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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[New York City Council ने पारित किया रोमांच कानून, घोड़ा-बग्घी संचालन पर 2028 तक लगेगी रोक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/new-york-city-council-passes-bill-to-phase-out-horse-drawn-carriages-central-park]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, 23 अक्टूबर न्यूयॉर्क शहर में घोड़ों से खींची जाने वाली बग्घियों की सवारी पर रोक लगाने वाला एक विधेयक पारित किया गया है। इस साल गर्मियों में सेंट्रल पार्क में बग्घी से जुड़ी एक भयावह घटना में एक भारतीय किशोर की मौत के बाद इस दिशा में नये सिरे से कई महीनों तक प्रयास किए गए थे। न्यूयॉर्क नगर परिषद ने बृहस्पतिवार को ‘रोमांच कानून’ को मंजूरी दी।</p><p>इसके तहत एक जून 2028 तक सेंट्रल पार्क में घोड़ों से खींची जाने वाली बग्घियों का संचालन चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। साथ ही इस उद्योग पर लंबे समय से निर्भर कर्मचारियों की आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। विधेयक के पक्ष में 40 और विरोध में सात मत पड़े, जबकि दो सदस्य मतदान में अनुपस्थित रहे।</p><p>अब यह विधेयक हस्ताक्षर के लिए न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के पास भेजा जाएगा। इस कानून का नाम भारत से आए 18 वर्षीय पर्यटक रोमांच महाजन के नाम पर रखा गया है। इस साल गर्मियों में सेंट्रल पार्क में घोड़ों से खींची जाने वाली बग्घी से गिरने के बाद रोमांच की मौत हो गई थी।</p><p>घटना के बाद यह कानून पारित किया गया। रोमांच की मौत के तुरंत बाद नगर परिषद ने बग्घी उद्योग पर सुनवाई की थी। इसका उद्देश्य इस प्रथा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए संभावित विधायी कदमों की पड़ताल करना और बग्घी मालिकों तथा संचालकों की राय जानना था।</p><p>नगर परिषद ने एक बयान में कहा कि इस विधेयक के तहत अगले 19 महीनों में इस उद्योग को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। साथ ही कर्मचारियों और घोड़ों के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित बदलाव की रूपरेखा तैयार की जाएगी। नगर परिषद की अध्यक्ष जूली मेनिन ने विधेयक पारित होने को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि रोमांच की ‘दुखद और टाली जा सकने वाली’ मौत ने दशकों से बढ़ती चिंताओं के बीच तत्काल कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित किया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 23:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/new-york-city-council-passes-bill-to-phase-out-horse-drawn-carriages-central-park</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Jordan के कराक में चर्च पर आतंकी हमला, 7 लोगों की मौत और 34 घायल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/jordan-karak-greek-orthodox-church-shooting-seven-killed-thirty-four-injured]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>जॉर्डन में शुक्रवार को एक गिरजाघर में अंतिम संस्कार के दौरान हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई और 34 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। गोलीबारी की ये घटना राजधानी अम्मान से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण में कराक स्थित एक ग्रीक ऑर्थोडॉक्स गिरजाघर में हुई।</p><p>सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी ने एक बयान में कहा कि सुरक्षा एजेंसियां गोलीबारी की जांच कर रही हैं। कराक में आबादी के लिहाज से ईसाई अल्पसंख्यक हैं। जॉर्डन के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित वीडियो में दो लोग पिस्तौल लिए गिरजाघर की ओर बढ़ते और गोलियां चलाते दिखाई दे रहे हैं।</p><p>इसके बाद एक तीसरा व्यक्ति दिखाई देता है, जिसके हाथ में अर्ध-स्वचालित राइफल नजर आ रही है। वह भी गोलीबारी शुरू कर देता है। इसके बाद तीनों हमलावर गिरजाघर की ओर दौड़ते हैं।</p><p>सरकार के एक बयान में कहा गया कि यह हमला ‘‘अज्ञात हमलावरों ने किया।’’
हालांकि, यह नहीं बताया गया कि किसी बंदूकधारी को पकड़ा गया या मार गिराया गया। शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने ‘एक्स’ पर कहा कि जॉर्डन कराक को निशाना बनाने वाले ‘‘आतंकवादी कृत्य’’ के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 22:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/jordan-karak-greek-orthodox-church-shooting-seven-killed-thirty-four-injured</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[S Jaishankar और नेपाल के वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद पर की चर्चा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/s-jaishankar-and-nepal-finance-minister-discuss-global-cooperation]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 23 अक्टूबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भविष्य पर विचारों का आदान-प्रदान किया। नेपाल की ‘नेशनल न्यूज एजेंसी’ के अनुसार बृहस्पतिवार को ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026’ के एक सत्र में दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव, बहुपक्षीय सहयोग के भविष्य और क्षेत्रीय तथा उप-क्षेत्रीय साझेदारियों की आवश्यकता पर चर्चा की। सम्मेलन के ‘संप्रभु विकल्प की भू-राजनीति’ शीर्षक वाले सत्र में जयशंकर मुख्य वक्ता थे।</p><p>वागले ने कहा कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया में व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में बहुपक्षवाद को प्राथमिकता दी गई, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी नींव कमजोर हुई है। नेपाल के वित्त मंत्री ने यह सवाल भी उठाया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को औपचारिक संस्थागत ढांचों के जरिए मजबूत किया जाना चाहिए या साझेदार देशों के बीच आपसी समझ के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में देश औपचारिक प्रतिबद्धताओं के बजाय व्यावहारिक सहयोग की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।</p><p>जयशंकर ने कहा कि औपचारिक संस्थागत ढांचे तैयार करने में परामर्श, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, वित्तीय प्रतिबद्धताओं और नियम बनाने में काफी समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि जहां औपचारिक ढांचे जरूरी हैं, वहां ऐसी व्यवस्थाएं उपयुक्त हैं, लेकिन सहयोग के सभी रूपों को संस्थागत ढांचों से जोड़ना आवश्यक नहीं है। ब्रिक्स की तुलना शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से करते हुए जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स का अपना कोई सचिवालय नहीं है और न ही यह अपने सभी सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित किसी चार्टर पर आधारित है।</p><p>विदेश मंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ के बीच संरचनात्मक अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि सहयोग के सभी तंत्रों के लिए एक ही तरह का समान ढांचा होना जरूरी नहीं है। जयशंकर ने कहा, ‘‘अगर आप मुझसे इस रुझान के बारे में पूछें, तो मैं कहूंगा कि यह स्पष्ट रूप से तदर्थ व्यवस्थाओं और समान विचारधारा वाले देशों के बीच साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।’’
पिछले एक दशक में भारत द्वारा ऐसे लगभग 50 समूह बनाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें त्रिपक्षीय और चतुष्पक्षीय व्यवस्थाओं से लेकर समान विचारधारा वाले देशों के गठबंधन तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशों में सहयोग के ऐसे मॉडल में रुचि बढ़ रही है, जिसमें प्रशासनिक खर्च कम हो और ठोस परिणाम हासिल किए जा सकें।</p><p>इससे पहले, वागले ने 26 अगस्त को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आपदा से निपटने के प्रयासों में नेपाल को भारत की ओर से दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए नेपाल भारत का आभारी है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 22:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/s-jaishankar-and-nepal-finance-minister-discuss-global-cooperation</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Tibet Earthquake में 16 की मौत, बचाव कार्य में China ने उतारे Satellites और Drones]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/tibet-earthquake-kills-16-china-deploys-satellites-and-drones-for-rescue]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप आने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और 76 अन्य लोग घायल हो गए, जिसके बाद 12,000 से अधिक निवासियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के बाद चीन ने जिंदा बचे लोगों की तलाश के लिए क्षेत्र में उपग्रह और ड्रोन तैनात किए।</p><p>अधिकारियों के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजकर 33 मिनट (स्थानीय समय) पर नागकू शहर की बाकेन काउंटी में आए भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर से भी कम गहराई पर था। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा से खबर दी कि अब तक 12,489 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। उसने बताया कि बचाव एवं राहत अभियान के साथ-साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने का काम जारी है।</p><p>चीन एयरोस्पेस विज्ञान और प्रौद्योगिकी निगम (सीएएससी) ने शुक्रवार को बताया कि बचाव कार्यों में मदद के लिए चीन ने भूकंप प्रभावित इलाके में आपातकालीन संचार सुविधा देने और वहां की तस्वीरें लेने के लिए उपग्रहों और मानवरहित विमानों को तैनात किया है। तिब्बती पठार को भूकंप के खतरे के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र उस स्थान के ठीक ऊपर स्थित है, जहां यूरेशियाई एवं भारतीय टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, जिससे भूकंपीय कंपन पैदा होती है।</p><p>‘शिन्हुआ’ के अनुसार, चीन ने भूकंप के बाद आपातकालीन आपदा राहत के लिए लगभग 75 लाख अमेरिकी डॉलर (पांच करोड़ युआन) आवंटित किए हैं और पुनर्वास कार्यों के लिए तीन करोड़ युआन की अतिरिक्त राशि निर्धारित की है। इससे पहले आई खबरों के अनुसार, भूकंप में 330 से अधिक मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।</p><p>गंभीर रूप से घायल लोगों की संख्या सहित 76 घायलों का विस्तृत ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। चाइना रेलवे छिंगहाई-तिब्बत ग्रुप कंपनी लिमिटेड ने बताया कि प्रभावित हिस्से में छिंगहाई-तिब्बत रेलवे पर यात्री ट्रेन का परिचालन शुक्रवार सुबह कम गति से फिर शुरू कर दिया गया। ‘स्टेट ग्रिड शिजांग इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड’ ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10 बजे (स्थानीय समय) तक भूकंप प्रभावित बाकेन काउंटी में 1,937 घरों की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी।</p><p>विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की ओर से आवंटित राहत सामग्री भूकंप प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने लगी है। इसमें पहले से तैयार 1,000 आवासीय इकाइयां, 3,239 तंबू, 2,821 तह किए जा सकने वाले बिस्तर और रजाइयां, स्टोव तथा कपड़ों जैसी रोजमर्रा की जरूरत की अन्य वस्तुएं शामिल हैं। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के केंद्र के आसपास के क्षेत्र की औसत ऊंचाई 4,800 मीटर से अधिक है।</p><p>अगले तीन दिनों में तापमान गिरकर शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंचने का अनुमान है। विभाग ने कहा कि भूकंप के केंद्र के पास स्थित तीन टाउनशिप में शनिवार को रुक-रुककर बर्फबारी होने का भी पूर्वानुमान है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भूकंप में लापता लोगों की तलाश और उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने तथा घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।</p><p>चिनफिंग ने कहा कि भूकंप में जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र की अधिक ऊंचाई और कम तापमान को देखते हुए भूकंप के बाद संभावित अन्य आपदाओं को रोकने के लिए भूकंपीय गतिविधियों और मौसम की स्थितियों पर कड़ी नजर रखने पर भी जोर दिया। चीनी राष्ट्रपति ने प्रभावित लोगों के लिए आवास की उचित व्यवस्था करने, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की जल्द मरम्मत करने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आह्वान किया।</p><p>प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी आपदा की रोकथाम और उससे प्रभावी ढंग से निपटने के प्रयास करने का आह्वान किया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/tibet-earthquake-kills-16-china-deploys-satellites-and-drones-for-rescue</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Melania Trump की पहल पर Oleshky में सीजफायर समझौता, 29 अक्टूबर से पहुंचेगी मानवीय मदद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/melania-trump-brokered-ceasefire-in-russian-held-oleshky-white-house-says]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को घोषणा की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से तबाह शहर ओलेश्की में एक संघर्षविराम समझौता कराया है, ताकि मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके और नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकाला जा सके। यह स्थानीय संघर्षविराम समझौता 29 अक्टूबर से शुरू होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय (व्हाइट हाउस) ने बताया कि अमेरिका की प्रथम महिला ने बातचीत की पहल की थी, और उन्होंने तथा एक प्रतिनिधि ने संघर्षविराम की शर्तें तय करने के लिए सीधे रूसी और यूक्रेनी नेतृत्व के साथ काम किया।</p><p>यूक्रेन या रूस सरकार की ओर से इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है। प्रथम महिला के तौर पर, मेलानिया ट्रंप ने संघर्ष से प्रभावित बच्चों के मुद्दे को अपने मुख्य एजेंडे में शामिल किया है। इसी साल उन्होंने इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक की मेजबानी भी की थी।</p><p>इसके अलावा, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया था कि वह युद्ध के कारण अपने परिवारों से बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से फिर से मिलाने की दिशा में काम करें। निप्रो नदी के किनारे बसे ओलेश्की में महीनों से भोजन और चिकित्सा सामग्री की भारी कमी है। यह नदी यूक्रेनी सेनाओं को शहर पर कब्ज़ा जमाए रूसी बलों से अलग करती है।</p><p>वहाँ न तो बिजली है, और न ही पेयजल आपूर्ति है। शहर से बाहर जाने वाली सड़कों पर बारूदी सुरंगें बिछी हैं और वहाँ जली हुई कारें पड़ी हैं। सिर के ऊपर खतरनाक ड्रोन मंडराते रहते हैं।</p><p>लगभग 24,000 की आबादी वाला शहर ओलेश्की, 2022 में यूक्रेन पर शुरू हुए हमले के पहले ही दिन रूसी बलों के कब्जे में आ गया था। इसकी इमारतों पर गोलाबारी की गई और उन्हें जला दिया गया, साथ ही इसके बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। जून 2023 में एक और बड़ी आपदा आई, जब काखोव्का बांध के ढह जाने के कारण शहर में बाढ़ का पानी भर गया।</p><p>‘एसोसिएटेड प्रेस’ की जांच के अनुसार, यह बांध एक विस्फोट के कारण टूटा था, जिसे संभवतः रूसी सेना ने अंजाम दिया था। इस घटना में सैकड़ों निवासियों की जान चली गई। यूक्रेन ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बार-बार स्थानीय स्तर पर संघर्षविराम की अपील की है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/melania-trump-brokered-ceasefire-in-russian-held-oleshky-white-house-says</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[उछल-उछल कर भारत को फंसा रही थी ये महिला, लगा तगड़ा करंट!]]></title>
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      <description><![CDATA[<p>आपने कई बार देखा होगा कि कैसे पाखंडी विदेशी मीडिया और अहंकारी विदेशी एक्सपर्ट्स खुद रूस से गैस खरीदने के बावजूद रूसी तेल का नाम लेकर हमेशा भारतीय विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर को फंसाने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन हर बार विदेश मंत्री एस जयशंकर इनकी सरेआम धुलाई कर देते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ लेकिन किरदार थोड़े बदल गए। इस बार भी अहंकारी और पाखंडी विदेशियों को 440 वोल्ट का झटका दिया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाला। पीयूष गोयल ने जिस तरह से यूरोप के धागे खोले हैं, वह ऐतिहासिक है। दरअसल, जर्मनी के शहर बर्लिन में क्लाइमेट चेंज को लेकर एक चर्चा चल रही थी। तीन यूरोपीय बैठे थे और पीयूष गोयल अकेले ही काफी थे। पीयूष गोयल के सामने बैठी यह विदेशी महिला अचानक अजीब-अजीब हरकतें करने लगी। ड्रामा करते हुए हाथ उठाकर बोली कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर मामला है। यह कोई मामूली बात नहीं है। आप इन यूरोपीय लोगों का पाखंड देखिए। पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं लोगों ने पहुंचाया है और अब यहां पर बैठकर भारत को नसीहत देने लगे।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/name-of-us-congresswoman-who-married-her-brother-turns-out-to-be-fake" target="_blank" rel="noopener">भाई से शादी करने वाली अमेरिकी सांसद का नाम निकला फर्जी? ट्रंप ने भारत विरोधी एल्हान उमर पर लगाया बड़ा आरोप</a></h3><p><br>दरअसल विदेशी महिला पीयूष गोयल के जरिए भारत पर निशाना साध रही है। लेकिन पीयूष गोयल ने मुस्कुराते हुए तथ्यों को सीधे इनके मुंह पर दे मारा। सच्चाई सुनकर इन सभी को ऐसा करंट लगा कि यह हिल तक नहीं पाए। उछल-उछल कर पर्यावरण की बातें कर रही इस महिला से पीयूष गोयल ने पूछा कि आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? ओजोन परत को नुकसान किसने पहुंचाया है? पर्यावरण में सबसे ज्यादा कार्बन किसने भेजी है? इस महिला ने चालाकी दिखाते हुए कहा कि हम सब ने यानी गलती खुद करो और दोष सब पर लगा दो। लेकिन पीयूष गोयल ने तुरंत इस महिला को टोकते हुए कहा कि आप गलत हैं। मैं दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूं और मेरे देश का कार्बन उत्सर्जन 3% से भी कम है। लेकिन आप शायद दुनिया की 3 से 4% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। मगर पर्यावरण में कार्बन छोड़ने में आपका योगदान करीब 20% है।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/kaushambi-court-life-imprisonment-four-dalit-woman-murder-case-2009" target="_blank" rel="noopener">कौशांबी में दलित महिला के अपहरण और हत्या मामले में चार दोषियों को उम्रकैद</a></h3><p><br>तो यह समस्या आपने पैदा की है। आप सभी अपनी अर्थव्यवस्थाओं का विकास कर रहे थे। आपने दिन रात कोयला जलाया। पीयूष गोयल के तथ्यों को सुनकर पीली पड़ चुकी इस महिला को बचाने के लिए एक दूसरा विदेशी एक्सपर्ट कूद पड़ा। इसने पीयूष गोयल से कहा कि सिर्फ यूरोप ही जिम्मेदार थोड़ी है। अमेरिका ने भी तो यही किया है। लेकिन यह सुनने के बाद भी पीयूष गोयल अपने जवाब से भटके नहीं। उन्होंने कहा कि आज मैं यहां पर सिर्फ यूरोप की बात कर रहा हूं। पर्यावरण को जो नुकसान आपने पहुंचाया है उसकी बात कर रहा हूं। पीयूष गोयल ने कहा कि मुझे 1.4 अरब लोगों की जरूरतें पूरी करनी है। उनकी ऊर्जा जरूरतें, उनके भोजन की जरूरतें और एक राष्ट्र के रूप में अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे स्वच्छ ऊर्जा यानी क्लीन एनर्जी प्रोग्राम चला रहा है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:47:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Tibet Earthquake: तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप, धरती कांपी, कई मौतें!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/70-magnitude-earthquake-in-tibet-the-earth-shook-followed-by-several-aftershocks]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>तिब्बत में सात तीव्रता का जोरदार भूकंप आया और भूकंप से 16 लोगों की मौत हो गई। 65 लोग घायल बताए जा रहे हैं और अब तक 400 से ज्यादा आफ्टर शॉक आए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का झटका महसूस होते ही पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। इमारतें और गाड़ियां हिलने लगी। लोग जान बचाने के लिए घरों और होटलों से निकलकर बाहर भागने लगे। भूकंप के झटके लगे और एक स्टोर में रखा सामान अपने आप गिरने लगा। इसी दौरान जैकेट और कैप पहने एक कस्टमर स्टोर के अंदर नजर आया। लेकिन जैसे ही सामान गिरने लगा तो डर की वजह से उसे लौटना पड़ा। स्टोर के अंदर अचानक अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। वहां रखा सामान नीचे गिरता देखकर सभी लोग तेजी से बाहर की तरफ भागने लगे। नाचू शहर के कई रिहाइशी इलाकों में लोकल टाइम के हिसाब से रात 10:33 पर धरती कांपी। झटके इतने तेज थे कि लोग सहम गए और आनन-फानन में घरों से बाहर निकलने को मजबूर हुए। तापमान काफी कम था। लिहाजा लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/tibet-earthquake-kills-16-injures-76-magnitude-7-tremor" target="_blank" rel="noopener">Tibet में 7.0 तीव्रता के Earthquake से भारी तबाही, 16 की मौत और 76 लोग घायल</a></h3><p>एक तरफ भूकंप का खौफ और दूसरी तरफ सर्द रात में सड़क पर काफी वक्त गुजारना पड़ा। भूकंप के झटों से जान माल का भी काफी नुकसान हुआ है। नागपुर शहर में 300 से ज्यादा घर ढहने की खबर है। भूकंप का केंद्र लहासा से करीब 400 कि.मी. दूर उत्तरी तिब्बत के नागपुर सिटी में जमीन से लगभग 173 किमी की गहराई में था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप के बाद कई और भूकंपीय घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 5, 4.8, 4.7, 4.6, 4.4 और 4.3 तीव्रता के झटके शामिल हैं। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। इस काम में 1600 से ज्यादा बचाव कर्मियों को लगाया गया है। प्रभावित लोगों के मदद के लिए राहत सामग्री भी भेजी गई है। इसमें करीब 300 तंबू, 1000 तैयारसीय इकाइयां, फोल्डिंग बेड, टॉर्च और सर्दियों में काम आने वाले कपड़े शामिल हैं। तिब्बत दुनिया के उन इलाकों में शामिल है जहां भूकंप आने का खतरा ज्यादा रहता है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं। इसी वजह से इलाके में भूकंप आते हैं। तिब्बत के अलावा चार एशियाई देशों में भी धरती हिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में सुबह 4:56 पर 4.9 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:38:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/70-magnitude-earthquake-in-tibet-the-earth-shook-followed-by-several-aftershocks</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Russia से 40 हजार टन Diesel लेकर US रवाना हुआ पहला टैंकर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/first-russian-diesel-tanker-departs-for-united-states-under-import-deal]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रूसी राष्ट्रपति कार्यालय-सह-आवास ‘क्रेमलिन’ ने शुक्रवार को कहा कि एक नये आयात समझौते के तहत रूसी डीजल लेकर जाने वाला पहला टैंकर रवाना हो गया है। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो हफ्ते बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बावजूद उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौता किया है। रूसी समाचार एजेंसी ‘इंटरफैक्स’ के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा कि पहली खेप में 40,000 टन डीजल होगा।</p><p>समुद्री खुफिया फर्म केप्लर ने बताया कि जहाज से संकेत मिल रहे हैं कि वह 7 नवंबर को न्यूयॉर्क पहुंचने वाला है। यह जुलाई 2023 के बाद से अमेरिका पहुंचने वाली रूस की पहली डीजल खेप होगी। अपने पड़ोसी देश पर हमले को लेकर रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध नीति में अचानक आया बदलाव, मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए ट्रंप के एक प्रयास के रूप में देखा गया।</p><p>करीब 40,000 टन डीजल की खेप लगभग 300,000 बैरल के बराबर है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था द्वारा एक दिन में खपत किए जाने वाले लगभग 40 लाख (40 लाख) बैरल डीजल का लगभग 7 प्रतिशत है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस आयात समझौते से -- जिसके बारे में ट्रंप का कहना है कि इससे आगामी महीनों में लाखों टन और रूसी डीजल अमेरिका पहुंचेगा -- पेट्रोल पंप या अन्य जगहों पर बहुत अधिक कीमतों में कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है। रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार लंबी दूरी वाले ड्रोन हमलों के कारण वहां डीजल उत्पादन पर दबाव आ गया था।</p><p>इन हमलों की वजह से ईंधन की कमी हो गई थी, जो अब कुछ हद तक दूर हुई है। पिछले महीने ट्रंप ने कीव से इन हमलों को रोकने के लिए कहा था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/first-russian-diesel-tanker-departs-for-united-states-under-import-deal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[PoJK की तरह PoGB में भी बेअसर रहेंगे Local Body Elections, पार्षदों को नहीं मिलेगी विकास निधि]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/amjad-ayub-mirza-slams-pakistan-over-proposed-pogb-local-body-elections]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह कवायद बिना किसी वास्तविक लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के, महज एक और राजनीतिक व्यवस्था बनकर रह सकती है। यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में, मिर्जा ने सवाल उठाया कि क्या 5 दिसंबर, 2026 को होने वाले ये चुनाव निर्वाचित प्रतिनिधियों को वास्तविक अधिकार सौंपेंगे, या फिर पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल लोकतंत्र का दिखावा भर करेंगे? मिर्जा ने स्थानीय पार्षदों, परिषदों और मेयरों को मिलने वाले प्रस्तावित अधिकारों को लेकर स्पष्टता की कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्थानीय मुद्दों को हल करने के लिए पर्याप्त अधिकार और विकास निधि मिलेगी? उन्होंने चेतावनी दी कि केवल चुनाव करा लेने से लोकतांत्रिक शासन की गारंटी नहीं मिल जाती।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/balochistan-liberation-front-claims-pakistan-army-suffered-heavy-losses" target="_blank" rel="noopener">Balochistan में BLF के हमलों से Pakistan Army को बड़ा नुकसान, पीछे हटने का किया दावा</a></h3><p><br>कार्यकर्ता ने प्रस्तावित चुनावों की तुलना PoJK में 33 साल के अंतराल के बाद हुए स्थानीय निकाय चुनावों से की। उन्होंने दावा किया कि वहां पार्षद बिना पर्याप्त शक्तियों या विकास निधि के काम करते रहे, जबकि असली ताकत कहीं और केंद्रित रही। उन्होंने PoJK में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (JAAC) की मांगों का भी जिक्र किया, जिसमें 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की मांग शामिल है। उनका आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल सरकार बनाने की प्रक्रिया और राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता था। मिर्जा ने इस समिति के आंदोलन को राजनीतिक अधिकारों, जवाबदेही और कानून के शासन की व्यापक मांगों से जोड़ा। PoGB के राजनीतिक हालात पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कार्यकर्ता अहसान अली एडवोकेट और बाबा जान का जिक्र किया। उन्होंने इस क्षेत्र में अधिकारों की मांग से जुड़े राजनीतिक लामबंदी और जेल जाने के इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने तर्क दिया कि अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोणों के टकराव ने PoGB के राजनीतिक भविष्य पर केंद्रित एक एकजुट आंदोलन के उभरने में बाधा डाली है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:20:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/amjad-ayub-mirza-slams-pakistan-over-proposed-pogb-local-body-elections</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, BJP सांसद अरुण गोविल ने UN में भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र किया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/bjp-mp-arun-govil-highlights-supreme-court-decisions-on-right-to-health-at-un]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने स्वास्थ्य के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में भारत के न्यायिक प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के 'स्वास्थ्य के अधिकार' (शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर का आनंद लेने का अधिकार) पर विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) के साथ हुई बातचीत के दौरान, संविधान के अनुच्छेद 21 की सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई व्यापक व्याख्या का जिक्र किया। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर इस बातचीत के कुछ पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र "न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य के अधिकार की न्याय-योग्यता (Justiciability)" था।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/samajwadi-party-accuses-bjp-of-deploying-corrupt-officials-in-up-mlc-polls" target="_blank" rel="noopener">UP MLC Election: Akhilesh Yadav ने इटावा में डाला वोट, बीजेपी पर लगाया भ्रष्ट अफसरों की तैनाती का आरोप</a></h3><p>बातचीत के दौरान, गोविल ने उन संरचनात्मक बाधाओं को स्वीकार किया - जैसे कि लागत, भाषा की समस्या, दूरी और कानूनी जागरूकता की कमी - जो नागरिकों को अपने स्वास्थ्य अधिकारों का उपयोग करने से रोकती हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट शक्ति और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर भी बात की, और वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतरीन प्रथाओं (best practices) को उजागर करने के लिए रिपोर्ट की सराहना की। उन्होंने कहा, "हम विशेष प्रतिवेदक को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में एक सामयिक और प्रासंगिक विषय को उठाया है। हम रिपोर्ट में उठाई गई चिंताओं को समझते हैं—यानी लागत, भाषा, दूरी और कानूनी जागरूकता की कमी जैसी बाधाएं, जो नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार का आनंद लेने की क्षमता पर असर डालती हैं। विशेष प्रतिवेदक ने कॉर्पोरेट शक्ति की ओर भी इशारा किया है, जो अक्सर जवाबदेही से बच निकलती है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/chief-justice-soumen-sen-administers-oath-to-kerala-governor-om-prakash-mathur" target="_blank" rel="noopener">Om Prakash Mathur बने Kerala के 29वें राज्यपाल, Lok Bhavan में ली पद की शपथ</a></h3><p>हम विशेष रूप से इस बात की सराहना करते हैं कि यह रिपोर्ट दुनिया भर की अच्छी प्रथाओं पर केंद्रित है, जिससे सदस्य देशों को एक-दूसरे से सीखने में मदद मिलती है। रिपोर्ट का विषय भारत के अपने अनुभवों से काफी मेल खाता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) की व्यापक व्याख्या की है, जिसमें अब 'स्वास्थ्य का अधिकार' भी शामिल हो गया है। कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का जिक्र करते हुए, गोविल ने बताया कि कैसे सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है - की व्याख्या इस तरह की कि इसमें चिकित्सा देखभाल और स्वास्थ्य सुरक्षा भी शामिल हो गई। उन्होंने 1995 के एक फैसले का उदाहरण दिया जो श्रमिकों के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक प्रगति कर्मचारियों की भलाई की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:18:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/bjp-mp-arun-govil-highlights-supreme-court-decisions-on-right-to-health-at-un</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[West Bank हमले के बाद 2 आतंकी ढेर और 5 घायल, Hebron की पूर्ण घेराबंदी में जुटी IDF]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/benjamin-netanyahu-orders-west-bank-lockdown-after-attack-in-hebron-injures-five]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हेब्रोन शहर की घेराबंदी करने और पूरे वेस्ट बैंक में आने-जाने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह कदम इलाके में कथित हमास आतंकवादियों द्वारा किए गए एक आतंकी हमले में पांच लोगों के घायल होने के बाद उठाया गया है। नेतन्याहू ने कहा कि मैंने IDF और सुरक्षा बलों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत हेब्रोन शहर को बंद कर दें और आज से ही पूरे जुडिया और सामरिया (वेस्ट बैंक) में पूर्ण लॉकडाउन की तैयारी करें।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि हम हमास आतंकवादियों और उन्हें भेजने वालों का पीछा करेंगे, चाहे वे कहीं भी हों और कभी भी हों। आपके पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं है।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/a-kalashnikov-in-his-hands-and-a-desire-to-shoot-jews-letter-from-former-hamas-chief-son-surfaces" target="_blank" rel="noopener">हाथों में कलाश्निकोव और यहूदियों को गोली मारने की इच्छा, सामने आई पूर्व हमास चीफ के बेटे की चिट्ठी</a></h3><p><br>इससे पहले IDF ने बताया कि हमले में शामिल दो आतंकवादी मारे गए हैं। अन्य संभावित आतंकवादियों की तलाश अभी भी जारी है। IDF ने कहा कि आज हुए गोलीबारी के हमले के बाद, IDF के सैनिकों और इज़राइल बॉर्डर पुलिस के अधिकारियों ने हेब्रोन इलाके (जिसे अब घेराबंदी में ले लिया गया है) और अन्य जगहों पर आतंकवाद-विरोधी अभियान शुरू किए हैं। पिछले एक हफ्ते में, सुरक्षा बलों ने हमास और इस्लामिक जिहाद से जुड़े लोगों सहित लगभग 70 वांछित व्यक्तियों को पकड़ा है। साथ ही, M16 राइफल, कार्लो सबमशीन गन और विस्फोटक सामग्री सहित दर्जनों हथियार भी बरामद किए हैं। इज़राइली नागरिकों की सुरक्षा के लिए IDF आतंकवाद-विरोधी अभियान जारी रखेगा।" एम्बुलेंस सेवा ने बताया कि हमले में पांच लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर है, एक की हालत मध्यम है, और दो को मामूली चोटें आई हैं। IDF के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने एक बयान में कहा, "यह एक गंभीर हमला था। सैनिकों की त्वरित कार्रवाई से एक और भी बड़ा हमला टल गया, जिससे नागरिकों और सुरक्षा बलों को और अधिक नुकसान नहीं हुआ। आतंकवादियों ने घटनास्थल तक पहुँचने के लिए जिस वाहन का इस्तेमाल किया था, उसमें भारी मात्रा में गोला-बारूद मिला है। इसका मकसद बड़े पैमाने पर हमला करना था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:17:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/benjamin-netanyahu-orders-west-bank-lockdown-after-attack-in-hebron-injures-five</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Balochistan में BLF के हमलों से Pakistan Army को बड़ा नुकसान, पीछे हटने का किया दावा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/balochistan-liberation-front-claims-pakistan-army-suffered-heavy-losses]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया है कि उनके चल रहे 'ऑपरेशन अलमास' के दौरान बलूचिस्तान में कई जगहों पर पाकिस्तानी सेना के जवानों की जान गई है, सुरक्षा ठिकानों पर कब्ज़ा किया गया है और सेना के एक वाहन को नष्ट कर दिया गया है। 22 अक्टूबर 2026 को जारी बयानों में, BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने कहा कि यह ऑपरेशन कई मोर्चों पर जारी है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है और वे कुछ जगहों से पीछे हट रहे हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/election-commission-blames-software-glitch-for-errors-in-up-mlc-voter-list" target="_blank" rel="noopener">Voter List में गलत नाम होने पर भी नहीं रुकेगा वोट, UP MLC Election के लिए EC का निर्देश</a></h3><p><br>प्रवक्ता के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान BLF के लड़ाकों ने मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई जवानों को मार गिराया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके लड़ाकों ने फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के मुख्य कैंप पर कब्ज़ा कर लिया और ग्वादर ज़ीरो पॉइंट पर BLF का झंडा फहराया।<br>मेजर ग्वाहराम बलूच ने यह भी दावा किया कि BLF के लड़ाकों ने मुझानी पुलिस स्टेशन पर कब्ज़ा कर लिया, वहां से सरकारी हथियार और सैन्य उपकरण ज़ब्त किए, और एक झड़प के दौरान एक पुलिस अधिकारी को मार डाला। गुब्द में, समूह ने सेना के एक काफिले पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली, जिसमें कथित तौर पर सेना का एक वाहन नष्ट हो गया और कई जवान मारे गए या घायल हो गए। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि गुब्द क्रॉस पर स्थित पुलिस चेकपॉइंट अब BLF के नियंत्रण में है।<br>बाद में जारी एक बयान में, प्रवक्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन संगठन की 'सद्दू ऑपरेशनल बटालियन' के तहत चलाया जा रहा है। इस बटालियन का नाम वरिष्ठ BLF कमांडर मामो सद्दू मरी (जिन्हें शहादत मरी के नाम से भी जाना जाता था) के नाम पर रखा गया है। बयान में मरी को संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक बताया गया है, जिन्होंने संगठन के ढांचे को बनाने और मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/up-mlc-election-voter-list-errors-election-commission-blames-translation-software" target="_blank" rel="noopener">उत्तर प्रदेश MLC Election: वोटर लिस्ट में अजीब गलतियों पर EC ने सॉफ्टवेयर अनुवाद को बताया जिम्मेदार</a></h3><p><br>BLF के अनुसार, जब पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके में स्थित BLF के एक कैंप पर हमला किया, तब मारी की उम्र 75 साल से अधिक थी। संगठन का दावा है कि वह आगे बढ़ती सेना को उलझाए रखने के लिए वहीं रुक गए, ताकि उनके साथी लड़ाके सुरक्षित निकल सकें; इस दौरान मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई। BLF ने बताया कि उनके बलिदान को याद रखने के लिए एक बटालियन का नाम उनके सम्मान में रखा गया है। 'ऑपरेशन अलमास' से जुड़े एक अन्य बयान में, मेजर ग्वाहराम बलूच ने दावा किया कि मुजाहिद मेहर (उर्फ सागर ज़मुरानी) नाम के एक लड़ाके ने विस्फोटकों से लदे वाहन का इस्तेमाल करके एक सुरक्षित सैन्य कैंप पर आत्मघाती हमला किया। प्रवक्ता के अनुसार, इस हमले से कैंप की सुरक्षा घेराबंदी टूट गई, जिससे अन्य BLF लड़ाकों को आगे बढ़ने का मौका मिला। संगठन ने मेहर को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वे अपने शहीद साथियों के अधूरे मिशन को पूरा करना जारी रखेंगे। इसके बाद, BLF के प्रवक्ता ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने 16 घंटे से अधिक समय तक FWO कैंप पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने बताया कि बख्तरबंद वाहनों में आ रही पाकिस्तानी सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों पर बार-बार हमले किए गए, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा और पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। मेजर ग्वाहराम बलूच ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना BLF के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने कुछ और ड्रोन भी मार गिराए हैं। BLF ने कहा कि 'ऑपरेशन अलमास' अभी भी जारी है और ऑपरेशन पूरा होने के बाद, इसके विस्तृत विवरण और हुए नुकसान की जानकारी मीडिया को दी जाएगी। संगठन ने अपने बयानों में बताए गए हमलों की जिम्मेदारी ली है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:49:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/balochistan-liberation-front-claims-pakistan-army-suffered-heavy-losses</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vishwakhabram : France में Macron के खिलाफ विद्रोह जैसे हालात, पूरे यूरोप में फैल सकती है जनाक्रोश की आग!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/france-protests-macron-political-economic-crisis-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>फ्रांस इन दिनों गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। महंगाई, बढ़ती ऊर्जा कीमतों, वेतन में ठहराव और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं से नाराज श्रमिकों और छात्रों के आंदोलन ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले सप्ताह प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बाद अब शनिवार को फिर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की आशंका है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कारोबारियों, संग्रहालयों और कला आयोजनों तक को बंद रखने की तैयारी करनी पड़ रही है। मैक्रों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हिंसा पर काबू पाना नहीं, बल्कि उस जनाक्रोश को थामना है, जो उनकी सरकार की नीतियों और नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है।</p><h2>सड़कों पर सरकार को सीधी चुनौती</h2><p>हम आपको बता दें कि फ्रांस के प्रमुख छात्र संगठन UNEF ने शनिवार को प्रदर्शनों का आह्वान किया है। वहीं, 2018 में उभरे सरकार-विरोधी येलो वेस्ट आंदोलन ने मध्य पेरिस में मार्च निकालने की योजना बनाई है। हम आपको याद दिला दें कि छात्र आंदोलन की शुरुआत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और जर्जर सुविधाओं के विरोध से हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ती जीवन-यापन लागत, वेतन, बजट कटौती और सार्वजनिक सेवाओं की गिरती गुणवत्ता तक फैल चुका है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/fox-news-global-protest-network-101-organisations-india-france" target="_blank" rel="noopener">Prabhasakshi NewsRoom: France से लेकर India तक हुए प्रदर्शनों के पीछे काम कर रहा था 13 देशों के 101 संगठनों का Network, Fox News ने किया बड़ा खुलासा!</a></p><p>मैक्रों ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की है, लेकिन UNEF ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन नहीं रोके जाएंगे। संगठन ने राष्ट्रपति पर विरोध के अधिकार को कुचलने और गणतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह टकराव बताता है कि सरकार के सामने केवल कानून-व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि जनता के एक हिस्से का राजनीतिक विश्वास बनाए रखने की भी चुनौती है।</p><p>मैक्रों ने हिंसा के लिए अतिवामपंथी और उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि वामपंथी दल फ्रांस अनबाउड ने इन आरोपों को खारिज किया है। राष्ट्रपति ने कुछ प्रदर्शनों को अवैध बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। साथ ही ट्रेड यूनियनों के वैध प्रदर्शनों को अनुमति देने, लेकिन उनके मार्ग बदलने की संभावना भी जताई गई है। इस बीच, फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठन CFDT की महासचिव मैरीलीज लियोन ने चेताया है कि प्रतिबंधों से गुस्सा कम होने के बजाय बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि जनता की नाराजगी दूर करने के लिए ठोस प्रस्ताव चाहिए, न कि यह तय करने की कोशिश कि किसे विरोध करने का अधिकार है।</p><h2>सुरक्षा संकट: बंद होते शहर, कारोबार और सांस्कृतिक संस्थान</h2><p>हम आपको याद दिला दें कि पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद सरकार की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि शांतिपूर्ण विरोध के साथ-साथ हिंसक घटनाएं पहले की तरह व्यापक रूप ना ले लें। फ्रांस में 17 अक्टूबर को पांच लाख से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे थे। हालांकि, शांतिपूर्ण तरीके से हुए इन ऐतिहासिक प्रदर्शनों की चर्चा लूटपाट की घटनाओं पर मीडिया के व्यापक कवरेज के कारण दबकर रह गई। फ्रांस के कानून मंत्री के अनुसार, शनिवार से अब तक लगभग 2,700 गिरफ्तारियां हुई हैं। पेरिस और अन्य शहरों में लगाए गए रात्रिकालीन कर्फ्यू के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन दोबारा हिंसा भड़कने की आशंका खत्म नहीं हुई है।</p><p>रिपोर्टों के मुताबिक मार्सेई और लियोन में शनिवार के लिए प्रस्तावित सभी प्रदर्शनों पर स्थानीय अधिकारियों ने प्रतिबंध लगाया है। मार्सेई के वाणिज्य मंडल ने कारोबारियों से दुकानें बंद रखने का आग्रह किया है। अंतरराष्ट्रीय कला मेला आर्ट बेसल पेरिस को भी सुरक्षा चिंताओं के कारण सप्ताहांत में बंद रखने की घोषणा की गई है। लौवर संग्रहालय और फोंडेशन लुई वितों के भी शनिवार को बंद रहने की योजना है। ये कदम बताते हैं कि अशांति का असर अब सड़कों से निकलकर पर्यटन, व्यापार और फ्रांस की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा तक पहुंच चुका है।</p><p>उधर, मध्य फ्रांस के ओरलियॉं में भी तनाव की आशंका है, जहां धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली की बैठक के विरोध में हजारों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। इस प्रकार संकट केवल सरकार बनाम प्रदर्शनकारी का नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक धाराओं के बीच आमने-सामने के टकराव का भी रूप ले सकता है।</p><h2>आर्थिक मोर्चे पर दोहरी मार</h2><p>देखा जाये तो इस उथल-पुथल की जड़ में गंभीर आर्थिक असंतोष है। बढ़ती ऊर्जा कीमतें, घरेलू बजट पर दबाव, वेतन को लेकर असंतोष और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट ने श्रमिकों तथा युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक खर्च पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि बढ़ता सरकारी कर्ज और उधारी की लागत राजकोषीय गुंजाइश सीमित कर रहे हैं।</p><p>दूसरी ओर, वित्तीय बाजार इस संकट को गंभीरता से ले रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरों के अंतर में वृद्धि निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है। 22 अक्टूबर को फ्रांस की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड लगभग 5.14 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो जुलाई 2002 के बाद का उच्चतम स्तर बताया गया। यह संकेत है कि राजनीतिक अस्थिरता और बजट संबंधी चिंताओं का असर अब सरकारी उधारी पर भी पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी मूडीज की 23 अक्टूबर को फ्रांस की साख पर संभावित कार्रवाई भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। फ्रांस की रेटिंग में गिरावट या नकारात्मक दृष्टिकोण कायम रहने से निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।</p><h2>फ्रांस से आगे यूरोप की परीक्षा</h2><p>साथ ही इस संकट का असर सिर्फ फ्रांस की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आंच पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच सकती है। अगर मैक्रों सरकार जनता के गुस्से को शांत करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहती है, तो सरकार और लोगों के बीच अविश्वास और गहरा होगा। वहीं, बढ़ती उधारी और आर्थिक दबाव के कारण रक्षा, विकास और सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च करना भी सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। यूरोपीय संघ की प्रमुख शक्ति होने के कारण फ्रांस में लंबे समय तक जारी अस्थिरता का असर यूरोप के वित्तीय बाजारों और आर्थिक नीतियों पर भी पड़ेगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनों पर सख्ती और प्रतिबंध आंदोलन को और भड़का सकते हैं, जबकि हिंसक समूहों पर नियंत्रण न होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। फ्रांस का येलो वेस्ट आंदोलन पहले भी दिखा चुका है कि जब जनता को लगता है कि उसकी आर्थिक परेशानियों की अनदेखी हो रही है और सत्ता उसकी आवाज नहीं सुन रही, तो असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।</p><p>बहरहाल, मैक्रों के सामने चुनौती सिर्फ शनिवार के प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या उनकी सरकार सुरक्षा व्यवस्था बहाल करते हुए महंगाई, वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सवालों का विश्वसनीय समाधान दे सकती है। केवल प्रतिबंधों और गिरफ्तारी के सहारे व्यवस्था कायम करने की कोशिश विरोध को टाल सकती है, समाप्त नहीं कर सकती। फ्रांस की सड़कों पर उठता यह उबाल अब सरकार की राजनीतिक साख, देश की आर्थिक क्षमता और यूरोप की स्थिरता, तीनों की परीक्षा बन चुका है।</p><p>-नीरज कुमार दुबे</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/france-protests-macron-political-economic-crisis-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[India Out वाले मुइज्जू अचानक क्यों अलापने लगे 12 साल से बंद SAARC का राग, अब पाकिस्तान में चल रहा क्या खेल?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/president-mohamed-muizzu-suddenly-begun-calling-for-the-revival-of-saarc]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान और मालदीव ने बुधवार को रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए 20 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा के दौरान किए गए। वे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा के लिए मंगलवार को इस्लामाबाद पहुंचे थे। मुइज़्ज़ू की यह यात्रा 11 वर्षों में किसी मालदीवियन राष्ट्रपति की पहली यात्रा है। यह ऐसे समय में हो रही है जब 1966 में दोनों देशों के बीच स्थापित राजनयिक संबंधों को 60 साल पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के नेताओं की मौजूदगी में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों (MoUs) में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, और सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/maldives-president-mohamed-muizzu-pakistan-visit-bilateral-trade-target-200-million-dollars" target="_blank" rel="noopener">Pakistan के साथ द्विपक्षीय व्यापार 20 करोड़ डॉलर पहुंचाएगा Maldives, Muizzu ने तय किया लक्ष्य</a></h3><p><br>इन समझौता ज्ञापनों में अवैध तस्करी और नशीले पदार्थों की रोकथाम, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य नियामक प्राधिकरणों के बीच सहयोग, स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती, व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना, युवा एवं खेल विकास, हवाई संपर्क (एयर कनेक्टिविटी) को बेहतर बनाना, पुलिस अकादमियों के बीच सहयोग, और मालदीव के सिविल सेवा आयोग तथा फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन एवं सिविल सर्विस अकादमी के बीच हुए समझौते भी शामिल हैं। कृषि, व्यापार, मत्स्य पालन, पर्यावरण, शिक्षा, पर्यटन, और कला एवं संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग के लिए अलग-अलग समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने से पहले प्रधानमंत्री शरीफ और राष्ट्रपति मुइज्जू के बीच बातचीत हुई, और हस्ताक्षर समारोह के बाद उन्होंने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/cricket/second-highest-successful-odi-run-chase-as-sri-lanka-defeat-england" target="_blank" rel="noopener">ODI इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा रन चेज दर्ज, Sri Lanka ने England के खिलाफ हासिल की जीत</a></h3><p>प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा कि दोनों देश भविष्य में इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम करना जारी रखेंगे। प्रधानमंत्री शरीफ ने मुइज्जू से कहा कि वे इन लिखित समझौतों को "तेजी से निर्णय लेने और त्वरित कार्यान्वयन के जरिए हकीकत में बदलने" के लिए उनके साथ व्यक्तिगत रूप से काम करके खुश होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच "बहुत ही सार्थक और उपयोगी चर्चा" हुई, जिसमें "आर्थिक और व्यापारिक संबंध, रणनीतिक रक्षा सहयोग, और मालदीव के हमारे भाइयों-बहनों को पाकिस्तान में विभिन्न क्षेत्रों - जैसे पुलिस, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कई क्षेत्रों - में प्रशिक्षण देने के लिए हमारा समर्थन" जैसे विषय शामिल थे।<br>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/president-mohamed-muizzu-suddenly-begun-calling-for-the-revival-of-saarc</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Myanmar training camp case: भारत आया मैथ्यू वैनडाइक फिर जाएगा अमेरिका, कोर्ट ने 24 फरवरी तक दी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/matthew-vandyke-arrived-in-india-then-returned-to-the-us]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। वे हाल ही में अमेरिका से लौटे हैं, जहाँ वे कोर्ट की अनुमति लेकर अपने परिवार से मिलने गए थे। उन पर म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही है, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। कोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी छह यूक्रेनी नागरिकों को 24 फरवरी, 2027 को होने वाली अगली सुनवाई तक भारत से बाहर रहने की अनुमति दे दी है। साथ ही, कोर्ट ने वैनडाइक को भी अमेरिका जाने की छूट दी है। यह घटनाक्रम सितंबर में आए उस आदेश के बाद हुआ है, जिसमें सभी सात आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ एक महीने के लिए अपने-अपने देश जाने की अनुमति दी गई थी।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/name-of-us-congresswoman-who-married-her-brother-turns-out-to-be-fake" target="_blank" rel="noopener">भाई से शादी करने वाली अमेरिकी सांसद का नाम निकला फर्जी? ट्रंप ने भारत विरोधी एल्हान उमर पर लगाया बड़ा आरोप</a></h3><h2>वैनडाइक को सितंबर में अमेरिका जाने की अनुमति दी गई थी</h2><p><br>सितंबर 2026 में, राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने वैनडाइक को अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे तय समय के बाद भारत लौट आएं और अदालत के सामने पेश हों। इसी तरह की शर्तों पर छह यूक्रेनी नागरिकों को भी यूक्रेन जाने की अनुमति दी गई थी। इन सात लोगों को 'डिफ़ॉल्ट ज़मानत' (default bail) दी गई थी। NIA ने जो चार्जशीट दायर की थी, उसमें 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025' की धाराएं तो लगाई गई थीं, लेकिन 'अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट' (UAPA) के तहत कोई आरोप शामिल नहीं किए गए थे। अदालत ने यह भी शर्त रखी थी कि ज़रूरत पड़ने पर वे जांच में सहयोग करेंगे।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/indigo-extends-flight-suspension-to-saudi-arabia-amid-security-concerns" target="_blank" rel="noopener">सुरक्षा कारणों से IndiGo ने Saudi Arabia की उड़ानें 31 अक्टूबर तक रोकीं</a></h3><h2>NIA का आरोप था कि म्यांमार में ड्रोन युद्ध (drone warfare) की ट्रेनिंग दी गई थी</h2><p><br>NIA ने 13 मार्च 2026 को वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे बिना ज़रूरी यात्रा दस्तावेज़ों के मिज़ोरम में दाखिल हुए और फिर म्यांमार चले गए, जहाँ उन्होंने कथित तौर पर कुछ सशस्त्र समूहों के सदस्यों को ट्रेनिंग दी। एजेंसी का आरोप है कि इस समूह ने 'चिन नेशनल फ्रंट' और 'काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी' जैसे सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबल करने और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग दी। ये कथित गतिविधियां म्यांमार की सैन्य सरकार (military junta) के ख़िलाफ़ लड़ रहे समूहों से जुड़ी थीं। इन आरोपों को अभी तक किसी के दोषी होने का सबूत नहीं माना गया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:10:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/matthew-vandyke-arrived-in-india-then-returned-to-the-us</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[भाई से शादी करने वाली अमेरिकी सांसद का नाम निकला फर्जी? ट्रंप ने भारत विरोधी एल्हान उमर पर लगाया बड़ा आरोप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/name-of-us-congresswoman-who-married-her-brother-turns-out-to-be-fake]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी मिड टर्म इलेक्शन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं और इस दौरान उनके निशाने पर इल्हान उमर हैं। इल्हान उमर एक सांसद हैं जिन्हें भारत में लोग पाकिस्तान समर्थक और जिहादी मानसिकता वाली भारत विरोधी सांसद मानते हैं। उनके यहां हाल ही में छापा पड़ा तो वापस से मामला गरमाया हुआ है और अब उन्हें लेकर हैरान करने वाली जानकारियां भी सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जानकारी के सामने आने पर उन्हें सुझाव दिया कि मिनिसोटा की सोमाली अमेरिकी सांसद इलहान उमर को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने कांग्रेस में शपथ लेने के लिए एक फर्जी नाम का इस्तेमाल किया। ट्रंप अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने के ओयोवा में थे। लेकिन उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल दूसरे राज्यों के डेमोक्रेट्स पर निशाना साधने के लिए किया। इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने यह बताया है कि 12 अक्टूबर को इलहान उमर के घर पर मारे गए छापे में अमेरिकी इमीग्रेशन दस्तावेजों से जुड़ी एक विस्तृत जांच की जा रही है और यह छापामारी उसी का हिस्सा थी। इसके बाद से ही ट्रंप उन्हें लेकर हमलावर हैं और चुनावी रैलियों से लेकर सोशल मीडिया तक उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं और उनके भाई के साथ कथित तौर पर शादी करने के मामले को खूब उछाल रहे हैं और अब उनके हाथ उनका असली नाम भी लग गया है। जिसे लेकर वह यह कह रहे हैं कि उनका नाम भी फर्जी है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-is-now-in-full-swing-it-took-out-7-ships-in-a-single-night-and-has-once-again-challenged-trump" target="_blank" rel="noopener">अब फुल फॉर्म में आया ईरान, एक ही रात में ठोक डाले 7 जहाज, ट्रंप को फिर चुनौती</a></h3><p><br>उमर पर यह आरोप पहली बार साल 2016 में लगा। आलोचकों का दावा है कि उसने नागरिकता हासिल करने के लिए 2009 में अहमद नूर सैद एलमी से शादी की जो उसके भाई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप उमर की इमीग्रेशन बैकग्राउंड का मुद्दा समय समय पर उठाचे रहते हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि उमर अवैध रूप से अमेरिका आई और अपने भाई से शादी करके अमेरिका की नागरिकता ले ली। हालांकि ट्रंप के आरोप पर इल्हान उमर के कार्यालय ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उनके कार्यालय ने कहा, 'यह पूरी तरह झूठ है। इल्हान उमर ही उनका असली नाम है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/vladimir-putin-backs-peace-talks-then-launches-missile-attacks-on-ukraine" target="_blank" rel="noopener">इधर पुतिन ने की Peace की बात, उधर यूक्रेन पर कर दी मिसाइलों की बरसात! 3 घंटे में जेलेंस्की के 32 अड्डे उड़ाए</a><br>कौन है इल्हान उमर ?</h3><p><br>40 साल की इल्हान सोमालियाई अमेरिकी राजनेता हैं जो साल 2019 से मिनिसोटा में चुनाव जीतकर हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में आई थी। वो अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली दो मुस्लिम महिला सांसदों में से एक हैं। अमेरिकी संसद में पहुंचने वाली वो पहली सोमालियाई अमेरिकी नागरिक भी हैं। मूल रूप से वो अफ्रीका की नागरिक रही हैं। उमर ने एसोसिएटिव प्रेस से बात करते हुए कहा था, वह सोमालिया के नागरिक युद्ध से भागे शरणार्थी के रूप में 1995 में 12 साल की उम्र में अमेरिका पहुंची थीं। वह पांच साल बाद 17 साल की उम्र में अमेरिकी नागरिक बनीं। हिजाब पहनकर शपथ लेने वाली वो पहली अमेरिकी मुस्लिम सांसद बनीं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:01:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सुरक्षा कारणों से IndiGo ने Saudi Arabia की उड़ानें 31 अक्टूबर तक रोकीं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/indigo-extends-flight-suspension-to-saudi-arabia-amid-security-concerns]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय विमानन कंपनी ‘इंडिगो’ ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानों के निलंबित रहने की अवधि बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रियाद आने-जाने वाली इंडिगो की उड़ानें 31 अक्टूबर 2026 तक रद्द रहेंगी, जबकि जेद्दा, दम्माम और मदीना आने-जाने वाली उड़ानें 27 अक्टूबर 2026 तक रद्द रहेंगी।’’
ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के हवाई अड्डों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज किये जाने के बीच उड़ानें प्रभावित हुई हैं।</p><p>उड़ानें रद्द करने की अवधि बढ़ाने का यह फैसला बुधवार को दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद आया है। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे। अन्य भारतीय विमानन कंपनियों ने भी इससे पहले सऊदी अरब से आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन बढ़ाया था।</p><p>एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने सऊदी अरब के लिए 24 अक्टूबर तक, जबकि अकासा एयर ने 27 अक्टूबर तक उड़ानें निलंबित कर दी हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:53:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[श्रीलंका के Galle में भारत ने 24 परिवारों को सौंपे आवास, 98.6 फीसदी काम पूरा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-hands-over-24-houses-in-galle-under-sri-lanka-housing-project]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने अपने ‘मॉडल विलेज हाउसिंग प्रोजेक्ट’ के तहत लाभार्थियों को गाले जिले में 24 घर प्रदान किए। संबंधित परियोजना श्रीलंका के आवास, निर्माण और जल आपूर्ति मंत्रालय के साथ मिलकर द्वीप के सभी 25 जिलों में लागू की जा रही है, जिसमें भारत सरकार की ओर से अनुदान सहायता दी गई है। उच्चायोग ने बताया कि इस पहल के लिए भारत और श्रीलंका की सरकारों के बीच अक्टूबर 2017 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।</p><p>यह परियोजना श्रीलंका में कम आय वाले 600 परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने से संबंधित है। इसमें हर आदर्श गांव में 24 घर हैं, जो जिला आवास समितियों द्वारा चुने गए परिवारों के लिए हैं। इसके तहत पूर्व में 21 जिलों में आदर्श गांवों का उद्घाटन किया जा चुका है, जिनमें बट्टिकलोवा, वावुनिया, जाफना, कैंडी, गम्पाहा, अनुराधापुरा, बादुल्ला, मटाले, पुट्टलम, कोलंबो, त्रिंकोमाली, मोनारगला, किलिनोच्ची, मन्नार, मुल्लातिवु, रत्नापुरा, अम्पारा, कुरुनेगला, केगले, कलुतारा और पोलोन्नारुवा शामिल हैं।</p><p>अधिकरियों के अनुसार, परियोजना लगभग 98.6 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, और बाकी तीन आदर्श गांवों का जल्द ही उद्घाटन किए जाने तथा लाभार्थियों को घर सौंपे जाने की उम्मीद है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:24:52 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-hands-over-24-houses-in-galle-under-sri-lanka-housing-project</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pakistan के साथ द्विपक्षीय व्यापार 20 करोड़ डॉलर पहुंचाएगा Maldives, Muizzu ने तय किया लक्ष्य]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/maldives-president-mohamed-muizzu-pakistan-visit-bilateral-trade-target-200-million-dollars]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 23 अक्टूबर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने शुक्रवार को पाकिस्तान की अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के समापन पर कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य अगले दो साल के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को 1.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर करना है। मुइज्जू ने अपनी इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक ‘‘महत्वपूर्ण मोड़’’ भी बताया। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के एक बयान के अनुसार, मुइज्जू अपनी राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद इस्लामाबाद से रवाना हो गए।</p><p>इस यात्रा के दौरान उनके साथ उनकी पत्नी साजिदा मोहम्मद और एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था। बयान में कहा गया है कि मुइज्जू ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ ‘‘महत्वपूर्ण और सार्थक बातचीत’’ की। विदेश कार्यालय ने बताया कि ‘‘इस यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए और समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।</p><p>साथ ही, पाकिस्तान-मालदीव बिजनेस फोरम का आयोजन भी किया गया, जिससे व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के लिए नये रास्ते खुले हैं।’’
मुइज्जू ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि उनकी यह यात्रा ‘‘मालदीव-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्पूर्ण मोड़ है। हम अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू करने और साझेदारी के एक नये युग की शुरुआत करने पर सहमत हुए हैं।’’
मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि इस नये अध्याय में ‘‘अगले दो साल के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को 1.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर करने का साझा संकल्प’’ शामिल किया गया है। मुइज्जू, पिछले 11 वर्ष में पाकिस्तान की राजकीय यात्रा करने वाले मालदीव के पहले राष्ट्रपति हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:12:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/maldives-president-mohamed-muizzu-pakistan-visit-bilateral-trade-target-200-million-dollars</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Tibet में 7.0 तीव्रता के Earthquake से भारी तबाही, 16 की मौत और 76 लोग घायल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/tibet-earthquake-kills-16-injures-76-magnitude-7-tremor]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप आने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और 76 अन्य लोग घायल हो गए, जिसके बाद 12,000 से अधिक निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्राधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजकर 33 मिनट (स्थानीय समय) पर नागकू शहर की बाकेन काउंटी में आए भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर से भी कम गहराई पर था।</p><p>सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा से खबर दी कि अब तक 12,489 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने, बचाव अभियान चलाने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करने का काम जारी है। शिन्हुआ के अनुसार, चीन ने भूकंप के बाद आपातकालीन आपदा राहत के लिए लगभग 75 लाख अमेरिकी डॉलर (पांच करोड़ युआन) आवंटित किए हैं और पुनर्वास कार्यों के लिए तीन करोड़ युआन की अतिरिक्त राशि निर्धारित की है।</p><p>इससे पहले आई खबरों के अनुसार, भूकंप में 330 से अधिक मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। गंभीर रूप से चोटिल लोगों की संख्या सहित 76 घायलों का विस्तृत ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका।</p><p>चाइना रेलवे छिंगहाई-तिब्बत ग्रुप कंपनी लिमिटेड ने बताया कि प्रभावित हिस्से में छिंगहाई-तिब्बत रेलवे पर यात्री ट्रेनों का परिचालन शुक्रवार सुबह कम गति से फिर शुरू कर दिया गया। ‘स्टेट ग्रिड शिजांग इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड’ ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10 बजे (स्थानीय समय) तक भूकंप प्रभावित बाकेन काउंटी में 1,937 घरों की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी। विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की ओर से आवंटित राहत सामग्री भूकंप प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने लगी है।</p><p>इसमें पहले से तैयार 1,000 आवासीय इकाइयां, 3,239 तंबू, 2,821 तह किए जा सकने वाले बिस्तर और रजाइयां, स्टोव तथा कपड़ों जैसी रोजमर्रा की जरूरत की अन्य वस्तुएं शामिल हैं। स्थानीय मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के केंद्र के आसपास के क्षेत्र की औसत ऊंचाई 4,800 मीटर से अधिक है। अगले तीन दिनों में तापमान गिरकर शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंचने का अनुमान है।</p><p>भूकंप के केंद्र के पास स्थित तीन टाउनशिप में शनिवार को रुक-रुककर बर्फबारी होने का भी पूर्वानुमान है। इस बीच, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भूकंप में लापता लोगों की तलाश और उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने तथा घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। शी ने अपने निर्देश में कहा कि भूकंप में जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं।</p><p>उन्होंने प्रभावित क्षेत्र की अधिक ऊंचाई और कम तापमान को देखते हुए भूकंप के बाद उत्पन्न होने वाली अन्य आपदाओं को रोकने के लिए भूकंपीय गतिविधियों और मौसम की स्थितियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। चीनी राष्ट्रपति ने प्रभावित लोगों के लिए उचित आवास की व्यवस्था करने, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की जल्द मरम्मत करने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने भी आपदा की रोकथाम और उससे प्रभावी ढंग से निपटने के प्रयास करने का आह्वान किया।</p><p>तिब्बती पठार में शक्तिशाली भूकंप आने का खतरा बना रहता है। यह क्षेत्र उस स्थान के ठीक ऊपर स्थित है, जहां यूरेशियाई एवं भारतीय टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं और अक्सर बहुत अधिक ताकत से टकराती हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/tibet-earthquake-kills-16-injures-76-magnitude-7-tremor</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[West Bank में गोलीबारी के बाद Netanyahu कार्यालय ने दिया पूर्ण बंदी की तैयारी का निर्देश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/israel-orders-west-bank-closure-preparations-after-hebron-shooting-incident]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इजराइली सैनिकों ने शुक्रवार सुबह कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हेब्रोन शहर के पास हमला करने वाले दो लोगों को गोली मार कर घायल कर दिया। सेना ने यह जानकारी दी। इस घटना में कम से कम पांच लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।</p><p>इसके कुछ घंटे बाद इजराइल ने सेना को वेस्ट बैंक को पूरी तरह बंद करने की तैयारी करने का आदेश दिया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि उसने सुरक्षा बलों को तुरंत हेब्रोन शहर की घेराबंदी करने और शुक्रवार से पूरे वेस्ट बैंक को पूरी तरह बंद करने की तैयारी करने का निर्देश दिया है। इससे पहले, सेना ने कहा था कि उसने ‘‘इजराइली नागरिकों पर आतंकवादी हमले’’ को नाकाम कर दिया।</p><p>सेना के मुताबिक, हमलावरों के पास एम-16 राइफल और एक पिस्तौल थी। हालांकि, उसने कथित हमले के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। साथ ही मारे गए दोनों लोगों और घायलों की पहचान भी नहीं बताई गई।</p><p>आपातकालीन सेवा कर्मियों ने बताया कि घटना में पांच लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। उन्हें इजराइल के अस्पतालों में ले जाया जा रहा था। आपातकालीन सेवा कर्मियों के एक बयान के अनुसार, सुबह येहुदा जंक्शन के पास घटनास्थल पर पहुंचने के दौरान भी गोलीबारी जारी थी।</p><p>उन्होंने बताया कि 20 वर्ष के दो युवकों के पैरों के निचले हिस्से में गोली लगी, जबकि एक अन्य व्यक्ति बेहोश था और गंभीर रूप से घायल था। आपातकालीन सेवा दल के त्सुरियल एद्री ने कहा, ‘‘जब हम घटनास्थल पर पहुंचे, तो वहां स्थिति बेहद गंभीर थी और इलाके में गोलीबारी जारी थी।’’
अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। यह घातक गोलीबारी ऐसे समय हुई है, जब अगले मंगलवार को इजराइल के मतदाता यह फैसला करेंगे कि नेतन्याहू को प्रधानमंत्री के रूप में एक और कार्यकाल दिया जाए या इजराइली राजनीति में नए दौर की शुरुआत हो।</p><p>यह चुनाव हमास के नेतृत्व में इजराइल पर हुए हमलों के तीन साल बाद हो रहा है। इजराइल की सरकार ने चुनाव से पहले देश के ‘‘दुश्मनों’’ के संभावित हमलों को लेकर चेतावनी दी है। इजराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कहा कि हेब्रोन में हुआ हमला दर्शाता है कि वेस्ट बैंक में फलस्तीनियों की आवाजाही की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।</p><p>बेन-ग्विर अपने चरमपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/israel-orders-west-bank-closure-preparations-after-hebron-shooting-incident</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[गड़बड़ी आपने की और जिम्मेदार भारत को ठहरा रहे, पीयूष गोयल ने हंसते-हंसते ही यूरोप को रुला दिया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/piyush-goyal-blames-europe-for-carbon-emissions-at-berlin-global-dialogue]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जलवायु संकट के लिए यूरोपीय देशों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों का कार्बन उत्सर्जन में बहुत बड़ा योगदान है, जबकि 2015 में पेरिस में हुए COP21 सम्मेलन में जलवायु वित्त (क्लाइमेट फाइनेंस) को लेकर किए गए अपने वादों को पूरा करने में वे विफल रहे हैं। 'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग' के दौरान एक गोलमेज चर्चा में बोलते हुए, गोयल ने कहा कि यूरोप की आबादी दुनिया की कुल आबादी का शायद 3 या 4 प्रतिशत ही है, फिर भी कार्बन उत्सर्जन में उनका योगदान बहुत अधिक है। इसके विपरीत, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन योगदान शायद 10 या 15 प्रतिशत से भी कम है। पीयूष गोयल कहते हैं कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान 3 प्रतिशत से भी कम है। गोयल ने कहा आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? ओजोन परत को नुकसान कहाँ पहुँचा? वातावरण में इतना सारा कार्बन किसने भेजा? मैं दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूँ, लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान 3 प्रतिशत से भी कम है। आप (यूरोप) शायद दुनिया की 3% या 4% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, फिर भी इन कार्बन उत्सर्जनों यानी इस गड़बड़ी में आपका योगदान बहुत बड़ा है। यह समस्या आपके कारण पैदा हुई है। आज भी, जब हम यहाँ बैठे हैं, तो प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान शायद आपके योगदान का 10 या 15 प्रतिशत से भी कम है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-european-car-makers-exploring-manufacturing-in-india" target="_blank" rel="noopener">European car कंपनियां भारत में तलाश रहीं Manufacturing अवसर, Piyush Goyal ने दी जानकारी</a></h3><p>उन्होंने आगे कहा कि आज भी, प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर प्रति व्यक्ति प्रभाव के मामले में यूरोप का स्तर भारत की तुलना में शायद सात या आठ गुना अधिक है। मैं दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूँ, और मैं कचरे (वेस्ट) तथा सर्कुलर इकोनॉमी को लेकर कहीं अधिक जागरूक हूँ। मुझे 1.4 अरब लोगों की जरूरतें भी पूरी करनी हैं। मुझे उनकी ऊर्जा संबंधी जरूरतों और भोजन की जरूरतों को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि मेरा देश सुरक्षित रहे। इन सबके बावजूद, हमारे पास दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक है।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-govt-to-bear-certification-cost-for-small-exporters" target="_blank" rel="noopener">सूक्ष्म व छोटे Exporters के प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार: Piyush Goyal</a><br>प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत से आधे से भी कम है: पीएम मोदी</h3><p><br>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए अक्सर विकासशील देशों को अनुचित तरीके से दोषी ठहराया जाता है, जबकि विकसित देश भारत की तुलना में प्रति व्यक्ति छह गुना अधिक उत्सर्जन करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी वाले दो दिवसीय कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल दी जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि आज भी, प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत से आधे से भी कम है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के मामलों में दुनिया का मार्गदर्शन किया है और अब वह आधुनिक जलवायु चुनौतियों के समाधान पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी इसी वैचारिक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक अनुभवों के आधार पर, भारत अब आधुनिक जलवायु चुनौतियों के समाधान दे रहा है और साथ ही सामूहिक वैश्विक कार्रवाई का आह्वान भी कर रहा है। मुझे खुशी है कि NGT का यह सम्मेलन उसी मिशन को आगे बढ़ा रहा है</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 13:34:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/piyush-goyal-blames-europe-for-carbon-emissions-at-berlin-global-dialogue</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NIA जांच के बीच भारत लौटे Matthew VanDyke, Myanmar मामले में Delhi Court में पेश हुए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-citizen-matthew-vandyke-appears-in-delhi-court-in-myanmar-training-case]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक, जिन्हें एक महीने के लिए अपने देश लौटने की अनुमति दी गई थी, भारत वापस आ गए हैं और शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत में पेश हुए। एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले महीने एक आदेश में अदालत ने वैनडाइक को भारत लौटने के 72 घंटों के भीतर अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। नाम न बताने की शर्त पर उस व्यक्ति ने कहा वह अभी अदालत में औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। हालाँकि, 13 मार्च को वैनडाइक के साथ गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिक भारत वापस नहीं लौटे हैं। पिछले महीने, दिल्ली की एक अदालत ने वैनडाइक और उन छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने-अपने देश लौटने की अनुमति दे दी थी, लेकिन इस शर्त पर कि उन्हें जांच में फिर से शामिल होना होगा। इन सातों लोगों को मार्च में 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में सितंबर में दायर अपनी चार्जशीट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इन धाराओं को हटा दिया।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/vladimir-putin-backs-peace-talks-then-launches-missile-attacks-on-ukraine" target="_blank" rel="noopener">इधर पुतिन ने की Peace की बात, उधर यूक्रेन पर कर दी मिसाइलों की बरसात! 3 घंटे में जेलेंस्की के 32 अड्डे उड़ाए</a></h3><p>अपनी चार्जशीट में NIA ने सातों आरोपियों पर केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट' (प्रवासन और विदेशी अधिनियम) के तहत आरोप लगाए। एक ऐसा अपराध जिसमें जुर्माना भरकर मामला सुलझाया जा सकता है। वैनडाइक ने इस अधिनियम के तहत कथित उल्लंघनों के लिए जुर्माना भर दिया, जिसके बाद पिछले महीने अदालत ने उन्हें डिफ़ॉल्ट ज़मानत दे दी। एजेंसी ने पिछले महीने कहा था कि UAPA के तहत उसकी जांच जारी है। ये छह यूक्रेनी नागरिक हैं - हर्बा पेट्रो, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमनोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/russian-forces-on-the-pakistan-border-for-the-first-time-in-36-years" target="_blank" rel="noopener">36 साल बाद पाकिस्तान बॉर्डर पर रूसी सेना, तालिबान के साथ मिलकर भारी गोलीबारी</a></h3><p>NIA ने पहले आरोप लगाया था कि सातों आरोपी वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना मिजोरम के रास्ते म्यांमार में अवैध रूप से दाखिल हुए थे। वहां उन्होंने म्यांमार के सैन्य शासन (मिलिट्री जुंटा) से लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों के लिए पहले से तय एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। एजेंसी के अनुसार, इन सातों लोगों ने लगभग तीन महीनों तक म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों - जिनमें चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) शामिल हैं - के सदस्यों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया। NIA ने यह भी आरोप लगाया कि वैनडाइक और अन्य लोगों को CNF सदस्यों से लॉजिस्टिक सहायता मिली थी, और इस मिशन के लिए फंड की व्यवस्था म्यांमार स्थित एक विद्रोही समूह के कमांडर ने की थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 13:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-citizen-matthew-vandyke-appears-in-delhi-court-in-myanmar-training-case</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[इधर पुतिन ने की Peace की बात, उधर यूक्रेन पर कर दी मिसाइलों की बरसात! 3 घंटे में जेलेंस्की के 32 अड्डे उड़ाए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/vladimir-putin-backs-peace-talks-then-launches-missile-attacks-on-ukraine]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रूस के राष्टपती पुतिन ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत दोबारा शुरू करने पर सहमती जताई और इसके कुछ दिर बाद ही युक्रेन पर बड़ा हमला भी कर दिया। युक्रेन की राजधानी कीव पर बमबारी कर दी गई। कई हमारतों को बर्बाद कर दिया गया, तबाह कर दिया गया। कीव के अलावा युक्रेन के दूसरे इलाकों में भी एर स्ट्राइक कर दी गए और इसमें 9 लोगों के मारे जाने की खबर आई। 50 से जादा लोग घायल हो गए, क्योंकि रूस की सेना ने ड्रोन और मिसाइलों की बोचार कर दी कीव पर, ताबर तोड धमाके कर दी, युक्रेन की धरती को बुरी तरह देहला दिया। इसके कुछ देर पहले ही पुतिन में ये संकेत दिये थे कि लड़ाई जल्द ही खत्म हो सकती है उन्होंने अमेरिका से डॉनल्ड ट्रम के भेजे एक प्रतनीदी मंडल से मुलाकात की थी बैठक की तीन घंटों तक चर्चा की और एलान किया कि वो एक बार फिर शांति वार्ता के लिए तयार हैं अमेरिका की मध्यस्थता में यूक्रेन के साथ बातचीत करने के लिए तयार हैं ताकि साढ़े चार साल से ज्यादा वक्त से जो यह जंग चल रही है, इसे रोका जा सके। लेकिन इस घोषणा के कुछ घंटे बाद ही उनकी फौज ने यूक्रेन पर जबरदस्त अटैक कर दिया बम की तरह फटने वाले दर्जनों आत्मघाती ड्रोन दाग दिये। क्रूज मिसाइलें दाग दिये। बिलिस्टिक मिसाइलें तक दाग दिये।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/india-condemns-saudi-arabia-attacks-after-indian-citizen-dies-in-dammam" target="_blank" rel="noopener">Saudi Arabia में हुए हमलों में 1 भारतीय की मौत, MEA ने की कड़ी निंदा</a></h3><p><br>यूक्रेन की अखवार द कीव इंडिपेंडन्ट ने रिपॉर्ट दी कि रूस की फौज ने एक एक साथ 32 जगहों को निशाना बनाया और भयंकर बमबारी कर दी। युक्रेन की राजधानी कीव पर अटैक किया, खारकीव पर अटैक किया। रूस से दागी गई मिसाइलें, युक्रेन में जहां भी गिरी, वहाँ तबाही मच गई, जिन इमारतों पर गिरी, उन्हें तहस नहस कर दिया, आग लग गई और सब कुछ जल कर राक हो गया। रूस के इन हमलों में नौ लोगों की जान चले गई, पचास से जादा लोग बुरी तरह जखमी हो, इधर सऊदी अरब में, हूती लडाकों के हमले तेज होने के बाद, अमेरिका ने अपने राजनयिकों को आदेश जारी कर दिया कि वो तुरंत सऊदी अरब छोड़ दें, अपने परिवार के साथ महां से निकल जाएं, ऐसे वक्त में यह आदेश जारी हुआ जब हूती लडाकों ने सऊदी अरब के एक और एयरपोर्ट को निशाना बनाया, एक और तेल ठिकाने को निशाना बनाया, खतरनाक ड्रोन से हुए इन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/saudi-forces-attacked-a-boat-carrying-14-indian" target="_blank" rel="noopener">14 भारतीयों को लेकर जा रहे नाव पर सऊदी ने किया हमला, यमन की सेना ने बचाया, हूती का बड़ा दावा</a></h3><p><br>अमेरिका के विदेश विभाग ने बड़ा कदम उठाया, उसने अपने राजनयिकों को आदेश दे दिया कि वो बिना देरी किये वहां से निकल जाए, दूतावास खाली कर दे, अपने परिवार को भी साथ ले, अमेरिका ने संभावित नए हमलों को लेकर सुरक्षा चेतावनी भी जारी की, उसने अपने अधिकारियों और उनके परिवार वालों की सुरक्षा को सबसे जरूरी बताए। हूती लड़ाकों ने ड्रोन से पहला हमला दसऊदी अरब के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया। हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई, दस से जादा लोग घाय लोग थोड़ी दिर बाद, UAE की सीमा के नस्दीक साओधीय रामको के एक तेल ठिकाने पर हमला हो गया, यमन के हुती लडाकों ने उन दोनों जगहों पर ड्रोन से तबाही मचाई। &nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 13:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/vladimir-putin-backs-peace-talks-then-launches-missile-attacks-on-ukraine</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अब फुल फॉर्म में आया ईरान, एक ही रात में ठोक डाले 7 जहाज, ट्रंप को फिर चुनौती]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-is-now-in-full-swing-it-took-out-7-ships-in-a-single-night-and-has-once-again-challenged-trump]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी दावों जिनमें बार-बार कहा गया कि हमने होर्मुज से ईरान के प्रबुत्व को कमजोर कर दिया है। उनकी सच्चाई पर सवाल तब उठ रहे हैं जब स्टेट ऑफ होर्मुज &nbsp;में रातोंरात सात तेल टैंकरों पर हमला हुआ और सातों में आग लग गई। मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि यह टैंकर बीच समंदर में टूट चुके हैं और धधक रहे हैं। इन जहाजों को या तो ईरान ने निशाना बनाया या फिर वह बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। लेकिन इस वाक्य से साबित हो गया है कि होर्मुज पर ईरान का दबदबा था और दबदबा है। हालांकि एक ही रात में होर्मुज में सात टैंकरों पर हमले की तस्दीक नहीं हो पा रही है। इसकी वजह बताई जाती है कि कुछ शिपिंग कंपनियां तो ऐसे हमलों की रिपोर्ट से भी कतरा जाती हैं। इस बीच ईरान की आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा है कि उनकी नेवी होर्मुज स्टेट की निगरानी और कंट्रोल जारी रखे हुए हैं। पहले भी उन शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी गई थी जिन्हें अमेरिकी सेना ने गुमराह किया था और जिन्होंने गैर कानूनी समुद्री रास्तों का इस्तेमाल किया था। आईआरजीसी ने अपने बयान में अमेरिका पर निशाना साधा। उनका कहना था कि अमेरिकी प्रशासन लगातार जहाजों को म से भरे बताए गए गैरकानूनी रास्तों से गुजरने के लिए उकसा रहा है जिससे इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। बयान में चेतावनी दी गई है कि यदि यह टकराव जारी रहा तो इसका असर मौजूद अमेरिकी अड्डों तक पहुंच सकता है।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/take-a-close-look-at-the-strategic-partnership-behind-marco-rubio-visit-to-india" target="_blank" rel="noopener">मार्को रूबियो की भारत यात्रा के पीछे की रणनीतिक साझेदारी या दबाव की कूटनीति को बारीकी से समझिए</a></h3><p><br>आईआरजीसी ने इसे अमेरिका के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया है। इस बीच ईरान के आर्मी चीफ मेजर जनरल अमीर हातमी ने कहा है कि हम असीमित युद्ध यानी कि एस्मैटिक वारफेयर और इसके लिए जरूरी हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि ड्रोन तकनीक और इंसान के बिना उड़ने और चलने वाली मशीनों पर हमने कमांड हासिल कर ली है। ईरान ने एक रात में सात जहाज मारने का दावा किया है और सिर्फ 6 दिन पहले भी फारस की खाड़ी का नीला समंदर काला धुआं उठा रहा था। एक तेल टैंकर जो धू-धू करके यहां जल रहा था और ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने उस समय भी दावा किया था कि ईरान की आईआरजीसी नेवी ने ऐलान किया है कि समंदर में लगे सेंशंस को पार करने वाले एक तेल टैंकर ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद करके होर्मुज के उस इलाके से गुजरने की जानबूझकर कोशिश की जिसे ईरान ने प्रतिबंधित इलाका घोषित कर रखा है। फिर प्रेस टीवी ने ईरान की नेवी के हवाले से सिर्फ इतना लिखा कि टैंकर में आग लग गई। ईरान, अमेरिका, जंग और उसके बाद भी लगातार हॉर्मोस को लेकर बने तनाव पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान के यह इशारे हैं कि समंदर के भीतर ईरान के जरिए बिछाई गई समुद्री माइंस किस कदर एक्टिव हैं। अब तो खबर यह भी आ रही है कि अगर जंग बढ़ती है या तनाव बढ़ता है तो समंदर के नीचे बिछे हुए जो तार हैं जिससे इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं उन पर भी ईरान हमला कर सकता है। ईरान के तेवर बता रहे हैं कि वह रत्ती भर भी टस से मस नहीं हुआ है अपने इरादों से। वहीं इस बार ईरान का दावा है कि उसने होर्मुज से गुजर रहे सात जहाजों को इसलिए मारा क्योंकि उन्हें फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में तेल के कारगो एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करते हुए पाया गया था। इसके बाद इन चारों जहाजों को एक साथ निशाना बनाया गया। उनमें आग लग गई। जबकि तीन जहाज बारूदी सुरंगों से जाकर टकरा गए।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/iaf-air-show-wings-over-ganga-begins-in-varanasi-namo-ghat" target="_blank" rel="noopener">IAF का एयर शो Wings Over Ganga वाराणसी में शुरू, 100 विमानों ने गंगा तट पर दिखाई ताकत</a></h3><p><br>अमेरिका और इसराइल के साथ जारी भयानक महासंग्राम के बीच ईरान तो कतई झुकने को तैयार नहीं है। अपने 22,000 पाउंड वजनी महाविनाशकारी जीयू43 बाय बी यानी एमओएवी माने मदर ऑफ ऑल बम्स को दागने का प्लानिंग कर रहे हैं। वहीं तेहरान से आई इस खौफनाक चेतावनी ने पेंटागन के होश उड़ा दिए। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक इस्लामिक रिवोलशनरी गार्ड कॉब्स के प्रवक्ता हुसैन मोहबी ने वाशिंगटन को सीधे ललकारते हुए कहा अगर अमेरिका के पास मदर ऑफ ऑल बम्स है तो हम उन्हें फादर ऑफ ऑल बम्स दिखाएंगे और यह उनके लिए एक ऐसा बिल्कुल नया और भयानक तजुर्बा होगा जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे। द न्यूयॉर्क टाइम्स की सनसनीखेज रिपोर्ट की माने तो अमेरिका नवंबर के शुरुआती हफ्ते तक फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य ताकत का ऐसा सैलाब जुटाने जा रहा है जिसमें तीन-तीन विमान वाहक पोत हजारों मरीन कमांडो फाइटर जेट्स और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस शामिल हैं। अमेरिका इस विशाल सैन्य घेराबंदी के दम पर ईरान को बातचीत के मेज पर झुकाना चाहता है ताकि परमाणु कार्यक्रम और होरमू जलडमरू मध्य पर अपना कब्जा जमा सके। लेकिन ईरानी वार्ताकारों ने परमाणु समझौते पर रत्ती भर भी रियायत देने से साफ तौर पर इंकार कर दिया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:58:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-is-now-in-full-swing-it-took-out-7-ships-in-a-single-night-and-has-once-again-challenged-trump</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[36 साल बाद पाकिस्तान बॉर्डर पर रूसी सेना, तालिबान के साथ मिलकर भारी गोलीबारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/russian-forces-on-the-pakistan-border-for-the-first-time-in-36-years]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>क्या मध्य एशिया में किसी नए और बड़े खतरे का धमाका होने वाला है? दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 से 27 अक्टूबर के बीच रूस और उज़्बेकिस्तान की सेनाएं तरमेज ट्रेनिंग सेंटर में एक विशाल जॉइंट मिलिट्री डील कर रही हैं। तरमेज अफगानिस्तान की उत्तरी सीमा से महज कुछ ही दूरी पर स्थित सबसे रणनीतिक इलाका है। इस अभ्यास में सिर्फ पैदल सैनिक ही नहीं बल्कि भारी तबाही मचाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर जमीन पर गस्त लगाने वाले आधुनिक रोबोटिक वॉरफेयर सिस्टम और दुर्गम पहाड़ियों में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने वाले निगरानी ड्रोन तैनात किए गए हैं। यानी रूस और उज़्बेकिस्तान अपनी बॉर्डर सिक्योरिटी को कंक्रीट की दीवार की तरह अभेद बनाने में जुट गए हैं। सवाल उठता है कि आखिर रूस को अफगानिस्तान की सीमा के पास इतना बड़ा सख्ती प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ी? इसके पीछे तीन सबसे बड़े कारण है। पहला आतंकी घुसपैठ का डर। अफगानिस्तान में मौजूद चरमपंथी संगठन और छोटे हथियार बंद गिरोह उज्बेकिस्तान के रास्ते मध्य एशिया में अस्थिरता फैला सकते हैं। दूसरा मध्य एशिया में दबदबा। रूस इस पूरे रीजन का बिग ब्रदर माना जाता है। ताजाकिस्तान में उसका मिलिट्री बेस पहले से ही और उज़्बेकिस्तान के साथ इस झील से पुतिन यह संदेश दे रहे हैं कि मध्य एशिया में रूस का दबदबा कायम रहेगा। तीसरा आधुनिक युद्ध तकनीक का टेस्ट। पथरीले और दुर्गम इलाकों में इंसानी सैनिकों से ज्यादा ड्रोंस और रोबोटिक असरदार होते हैं।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/bhavika-mangalanandan-slams-pakistan-at-un-over-treatment-of-minorities" target="_blank" rel="noopener">'जो देश अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता...': संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की लगाई क्लास, कारगिल युद्ध का कराया अहसास</a></h3><p><br>रूस यहां अपनी नई तकनीक का लाइव टेस्ट कर रहा है। अब आइए इस कहानी के सबसे दिलचस्प मोड़ पर आते हैं। एक तरफ जहां रूस सैन्य ताकत के दम पर सीमाएं सील कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ भारत की रणनीति पूरी तरह अलग और अनोखी है। भारत ने अफगानिस्तान में बंदूकों से नहीं बल्कि विकास और दोस्ती से जगह बनाई है। सलमा डैम से लेकर काबुल की संसद इमारत और टरंज डेलाराम हाईवे तक भारत ने अफगान लोगों का दिल जीत लिया है। भुखमरी और संकट के समय भारत ने लगातार गेहूं, दवाइयां, राहत सामग्री भेजकर यह साबित किया है कि भारत हर हाल में एक सच्चा दोस्त है। अब सवाल है कि क्या भारत और रूस की सोच एक जैसी है? हां भी और ना भी। जहां दोनों एक हैं। भारत, रूस और उज़्बेकिस्तान तीनों ही यह कतई नहीं चाहते हैं कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए हो। जहां रास्ते अलग है। रूस का ध्यान मिलिट्री अलायंस पर ज्यादा है। जबकि भारत व्यापार, कनेक्टिविटी और मानवीय संबंधों पर फोकस कर रहा है। और यहां काम आता है ईरान का चाबहार पो। चाबहार के जरिए भारत बिना पाकिस्तान पर निर्भर रहे। सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंच बना रहे। अगर क्षेत्र में शांति रही तो यह चाबहार रूट पूरे एशिया की अर्थव्यवस्था की तकदीर बदल सकता है। तो रूस का यह सैन अभ्यास साफ दिखाता है कि मध्य एशिया में सुरक्षा का माहौल बहुत ही ज्यादा संवेदनशील है।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:57:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/russian-forces-on-the-pakistan-border-for-the-first-time-in-36-years</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अगले 50 साल में 96 फीसदी Coral Reefs नष्ट होने की कगार पर, IUCN की चेतावनी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iucn-study-warns-nearly-all-coral-reefs-risk-collapse-in-50-years]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दुनिया की लगभग सभी प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) के अगले 50 वर्षों में नष्ट होने का गंभीर खतरा है। एक वैश्विक अध्ययन में यह चेतावनी देते हुए, इसके लिए मुख्य रूप से समुद्र के बढ़ते तापमान और लू जैसी अत्यधिक गर्मी की घटनाओं को जिम्मेदार बताया गया है। अल्बानिया में संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता सम्मेलन से इतर, बृहस्पतिवार को जारी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के आकलन में कहा गया है कि उथले पानी में मौजूद 96 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां पहले से ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं और वर्ष 2075 तक गायब हो सकती हैं।</p><p>ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ, पश्चिमी प्रशांत महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित कोरल ट्रायंगल, मेसोअमेरिकन बैरियर रीफ प्रणाली और लाल सागर की प्रवाल भित्तियां सहित दुनिया की कई प्रसिद्ध प्रवाल भित्तियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। यह खतरे का सबसे गंभीर स्तर है। आईयूसीएन की प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी प्रणालियों की ‘ग्लोबल रेड लिस्ट’ के इस आकलन का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक मिशाल गुडका ने कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियों के नष्ट होने का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन इसे निराशा का कारण बनाने के बजाय खतरे की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियों ने बड़े पैमाने पर हानिकारक विरंजन (ब्लीचिंग) जैसी विनाशकारी घटनाओं के बाद भी उल्लेखनीय रूप से उबरने की क्षमता दिखाई है।</p><p>भविष्य में भी कुछ स्थानों पर ऐसी प्रवाल भित्तियां बची रह सकती हैं, जो प्रतिकूल परिस्थितियों को सहने में सक्षम हों। इसलिए हमें उनकी रक्षा और विकास के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।’’
यह आकलन प्रवाल भित्तियों को लेकर आई ताजा चिंताजनक रिपोर्ट है। ये भित्तियां समुद्री भोजन और पर्यटन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं तथा तटीय कटाव और तूफानों से बचाव में भी मदद करती हैं।</p><p>इन्हें ‘‘समुद्र के वर्षावन’’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां दुनिया की सबसे समृद्ध जैव विविधता में से कुछ पाई जाती हैं। ये समुद्री जीवों की एक चौथाई प्रजातियों के साथ-साथ तटीय समुदायों और व्यवसायों को भी सहारा देती हैं। जब कोई प्रवाल भित्ति नष्ट हो जाती है, तो उसके कठोर प्रवाल गायब होने लगते हैं और उनकी जगह शैवाल, टूटे हुए प्रवाल के टुकड़े तथा स्पंज जैसे जीव ले लेते हैं।</p><p>इसके परिणामस्वरूप भित्ति एक ऐसे विविध पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देने में सक्षम नहीं रह जाती, जिसमें छोटे अकशेरुकी जीवों से लेकर ग्रूपर जैसी रीफ मछलियां तक शामिल होती हैं। आईयूसीएन की महानिदेशक ग्रेथेल एगुइलार ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियां समुद्र के स्वास्थ्य के सबसे स्पष्ट संकेतकों में से एक हैं।’’
इस आकलन में उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) और उपोष्णकटिबंधीय (सबट्रॉपिकल) क्षेत्रों के 127 पारिस्थितिकी क्षेत्रों तथा दुनिया भर में फैली 1,88,362 वर्ग किलोमीटर प्रवाल भित्तियों को शामिल किया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन को दुनिया भर में प्रवाल भित्तियों के क्षरण का ‘‘सबसे प्रमुख और लगातार बना रहने वाला खतरा’’ बताया गया है।</p><p>एक सप्ताह पहले आईयूसीएन के एक अन्य अध्ययन में कहा गया था कि प्रवाल भित्तियां बनाने वाली लगभग 44 प्रतिशत प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ गया है। वहीं, एक साल पहले किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि दुनिया की 84 प्रतिशत समुद्री प्रवाल भित्तियां हानिकारक विरंजन (ब्लीचिंग) की चपेट में आ चुकी हैं। दर्ज इतिहास में यह इस तरह की सबसे व्यापक घटना थी।</p><p>वर्ष 2024 पृथ्वी का अब तक का सबसे गर्म वर्ष था और इस दौरान पैदा हुई गर्मी का बड़ा हिस्सा महासागरों में समा गया। ध्रुवीय क्षेत्रों से दूर स्थित महासागरों की सतह का औसत वार्षिक तापमान रिकॉर्ड 20.87 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और तटीय क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास को कम करने के प्रयास भी प्रवाल भित्तियों को बचाने में मदद कर सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iucn-study-warns-nearly-all-coral-reefs-risk-collapse-in-50-years</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[UN में भारत का पलटवार: Kargil War में जवानों के शव ठुकराने वाला Pakistan न दे आस्था पर उपदेश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-slams-pakistan-at-un-over-kargil-war-soldiers-burial-rights]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों के शव तक स्वीकार करने से इनकार करने वाला देश अब आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और शवों को दफनाने के अधिकार की बात कर रहा है। धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक नाजिला घानिया की अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत के जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अभियानों के दौरान मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के अधिकारों से कथित तौर पर व्यवस्थित रूप से इनकार किए जाने की खबरें गंभीर चिंता पैदा करती हैं। इसमें शवों को परिजनों को सौंपने से इनकार करना और दूरदराज के स्थानों पर गुप्त रूप से दफनाना शामिल है।</p><p>इससे मुसलमान विशेष रूप से प्रभावित होते हैं और यह उनकी धार्मिक परंपराओं के भी विपरीत है।’’
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने बृहस्पतिवार को यहां कहा, ‘‘यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि 1999 में कारगिल में लड़ाई के दौरान मारे गए अपने सैनिकों के शव तक स्वीकार नहीं करने वाला देश आज खुले तौर पर पूरे जोश के साथ आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और शवों को दफनाने के अधिकार की बात कर रहा है।’’
यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के संदर्भ में की गई थी। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के शव दफनाए थे। पाकिस्तान ने उस समय युद्ध में पाकिस्तानी सेना के जवानों की संलिप्तता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।</p><p>मंगलानंदन ने ‘विशेष परिस्थितियों में अंतिम संस्कार के अधिकारों पर’ विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद के दौरान पाकिस्तान को याद दिलाया कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान के साथ और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुरूप दफनाया था। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हो रही घटनाओं को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहता है, जबकि उसे अपना ध्यान जम्मू-कश्मीर के उन हिस्सों में हो रही घटनाओं पर देना चाहिए, जिन पर उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इनमें रावलकोट भी शामिल है।’
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार घट रही है और उनके अधिकारों का नियमित रूप से हनन किया जाता है।</p><p>मंगलानंदन ने कहा, ‘‘जो देश अपने ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे भारत को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के अंतिम संस्कार के अधिकारों को यह तर्क देकर उचित ठहराया जा रहा है कि देश आतंकवादियों के अंतिम संस्कार के अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन ऐसा केवल कानूनी सीमाओं के भीतर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ कानूनी सीमाएं संप्रभु अधिकारों के सिद्धांतों के अनुरूप तय की जानी चाहिए। एक आतंकवादी न केवल निर्दोष लोगों की हत्या करता है, बल्कि पूरे देश की मानसिकता को भी नुकसान पहुंचाता है।’’
मंगलानंदन ने कहा कि रिपोर्ट में आतंकवादियों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की गई है, जबकि वे मानव के सबसे पवित्र अधिकार यानी जीवन के अधिकार का उल्लंघन करते हैं लेकिन आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों की ऐसी कोई वकालत नहीं की गई है।</p><p>उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान भेदभाव और गलत व्यवहार की सभी घटनाएं कथित तौर पर केवल ‘ग्लोबल साउथ’ में हुईं। ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य दुनिया के उन विकासशील, कम विकसित या उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह से है, जो मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत क्षेत्र में स्थित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘विकसित देशों में ऐसी ही दुखद घटनाओं का उल्लेख नहीं करने से रिपोर्ट को क्या लाभ होता है?</p><p>लोगों के दर्द और नुकसान से राजनीतिक फायदा उठाना ऐसा विषय नहीं होना चाहिए, जिसके आधार पर विशेष दूत अपनी प्रासंगिकता साबित करें।’’</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-slams-pakistan-at-un-over-kargil-war-soldiers-burial-rights</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[UNSC में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व न होने से शांति स्थापना में आ रही बाधा: India]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-calls-for-unsc-reform-highlights-representation-gap-at-united-nations]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 23 अक्टूबर भारत ने दुनिया के कुछ ‘‘सबसे गंभीर’’ संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जूझने का जिक्र करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत के आधार पर हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकते, जिसमें दुनिया के सभी देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जो संगठन अपने प्रमुख अंग में बदलाव नहीं कर सकता, उसके लिए 1945 के बाद से काफी आगे बढ़ चुकी दुनिया में अपना प्राधिकार कायम रखना लगातार मुश्किल होता जाएगा। पर्वतनेनी ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और उसकी सदस्य संख्या बढ़ाने का सवाल’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा, ‘‘इसकी कीमत पहले ही दिखाई दे रही है।</p><p>80 साल बाद भी यह संगठन परिषद के सामने मौजूद कुछ सबसे गंभीर संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में जूझ रहा है।’’
भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘आठ दशक पहले मिली जीत से हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकता, जिसमें सभी का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है।’’
पर्वतनेनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक संगठन की कमियों और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा संघर्षों से निपटने में उसकी नाकामियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी युद्ध, खासकर 80 साल से भी पहले हुआ युद्ध, आज दुनिया की स्थिति तय नहीं कर सकता।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी, लेकिन आज के संयुक्त राष्ट्र के लिए उस वर्ष को ही एकमात्र आधार मानकर फैसले नहीं लिए जा सकते। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी उस दौर से बहुत दूर आ चुकी है, जब इस संगठन का गठन हुआ था।</p><p>पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘इतिहास हमें यह बता सकता है कि क्या नहीं करना चाहिए लेकिन समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए आज क्या किया जाना चाहिए, यह इतिहास तय नहीं कर सकता।’’
उन्होंने कहा कि संघर्षों के बढ़ने और सुरक्षा परिषद के उन पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने में जूझने के कारण संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। भारत ने विश्व युद्धों में विभिन्न देशों के बलिदानों को जानबूझकर दबाए जाने के मुद्दे को भी उठाया। उसने कहा कि विजेताओं द्वारा, विजेताओं के लिए और विजेताओं के हाथों बनाया गया संगठन युद्ध के पीड़ितों की चिंताओं को शामिल करने में विफल रहा।</p><p>पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘विश्व युद्धों में अनगिनत बलिदान दिए गए, लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली और कुछ मामलों में जानबूझकर दबा दिया गया।’’ उन्होंने कहा कि करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और उनमें से लगभग 90,000 सैन्य सेवा के दौरान मारे गए थे। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन की युद्ध नीतियों के कारण बंगाल के कुख्यात अकाल में 40 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘विजेताओं द्वारा, विजेताओं के लिए और विजेताओं के हाथों बनाए गए संगठन ने स्पष्ट रूप से पीड़ितों की चिंताओं को शामिल करने की परवाह नहीं की।</p><p>समय बदल चुका है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी बदलना होगा, ताकि उसकी प्रासंगिकता बनी रहे।’’
वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट हासिल करने की कोशिश कर रहे भारत ने कहा कि एशिया-प्रशांत समूह में दुनिया की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है, लेकिन सुरक्षा परिषद में उसका प्रतिनिधित्व केवल एक स्थायी सदस्य और हर साल एक या दो निर्वाचित सदस्यों तक सीमित है। अफ्रीका और लातिन अमेरिका का भी सुरक्षा परिषद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके विपरीत, यूरोप के पास दो स्थायी और तीन निर्वाचित सदस्य हैं।</p><p>संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार वाले पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। इसके अलावा, 10 सदस्य देशों को दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्य संख्या बढ़ाने की मांग करता रहा है।</p><p>पर्वतनेनी ने जोर देकर कहा कि केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने से बुनियादी असंतुलन दूर नहीं होगा, बल्कि इससे मौजूदा व्यवस्था और मजबूत होगी। वीटो व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि भारत का रुख सिद्धांतों पर आधारित है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:43:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-calls-for-unsc-reform-highlights-representation-gap-at-united-nations</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Donald Trump को US Court का सख्त निर्देश, BBC मानहानि केस में 11 दिसंबर तक दें बयान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-ordered-record-deposition-bbc-defamation-case-11-december]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के खिलाफ दायर 10 अरब अमेरिकी डॉलर के मानहानि मामले में 11 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया। ‘यूएस मजिस्ट्रेट जज’ एंजोलिक लेट ने यह आदेश दिया। दरअसल, बीबीसी के वकीलों ने शिकायत की है कि ट्रंप अपने ही द्वारा दायर मुकदमे में बयान दर्ज कराने में देरी कर रहे हैं।</p><p>बीबीसी के वकील चार्ल्स टोबिन ने कहा कि सबूत जुटाने और उनकी जांच की प्रक्रिया पूरी होने में अब केवल दो महीने बचे हैं, लेकिन ‘‘हम अब तक वादी (ट्रंप) का बयान दर्ज नहीं कर पाए हैं।’’
इस बीच, यह स्पष्ट नहीं है कि पूर्व विशेष अधिवक्ता जैक स्मिथ को बयान दर्ज कराने की अनुमति मिलेगी या नहीं। संघीय नियमों के अनुसार, सरकारी विभागों के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों को अदालती मामलों में गवाही देने से पहले संबंधित विभाग के प्रमुख से अनुमति लेनी होती है। स्मिथ ने अनुमति मांगी है, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।</p><p>न्यायाधीश ने न्याय विभाग को दो नवंबर तक उनके अनुरोध पर जवाब देने का आदेश दिया। ट्रंप का बयान दर्ज कराने के मामले पर सुनवाई के दौरान टोबिन ने बताया कि इसके लिए पहले 16 अक्टूबर की तारीख पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रंप ने ‘‘राष्ट्रीय महत्व के एक मामले’’ का हवाला देकर इसे स्थगित कर दिया था। टोबिन ने कहा कि वास्तव में रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं राष्ट्रपति ट्रंप उस दिन जॉर्जिया में चुनाव प्रचार कर रहे थे।</p><p>उन्होंने कहा, ‘‘वह पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे और उन्होंने बयान दर्ज कराने के बजाय उसे प्राथमिकता दी।’’
न्यायाधीश लेट ने कहा कि ट्रंप को 11 दिसंबर तक अपना बयान दर्ज कराना होगा और ऐसा नहीं करने पर मुकदमा खारिज किया जा सकता है। हालांकि, यदि मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश सबूत जुटाने की अवधि बढ़ा देते हैं, तो यह समयसीमा बदल सकती है। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच दस्तावेजों और अन्य सबूतों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया 18 दिसंबर को समाप्त होनी है।</p><p>बीबीसी के वकील चाहते हैं कि इससे पहले ट्रंप का बयान दर्ज हो जाए। ट्रंप पहले भी कई बार बयान दर्ज कराने से बचते रहे हैं। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बीबीसी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।</p><p>ट्रंप ने सार्वजनिक धन से संचालित इस प्रसारण संस्था पर ‘ट्रंप: ए सेकंड चांस’ नामक वृत्तचित्र को लेकर मानहानि करने के साथ ही भ्रामक और अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 10:53:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-ordered-record-deposition-bbc-defamation-case-11-december</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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