<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
  <channel>
    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
    <item>
      <title><![CDATA[Women Reservation Bill पर विपक्ष में पड़ी फूट? जानें Parliament में फेल होने का पूरा Game Plan]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-there-a-split-in-the-opposition-over-the-women-reservation-bill]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद सत्र को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे से हमने पहला सवाल तो यही पूछा कि जो कुछ भी महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के साथ लोकसभा में हुआ उसको लेकर आप क्या कहेंगे क्योंकि भाजपा जबरदस्त तरीके से विपक्ष को महिला विरोधी बताने में जुटी हुई है। नीरज दुबे ने कहा कि 12 साल हो गए लेकिन यह पहला मौका है जब संसद में मोदी सरकार का कोई बिल पास नहीं हो पाया है। इससे यह साफ हो गया है कि महिला आरक्षण को लेकर पक्ष में कौन है और कौन नहीं है। एक तस्वीर इसको लेकर साफ हो गई है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/tamil-nadu-politics-karti-chidambaram-predicts-landslide-and-one-sided-victory-for-dmk-alliance" target="_blank">Tamil Nadu Politics: कार्ति चिदंबरम की भविष्यवाणी, DMK Alliance को मिलेगी शानदार और एकतरफा जीत</a></h3><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद में बिल के गिरने के बाद से महिला सड़कों पर हैं। महिलाओं में आक्रोश है और यही कारण है कि विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच भी इस बात की चिंता शुरू हो गई है कि क्या हमने कोई सही कदम उठाया या नहीं। दावा किया जा रहा है सूत्रों के हवाले से की कई नेताओं ने बीजेपी को यह बताया है कि हम तो इसके लिए तैयार थे। लेकिन पार्टी का लाइन कुछ अलग था। साथ ही साथ नीरज कुमार दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस के भी कई ऐसे नेता थे जो इस बिल के पक्ष में थे। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि प्रियंका गांधी खुद इस बिल का समर्थन करना चाहती थीं लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि इस विधेयक को लेकर विपक्षी खेमे में कई गुट सामने आ चुके हैं।</div><div><br></div><div>इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि सरकार 2029 चुनाव में ही महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संकल्पित है और इसको लेकर सरकार विधि विकल्प देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ तौर पर हर हाल में इस विधेयक को लेकर काफी प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं और उन्होंने कैबिनेट की बैठक में इसके पास नहीं होने पर चिंता भी जताई है। लेकिन मोदी सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा जा रहा है कि महिलाओं को यह हक मिलकर रहेगा और यह सरकार महिलाओं को उनका हक देकर भी रहेगी। सरकार पर जो विपक्ष आरोप लगा रहा है कि एकतरफा और मनमाना फैसला लिया गया। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों को पत्र लिखा था।</div><div><br></div><div>संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की यह हार मोदी सरकार के लिए एक बड़ी&nbsp; राजनीतिक असहजता के रूप में देखी जा रही है। साथ ही यह घटना न केवल एकजुट विपक्ष की ताकत का संकेत देती है, बल्कि संविधान जैसे गंभीर विषयों पर व्यापक और गंभीर संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। इस पराजय ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/jairam-ramesh-attacks-women-reservation-bill-says-it-was-a-case-of-bjp-patronage" target="_blank">महिला आरक्षण Bill पर Jairam Ramesh का हमला, यह BJP के संरक्षण का मामला था</a></h3><div><br></div><div>हम आपको बता दें कि विधेयक की प्रस्तुति और उसकी संरचना ने भी कई सवाल खड़े किए। सबसे अधिक विवाद इस बात को लेकर हुआ कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे दो अलग विषयों को एक साथ क्यों जोड़ा गया। विपक्ष ने इसे एक रणनीतिक चाल बताया, जिसका उद्देश्य एक मुद्दे की आड़ में दूसरे को आगे बढ़ाना था। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम पारदर्शिता के विपरीत है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:51:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-there-a-split-in-the-opposition-over-the-women-reservation-bill</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/20/women-reservation-bill_large_1651_8.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: West Bengal, Tamilnadu Elections में क्या हैं जमीनी हालात, बदलाव होगा या नहीं?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-is-ground-situation-in-bengal-and-tamil-nadu-elections-will-there-be-any-change-or-not]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। पश्चिम बंगाल को लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि इस बार राज्य में भाजपा के लिए एक अलग माहौल बन रहा है। भाजपा इस बार राज्य में सीधे तौर पर ममता बनर्जी को चुनौती देती हुई नजर आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का जिस तरीके से बयान आ रहा है, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि वह एक अतिरिक्त दबाव में हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि हमने देखा है कि हाल फिलहाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी प्रचार के दौरान जो भीड़ जुट रही है। उससे भाजपा पूरी तरीके से गदगद है। भाजपा ने वहां अपनी पूरी ताकत लगा रखी है। भाजपा इस बार बयानों पर नहीं बल्कि लोगों के बीच जाकर उन्हें वोट देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यह अपने आप में भाजपा के लिए बदली हुई रणनीति है। भाजपा अपनी पिछली गलतियों से सीख कर इस बार बंगाल का चुनाव में लड़ती हुई दिखाई दे रही है। इसके अलावा नीरज दुबे ने कहा साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार पिछले 15 वर्षों से हैं। ऐसे में उसके खिलाफ कुछ माहौल भी बने हैं। भाजपा उसका भी फायदा उठाने की कोशिश में है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/election-campaign-intensifies-in-bengal-bjp-manifesto-released" target="_blank">बंगाल में आक्रामक हुआ चुनाव प्रचार, जारी हुआ भाजपा संकल्प पत्र</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि इस बार भाजपा इस चुनाव को मोदी बना ममता बनर्जी नहीं होने देना चाहती। यही कारण है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेता ममता बनर्जी का नाम तक नहीं रहता है और ममता बनर्जी जो भी सवाल करती है या जो भी आरोप लगाती हैं, वहां के स्थानीय नेता ही वही की भाषा में उसका जवाब भी देता है। सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व बंगाल में बीजेपी का विजन क्या होगा, उसको लेकर बात करता है। बंगाल में किस तरीके से चीजों को आगे बढ़ाया जाएगा उसकी बात की जाती है और लोगों को यह भरोसा दिला जाता है कि आपको डरना नहीं है। आपके घर से बाहर आना है और वोट डालने जाना है।&nbsp;</div><div><br></div><div>तमिलनाडु चुनाव को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां डीएमके और एआईएडीएम के काफी बड़ी और स्थानीय पार्टी है। कांग्रेस डीएमके के साथ गठबंधन में है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी एआईएडीएम के साथ गठबंधन में है। ऐसे में उन्हें दो क्षेत्रीय दलों का साख दांव पर लगा हुआ है। एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएम के दो टर्म से सस्ता सस्ता में है। ऐसे में उसके खिलाफ कुछ नकारात्मक चीज जरूर हुई होगी। एआईएडीएमके को उसी से फायदे की उम्मीद है। एआईएडीएमके के में कोई भी प्रभावशाली नेता दिखाई नहीं देता है। इसलिए पार्टी कितनी मजबूत है, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि बीजेपी जो चुनाव लड़ रही है, वह काफी कम सीटों पलट रही है। ऐसे में भाजपा के लिए वहां अपने दम पर करने का कुछ भी नहीं है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:54:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-is-ground-situation-in-bengal-and-tamil-nadu-elections-will-there-be-any-change-or-not</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/13/west-bengal-tamilnadu-elections_large_1654_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Raghav Chadha से AAP ने क्यों बनाई दूरी? क्या है Arvind Kejriwal की मजबूरी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-has-aap-distanced-itself-from-raghav-chadha-what-is-arvind-kejriwal-compulsion]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राघव चड्ढा और मालदा घटनाक्रम पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। राघव चड्ढा के प्रकरण में नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि आखिर असली मामला क्या है यह तो या अरविंद केजरीवाल बता सकते हैं या राघव चड्ढा बता सकते हैं। लेकिन 2024 के आखिर तक दोनों के रिश्ते बेहद करीबी के रिश्ते थे और दोनों का एक दूसरे पर विश्वास भी बहुत था। लेकिन यह दूरियां क्यों आई, इस पर सवाल लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच की दूरी पिछले एक-डेढ़ सालों से लगातार दिख रही थी। फिलहाल देखें तो मनीष सिसोदिया हो या अरविंद केजरीवाल हो इन पर जिस तरीके से आरोप लगाए गए थे। केजरीवाल और बाकी पार्टी के नेताओं पर लगे आरोपों से राघव चड्ढा अपनी दूरियां बनाने लगे थे।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि मीडिया क्षेत्र में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। क्या राघव चड्ढा से केजरीवाल कुछ और चाहते थे और राघव चड्ढा ने उसे पूरा नहीं किया। यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं और इसी वजह से शायद केजरीवाल और राघव चड्ढा की दूरी हुई। नीरज दुबे ने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा ने पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए पार्टी से जुड़े मुद्दे नहीं उठाई। लेकिन क्या आम आदमी पार्टी के तमाम सांसद इस तरीके के मुद्दे उठाते हैं? राघव चढ़ा जो मुद्दे उठा रहे थे वह तो आम आदमी के मुद्दे नहीं थे? क्या इस तरह के सवाल भी आम आदमी पार्टी का कोई सांसद उठना है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/raghav-chadha-took-aim-at-kejriwal-with-his-book-writing-never-outshine-the-master" target="_blank">Raghav Chadha का किताब से Kejriwal पर निशाना? लिखा- Never Outshine The Master</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं जो राजनीति को नहीं समझते, नहीं जानते। लेकिन वह राघव चड्ढा का समर्थन कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि राघव चड्ढा ने आम लोगों से जुड़े हुए मुद्दे उठाए हैं। हर मुद्दे उठाए हैं वह पंजाब के लोगों के भी बोलते रहे हैं। वह दिल्ली के लोगों के भी मुद्दे उठाते रहे हैं। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि राजनीति में कोई भी किसी का कितना भी खास क्यों ना हो जब विश्वास कम होने लगता है तो वह खास लगातार दूर होते जाता है और यही हम राघव चड्ढा के केस में भी देख रहे हैं।</div><div><br></div><div>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव किये जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचार रणनीति का रविवार को केंद्र बिंदु बनाते हुए इस घटना को तृणमूल कांग्रेस का ‘‘महा जंगलराज’’ करार दिया। उन्होंने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए भय और भाजपा के भरोसे के बीच सीधा मुकाबला बताया। मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा होने के बाद, उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मालदा घटना का इस्तेमालभाजपा के दोहरे चुनावी मुद्दों - ‘‘बिगड़ती कानून व्यवस्था’’ और कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया।&nbsp;</div><div><br></div><div>उन्होंने कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन का हवाला देते हुए संदेशखालि मामला, बांग्लादेश से घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी का उल्लेख करते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला। मोदी ने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए एक निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश किया और चेतावनी दी कि 4 मई के बाद कानून का शासन लागू होने पर, तृणमूल कांग्रेस के गुंडों के कथित अत्याचारों का चुन चुन के हिसाब होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह क्रूर सरकार प्रतिदिन बंगाल की पवित्र भूमि को रक्तरंजित कर रही है और इसे किसी भी संवैधानिक संस्था की परवाह नहीं है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 18:20:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-has-aap-distanced-itself-from-raghav-chadha-what-is-arvind-kejriwal-compulsion</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/6/raghav-chadha_large_1820_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bengal, Assam Elections में सभी दल लगा रहे पूरा जोर, मगर जमीन पर क्या हालात हैं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/all-parties-are-going-all-out-in-bengal-assam-elections-what-is-the-actual-situation-on-ground]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह असम और पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल को लेकर हमने चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि असम में कांग्रेस के लिए स्थितियां प्रतिकूल नजर आ रही है। कांग्रेस अपनी कमजोरी से एक बार फिर से चुनाव में पीछे होती दिखाई दे रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल में इंडिया गठबंधन का नामोनिशान नहीं है। वहां ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है। दोनों दलों में वार-पटवार का दौर लगातार जारी है और ऐसे में इस बार भाजपा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल में इस बार भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति है।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद हुए कई विधानसभा चुनावों ने यह संकेत दिया कि भाजपा अभी भी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे मजबूत ताकत बनी हुई है। विपक्ष को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन के बाद उसका मनोबल बढ़ेगा, लेकिन बाद के चुनावों में भाजपा ने अपनी पकड़ बनाए रखी। अब पांच राज्यों में हो चुका चुनावी शंखनाद का दौर यह तय करेगा कि क्या भाजपा उन राज्यों में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकती है जहां अब तक उसे सत्ता नहीं मिली है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/will-the-assembly-election-results-determine-the-socio-political-future-of-the-upper-castes" target="_blank">क्या पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम सवर्णों के राजनीतिक-सामाजिक भविष्य को तय करेंगे?</a></h3><div>भाजपा इस चुनावी दौर में असम में सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ उतर रही है। 2016 से राज्य की सत्ता में मौजूद भाजपा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है। पार्टी ने बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ और स्थानीय पहचान के मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया है, जिससे चुनावी वातावरण और अधिक तीखा हो गया है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा अब तक सत्ता से दूर रही है, लेकिन इस बार वह पूरी ताकत के साथ अपनी राजनीतिक उपस्थिति को विस्तार देने की कोशिश कर रही है। इन राज्यों में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय दल हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भाजपा के सबसे मुखर विरोधियों में शामिल हैं और दोनों ही नेता इस चुनावी मुकाबले में सीधे भाजपा के निशाने पर हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि भाजपा का दावा है कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों ने व्यापक राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। पार्टी का मानना है कि इन मुद्दों ने राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को मजबूत किया है और इससे उसे चुनाव में फायदा मिल सकता है। ममता बनर्जी 2011 से लगातार सत्ता में हैं और उन्होंने कई बार भाजपा की चुनौती को रोकने में सफलता हासिल की है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इसके बाद हुए चुनावों में भाजपा का मत प्रतिशत लगभग 38 से 39 प्रतिशत के बीच स्थिर रहा है, जिससे पार्टी को उम्मीद है कि इस बार वह ममता बनर्जी के किले में बड़ी सेंध लगा सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:59:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/all-parties-are-going-all-out-in-bengal-assam-elections-what-is-the-actual-situation-on-ground</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/3/23/bengal-assam-elections_large_1702_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: LPG Shortage क्यों हुई, क्या गैस की कमी के संकट का ठीक से सामना नहीं कर रहे PM]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-did-the-lpg-shortage-occur-is-the-pm-failing-to-adequately-address-the-gas-shortage-crisis]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश में गैस संकट को लेकर चर्चा की। हमने नीरज दुबे से सवाल किया कि क्या वाकई में देश में एलपीजी गैस सिलेंडर का संकट है या विपक्ष सिर्फ अफवाह फैला रहा है जिस बात का दवा सरकार की ओर से किया जा रहा है। इसके जवाब में नीरज दुबे ने कहा कि हां, संकट जरूर है लेकिन वह संकट सिर्फ व्यावसायिक सिलेंडर पर है। घरेलू सिलेंडर आपको ढाई दिनों के अंदर मिल जा रहे हैं और इसके लिए हमें कुछ अतिरिक्त करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। जहां से भी लाइन लगे रहने की तस्वीर सामने आ रही है वह सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि अफवाहें तेजी से फैल रही है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि हमने पहले भी देखा है कि किस तरीके से एक बार नमक खत्म होने का फैलाया गया था और लंबी-लंबी लाइन देखने को मिली थी।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि देश में एलपीजी का कोई संकट नहीं है। देश में डीजल पेट्रोल का कोई संकट नहीं है। हम लगातार अपनी क्षमताओं को वृद्धि कर रहे हैं। हम अरब देशों से अपनी डिपेंडेंसी को कम कर रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्र से हम क्रूड ऑयल मंगा रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि हम ईरान से भी संपर्क रख रहे हैं ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए हमारे जहाज गुजर सके। उन्होंने कहा कि भारत आज हर वर्ष लगभग 3 करोड़ टन से अधिक एलपीजी का उपभोग करता है लेकिन घरेलू उत्पादन इस मांग का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कर पाता। शेष आवश्यकता खाड़ी देशों से आयात करके पूरी की जाती है। अनुमान है कि भारत में आने वाली एलपीजी का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। यही कारण है कि जैसे ही इस मार्ग में व्यवधान आया, उसका सबसे पहला और सबसे तेज असर भारत की रसोई पर दिखाई देने लगा। यह एक कठोर सच्चाई है कि भारतीय परिवारों की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक एक संकरे समुद्री मार्ग पर निर्भर है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/questions-arising-from-gas-queues-how-secure-is-india-energy-system" target="_blank">गैस की कतारों से उठते सवाल: कितनी सुरक्षित है भारत की ऊर्जा व्यवस्था?</a></h3><div>इसी संकट के दौरान पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता अपेक्षाकृत सामान्य बनी हुई है। पैट्रोल पंपों पर न तो लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और न ही कीमतों में अचानक उछाल आया है। इसका कारण यह है कि भारत ने पिछले वर्षों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अपेक्षाकृत अधिक लचीला ढांचा विकसित किया है। आज भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और रूस, अमेरिका तथा अफ्रीका के कई देशों से आने वाला तेल ऐसे मार्गों से भारत पहुंचता है, जो होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं। इसके अतिरिक्त भारत के पास रणनीतिक पैट्रोलियम भंडार भी मौजूद हैं, जिनमें आपातकालीन परिस्थितियों के लिए लाखों बैरल कच्चा तेल संग्रहीत किया जाता है। इन भंडारों और विविध आपूर्ति स्रोतों के कारण पैट्रोल और डीजल की उपलब्धता तुरंत प्रभावित नहीं होती।</div><div><br></div><div>संसद में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ ले गए प्रस्ताव को लेकर भी हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने इसको लेकर कहा कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में बेहद अहम है लेकिन विपक्ष का बर्ताव जिस तरीके से रहा है वह सही नहीं है। राहुल गांधी को हमेशा बोलने का मौका मिलता है। लेकिन वह मुद्दों पर नहीं रहते बल्कि इधर-उधर की बातें ज्यादा करते हैं। राहुल गांधी को समझना होगा कि वह विपक्ष के नेता है और उनकी बातों में गंभीरता होनी चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:04:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-did-the-lpg-shortage-occur-is-the-pm-failing-to-adequately-address-the-gas-shortage-crisis</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/3/17/lpg_large_1706_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: बिहार की गद्दी छोड़ कर Rajya Sabha की सीट पर क्यों जा रहे हैं Nitish Kumar?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-nitish-kumar-leaving-the-throne-of-bihar-and-going-for-rajya-sabha-seat]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क&nbsp; के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह बिहार की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने तमाम सवालों का जवाब दिया। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार पहले भी यह बात कह चुके हैं कि उन्हें राज्यसभा जाने की इच्छा है। अब वह समय आ गया है। नीतीश कुमार अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं जैसा कि उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा है। उन्होंने कहा कि 2020 में जब चुनाव हुए थे तब नीतीश कुमार तीसरे नंबर की पार्टी बन गए थे। बावजूद इसके भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इस बार भाजपा बड़ी पार्टी है। नीतीश कुमार की जदयू ने भी अच्छी खासी सीटे हासिल की है। लेकिन जिस तरीके से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य का हाल है, उसको लेकर कई सवाल बने हुए हैं और शायद यही कारण है कि नीतीश कुमार अब दिल्ली जाने का फैसला कर रहे हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार को बिहार में सभी लोग पसंद करते हैं। उन्होंने बिहार को बदलने का काम किया हैं। नीतीश कुमार की बदौलत एनडीए बिहार में जीत हासिल करता रहा है। नीतीश कुमार की आज भी बिहार में स्वीकारता है। वह बिहार के सर्वमान्य नेता है। ऐसे में नीतीश कुमार की बिहार में लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर वहां प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे साफ तौर पर हम कह सकते हैं कि नीतीश अभी भी बिहार में बहुत ही लोकप्रिय नेता हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/before-going-to-rajya-sabha-nitish-kumar-big-attack-on-rjd-asked-what-did-you-do-for-women" target="_blank">Rajya Sabha जाने से पहले RJD पर Nitish Kumar का बड़ा हमला, पूछा - महिलाओं के लिए क्या किया?</a></h3><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि बिहार को जंगल राज की छवि से नीतीश कुमार ने बाहर निकाला है। नीतीश कुमार ने कई बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार से भले ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी ले जा सकती है लेकिन उन्होंने बिहार के लिए जो काम किया है उसको हमेशा याद किया जाएगा। इतना ही नहीं, नीरज कुमार दुबे ने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार भविष्य में कभी वापस मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आना चाहे तो मतदाताओं का साथ उन्हें मिल सकता है। मतदाता लगातार नीतीश कुमार के साथ बने रह सकते हैं। यही नीतीश कुमार की मजबूती है और इस बात को उनके सहयोगी दल भी अच्छे से समझते हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सलाह पर यह निर्णय लिया गया लगता है, क्योंकि 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी (89 सीटें) बन गई है। इससे बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनना आसान हो सकता है, जबकि नीतीश के बेटे निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि, जदयू में उनके इस फैसले पर असंतोष है, लेकिन इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे बीजेपी का "मास्क" हटाने का प्रयास मान रहा है। इससे राजद को पुनः सियासी ऑक्सीजन मिल सकता है। यूँ तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के नए मुख्यमंत्री की घोषणा अभी स्पष्ट रूप से नहीं हुई है, क्योंकि यह प्रक्रिया राज्यसभा चुनाव के परिणाम (16 मार्च 2026) के बाद शुरू होगी। एनडीए में बीजेपी का सबसे बड़ा दावा माना जा रहा है, क्योंकि उनके पास 89 विधायक हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 19:01:32 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-nitish-kumar-leaving-the-throne-of-bihar-and-going-for-rajya-sabha-seat</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/3/10/nitish-kumar_large_1903_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Youth Congress Protest से बढ़ी कांग्रेस की टेंशन, Anti-India Party होने का आरोप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/youth-congress-protest-increases-congress-tension-accuses-it-of-being-an-anti-india-party]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क&nbsp; के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के आयोजन स्थल भारत मंडपम में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर पूछे गए सवालों के जवाब में नीरज कुमार दुबे ने कहा कि पार्टी के युवा मोर्चे के द्वारा जो कुछ भी किया गया, वह बिल्कुल शर्मनाक है। यह आयोजन मोदी का नहीं था, यह आयोजन भाजपा का नहीं था, यह आयोजन भारत की सरकार का था। इस देश के नागरिकों का था और कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन मोदी या फिर भाजपा के विरोध में नहीं, बल्कि यह देश के विरोध में किया गया। उन्होंने कहा कि जब देश दुनिया के लोग वहां जुटे हुए थे और आप वहां पहुंचकर इस तरीके का कृत्य करें, इसे बिल्कुल माफ नहीं किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने दावा किया कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। टी-शर्ट कैसे छपे, पैसे इसके लिए कहां से आए। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा में कोई चूक नहीं था बल्कि यह प्लान किया हुआ था। इसका बहुत पहले से प्लान कर लिया गया था। तभी सम्मेलन के आखिरी दिन इसको अंजाम दिया गया, यह जानते हुए की आखिरी दिन वीवीआईपी मूवमेंट की कमी होगी और ऐसे में सुरक्षा को भेदना बहुत बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के पहुंचने से पहले जो लोग वहां मौजूद थे, उन्होंने ही कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का विरोध करना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोगों ने प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि हमारे लिए इस तरह की राजनीति सामान्य बात हो सकती है लेकिन विदेशी मेहमानों के लिए यह सामान्य नहीं है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/delhi-police-action-against-shirtless-protestors-at-ai-summit-arrests-two-more-senior-iyc-leaders" target="_blank">AI Summit में Shirtless Protest पर Delhi Police का एक्शन, IYC के 2 और बड़े नेता गिरफ्तार</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि विदेश के जो प्रतिनिधि आए हुए थे, वह बिना किसी सिक्योरिटी के इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। मामूली सिक्योरिटी के साथ तमाम हॉल में वह जा रहे थे। ऐसे में आप अगर इस तरह की चीज करते हैं तो यह हमारे देश की छवि के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। अगर आप इस तरीके का प्रदर्शन करेंगे तो भारत के लोग गुस्सा होंगे ही। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जो कुछ भी किया उसे देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। आपके देश की छवि खराब हो सकती है। अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है लेकिन राष्ट्र के विरोध की आजादी किसी को नहीं होनी चाहिए और कांग्रेस को भी अपने कार्यकर्ताओं को समझाना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छोटा बना कर इस मुद्दे को पीछे नहीं करना होगा। इस मुद्दे की पूरी तरीके से जांच होनी चाहिए। 80 से ज्यादा देशों की इस सम्मेलन में प्रत्यक्ष भागीदारी हुई है। ऐसे में इस सम्मेलन की महता को हम सभी को समझना होगा। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उस जगह इस तरीके का प्रदर्शन किया जहां आधी दुनिया के लोग इकट्ठा थे। कांग्रेस बौखलाई हुई है। कांग्रेस को सत्ता नहीं मिल रही है। वह किसी भी कीमत पर सत्ता चाहती है। इसके लिए उसे देश का विरोध ही क्यों न करना पड़े, कांग्रेस इससे भी पीछे नहीं हो रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:24:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/youth-congress-protest-increases-congress-tension-accuses-it-of-being-an-anti-india-party</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/2/23/youth-congress-protest_large_1827_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: हर बात पर नकारात्मक राजनीति और हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष को क्यों भाता है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-does--opposition-like-to-do-negative-politics-on-every-issue-and-criticize-every-decision]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद में जारी गतिरोध और राहुल गांधी को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने संसद में हंगामा को लेकर कहा कि यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 2026 का बजट सत्र शुरू हुआ। देश को इससे बहुत उम्मीदें थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जो हो हल्ला हुआ, प्रधानमंत्री को बोलते नहीं दिया गया, यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है। ऐसा लग रहा है कि विपक्ष ने संसद को बंधक बना दिया है और गोरिल्ला युद्ध लड़ रहा है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि स्पीकर के कमरे में जाकर विपक्ष के सांसदों ने जो बातें कहीं, वह गलत है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है और संसदीय परंपरा को तार-तार कर रहा है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि संसदीय परंपरा में नियम है, कानून है। आपको उसी के अनुसार चलना होता है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी का बॉडी लैंग्वेज तक संसदीय परंपरा के हिसाब से नहीं है। ऐसा लगता है कि वह संसद में किसी से भिड़ने पहुंचते हैं। राहुल गांधी ऐसे लहजे का प्रयोग करते हैं जैसा कि वह किसी शाही परिवार से हो या राजा हो। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल को राहुल गांधी ने टारगेट किया, वह भी बिल्कुल ठीक नहीं था। भले ही वह मामला हंसी मजाक में टल गया लेकिन यह लोकतंत्र के खिलाफ है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/parliament-has-become-an-arena-instead-of-solving-problems" target="_blank">समस्याओं के निराकरण के बजाए अखाड़ा बनी संसद</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि अगर आपके खिलाफ कोई अदालत फैसला दे दे तो आप जज के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाएंगे, अगर स्पीकर आपके खिलाफ कोई बात कह दे आप उसके खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे, इलेक्शन कमीशन आपके हिसाब से कम ना करें तो उसके खिलाफ आप प्रस्ताव लाएंगे। यह कहीं से भी किसी भी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में विपक्ष सिर्फ ब्लैकमेल की राजनीति कर रहा है और यह कहीं से भी ठीक नहीं है। नकारात्मक विपक्ष की भूमिका हमारे विरोधी पार्टियां निभा रही हैं जो कि हमारे जैसे लोकतंत्र देश के लिए ठीक नहीं है।&nbsp;</div><div><br></div><div>राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे द्वारा लाए गए प्रस्ताव को लेकर जब हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी जो कुछ भी करते हैं, उस पर तो बात होनी चाहिए। इसके अलावा एमएम नरवाने की किताब को लेकर जो विवाद चल रहा है उसकी भी पूरी तरीके से जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी को किताब कहां से मिली, यह बात सामने आना चाहिए। साथ ही साथ राहुल गांधी के खिलाफ जो प्रस्ताव आया है, ऐसा लगता है कि सरकार उसके साथ खड़ी है और राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पर आने वाले दिनों में हमें संसद में चर्चा देखने को मिल सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 19:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-does--opposition-like-to-do-negative-politics-on-every-issue-and-criticize-every-decision</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/2/16/rahul-gandhi_large_1914_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Loksabha में इस बार का हंगामा क्यों सबसे अलग था? क्या PM के खिलाफ कोई साजिश थी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-was-this-time-uproar-in-the-ls-different-from-others-was-there-a-conspiracy-against-the-pm]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश के संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे बवाल पर चर्चा की। हमेशा की तरह कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने कहा कि देश का बजट सत्र चल रहा है। संसद चल रहा है। एक दिन के लाखों में खर्च होते हैं। लेकिन अफसोस है कि लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भी हमारा सांसद नहीं चल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जिम्मेदार है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी को जनता से जुड़े मुद्दे को उठाना चाहिए था। बजट सत्र में तमाम मुद्दों पर चर्चा होती है। लेकिन राहुल गांधी ऐसे किताब का हवाला दे रहे हैं और उस पर चर्चा की मांग कर रहे हैं जो अब तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को परिपक्व बनना पड़ेगा। संसद में परिपक्वता के साथ व्यवहार करना पड़ेगा। संसद हो हल्ला करने की जगह नहीं है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/parliament-diary-lok-sabha-proceedings-again-marred-by-uproar-budget-discussed-in-rajya-sabha" target="_blank">Sansad Diary: फिर हंगामे की भेंट चढ़ी लोकसभा की कार्यवाही, राज्यसभा में बजट पर चर्चा</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद सत्र से पहले सर्दलीय बैठक होती है। कार्य मंत्रणा समिति की भी बैठक होती है। इस दौरान इन बातों पर चर्चा होती है कि संसद के दौरान कौन-कौन से मुद्दे को उठाना है। हालांकि जो बातें बैठकों में होती है उस पर न सत्ता पक्ष और ना ही विपक्ष अमल करते हैं। हो-हल्ला शुरू हो जाता है। ऐसे में जनता के मुद्दे पीछे हो जाते हैं और सवाल ईगो पर आ जाता है। उन्होंने कहा कि जिन नियमों के तहत कांग्रेस एक ऐसी पुस्तक पर चर्चा की मांग कर रही है जो प्रकाशित हो नहीं हुआ है। अगर नियम में ऐसा कुछ नहीं है तो फिर चर्चा कैसे हो सकती है। नियम इस सरकार ने नहीं बनाए हैं। नियम पहले से ही बने हुए हैं।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री को बोलना था, तब कांग्रेस के महिला नेता उनके कुर्सी के पास पहुंच जाते हैं। स्पीकर की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारू रूप से चले। इसको लेकर वह काम करें। हालांकि, स्पीकर के पास तमाम खुफिया सूचनाएं मिल जाती हैं और यही कारण है कि प्रधानमंत्री को लेकर उनके पास कुछ सूचनाएं गई होंगी। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब नहीं देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि कई बार हमने देखा है कि संसद के भीतर सुरक्षा में चूक हुई है। यही कारण है कि स्पीकर भी काफी सतर्क रहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि संसद भारत के लोकतंत्र का मंदिर है। वहां नियमों के हिसाब से हर चीज होना चाहिए। हर चीज नियम के हिसाब से हो इसकी जिम्मेदारी स्पीकर और अध्यक्ष के पास होती है। लेकिन विपक्ष अगर चाहता है कि सब कुछ उसके मुताबिक हो तो यह संभव नहीं है और अगर प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश होती है या योजना बनाई जाती है तो यह बिल्कुल लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। इससे विपक्ष की सोच पर कई सवाल खड़े होते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:42:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-was-this-time-uproar-in-the-ls-different-from-others-was-there-a-conspiracy-against-the-pm</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/2/9/loksabha_large_1843_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Maharashtra CM Devendra Fadnavis का शासन मॉडल जीत की गारंटी कैसे बनता जा रहा है]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-is-maharashtra-cm-devendra-fadnavis-governance-model-becoming-a-guarantee-of-victory]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने महाराष्ट्र के चुनाव में भाजपा और महायुति की हुई जीत पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरीके से भाजपा की जीत हुई है, यह अपने आप में दिखता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार राजनीतिक तौर पर अपने कद को ऊपर कर रहे हैं। नीरज दुबे ने दावा किया कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े चाणक्य हुए लेकिन सबको देवेंद्र फडणवीस ने अपनी रणनीति से सबको पीछे छोड़ दिया।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि वह महाराष्ट्र में अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी सेवा दे चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री होने के बाद भी पार्टी संगठन के लिए उपमुख्यमंत्री पद का स्वीकार किया था। यह अपने आप में उन्होंने बड़ी कुर्बानी दी थी। लेकिन उन्होंने जो कार्यकर्ताओं को संदेश दिया था उसी का नतीजा है कि आज महाराष्ट्र में भाजपा ने जबरदस्ती जीत हासिल की है। कभी महाराष्ट्र में भाजपा एकदम अंतिम पार्टी हुआ करती थी। लेकिन आज महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पीछे देवेंद्र फडणवीस और संगठन का मेहनत है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि ठाकरे बंधुओं का इस चुनाव में काफी कुछ दांव पर लगा था। वह पूरी तरीके से विफल रहे। ठाकरे बंधुओं की जो बांटने की राजनीति है, उसको जनता ने नाकार दिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/political-implications-of-the-2026-bmc-elections" target="_blank">बीएमसी चुनाव 2026 के सियासी मायने, महायुति के राजनीतिक कौशल को मिली जनस्वीकृति</a></h3><div>दुबे ने कहा कि मुंबई के अलावा पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जैसे शहरों में भी भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। ये क्षेत्र पारंपरिक रूप से पवार परिवार के प्रभाव वाले माने जाते रहे हैं। यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों का लंबे समय तक नियंत्रण रहा है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने इन गढ़ों में सेंध लगाकर यह साबित कर दिया कि उसका संगठनात्मक विस्तार और जमीनी रणनीति अब पूरे राज्य में असर दिखा रही है। नागपुर, नाशिक और अन्य प्रमुख नगर निकायों में भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट बहुमत या मजबूत स्थिति हासिल की है। इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि शहरी मतदाता भाजपा के विकास आधारित प्रचार और नेतृत्व से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और डिजिटल सेवाओं जैसे मुद्दे चुनाव के दौरान प्रमुखता से उठे और मतदाताओं ने इन्हीं आधारों पर मतदान किया।</div><div><br></div><div>नीरज कुमार दुबे ने कहा कि विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। ठाकरे और पवार नाम जो कभी महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे मजबूत ब्रांड माने जाते थे, वह इस चुनाव में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सके। कई स्थानों पर उनकी पार्टियों को न केवल सीटों का नुकसान हुआ बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक चुनावी हार नहीं है बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक रुझानों का संकेत है। इन चुनावों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए यह परिणाम एक संकेत के रूप में देखे जाएंगे। भाजपा के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है जबकि विपक्ष के लिए यह चेतावनी है कि यदि रणनीति और नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया तो भविष्य की राह और कठिन हो सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 19:31:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-is-maharashtra-cm-devendra-fadnavis-governance-model-becoming-a-guarantee-of-victory</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/1/19/devendra-fadnavis_large_1935_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: क्या इस बार नहीं चल पायेगा Mamata Banerjee का खेला? इतनी परेशान क्यों है TMC?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-mamata-banerjee-political-game-fail-this-time-why-is-the-tmc-so-worried]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पश्चिम बंगाल और दिल्ली की राजनीति पर बातचीत की है। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने पश्चिम बंगाल को लेकर साफ तौर पर कहा कि जिस तरह की स्थिति वहां पर देखने को मिल रही है, उससे ऐसा लगता है कि राज्य में कानून व्यवस्था की अच्छी स्थिति नहीं है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जब कोई आम व्यक्ति सरकारी कामकाज में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है लेकिन ममता बनर्जी के खिलाफ के कार्यवाही क्यों नहीं की गई? सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि जिनके ऊपर कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी है, वही कानून का मजाक बना रही हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने आगे कहा कि अगर ममता बनर्जी को लगता है कि जो कार्रवाई हो रही है वह किसी राजनीतिक दुर्भावना से की जा रही है तो उनको जवाब देना चाहिए कि आखिर पूरा मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के कई मंत्रियों के यहां, कई विधायकों के यहां छापे पड़ते रहे हैं। लेकिन ममता बनर्जी सिर्फ आई पैक्क के ही ऑफिस में क्यों गईं? सिर्फ प्रतीक जैन के यहां ही क्यों गईं? इससे कई संदेह पैदा होता है। नीरज दुबे ने कहा कि इससे संदेह यह उठता है कि क्या ममता बनर्जी का कोई हित है जो प्रभावित हो रहा है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/case-filed-in-supreme-court-against-mamata-for-threatening-ed-officials" target="_blank">West Bengal में सियासी घमासान, ED अधिकारियों को धमकाने पर Mamata के खिलाफ Supreme Court में केस</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि अब तक हमने पश्चिम बंगाल में कई बार देखा है कि जो जांच एजेंसी जाती है, उन पर हमले किए जाते हैं, उन पर पत्थर बाजी की जाती है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि कानून व्यवस्था को लेकर बंगाल में सवाल खड़े होते हैं। ममता बनर्जी उसको दुरुस्त करने की बजाय खुद सड़कों पर उतरकर कानून व्यवस्था को तार-तार करती हैं और अपने समर्थकों को खुली छूट मिलने का भी संदेश देती है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी जो कुछ भी कर रही हैं, वह कार्यकर्ताओं के लिए भी एक संदेश देना चाहती हैं कि हमें भी ऐसे ही सड़कों पर उतरना होगा यही काम करना होगा। इसका मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव में विकास, रोजगार मुद्दा नहीं रहने वाला है सिर्फ सत्ता को बचाने की कवायद देखने को मिलेगी।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><div>दिल्ली की राजनीति को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि अरविंद केजरीवाल फिलहाल पूरी तरीके से पंजाब शिफ्ट हो गए हैं। उनको दिल्ली से कोई मतलब नहीं है। दिल्ली में विधानसभा का सत्र चल रहा है। लेकिन जो नेता प्रतिपक्ष है वह गोवा गायब हो जाती हैं। इसके अलावा आतिशी जब विधानसभा में आती है तो वह जिस तरीके से गुरुओं को लेकर बयान देती हैं जिसके बाद से बीजेपी सवाल खड़े कर रही है। आम आदमी पार्टी पूरा का पूरा पंजाब फोकस करके बैठी हुई है ताकि वहां सरकार बचाई जा सके। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अब आम आदमी पार्टी पंजाब से ही चल रही है। आम आदमी पार्टी पूरी तरीके से पंजाब में राजनीतिक कर रही है। दिल्ली में फिलहाल पार्टी सक्रिय दिखाई नहीं दे रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 19:52:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/will-mamata-banerjee-political-game-fail-this-time-why-is-the-tmc-so-worried</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/1/12/mamata-banerjee_large_1955_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bengal, Assam, Tamilnadu, Kerala Elections में किस पार्टी का पलड़ा भारी है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/which-party-has-the-upper-hand-in-bengal-assam-tamil-nadu-kerala-elections]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने 2026 में देश में अलग-अलग राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। हमने नीरज दुबे से सबसे पहला सवाल पश्चिम बंगाल को लेकर पूछा पश्चिम बंगाल को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि देखा जाये तो पश्चिम बंगाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। तृणमूल कांग्रेस आज सत्ता की थकान और आत्मसंतोष की शिकार दिख रही है। स्थापना दिवस के भाषणों में संघर्ष की बातें जरूर हैं, लेकिन उन शब्दों में वह धार नहीं दिखती जो कभी ममता बनर्जी की पहचान हुआ करती थी। दुष्ट ताकतों का जिक्र दरअसल अपनी कमजोरियों से ध्यान हटाने का प्रयास अधिक लगता है। लंबे समय तक सत्ता में रहने का बोझ अब तृणमूल पर साफ दिखने लगा है। भ्रष्टाचार के मामलों, संगठनात्मक ढीलापन, जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष और जनता के रोजमर्रा के सवालों से कटाव ने पार्टी को रक्षात्मक बना दिया है। मां माटी मानुष का नारा आज भी दोहराया जा रहा है, लेकिन मानुष के मन में उठ रहे सवालों के ठोस जवाब तृणमूल के पास नहीं दिखते।</div><div><br></div><div>इसके विपरीत भाजपा आक्रामक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर चुकी है। अमित शाह की यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी घुसपैठ, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर तृणमूल कांग्रेस को घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। साथ ही संगठन को मजबूत करने पर जोर और अनुशासनात्मक निर्देश यह बताते हैं कि भाजपा ने पिछली गलतियों से सीख ली है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा ने बंगाल में वैचारिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर लड़ाई की तैयारी कर ली है। संघ के साथ तालमेल और पुराने चेहरों की वापसी यह संकेत देती है कि पार्टी अंदरूनी मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुट मोर्चा बनाना चाहती है। यह एक ऐसी रणनीति है जो तृणमूल के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/has-delimitation-changed-assam-political-equation-cm-himanta-saidnow-the-nda-will-win-103-seats" target="_blank">परिसीमन ने बदला Assam का सियासी समीकरण? CM Himanta बोले- अब NDA जीतेगी 103 सीटें</a></h3><div>पश्चिम बंगाल के अलावा हमने असम तमिलनाडु केरल पर भी चर्चा की। असम को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां एकतरफा मुकाबला नजर आ रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा की पकड़ बहुत मजबूत है। इतना ही नहीं, हिमंत बिस्वा सरमा जबरदस्त तरह की राजनीति करते हैं और साफ तौर पर वह सामाजिक समीकरणों को साधने में कामयाब हुए हैं। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य के हिंदू ही नहीं, बल्कि स्थाथी मुसलमान भी पसंद करते हैं जो असम के रहने वाले हैं। उनके लिए हिमंत बिस्वा सरमा लगातार मजबूती से काम करते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस में अभी भी गठबंधन को लेकर कंफ्यूजन है। साथ ही साथ कांग्रेस जमीन पर काम करती हुई दिखाई नहीं दे रही है।</div><div><br></div><div>तमिलनाडु को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार वहां सियासत जबरदस्त तरीके से हो रही है। हां, यह बात सही है कि सत्ता में रहते हुए डीएमके इस वक्त काफी मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, एआईएडीएमके के गठबंधन से डीएमके को बड़ी चुनौती की उम्मीद है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि तमिलनाडु में 10 सालों से एमके स्टालिन की सरकार है। ऐसे में उनकी सरकार के खिलाफ नाराजगी जबरदस्त तरीके से कई बार हमें देखने को मिली है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप उनकी सरकार पर लगे हैं। ऐसे में एआईएडीएमके के और भाजपा का गठबंधन वहां कुछ खास कर सकता है। हालांकि नीरज दुबे ने यह भी कहा कि एआईएडीएमके के जो पुराने नेता है, उनको साथ लिया जाए तो वहां मुकाबला एकतरफा भी हो सकता है। केरल को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां यूडीएफ और एलडीएफ की लड़ाई है। भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी जरूर है लेकिन अभी इतनी ज्यादा नहीं है कि वहां सरकार बन सके।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 15:30:53 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/which-party-has-the-upper-hand-in-bengal-assam-tamil-nadu-kerala-elections</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/1/5/assembly-elections-2026_large_1532_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Modi Govt के खिलाफ Congress करेगी हल्लाबोल, क्या Bangladesh में होगा Action?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/congress-party-will-launch-a-protest-against-the-modi-government]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने मनरेगा को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन और बांग्लादेश की स्थिति पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर कहा कि सरकार जो जी राम जी बिल लेकर आई है, उसका देशभर में स्वागत हो रहा है। हालांकि कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। मनरेगा हो या फिर जी राम जी विधायक हो, उससे किसका फायदा होना था, उन लोगों को फायदा होना था जो देश के ग्रामीण हिस्सों में रहते हैं जो मजदूरी करते हैं, जिन्हें रोजगार चाहिए और वह सब उसका स्वागत कर रहे हैं। लेकिन इस बिल का विरोध कौन कर रहा है, इस बिल का विरोध वह लोग कर रहे हैं जिनको सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक करनी होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने आगे कहा कि किसी भी राज्य से यहां तक की कांग्रेस शासित राज्यों से भी इस तरह की कोई खबरें नहीं आई कि इस बिल के खिलाफ कोई मजदूर संगठन प्रदर्शन कर रहा है, सड़क पर उतरा है। वैसे लोग भी अभी तक सामने नहीं आए हैं जिन्हें लगता है कि इस बिल के आ जाने के बाद से उनका रोजगार खत्म हो सकता है। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि जी राम जी बिल का सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस विरोध कर रही है। उसके जो इंडिया गठबंधन के साथी हैं, वह भी इसका खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। ममता बनर्जी की चुनावी मजबूरी है इसलिए फिलहाल वह इस मुद्दे पर बोलती हुई दिखाई दे रही हैं। नीरज दुबे ने कहा कि हां, यह बात सही है कि कई दलों ने महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के नाम को कहीं से हटाया नहीं जा सकता है। हां, नाम बदला गया है। लेकिन महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता है. वे लोगों के दिलों में बसते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/story-of-a-folded-mountain-range-older-than-present-day-india-aravalli-hills-controversy" target="_blank">आज के भारत से भी पुराने फोल्डेड माउंटेन रेंज की कहानी... जिसके लिए अपने ही फैसले पर SC को लेना पड़ा U-टर्न</a></h3><div>नीरज दुबे ने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। एक पड़ोसी के नाते हम सब बहुत चिंतित हैं। बांग्लादेश के हालात पर भारत सरकार नजर बनाए हुए है। वहां पर जिस तरीके से अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, उस पर भारत गौर कर रहा है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार का मुद्दा वहां के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के समक्ष भी उठा चुके हैं। नीरज दुबे ने कहा कि अभी हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार का बांग्लादेश में यह दूसरा दौर चल रहा है। हालांकि भारत अभी भी कठोर शब्दों में इसकी निंदा कर रहा है और संबंधित लोगों के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में भारत के खिलाफ जो भी दुष्प्रचार चल रहा है, उसको लेकर भी केंद्र सरकार अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कर रहा है।</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी में हर चीज के अलग-अलग तरीके बनाए गए हैं। भारत उन तरीकों को अपनाते हुए आगे बढ़ रहा है। संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा कूटनीतिक तौर पर उठाया जा रहा है। तमाम जो विकल्प उपलब्ध है, भारत उसका इस्तेमाल कर रहा है। बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है उसकी वजह से भारत सरकार पूरी तरीके से सतर्क है। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा चुका है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 19:06:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/congress-party-will-launch-a-protest-against-the-modi-government</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/12/29/congress_large_1907_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Parliament Session कितना सार्थक रहा? Priyanka Vadra के रुख ने क्या संकेत दिया?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-productive-was-the-parliament-session-what-did-priyanka-vadra-stance-indicate]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद सत्र को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। नीरज कुमार दुबे से हमने पहला सवाल जी राम जी विधेयक पर ही पूछा। इसके जवाब में नीरज कुमार दुबे ने कहा कि कहा कि मनरेगा की जगह जी राम जी विधेयक को लाना आज के समय की जरूरत है और दूसरी वजह हर सरकार अपने हिसाब से काम करती है। अपने हिसाब से किसी भी कानून का नामकरण करती है। इस सरकार के बाद अगर कोई दूसरी सरकार आती है तो उसके पास भी किसी योजना के नाम बदलने का अधिकार होता है।</div><div><br></div><div>इसके साथ ही नीरज दुबे ने यह भी कहा कि जहां तक रही बात महात्मा गांधी जी के नाम को इस योजना से हटाने की तो सरकार बार-बार कह रही है कि हम महात्मा गांधी का सम्मान करते हैं और मोदी सरकार की सबसे पहली और सबसे बड़ी योजना स्वच्छ भारत अभियान भी महात्मा गांधी के ही नाम पर था और उन्हीं के जन्म दिवस के अवसर पर से शुरू किया गया था। नीरज दुबे ने कहा कि मनरेगा में कई राज्यों के अलग-अलग शिकायतें होती थी। उन शिकायतों को दूर करने के लिए जी राम जी विधेयक को लाया गया है। हालांकि यह भी दावा किया जा रहा है कि राज्यों पर अतिरिक्त भोज पड़ेगा। लेकिन उसमें भी राज्यों को कई बड़े अधिकार दिए गए हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/end-of-mnrega-would-be-collective-moral-failure-we-must-unite-to-protect-sonia-gandhi" target="_blank">मनरेगा का खत्म होना सामूहिक नैतिक विफलता, अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा: सोनिया गांधी</a></h3><div>दुबे ने कहा कि मनरेगा में जो तकनीकी खामियां थी, उसे दूर करने की कोशिश की गई है। साथ ही साथ 100 दिन की जगह अब 125 दिन रोजगार गारंटी मिल रही है। इसे भी सरकार अपनी कामयाबी बता रही है। विपक्ष की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि कांग्रेस सरकार द्वारा इस योजना को लाया गया था। इसे कांग्रेस का सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया गया था। लेकिन आज इस योजना को मोदी सरकार बदल रही है। ऐसे में विपक्ष में रहने की वजह से कांग्रेस को इसका विरोध करना बनता है और कांग्रेस वही कर रही है। इसे सिर्फ और सिर्फ सियासत के चश्मे से ही देखा जाना चाहिए। बाकी जरूरत के हिसाब से सरकारें योजनाओं को लेकर आती हैं या उनमें सुधार करती है।</div><div><br></div><div>संसद के कामकाज को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार संसद के दोनों सदनों में अच्छा काम काज हुआ। यह हर देशवासी के लिए संतोष की बात है और हर देशवासी यह उम्मीद करेगा कि आगे भी ऐसा ही कामकाज संसद के दोनों सदनों में हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ छात्रों में हमने देखा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने सामने होता था। लेकिन इस बार शुरुआत के एक-दो दिन छोड़ दिया जाए तो सामान्य कामकाज दोनों ही सदनों में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बड़े कामकाज इस सत्र में हुए हैं। चुनाव सुधार और वंदे मातरम पर चर्चा भी हुई है। इस सत्र में प्रियंका गांधी ने जबरदस्त तरीके से खुद को प्रेजेंट किया है। उनके भाषण की भी चर्चा हो रही है। उनके व्यवहार की भी चर्चा हो रही है। साथ ही साथ जो स्पीकर ओम बिरला की ओर से संसद के आखिर में टी पार्टी बुलाई जाती है, उसमें प्रियंका गांधी के शामिल होने पर एक अलग ही माहौल अपने लोकतंत्र का दिखाई दे रहा है और यह लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छी बात है।&nbsp;</div><div><br></div><div>नीरज दुबे ने कहा कि जिस दिन प्रधानमंत्री ने यह बात कही कि ड्रामा नहीं डिलीवरी चाहिए, उसके बाद से ऐसा लग रहा था कि इस सत्र में भी विपक्ष हंगामा करेगा। एक-दो दिन साफ तौर पर यही देखने को मिला। लेकिन उसके बाद दोनों पक्षों की ओर से चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो, आपसी बातचीत के बाद सामान्य रूप से कामकाज करने की कोशिश की गई और इसमें सरकार काफी हद तक कामयाबी हुई है। तीखी नोकझोंक संसद में वाद-विवाद के क्रम में चलता रहता है। इससे कोई नुकसान नहीं है। स्वस्थ लोकतंत्र में यह परंपरा बहुत पुरानी रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 19:41:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-productive-was-the-parliament-session-what-did-priyanka-vadra-stance-indicate</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/12/22/priyanka-gandhi_large_1951_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Rahul Gandhi से नहीं संभल रही Congress, क्या Priyanka को कमान सौंपनी ही पड़ेगी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/rahul-gandhi-is-unable-to-handle-the-congress-will-priyanka-gandhi-have-to-take-over]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने कांग्रेस के भीतर हो रही अलग-अलग चर्चाओं पर बातचीत की है। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। हमने नीरज दुबे से एक बड़ा सवाल यही पूछा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने जिस तरीके से संसद में भाषण दिया, उसके बाद दोनों के बीच लगातार तुलना हो रही है। प्रियंका गांधी के भूषण की तारीफ हो रही है। वहीं राहुल गांधी पर कई तरह के सवाल भी किया जा रहे हैं।</div><div><br></div><div>इस पर नीरज दुबे ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि प्रियंका गांधी का जो भाषण था, वह अच्छे से लिखा हुआ था। प्रियंका गांधी ने उसे मजबूती से पेश भी किया और नई-नई बातें भी कहीं। वहीं राहुल गांधी ने अपने पूराने दावे ही करते रहे। कई बार वह मुद्दों से भटकते हुए दिखाई भी दिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि राहुल और प्रियंका के भाषण को हम कैसे देखते हैं, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता उनके भाषण को कैसे देखते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rahul-gandhi-visits-amid-parliament-winter-session-bjp-hails-him-as-a-foreign-hero" target="_blank">दिल्ली से लंदन, वहां से जर्मनी...संसद के शीतकालीन सत्र के बीच राहुल की यात्रा, बीजेपी ने बताया विदेशी नायक</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने आगे कहा कि उड़ीसा के पूर्व विधायक ने चिट्ठी लिखी है कि प्रियंका गांधी को नेतृत्व सोप जाए। हालांकि, सिर्फ एक पूर्व विधायक ने ही अब तक यह बात नहीं कही है, कई ऐसे नेता है जो लगातार कांग्रेस में प्रियंका गांधी को नेतृत्व सौंपने की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे नेता बराबर सामने आते हैं और यह सवाल करते हैं कि हमारी पार्टी क्यों कमजोर होती जा रही है, हम चुनाव क्यों नहीं जीत रहे हैं? हालांकि ऐसे नेताओं को अभी अनसुना किया जा रहा है। लेकिन आने वाले दिनों में यह नेता कांग्रेस पार्टी के लिए मुसीबत बन सकते हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी का भाषण काफी मजबूत रखा। उन्होंने सौम्यता के साथ उसे पेश किया। वहीं राहुल गांधी का भाषण आक्रामक लगा और ऐसा लगा कि वह सिर्फ रील के हिसाब से अपना भाषण दे रहे हैं। नीरज दुबे ने दावा किया कि राहुल गांधी को जो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली है, उसे वह गंभीरता से निभाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। प्रियंका गांधी पहली बार की लोकसभा सांसद हैं। लेकिन उनमें गंभीरता काफी दिखाई देती है। बीजेपी साफ-साफ दावा करती है कि कांग्रेस में अब दो गुट बन चुके हैं। एक गुट में राहुल गांधी का है, दूसरे गुट में प्रियंका गांधी हैं। कर्नाटक में जो कुछ भी लड़ाई हो रही है, वह गुटबाजी की ही वजह से हो रही है। भाई बहन के जो आंतरिक मतभेद है, वह भी अब बाहर सामने आने लगे हैं।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि राहुल गांधी की टीम में जो नेता हैं, वह एक पंचायत का चुनाव भी पार्टी को नहीं जितवा सकते हैं। लेकिन प्रियंका गांधी के टीम में ऐसे लोग हैं जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रियंका गांधी कई बार कांग्रेस के लिए गठबंधन में संकट मोचन की भूमिका निभा चुकी हैं। नीरज दुबे ने इस बात का भी दावा किया कि जो नेता कांग्रेस छोड़ रहे हैं, वह यह दवा जरूर करते हैं कि राहुल गांधी से मिलने नहीं दिया जाता है। अगर राहुल गांधी से हम मिल भी लें तो हमारी बात नहीं सुनी जाती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 17:32:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/rahul-gandhi-is-unable-to-handle-the-congress-will-priyanka-gandhi-have-to-take-over</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/12/15/rahul-priyanka_large_1740_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Trump Tariff को Modi की आर्थिक नीतियों ने दे दी मात, दुनिया बोली ये हुई ना बात]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/modi-economic-policies-defeated-trump-tariff-the-world-said-this-is-not-right]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश की जीडीपी में हुए ग्रोथ पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। जुलाई-सितंबर 2025 में भारत की वृद्धि व्यापक रूप से अपेक्षित गति से हुई, क्योंकि उपभोग और विनिर्माण में वृद्धि ने विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम कर दिया। जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2% रही, जबकि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में यह 7.8% और एक साल पहले इसी अवधि में 5.4% थी। रॉयटर्स द्वारा सर्वेक्षण किए गए अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान लगाया था, जबकि एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह आँकड़ा 7.5% बताया गया था। ब्लूमबर्ग ने यह आँकड़ा 7.4% रहने का अनुमान लगाया था।&nbsp;</div><div><br></div><div>जीडीपी पर अपनी बात रखते हुए प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि जिस भारतीय अर्थव्यवस्था को डोनाल्ड ट्रंप डेड इकोनामिक कह रहे थे, आज पूरी दुनिया उस पर हैरान हो रही है। जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में उथल-पुथल मचल हुआ है, भारत लगातार तरक्की करता हुआ दिखाई दे रहा है जो अपने आप में भारत की ताकत को दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही राहुल गांधी हमारे देश के विपक्ष के नेता है लेकिन उन्हें अपने देश पर नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की बातों पर विश्वास हो रहा था। वह भी डेट इकोनामी वाली बात कह रहे थे। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखा दिया कि आज उस पर पूरी दुनिया की नजर क्यों है ।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/commonwealth-games-2030-and-bullet-train-means-bjp-will-win-again-in-gujarat" target="_blank">राष्ट्रमंडल खेल 2030 और बुलेट ट्रेन... यानि गुजरात में फिर से भाजपा जीतेगी</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने दावा किया कि यह आंकड़े सिर्फ दूसरी तिमाही के हैं। अभी तीसरी तिमाही के जब आंकड़े आएंगे। तो हो सकता है, वह और भी चौंकाने वाले होंगे। जीडीपी के जो आंकड़े आए हैं, उसमें जीएसटी उत्सव के सिर्फ 8 दिन ही जुड़े हैं। लेकिन जो दिवाली के आसपास हमारे देश में खरीदारी हुई है, उससे जीडीपी में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। नीरज दुबे ने कहा कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर की जो आर्थिक रिपोर्ट है, वह जनवरी में आएगी और जनवरी में भी हम भारतीय अर्थव्यवस्था को इस रफ्तार से बढ़ते हुए देख सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि भले ही अमेरिका ने भारत पर बड़ा टैरिफ लगा दिया हो लेकिन भारत में कई बड़े सुधार किए गए हैं। चीजें सस्ती हुई है। लोगों को सामान खरीदने में सहूलियत मिली है जिसका नतीजा हम सब देख रहे हैं। उद्योग जगत भी लगातार निवेश कर रहा है जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। जो महंगाई है वह भी एक सीमित मात्रा में है। जबकि पूरी दुनिया महंगाई से त्रस्त नजर आ रही है। भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत अंतिम बार कब बढ़ी है, शायद फिलहाल किसी को याद ना हो। लेकिन दुनिया के बाजार में इसको लेकर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस के समय में देश की अर्थव्यवस्था 11वें नंबर पर थी जो अब चौथे नंबर पर है। तीसरे नंबर की ओर हम बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर विपक्ष को देश की तरक्की दिखाई नहीं दे रहा है तो उसमें कोई क्या कहा जा सकता है लेकिन आज देश हर मामले में तरक्की करता हुआ दिखाई दे रहा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 01 Dec 2025 16:34:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/modi-economic-policies-defeated-trump-tariff-the-world-said-this-is-not-right</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/12/1/pm-modi_large_1641_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Siddaramaiah vs Shivakumar घमासान का हल निकाल पाने में Congress हाईकमान भी विफल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/the-congress-high-command-also-failed-to-resolve-the-siddaramaiah-vs-shivakumar-feud]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने कर्नाटक को लेकर कांग्रेस के भीतर मचे घमासन पर चर्चा की। इस दौरान हमेशा की तरह मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि कर्नाटक का नाटक लगातार चलता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि जब कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली थी तब यह पर्दे के पीछे एक समझौता हुआ था कि ढाई ढाई साल के तहत सिद्धारमैया और डीके शिवाकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे। हालांकि, सिद्धारमैया अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। ऐसे में डीके शिवाकुमार गुट सक्रिय हो गया है। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस के लिए यह मसला कोई नया नहीं है। यह हमने राजस्थान में भी देखा, मध्य प्रदेश में देखा, छत्तीसगढ़ में देखा, कुछ दिन पहले हमने हिमाचल प्रदेश में भी देखा। लेकिन कांग्रेस इन तमाम घटनाओं को एक तरीके से शांत करने में विफल रही है। यही कारण है कि समय-समय पर कांग्रेस के नेताओं के जो दर्द है, वह सामने निकलकर आते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमने देखा कि भूपेश बघेल का जो प्रतिद्वंदी था वह बहुत ज्यादा मजबूत नहीं था। राजस्थान में हमने देखा कि सचिन पायलट पहले आक्रामक हुए लेकिन बाद में वह थोड़े शांत हुए। लेकिन मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थनों ने जो बगावत की, उसके बाद सरकार गिर गई। कर्नाटक में भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। कर्नाटक में डीके शिवाकुमार मजबूत नेता है। वह फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष की भी कमान संभाले हुए हैं। संगठन पर डीके शिवाकुमार की अच्छी पकड़ है। ऐसे में सिद्धारमैया के लिए वह लगातार चुनौतियां पेश कर रहे हैं और यही कारण है कि कांग्रेस में कुर्सी को लेकर बार-बार इस तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती है। नीरज दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि डीके शिवकुमार को कहीं ना कहीं भाजपा का भी अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। तभी वह बार-बार हिम्मत दिखा भी रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/congress-high-command-will-decide-cm-future-siddaramaiah-reiterates-high-command-words" target="_blank">कांग्रेस आलाकमान तय करेगा CM का भविष्य: सिद्धारमैया ने फिर दोहराई हाईकमान की बात, दिल्ली पहुंचे डीके समर्थक विधायक</a></h3><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जो भविष्यवाणी की है वह क्या कर्नाटक से ही शुरू होने वाली है? प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा था कि मैं कांग्रेस में एक बड़ा विभाजन देख रहा हूं। ऐसे में क्या इसकी शुरुआत कर्नाटक से होगी? बड़ा सवाल तो यह भी है कि कांग्रेस के जो अध्यक्ष है मल्लिकार्जुन खड़गे वह कर्नाटक से आते हैं, लेकिन कर्नाटक के ही झगड़े को वह सुलझा नहीं पा रहे हैं। वह कर्नाटक जा रहे हैं कर्नाटक के विधायक दिल्ली आ रहे हैं। इसके अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे यह कह रहे हैं कि कर्नाटक का विवाद जो है वह पार्टी आलाकमान तय करेगा। लेकिन सवाल यह है कि पार्टी में आलाकमान कौन है? जब पार्टी अध्यक्ष आलाकमान की बात करें तो कहीं ना कहीं कुछ और संकेत इसके मिलने शुरू हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुर्सी को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही लड़ाई की वजह से जनहित के कामों पर भी असर पड़ रहा होगा। यही कारण है कि विकास के पैसे की कमी हो गई है। विधायकों को फंड नहीं मिल रहा है। लोगों की परेशानियां सामने आ रही है।</div><div><br></div><div>बंगाल में एसआईआर को लेकर हो रही चर्चा पर भी हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि बंगाल में एसआईआर का असर दिखना शुरू हो गया है। हमने देखा है कि कैसे लोग अब वापस जा रहे हैं। जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें यह पता चल रहा है कि अगर हम इसमें पकड़े जाते हैं तो या तो हमें जेल में रहना पड़ेगा या जो केंद्र बनाए जा रहे हैं, वहां रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एसआईआर से देश में जो अवैध रूप से घुसपैठिए शामिल हो गए हैं। उन्हें बाहर निकालने का एक तरीके से मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इसमें जो राजनीतिक दल है, उन्हें सहयोग देना चाहिए। वोट बैंक की राजनीति से बाहर निकलना चाहिए क्योंकि घुसपैठिया सिर्फ हमारे देश में नहीं आते, बल्कि हमारे लोगों के हक को भी छीनते है। यही कारण है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूर होना चाहिए। अगर आप भारतीय हैं तो आपको इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। आपके ही वोट से यहां की सरकार चुनी जाती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 17:16:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/the-congress-high-command-also-failed-to-resolve-the-siddaramaiah-vs-shivakumar-feud</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/11/24/siddaramaiah-shivakumar_large_1722_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: 95 हार के बाद भी नहीं संभल रहे Rahul Gandhi! क्या Congress में होगा विभाजन?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/rahul-gandhi-is-still-struggling-despite-95-defeats-will-the-congress-split]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने बिहार चुनाव के नतीजे और दिल्ली में हुए आतंकवादी घटना पर चर्चा की। साथ ही साथ कांग्रेस के भविष्य को लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से सवाल भी पूछे। कांग्रेस के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि बिहार में महागठबंधन में कुछ भी ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लालू परिवार भी फिलहाल कई संकटों से गुजर रहा है। खुद लालू यादव को अपना किडनी देने वाली उनकी दुलारी बेटी रोहिणी आचार्य कई बड़े आरोप तेजस्वी यादव के सलाहकारों पर लगा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस के लिए भी स्थिति बिहार चुनाव के बाद अच्छी नहीं रहने वाली है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को अब तक 95 हार मिल चुकी है। इसके बावजूद भी ऐसा लगता है कि वह संतुष्ट नहीं हुए हैं। अब वह सेंचुरी बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने तंज भरे लहजे में कहा कि ऐसा लगता है कि राहुल गांधी को संतोष नहीं हुआ है। राहुल गांधी कुछ लोगों के सर्कल में घिरे हुए हैं और वह लोग जो कहते हैं वहीं राहुल गांधी सुनते हैं। मतदाता सूची को लेकर जो भ्रम फैलाया गया, वह कोई काम करता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। आप मतदाता सूची को अपने चुनावी हार के बहाने के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। आप को आरोपों पर जनता ने विश्वास नहीं किया। उसे गंभीरता से नहीं लिया और यही कारण है कि इस तरह के नतीजे सामने आए हैं। अगर कोई वोट चोरी हुई होती या फिर एसआईआर का दुष्प्रभाव हमें देखने को मिलता तो जनता जरूर सामने आती, अपनी बात कहती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और राहुल गांधी के मुद्दे को जनता ने पूरी तरीके से जानकारी दिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/tejashwi-becomes-leader-of-opposition-after-crushing-defeat-in-bihar" target="_blank">बिहार में करारी हार के बाद तेजस्वी बने नेता प्रतिपक्ष, RJD के लिए कितनी बड़ी चुनौती?</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी लगातार जैन जी की बात करते हैं। लेकिन बिहार के जैन जी ने राहुल गांधी को जवाब दे दिया। नीरज दुबे ने प्रधानमंत्री के उसे बात को दोहराया कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस में विभाजन हो जाएगा। कई कांग्रेस युवाओं को अब ऐसा लगने लगा है कि राहुल गांधी के रहते हुए हमारा राजनीतिक कैरियर बनने वाला नहीं है। ऐसे में यह जैन जी अब कांग्रेस में विभाजन कर सकते हैं। हमें पता है कि कांग्रेस के पुराने नेता पहले ही पार्टी में हासिए पर जा चुके हैं और राहुल गांधी की टीम के द्वारा किनारे किए जाने से नाराज बताए जाते हैं। इसलिए जी-23 जैसे ग्रुप के भी नाम पिछले कुछ दिनों में सामने आए हैं। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अगर आप राष्ट्र के साथ नहीं और विदेशी एजेंट के साथ रहेंगे तो आपकी पार्टी का यही होगा। अभी भी वक्त है। कांग्रेस को होमवर्क करने की जरूरत है। कांग्रेस अभी भी अगर नहीं समझती है तो उसके लिए आने वाले चुनाव और भी मुश्किल रहने वाले हैं क्योंकि भाजपा पूरी मैनेजमेंट के साथ चुनाव लड़ती है। जबकि आपका आपसी कलह से और संगठन की कमी से हर बार हार होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>दिल्ली में आतंकवादी हमले पर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पाकिस्तान के सरगना अब हमारे ही लोगों का इस्तेमाल कर हमारे ही देश में आतंक फैलाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वह अब सीधे तौर पर भारत के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते हैं। इसलिए वह अप्रत्यक्ष रूप से इसमें लगे हुए हैं। हमारी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है और यही कारण है कि आतंकवादियों के खिलाफ जबरदस्त कार्यवाही हमें देखने को मिलती है। फिलहाल दिल्ली मामले को लेकर पूरा जांच हो रहा है। इसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं। देखना है आगे किस तरह का एक्शन इस धमाके में बाद लिया जाता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:41:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/rahul-gandhi-is-still-struggling-despite-95-defeats-will-the-congress-split</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/11/17/rahul-gandhi_large_1746_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: PM Modi पर Vote Chori के आरोप में दम है या Rahul Gandhi की राजनीति बेदम है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-substance-in-the-allegations-of-vote-theft-against-pm-modi-or-is-rahul-politics-baseless]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप और बिहार चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपी पर साफ तौर पर कहा कि यह ध्यान भटकने की राजनीति है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का जो हाइड्रोजन बम था वह पूरी तरीके से फ्यूज कर गया है। राहुल गांधी के आरोपों में दम नजर नहीं आ रहा है। नीरज दुबे ने इस बात पर भी सहमति जताई कि राहुल गांधी सिर्फ और सिर्फ मीडिया में बने रहने की राजनीति करते हैं। इसके अलावा वह खुद के लिए एक सर्वाइवल का तरीका भी ढूंढने लगे हैं क्योंकि लगातार उनके नेतृत्व में कांग्रेस और उसके गठबंधन के साथियों को हार का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी बेबुनियाद आरोप लगाते रह रहे हैं।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब राहुल गांधी को इस बात की आशंका सताने लगी है कि कभी ना कभी कांग्रेस के नेता उनसे यह जरूर पूछेंगे कि आप हमें चुनाव कब जीता रहे हो। ऐसे में राहुल गांधी को जवाब देना मुश्किल होगा। यही कारण है कि उन्होंने लगातार अपनी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश की है। 2014 से आपने देखा होगा कि राहुल गांधी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश करते हैं। बावजूद इसके जनता में उसकी विश्वसनीयता कम होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस को सफलताएं नहीं मिल रही है तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार पहले ईडी और सीबीआई को निशाने पर लेते थे। लेकिन अब वे सीधे तौर पर चुनाव आयोग को ही निशाने पर ले रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस को अदालत से भी फटकार लग चुकी है। लेकिन उनकी पार्टी अभी भी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। राहुल गांधी को बार-बार अपने बेबुनियाद आरोपों की वजह से डांट भी खानी पड़ रही है। लेकिन सुधार नहीं दिख रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/politicians-can-make-empty-promises-for-power" target="_blank">नेता सत्ता के लिए कर सकते हैं हवाई वादा</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी बार-बार जैन जी की बात कर रहे हैं। लेकिन यह भारत है। भारत के युवा जानते हैं कि हमारा देश लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करता है। शांति में विश्वास करता है और इसलिए राहुल गांधी का कोई मकसद यहां कामयाब होने वाला नहीं है। नीरज दुबे ने कहा कि वोट चोरी का आरोप राहुल गांधी अभी से ही इसलिए लग रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि बिहार में चुनावी हार के बाद उनसे फिर से सवाल पूछा जाएगा और यही कारण है कि वह अभी से ही चुनाव आयोग और वोट चोरी का आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। एसआईआर को लेकर भी राहुल गांधी ने तमाम आरोप लगाए। लेकिन जब फाइनल मतदाता सूची आया तो कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से एक भी सवाल नहीं उठाया गया। इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए थे वह कहीं ना कहीं एजेंडा सेट करने के लिए थे ना कि उसमें कोई सत्यता थी।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब बीजेपी की ओर से कभी भी पार का नारा नहीं दिया जाएगा बीजेपी की ओर से मिनिमम नंबर्स दिए जा रहे हैं। यह कहीं ना कहीं लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के एजेंडे में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करती है। अमित शाह ने भाजपा के लिए बिहार में पूरी मेहनत की है। इसके अलावा नीतीश कुमार को लेकर जो अटकलें चलाई जा रही थी वह पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुका है। नीतीश कुमार ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। आप चुनाव से पहले देखिए किस तरीके से बिहार में एनडीए सरकार के खिलाफ नाराजगी दिखाई जा रही थी। लेकिन वह सब चीजे अब पूरी तरीके से समाप्त हो चुकी है। एनडीए एकजुट होकर एक नेतृत्व में चुनाव लड़ता हुआ दिखाई दे रहा है और इसी वजह से महागठबंधन के लोग परेशानी में है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 15:39:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/is-substance-in-the-allegations-of-vote-theft-against-pm-modi-or-is-rahul-politics-baseless</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/11/10/rahul-gandhi_large_1542_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bihar में स्टार प्रचारक रहने वाले Lalu खामोश क्यों हैं, क्या है RJD की रणनीति?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-lalu-who-is-a-star-campaigner-in-bihar-silent-what-is-rjds-strategy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बिहार विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) दोनों ने अपने-अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं। पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्रियों जीतन राम मांझी, चिराग पासवान तथा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की मौजूदगी में एनडीए ने अपना विस्तृत घोषणापत्र प्रस्तुत किया। एनडीए के घोषणापत्र में एक करोड़ रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे में निवेश पर ज़ोर दिया गया है। घोषणापत्र में हर जिले में मेगा स्किल सेंटर, औद्योगिक पार्क, महिला उद्यमिता मिशन, खेती के लिए एमएसपी की गारंटी, और सात नए एक्सप्रेसवे जैसी योजनाओं की घोषणा की गई है। इसके साथ ही गरीबों के लिए 50 लाख नए घर, 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुफ्त राशन और बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य ढांचा का वादा किया गया है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि राजग के घोषणा पत्र के प्रमुख प्रावधानों में पिछड़े वर्गों के लिए विशेष आर्थिक सहायता का भी उल्लेख है। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) को सरकार 10 लाख रुपये की सहायता देगी और उनके हितों के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किया जाएगा। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र के लिए राजग ने ‘कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ शुरू करने की घोषणा की है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से लागू किया जाएगा। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी दी जाएगी और कृषि अवसंरचना में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। घोषणापत्र में कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित उत्तर बिहार को अगले पांच वर्षों में पूरी तरह इस समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। शहरी विकास के तहत चार और शहरों में मेट्रो रेल सेवा शुरू करने की घोषणा भी की गई है। राजधानी क्षेत्र में “न्यू पटना” नामक एक हरित (ग्रीनफील्ड) परियोजना विकसित की जाएगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीतामढ़ी के पुनौरा धाम जानकी मंदिर को “सीतापुरम” के रूप में विकसित किया जाएगा। घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि बिहार से विदेशी उड़ानें शुरू की जाएंगी और कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बनाए जाएंगे। साथ ही, राज्य में 10 नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे और प्रत्येक जिले में फैक्टरी एवं विनिर्माण इकाइयां शुरू की जाएंगी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/bihar-politics-swings-between-promises-and-claims" target="_blank">वादे और दावे के बीच झूलती बिहार की राजनीति</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि बिहार की राजनीति में राहुल गांधी ने एक बार फिर वही गलती दोहरा दी है जो वह पहले भी कर चुके हैं। यह गलती है जनता की आस्था को ‘ड्रामा’ बताने की गलती। हैरानी की बात यह है कि राहुल गांधी की इस प्रकार की हर गलती का बड़ा खामियाजा कांग्रेस को हर बार भुगतना पड़ता है लेकिन राहुल फिर भी नहीं सबक लेते। छठ पूजा, पर राहुल गांधी का तंज न केवल राजनीतिक भूल थी, बल्कि चुनावी मायने में आत्मघाती भी थी। दिल्ली के यमुना तट पर छठ आयोजन का हवाला देते हुए जब राहुल ने कहा कि “प्रधानमंत्री छठ पूजा के बहाने ड्रामा करते हैं,” तो यह तीर सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर नहीं, बल्कि उन करोड़ों माताओं-बहनों के दिल पर लगा, जो साल दर साल निर्जला व्रत रखकर सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा करती हैं। राहुल गांधी का यह बयान भाजपा के लिए जैसे राजनीतिक वरदान बन गया। मुजफ्फरपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी को मुद्दा बनाते हुए महागठबंधन पर जोरदार हमला बोला। मोदी ने कहा, “जब आपका बेटा छठी मैया की जय-जयकार दुनिया में करा रहा है, तब ये कांग्रेस और आरजेडी वाले उसी छठी मैया का अपमान कर रहे हैं। क्या बिहार की माताएं-बहनें इसे बर्दाश्त करेंगी?''</div><div><br></div><div>दरभंगा की सभा में अमित शाह ने महागठबंधन को “ठगबंधन” बताते हुए कहा कि “लालू प्रसाद अपने बेटे तेजस्वी को मुख्यमंत्री और सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहती हैं, लेकिन दोनों पद रिक्त नहीं हैं।” उन्होंने मिथिला की बेटी सीता का स्मरण करते हुए कहा कि “राजग ने मिथिला की अस्मिता को सम्मान दिया— मैथिली को आधिकारिक भाषा का दर्जा और पुनौराधाम में माता सीता मंदिर का निर्माण इसका प्रमाण है।” शाह ने अनुच्छेद 370, आतंकवाद और पीएफआई पर राजद-कांग्रेस की “ढिलाई” को निशाना बनाते हुए कहा कि “राजग किसी भी कीमत पर देशविरोधी ताकतों को बाहर नहीं आने देगा।"</div><div><br></div><div>वहीं दरभंगा की ही एक रैली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजद पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “बिहार के एक पूर्व मुख्यमंत्री का पूरा परिवार भ्रष्टाचार में डूबा है। मुद्दा साफ है— बिहार को विकास चाहिए या जंगलराज?” उन्होंने कहा कि “संप्रग ने बिहार को 10 साल में दो लाख करोड़ दिए, जबकि मोदी सरकार ने 11 साल में 15 लाख करोड़।” राजनाथ ने नीतीश कुमार की ईमानदारी को “बिहार का सबसे बड़ा पूंजी” बताते हुए कहा कि ''इतने ईमानदार व्यक्ति पर उंगली उठाना बिहार की जनता का अपमान है।''</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 16:43:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/why-is-lalu-who-is-a-star-campaigner-in-bihar-silent-what-is-rjds-strategy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/11/3/lalu-yadav_large_1646_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bihar में सीट बँटवारे की उठापटक ने दोनों गठबंधनों की एकता का सच उजागर कर दिया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/the-turmoil-over-seat-sharing-in-bihar-has-exposed-the-truth-about-the-unity-of-two-alliances]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने बिहार चुनाव को लेकर जारी उठापटक पर चर्चा की। दोनों ही गठबंधनों में सीट बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति देखने को मिली। सोमवार तक देखा जाए तो एनडीए ने जहां अपने गठबंधन में सीटों को लेकर तालमेल बिठा लिया है। वहीं महागठबंधन में फिलहाल स्थिति अभी भी ऊपर नीचे दिखाई दे रही है। इन सभी सवालों को लेकर हमने प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से बात की।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि एनडीए की बात करें तो भले ही एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया लेकिन एनडीए में शामिल घटक दलों का सत्तास्वार्थ साफ तौर पर देखने को मिला। आपको बता दे की एनडीए के तमाम दल यह जरूर कहते रहे कि उनका विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है। लेकिन सीट बंटवारे को लेकर भाजपा पर तमाम दबाव बनाने की कोशिश की गई। वहीं, महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर भी चल रही उठापटक पर नीरज दुबे ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से बार-बार संविधान और लोकतंत्र बचाने की बात की जा रही है। लेकिन सीट बंटवारे को लेकर ही ये दल आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं। कांग्रेस और राजद में बातचीत नहीं बन पा रही है। वहीं मुकेश साहनी भी आंखें दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार बिहार में लेफ्ट भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/jitan-ram-manjhi-upset-with-the-seats-in-bihar-nda-said-i-am-upset-but-with-nda" target="_blank">बिहार NDA में सीटों से नाराज़ जीतन राम मांझी, बोले- परेशान हैं, पर NDA के साथ</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि बिहार में जो भी छोटे दल है, वह पूरा का पूरा प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। उनके राजनीतिक इतिहास को भी देखें तो यह लगातार प्रेशर पॉलिटिक्स करते रहते हैं। इसके साथ ही इन छोटे दलों को यह भी पता है कि भाजपा केंद्र के सत्ता में है। ऐसे में अगर सीट बंटवारे में बात नहीं बन पाती है तो कुछ दूसरा ऑफर ले लिया जाए जैसे बड़े मंत्रालय का या बड़े विभाग का। तो यह पूरा का पूरा दबाव बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है। वहीं, नीरज दुबे ने कहा कि बिहार में कांग्रेस राजद के सहारे जीवित है। कांग्रेस ने हमेशा आरजेडी पर ज्यादा से ज्यादा सीटें देने का दबाव बनाया है। इसका नुकसान आरजेडी को उठाना पड़ता है। हालांकि कांग्रेस अभी भी अपना अड़िक रवैया अपनाए हुए हैं जो कि गठबंधन के लिए ठीक नहीं है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने यह भी कहा कि बिहार में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। ना सिर्फ दो गठबंधनों के बीच की लड़ाई है। बल्कि प्रशांत किशोर की पार्टी भी चुनाव लड़ रही है। साथ ही साथ एआईएमआईएम ने भी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर ली है। तेज प्रताप यादव जो अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। तो बिहार में असल मुद्दों को लेकर जो लड़ाई होनी चाहिए उस पर कोई भी राजनेता या दल बात नहीं कर रहे हैं। सिर्फ बातचीत जो हो रही है वह कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, किसको कहां से सीट मिलेगा और साथ ही साथ किसको कौन से सीट मिलेगी जहां से उसके जीतने की संभावनाएं ज्यादा है। बिहार के मुद्दे और बिहार की स्थिति फिलहाल किसी भी राजनीतिक दलों की ओर से चर्चा में नहीं लाया जा रहा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 15:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/the-turmoil-over-seat-sharing-in-bihar-has-exposed-the-truth-about-the-unity-of-two-alliances</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/10/13/bihar-election_large_1506_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Rahul Gandhi को सेल्फ गोल करने में मजा आता है या यही उनकी राजनीतिक शैली है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/does-rahul-gandhi-enjoy-scoring-self-goals-or-is-this-his-political-style]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी के विदेश दौरे और उनके द्वारा दिए गए बयानों पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने राहुल गांधी के बयानों को लेकर कहा कि कांग्रेस नेता के तमाम बयानों को देखें तो उसका निचोड़ यही निकलता है कि भारत का रहने वाला हूं, भारत के विरोध में बात सुनाता हूं। राहुल गांधी विदेश की धरती पर जाकर छात्रों के बीच भारत के विरोध में बयान दे रहे हैं। इससे भारत की छवि बिल्कुल खराब हो रही है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि कई देशों में भारत के लोकतंत्र की बात कही जाती है। लेकिन आप उन्हें देश में जाकर वहां के छात्रों से कह रहे हैं कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। आप विपक्ष के नेता हैं। आपको थोड़ी बहुत गंभीरता लानी चाहिए। नीरज दुबे ने कहा कि एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को लेकर बालक बुद्धि शब्द का प्रयोग किया था। ऐसे में अब लगता है कि प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही कहा था। राहुल गांधी के बयानों को देखें तो वह ठीक बालको जैसा सवाल करते हैं। हमने देखा कि कैसे कोलंबिया में वह मोटरसाइकिल और कार के वजन की तुलना करते हुए छात्रों से सवाल पूछते दिखाई दे रहे हैं। कभी-कभी राहुल गांधी कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं कि उनकी पार्टी भी उनके बचाव में बहुत कुछ नहीं कर पाती। कांग्रेस पार्टी भी इस तरीके के कार्यक्रम राहुल गांधी का क्यों रखवाती है जिससे कि राहुल गांधी की छवि ही खराब होती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/kejriwal-bihar-bet-aap-releases-first-list-of-11-candidates-will-contest-elections-alone" target="_blank">केजरीवाल का 'बिहार दांव': AAP ने जारी की 11 उम्मीदवारों की पहली सूची, अकेले लड़ेगी चुनाव!</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी में नेतृत्व की कमी है और यही कारण है कि चुनाव में हम कांग्रेस का लगातार खराब प्रदर्शन देखते हैं। लेकिन राहुल गांधी इस तरीके का बयान दे जाते हैं जैसे कि कांग्रेस की छवि पर असर पड़ता है। आरएसएस को कायर बताने वाले राहुल गांधी के बयान पर नीरज दुबे ने कहा कि नरेंद्र मोदी आरएसएस के प्रचारक रहे हैं और वह देश के प्रधानमंत्री हैं। आज आरएसएस का प्रचारक देश का प्रधानमंत्री है और यह पहला मौका है जब भारत यह शक्ति दिख रहा है। किसी को घर में घुसकर मारने का। तो यह अपने आप में दिखता है कि आरएसएस कितना मजबूत है और उसके लोग कितनी मजबूत इच्छा शक्ति रखते हैं और समय आने पर उसका प्रदर्शन भी करते हैं। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस के जमाने में इतने सारे आतंकवादी हमले हुए लेकिन किसी का बदला नहीं दिया गया। सही से ट्रायल्स नहीं किए गए और सभी आरोपी बड़ी तक हो गए लेकिन आज स्थिति बदली हुई है।</div><div><br></div><div>इसके साथ ही प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी बिहार में दौरे पर थे। वहां एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाया। मतदाता सूची जारी हो गया है। राहुल गांधी ने अब कोई ट्वीट नहीं किया है। इसका मतलब यह है कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को अभी विदेश जाने की बजाय बिहार में गठबंधन धर्म निभाना चाहिए था। बिहार में चुनाव बिल्कुल नजदीक है। आप सीट बंटवारा करते लेकिन आप विदेश पहुंच गए हैं। तेजस्वी यादव इधर अकेले परेशान है। तेजस्वी यादव अन्य गठबंधन सहयोगियों को भी आपकी वजह से कुछ कह नहीं पा रहे हैं। वह भी असमंजस की स्थिति में फंसे हुए हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:03:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/does-rahul-gandhi-enjoy-scoring-self-goals-or-is-this-his-political-style</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/10/6/rahul-gandhi_large_1705_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Bihar, Bengal, Tamilnadu में BJP ने उतारे अपने महारथी, क्या फिर दौड़ेगा विजय रथ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/bjp-has-fielded-its-stalwarts-in-bihar-bengal-tamil-nadu-will-the-chariot-of-victory-run-again]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने भाजपा और चुनावी राज्यों में उसके द्वारा नियुक्त किए गए प्रभारियों को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने कहा कि भाजपा हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहती है और वह हर राज्यों में अलग-अलग तरीके से चुनाव भी लड़ती है। नीरज दुबे ने सबसे पहले बिहार की बात करते हुए कहा कि हम सब इंतजार कर रहे थे कि चुनाव नजदीक आ गए हैं लेकिन बिहार में अभी तक प्रभारी नियुक्त नहीं किए गए हैं। अमित शाह वहां के लगातार दौरे कर रहे हैं। ऐसे में अब बिहार के प्रभारी के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।&nbsp;</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि इसके अलावा उनके साथ सीआर पाटिल और केशव प्रसाद मौर्य को लगाया गया है जो कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भी बेहद विश्वास पात्र माने जाते हैं। बिहार को बारीकी से समझते हैं। इसके अलावा वह जातीय समीकरण में भी फिट बैठते हैं। सीआर पाटिल को वहां भेजने का मतलब है कि कहीं से भी कोई चूक संगठन के स्तर पर चुनाव को लेकर ना हो और अगर सीआर पाटिल गए हैं तो इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हो सकती है। सीआर पाटिल को संगठन के लिए जाना जाता है। संगठन में रहते हुए वह ऐसे कई काम कर चुके हैं जो आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक दलों के लिए मिसाल बना हुआ है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/nda-mahamanthan-in-bihar-amit-shah-blows-the-election-bugle-aiming-for-a-two-thirds-majority" target="_blank">बिहार में NDA का 'महामंथन', अमित शाह ने फूंका चुनावी बिगुल, दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने केशव प्रसाद मौर्य के लिए कहा कि वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में तो काफी बड़े नेता है। लेकिन बिहार में उनको प्रभारी नियुक्त किया गया है। केशव प्रसाद मौर्य जिस जाति से आते हैं, बिहार में उसकी अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य को वहां भेज कर कहीं ना कहीं भाजपा ने एक नई तरह की रणनीति पर काम करने की शुरुआत कर दी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी एक अलग मैसेज दिया गया है कि केशव प्रसाद मौर्य अभी पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और अगर बिहार में वह चुनाव जितवाने में कामयाब होते हैं तो केशव प्रसाद मौर्य का भी कद आगे बढ़ सकता है। वही पश्चिम बंगाल को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि अगर भूपेंद्र यादव को वहां भेजा गया है तो इससे अंदाजा लगा लेना चाहिए कि बंगाल में इस बार भाजपा कहीं से भी कोई चूक नहीं करना चाहती। याद होगा कि भूपेंद्र यादव ने महाराष्ट्र जैसे कठिन चुनाव को भाजपा की झोली में डाला है। ऐसे में अब बंगाल में भूपेंद्र यादव की कड़ी परीक्षा होनी है और भूपेंद्र यादव को इस तरह के चुनौती लेने की आदत है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा हर हाल में बंगाल चुनाव जीतना चाहती है और भूपेंद्र यादव इसके लिए एक अलग तरह के राजनीति पर भी काम कर सकते हैं। तमिलनाडु को लेकर भाजपा ने बैजयंत पांडा को प्रभारी बनाया है। बैजयंत पांडा पहले बीजेडी में थे। अब वहां भाजपा में है। भाजपा के संगठन में काम कर रहे हैं। नीरज दुबे ने कहा कि दिल्ली में अभी उन्हीं के प्रभारी रहते हुए भाजपा ने चुनाव जीता है। ऐसे में उन्हें इनाम दिया गया है और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बनाया गया है। दक्षिण भारत में कमल खिलाने की जिम्मेदारी बैजयंत पांडा के ऊपर होगी। बैजयंत पांडा संगठन में काफी बारीकी से काम करते हैं। वह हर तरह से पार्टी को मजबूत करने में सक्षम है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने यह भी कहा कि फिलहाल जिस तरीके से प्रभारी की नियुक्ति हो गई है। उससे ऐसा लगता है कि अब भाजपा अध्यक्ष का चुनाव फिलहाल नहीं होने जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा अध्यक्ष का चुनाव अभी होने जा भी रहा है तो भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान का नाम इससे हट गया है क्योंकि इन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें प्रभारी बनाकर भेजा गया है। उन राज्यों में जहां आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं, ऐसे में अब भाजपा अध्यक्ष को लेकर आने वाले दिनों में अलग-अलग नाम चल सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:25:04 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/bjp-has-fielded-its-stalwarts-in-bihar-bengal-tamil-nadu-will-the-chariot-of-victory-run-again</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/9/29/dharmendra-bhupendra-panda_large_1626_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Rahul Gandhi को Urban Naxal कहना सही है या गलत, मोदी के जन्मदिन की इतनी चर्चा क्यों?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/right-or-wrong-to-call-rahul-gandhi-urban-naxal-why-so-much-discussion-about-modi-birthday]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी समाचार नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह राहुल गांधी राजनीति, ईसीआई पर कांग्रेस के हमले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक ने सवालों के जवाब दिये। राहुल गांधी और उनके द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए कहीं ठीक नहीं है। यही कारण है कि देवेंद्र फडणवीस उन्हें अर्बन नक्सली कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली क्या कहते है कि हमें इस तंत्र पर विश्वास नहीं है और राहुल गांधी भी फिलहाल यही कह रहे हैं कि हमें इस तंत्र पर विश्वास नहीं है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि अगर अदालत का फैसला आपके पक्ष में आता है तो ठीक है, अगर आपके खिलाफ आता है तो गलत है। यह कहीं ना कहीं राजनीति और इस देश के लिए ठीक नहीं है। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की ओर से लगातार संवैधानिक के पदों पर बैठे हुए लोगों को धमकी दी जा रही है। यह कहीं ना कहीं अर्बन नक्सली मानसिकता को दर्शाता है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह खुद जमानत पर हैं। जमानत पर जेल से बाहर होने के बावजूद भी आप संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोगों पर आरोप लगा रहे हो। जो बात चुनाव आयोग ने कहा था वही आप कह रहे हो और आरोप लगा रहे हो। ऐसे कैसे चल सकता है। चुनाव आयोग पहले ही जांच कर रहा है। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस और बाकी के विपक्षी दल एक सुनीयोजित तरीके से अभियान चलाने लगते हैं। हमने हिडनवर्ग का मामला देखा। पूरा का पूरा संसद सत्र बर्बाद हो गया था। लेकिन आज इस मामले में गौतम अडानी को क्लीन चिट मिल गई है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/indian-brains-should-now-invest-their-energy-in-indian-companies-and-take-the-country-forward" target="_blank">चुनौती नहीं अवसर है ट्रंप की वीजा नीति, 'इंडियन ब्रेन' अब भारतीय कंपनियों में ऊर्जा लगाएँ और देश को आगे बढ़ाएँ</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि लगातार विपक्ष की ओर EVM को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे। लेकिन अब तो चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लगातार भ्रम और अफवाहें फैलाने की कोशिश हो रही है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। सारा का सारा फैसला लोकतंत्र में जनता के हाथों में होता है। जैन जी वाले ट्वीट को लेकर भी नीरज दुबे ने राहुल गांधी को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैन जी को लेकर बंद कमरे में ट्वीट कर रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर देश के युवा हमारे एप्पल के स्टोर पर लाइन में लगे हुए थे। इससे पता चलता है कि हमारे देश के युवा किस तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी जो चीज करने की कोशिश कर रहे हैं, वह यहां सफल नहीं होने वाला है और हमने देखा है कि हाल कहीं DUSU चुनाव में भी युवाओं ने राष्ट्रवादी लोगों को चुना है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो गए और भाजपा सेवा पखवाड़ा मना रही है। हां, यह बात सही है कि 75 साल से ज्यादा उम्र वालों को भाजपा की राजनीति में किनारे किया गया था। यह हम सब ने देखा है और ऐसे कई नेताओं के बारे में कहा जा सकता है कि वे अब सोच रहे होंगे कि हमारी क्या गलती थी? लेकिन यह बात भी सही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी बिल्कुल फिट है। वह पूरी पार्टी के लिए ऊर्जा के स्रोत हैं और वह पार्टी के लिए लगातार प्रेरणा बने हुए हैं। उनके जन्मदिन पर पूरे देश में उत्साह देखने को मिला। देश ही क्या विदेश से भी उन्हें शुभकामनाएं मिले हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 16:55:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/right-or-wrong-to-call-rahul-gandhi-urban-naxal-why-so-much-discussion-about-modi-birthday</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/9/22/modi-rahul_large_1656_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: नेपाल के बवाल से भारत ने क्या सीखा? Nepal Crisis और Trump Tariffs पर चर्चा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-did-india-write-about-nepal-breakdown-discussion-on-nepal-crisis-and-trump-tariffs]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी समाचार नेटवर्क के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह नेपाल की स्थिति और ट्रम्प की टैरिफ से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने प्रश्नों के उत्तर दिये। नीरज कुमार दुबे ने कहा कि नेपाल में आज जिस तरह लोकतंत्र भरभराकर ढह गया उससे देश के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। देखा जाये तो नेपाल की घटनाएं केवल राजनीतिक संकट नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को झकझोर देने वाली चेतावनी हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारी जनाक्रोश और हिंसा के बीच इस्तीफा दे दिया।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और कई वरिष्ठ नेताओं के घरों पर हमले हुए जिसके बाद उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और सरकारी दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया। सड़कों पर युवा प्रदर्शनकारियों ने न केवल मंत्रियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा बल्कि राजधानी काठमांडू तक को असुरक्षित बना दिया। यह दृश्य नेपाल की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। देखा जाये तो इस पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार विरोधी जनाक्रोश और Gen-Z की अगुवाई वाला असंतोष है। सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्रतिबंध ने आग में घी डालने का काम किया, जिसे अंततः वापस लेना पड़ा। लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। लगभग 20 से ज्यादा लोगों की जान गई, सैंकड़ों घायल हुए और नेपाल की नाजुक राजनीतिक व्यवस्था फिर से हिल गई।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/has-nepals-gen-z-been-cheated-again" target="_blank">नेपाल के Gen-Z के साथ फिर बड़ा धोखा हो गया क्या?</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि नेपाल का यह संकट भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है। इसके चलते भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ानी पड़ी है। यदि अस्थिरता लंबी खिंचती है तो यह भारत की सुरक्षा और व्यापार दोनों को प्रभावित करेगी। यहां यह भी ध्यान रखने योग्य बात है कि हाल के वर्षों में नेपाल का झुकाव चीन की ओर बढ़ा है। लेकिन अब यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या काठमांडू की बीजिंग-नज़दीकी ने ही उसकी राजनीति को और उलझा दिया है? चीन की मदद से आर्थिक विकास की अपेक्षा थी, लेकिन जनता को न भ्रष्टाचार से मुक्ति मिली, न रोज़गार।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि देखा जाये तो दक्षिण एशिया में नेपाल को अक्सर “नए लोकतंत्र” के रूप में देखा जाता था। यदि यहां संस्थाएँ भीड़तंत्र के सामने कमजोर साबित होती हैं, तो यह क्षेत्रीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा पर भी आघात है। जब संसद और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्थाओं पर भीड़ हमला करती है, तो यह संकेत है कि जनविश्वास बुरी तरह टूटा है। सवाल यह है कि क्या नेपाल का लोकतंत्र इस बार फिर से खुद को पुनर्जीवित कर पाएगा, या हिंसा और अराजकता उसका स्थायी चेहरा बन जाएगी।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने अमेरिका को लेकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी और व्यवहार के बीच का अंतर कोई नई बात नहीं है। परंतु अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक कला का रूप दे दिया है। दो खबरें इसका ताज़ा उदाहरण हैं। एक ओर ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “मित्र” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को “असीम संभावनाओं वाला साझेदारी” करार देते हैं और व्यापार वार्ताओं के शीघ्र व सफल निष्कर्ष का भरोसा दिलाते हैं। दूसरी ओर वह यूरोपियन यूनियन से आग्रह करते हैं कि वह भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए ताकि रूस को आर्थिक रूप से पंगु बनाया जा सके। यह विरोधाभास महज़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि ट्रंप की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि ट्रंप की कूटनीति में विरोधाभास दरअसल उनकी “डील-मेकिंग” शैली का हिस्सा है। वे मित्रवत भाषा बोलकर विश्वास का माहौल रचते हैं और साथ ही दंडात्मक कदमों की धमकी देकर अपने पक्ष को मज़बूत करते हैं। भारत को “स्वाभाविक साझेदार” बताने और 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी देने के बीच यही संतुलन दिखाई देता है। उनका लक्ष्य भारत को यह अहसास कराना है कि यदि वह अमेरिकी शर्तों के अनुरूप नहीं चला तो आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 17:10:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/what-did-india-write-about-nepal-breakdown-discussion-on-nepal-crisis-and-trump-tariffs</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/9/15/nepal-crisis_large_1715_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Social Media Ban के विरोध में Nepal Gen Z का बवाल, सड़क से संसद तक महासंग्राम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/nepal-gen-z-creates-ruckus-in-protest-against-social-media-ban-fight-streets-to-parliament]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी समाचार नेटवर्क&nbsp; के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह नेपाल की स्थिति, जीएसटी सुधार और बिहार कांग्रेस की राजनीति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि नेपाल के प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ पार्टी कार्यालयों, बालकोट स्थित प्रधानमंत्री ओली के घर और जनकपुर की इमारतों में आग लगा दी, जबकि काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहे। सोमवार को हुई मौतों की जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बालकोट स्थित निजी आवास के पास जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आवास में आग लगा दी। मंगलवार दोपहर सानेपा स्थित नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शनकारियों ने बुधनीलकांठा स्थित नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के घर में भी तोड़फोड़ की।</div><br><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने ललितपुर के च्यासल स्थित सीपीएन-यूएमएल के राजनीतिक दल कार्यालय पर हमला किया। सोमवार को 19 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन के तहत प्रदर्शनकारियों ने खिड़कियां तोड़ दीं, पत्थर फेंके और इमारत में आग लगा दी। उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोस में ये सब अगर हो रहा है तो यह हमारे देश के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि नेपाल में सरकार द्वारा प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध ने देश के राजनीतिक, सामाजिक और कूटनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया है। यह केवल डिजिटल नीति का सवाल नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवा चेतना के लिए एक गंभीर चुनौती है। फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स, जिन्हें युवा पीढ़ी अपने विचार व्यक्त करने, दोस्तों से जुड़ने और वैश्विक घटनाओं से अपडेट रहने के लिए इस्तेमाल करती है, उन पर बैन लगाने से युवाओं में गहरी नाराजगी और असंतोष पैदा हुआ है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/how-did-nepal-get-trapped-between-america-vs-china-now-only-modi-will-extinguish" target="_blank">America vs China में कैसे फंसा नेपाल, अब मोदी ही कभी हिंदू राष्ट्र रहे मुल्क की आग बुझाएंगे?</a></h3><div>प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि युवा पीढ़ी पहले ही देश की कमजोर स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से तंग आ चुकी है। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर पाबंदी ने उनकी निराशा को और बढ़ा दिया है। हाल ही में ‘नेपो किड्स’ यानि राजनीतिक परिवारों के बच्चों के विरुद्ध उभरे गुस्से और काठमांडू में जेनरेशन ज़ेड के युवाओं का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि वह अब अन्याय को चुपचाप सहन नहीं करेंगे। यह चेतावनी है कि यदि सरकार युवा वर्ग की भावनाओं को समझने में विफल रही, तो राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। देखा जाये तो इस घटनाक्रम का भारत और दक्षिण एशिया के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है। नेपाल भारत का निकटतम पड़ोसी और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देश है। वहां की अस्थिरता न केवल सीमा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है, बल्कि चीन जैसे बाहरी प्रभावों को बढ़ावा देने का अवसर भी दे सकती है।</div><div><br></div><div>जीएसटी सुधार को लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसे हर एक इंसान को फायदा होगा। देश में महंगाई कम होगी। साथ ही साथ लोगों को टैक्स के झंझट से राहत मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भारतीय अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में यह फैसला लिया गया है। अपने आप में यह ऐतिहासिक फैसला है और सभी को इससे राहत मिलेगा। इससे आम जरूरत की चीजें सस्ती होगी। वही, बिहार को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि कई बार राहुल गांधी मेहनत करते हैं और उनकी पार्टी उसे पर पानी फेर देती है। दूसरी ओर देखे तो कांग्रेस मेहनत करती है और राहुल गांधी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। यह कांग्रेस में लगातार चलता रहा है और जिस तरीके से केरल कांग्रेस का ट्वीट आया वह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप किसी को इस तरीके से नीचा नहीं कर सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:06:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/nepal-gen-z-creates-ruckus-in-protest-against-social-media-ban-fight-streets-to-parliament</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/9/9/nepal-protest_large_1511_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: बिहार में गाली वाली राजनीति से किसे होगा फायदा, किसका नुकसान?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/who-will-benefit-and-who-will-lose-from-abusive-politics-in-bihar]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने बिहार में राहुल गांधी की चल रही यात्रा और उससे जुड़ी राजनीति पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि बिहार में राहुल गांधी और विपक्ष की जो यात्रा निकाली जा रही है, उ,से बिहार का प्रचार हो रहा है। राहुल गांधी द्वारा नीतीश सरकार ने जो कुछ भी काम किया है, उसका प्रचार किया जा रहा है। बिहार के सड़के अच्छी है इसलिए राहुल गांधी कार और बाइक से भी यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महुआ मोइत्रा ने इस तरीके से गृह मंत्री अमित शाह को लेकर बयान दिया वह वाकई निंदनीय है और महुआ मोइत्रा जैसी वरिष्ठ नेता को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी जिस लहजे में बात कर रहे हैं, वह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। राहुल गांधी एक संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें अपनी शब्दावली पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वह जिस तरीके से बातें कह रहे हैं, वह चिंताजनक है। यह भारत के लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के सोशल मीडिया को देखें तो चिंताएं और भी बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक भाषाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। सोशल मीडिया पर जो कुछ भी कांग्रेस की ओर से लिखा जा रहा है, कहा जा रहा है, वह हैरान करने वाला है। नीरज दुबे ने कहा कि यह देश के साथ खड़े होने का समय है। वैश्विक चुनौतियां देश के समक्ष है और ऐसे में सबकी को एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ने की आवश्यकता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rahul-gandhi-warns-bjp-hydrogen-bomb-revelation-on-vote-fraud-in-bihar" target="_blank">राहुल का मोदी सरकार पर बड़ा हमला: 'वोट चोरी पर छोड़ेंगे हाइड्रोजन बम, चेहरा नहीं दिखा पाएंगे PM'</a></h3><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने कहा कि हमारे राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि इन चुनौतियों से हमें बाहर निकलना है। लेकिन हम एकजुट होने की बजाए एक दूसरे से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री पर जिस तरीके के आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी मां को गाली दिए जा रहे हैं, संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लग रहे हैं यह पूरी तरीके से गलत है। इसको कही से भी सही नहीं कहा जा सकता। किसी के मां पर इस तरह की टिप्पणी करना बिल्कुल गलत है। नरेंद्र मोदी की मां को गाली दिए जाने के बाद भी राहुल गांधी और कांग्रेस इस पर खेद नहीं जाता रही है। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी अपनी यात्रा के जरिए विकास जो बिहार में हुआ है, उसको प्रचारित कर रहे हैं। अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। बिहार की विकास की गाथा को राहुल गांधी देश के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। तभी वह बाइक से घूम रहे हैं। नीतीश कुमार को भी इसके लिए राहुल गांधी का शुक्रिया करना चाहिए। नीरज दुबे ने कहा कि नीतीश कुमार महिला वोट को एक बार फिर से साधने की कोशिश की है और चुनावी मौसम में महिला मतदाता हाल के दिनों में भाजपा और एनडीए के लिए फायदेमंद रही है।&nbsp;</div><div><br></div><div>महुआ मोइत्रा पर नीरज दुबे ने कहा कि जिस तरीके से अमित शाह को लेकर बयान दिया, वह पूरी तरीके से गलत है और हमें सिर्फ महुआ मोइत्रा ही नहीं तृणमूल कांग्रेस को भी देखना होगा। तृणमूल कांग्रेस के नेता जिन भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं वह गलत है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने बंगाल की संस्कृति और संस्कार जो है, उसको कहीं ना कहीं खत्म करने की कोशिश की है। यह बंगाल के लिए और देश के लिए ठीक नहीं है। जैसे-जैसे चुनाव आएंगे, इस तरीके के कड़वे बयान सामने आएंगे जो बिल्कुल भी अच्छी बात लोकतंत्र के लिए नहीं है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 16:52:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/who-will-benefit-and-who-will-lose-from-abusive-politics-in-bihar</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/9/1/modi-rahul_large_1656_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Trump Tariffs Constitutional Amendment Bill SIR in Bihar मुद्दों की समीक्षा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/review-of-issues-trump-tariffs-constitutional-amendment-bill-sir-in-bihar]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने देश दुनिया के मुद्दों पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे से हमने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गए टैरिफ को लेकर ही पहला सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है। हालांकि भारत तमाम चिंताओं को पीछे कर आगे बढ़ना जारी रख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरीके से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वह पूरी तरीके से गलत है। जो अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, वह अब लागू होने जा रहा है। ऐसे में चिंता तो स्वाभाविक है।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि अगर रूस यूक्रेन युद्ध बंद नहीं होता है तो वह और पेनल्टी लगा सकते हैं। ट्रंप यह भी कह रहे हैं कि शांति का रास्ता दिल्ली से ही होकर जाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से अपने विदेश नीति चला रहे हैं, ऐसा कभी भी अमेरिका ने पहले नहीं किया है। सार्वजनिक रूप से जिस तरीके से किसी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ वह बर्ताव करते हैं, वह भी गलत लगता है। नीरज दुबे ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान एक अलग ट्रंप लग रहे थे जबकि सत्ता में आने के बाद वह पूरी तरीके से अलग है। इस बार ट्रंप व्यवसायी ट्रंप नजर आ रहे हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/will-tejaswi-become-cm-of-bihar-rahul-gandhi-avoided-real-question-by-giving-a-vague-answer" target="_blank">क्या तेजस्वी बिहार के सीएम बनेंगे? गोलमोल जवाब देकर असली सवाल को टाल गए राहुल गांधी</a></h3><div>प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने कहा कि जो लोग भी यह कह रहे हैं कि भारत की विदेश नीति खराब हो रही है, उन्हें यह देखना चाहिए की पूरी दुनिया में ट्रंप द्वारा लिए गए निर्णय का प्रभाव पड़ रहा है। भारत ट्रंप के फैसलों के सामने डटकर खड़ा है। भारत किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है। जबकि भारत पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश ट्रंप प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरीके से रिपोर्ट आई है कि अमेरिका ने भारत को कहा था कि आप रूस से तेल खरीदे, अब ट्रंप कुछ और निर्णय ले रहे हैं। भारत लगातार यह भी साफ कर रहा है कि हम रूस के सबसे बड़े खरीदार नहीं है। चीन और यूरोपीय देश उससे ज्यादा ईंधन लेते हैं। बावजूद इसके ट्रंप भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतना भारी दबाव अमेरिका की ओर से बनाया जा रहा है। बावजूद इसके हम अपने किसानों और मछुआरों के हितों को साधने में सफल हो रहे हैं। ऐसे में हमारी विदेश नीति कहां विफल हो रही है।</div><div>&nbsp;</div><div>गिरफ्तार सीएम-पीएम को हटाने वाले बिल को लेकर भी सियासत जबरदस्त तरीके से तेज है। इसको लेकर नीरज दुबे ने कहा कि आज देश के लिए यह बिल बेहद जरूरी है। हमने देखा कि कैसे अरविंद केजरीवाल जब जेल में थे, तब यहां की सरकार चलती थी। कोई कैबिनेट का बैठक नहीं हो पता था। जेल से निर्देश आते थे जो कि लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष दावा कर रहा है कि यह हमें निशाना बनाने की कोशिश किया जा रहा है। लेकिन डर उन्हें लगता है जिन्होंने कुछ गलत किया हो। इस देश में सबसे ज्यादा शासित राज्य भाजपा के हैं। केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में उन्हें डरना चाहिए। लेकिन डर विपक्ष रहा है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर सबसे ज्यादा केस हैं। ऐसे रिपोर्ट है। उन्होंने कहा कि अगर आप जनता के खजाने की सुरक्षा के लिए गद्दी पर बैठे हैं तो जनता का पैसा सही जगह निवेश हो, इसकी जिम्मेदारी आपकी है और ऐसे में आपको कोई भी गलत काम करते वक्त डर तो लगना ही चाहिए।</div><div><br></div><div>एसआईआर को लेकर देश में जारी विवाद के बीच नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष लगातार देश के कार्यक्रमों से किनारा कर रहा है। राहुल गांधी वोट चोरी के बात कर रहे हैं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के नेताओं का दिमाग चोरी हो गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने कांग्रेस जा रही है। लेकिन मुद्दे वह वोट चोरी का उठा रही है। बिहार के मुद्दे नहीं उठा रही है। महाराष्ट्र में वोट चोरी हुआ, लेकिन मुद्दा बिहार में बनाया जा रहा है। एसआईआर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है। ऐसे में विपक्ष को कहीं ना कहीं संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा करना चाहिए। आप सिर्फ एजेंडा सेटिंग के लिए राजनीति नहीं कर सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/review-of-issues-trump-tariffs-constitutional-amendment-bill-sir-in-bihar</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/8/25/bihar-elections_large_1557_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: Vote Chori Politics, CP Radhakrishnan और PM Independence Day Speech की समीक्षा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/review-of-vote-chori-politics-cp-radhakrishnan-and-pm-independence-day-speech]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने उपराष्ट्रपति चुनाव, राहुल गांधी के आरोप और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण पर विश्लेषण किया। इस दौरान हमेशा की तरह हमारे साथ रहे मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार के तौर पर सीपी राधाकृष्णन का नाम आगे किया गया है। इसको लेकर हमने नीरज दुबे से सवाल पूछे। नीरज दुबे ने कहा कि संगठन का काम करने का राधाकृष्णन जी को इनाम मिला है। वह बेहद ही शांत और सहज स्वभाव के व्यक्ति हैं। उनके सभी दलों में अच्छी पकड़ है। सभी से उनके अच्छे संबंध है। वह वैचारिक रूप से भाजपा से लगातार जुड़े रहे हैं। 16 वर्ष की आयु से वह संघ से जुड़े हुए हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि जगदीप धनखड़ को लेकर भाजपा को जो कड़वा अनुभव मिला है। उससे सबक लेते हुए सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमने अपने कार्यक्रम में कई नामों को लेकर चर्चा की। लेकिन इतना तय था कि जो नाम भी सामने आएगा, वह भाजपा या संघ की पृष्ठभूमि का ही होगा और यही हमने देखा भी। सीपी राधाकृष्णन जी हमेशा पार्टी के लिए काम किया है। परिस्थितियां चाहे जो भी रही हो, लेकिन वह पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से भी सीपी राधाकृष्णन को लेकर कोई ऐसा बयान नहीं दिया जा रहा है जिसमें कड़वाहट हो। हां, यह जरूर कहा जा रहा है कि वह आरएसएस के हैं। लेकिन उनके व्यवहार की आलोचना कहीं से भी नहीं हो रही है और हमने देखा है कि गवर्नर के तौर पर झारखंड और महाराष्ट्र में भी वह कितने सहज रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/the-father-of-vote-rigging-and-the-obsession-of-his-great-grandson" target="_blank">मतों की हेराफेरी के जनक और उनके परनाती की सनक</a></h3><div>उन्होंने कहा कि वह विवादों से दूर रहे हैं और यही कारण है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व का भरोसा प्राप्त हुआ है और एनडीए का भी समर्थन उसे हासिल होता दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं राधाकृष्णन को आगे कर कर भाजपा ने तमिलनाडु की राजनीति को भी साधने की कोशिश की है। एक ओर जहां भाजपा पर आरोप लगता है कि भाजपा तमिलनाडु के लोगों से भेदभाव करती है। वहीं अब भाजपा यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि कोई भेदभाव नहीं है। हम सबको साथ लेकर आगे चलते हैं।</div><div><br></div><div>आजादी के बाद पहली बार देश के किसी प्रधानमंत्री ने लाल किले से आरएसएस का नाम लिया है। इसके बाद अब प्रधानमंत्री की विपक्ष जबरदस्त तरीके से आलोचना कर रहा है। इसी को लेकर नीरज दुबे से हमने सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में सभी का योगदान रहा है। केवल कांग्रेस का योगदान रहा है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आरएसएस का भी आजादी के आंदोलन में योगदान रहा है। हां, उनके कामों को आगे नहीं किया गया। निस्वार्थ भाव से आरएसएस के लोग काम करते थे और यही कारण रहा की एकजुट होकर भारत ने अंग्रेजों से आजादी हासिल की। ऐसे में विश्व का सबसे बड़ा संगठन आज अपने 100 साल पूरे कर रहा है तो उसका जिक्र क्यों न किया जाए। हमें आजादी मिली लेकिन आधी अधूरी मिली थी। विभाजित आजादी मिली थी। लेकिन आरएसएस का जिक्र जरूर होना चाहिए। आरएसएस 100 साल से लगातार देश के अलग-अलग क्षेत्र में काम करता रहा है और उसके बदले उसका कोई अपना स्वार्थ नहीं होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच चल रहे तकरार पर नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस नेता जिस तरीके से आरोप लगा रहे हैं, वह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। बावजूद इसके आप चोरी चोरी कह रहे हैं। आप बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग आपके सारे आरोपों का जवाब दे रहा है। बावजूद इसके आप एक के बाद एक आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं। आप राजनीतिक तौर पर अपने विरोधियों से लड़िया लेकिन आप देश के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं जो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। हालांकि राहुल गांधी ऐसा नहीं है कि पहली बार सवाल खड़े कर रहे हैं। हमने देखा कि मनमोहन सिंह की सरकार थी तब वह किस तरीके से सरकारी बिल फाड़ कर फेंक देते थे जो वीडियो वायरल हुआ था। राहुल गांधी को गंभीरता से हमारे संविधानिक संस्थानों पर विश्वास करना चाहिए। अविश्वास लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। एक परिवार है जो खुद को इस देश का मालिक मानता है और इसी वजह से राहुल गांधी की इस तरह की मानसिकता बार-बार पर दिखाई देती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 16:31:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/review-of-vote-chori-politics-cp-radhakrishnan-and-pm-independence-day-speech</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/8/19/rahul-gandhi-ec_large_1633_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Chai Par Sameeksha: EC के खिलाफ राहुल के तेवर लोकतंत्र के लिए कितना सही?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-right-is-rahul-stance-against-ec-for-democracy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाया जा रहे आरोपों को लेकर चर्चा की। साथ ही साथ हमने मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर भी प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से सवाल पूछे। इस दौरान नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को खटखड़े में खड़ा करना अब कांग्रेस की आदत सी बन गई है। नीरज दुबे ने कहा कि एसआईआर को लेकर जो राजनीति चल रही है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। देश का सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे को देख रहा है। ऐसे में विपक्ष को थोड़ा धैर्य दिखाने की आवश्यकता है।</div><div><br></div><div>प्रभासाक्षी के संपादक ने कहा कि जब पूरे प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय के निगाहें हैं, तब कोई कैसे गड़बड़ी कर सकता है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग विपक्ष के तमाम सवालों का जवाब दे रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के निशाने पर संवैधानिक संस्थाएं आ रहे हैं। चुनाव से पहले ही यह हार मान लेने वाली स्थिति है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि इस तरीके का विवाद खड़ा करके देश की छवि को खराब किया जा रहा है। संसद का समय बर्बाद किया जा रहा है। विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है। लेकिन संसद का वक्त इस तरीके से खराब करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष चाहे की तो सांसद जरुर चलेगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/his-data-will-be-broken-we-will-remove-him-rahul-gandhi-again-targeted-the-election-commission" target="_blank">उसका डेटा फटेगा, उसको हम निकाल देंगे... चुनाव आयोग पर राहुल गांधी ने फिर साधा निशाना</a></h3><div>संपादक नीरज दुबे ने कहा कि जब से राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने हैं, तब से विपक्ष नाम की चीज नहीं रह गई है। वह मीडिया की सुर्खियों में ज्यादा रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। संसद नहीं चल रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ और उसे पर कोई चर्चा नहीं हुई और 1 मिनट में यह पास हो गया। जिससे साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। विधेयक बिना किसी चर्चा के पास हो रहा है। अगर सदन सामान्य रूप से चले तो विपक्ष के तमाम सवालों का जवाब सरकार को देना पड़ेगा।</div><div><br></div><div>संपादक नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि जो देश के हमारे टैक्स पेयर हैं, उनके पैसे को हम बर्बाद इस तरीके से क्यों कर रहे हैं। हमें विपक्ष की भूमिका के तौर पर राहुल गांधी जो कुछ भी कर रहे हैं उसे पर सोचने की जरूरत है। राहुल गांधी के तेवर अच्छे हैं लेकिन संसद चलना चाहिए ऐसा भी उन्हें कोशिश करनी होगी। नीरज दुबे ने यह भी सवाल किया कि चुनाव आयोग जो काम कर रहा है, उस पर आप चर्चा करने के लिए क्यों अड़े हुए हैं। पहले चुनाव आयोग को अपना काम कर लेने दीजिए। उसके बाद अगर आपको गड़बड़ी लगे तो आप इस पर हो-हल्ला कर सकते हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 16:37:28 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/reviews-on-tea/how-right-is-rahul-stance-against-ec-for-democracy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2025/8/11/rahul-gandhi_large_1638_23.webp" />
    </item>
  </channel>
</rss>