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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[White House Dinner में Security में बड़ी चूक, हथियार लेकर घुसा शख्स, Washington में हड़कंप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/major-security-lapse-at-white-house-dinner-man-enters-with-weapon-causing-panic-in-washington]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>शनिवार शाम अमेरिका की राजधानी में आयोजित एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम के दौरान अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रेस की स्वतंत्रता के प्रतीक माने जाने वाले व्हाइट हाउस संवाददाता संघ डिनर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक हथियारबंद व्यक्ति सुरक्षा घेरा पार कर भीतर पहुंच गया और सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ हो गई हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार यह घटना वॉशिंगटन हिल्टन में हुई, जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी होटल में ठहरा हुआ था, जिसकी वजह से वह शुरुआती सुरक्षा जांच को पार करने में सफल रहा है। बता दें कि कार्यक्रम से पहले होटल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था और केवल आमंत्रित लोगों तथा होटल में ठहरे मेहमानों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि होटल के मुख्य प्रवेश द्वारों पर धातु जांच उपकरण नहीं लगाए गए थे और कड़ा सुरक्षा घेरा केवल कार्यक्रम स्थल के अंदर के हिस्से में ही बनाया गया था। इसी खामी का फायदा उठाकर आरोपी अंदर तक पहुंच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ने होटल के एक कम सुरक्षित हिस्से में खुद को तैयार किया और फिर अचानक कार्यक्रम की ओर बढ़ गया है।</div><div><br></div><div>पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी के पास एक बंदूक, एक छोटी बंदूक और कई धारदार हथियार थे। जब वह सुरक्षा जांच बिंदु की ओर बढ़ा तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद हल्की मुठभेड़ हुई और अंततः उसे काबू कर लिया गया है।</div><div><br></div><div>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी की पहचान कोल टोमस एलन के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 31 वर्ष बताई जा रही है। उस पर हथियार रखने और हमला करने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वह अकेले ही इस घटना को अंजाम देने आया था और फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।</div><div><br></div><div>बता दें कि यह कार्यक्रम हर साल आयोजित किया जाता है और इसमें देश के शीर्ष नेता, पत्रकार और कई प्रमुख हस्तियां शामिल होती हैं। ऐसे आयोजनों में आमतौर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है, खासकर जब राष्ट्रपति की मौजूदगी होती है। अंदर के हिस्से में भी एक अलग सुरक्षा घेरा बनाया गया था, जहां विशेष एजेंसियां तैनात रहती हैं।</div><div><br></div><div>हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंदर की सुरक्षा व्यवस्था ने सही तरीके से काम किया और किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा में शुरुआती स्तर पर मौजूद कमियों को उजागर कर दिया है।</div><div><br></div><div>इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि उच्च स्तरीय सुरक्षा सुविधाओं से लैस स्थायी सभागार की आवश्यकता है। उन्होंने व्हाइट हाउस परिसर में एक आधुनिक भवन बनाने की अपनी योजना का भी जिक्र किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।</div><div><span style="font-size: 1rem;"><br></span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 19:22:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/major-security-lapse-at-white-house-dinner-man-enters-with-weapon-causing-panic-in-washington</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[White House Party में गोली चलाने वाले की पूरी कुंडली, जिसे ट्रंप ने बताया Lone Wolf]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/complete-biography-of-the-shooter-at-the-white-house-party-whom-trump-described-as-a-lone-wolf]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका की सियासत को हिला देने वाले हमले में एक चौंकाने वाला नाम कोल थॉमस एलेन का सामने आया है। एलेन को डोनाल्ड ट्रंप ने “लोन वुल्फ” बताया।आखिर कौन है ये शख्स, जिसने अकेले ही इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश की? जांच में अब तक किसी आतंकी संगठन से कनेक्शन नहीं मिला, लेकिन उसके इरादे बेहद खतरनाक थे। इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स करने वाला ये युवक, दिखने में जितना साधारण था, कहानी उतनी ही रहस्यमयी। क्या एक “लोन वुल्फ” सच में अकेला होता है, या इसके पीछे छिपी है कोई बड़ी साजिश? दरअसल, लोन वुल्फ उस व्यक्ति को कहते हैं जो अकेले अपना काम करने में सक्षम हो। जैसे कि यह व्यक्ति अकेले ही सारे अटैक्स किया। यहां पर अभी तक जो भी जांच में हमें पता चला है कोई भी इसके पीछे आतंकी संगठन नहीं था या किसी का भी हाथ अभी तक नहीं पता चला है।&nbsp;</div><h3>कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स</h3><div>हमलावर का नाम कोल थॉमस एलेन है।सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक कोल थॉमस एलेन पेशे से एक पार्ट टाइम टीचर है और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने सबसे पहले 2017 में ग्रेजुएशन किया है मैकेनिकल इंजीनियरिंग में और पिछले साल उन्होंने मास्टर्स डिग्री कंप्यूटर साइंस में की है। सी2 एजुकेशन एक कंपनी है जिसमें वह पार्ट टाइम ट्यूटर थे और उन्हें गेमिंग का बहुत शौक था। वह इंड गेम डेवलपर भी हैं।&nbsp;</div><h3>ट्रंप के अधिकारियों पर अटैक की प्लानिंग</h3><div>जब उनसे सिक्योरिटी एजेंसी ने पूछा कि आप यहां पर किस पर हमला करने आए थे? तो उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारियों पर वो हमला करने आए हैं। साथ ही साथ कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी डोमिंगस हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली है।</div><h3>कमला हैरिस के अभियान में $25 का योगदान</h3><div>जब इनके राजनीतिक जुड़ाव की ओर देखते हैं तो पता चलता है कि साल 2024 में फेडरल इलेक्शन का जो रिकॉर्ड है उसमें इन्होंने $25 कमला हैरिस का जो राष्ट्रपति अभियान था उसमें योगदान भी दिया। इन सारी जानकारी से यह पता चलता है कि एलन काफी ब्राइट रहे हैं। उनका बहुत ही एक अच्छा खासा एजुकेशनल बैकग्राउंड रहा है और दिसंबर 2024 में उन्हें टीचर ऑफ द मंथ का भी खिताब मिला है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:35:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/complete-biography-of-the-shooter-at-the-white-house-party-whom-trump-described-as-a-lone-wolf</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[व्हाइट हाउस डिनर में जब हुआ शूटआउट, सबसे फिट, स्मार्ट और तेज यूएस सीक्रेट सर्विस काउंटर असॉल्ट टीम ने कैसे पलभर में मोर्चा संभाला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/how-did-fittest-smartest-fastest-us-secret-service-counter-assault-team-take-charge-situation]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वॉशिंगटन डीसी की चमकती रोशनी और हाई-प्रोफाइल डिनर पार्टी का माहौल चल रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में यह सन्नाटा अफरा-तफरी में बदल गया। पत्रकारों के लिए आयोजित इस खास डिनर के दौरान अचानक एक हथियारबंद शख्स सुरक्षा घेरा तोड़कर उस क्षेत्र में घुस आया, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई बड़े अमेरिकी नेता मौजूद थे। घटना ने माहौल को पल भर में दहशत में बदल दिया। मेहमान अपनी जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिपने लगे। हालांकि, सतर्क सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू में कर लिया। राहत की बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित रहे और उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।&nbsp; सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स वगैरह भी मौजूद थे और वहां पर उनके सुरक्षा कर्मियों ने अह पूरी स्थिति को संभाल लिया है। दरअसल, इस खास यूनिट को 'कैट' (CAT) के नाम से जाना जाता है, जिसमें शामिल होना इतना मुश्किल है कि टेस्ट देने वालों में से सिर्फ कुछ चुनिंदा एजेंट्स को ही इसमें जगह मिल पाती है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की 'काउंटर असॉल्ट टीम' राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा के लिए खास टैक्टिकल यूनिट है। आइए आपको सीक्रेट सर्विस के इन सबसे खतरनाक और जांबाज एजेंट्स के बारे में बताते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/this-incident-cannot-stop-iran-from-winning-the-war-trump-roars-after-the-firing" target="_blank">हमले को ट्रंप ने ईरान युद्ध से जोड़ा, कहा- ये घटना मुझे जीतने से नहीं रोक सकती</a></h3><h2>कैसे काम करती है 'कैट'?</h2><div>कैट का काम हमेशा फ्रंटफुट पर रहकर जवाबी कार्रवाई करने का होता है। जब भी राष्ट्रपति का काफिला निकलता है या वो किसी कार्यक्रम में होते हैं, तो कैट के कमांडो आस-पास चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहते हैं। अगर राष्ट्रपति पर कोई भी हमला होता है, तो ये टीम पलक झपकते ही हमलावरों पर टूट पड़ती है और उन्हें घेर लेती है। ये टीम भारी गोलीबारी करके दुश्मनों को उसी जगह रोक देती है, ताकि इस बीच राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी मुख्य टीम उन्हें सुरक्षित वहां से निकाल सके। ये खास टीम मोटरकेड (काफिले) और बड़े आयोजनों में सुरक्षा का जिम्मा संभालती है। कैट के कमांडो हर वक्त इस बात के लिए तैयार रहते हैं कि किसी भी खतरे को उसी वक्त कुचल दिया जाए। इनकी ट्रेनिंग इतनी कड़ी और एडवांस होती है कि ये भारी दबाव और तनाव के बीच भी पल भर में एकदम सही फैसला ले सकते हैं। सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसलिए कैट बाकी सुरक्षा टीमों के साथ भी बेहतरीन तालमेल बनाकर काम करती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-rapid-gunfire-erupts-how-did-a-cia-agent-save-his-life" target="_blank">ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?</a></h3><h2>किन हथियारों से लैस होते हैं 'कैट' के कमांडो?</h2><div>कैट के कमांडो बेहद आधुनिक और घातक हथियारों से लैस होते हैं। आमतौर पर हर कमांडो के पास 'नाइट्स आर्मामेंट कंपनी' (KAC) की SR-16 CQB राइफल होती है। ये 11.5 इंच की बैरल वाली ऐसी राइफल है जिसमें साइलेंसर लगा होता है। निशाना अचूक लगाने के लिए इस राइफल में रेड डॉट साइट, लेजर, खास लाइट और स्टॉक जैसी चीजें लगी होती हैं। इसके साथ ही, इनके पास बैकअप के लिए SIG Sauer P229 या ग्लॉक 19 जेन 5 (Glock 19 Gen 5 MOS) जैसी दमदार पिस्तौल भी होती है, जिसमें रेड डॉट साइट लगा होता है। हालात के हिसाब से कुछ जवानों के पास भारी हथियार भी होते हैं। इसके अलावा ये कमांडो फ्लैश-बैंग ग्रेनेड, बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट और बाकी जरूरी टेक्टिकल गियर से भी पूरी तरह लैस होते हैं। इन्हीं अत्याधुनिक हथियारों के दम पर कैट की टीम किसी भी हमले का पल भर में मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत रखती है।</div><h2>हमलावर के पास थे घातक हथियार&nbsp;</h2><div>हमलावर की पहचान कैलिफोर्निया के टोरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि संदिग्ध पर हथियार रखने और हमले के आरोप लगाए गए हैं। गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे। सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 11:29:07 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[हमले को ट्रंप ने ईरान युद्ध से जोड़ा, कहा- ये घटना मुझे जीतने से नहीं रोक सकती]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/this-incident-cannot-stop-iran-from-winning-the-war-trump-roars-after-the-firing]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">फायरिंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान आया है। वो यह कह रहे हैं कि यह घटना मुझे ईरान युद्ध रोकने से नहीं रोक सकती। यह घटना मुझे रोक नहीं पाएगी। ईरान युद्ध जीतने से नहीं रोक पाएगी मुझे यह घटना। कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर चल रही थी। वहां पर जैसे ही ये गोली की आवाजें हुई एक तो पूरे डोनल्ड ट्रंप उनके कैबिनेट उनकी पत्नी मिलानिया ट्रंप को लेकर जिसमें जितने भी लोग वहां पर मौजूद थे। पीट हेगसेथ से लेकर कैश पटेल सबको वहां से निकाला गया। अमेरिका के अंदर एक अटैक होता है और डॉनल्ड ट्रंप इसको ईरान युद्ध से जोड़ रहे हैं। वो कह रहे हैं कि यह घटना मुझे ईरान युद्ध रोकने से नहीं जीतने से नहीं रोक सकती।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/pm-modi-strong-reaction-to-white-house-shooting-said-there-is-no-place-for-violence-in-a-democracy" target="_blank">White House Shooting पर PM Modi की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं</a></h3><div>अधिकारियों ने बताया कि 31 वर्षीय हमलावर कैलिफोर्निया से था, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। घटना के बाद ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं को संबोधित किया और बताया कि संदिग्ध के पास कई हथियार थे। एक अधिकारी को गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई। ट्रंप ने कहा कि सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें संदिग्ध को सुरक्षा अवरोधक के पास भागते हुए और सीक्रेट सर्विस के एजेंट को उसकी ओर दौड़ते हुए देखा जा सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-rapid-gunfire-erupts-how-did-a-cia-agent-save-his-life" target="_blank">ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?</a></h3><div>घटना के बाद वॉशिंगटन हिल्टन के बैंक्वेट हॉल में सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों के अधिकारी बड़ी संख्या में पंहुचे, जहां सैकड़ों अतिथि स्प्रिंग पी और बुराटा सलाद का आनंद ले रहे थे। उन्हें अचानक टेबलों के नीचे छिपने को मजबूर होना पड़ा। जैसे ही लोगों को स्थिति का एहसास हुआ, बॉलरूम में दहशत फैल गई। सैकड़ों पत्रकार सूचनाएं साझा करने के लिए फोन पर जुट गए। किसी को चिल्लाते हुए सुना गया हट जाइए, सर! जबकि कुछ लोग निर्देश दे रहे थे कि झुक जाइए।’ एक कोने से गॉड ब्लेस अमेरिका की आवाजें भी सुनाई दीं। इसी बीच ट्रंप को मंच से सुरक्षित बाहर ले जाया गया। इस दौरान वह क्षण भर के लिए, संभवतः ठोकर लगने से, लड़खड़ाए और सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया। एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने गोलीबारी की पुष्टि की। हालांकि विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा में रहने वाले सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि एक कानून-प्रवर्तन कर्मी को बुलेट-प्रूफ जैकेट पर गोली लगी, लेकिन उसके सुरक्षित रहने की उम्मीद है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 11:06:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/this-incident-cannot-stop-iran-from-winning-the-war-trump-roars-after-the-firing</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-rapid-gunfire-erupts-how-did-a-cia-agent-save-his-life]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका के राष्ट्रपति पर हमले का प्रयास किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टारगेट करने की कोशिश की गई है। ट्रंप पर हमले की कोशिश कैसे हुई? डिनर पार्टी में उपराष्ट्रपति जे डीवन समेत और कौन-कौन से प्रमुख लोग वहां पर मौजूद थे? दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली इमारत के अंदर गोलियां कैसे चल गई? सब कुछ आपको विस्तार से बताते हैं। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब दुनिया के सबसे हाई प्रोफाइल आयोजनों में से एक वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान अचानक तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दी। यह वही इवेंट है जहां अमेरिका का राजनीतिक और मीडिया जगत एक ही छत के नीचे होता है। लेकिन इस बार माहौल हंसीज़ाक से सीधे डर और अफरातफरी में तब्दील हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक जैसे ही यह आवाजें गूंजी यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विसेज तुरंत हरकत में आ गई। एजेंट्स ने बिना एक सेकंड गवाए डोनाल्ड ट्रंप को स्टेट से हटाया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। उस समय उनके साथ जे डीवेंस और कई वरिष्ठ कैबिनेट के सदस्य भी मौजूद थे जिन्हें तुरंत कवर किया गया।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-one-down-how-many-others-are-involved" target="_blank">Trump पर हमला, एक पकड़ा गया और कितने शामिल? खुलासे होश उड़ा देंगे!</a></h3><div>घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों के मुताबिक अचानक आई इन आवाजों ने पूरे हॉल में भगदड़ जैसा माहौल बना दिया था। कुछ वीडियो क्लिप्स में देखा जा सकता है कि कैसे लोग अपनी सीटें छोड़कर इधर-उधर भागने लगे और सुरक्षा एजेंसियां भीड़ को नियंत्रित करने में तुरंत जुट गई। हालांकि इन वीडियोस की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है लेकिन माहौल की गंभीरता इससे साफ झलकती है। इस बीच अधिकारियों के रेडियो कम्युनिकेशन से यह जानकारी सामने आई कि एक संदिग्ध शख्स को हिरासत में लिया गया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि वास्तव में गोली चली थी या आवाज किसी और कारण से आई थी। लेकिन जिस तरह से सुरक्षा एजेंसियों ने रिएक्ट किया उसने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीसी में आज की शाम काफी हलचल भरी रही। सीक्रेट सर्विसेज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि संदिग्ध को पकड़ लिया गया है और उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यक्रम जारी रखा जा सकता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-big-revelation-on-the-white-house-firing-the-attacker-had-many-deadly-weapons" target="_blank">White House फायरिंग पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, 'हमलावर के पास थे कई घातक हथियार'</a></h3><div>हालांकि अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में ही था। ट्रंप ने इसके साथ-साथ अमेरिकी सीक्रेट सर्विज की भी तारीफ की जिन्होंने सब कुछ अच्छे से संभाल लिया। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़े करती है कि क्या दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सिस्टम में भी सेंध लग सकती है? और अगर हां, तो इसके पीछे की असली वजह क्या है? क्या यह वाकई हमला था या फिर सिर्फ अफवाहों ने माहौल को खतरनाक बना दिया। फिलहाल प्रशासन की ओर से यही कहा गया है कि राष्ट्रपति और सभी वरिष्ठ नेता पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों, खुफिया तंत्र और बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या यह सिर्फ एक फर्जी अलार्म था जिसके जरिए हमलावर या इसके पीछे का प्रॉक्सी समूह यह दिखाना चाह रहा था कि उसकी पहुंच कहां तक हो सकती है और वह कहां तक घुसकर हमला कर सकते हैं या फिर यह अमेरिका के दिल पर हमला करने की असली साजिश थी जो पूरी नहीं हो सकी।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 10:56:34 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Trump पर हमला, एक पकड़ा गया और कितने शामिल? खुलासे होश उड़ा देंगे!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-one-down-how-many-others-are-involved]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार रात को संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर की पहचान कैलिफोर्निया के टोरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। जिस तरीके से डोनाल्ड ट्रंप को एक&nbsp; डिनर पार्टी के दौरान निशाना बनाया गया। सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स वगैरह भी मौजूद थे और वहां पर उनके सुरक्षा कर्मियों ने अह पूरी स्थिति को संभाल लिया है। लेकिन और उसको बाहर से बाहर निकाला है। अब जो है इसमें किसी पकड़े भी गए हैं जो लोग थे और उसप एक हमला उसके ऊपर अटैक भी हुआ है। अब इसके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी जब इन्वेस्टिगेशन की जाएगी कि आखिर ये कहां था? कौन है? किस रास्ते से ये वहां पर आया था। तमाम जो एरिया की जो सीसीटीवी होटल की सीसीटीवी है उसको एनालाइज किया जाएगा। जो होटल का सीसीटीवी फुटेज है वो खंगाला जाएगा। इतना बड़ा सिक्योरिटी लैब्स कैसे हो गया? इन तमाम विषयों पर जांच होगी। हमलावर एक था या उससे ज्यादा थे इसको लेकर कुछ डिटेल्स मिल पा रही है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/white-house-shooting-attacker-cole-allen-carried-out-the-incident-alone-washington-mayor-reveals" target="_blank">White House Shooting: हमलावर Cole Allen ने घटना को अकेले दिया अंजाम, Washington मेयर ने किया खुलासा</a></h3><div>एक हमलावर मार गिराया गया। पहले तो वो आता कैसे हाई सिक्योरिटी जोन में और इस तरीके से फायरिंग करता है वो तो बहुत बड़ा सवाल है। लेकिन क्या उसके साथ इस पूरे इस पूरे घटनाक्रम में और लोग शामिल थे इस पर भी सवाल उठ रहा है। क्योंकि अभी तक की जांच में यही सामने आया है कि ये सिर्फ एक आदमी की खुद की प्लानिंग नहीं है कि वो वेपन लेकर जो है उस सिक्योर एरिया में आ गया था। उस होटल में पहुंच गया था। जहां पर डोनाल्ड ट्रंप अपने साथियों के साथ पत्रकारों के साथ एक डिनर पार्टी कर रहे थे। वहां पे उनसे मिल रहे थे और इसको इस पूरी प्रोग्राम के बारे में कैसे पता चला था और पूरी सिक्योरिटी को क्योंकि पूरा एरिया जो है वो सेनेटाइज कर दिया जाता है। काफी एक थ्रेट जो है वो डोनाल्ड ट्रंप को लेकर है क्योंकि इससे पहले भी 2000 देश पर हमला 24 का हमला हो चुका है। उसको उसके बाद इस तरीके के हमला हुआ है।&nbsp;</div><div>दरअसल मीडिया के साथ ये डिनर का आयोजन था। भारी संख्या में जर्नलिस्ट यहां पर आए हुए थे और तुरंत यहां पर एक हमलावर अचानक से आता है। मेजर सिक्योरिटी लैब्स तो है ही लेकिन ये हमलावर अंदर आता है होटल हिल्टन में जो कि हाई सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील था। प्रेसिडेंट वहां पर थे। उपराष्ट्रपति जेडी वंस वहां पर थे और वहां पर कई राउंड फायरिंग होती है और इस फायरिंग के दौरान तुरंत प्रभाव के साथ डायस से हटाया गया। भारी सुरक्षा के बीचोंबीच राष्ट्रपति ट्रंप को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को हटाया गया। पांच से आठ राउंड फायरिंग हुई है होटल हिल्टन के इस हॉल में। हालांकि ये कोई पहली दफे नहीं हुई। इससे पहले भी जब वो कंपेन के दौरान भी उनके एक बार हो चुकी थी। उनके कान में चोट लगी थी। अब बात दरअसल ये है कि प्रेसिडेंट ट्रंप जो है बहुत रेडिकल चेंजेस अमेरिकन पॉलिसी में ला रहे हैं। उसकी वजह से एक टेंशन क्रिएट हो गया है और उनके उनके विरुद्ध बहुत से ग्रुप और लोग इस तरह के हो गए हैं।&nbsp;</div><div>फिर दूसरी बात ये भी है कि जो उनके मागा (मेर अमेरिका ग्रेट अगेन) मूवमेंट है जिसकी मदद से वो आए सत्ता के अंदर वो भी उनसे खुश नहीं है। ये बहुत फॉर राइट ग्रुप्स हैं। ट्रंप अपने को स्वयं जीसस क्राइस्ट के रूप में प्रेजेंट किया और पोस्टर निकाला जिसमें दिखाया कि वो एक जो है उनके अवतार हैं या खुद स्वयं जीसस बन के आए हैं। लोगों की मदद कर रहे हैं। अब अभी तो पता नहीं ज्यादा डिटेल रिपोर्ट्स है नहीं। कौन लोग हैं इनके पीछे क्या है? अच्छी बात ये है कि उसमें से कुछ अरेस्ट हो गए हैं तो जल्दी ही पूरी डिटेल का पता चल जाएगा और उसमें फिर दूसरी बात ये कि यूरोप भी इनसे खुश नहीं है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 10:52:04 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-trump-one-down-how-many-others-are-involved</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[White House Shooting: हमलावर Cole Allen ने घटना को अकेले दिया अंजाम, Washington मेयर ने किया खुलासा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/white-house-shooting-attacker-cole-allen-carried-out-the-incident-alone-washington-mayor-reveals]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन की मेयर मुरियल बाउजर ने शनिवार रात कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान गोलीबारी करने वाला संदिग्ध बंदूकों और चाकुओं से लैस था और माना जा रहा है कि उसने अकेले ही घटना को अंजाम दिया।
 ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार शाम रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के अन्य शीर्ष नेताओं को वहां से निकाला गया।</p><p>
 अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 एक संवाददाता सम्मेलन में मेयर ने कहा, ‘‘अब तक की जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का कोई सुराग नहीं मिला है। सभी संकेत यही इशारा करते हैं कि हमलावर ने अकेले इस घटना को अंजाम दिया।’’
</p><p> उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम जनता को किसी खतरे की आशंका नहीं है।
 दो कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को बताया कि संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया के टॉरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 10:18:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/white-house-shooting-attacker-cole-allen-carried-out-the-incident-alone-washington-mayor-reveals</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[White House फायरिंग पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, 'हमलावर के पास थे कई घातक हथियार']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-big-revelation-on-the-white-house-firing-the-attacker-had-many-deadly-weapons]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार रात को संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे।
 ‘व्हाइट हाउस’ में रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद ट्रंप और अमेरिका के अन्य शीर्ष नेताओं को वहां से निकाला गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। </p><p>कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 अधिकारियों ने बताया कि 31 वर्षीय हमलावर कैलिफोर्निया से था, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है।
 घटना के बाद ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं को संबोधित किया और बताया कि संदिग्ध के पास कई हथियार थे। एक अधिकारी को गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई।</p><p>
ट्रंप ने कहा, ‘‘सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें संदिग्ध को सुरक्षा अवरोधक के पास भागते हुए और सीक्रेट सर्विस के एजेंट को उसकी ओर दौड़ते हुए देखा जा सकता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 09:25:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-big-revelation-on-the-white-house-firing-the-attacker-had-many-deadly-weapons</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[America Plane Crash: North Dakota की प्रतिनिधि Liz Conmy की मौत, उड़ान भरते ही आग का गोला बना विमान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/north-dakota-representative-liz-conmy-dies-plane-bursts-into-flames-as-soon-as-it-takes-off]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मिनियापोलिस के उत्तर में स्थित क्रिस्टल हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें नॉर्थ डकोटा की प्रांत प्रतिनिधि और विमान के पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीनेटर टिम मैथर्न ने स्थानीय अखबार ‘स्टार ट्रिब्यून’ से इस विमान हादसे में फार्गो निवासी प्रांत प्रतिनिधि लिज कॉन्मी की मौत की पुष्टि की।</p><p>
नॉर्थ डकोटा डेमोक्रेटिक–नॉनपार्टिजन लीग पार्टी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनकी मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि कॉन्मी सार्वजनिक शिक्षा, पर्यावरण और पारदर्शिता की सशक्त पैरोकार थीं।
पार्टी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। प्रतिनिधि लिज कॉन्मी का जाना हमारे प्रांत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
</p><p>ब्रुकलिन पार्क पुलिस निरीक्षक मैट राबे के अनुसार, शनिवार पूर्वाह्न 11 बजकर 51 मिनट पर विमान दुर्घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि मिनेसोटा के ब्रुकलिन पार्क शहर के एक पार्क में विमान गिरकर आग की लपटों में घिर गया था।
राबे ने बताया कि विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। </p><p>हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि विमान में कितने लोग सवार थे।
संघीय विमानन प्राधिकरण (एफएए) के अनुसार, विमान में कुल दो लोग सवार थे।
राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) ने पुष्टि की है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान बीच एफ33ए मॉडल का था। जांच दल जल्द घटनास्थल पर पहुंचेगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 09:21:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/north-dakota-representative-liz-conmy-dies-plane-bursts-into-flames-as-soon-as-it-takes-off</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[White House डिनर में चली गोलियां, मंच से निकाले गए President Trump; कार्यक्रम हुआ रद्द]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/shots-fired-at-white-house-dinner-president-trump-removed-from-stage-event-cancelled]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं के वार्षिक रात्रिभोज के दौरान गोलीबारी की घटना से मची अफ़रातफ़री के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य प्रमुख नेताओं को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला गया।
 प्रारंभिक तौर पर किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि एक अज्ञात हमलावर ने गोलीबारी की।
</p><p> अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 ‘व्हाइट हाउस’ संवाददाताओं के संघ की अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने कहा, ‘‘हम इसे फिर से आयोजित करेंगे।’’
 घटना के तुरंत बाद कर्मचारियों ने टेबल साज-सज्जा और राष्ट्रपति के भाषण मंच को हटाना शुरू कर दिया।</p><p>
 कथित घटना के बाद वॉशिंगटन हिल्टन के बैंक्वेट हॉल में सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों के अधिकारी बड़ी संख्या में पंहुचे, जहां सैकड़ों अतिथि “स्प्रिंग पी” और “बुराटा सलाद” का आनंद ले रहे थे। उन्हें अचानक टेबलों के नीचे छिपने को मजबूर होना पड़ा।
 जैसे ही लोगों को स्थिति का एहसास हुआ, बॉलरूम में दहशत फैल गई। सैकड़ों पत्रकार सूचनाएं साझा करने के लिए फोन पर जुट गए।
 किसी को चिल्लाते हुए सुना गया “हट जाइए, सर!” जबकि कुछ लोग निर्देश दे रहे थे कि “झुक जाइए।’’ एक कोने से “गॉड ब्लेस अमेरिका” की आवाजें भी सुनाई दीं।</p><p> इसी बीच ट्रंप को मंच से सुरक्षित बाहर ले जाया गया। इस दौरान वह क्षण भर के लिए, संभवतः ठोकर लगने से, लड़खड़ाए और सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया।
 एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने गोलीबारी की पुष्टि की। हालांकि विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा में रहने वाले सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
 एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि एक कानून-प्रवर्तन कर्मी को बुलेट-प्रूफ जैकेट पर गोली लगी, लेकिन उसके सुरक्षित रहने की उम्मीद है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 08:54:55 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/shots-fired-at-white-house-dinner-president-trump-removed-from-stage-event-cancelled</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US-Iran Peace Talks पर संकट के बादल, Tehran ने अमेरिकी दल से मिलने का प्रस्ताव ठुकराया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/tehran-rejects-proposal-to-meet-with-us-delegation]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं; नई रिपोर्टों से पता चलता है कि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान स्थित मीडिया संस्थान ARY News के चेयरमैन कामरान खान के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से होने वाली इस निर्धारित बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में, खान ने बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि बातचीत के दूसरे दौर की संभावनाएँ अब काफी कम हो गई हैं। उन्होंने कहा, "इस्लामाबाद में आज अमेरिका-ईरान बातचीत के दूसरे दौर के फिर से शुरू होने की संभावनाएँ तेज़ी से खत्म होती जा रही हैं, क्योंकि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है; इस प्रतिनिधिमंडल के आज देर रात वॉशिंगटन से यहाँ पहुँचने की उम्मीद थी।</div><div>खान ने आगे बताया कि ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' से जुड़ी एक कड़ी शर्त रखी है, जिसमें उसने ज़ोर देकर कहा है कि वाशिंगटन को सबसे पहले ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी। उनके पोस्ट में कहा गया है, ईरान लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि बातचीत का दूसरा दौर शुरू करने की शर्त के तौर पर अमेरिकी 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' पर अपनी नाकेबंदी खत्म करें।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-asim-munir" target="_blank">Iran-US Talks: ईरानी विदेश मंत्री ने Asim Munir से की मुलाकात, America के आगे झुकने से और सीधी बातचीत से तेहरान का साफ इंकार</a></h3><div>अमेरिका का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हरी झंडी का इंतज़ार कर रहा है</div><div>अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ की अगुवाई में, जिसमें वरिष्ठ सलाहकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं, अमेरिकी टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाली है। यह घटनाक्रम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने के बाद सामने आया है, जिससे शुरू में तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने की उम्मीदें जगी थीं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/will-indians-now-face-no-entry-in-the-us" target="_blank">अब US में भारतीयों की होगी No Entry?  H1B वीजा पर आए नए बिल ने बढ़ाई चिंता</a></h3><h2>इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था</h2><div>यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि पाकिस्तान की राजधानी में इस समय ऐसी सुरक्षा व्यवस्था लागू है जिसे 'दम घोंटने वाली' सुरक्षा व्यवस्था बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सड़कों को सील कर दिया गया है और अति-सुरक्षित 'रेड ज़ोन' को सुरक्षा के कड़े घेरे से घेर दिया गया है। बातचीत का पिछला दौर, जो 21 घंटे तक चला था, बिना किसी ठोस प्रगति के समाप्त हो गया था। उस बैठक की अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष एम.बी. ग़ालिबफ़ ने की थी।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 19:28:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/tehran-rejects-proposal-to-meet-with-us-delegation</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran-US Talks: ईरानी विदेश मंत्री ने Asim Munir से की मुलाकात, America के आगे झुकने से और सीधी बातचीत से तेहरान का साफ इंकार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-asim-munir]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के बीच बातचीत की नई कोशिशें शुरू हुई हैं, जिनमें पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद पहुंचकर पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की और तेहरान की मांगों तथा अमेरिका की शर्तों पर अपनी आपत्तियां स्पष्ट रूप से रखीं। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है और किसी भी समझौते में उसकी सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि रहेगी।</div><div><br></div><div>इसी बीच, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी पाकिस्तान पहुंच रहे हैं, जहां वह ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेंगे। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका के साथ आमने सामने बातचीत नहीं करेगा और अपनी बात पाकिस्तान के माध्यम से ही रखेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pm-netanyahu-concealed-cancer-diagnosis-to-avoid-iran-false-narrative" target="_blank">Iran के 'झूठे नैरेटिव' से बचने के लिए PM Netanyahu ने छिपाई Cancer की बात, अब किया खुलासा</a></h3><div>उधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इन वार्ताओं को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है, प्रमुख मार्ग बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पहले दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी, ऐसे में इस बार भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस्लामाबाद की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया है तथा उस ‘रेड जोन’ को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है जहां प्रमुख सरकारी भवन एवं राजनयिक मिशन स्थित हैं। पास के वाणिज्यिक क्षेत्र ‘ब्लू एरिया’ में बाजार सुनसान हैं, कैफे में आपूर्ति कम हो रही है और बस अड्डों की सेवाएं बंद होने के कारण सार्वजनिक परिवहन बाधित है जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोगों के लिए अनिश्चितता सबसे कठिन स्थिति है। हाल के सप्ताहों में यह दूसरा ‘लॉकडाउन’ है। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता के लिए इस्लामाबाद में पहले 11 अप्रैल को ‘लॉकडाउन’ किया गया था। वह वार्ता कोई समझौता हुए बिना समाप्त हो गई थी। इसके बाद शहर कुछ समय के लिए खुला, लेकिन पाकिस्तान द्वारा एक और दौर की बातचीत की मेजबानी की तैयारियां किए जाने के बीच पाबंदियां फिर लागू कर दी गईं। हालांकि, वार्ता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हम आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का और समय मिल सके। यह फैसला युद्धविराम की अवधि समाप्त होने से कुछ घंटे पहले किया गया।</div><div><br></div><div>दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के भीतर एकता की सराहना की है और कहा है कि दुश्मनों को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। सुरक्षा कारणों से वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आ रहे हैं और उनके निर्देश विशेष माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं।</div><div><br></div><div>उधर, मैदान में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपनी नौसेना को होरमुज जलडमरूमध्य में ईरानी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह जलमार्ग विश्व के तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, लेकिन युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। इसके अलावा, लेबनान में भी संघर्ष जारी है, जहां हिजबुल्लाह ने युद्धविराम बढ़ाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और एक इजराइल ड्रोन को मार गिराया। इसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के खियाम शहर में बमबारी की, जिसमें रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।</div><div><br></div><div>इसी बीच, खाड़ी क्षेत्र में भी अस्थिरता देखने को मिली है। कतर ने कुवैत पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। कतर ने इराक से ऐसे हमलों को रोकने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। वहीं ईरान ने आंतरिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। उसने एक व्यक्ति को इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दे दी है। यह कार्रवाई उन कई मामलों में से एक है, जिनमें हाल के महीनों में सख्ती बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।</div><div><br></div><div>युद्ध के बीच एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि ईरान ने लगभग दो महीने बाद तेहरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है। इससे यह उम्मीद जगी है कि स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो सकती है, हालांकि पूरी तरह स्थिरता अभी दूर है। तुर्की ने भी संकेत दिया है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होता है तो वह होरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने के काम में भाग ले सकता है। तुर्की ने इसे मानवीय जिम्मेदारी बताया है और बहुपक्षीय सहयोग की वकालत की है।</div><div><br></div><div>वहीं, ईरान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह इस युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है। ईरान का दावा है कि उसकी सैन्य ताकत ने अमेरिका को कठिन स्थिति में डाल दिया है।</div><div><br></div><div>कुल मिलाकर स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या यह संघर्ष और गहराता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाली इन महत्वपूर्ण वार्ताओं पर टिकी हुई हैं, जो इस संकट के भविष्य को दिशा दे सकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:36:28 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-asim-munir</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran के 'झूठे नैरेटिव' से बचने के लिए PM Netanyahu ने छिपाई Cancer की बात, अब किया खुलासा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pm-netanyahu-concealed-cancer-diagnosis-to-avoid-iran-false-narrative]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को बताया कि हाल ही में उनका प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण का इलाज हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सालाना मेडिकल रिकॉर्ड जारी करने में दो महीने की देरी इसलिए की, ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान ईरान उन बातों को न फैला सके, जिन्हें उन्होंने 'झूठा नैरेटिव' बताया। एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सेहत अब बहुत अच्छी है और प्रोस्टेट से जुड़ी एक छोटी-सी समस्या पूरी तरह से ठीक हो गई है। नेतान्याहू के अनुसार, एक साल से भी ज़्यादा समय पहले बढ़े हुए बिनाइन प्रोस्टेट की सफल सर्जरी करवाने के बाद से वे लगातार मेडिकल देखरेख में थे। हाल ही में हुए एक चेकअप के दौरान, डॉक्टरों ने एक बहुत छोटा सा धब्बा देखा, जिसका आकार एक सेंटीमीटर से भी कम था। आगे की जाँचों में पता चला कि यह बहुत ही शुरुआती स्टेज का मैलिग्नेंट ट्यूमर था, जो न तो फैला था और न ही उसमें मेटास्टेसिस के कोई लक्षण दिखे थे।</div><div>इज़रायली पीएम ने एक्स पर बताया, मैंने एक खास इलाज करवाया, जिससे यह समस्या पूरी तरह खत्म हो गई और इसका कोई निशान भी नहीं बचा। मैंने कुछ छोटे-मोटे इलाज करवाए, एक किताब पढ़ी और अपना काम जारी रखा। वह धब्बा पूरी तरह से गायब हो गया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-seizes-iranian-oil-tanker-amid-ceasefire" target="_blank">सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासा</a></h3><h2>डॉक्टरों ने विकल्प दिए, नेतन्याहू ने इलाज चुना</h2><div>मेडिकल विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि उनकी उम्र के पुरुषों में यह समस्या काफी आम है। उनके सामने दो विकल्प रखे गए। पहला विकल्प था ट्यूमर का इलाज न करवाना और नियमित निगरानी रखना, क्योंकि बहुत से लोग बिना किसी दखल के ऐसी समस्याओं को संभाल लेते हैं। दूसरा विकल्प था, इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए खास इलाज करवाना। इजरायली नेता ने कहा कि उन्होंने इलाज का विकल्प चुना ताकि यह पक्का हो सके कि ट्यूमर पूरी तरह से निकल जाए। आभार जताते हुए, उन्होंने यरुशलम के हदासाह अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उनकी देखभाल के लिए धन्यवाद दिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-war-2-a-terrifying-plan-it-will-be-difficult-for-the-us-to-escape" target="_blank">ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किल</a></h3><div>3 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने नेतन्याहू के ईरान युद्ध के प्रस्ताव को ठुकरा दिया</div><div>अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने खुलासा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले कई अमेरिकी नेताओं के सामने ईरान के साथ सैन्य संघर्ष का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन सभी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट' में शामिल होने के दौरान, केरी ने विस्तार से बताया कि पिछली सरकारों ने युद्ध के इस दबाव का विरोध कैसे किया। आंतरिक चर्चाओं के बारे में बात करते हुए, केरी ने कहा, "ओबामा ने मना कर दिया। बुश ने मना कर दिया। राष्ट्रपति बाइडेन ने मना कर दिया। मेरा मतलब है, मैं उन बातचीत का हिस्सा था।" पूर्व अधिकारी ने समझाया कि पिछले राष्ट्रपतियों ने तेहरान के साथ युद्ध में शामिल होने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने "शांतिपूर्ण प्रक्रिया के सभी उपायों को पूरी तरह से आज़माया नहीं था।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:30:58 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pm-netanyahu-concealed-cancer-diagnosis-to-avoid-iran-false-narrative</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अब US में भारतीयों की होगी No Entry?  H1B वीजा पर आए नए बिल ने बढ़ाई चिंता]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/will-indians-now-face-no-entry-in-the-us]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका में एक ऐसा बिल पेश हुआ है जो लाखों विदेशी प्रोफेशनल्स खासतौर पर भारतीयों के सपनों पर सीधा वार कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के दौर में इमीग्रेशन को लेकर सख्ती के बीच अब एच वन बी वीजा सिस्टम को पूरी तरह बदलने की तैयारी हो चुकी है। रिपब्लिकन नेता एलिक क्रेन ने एंड एच1 वीजा अब्यूज एक्ट 2026 पेश कर ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे अगर मंजूरी मिलती है तो अमेरिका में नौकरी करने का रास्ता पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। जो एच वन वीजा सिस्टम को जड़ से बदल सकते हैं। सबसे बड़ा झटका हर साल जारी होने वाले वीजा की संख्या 65,000 से घटाकर सिर्फ 25,000 करने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं अब तक चल रही लॉटरी सिस्टम को भी खत्म कर हाई सैलरी के आधार पर चयन की बात कही गई है। कंपनियों के लिए भी नियम बेहद सख्त होंगे। उन्हें साबित करना होगा कि उन्हें कोई अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला और उन्होंने हाल ही में किसी को नौकरी से नहीं निकाला। एच1वी कर्मचारियों के एक से ज्यादा नौकरी करने की अनुमति नहीं होगी और थर्ड पार्टी एजेंसियों के जरिए हायरिंग पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव एच1 बी वीजा धारकों को अपने परिवार को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/57-days-of-internet-blackout-nation-cut-off-from-world-following-us-israel-attacks" target="_blank">Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US-Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देश</a></h3><div>साथ ही इस वीजा को ग्रीन कार्ड में बदलने का रास्ता भी बंद करने की बात कही गई है। यानी यह वीजा पूरी तरह अस्थाई बन जाएगा। इमीग्रेशन एक्सपर्ट रोजमरी जेनेक्स का कहना है कि अगर एच वन वीजा कर्मचारियों को 3 साल बाद वापस भेजा जाएगा तो कंपनियों की लागत बढ़ेगी और वह मजबूर होकर अमेरिकी नागरिकों को ही नौकरी देंगे। इस विल को ब्रैंडन ग्रिल समेत कई रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन मिला है। जिन्होंने साफ कहा है कि अमेरिकी नौकरियों पर पहला हक अमेरिकियों का होना चाहिए ना कि विदेशी कर्मचारियों का। अगर यह विल पास होता है तो यह सिर्फ एक पॉलिसी बदलाव नहीं बल्कि अमेरिका में काम करने वाले सपने देखने वाले लाखों युवाओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।&nbsp;</div><div>H-1B वीज़ा प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियाँ विदेशी प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखने के लिए बड़े पैमाने पर करती हैं; इसमें भारतीय कर्मचारी—खास तौर पर टेक्नोलॉजी और मेडिकल के क्षेत्र में सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में से एक हैं। प्रस्तावित सुधारों में मौजूदा लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लाना शामिल है। इसके तहत, एम्प्लॉयर्स को यह प्रमाणित करना होगा कि कोई भी योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और हाल ही में कोई छँटनी नहीं हुई है। साथ ही, H-1B कर्मचारियों के एक से ज़्यादा नौकरियाँ करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और थर्ड-पार्टी स्टाफिंग फर्मों द्वारा उन्हें नौकरी पर रखने पर रोक लगाई जाएगी। अतिरिक्त प्रावधानों के तहत, संघीय एजेंसियों को गैर-प्रवासी कर्मचारियों को प्रायोजित करने या नौकरी पर रखने से रोका जाएगा, 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' प्रोग्राम को समाप्त कर दिया जाएगा, और H-1B वीज़ा धारकों को स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) में बदलने से रोका जाएगा—जिससे इन वीज़ाओं का अस्थायी स्वरूप और भी मज़बूत होगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/two-months-after-war-scare-with-us-israel-easing-in-iran" target="_blank">US-Israel से 'War' के दो महीने बाद Iran में नरमी, Tehran से Commercial Flights शुरू</a></h3><div>इस बिल में यह भी अनिवार्य किया गया है कि गैर-प्रवासी कर्मचारी किसी दूसरी वीज़ा श्रेणी में जाने से पहले संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ दें। क्रेन ने कहा कि इस उपाय से अमेरिकियों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, वीज़ा नियमों को और मज़बूत किया जाएगा, और घरेलू कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा, "संघीय सरकार को मेहनती नागरिकों के लिए काम करना चाहिए, न कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के मुनाफ़े के लिए। अमेरिकी लोगों के प्रति हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि हम इस दोषपूर्ण H-1B सिस्टम को उन्हें उन नौकरियों से वंचित करने से रोकें, जिनके लिए वे पूरी तरह योग्य हैं।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:18:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/will-indians-now-face-no-entry-in-the-us</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[US-Israel से 'War' के दो महीने बाद Iran में नरमी, Tehran से Commercial Flights शुरू]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/two-months-after-war-scare-with-us-israel-easing-in-iran]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान ने शनिवार को तेहरान के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानें फिर से शुरू कर दीं; अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष शुरू होने के लगभग दो महीने बाद यह पहली बार हुआ है। सरकारी टेलीविज़न ने बताया कि इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इस्तांबुल, मस्कट और मदीना के लिए उड़ानें रवाना हुईं। फ़्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म Flightradar24 ने बताया कि शनिवार सुबह इस्तांबुल के लिए कम से कम 3 उड़ानें रवाना हुईं। अमेरिका के साथ संघर्ष विराम के बाद, इस महीने की शुरुआत में ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से फिर से खोल दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म हो गई थी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/57-days-of-internet-blackout-nation-cut-off-from-world-following-us-israel-attacks" target="_blank">Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US-Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देश</a></h3><div>यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचने के बाद पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के साथ बातचीत के 2 दौर किए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखेगा, जबकि अमेरिकी दूतों के शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद थी। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि डोनाल्ड ट्रम्प तेहरान के साथ युद्धविराम वार्ता को फिर से शुरू करने के प्रयासों के तहत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजेंगे। हालांकि, अरघची के आगमन के तुरंत बाद, ईरान ने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ कोई भी बातचीत अप्रत्यक्ष रहेगी, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-war-secretary-controversial-statement-calls-iran-conflict-gift-to-the-world" target="_blank">US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया 'दुनिया के लिए Gift'</a></h3><div>यह राजनयिक प्रयास अनिश्चितकालीन युद्धविराम के बाद किया जा रहा है, जिसने अधिकांश लड़ाई को रोक दिया है, लेकिन वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित ऊर्जा शिपमेंट को बाधित करना जारी रखा है। ट्रम्प द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में युद्धविराम को बढ़ाने की घोषणा के बाद, पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए प्रयासरत है, जो इस्लामाबाद के कूटनीति के लिए अधिक समय के अनुरोध का जवाब था।</div><h2>पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल</h2><div>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को इस्लामाबाद में आसिम मुनीर से मुलाक़ात की। इस दौरान पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को बढ़ावा देने की अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है। ईरानी दूतावास द्वारा शेयर किए गए एक छोटे से वीडियो में दिखाया गया कि इस बैठक में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई और ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघद्दम भी मौजूद थे। दूतावास ने एक छोटे से कैप्शन में इस बैठक की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के विवरण का खुलासा नहीं किया। अराघची शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ बातचीत की। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, जिनमें मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृह मंत्री मोहसिन नकवी शामिल थे।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:00:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/two-months-after-war-scare-with-us-israel-easing-in-iran</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Turkey में भारतीय एजेंसियों की बड़ी कामयाबी, Dawood का करीबी Salim Dola इस्तांबुल से अरेस्ट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/dawood-close-associate-salim-dola-arrested-in-istanbul]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>एक अहम अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में, तुर्की के अधिकारियों ने इस्तांबुल में भारतीय ड्रग माफिया के कथित सरगना सलीम डोला को गिरफ्तार कर लिया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे वैश्विक ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता बताया है। माना जा रहा है कि डोला एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क का अहम खिलाड़ी है जो कई देशों में फैला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, डोला कई सालों से एक विशाल ड्रग सिंडिकेट चला रहा था, और बताया जाता है कि वह विदेशों से ही अपने ऑपरेशन्स को कंट्रोल करता था। कहा जाता है कि उसका नेटवर्क वैश्विक सिंथेटिक ड्रग्स के व्यापार से जुड़ा है, जिसकी सप्लाई चेन भारत समेत कई क्षेत्रों तक फैली हुई है।</div><div>जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि देश से बाहर रहते हुए भी वह भारत में ड्रग्स की सप्लाई के लिए एक बड़े चैनल को मैनेज करता था।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/why-did-turkey-suddenly-train-its-missiles-a-major-mobilization-against-israel" target="_blank">Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगान</a></h3><h2>अंडरवर्ल्ड से संबंधों को लेकर गंभीर चिंताएँ</h2><div>इस मामले का सबसे गंभीर पहलू डोला का दाऊद इब्राहिम से जुड़े अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के साथ कथित संबंध है। अधिकारियों का कहना है कि ये संबंध संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी के बीच एक गहरे गठजोड़ की ओर इशारा कर सकते हैं, जिस पर एजेंसियाँ पिछले कई सालों से नज़र रख रही हैं।</div><h2>मुंबई से दुबई तक का ऑपरेशन</h2><div>डोला मूल रूप से मुंबई में सक्रिय था, जिसके बाद उसने कथित तौर पर अपना ठिकाना दुबई में बना लिया और वहीं से अपने ऑपरेशन चलाता रहा। पिछले कुछ महीनों में, भारतीय एजेंसियों ने उसके नेटवर्क के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। साल 2025 में मुंबई पुलिस ने इस कार्रवाई के तहत उसके कई करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया और उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी हिरासत में लिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/why-does-the-man-proposing-to-trump-wife-want-a-turkish-bride" target="_blank">Trump की पत्नी को प्रपोज करने वाले को टर्किश दुल्हन क्यों चाहिए? मेलोनी को भी भेजा शादी का ऑफर</a></h3><h2>रेड कॉर्नर नोटिस और इनाम जारी</h2><div>नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पहले डोला के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की थी। अब उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से जांचकर्ताओं को इस बड़े नेटवर्क के बारे में अहम जानकारियां जुटाने में मदद मिलेगी। गिरफ्तारी के बावजूद, डोला को भारत वापस लाना आसान नहीं हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि तुर्की से उसका प्रत्यर्पण कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/dawood-close-associate-salim-dola-arrested-in-istanbul</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pakistan Economic Crisis: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, सफर हुआ महंगा, अब जनता की जेब पर डाका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/petrol-and-diesel-prices-rise-travel-becomes-expensive]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पेट्रोलियम की कीमतों में ताज़ा बढ़ोतरी ने पूरे पाकिस्तान में ट्रांसपोर्ट के किराए बढ़ा दिए हैं, जिससे उन यात्रियों पर और बोझ पड़ गया है जो पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं। समा टीवी के मुताबिक, लाहौर में रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के बीच हुई बातचीत के बाद किराए में 3 से 4 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की गई है। ट्रांसपोर्ट हाउस में हुई इस बैठक में RTA के सेक्रेटरी राणा मोहसिन ने ट्रांसपोर्टरों के साथ बातचीत की; ट्रांसपोर्टरों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण शुरू में किराए में ज़्यादा बढ़ोतरी की मांग की थी। अधिकारियों ने किराए में सिर्फ़ सीमित बढ़ोतरी की अनुमति दी और बिना अनुमति के किराया बढ़ाने वालों को चेतावनी भी दी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-war-secretary-controversial-statement-calls-iran-conflict-gift-to-the-world" target="_blank">US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया 'दुनिया के लिए Gift'</a></h3><div>राणा मोहसिन ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी ट्रांसपोर्टर को तय सीमा से ज़्यादा किराया वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस बात की पुष्टि की कि किराए की नई सूची तुरंत लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम की कीमतों में 7 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से यह बदलाव करना पड़ा। रेगुलेटरी सीमाओं के बावजूद, यात्रियों को अभी भी इसका बोझ उठाना पड़ रहा है। खबरों के मुताबिक, पब्लिक ट्रांसपोर्ट चलाने वालों ने कुछ मामलों में किराया करीब 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जिससे रोज़ाना और शहरों के बीच (इंटर-सिटी) सफ़र का खर्च और बढ़ गया है। यात्रियों ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि बार-बार किराया बढ़ने से सफ़र करना अब और भी ज़्यादा महंगा होता जा रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-faces-the-double-blow-of-climate-change-and-inflation" target="_blank">Pakistan पर Climate Change और महंगाई की दोहरी मार, लाखों लोग गंभीर Food Crisis से जूझ रहे।</a></h3><div>शहरों के बीच चलने वाले रूटों पर किराए में काफ़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। लाहौर से रावलपिंडी का किराया बढ़कर PKR 2,340 हो गया है, जबकि पेशावर तक सफ़र करने का खर्च अब PKR 3,100 हो गया है। इसी तरह, फ़ैसलाबाद और सरगोधा का किराया बढ़कर PKR 1,260 हो गया है, और लाहौर-कराची रूट का किराया भी काफ़ी बढ़ोतरी के बाद अब PKR 9,720 हो गया है। इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ़ यात्री ट्रांसपोर्ट तक ही सीमित नहीं है। माल ढोने वाले वाहनों और मिनी मज़्दा चलाने वालों ने भी डीज़ल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए अपने किराए में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट अलायंस ने किराए में 10 प्रतिशत की और भी बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अलायंस के प्रेसिडेंट मलिक शहज़ाद अवान ने सरकार की ईंधन मूल्य निर्धारण नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा PKR 80,000 की सब्सिडी काफ़ी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशनल खर्चों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और हर ट्रिप पर खर्च PKR 200,000 तक बढ़ गया है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:43:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/petrol-and-diesel-prices-rise-travel-becomes-expensive</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US-Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/57-days-of-internet-blackout-nation-cut-off-from-world-following-us-israel-attacks]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, ईरान के नागरिकों को पिछले 57 दिनों से लगातार इंटरनेट ब्लैकआउट का सामना करना पड़ रहा है। यह ठीक आठ हफ़्ते पूरे होने का संकेत है, जब से ईरानी शासन ने देश की डिजिटल पहुँच पूरी तरह से काट दी थी। इस शनिवार को स्थिति पर रिपोर्ट करते हुए, संस्था ने इस पाबंदी के गंभीर असर को उजागर किया। उसने कहा कि यह रुकावट, जो अब 1344 घंटों के बाद अपने 57वें दिन में प्रवेश कर रही है, ईरानियों की आवाज़ को दबा देती है, दोस्तों और परिवार को एक-दूसरे से संपर्क से काट देती है, और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-army-chief-munir" target="_blank">US-Iran तनाव के बीच Pakistan बना नया 'अखाड़ा'? Army Chief मुनीर से मिले ईरानी विदेश मंत्री</a></h3><div>यह पूरी तरह से ब्लैकआउट 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के तुरंत बाद लागू किया गया था। इस लंबे समय तक चले शटडाउन ने क्षेत्रीय अस्थिरता के एक महत्वपूर्ण दौर में ईरानी आबादी को वैश्विक समुदाय से अलग-थलग कर दिया है।</div><div>इस महीने की शुरुआत में NetBlocks ने इस चल रहे संकट को "किसी भी देश में अब तक का सबसे लंबा, पूरे देश के स्तर पर इंटरनेट शटडाउन" बताया था। इस रुकावट का पैमाना, जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए राज्य द्वारा पहले किए गए प्रयासों से कहीं अधिक बड़ा है। यह मौजूदा पाबंदी, जनवरी में ईरानी सरकार द्वारा लगाए गए एक अलग इंटरनेट और संचार ब्लैकआउट के बाद आई है। आरोप है कि इस ब्लैकआउट का इस्तेमाल, लगभग 47 साल पहले इस्लामिक गणराज्य की स्थापना के बाद से अपने ही नागरिकों पर राज्य की सबसे घातक कार्रवाई के सबूतों को छिपाने के लिए किया गया था।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-pays-a-heavy-price-for-calling-india-and-china-hell-major-nations-outraged" target="_blank">भारत-चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!</a></h3><div>इस घरेलू अलगाव के बीच, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका के साथ "गहरे होते कूटनीतिक गतिरोध" के बीच एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी राजधानी पहुंचा था। यह उच्च-स्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब शहर अभी भी "दम घोंटने वाले सुरक्षा लॉकडाउन" के घेरे में है; अधिकारियों ने शहर की मुख्य सड़कों को सील कर दिया है और अत्यधिक सुरक्षा वाले 'रेड ज़ोन' को "सख्त घेराबंदी" के तहत रखा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-war-secretary-controversial-statement-calls-iran-conflict-gift-to-the-world" target="_blank">US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया 'दुनिया के लिए Gift'</a></h3><div>एक अलग कूटनीतिक कार्यक्रम में उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें "इस्लामाबाद में अपने भाई, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का स्वागत और सत्कार करके" खुशी हुई। उन्होंने आगे कहा कि वह "क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारी सार्थक वार्ताओं की प्रतीक्षा करेंगे। इस यात्रा का समय विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की थी कि दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी ईरान के साथ संभावित बातचीत के लिए इस क्षेत्र का दौरा करेंगे। हालांकि, तेहरान अपने विरोध पर अडिग रहा है, और उसने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका के साथ कोई बैठक नहीं करेगा।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:40:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/57-days-of-internet-blackout-nation-cut-off-from-world-following-us-israel-attacks</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Australia का बड़ा बयान: India से दोस्ती 'सर्वोच्च स्तर' पर, क्वाड ने दी नई मजबूती]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/australia-major-statement-friendship-with-india-at-highest-level]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों के सबसे ऊंचे मुकाम पर हैं। एएनआई से बात करते हुए ग्रीन ने कहा कि दोनों देश QUAD के ज़रिए रणनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और द्विपक्षीय स्तर पर इंडो-पैसिफिक के लिए उनका एक साझा विज़न है। हम अपने द्विपक्षीय संबंधों के सबसे ऊंचे मुकाम पर हैं... हम QUAD के ज़रिए रणनीतिक रूप से एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और द्विपक्षीय स्तर पर इंडो-पैसिफिक के लिए हमारा एक साझा विज़न है। हमारी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और बहुत मज़बूत हैं... हमारे संबंधों का दूसरा पहलू वह है जिसे हम 'ह्यूमन ब्रिज' (मानवीय सेतु) कहते हैं। दस लाख से ज़्यादा लोग, जो ऑस्ट्रेलिया को अपना घर मानते हैं, हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।</div><div>भारत में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस स्टाफ के प्रमुख ब्रिगेडियर डेमियन हिल ने भी ग्रीन की बात का समर्थन करते हुए कहा कि हमारे संबंध बहुत पुराने हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/amidst-the-turmoil-in-the-strait-of-hormuz-south-korean-president-meets-modi" target="_blank">होर्मुज की उथल-पुथल के बीच अचानक मोदी से मिले कोरियाई राष्ट्रपति, चीन की उल्टी गिनती शुरू?</a></h3><div> हमारी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) को करीब 4 साल हो चुके हैं, लेकिन हमारे संबंध उससे कहीं ज़्यादा गहरे और पुराने हैं। जैसे-जैसे मध्य पूर्व की स्थिति दुनिया की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव ला रही है, ग्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने तनाव कम करने की अपील की है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार होर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील कर रही है। इससे पूरी दुनिया में हलचल और झटके महसूस हो रहे हैं। इसका असर ऑस्ट्रेलिया में भी महसूस हो रहा है; और यहाँ भारत में भी। हमारे लिए बातचीत की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है, और जितनी जल्दी संबंधित पक्ष किसी नतीजे पर पहुँचकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सामान्य आवाजाही फिर से शुरू कर पाएंगे, उतना ही हम सभी के लिए बेहतर होगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/biden-stood-firm-for-modi-india-not-us-was-key-force-behind-the-quad" target="_blank">मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा</a></h3><div>हिल ने एएनआई को बताया कि हम तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हम एक ऐसे शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं, जो हम सभी को शांति से रहने में सक्षम बनाए... हम इस क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं, क्योंकि यह पूरी दुनिया के सर्वोत्तम हित में है कि हम एक शांतिपूर्ण समुदाय के रूप में रहें; और वास्तव में इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसका असर केवल एशिया या मध्य पूर्व में रहने वाले लोगों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर हर किसी को प्रभावित करता है। इससे पहले 18 अप्रैल को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की थी; उन्होंने मौजूदा संघर्ष के बीच इस समुद्री मार्ग को टोल-मुक्त और निजीकरण से मुक्त रखने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया था।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:21:30 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/australia-major-statement-friendship-with-india-at-highest-level</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pakistan पर Climate Change और महंगाई की दोहरी मार, लाखों लोग गंभीर Food Crisis से जूझ रहे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-faces-the-double-blow-of-climate-change-and-inflation]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में से एक बना हुआ है जहाँ खाने की सबसे ज़्यादा कमी है; यहाँ लाखों लोग बुनियादी पोषण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 'खाद्य संकट पर 2026 की वैश्विक रिपोर्ट' में पाकिस्तान को उन दस देशों में शामिल किया गया है जहाँ भुखमरी सबसे ज़्यादा गंभीर है। इस सूची में अफगानिस्तान, सूडान और यमन जैसे देश भी शामिल हैं। डॉन के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में लगभग 1.1 करोड़ लोगों को खाने की गंभीर कमी का सामना करना पड़ा। इनमें से लगभग 93 लाख लोगों को "संकट" (crisis) की स्थिति में रखा गया था। वहीं, 17 लाख लोग और भी ज़्यादा गंभीर आपातकाल श्रेणी में आ गए थे, जो 'एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण' पैमाने पर अकाल से ठीक एक स्तर नीचे है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक कमज़ोरी और लगातार बढ़ रही जलवायु घटनाओं के मेल से पाकिस्तान में खाने की कमी की समस्या बढ़ रही है। पिछले साल मॉनसून की भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने 60 लाख से ज़्यादा लोगों को प्रभावित किया; इससे कमज़ोर इलाकों में फसलें बर्बाद हो गईं और बुनियादी ढांचा भी तबाह हो गया।</div><div>हालांकि देश में सबसे गंभीर भूख की श्रेणी में आने वाले लोगों की संख्या में कमी आने से थोड़ी सुधार देखने को मिला है, लेकिन यह सुधार अभी भी पक्का नहीं है। बढ़ती महंगाई, जिसके 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, और लगातार बढ़ रहे पर्यावरणीय दबाव के कारण अब तक हुई प्रगति के उलट जाने का खतरा बना हुआ है।</div><div>रिपोर्ट में पोषण से जुड़ी गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया गया है, खासकर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में। हालांकि, पाकिस्तान के पास कुपोषण की गंभीरता का औपचारिक रूप से आकलन करने के लिए ताज़ा डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे यह उन देशों की श्रेणी में आ जाता है जहां पोषण का वर्गीकरण अधूरा है।</div><div>इसके बावजूद, खराब स्वास्थ्य सेवाओं, असुरक्षित पानी और अपर्याप्त भोजन से जुड़े ढांचागत जोखिम अभी भी बने हुए हैं। पाकिस्तान विस्थापित लोगों, खासकर अफगान शरणार्थियों को पनाह देने वाले प्रमुख देशों में से एक है; जैसा कि 'डॉन' अखबार ने बताया है, इससे पहले से ही सीमित संसाधनों पर और भी ज़्यादा दबाव पड़ रहा है। खास बात यह है कि रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि खाद्य असुरक्षा में जो बढ़ोतरी दिख रही है, उसकी एक वजह डेटा कवरेज का बढ़ना भी है। इस आकलन में अब 68 ज़िले शामिल हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 43 थी; इससे आबादी का कवरेज 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया है। इस व्यापक दायरे की वजह से विश्लेषण में ज़्यादा प्रभावित आबादी शामिल हो गई है, जिससे साल-दर-साल तुलना करना मुश्किल हो गया है, जैसा कि 'डॉन' ने रिपोर्ट किया है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-faces-the-double-blow-of-climate-change-and-inflation</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया 'दुनिया के लिए Gift']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-war-secretary-controversial-statement-calls-iran-conflict-gift-to-the-world]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान में चल रहे संघर्ष को "दुनिया के लिए एक तोहफ़ा" बताया है, और ज़ोर देकर कहा है कि ईरान के समुद्री यातायात पर अमेरिकी नाकेबंदी "जब तक ज़रूरी होगी, तब तक" जारी रहेगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पेंटागन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, हेगसेथ ने कहा कि नौसैनिक प्रतिबंध उस "साहसी और खतरनाक" मिशन को पूरा करने के लिए ज़रूरी हैं, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए ईरान से होने वाले कथित खतरे को खत्म करना है। जहाँ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाकेबंदी के ज़रिए 34 जहाज़ों को सफलतापूर्वक रोका गया है, वहीं समुद्री निगरानी डेटा से पता चलता है कि तेहरान प्रतिबंधित तेल का निर्यात करने के लिए इन उपायों से बचने के तरीके लगातार ढूँढ़ रहा है।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-supreme-leader-mojtaba-khamenei-secret-about-human-chain" target="_blank">Iran के Supreme Leader Mojtaba Khamenei का 'Human Chain' वाला राज, Tracking से बचने की अनोखी तरकीब</a></h3><div>Lloyd's List Intelligence के अनुसार, फ़ारस की खाड़ी से गुज़रते हुए "छाया बेड़े (shadow fleet) के यातायात का एक लगातार प्रवाह" देखा गया है। इसमें ईरान का माल ले जाने वाले 11 टैंकर शामिल हैं, जिनके बारे में बताया गया है कि वे 13 अप्रैल से अब तक जलडमरूमध्य के बाहर, ओमान की खाड़ी से रवाना हुए हैं। अमेरिकी रुख के जवाब में, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर 'प्रेस टीवी' ने रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रेज़ा तलाई-निक के हवाले से कहा कि उन्होंने चेतावनी दी है कि "हमारी मिसाइल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। जनरल ने आगे दावा किया कि संघर्ष विराम से ठीक पहले तक "सशस्त्र बलों का कब्ज़े वाले इलाकों के आसमान पर पूरा नियंत्रण था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">तलाई-निक ने देश के भीतर की मज़बूती पर भी ज़ोर दिया और लड़ाई खत्म होने के बाद भी लोगों के लगातार मिल रहे समर्थन को एक सामाजिक चमत्कार बताया। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने 'बलिदान' अभियान में अपना नाम दर्ज कराया और इसे दुनिया में लोगों को एकजुट करने का एक बेमिसाल उदाहरण बताया।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-pays-a-heavy-price-for-calling-india-and-china-hell-major-nations-outraged" target="_blank">भारत-चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!</a></h3><div>अमेरिकी रणनीति को सीधे चुनौती देते हुए, प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि दुश्मन का इरादा देश के भीतर अराजकता फैलाना था। हालाँकि, उन्होंने कहा कि लोगों की सतर्कता और सुरक्षा एजेंसियों के आपसी तालमेल की वजह से देश "सुरक्षित, स्थिर और एकजुट स्थिति" में बना हुआ है।</div><div>ब्रिगेडियर जनरल ने आगे कहा कि "होरमुज़ जलडमरूमध्य ईरान के समझदार और मज़बूत प्रबंधन के तहत है" और यह "ईरानी राष्ट्र की मांगों को पूरा करने के लिए एक नियंत्रण का ज़रिया" बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ओमान सागर में मौजूद पश्चिमी ताकतों को "सशस्त्र बलों के निर्णायक जवाब के सामने बार-बार पीछे हटना पड़ा है। ईरानी सेना का यह चुनौती भरा संदेश ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका स्थित थिंक टैंक 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर' (ISW) के एक नए आकलन से ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद होने का पता चला है। ISW की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी और उनके "करीबी लोगों" ने संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ और अन्य "व्यावहारिक" अधिकारियों की उन कोशिशों को "बार-बार रोका है," जिनका मकसद ईरानी शासन को "बातचीत के लिए ज़्यादा लचीला रुख अपनाने" की दिशा में आगे बढ़ाना था।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:13:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-war-secretary-controversial-statement-calls-iran-conflict-gift-to-the-world</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[भारत-चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/trump-pays-a-heavy-price-for-calling-india-and-china-hell-major-nations-outraged]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर विवादित बयान दिया और भारत विरोधी अपनी मानसिकता और अपनी सोच का सबूत पेश किया। 22 अप्रैल 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया जिसमें अमेरिका के एक रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पडकास्ट की टिप्पणियां थी। इस पोस्ट में भारत और चीन को हेलहोल यानी नरक बताया गया। भारतीय और चीनी मूल के प्रवासियों को लैपटॉप वाले गैंगस्टर कहकर संबोधित किया गया। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन जैसे देशों से आए प्रवासियों ने अमेरिका को माफिया परिवारों से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाया।&nbsp;</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-administration-concession-on-iran-and-russia-oil-ends-blockade-of-hormuz-will-continue" target="_blank">Donald Trump प्रशासन का बड़ा फैसला! ईरान और रूस के तेल पर 'छूट' खत्म, होर्मुज़ की नाकाबंदी रहेगी जारी</a></h3><div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारत ने दो टूक जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ट्रंप की टिप्पणियां स्पष्ट रूप से अज्ञानतापूर्ण अनुचित अस्वीकार हैं। तथ्य और वास्तविकता से परे हैं। लेकिन अपनी मूर्खता का परिचय देने वाले ट्रंप को सबसे तगड़ा जवाब ईरान ने दिया। ईरान ने भारत की तारीफ की और कहा कि शायद किसी को ट्रंप के लिए एक वन वे कल्चरल डिटॉक्स बुक कर देना चाहिए जिससे उनकी बिना मतलब की बयानबाजी कम हो सके। साथ ही लिखा गया कि कभी भारत आकर देखो। फिर बोलना भारत को नर्क बताने वाले ट्रंप को हैदराबाद में ईरानी कंसुलेट ने भी आईना दिखाया।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-war-2-a-terrifying-plan-it-will-be-difficult-for-the-us-to-escape" target="_blank">ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किल</a></h3><div>सोशल मीडिया पर लिखा कि हम रोटी और रेस्पेक्ट में भरोसा करते हैं। लेकिन जैसे ही साउथ इंडिया में कदम रखा भाई वो तो एकदम अलग ही लीक है। जैसे भारत ने अपना हेवन मूड अनलॉक कर लिया हो। यकीन मानो वो और भी खूबसूरत [संगीत] है। ईरान ना सिर्फ भारत की तारीफ कर रहा है बल्कि ट्रंप के मुंह पर तमाचा भी जड़ रहा है। दुनिया भर में जब ट्रंप की आलोचना होने लगी तब ट्रंप को होश आया। तुरंत उन्होंने अपनी गलती सुधारी। भारत को लेकर दिए विवादित बयान पर सफाई दी। गलती का एहसास करते हुए ट्रंप ने लिखा भारत एक महान देश है जिसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है। अच्छा हुआ ट्रंप को अपनी गलती का एहसास हो गया लेकिन ट्रंप को भूलना नहीं चाहिए। जिस भारत को वह नर्क बता रहे हैं, उसी देश के नागरिक अमेरिका की समृद्धि में अपना योगदान दे रहे हैं। अमेरिका की जीडीपी का सबसे ज्यादा हिस्सा यानी लगभग 10% टैक्स सेक्टर से आता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/how-did-a-single-decision-in-bengal-change-everything" target="_blank">3 करोड़ 34 लाख लोग बाहर निकले, बंगाल में एक फैसले ने कैसे सब बदल दिया?</a></h3><div>सत्य नडेला माइक्रोसॉफ्ट चलाते हैं। सुंदर पिचई Google को लीड करते हैं। अरविंद कृष्णा आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ हैं। आज अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में करीब 20 कंपनियां भारतीय मूल के सीईओ चला रहे हैं। लेकिन लगता है कि डोन्ड ट्रंप की सोच दूषित हो गई है। उनको यह तक समझ में नहीं आ रहा क्या अमेरिका के हित में है और किस चीज से अमेरिका की तरक्की रुक सकती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:03:21 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/trump-pays-a-heavy-price-for-calling-india-and-china-hell-major-nations-outraged</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran के Supreme Leader Mojtaba Khamenei का 'Human Chain' वाला राज, Tracking से बचने की अनोखी तरकीब]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-supreme-leader-mojtaba-khamenei-secret-about-human-chain]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में अपने पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद नेतृत्व संभालने के बाद से ही सार्वजनिक नज़र से काफी हद तक दूर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें एक ईरानी अधिकारी का हवाला दिया गया है, नए नेता की कोई भी वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी नहीं की गई है। इसके बजाय, उनके निर्देश विशेष रूप से सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से साझा किए जाते हैं या सरकारी टेलीविज़न पर पढ़कर सुनाए जाते हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मोजतबा जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि वह अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कमज़ोर या असहाय नहीं दिखना चाहते।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/did-trump-sever-one-of-mojtaba-khamenei-legs" target="_blank">Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा</a></h3><div>सुप्रीम लीडर की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर तक पहुँच गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ कमांडर और सरकार के उच्च-रैंकिंग अधिकारी उनसे मिलने से परहेज़ करते हैं, इस डर से कि इज़राइल उनकी गतिविधियों के ज़रिए उनके ठिकाने का पता लगा सकता है और उनकी हत्या की साज़िश रच सकता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अमेरिका और इज़राइल द्वारा की जाने वाली अत्याधुनिक ट्रैकिंग से बचने के लिए, रिपोर्ट में एक साधारण लेकिन सुरक्षित संचार प्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है। मोजतबा के लिए भेजे जाने वाले संदेश हाथ से लिखे जाते हैं, लिफाफों में बंद किए जाते हैं और भरोसेमंद संदेशवाहकों की एक 'मानव श्रृंखला' के ज़रिए आगे बढ़ाए जाते हैं। बताया जाता है कि ये संदेशवाहक उनकी "छिपी हुई जगह" तक पहुँचने के लिए मोटरसाइकिलों और कारों में राजमार्गों और ग्रामीण इलाकों की पिछली सड़कों से गुज़रते हैं, और उनके जवाब भी उसी सुरक्षित मार्ग से वापस आते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा उद्धृत अधिकारी ने आगे बताया कि, हालांकि शीर्ष नेता इन हमलों में "गंभीर रूप से" घायल हो गए थे, फिर भी वे "मानसिक रूप से पूरी तरह सचेत और सक्रिय" बने हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन हमलों से "उनके चेहरे को नुकसान पहुंचा है" और उन्हें "प्लास्टिक सर्जरी" की आवश्यकता पड़ गई है।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/face-burned-hair-lost-unable-to-open-his-mouth-iran-new-supreme-leader-is-in-a-dire-condition" target="_blank">चेहरा जल गया, बाल उड़ गये, मुंह खुल नहीं रहा... ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बहुत बुरी स्थिति,  प्लास्टिक सर्जरी की तैयारी</a></h3><div>रिपोर्ट में दिए गए मेडिकल विवरणों से संकेत मिलता है कि मोजतबा की चोटें काफी गंभीर और व्यापक हैं। बताया गया है कि उनके एक पैर की तीन बार सर्जरी हो चुकी है और अब वह कृत्रिम पैर लगने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनके घायल हाथ के बारे में कहा जा रहा है कि वह "धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता वापस पा रहा है।" इसके अलावा, उनके "चेहरे और होठों" पर लगी चोटों के कारण कथित तौर पर "उन्हें बोलने में भी कठिनाई हो रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान जो स्वयं एक प्रशिक्षित हृदय सर्जन हैं—और देश के स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ही सीधे तौर पर "उनकी देखभाल में शामिल रहे हैं।" बताया गया है कि यह नेता अपने किसी अज्ञात स्थान पर "ज्यादातर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से घिरे रहते हैं।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/silent-coup-in-iran-irgc-seizes-control-of-diplomacy-mojtaba-khamenei--emerge-new-power-centers" target="_blank">Iran में 'साइलेंट तख्तापलट'? कूटनीति पर IRGC का कब्जा, मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने नए पावर सेंटर</a></h3><div>उनके स्वास्थ्य से जुड़े इन दावों के जवाब में सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के एक्स अकाउंट पर की गई एक पोस्ट में दुश्मन के मीडिया अभियानों की कड़ी आलोचना की गई। इस पोस्ट में ऐसे रिपोर्टों पर आरोप लगाया गया कि वे, उन हमलों में लगी चोटों के विवरण सामने आने के बाद जिनमें अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी देश की एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">यह रिपोर्ट अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे एक अस्थिर संघर्ष-विराम के दौरान सामने आई है; यह संघर्ष-विराम मध्य-पूर्व में हुई भीषण लड़ाई के एक दौर के बाद लागू हुआ था। शत्रुता में आई इस रुकावट के बावजूद, होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा गतिरोध अभी भी बना हुआ है।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:52:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-supreme-leader-mojtaba-khamenei-secret-about-human-chain</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US-Iran तनाव के बीच Pakistan बना नया 'अखाड़ा'? Army Chief मुनीर से मिले ईरानी विदेश मंत्री]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-army-chief-munir]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका के साथ गहरे होते कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी राजधानी पहुंचा। यह उच्च-स्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब शहर में सुरक्षा के चलते कड़ा लॉकडाउन लगा हुआ है; अधिकारियों ने मुख्य सड़कों को सील कर दिया है और अत्यधिक सुरक्षा वाले 'रेड ज़ोन' को सख्त घेरे में ले लिया है। एक अलग कूटनीतिक कार्यक्रम में उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें इस्लामाबाद में अपने भाई, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का स्वागत करके और उनसे मिलकर खुशी हुई। उन्होंने आगे कहा कि वह "क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारी सार्थक चर्चाओं का बेसब्री से इंतजार करेंगे। इस यात्रा का समय विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की थी कि दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी ईरान के साथ संभावित बातचीत के लिए इस क्षेत्र का दौरा करेंगे।</div><div>हालांकि, तेहरान अपने विरोध पर अडिग रहा है, और उसने साफ कहा है कि वह अमेरिका के साथ कोई बैठक नहीं करेगा। इस कूटनीतिक गतिरोध ने इस्लामाबाद की "व्यापारिक रफ्तार" को लगभग ठप कर दिया है; 'ब्लू एरिया' के बाज़ार लगभग खाली पड़े हैं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। खबरों के अनुसार, स्थानीय निवासियों को ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कमी और लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण हो रहे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिबंधों की यह मौजूदा लहर 11-12 अप्रैल को हुई चर्चाओं के शुरुआती सत्र के दौरान लगाए गए इसी तरह के लॉकडाउन के बाद आई है, जो बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया था। इस्लामाबाद में चल रहा यह कूटनीतिक तनाव तीन मुख्य मुद्दों पर पूरी तरह से बने गतिरोध के कारण पैदा हुआ है: तेहरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं का भविष्य, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना, और लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान।</div><div>हालांकि व्हाइट हाउस ने इशारा किया है कि दूत आमने-सामने बातचीत के लिए तैयार हैं, तेहरान के सरकारी मीडिया ने इस दावे को खारिज कर दिया है, और ज़ोर देकर कहा है कि सीधी बातचीत "होने की उम्मीद नहीं है।"</div><div>इसके बावजूद, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कन्फर्म किया कि दो दूत अराघची के साथ बातचीत करने वाले हैं, उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह एक फायदेमंद बातचीत होगी और उम्मीद है कि यह डील की ओर आगे बढ़ेगी। उन्होंने आगे साफ किया कि हालांकि वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस साइट पर नहीं जाएंगे, लेकिन वह पूरी तरह से शामिल हैं। प्रोग्रेस की कमी पर बात करते हुए, US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि 21 घंटे की गहरी बातचीत" से पहले कोई कामयाबी नहीं मिली थी।</div><div>वेंस ने कहा कि उनका न्यूक्लियर प्रोग्राम और उनके पास पहले जो एनरिचमेंट फैसिलिटी थीं, उन्हें खत्म कर दिया गया है। लेकिन हमें और न्यूक्लियर हथियार न बनाने का कोई कमिटमेंट नहीं दिख रहा है। ये चर्चाएं 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देखी गई कुछ सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक बातचीत हैं। लेकिन, बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशें रुक गई हैं क्योंकि तेहरान बातचीत की टेबल पर लौटने से मना कर रहा है, जबकि US नेवल ब्लॉकेड उसके पोर्ट्स पर एक्टिव है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर "असल में ब्लॉकेड" लगा दिया है, जिससे ज़रूरी एनर्जी कॉरिडोर से समुद्री ट्रैफिक बहुत कम हो गया है और ग्लोबल मार्केट में अफरा-तफरी मच गई है। इस रुकावट के बीच, वॉशिंगटन मिडिल ईस्ट में अपनी मिलिट्री बिल्ड-अप जारी रखे हुए है, जिसमें USS जॉर्ज HW बुश भी शामिल है, जो इस इलाके में तैनात तीसरा US एयरक्राफ्ट कैरियर है। साथ ही, US ने इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ा दिया है, एक बड़ी चीनी ऑयल रिफाइनरी और ईरानी क्रूड ऑयल के ट्रांसपोर्ट से जुड़ी लगभग 40 शिपिंग फर्मों और टैंकरों पर नए बैन लगाए हैं।</div><div>फॉरेन ऑफिस के मुताबिक, "इस दौरे के दौरान, ईरानी फॉरेन मिनिस्टर पाकिस्तान के सीनियर लीडरशिप के साथ मीटिंग करेंगे ताकि लेटेस्ट रीजनल डेवलपमेंट्स के साथ-साथ रीजनल शांति और स्टेबिलिटी के लिए चल रही कोशिशों पर चर्चा की जा सके," जबकि कैपिटल अभी भी "सस्पेंडेड एनिमेशन" की हालत में है और अभी तक इस बात की कोई कन्फर्मेशन नहीं है कि नई बातचीत होगी या नहीं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:47:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iranian-foreign-minister-meets-army-chief-munir</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-seizes-chinese-arms-ship-sparks-uproar]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अब एक और नया मोड़ सामने आया। अमेरिका द्वारा जब्त किए गए एक ईरानी मालवाहक जहाज को लेकर अब चीन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सवाल यह है कि क्या वाकई चीन इस पूरे मामले में शामिल है या फिर यह सिर्फ एक भू राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल है। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना ने एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि इस जहाज पर मिसाइल निर्माण से जुड़ी खतरनाक रासायनिक सामग्री लदी हुई थी और यह जहाज ईरान जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जब जहाज को रोकने के लिए कहा गया तो उसने आदेश मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी नौसैनिक जहाज ने फायरिंग की और फिर मरीन कमांडो ने उस जहाज को कब्जे में ले लिया। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बयान आया है अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली की तरफ से।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/punishment-for-nato-will-trump-dismantle-europe-us-plan-leaked" target="_blank">NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीक</a></h3><div>उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था और इसमें मिसाइल वाली सामग्री थी। यह साफ सबूत है कि चीन ईरान की मदद कर रहा है। हेली का कहना है कि चीन लगातार ईरान के शासन को मजबूत करने में लगा हुआ है जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। अब इन आरोपों के बाद चीन ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गो जियाकुन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार यह एक विदेशी ध्वज वाला मालवाहक जहाज है। चीन का इससे कोई संबंध नहीं है। चीन ऐसे किसी भी निराधार आरोप का कड़ा विरोध करता है। यानी साफ है चीन इस मामले में खुद को पूरी तरह अलग बता रहा है। अब बात करें ईरान की तो उसने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/germany-hands-over-bahubali-to-india-modi-and-rajnath-masterstroke" target="_blank">जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरान</a></h3><div>ईरानी सेना ने अमेरिका की इस कारवाई को समुद्री डकैती करार दिया। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कारवाई का जवाब दिया जाएगा। इतना ही नहीं सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका ने ना केवल जहाज पर हमला किया बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नष्ट कर दिया। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका ने इस कारवाही के जरिए सीज फायर का उल्लंघन किया। ओमान सागर के जल क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों की बात उठाई। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को लेकर सख्त अपनाया। अगर चीन ईरान को हथियार या सैन्य सहायता देता है तो उस पर भारी टेरिफ यानी कि शुल्क लगाया जाएगा। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक जहाज का नहीं बल्कि अमेरिका, चीन, ईरान के बीच बढ़ती राजनीतिक टकराव का हिस्सा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:26:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-seizes-chinese-arms-ship-sparks-uproar</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-war-2-a-terrifying-plan-it-will-be-difficult-for-the-us-to-escape]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>युद्ध किसी भी वक्त छिड़ सकता है। ऐसी खबरें साफ तौर पर अब सामने आने लगी है। ईरान की तरफ लगातार अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट करियर बढ़ रहे हैं। हालांकि एयरक्राफ्ट करियर वही है जो पिछले युद्ध के दौरान यानी करीब 40 दिन की जो जंग अभी चल रही थी उसमें लौट गए थे। इनको काफी हद तक नुकसान ईरान ने पहुंचाया था। लेकिन इस बार जो दो युद्धपोत थे अब्राहम लिंकन इसके साथ-साथ जो दूसरा युद्धपोत था। तीसरा युद्ध को जॉर्ज बुश भी पहुंच चुका है। तीनों न्यूक्लियर पावर्ड है, एडवांस्ड है। लेकिन इस बीच एक और खबर निकल के सामने आती है कि जो चीन है, भारत है। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम, रूस, तुर्की और पाकिस्तान इन सभी देशों ने अपने नागरिकों को या फिर जो भी लोग अभी ईरान पहुंचे थे उन सभी को अर्जेंट वार्निंग दी है कि जल्द से जल्द आप लोग छोड़ के हट जाइए।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/oil-politics-or-conspiracy-of-destruction-biggest-blow-to-dragon-ahead-of-trump-visit-to-china" target="_blank">तेल की राजनीति या विनाश की साजिश? Donald Trump की China यात्रा से पहले ड्रैगन पर सबसे बड़ा प्रहार</a></h3><div>कहीं भी मौजूद है वापस लौटिए तुरंत लौटिए तो क्या वो वो दौर फिर से एक बार पास आने लगा है क्योंकि अमेरिका पर ईरान पहले से कह रहा था हमें भरोसा किसी तरीके से नहीं है और इस बीच एक और खबर निकल के सामने आती है कि अब्बास सराकची इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। उन्होंने ट्वीट भी किया इसके बाद मस्कट मॉस्को इन जगहों पे भी जाने वाले हैं। अभी जो 40 दिनों की जंग में जो कुछ हुआ वो अमेरिका के मुताबिक उसकी एक बड़ी हार है एक तरह की और एक तरह से उसे कुछ बढ़त नहीं मिल पाई बल्कि नुकसान हुआ। ऐसे में अमेरिका कुछ बड़ा नुकसान करके जाना चाहता है और यही वजह है कि वो एक कोशिश और कर सकते हैं। अब इसमें दो तरीके हैं। तो अमेरिका इजराइल फिर से हमला कर सकते हैं। बहुत तगड़ा हमला कर सकते हैं इस बार और एडवांस हथियारों के साथ या फिर ईरान इसको भांपते हुए प्रिवेंटिव स्ट्राइक कर सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-administration-concession-on-iran-and-russia-oil-ends-blockade-of-hormuz-will-continue" target="_blank">Donald Trump प्रशासन का बड़ा फैसला! ईरान और रूस के तेल पर 'छूट' खत्म, होर्मुज़ की नाकाबंदी रहेगी जारी</a></h3><div>ईरान की तरफ से तो ये सीज फायर हुआ नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि ईरान ही पहले हमला कर दे क्योंकि अभी भी इमाम आयतुल्ला अली खाम साहब का बदला पूरा नहीं हुआ है। उनके पास तो इस बात का का तर्क है। इस बात की दलील है हमला करने के पीछे का कारण है क्योंकि उनके सुप्रीम लीडर को मारा है 28 फरवरी को। तो ऐसे में ईरान के पास फिर हमला करने का कारण है तो वही हो सकता है पहले कर दे और उसकी तैयारियां चल रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:23:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-war-2-a-terrifying-plan-it-will-be-difficult-for-the-us-to-escape</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/biden-stood-firm-for-modi-india-not-us-was-key-force-behind-the-quad]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह क्वाड फिर चर्चा में है। अमेरिका के उप विदेश सचिव कर्ट एम कैंपबेल ने कहा है कि क्वाड की अहम ताकत भारत है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने पीएम मोदी को एक घंटे से ज्यादा समय तक मनाया था। कैंपबेल ने खुलासा किया, क्वाड में पर्दे के पीछे से अगुवाई करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया भी नहीं था। वह जापान भी नहीं था। वह भारत था। पूर्व राष्ट्रपति बाइडन को पीएम मोदी को राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर इस समूह में शामिल होने के लिए एक घंटे तक मनाया। पीएम मोदी हिचकिचा रहे थे। बाइडन के मनाने पर पीएम मोदी ने कहा कि ठीक है, लेकिन आप इस बारे में बार-बार समझाना बंद करें। बतौर मेजबान भारत को बीते साल ही क्वाड समिट की मेजबानी करनी थी। इस साल भी बैठक पर अभी संशय है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/punishment-for-nato-will-trump-dismantle-europe-us-plan-leaked" target="_blank">NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीक</a></h3><h2>अमेरिका ने चीन के खिलाफ भारत को गुप्त समर्थन दिया</h2><div>इस खुलासे से एक और अहम बात सामने आई है: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बढ़ गया था—अमेरिका ने भारत को बेहद संवेदनशील खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी। अमेरिका द्वारा दी गई यह रणनीतिक मदद, जिसका मकसद भारत को चीन की गतिविधियों पर करीब से नज़र रखने में सक्षम बनाना था, दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का प्रतीक मानी जाती है। भारत की इसी सक्रिय भागीदारी की बदौलत आज 'क्वाड' एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-denies-white-house-claim-says-no-direct-meeting-with-us-pakistan-will-mediate" target="_blank">White House के दावे से Iran का इनकार, कहा- US से सीधी बैठक नहीं, Pakistan करेगा मध्यस्थता।</a></h3><h2>आपसी सम्मान और बदलती राजनीति की आवश्यकता</h2><div>कैंपबेल ने भारत-अमेरिका संबंधों की मौजूदा स्थिति को लेकर कुछ चिंताजनक विचार भी व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच संबंध "आपसी सम्मान" के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि कभी-कभी हमें इस बुनियादी सिद्धांत की याद दिलाने की ज़रूरत पड़ती है। मौजूदा माहौल में—जब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप 'क्वाड' (Quad) से कुछ दूरी बना रहे हैं। इस समूह के भीतर भारत का महत्व और भी ज़्यादा ज़ोरदार ढंग से उभरकर सामने आ रहा है। कैंपबेल की टिप्पणियों से यह साफ़ हो गया कि भारत के बिना, यह समूह महज़ नाम का ही समूह बनकर रह जाता।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:04:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/biden-stood-firm-for-modi-india-not-us-was-key-force-behind-the-quad</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nepal politics crisis: बालेन शाह का खेल खत्म, नेपाल में तख्तापलट?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/balen-shah-game-over-a-coup-in-nepal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या नेपाल में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन होगा? क्या नेपाल में लोगों का प्रदर्शन यह कह रहा है कि हाल ही में बने बालेन शाह की सरकार मुश्किलों में है। मार्च 2026 में ही बालेन शाह की सरकार बनी लेकिन एक महीना भी पूरी तरह से नहीं बीता कि उनके खिलाफ देश भर में जन आक्रोश देखने को मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौर शुरू हो चुके हैं और विरोध के कई कारण हैं। छात्र संघ भी नाराज हैं। छात्र नाराज है। जिस जेन जेड आंदोलन के बाद बालेन शाह सत्ता में आए अब वही जेन जेड एक बार फिर आंदोलन के मूड में है। इसकी कई वजह हैं। विरोध के मुख्य कारणों में छात्र संघों का भंग कर देना एक बड़ा फैसला है। हाल ही में बालशाह ने एक और बड़ा फैसला लिया कि भारत से ₹100 से ज्यादा का सामान जो भी खरीद कर नेपाल के लोग ले जाएंगे तो उन्हें कड़े कस्टम नियमों का पालन करना होगा और साथ ही कस्टम ड्यूटी भी देनी होगी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/air-turns-toxic-in-kathmandu-becomes-world-second-most-polluted-city-with-an-aqi-of-247" target="_blank">Kathmandu में 'जहरीली' हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बना</a></h3><div>गृह मंत्री पर करप्शन के भी आरोप लगे हैं। नेपाल में सरकार के खिलाफ गुस्से में हैं लोग। कई वजह हैं। सीमा पार व्यापार पर सख्ती को लेकर सरकार को नाराजगी झेलनी पड़ रही है। बालेन शाह की सरकार ने यह फैसला लिया है कि भारत से 100 नेपाली रुपए से अधिक की कोई वस्तु अगर कोई व्यक्ति ले जाता है तो उसे कड़े टैक्स नियमों का पालन करना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी रोष है। छात्र संघों को भंग कर दिया उन्होंने। सरकार द्वारा छात्र संगठनों को खारिज करने के फैसले से छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं गृह मंत्री पर भी उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। गृह मंत्री सुदन गुरंग पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। अवैध संपत्ति के गंभीर आरोप लगे हैं। जिससे सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं। यह छात्रों की ओर से नेपाल के नागरिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है इस मसले पर।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/air-turns-toxic-in-kathmandu-becomes-world-second-most-polluted-city-with-an-aqi-of-247" target="_blank">Kathmandu में 'जहरीली' हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बना</a></h3><h2>आखिर नेपाल के लोग सड़कों पर क्यों उतर आए हैं</h2><div>उस सरकार के खिलाफ जो 1 महीने पहले ही लगभग बनी है। एक बड़े आंदोलन के बाद बालन शाह सत्ता में आए हैं। नेपाल की जनता ने उन्हें सत्ता सौंपी है। लेकिन उन्हीं बालन शाह के फैसलों से अब नेपाल की जनता नाराज दिख रही है। खासकर जेंस जिस आंदोलन की वजह से उनकी सरकार बनी वही आंदोलन एक बार फिर से उभरता हुआ दिख रहा है नेपाल की सड़कों पर। नेपाल में राजधानी से लेकर दूसरे शहरों में सड़क के अंदर प्रदर्शन हो रहा है तो सदन के अंदर भी प्रदर्शन हो रहा है। सड़क से लेकर सदन तक मौजूदा सरकार का विरोध हो रहा है। कौन-कौन से बड़े फैसले हैं जिसकी वजह से सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:19:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/balen-shah-game-over-a-coup-in-nepal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/russia-sells-massive-22000-kilograms-of-gold]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन रूस, यूक्रेन वॉर अब अपने पांचवें साल में पहुंचने वाली है और इसका असर सिर्फ युद्ध भूमि तक सीमित नहीं है। इसका असर सीधा अब रूस की अर्थव्यवस्था और खासकर उसके खजाने पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया ने साल 2026 की शुरुआत में अब तक करीब 22,000 किलोग्राम यानी कि 21.8 टन सोना बाजार में बेच दिया है। इसकी कीमत करीब ₹33,440 करोड़ बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर पुतिन को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? बता दें रूस का बजट घाटा मार्च 2026 तक 61.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि सरकार जितना कमा रही है उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रही है और खर्चा कहां हो रहा है? सबसे बड़ा हिस्सा जा रहा है युद्ध पर हथियार पर। सैनिक, लॉजिस्टिक और टेक्नोलॉजी पर। युद्ध जितना लंबा खिसता जा रहा है उतना ही महंगा होता जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। हालांकि भारत ने उसे संभालने की कोशिश की है। इंटरनेशनल ट्रेड सीमित हो गया है। विदेशी निवेश कम हो गया है और रूसी करेंसी रूबल पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास दो ही बड़े रास्ते बचते हैं। या तो कर्ज ले या फिर अपने रिजर्व का इस्तेमाल करें और रूस ने चुना है दूसरा रास्ता सोना बेचना। अब किटको की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2026 तक रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 2304.76 टन रह गया है। सिर्फ मार्च महीने में ही इसमें 6.22 टन की गिरावट आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड होल्डर्स में से एक रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/irgc-parade-ghadr-shahab-3b-mrbms-in-tehran-hours-before-ceasefire-expiry" target="_blank">Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना!</a></h3><div>लेकिन धीरे-धीरे यह रिजर्व कम हो रहा है जो कि बड़ा संकेत है कि आर्थिक दबाव बढ़ रहा है रूस पर। अब सवाल है कि क्या यह रूस के लिए खतरे की घंटी है? सीधा जवाब है हां, लेकिन पूरी कहानी इससे थोड़ी ज्यादा जटिल है। सोना किसी भी देश के लिए इमरजेंसी फंड जैसा होता है। जब स्थिति खराब होती है तो देश इसे बेचकर कैश फ्लो बढ़ाते हैं। लेकिन लगातार सोना बेचना इस बात का संकेत भी देता है कि नकदी की समस्या गंभीर होती जा रही है। अगर यही ट्रेंड रहता है तो भविष्य में रूस के पास आर्थिक संकट से निपटने के लिए कम विकल्प बचेंगे। लेकिन आम लोग क्यों खरीद रहे हैं सोना? यह जान लीजिए। यही कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है कि जहां एक तरफ सरकार सोना बेच रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस के आम नागरिक इसे खरीदने के लिए टूट पड़े हैं। मॉस्को एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में गोल्ड ट्रेंडिंग में 350% का उछाल आया है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/russia-su-57-m1-more-dangerous-than-the-f-22-will-india-buy-it" target="_blank">F-22 से खतरनाक रूस का SU-57 M1, खरीदेगा भारत?</a></h3><div>क्योंकि जब देश की करेंसी कमजोर होती है तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीदते हैं। रूबल की वैल्यू गिर रही है इसलिए लोग कैश की बजाय गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। युद्ध और अनिश्चितता के समय में सोना हमेशा सेफ हेवन माना जाता है। यानी सरकार बेच रही है मजबूरी में और जनता खरीद रही है डर के कारण। अब भारत के लिए इसका क्या मतलब है? देखिए भारत के लिए इसका बहुत बड़ा मतलब है? देखिए इसको हम कई पॉइंट्स में बताएंगे। पहला गोल्ड प्राइस पर असर। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में से एक है। अगर रूस जैसे बड़े देश मार्केट में सोना बेचते हैं तो ग्लोबल सप्लाई बढ़ती है जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ अगर दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है तो गोल्ड की डिमांड बढ़ती है जो कीमतों को ऊपर ले जाती है। यानी भारत में सोने की कीमतें आने वाले समय में वलाटाइल रह सकती हैं। इसके अलावा रुपया और ट्रेड देखिए रूस और भारत के बीच ट्रेड में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है। खासकर तेल और डिफेंस सेक्टर में अगर रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो इसका असर भारत रूस व्यापार पर पड़ सकता है। साथ ही रुपए रूबल ट्रेंडिंग मैकेनिज्म पर भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा ऊर्जा कीमतों की बात करें तो रूस अमेरिका के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर्स में से एक है। अगर उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो वह ज्यादा रेवेन्यू के लिए ऊर्जा निर्यात बढ़ा सकता है या कीमतों में बदलाव कर सकता है। यानी इसका सीधा असर भारत के पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत हमेशा एक बैलेंसिंग एक्ट करता आया है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:10:17 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/russia-sells-massive-22000-kilograms-of-gold</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/punishment-for-nato-will-trump-dismantle-europe-us-plan-leaked]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका ईरान से जंग में है और अब अमेरिका से जुड़ी जो जानकारी सामने आ रही है वह आपको हैरान कर देगी क्योंकि ईरान के खिलाफ तो अमेरिका जो कारवाई कर रहा है वो कर ही रहा है। इसके अतिरिक्त जो ईरान के साथ करेगा वो तो करेगा ही लेकिन अब वो अपने निशाने पर किसी और को नहीं बल्कि नाटो देशों को लेने की तैयारी कर रहा है।&nbsp; दरअसल अमेरिका और स्पेन का टकराव जगजाहिर हो चुका है। स्पेन ने अपने एयर स्पेस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। स्पेन ने अपने लड़ाकू बेसिस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। कहा कि हमारी धरती से कोई हमला नहीं होगा। हम युद्ध के खिलाफ हैं। अमेरिका चिढ़ गया। इसके बाद अब नाटो की गर्दन अमेरिका जो है वो पकड़ रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने रटर्स को बताया कि पेंटागन के एक आंतरिक ईमेल में उन विकल्पों की रूप रेखा दी गई है जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका उन नाटो सहयोगियों को दंडित कर सकता है जिनके बारे में उनका मानना है कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी अभियानों का समर्थन करने में विफल रहे हैं। जिसमें स्पेन को गठबंधन से निलंबित करना, फॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के दावे पर अमेरिकी स्थिति की समीक्षा करना शामिल है। नाम ना छापने की शर्त पर ईमेल का जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि नीतिगत विकल्पों का विस्तृत विवरण एक नोट में दिया गया है। जिसमें ईरान युद्ध के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका को पहुंच सैन्य अड्डे, हवाई उड़ान के अधिकार जो है वो देने के लिए कुछ सहयोगियों की कथित इच्छा और इनकार पर निराशा व्यक्त की गई है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/ceasefire-breaks-down-between-iran-us-could-something-major-unfold-over-the-strait-of-hormuz" target="_blank">ईरान-अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?</a></h3><div>अधिकारी कहते हैं कि ईमेल में कहा गया है कि एबीओ नाटो के लिए बिल्कुल बुनियादी मानक है और यह भी कहा गया है कि पेंटागन में उच्च स्तर पर इन विकल्पों पर बात हो रहा है। अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह है कि मुश्किल देशों को नाटो में महत्वपूर्ण या प्रतिष्ठित पदों से निलंबित कर दिया जाए। इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह भी है कि मुश्किल देशों को जो कारवाई है उनके खिलाफ सख्त होनी चाहिए ताकि दूसरे देश भी यह बात समझ पाए कि भैया ऐसे तो काम नहीं चल सकता। ऐसे सहयोग नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की इस बात के लिए भी एक कड़ी आलोचना पहले भी की है कि उन्होंने हारमूद जलडमरू मध्य को खोलने में मदद करने में अपनी नौसेनाएं नहीं भेजी। 28 फरवरी को हवाई युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक जहाज रानी के लिए बंद कर दिया गया था वो। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह गठबंधन से हटने पर विचार कर सकते हैं जो कि एक जाहिर बयान है। उन्होंने ट्रंप ने जो है 1 अप्रैल को एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर आप मेरी जगह होते तो क्या करते? यानी कि आप नाटो को छोड़ते नहीं अगर नाटो इस तरह का व्यवहार कर रहा होता तो। इसी को लेकर माना यह जा रहा है कि अमेरिका उस विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि बार-बार बात स्पेन की आ रही है।&nbsp;&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/major-ghost-jobs-scam-involving-h-1b-visas-in-the-us" target="_blank">America में H-1B वीज़ा का बड़ा 'Ghost Jobs' स्कैम, तेलुगू जोड़ी को होगी 5 साल की जेल</a></h3><div>ऐसे में स्पेन की तरफ से भी जवाब आया है। स्पेन का कहना है कि नाटो से हमें निकाल देना कोई मजाक बात नहीं है। इतना आसान नहीं है। क्या कहा गया है स्पेन की तरफ से? आपको पहले सुनवाते हैं। को तो एक तरफ अमेरिका की तैयारी है। दूसरी तरफ स्पेन का पलटवार है और भी बताएंगे कि कैसे नाटो दूसरे देश भी जो है अमेरिका की तरफ शक की सुई घुमा रहे हैं। लेकिन यह जो पेंटागन का मेल था एक जो हाई प्रोफाइल मेल था उसमें जो है बताया जा रहा है जो अधिकारी सूत्रों के हवाले से कह रहे हैं कि किस तरह का एक्शन हो यह कोई सुझाव नहीं दिया गया है और साथ ही यूरोप में सैन्य अड्डे क्या बंद कर देने चाहिए अमेरिका को इसका भी कोई प्रस्ताव नहीं है। अधिकारी ने हालांकि यह बताने से इंकार कर दिया कि विकल्पों में यूरोप से कुछ अमेरिकी सैनिक सेनाओं की व्यापक रूप से अपेक्षित वापसी शामिल है या नहीं। यानी कि अमेरिकी सेना जो यूरोप में मौजूद है वह वापस आ सकती है क्या? तो ऐसे में भी बड़ा मुश्किल स्थिति हो सकता है। ऐसे में ईमेल पर जो कई लोग हैं जिन्होंने पेंटागन को लेकर एक सवाल पूछा पेंटागन से तो उसके जवाब में पेंटागन ने कहा है कि जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने हमारे नाटो सहयोगियों के लिए जो कुछ भी किया है उसके बावजूद वह हमारे लिए मौजूद नहीं थे। यह भी कहा गया है पेंटागन की तरफ से कि युद्ध विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रपति के पास ऐसे विश्वसनीय विकल्प हो जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे सहयोगी अब केवल कागजी शेर बनकर ना रह जाए बल्कि अपनी भूमिका निभाएं। इस संबंध में चल रही किसी भी आंतरिक चर्चा पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/germany-hands-over-bahubali-to-india-modi-and-rajnath-masterstroke" target="_blank">जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरान</a></h3><div>ट्रंप प्रशासन को यूरोपीय लोगों में अधिकार की भावना जो है वो कहा जा रहा है कि दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों और राजनीयिकों का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका इजराइली युद्ध ने 76 साल पुराने गुट के भविष्य के बारे में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बात को लेकर अभूतपूर्व चिंता पैदा हो रही है कि अगर यूरोपीय सहयोगियों पर हमला होता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल होना युद्ध में प्रवेश करने के बराबर होगा। लेकिन एक स्थाई युद्ध विराम होने या संघर्ष समाप्त होने तक वो जलडमरू मध्य को खुला रखने में मदद करने के लिए तैयार होंगे। लेकिन कुल मिलाकर अमेरिका की तरफ से जो है साफ तौर पर कहा गया कि ये लोग साथ नहीं दे रहे हैं। इधर-उधर की बात कर रहे हैं और यही वजह है कि ये नाराजगी है। वहीं स्पेन कह रहा है कि बॉस हम पे खीज निकालने का कोई मतलब नहीं क्योंकि हमको तो तुम नाइट्रो से निकाल नहीं सकते हो क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है कि हमको तुम निकाल पाओ और स्पेन के प्रति जो निराशा व्यक्त की गई थी उसके बाद से ही ये कयास लगने लगे थे कि कुछ ना कुछ तो टकराव जो है वो होगा और सबसे बड़ी बात यह है कि स्पेन की जमीन पर दो बहुत अहम सैन्य अड्डे हैं अमेरिका के जो जिसमें से एक रोटा नौसेना स्टेशन है और दूसरा मोरोन हवाई अड्डा है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:04:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/punishment-for-nato-will-trump-dismantle-europe-us-plan-leaked</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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