रहे हैं। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि राजनीति में कोई भी किसी का कितना भी खास क्यों ना हो जब विश्वास कम होने लगता है तो वह खास लगातार दूर होते जाता है और यही हम राघव चड्ढा के केस में भी देख रहे हैं।</div><div><br></div><div>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव किये जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचार रणनीति का रविवार को केंद्र बिंदु बनाते हुए इस घटना को तृणमूल कांग्रेस का ‘‘महा जंगलराज’’ करार दिया। उन्होंने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए भय और भाजपा के भरोसे के बीच सीधा मुकाबला बताया। मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा होने के बाद, उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मालदा घटना का इस्तेमालभाजपा के दोहरे चुनावी मुद्दों - ‘‘बिगड़ती कानून व्यवस्था’’ और कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया।&nbsp;</div><div><br></div><div>उन्होंने कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन का हवाला देते हुए संदेशखालि मामला, बांग्लादेश से घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी का उल्लेख करते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला। मोदी ने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए एक निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश किया और चेतावनी दी कि 4 मई के बाद कानून का शासन लागू होने पर, तृणमूल कांग्रेस के गुंडों के कथित अत्याचारों का चुन चुन के हिसाब होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह क्रूर सरकार प्रतिदिन बंगाल की पवित्र भूमि को रक्तरंजित कर रही है और इसे किसी भी संवैधानिक संस्था की परवाह नहीं है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 18:20:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-has-aap-distanced-itself-from-raghav-chadha-what-is-arvind-kejriwal-compulsion</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bengal, Assam Elections में सभी दल लगा रहे पूरा जोर, मगर जमीन पर क्या हालात हैं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/all-parties-are-going-all-out-in-bengal-assam-elections-what-is-the-actual-situation-on-ground]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह असम और पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल को लेकर हमने चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि असम में कांग्रेस के लिए स्थितियां प्रतिकूल नजर आ रही है। कांग्रेस अपनी कमजोरी से एक बार फिर से चुनाव में पीछे होती दिखाई दे रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल में इंडिया गठबंधन का नामोनिशान नहीं है। वहां ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है। दोनों दलों में वार-पटवार का दौर लगातार जारी है और ऐसे में इस बार भाजपा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल में इस बार भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति है।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद हुए कई विधानसभा चुनावों ने यह संकेत दिया कि भाजपा अभी भी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे मजबूत ताकत बनी हुई है। विपक्ष को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन के बाद उसका मनोबल बढ़ेगा, लेकिन बाद के चुनावों में भाजपा ने अपनी पकड़ बनाए रखी। अब पांच राज्यों में हो चुका चुनावी शंखनाद का दौर यह तय करेगा कि क्या भाजपा उन राज्यों में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकती है जहां अब तक उसे सत्ता नहीं मिली है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/will-the-assembly-election-results-determine-the-socio-political-future-of-the-upper-castes" target="_blank">क्या पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम सवर्णों के राजनीतिक-सामाजिक भविष्य को तय करेंगे?</a></h3><div>भाजपा इस चुनावी दौर में असम में सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ उतर रही है। 2016 से राज्य की सत्ता में मौजूद भाजपा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है। पार्टी ने बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ और स्थानीय पहचान के मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया है, जिससे चुनावी वातावरण और अधिक तीखा हो गया है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा अब तक सत्ता से दूर रही है, लेकिन इस बार वह पूरी ताकत के साथ अपनी राजनीतिक उपस्थिति को विस्तार देने की कोशिश कर रही है। इन राज्यों में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय दल हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भाजपा के सबसे मुखर विरोधियों में शामिल हैं और दोनों ही नेता इस चुनावी मुकाबले में सीधे भाजपा के निशाने पर हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि भाजपा का दावा है कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों ने व्यापक राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। पार्टी का मानना है कि इन मुद्दों ने राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को मजबूत किया है और इससे उसे चुनाव में फायदा मिल सकता है। ममता बनर्जी 2011 से लगातार सत्ता में हैं और उन्होंने कई बार भाजपा की चुनौती को रोकने में सफलता हासिल की है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इसके बाद हुए चुनावों में भाजपा का मत प्रतिशत लगभग 38 से 39 प्रतिशत के बीच स्थिर रहा है, जिससे पार्टी को उम्मीद है कि इस बार वह ममता बनर्जी के किले में बड़ी सेंध लगा सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:59:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/all-parties-are-going-all-out-in-bengal-assam-elections-what-is-the-actual-situation-on-ground</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: LPG Shortage क्यों हुई, क्या गैस की कमी के संकट का ठीक से सामना नहीं कर रहे PM]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-did-the-lpg-shortage-occur-is-the-pm-failing-to-adequately-address-the-gas-shortage-crisis]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश में गैस संकट को लेकर चर्चा की। हमने नीरज दुबे से सवाल किया कि क्या वाकई में देश में एलपीजी गैस सिलेंडर का संकट है या विपक्ष सिर्फ अफवाह फैला रहा है जिस बात का दवा सरकार की ओर से किया जा रहा है। इसके जवाब में नीरज दुबे ने कहा कि हां, संकट जरूर है लेकिन वह संकट सिर्फ व्यावसायिक सिलेंडर पर है। घरेलू सिलेंडर आपको ढाई दिनों के अंदर मिल जा रहे हैं और इसके लिए हमें कुछ अतिरिक्त करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। जहां से भी लाइन लगे रहने की तस्वीर सामने आ रही है वह सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि अफवाहें तेजी से फैल रही है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि हमने पहले भी देखा है कि किस तरीके से एक बार नमक खत्म होने का फैलाया गया था और लंबी-लंबी लाइन देखने को मिली थी।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि देश में एलपीजी का कोई संकट नहीं है। देश में डीजल पेट्रोल का कोई संकट नहीं है। हम लगातार अपनी क्षमताओं को वृद्धि कर रहे हैं। हम अरब देशों से अपनी डिपेंडेंसी को कम कर रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्र से हम क्रूड ऑयल मंगा रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि हम ईरान से भी संपर्क रख रहे हैं ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए हमारे जहाज गुजर सके। उन्होंने कहा कि भारत आज हर वर्ष लगभग 3 करोड़ टन से अधिक एलपीजी का उपभोग करता है लेकिन घरेलू उत्पादन इस मांग का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कर पाता। शेष आवश्यकता खाड़ी देशों से आयात करके पूरी की जाती है। अनुमान है कि भारत में आने वाली एलपीजी का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। यही कारण है कि जैसे ही इस मार्ग में व्यवधान आया, उसका सबसे पहला और सबसे तेज असर भारत की रसोई पर दिखाई देने लगा। यह एक कठोर सच्चाई है कि भारतीय परिवारों की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक एक संकरे समुद्री मार्ग पर निर्भर है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/questions-arising-from-gas-queues-how-secure-is-india-energy-system" target="_blank">गैस की कतारों से उठते सवाल: कितनी सुरक्षित है भारत की ऊर्जा व्यवस्था?</a></h3><div>इसी संकट के दौरान पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता अपेक्षाकृत सामान्य बनी हुई है। पैट्रोल पंपों पर न तो लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और न ही कीमतों में अचानक उछाल आया है। इसका कारण यह है कि भारत ने पिछले वर्षों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अपेक्षाकृत अधिक लचीला ढांचा विकसित किया है। आज भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और रूस, अमेरिका तथा अफ्रीका के कई देशों से आने वाला तेल ऐसे मार्गों से भारत पहुंचता है, जो होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं। इसके अतिरिक्त भारत के पास रणनीतिक पैट्रोलियम भंडार भी मौजूद हैं, जिनमें आपातकालीन परिस्थितियों के लिए लाखों बैरल कच्चा तेल संग्रहीत किया जाता है। इन भंडारों और विविध आपूर्ति स्रोतों के कारण पैट्रोल और डीजल की उपलब्धता तुरंत प्रभावित नहीं होती।</div><div><br></div><div>संसद में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ ले गए प्रस्ताव को लेकर भी हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने इसको लेकर कहा कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में बेहद अहम है लेकिन विपक्ष का बर्ताव जिस तरीके से रहा है वह सही नहीं है। राहुल गांधी को हमेशा बोलने का मौका मिलता है। लेकिन वह मुद्दों पर नहीं रहते बल्कि इधर-उधर की बातें ज्यादा करते हैं। राहुल गांधी को समझना होगा कि वह विपक्ष के नेता है और उनकी बातों में गंभीरता होनी चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:04:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-did-the-lpg-shortage-occur-is-the-pm-failing-to-adequately-address-the-gas-shortage-crisis</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: बिहार की गद्दी छोड़ कर Rajya Sabha की सीट पर क्यों जा रहे हैं Nitish Kumar?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-nitish-kumar-leaving-the-throne-of-bihar-and-going-for-rajya-sabha-seat]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क&nbsp; के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह बिहार की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने तमाम सवालों का जवाब दिया। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार पहले भी यह बात कह चुके हैं कि उन्हें राज्यसभा जाने की इच्छा है। अब वह समय आ गया है। नीतीश कुमार अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं जैसा कि उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा है। उन्होंने कहा कि 2020 में जब चुनाव हुए थे तब नीतीश कुमार तीसरे नंबर की पार्टी बन गए थे। बावजूद इसके भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इस बार भाजपा बड़ी पार्टी है। नीतीश कुमार की जदयू ने भी अच्छी खासी सीटे हासिल की है। लेकिन जिस तरीके से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य का हाल है, उसको लेकर कई सवाल बने हुए हैं और शायद यही कारण है कि नीतीश कुमार अब दिल्ली जाने का फैसला कर रहे हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार को बिहार में सभी लोग पसंद करते हैं। उन्होंने बिहार को बदलने का काम किया हैं। नीतीश कुमार की बदौलत एनडीए बिहार में जीत हासिल करता रहा है। नीतीश कुमार की आज भी बिहार में स्वीकारता है। वह बिहार के सर्वमान्य नेता है। ऐसे में नीतीश कुमार की बिहार में लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर वहां प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे साफ तौर पर हम कह सकते हैं कि नीतीश अभी भी बिहार में बहुत ही लोकप्रिय नेता हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/before-going-to-rajya-sabha-nitish-kumar-big-attack-on-rjd-asked-what-did-you-do-for-women" target="_blank">Rajya Sabha जाने से पहले RJD पर Nitish Kumar का बड़ा हमला, पूछा - महिलाओं के लिए क्या किया?</a></h3><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि बिहार को जंगल राज की छवि से नीतीश कुमार ने बाहर निकाला है। नीतीश कुमार ने कई बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार से भले ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी ले जा सकती है लेकिन उन्होंने बिहार के लिए जो काम किया है उसको हमेशा याद किया जाएगा। इतना ही नहीं, नीरज कुमार दुबे ने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार भविष्य में कभी वापस मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आना चाहे तो मतदाताओं का साथ उन्हें मिल सकता है। मतदाता लगातार नीतीश कुमार के साथ बने रह सकते हैं। यही नीतीश कुमार की मजबूती है और इस बात को उनके सहयोगी दल भी अच्छे से समझते हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सलाह पर यह निर्णय लिया गया लगता है, क्योंकि 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी (89 सीटें) बन गई है। इससे बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनना आसान हो सकता है, जबकि नीतीश के बेटे निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि, जदयू में उनके इस फैसले पर असंतोष है, लेकिन इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे बीजेपी का "मास्क" हटाने का प्रयास मान रहा है। इससे राजद को पुनः सियासी ऑक्सीजन मिल सकता है। यूँ तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के नए मुख्यमंत्री की घोषणा अभी स्पष्ट रूप से नहीं हुई है, क्योंकि यह प्रक्रिया राज्यसभा चुनाव के परिणाम (16 मार्च 2026) के बाद शुरू होगी। एनडीए में बीजेपी का सबसे बड़ा दावा माना जा रहा है, क्योंकि उनके पास 89 विधायक हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 19:01:32 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-nitish-kumar-leaving-the-throne-of-bihar-and-going-for-rajya-sabha-seat</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Youth Congress Protest से बढ़ी कांग्रेस की टेंशन, Anti-India Party होने का आरोप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/youth-congress-protest-increases-congress-tension-accuses-it-of-being-an-anti-india-party]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क&nbsp; के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के आयोजन स्थल भारत मंडपम में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर पूछे गए सवालों के जवाब में नीरज कुमार दुबे ने कहा कि पार्टी के युवा मोर्चे के द्वारा जो कुछ भी किया गया, वह बिल्कुल शर्मनाक है। यह आयोजन मोदी का नहीं था, यह आयोजन भाजपा का नहीं था, यह आयोजन भारत की सरकार का था। इस देश के नागरिकों का था और कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन मोदी या फिर भाजपा के विरोध में नहीं, बल्कि यह देश के विरोध में किया गया। उन्होंने कहा कि जब देश दुनिया के लोग वहां जुटे हुए थे और आप वहां पहुंचकर इस तरीके का कृत्य करें, इसे बिल्कुल माफ नहीं किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने दावा किया कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। टी-शर्ट कैसे छपे, पैसे इसके लिए कहां से आए। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा में कोई चूक नहीं था बल्कि यह प्लान किया हुआ था। इसका बहुत पहले से प्लान कर लिया गया था। तभी सम्मेलन के आखिरी दिन इसको अंजाम दिया गया, यह जानते हुए की आखिरी दिन वीवीआईपी मूवमेंट की कमी होगी और ऐसे में सुरक्षा को भेदना बहुत बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के पहुंचने से पहले जो लोग वहां मौजूद थे, उन्होंने ही कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का विरोध करना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोगों ने प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि हमारे लिए इस तरह की राजनीति सामान्य बात हो सकती है लेकिन विदेशी मेहमानों के लिए यह सामान्य नहीं है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/delhi-police-action-against-shirtless-protestors-at-ai-summit-arrests-two-more-senior-iyc-leaders" target="_blank">AI Summit में Shirtless Protest पर Delhi Police का एक्शन, IYC के 2 और बड़े नेता गिरफ्तार</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि विदेश के जो प्रतिनिधि आए हुए थे, वह बिना किसी सिक्योरिटी के इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। मामूली सिक्योरिटी के साथ तमाम हॉल में वह जा रहे थे। ऐसे में आप अगर इस तरह की चीज करते हैं तो यह हमारे देश की छवि के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। अगर आप इस तरीके का प्रदर्शन करेंगे तो भारत के लोग गुस्सा होंगे ही। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जो कुछ भी किया उसे देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। आपके देश की छवि खराब हो सकती है। अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है लेकिन राष्ट्र के विरोध की आजादी किसी को नहीं होनी चाहिए और कांग्रेस को भी अपने कार्यकर्ताओं को समझाना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छोटा बना कर इस मुद्दे को पीछे नहीं करना होगा। इस मुद्दे की पूरी तरीके से जांच होनी चाहिए। 80 से ज्यादा देशों की इस सम्मेलन में प्रत्यक्ष भागीदारी हुई है। ऐसे में इस सम्मेलन की महता को हम सभी को समझना होगा। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उस जगह इस तरीके का प्रदर्शन किया जहां आधी दुनिया के लोग इकट्ठा थे। कांग्रेस बौखलाई हुई है। कांग्रेस को सत्ता नहीं मिल रही है। वह किसी भी कीमत पर सत्ता चाहती है। इसके लिए उसे देश का विरोध ही क्यों न करना पड़े, कांग्रेस इससे भी पीछे नहीं हो रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:24:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/youth-congress-protest-increases-congress-tension-accuses-it-of-being-an-anti-india-party</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: हर बात पर नकारात्मक राजनीति और हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष को क्यों भाता है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-does--opposition-like-to-do-negative-politics-on-every-issue-and-criticize-every-decision]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद में जारी गतिरोध और राहुल गांधी को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने संसद में हंगामा को लेकर कहा कि यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 2026 का बजट सत्र शुरू हुआ। देश को इससे बहुत उम्मीदें थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जो हो हल्ला हुआ, प्रधानमंत्री को बोलते नहीं दिया गया, यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है। ऐसा लग रहा है कि विपक्ष ने संसद को बंधक बना दिया है और गोरिल्ला युद्ध लड़ रहा है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि स्पीकर के कमरे में जाकर विपक्ष के सांसदों ने जो बातें कहीं, वह गलत है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है और संसदीय परंपरा को तार-तार कर रहा है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि संसदीय परंपरा में नियम है, कानून है। आपको उसी के अनुसार चलना होता है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी का बॉडी लैंग्वेज तक संसदीय परंपरा के हिसाब से नहीं है। ऐसा लगता है कि वह संसद में किसी से भिड़ने पहुंचते हैं। राहुल गांधी ऐसे लहजे का प्रयोग करते हैं जैसा कि वह किसी शाही परिवार से हो या राजा हो। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल को राहुल गांधी ने टारगेट किया, वह भी बिल्कुल ठीक नहीं था। भले ही वह मामला हंसी मजाक में टल गया लेकिन यह लोकतंत्र के खिलाफ है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/parliament-has-become-an-arena-instead-of-solving-problems" target="_blank">समस्याओं के निराकरण के बजाए अखाड़ा बनी संसद</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि अगर आपके खिलाफ कोई अदालत फैसला दे दे तो आप जज के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाएंगे, अगर स्पीकर आपके खिलाफ कोई बात कह दे आप उसके खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे, इलेक्शन कमीशन आपके हिसाब से कम ना करें तो उसके खिलाफ आप प्रस्ताव लाएंगे। यह कहीं से भी किसी भी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में विपक्ष सिर्फ ब्लैकमेल की राजनीति कर रहा है और यह कहीं से भी ठीक नहीं है। नकारात्मक विपक्ष की भूमिका हमारे विरोधी पार्टियां निभा रही हैं जो कि हमारे जैसे लोकतंत्र देश के लिए ठीक नहीं है।&nbsp;</div><div><br></div><div>राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे द्वारा लाए गए प्रस्ताव को लेकर जब हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी जो कुछ भी करते हैं, उस पर तो बात होनी चाहिए। इसके अलावा एमएम नरवाने की किताब को लेकर जो विवाद चल रहा है उसकी भी पूरी तरीके से जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी को किताब कहां से मिली, यह बात सामने आना चाहिए। साथ ही साथ राहुल गांधी के खिलाफ जो प्रस्ताव आया है, ऐसा लगता है कि सरकार उसके साथ खड़ी है और राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पर आने वाले दिनों में हमें संसद में चर्चा देखने को मिल सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 19:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-does--opposition-like-to-do-negative-politics-on-every-issue-and-criticize-every-decision</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Loksabha में इस बार का हंगामा क्यों सबसे अलग था? क्या PM के खिलाफ कोई साजिश थी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-was-this-time-uproar-in-the-ls-different-from-others-was-there-a-conspiracy-against-the-pm]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश के संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे बवाल पर चर्चा की। हमेशा की तरह कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने कहा कि देश का बजट सत्र चल रहा है। संसद चल रहा है। एक दिन के लाखों में खर्च होते हैं। लेकिन अफसोस है कि लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भी हमारा सांसद नहीं चल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जिम्मेदार है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी को जनता से जुड़े मुद्दे को उठाना चाहिए था। बजट सत्र में तमाम मुद्दों पर चर्चा होती है। लेकिन राहुल गांधी ऐसे किताब का हवाला दे रहे हैं और उस पर चर्चा की मांग कर रहे हैं जो अब तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को परिपक्व बनना पड़ेगा। संसद में परिपक्वता के साथ व्यवहार करना पड़ेगा। संसद हो हल्ला करने की जगह नहीं है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/parliament-diary-lok-sabha-proceedings-again-marred-by-uproar-budget-discussed-in-rajya-sabha" target="_blank">Sansad Diary: फिर हंगामे की भेंट चढ़ी लोकसभा की कार्यवाही, राज्यसभा में बजट पर चर्चा</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद सत्र से पहले सर्दलीय बैठक होती है। कार्य मंत्रणा समिति की भी बैठक होती है। इस दौरान इन बातों पर चर्चा होती है कि संसद के दौरान कौन-कौन से मुद्दे को उठाना है। हालांकि जो बातें बैठकों में होती है उस पर न सत्ता पक्ष और ना ही विपक्ष अमल करते हैं। हो-हल्ला शुरू हो जाता है। ऐसे में जनता के मुद्दे पीछे हो जाते हैं और सवाल ईगो पर आ जाता है। उन्होंने कहा कि जिन नियमों के तहत कांग्रेस एक ऐसी पुस्तक पर चर्चा की मांग कर रही है जो प्रकाशित हो नहीं हुआ है। अगर नियम में ऐसा कुछ नहीं है तो फिर चर्चा कैसे हो सकती है। नियम इस सरकार ने नहीं बनाए हैं। नियम पहले से ही बने हुए हैं।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री को बोलना था, तब कांग्रेस के महिला नेता उनके कुर्सी के पास पहुंच जाते हैं। स्पीकर की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारू रूप से चले। इसको लेकर वह काम करें। हालांकि, स्पीकर के पास तमाम खुफिया सूचनाएं मिल जाती हैं और यही कारण है कि प्रधानमंत्री को लेकर उनके पास कुछ सूचनाएं गई होंगी। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब नहीं देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि कई बार हमने देखा है कि संसद के भीतर सुरक्षा में चूक हुई है। यही कारण है कि स्पीकर भी काफी सतर्क रहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद भारत के लोकतंत्र का मंदिर है। वहां नियमों के हिसाब से हर चीज होना चाहिए। हर चीज नियम के हिसाब से हो इसकी जिम्मेदारी स्पीकर और अध्यक्ष के पास होती है। लेकिन विपक्ष अगर चाहता है कि सब कुछ उसके मुताबिक हो तो यह संभव नहीं है और अगर प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश होती है या योजना बनाई जाती है तो यह बिल्कुल लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। इससे विपक्ष की सोच पर कई सवाल खड़े होते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:42:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-was-this-time-uproar-in-the-ls-different-from-others-was-there-a-conspiracy-against-the-pm</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Maharashtra CM Devendra Fadnavis का शासन मॉडल जीत की गारंटी कैसे बनता जा रहा है]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-is-maharashtra-cm-devendra-fadnavis-governance-model-becoming-a-guarantee-of-victory]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने महाराष्ट्र के चुनाव में भाजपा और महायुति की हुई जीत पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरीके से भाजपा की जीत हुई है, यह अपने आप में दिखता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार राजनीतिक तौर पर अपने कद को ऊपर कर रहे हैं। नीरज दुबे ने दावा किया कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े चाणक्य हुए लेकिन सबको देवेंद्र फडणवीस ने अपनी रणनीति से सबको पीछे छोड़ दिया।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि वह महाराष्ट्र में अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी सेवा दे चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री होने के बाद भी पार्टी संगठन के लिए उपमुख्यमंत्री पद का स्वीकार किया था। यह अपने आप में उन्होंने बड़ी कुर्बानी दी थी। लेकिन उन्होंने जो कार्यकर्ताओं को संदेश दिया था उसी का नतीजा है कि आज महाराष्ट्र में भाजपा ने जबरदस्ती जीत हासिल की है। कभी महाराष्ट्र में भाजपा एकदम अंतिम पार्टी हुआ करती थी। लेकिन आज महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पीछे देवेंद्र फडणवीस और संगठन का मेहनत है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि ठाकरे बंधुओं का इस चुनाव में काफी कुछ दांव पर लगा था। वह पूरी तरीके से विफल रहे। ठाकरे बंधुओं की जो बांटने की राजनीति है, उसको जनता ने नाकार दिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/political-implications-of-the-2026-bmc-elections" target="_blank">बीएमसी चुनाव 2026 के सियासी मायने, महायुति के राजनीतिक कौशल को मिली जनस्वीकृति</a></h3><div>दुबे ने कहा कि मुंबई के अलावा पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जैसे शहरों में भी भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। ये क्षेत्र पारंपरिक रूप से पवार परिवार के प्रभाव वाले माने जाते रहे हैं। यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों का लंबे समय तक नियंत्रण रहा है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने इन गढ़ों में सेंध लगाकर यह साबित कर दिया कि उसका संगठनात्मक विस्तार और जमीनी रणनीति अब पूरे राज्य में असर दिखा रही है। नागपुर, नाशिक और अन्य प्रमुख नगर निकायों में भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट बहुमत या मजबूत स्थिति हासिल की है। इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि शहरी मतदाता भाजपा के विकास आधारित प्रचार और नेतृत्व से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और डिजिटल सेवाओं जैसे मुद्दे चुनाव के दौरान प्रमुखता से उठे और मतदाताओं ने इन्हीं आधारों पर मतदान किया।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। ठाकरे और पवार नाम जो कभी महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे मजबूत ब्रांड माने जाते थे, वह इस चुनाव में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सके। कई स्थानों पर उनकी पार्टियों को न केवल सीटों का नुकसान हुआ बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक चुनावी हार नहीं है बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक रुझानों का संकेत है। इन चुनावों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए यह परिणाम एक संकेत के रूप में देखे जाएंगे। भाजपा के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है जबकि विपक्ष के लिए यह चेतावनी है कि यदि रणनीति और नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया तो भविष्य की राह और कठिन हो सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 19:31:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-is-maharashtra-cm-devendra-fadnavis-governance-model-becoming-a-guarantee-of-victory</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: क्या इस बार नहीं चल पायेगा Mamata Banerjee का खेला? इतनी परेशान क्यों है TMC?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-mamata-banerjee-political-game-fail-this-time-why-is-the-tmc-so-worried]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पश्चिम बंगाल और दिल्ली की राजनीति पर बातचीत की है। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने पश्चिम बंगाल को लेकर साफ तौर पर कहा कि जिस तरह की स्थिति वहां पर देखने को मिल रही है, उससे ऐसा लगता है कि राज्य में कानून व्यवस्था की अच्छी स्थिति नहीं है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जब कोई आम व्यक्ति सरकारी कामकाज में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है लेकिन ममता बनर्जी के खिलाफ के कार्यवाही क्यों नहीं की गई? सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि जिनके ऊपर कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी है, वही कानून का मजाक बना रही हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने आगे कहा कि अगर ममता बनर्जी को लगता है कि जो कार्रवाई हो रही है वह किसी राजनीतिक दुर्भावना से की जा रही है तो उनको जवाब देना चाहिए कि आखिर पूरा मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के कई मंत्रियों के यहां, कई विधायकों के यहां छापे पड़ते रहे हैं। लेकिन ममता बनर्जी सिर्फ आई पैक्क के ही ऑफिस में क्यों गईं? सिर्फ प्रतीक जैन के यहां ही क्यों गईं? इससे कई संदेह पैदा होता है। नीरज दुबे ने कहा कि इससे संदेह यह उठता है कि क्या ममता बनर्जी का कोई हित है जो प्रभावित हो रहा है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/case-filed-in-supreme-court-against-mamata-for-threatening-ed-officials" target="_blank">West Bengal में सियासी घमासान, ED अधिकारियों को धमकाने पर Mamata के खिलाफ Supreme Court में केस</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि अब तक हमने पश्चिम बंगाल में कई बार देखा है कि जो जांच एजेंसी जाती है, उन पर हमले किए जाते हैं, उन पर पत्थर बाजी की जाती है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि कानून व्यवस्था को लेकर बंगाल में सवाल खड़े होते हैं। ममता बनर्जी उसको दुरुस्त करने की बजाय खुद सड़कों पर उतरकर कानून व्यवस्था को तार-तार करती हैं और अपने समर्थकों को खुली छूट मिलने का भी संदेश देती है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी जो कुछ भी कर रही हैं, वह कार्यकर्ताओं के लिए भी एक संदेश देना चाहती हैं कि हमें भी ऐसे ही सड़कों पर उतरना होगा यही काम करना होगा। इसका मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव में विकास, रोजगार मुद्दा नहीं रहने वाला है सिर्फ सत्ता को बचाने की कवायद देखने को मिलेगी।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><div>दिल्ली की राजनीति को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि अरविंद केजरीवाल फिलहाल पूरी तरीके से पंजाब शिफ्ट हो गए हैं। उनको दिल्ली से कोई मतलब नहीं है। दिल्ली में विधानसभा का सत्र चल रहा है। लेकिन जो नेता प्रतिपक्ष है वह गोवा गायब हो जाती हैं। इसके अलावा आतिशी जब विधानसभा में आती है तो वह जिस तरीके से गुरुओं को लेकर बयान देती हैं जिसके बाद से बीजेपी सवाल खड़े कर रही है। आम आदमी पार्टी पूरा का पूरा पंजाब फोकस करके बैठी हुई है ताकि वहां सरकार बचाई जा सके। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अब आम आदमी पार्टी पंजाब से ही चल रही है। आम आदमी पार्टी पूरी तरीके से पंजाब में राजनीतिक कर रही है। दिल्ली में फिलहाल पार्टी सक्रिय दिखाई नहीं दे रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 19:52:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-mamata-banerjee-political-game-fail-this-time-why-is-the-tmc-so-worried</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bengal, Assam, Tamilnadu, Kerala Elections में किस पार्टी का पलड़ा भारी है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/which-party-has-the-upper-hand-in-bengal-assam-tamil-nadu-kerala-elections]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने 2026 में देश में अलग-अलग राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। हमने नीरज दुबे से सबसे पहला सवाल पश्चिम बंगाल को लेकर पूछा पश्चिम बंगाल को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि देखा जाये तो पश्चिम बंगाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। तृणमूल कांग्रेस आज सत्ता की थकान और आत्मसंतोष की शिकार दिख रही है। स्थापना दिवस के भाषणों में संघर्ष की बातें जरूर हैं, लेकिन उन शब्दों में वह धार नहीं दिखती जो कभी ममता बनर्जी की पहचान हुआ करती थी। दुष्ट ताकतों का जिक्र दरअसल अपनी कमजोरियों से ध्यान हटाने का प्रयास अधिक लगता है। लंबे समय तक सत्ता में रहने का बोझ अब तृणमूल पर साफ दिखने लगा है। भ्रष्टाचार के मामलों, संगठनात्मक ढीलापन, जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष और जनता के रोजमर्रा के सवालों से कटाव ने पार्टी को रक्षात्मक बना दिया है। मां माटी मानुष का नारा आज भी दोहराया जा रहा है, लेकिन मानुष के मन में उठ रहे सवालों के ठोस जवाब तृणमूल के पास नहीं दिखते।</div><div><br></div><div>इसके विपरीत भाजपा आक्रामक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर चुकी है। अमित शाह की यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी घुसपैठ, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर तृणमूल कांग्रेस को घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। साथ ही संगठन को मजबूत करने पर जोर और अनुशासनात्मक निर्देश यह बताते हैं कि भाजपा ने पिछली गलतियों से सीख ली है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा ने बंगाल में वैचारिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर लड़ाई की तैयारी कर ली है। संघ के साथ तालमेल और पुराने चेहरों की वापसी यह संकेत देती है कि पार्टी अंदरूनी मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुट मोर्चा बनाना चाहती है। यह एक ऐसी रणनीति है जो तृणमूल के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/has-delimitation-changed-assam-political-equation-cm-himanta-saidnow-the-nda-will-win-103-seats" target="_blank">परिसीमन ने बदला Assam का सियासी समीकरण? CM Himanta बोले- अब NDA जीतेगी 103 सीटें</a></h3><div>पश्चिम बंगाल के अलावा हमने असम तमिलनाडु केरल पर भी चर्चा की। असम को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां एकतरफा मुकाबला नजर आ रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा की पकड़ बहुत मजबूत है। इतना ही नहीं, हिमंत बिस्वा सरमा जबरदस्त तरह की राजनीति करते हैं और साफ तौर पर वह सामाजिक समीकरणों को साधने में कामयाब हुए हैं। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य के हिंदू ही नहीं, बल्कि स्थाथी मुसलमान भी पसंद करते हैं जो असम के रहने वाले हैं। उनके लिए हिमंत बिस्वा सरमा लगातार मजबूती से काम करते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस में अभी भी गठबंधन को लेकर कंफ्यूजन है। साथ ही साथ कांग्रेस जमीन पर काम करती हुई दिखाई नहीं दे रही है।</div><div><br></div><div>तमिलनाडु को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार वहां सियासत जबरदस्त तरीके से हो रही है। हां, यह बात सही है कि सत्ता में रहते हुए डीएमके इस वक्त काफी मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, एआईएडीएमके के गठबंधन से डीएमके को बड़ी चुनौती की उम्मीद है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि तमिलनाडु में 10 सालों से एमके स्टालिन की सरकार है। ऐसे में उनकी सरकार के खिलाफ नाराजगी जबरदस्त तरीके से कई बार हमें देखने को मिली है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप उनकी सरकार पर लगे हैं। ऐसे में एआईएडीएमके के और भाजपा का गठबंधन वहां कुछ खास कर सकता है। हालांकि नीरज दुबे ने यह भी कहा कि एआईएडीएमके के जो पुराने नेता है, उनको साथ लिया जाए तो वहां मुकाबला एकतरफा भी हो सकता है। केरल को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां यूडीएफ और एलडीएफ की लड़ाई है। भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी जरूर है लेकिन अभी इतनी ज्यादा नहीं है कि वहां सरकार बन सके।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 15:30:53 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/which-party-has-the-upper-hand-in-bengal-assam-tamil-nadu-kerala-elections</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Modi Govt के खिलाफ Congress करेगी हल्लाबोल, क्या Bangladesh में होगा Action?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/congress-party-will-launch-a-protest-against-the-modi-government]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने मनरेगा को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन और बांग्लादेश की स्थिति पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर कहा कि सरकार जो जी राम जी बिल लेकर आई है, उसका देशभर में स्वागत हो रहा है। हालांकि कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। मनरेगा हो या फिर जी राम जी विधायक हो, उससे किसका फायदा होना था, उन लोगों को फायदा होना था जो देश के ग्रामीण हिस्सों में रहते हैं जो मजदूरी करते हैं, जिन्हें रोजगार चाहिए और वह सब उसका स्वागत कर रहे हैं। लेकिन इस बिल का विरोध कौन कर रहा है, इस बिल का विरोध वह लोग कर रहे हैं जिनको सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक करनी होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने आगे कहा कि किसी भी राज्य से यहां तक की कांग्रेस शासित राज्यों से भी इस तरह की कोई खबरें नहीं आई कि इस बिल के खिलाफ कोई मजदूर संगठन प्रदर्शन कर रहा है, सड़क पर उतरा है। वैसे लोग भी अभी तक सामने नहीं आए हैं जिन्हें लगता है कि इस बिल के आ जाने के बाद से उनका रोजगार खत्म हो सकता है। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि जी राम जी बिल का सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस विरोध कर रही है। उसके जो इंडिया गठबंधन के साथी हैं, वह भी इसका खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। ममता बनर्जी की चुनावी मजबूरी है इसलिए फिलहाल वह इस मुद्दे पर बोलती हुई दिखाई दे रही हैं। नीरज दुबे ने कहा कि हां, यह बात सही है कि कई दलों ने महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के नाम को कहीं से हटाया नहीं जा सकता है। हां, नाम बदला गया है। लेकिन महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता है. वे लोगों के दिलों में बसते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/story-of-a-folded-mountain-range-older-than-present-day-india-aravalli-hills-controversy" target="_blank">आज के भारत से भी पुराने फोल्डेड माउंटेन रेंज की कहानी... जिसके लिए अपने ही फैसले पर SC को लेना पड़ा U-टर्न</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। एक पड़ोसी के नाते हम सब बहुत चिंतित हैं। बांग्लादेश के हालात पर भारत सरकार नजर बनाए हुए है। वहां पर जिस तरीके से अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, उस पर भारत गौर कर रहा है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार का मुद्दा वहां के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के समक्ष भी उठा चुके हैं। नीरज दुबे ने कहा कि अभी हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार का बांग्लादेश में यह दूसरा दौर चल रहा है। हालांकि भारत अभी भी कठोर शब्दों में इसकी निंदा कर रहा है और संबंधित लोगों के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में भारत के खिलाफ जो भी दुष्प्रचार चल रहा है, उसको लेकर भी केंद्र सरकार अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कर रहा है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी में हर चीज के अलग-अलग तरीके बनाए गए हैं। भारत उन तरीकों को अपनाते हुए आगे बढ़ रहा है। संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा कूटनीतिक तौर पर उठाया जा रहा है। तमाम जो विकल्प उपलब्ध है, भारत उसका इस्तेमाल कर रहा है। बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है उसकी वजह से भारत सरकार पूरी तरीके से सतर्क है। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा चुका है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 19:06:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/congress-party-will-launch-a-protest-against-the-modi-government</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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