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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[‘भारतीय कभी किसी चीज़ के लिए पैसे नहीं देते!’... जब यूक्रेन में सेना भेजने के JD Vance के प्लान पर ओवल ऑफिस में हँस पड़े Donald Trump]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/when-trump-laughed-off-and-dismissed-jd-vance-plan-to-send-indian-troops-to-ukraine]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के भीतर चल रही कूटनीतिक रस्साकशी का एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हाल ही में (23 जून को) रिलीज़ हुई एक नई किताब 'रिजीम चेंज' (Regime Change) में दावा किया गया है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन में शांति बनाए रखने के लिए भारतीय सैनिकों को तैनात करने का एक गुप्त प्रस्ताव रखा था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस विचार को तुरंत हँसकर खारिज कर दिया और कहा कि "भारतीय ऐसा कभी नहीं करेंगे।" 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के मशहूर रिपोर्टर मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान द्वारा लिखी गई इस किताब में ओवल ऑफिस के अंदरूनी मतभेदों और भारत को लेकर ट्रंप की सोच को उजागर किया गया है।</div><div><br></div><div>यह मीटिंग ट्रंप के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह के दस दिन बाद हुई थी, जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने युद्धविराम मिशन के लिए एक गैर-यूरोपीय सेना का विचार रखा। किताब में कहा गया है कि ट्रंप ने भारत की भागीदारी के विचार को तुरंत खारिज कर दिया और हँसते हुए कहा, "भारतीय ऐसा नहीं करेंगे। वे ऐसी चीज़ के लिए पैसे नहीं देंगे।"</div><div><br></div><div>यह बातचीत रिटायर्ड आर्मी लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग द्वारा बुलाई गई एक मीटिंग में हुई थी। ट्रंप ने उन्हें यूक्रेन और रूस के लिए विशेष राष्ट्रपति दूत (special presidential envoy) नियुक्त किया था ताकि युद्ध को खत्म करने के लिए प्रशासन का "कमांडर का इरादा" (commander’s intent) तय किया जा सके।</div><div><br></div><div>मीटिंग में, केलॉग ने "एन अमेरिका फर्स्ट प्लान: ट्रंप्स हिस्टोरिक पीस डील फॉर रशिया-यूक्रेन वॉर" (An America First Plan: Trump’s Historic Peace Deal for Russia-Ukraine War) नाम का एक ड्राफ्ट प्लान पेश किया। इस प्रस्ताव के तहत, अमेरिका यूक्रेन के कब्ज़े वाले इलाकों पर रूस के दावों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देगा, जबकि यूक्रेन उन इलाकों को बलपूर्वक वापस लेने की कोशिश न करने पर सहमत होगा। इस योजना में ज़मीन पर विदेशी सैनिकों की मौजूदगी के साथ युद्धविराम की निगरानी की व्यवस्था भी शामिल थी।</div><div><br></div><div>फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड यूक्रेन में शांति सेना भेज सकते थे। कहा जाता है कि वेंस ने प्रस्ताव के इस हिस्से पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि यूक्रेन के अंदर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन (NATO) या नाटो सदस्य देशों के सैनिकों की मौजूदगी को मॉस्को द्वारा एक गंभीर उकसावे के तौर पर देखा जा सकता है।</div><div><br></div><div>किताब के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कदम तनाव बढ़ा सकता है, संघर्ष को और फैला सकता है और अमेरिका के युद्ध में और अधिक उलझने की संभावना बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><div>नाटो देशों की सेना वाले मिशन के विकल्प की तलाश में, वेंस ने कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज़ से पूछा कि क्या यूरोप के बाहर के देश यूक्रेन में युद्धविराम की निगरानी कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>वाल्ट्ज़ के इस बात से सहमत होने के बाद कि एक गैर-यूरोपीय सेना बेहतर होगी, वेंस ने इस भूमिका के लिए भारत और सऊदी अरब का सुझाव दिया। किताब में कहा गया है कि ट्रंप ने भारत की भागीदारी को खारिज कर दिया, जबकि उन्होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और मोदी "उन्हें बहुत पसंद करते थे और उनसे मिलना चाहते थे।" इसमें आगे कहा गया है कि ट्रंप ने कहा, "भारतीय कभी किसी चीज़ के लिए पैसे नहीं देते" और दोहराया कि "वे ऐसी किसी चीज़ के लिए पैसे नहीं देंगे।"</div><div><br></div><div>किताब के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई बुनियादी आपत्ति नहीं है कि अगर ब्रिटेन या फ्रांस उस इलाके की निगरानी के लिए अपने सैनिक भेजते हैं, बशर्ते अमेरिका पर कोई वित्तीय या सैन्य ज़िम्मेदारी न आए। इस बातचीत के अलावा, किताब में उस प्रशासन का ज़िक्र है जिसे यूक्रेनी नेतृत्व पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं था और जो काफी हद तक ट्रंप की अपनी सोच से चलता था।</div><div><br></div><div>केलगॉग की प्रेजेंटेशन के दौरान, किताब में कहा गया है कि ट्रंप ने बार-बार बीच में टोकते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की पर निशाना साधा। उन्होंने ज़ेलेंस्की को "खराब बातचीत करने वाला" (bad negotiator) बताया, जिसने "अपने देश को बर्बाद कर दिया" लेकिन "बाइडेन प्रशासन से चीज़ें हासिल करने में बहुत माहिर" था। ट्रंप ने कथित तौर पर यूक्रेन को "दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश" भी बताया।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 11:37:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/when-trump-laughed-off-and-dismissed-jd-vance-plan-to-send-indian-troops-to-ukraine</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan के प्रति प्रेम का इजहार करना JD Vance को पड़ा भारी, पत्नी Usha Vance भी सुर्खियों में आईं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/jd-vance-pakistan-remark-usha-vance-hindu-identity-controversy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों अपने बयानों और निजी जीवन को लेकर लगातार चर्चा में हैं। कभी अपनी धार्मिक आस्था को लेकर खुलकर बोलने वाले वेंस अब अपने ही राजनीतिक आधार वर्ग यानि मागा समर्थकों के बीच असहज स्थिति का सामना करते दिखाई दे रहे हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान को लेकर दिए गए उनके बयान, पत्नी उषा वेंस के साथ सार्वजनिक मंचों पर हुई चर्चाएं और उनके अंतरधार्मिक विवाह को लेकर उठ रही बहस ने अमेरिकी राजनीति में नया विमर्श खड़ा कर दिया है।</div><div><br></div><div>स्विट्जरलैंड में हाल ही में ईरान से वार्ता के दौरान जेडी वेंस ने पाकिस्तान के प्रति अपने लगाव का खुला प्रदर्शन किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मौजूदगी में वेंस ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी जिंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं, जिनमें एक उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और दूसरे पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर हैं। बाद में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें पाकिस्तान से प्रेम है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/i-am-a-problem-solver-donald-trump-claimed-regarding-handling-benjamin-netanyahu" target="_blank">'मैं समस्याओं को सुलझाने वाला हूँ', Donald Trump ने Benjamin Netanyahu को संभालने का दावा किया, US-Iran Peace Talks के बीच इजराइल से बढ़े मतभेद</a></h3><div>जेडी वेंस का यह बयान अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति और मागा समर्थकों को रास नहीं आया। अमेरिका में पाकिस्तान को लंबे समय से आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान और विशेष रूप से उसकी सैन्य व्यवस्था की खुली प्रशंसा ने रिपब्लिकन खेमे के भीतर भी असहजता पैदा कर दी है।</div><div><br></div><div>रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान और कतर जैसे देशों का आतंकवादियों को पनाह देने का पुराना इतिहास रहा है और वे ईरान के समर्थन में अधिक रुचि रखते दिखाई देते हैं। वहीं मोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने एक समाचार चैनल पर पाकिस्तान पर ओसामा बिन लादेन को वर्षों तक छिपाने और गुप्तचर एजेंसी के जरिये कट्टरपंथी ताकतों को समर्थन देने के आरोप दोहराए। रुढ़िवादी टिप्पणीकार मेगन मैक्केन ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जेडी वेंस भले पाकिस्तान से प्रेम करते हों, लेकिन वह ऐसा नहीं करतीं।</div><div><br></div><div>इन राजनीतिक विवादों के बीच जेडी वेंस का निजी जीवन भी सुर्खियों में बना हुआ है। कुछ दिन पहले उन्होंने और उनकी पत्नी उषा वेंस ने एक संयुक्त साक्षात्कार में अपने वैवाहिक और धार्मिक संबंधों को लेकर खुलकर बातचीत की थी। उषा वेंस ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्होंने हिंदू परिवार में स्थिर और सुखद माहौल में परवरिश पाई है, इसलिए उन्हें अपनी आस्था बदलने की आवश्यकता कभी महसूस नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जेडी वेंस के लिए चर्च ने जीवन में सहारा दिया, वहीं उन्हें ऐसा बदलाव जरूरी नहीं लगा।</div><div><br></div><div>उषा वेंस के इस बयान को सोशल मीडिया पर अलग-अलग नजरिए से देखा गया। कई लोगों ने इसे जेडी वेंस के कठिन बचपन पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना, जबकि समर्थकों ने इसे दो अलग जीवन अनुभवों की सहज अभिव्यक्ति बताया। हालांकि आलोचकों के अनुसार उषा वेंस ने बेहद विनम्र लेकिन प्रभावशाली तरीके से अपनी स्वतंत्र पहचान और सोच को सामने रखा।</div><div><br></div><div>हम आपको याद दिला दें कि जेडी वेंस पहले भी अपनी पत्नी को लेकर दिए गए कुछ बयानों के कारण आलोचना झेल चुके हैं। मिशिगन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मजाक में कहा था कि जब उन्होंने उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरने का फैसला किया, तब उषा ने कहा था कि वह या तो उपराष्ट्रपति बन सकते हैं या चौथे बच्चे के पिता। लेकिन उन्होंने दोनों हासिल कर लिए। उस समय गर्भवती उषा वेंस कार्यक्रम में मौजूद थीं। इस टिप्पणी को भी कई लोगों ने असहज और अनुचित माना था।</div><div><br></div><div>यही नहीं जेडी वेंस की नई आत्मकथा में उनकी एक पूर्व प्रेमिका का उल्लेख भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले ही लोगों के बीच यह जिज्ञासा बनी हुई थी कि अमेरिका के सबसे चर्चित अंतरधार्मिक विवाहों में से एक माने जाने वाले इस रिश्ते में धार्मिक और सांस्कृतिक संतुलन कैसे कायम है। जेडी वेंस जहां खुले तौर पर अपनी कैथोलिक आस्था और परिवार के उसी राह पर चलने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं, वहीं उषा वेंस ने हमेशा अपने हिंदू संस्कारों और पहचान पर गर्व व्यक्त किया है।</div><div><br></div><div>देखा जाये तो वॉशिंगटन की राजनीति में आमतौर पर नेताओं के जीवनसाथियों को केवल समर्थन देने वाली छवि में देखा जाता है। लेकिन उषा वेंस लगातार एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में उभरती दिखाई दे रही हैं। वह अपनी परंपराओं, विचारों और पहचान को बिना झिझक सार्वजनिक रूप से सामने रख रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यही बात उन्हें अमेरिकी राजनीति के पारंपरिक ढांचे से अलग बनाती है।</div><div><br></div><div>बहरहाल, जेडी वेंस के हालिया बयान और निजी जीवन से जुड़े विवाद ऐसे समय सामने आए हैं जब उन्हें भविष्य में राष्ट्रपति पद के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान पर दिए गए उनके बयान, धार्मिक पहचान को लेकर चल रही बहस और पत्नी उषा वेंस की स्वतंत्र छवि आने वाले समय में उनकी राजनीतिक यात्रा को किस दिशा में ले जाएगी, इस पर अब पूरे अमेरिका की नजर टिकी हुई है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 11:24:41 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/jd-vance-pakistan-remark-usha-vance-hindu-identity-controversy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Nirav Modi को London Court से झटका! Bank of India को 100 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश, सरकारी बैंक की बड़ी जीत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/setback-for-nirav-modi-from-london-court-ordered-to-pay-100-crore-to-bank-of-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत से फरार चल रहे हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लंदन हाई कोर्ट (London High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) को 10.7 मिलियन डॉलर (100 करोड़ रुपये से अधिक) की बकाया राशि चुकानी होगी। यह आदेश नीरव मोदी की एक कंपनी को दिए गए कर्ज (Loan) के एवज में उनके द्वारा दी गई 'पर्सनल गारंटी' (Personal Guarantee) के तहत जारी किया गया है। वर्तमान में लंदन की वांड्सवर्थ जेल में बंद नीरव मोदी के खिलाफ इसे भारतीय सरकारी बैंक के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी और आर्थिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।</div><div><br></div><div>मंगलवार को लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में फ़ैसला सुनाते हुए जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा, "मिस्टर मोदी बैंक को पर्सनल गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर (लगभग 38.9 करोड़ रुपये) की मूल बकाया रकम चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हैं। इसमें बैंक द्वारा तय आधार पर कैलकुलेट किया गया ब्याज भी जोड़ा जाएगा। मिस्टर मोदी ने ऐसा कोई बचाव पेश नहीं किया जिससे यह पता चले कि बैंक उस रकम का हकदार क्यों नहीं था।"</div><div><br></div><div><b>मामला क्या था?</b></div><div>यह विवाद 2012 में बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दुबई की कंपनी 'फायरस्टार डायमंड FZE' को दिए गए लोन से जुड़ा है। एक साल बाद, नीरव मोदी ने पर्सनल गारंटी पर साइन किए, जिसमें उन्होंने लोन न चुका पाने की स्थिति में खुद ज़िम्मेदारी ली।</div><div><br></div><div>2018 में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद, बैंक ने लोन वापस मांगा और कंपनी व मोदी दोनों से भुगतान की मांग की। कोर्ट के मुताबिक, इन मांगों का कोई जवाब नहीं दिया गया।</div><div><br></div><div><b>कोर्ट ने नीरव मोदी की दलीलें खारिज कीं</b></div><div>सुनवाई के दौरान, मोदी ने तर्क दिया कि पर्सनल गारंटी को लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें बैंक से भुगतान के लिए सही नोटिस नहीं मिले और लोन एग्रीमेंट खत्म करने के बैंक के फ़ैसले पर सवाल उठाए।</div><div><br></div><div>हालांकि, जस्टिस साइमन टिंकलर ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि बैंक ऑफ़ इंडिया बकाया रकम वसूलने का हकदार है। कोर्ट ने कहा कि मोदी ऐसा कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर पाए जिससे यह पता चले कि बैंक को गारंटी के तहत बकाया पैसा क्यों नहीं मिलना चाहिए।</div><div><br></div><div>इस मामले में एक अहम मुद्दा यह था कि क्या मोदी को बैंक द्वारा भेजे गए भुगतान के नोटिस मिले थे। मोदी ने कुछ नोटिस मिलने से इनकार किया और दावा किया कि जब वे भेजे गए थे, तब वे भारत में नहीं थे। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि नोटिस सही तरीके से पहुंचा दिए गए थे। फ़ैसले में बताया गया कि एक नोटिस उस लंदन जेल में भेजा गया था जहाँ मोदी अभी बंद हैं, जबकि दूसरा नोटिस पहले ही उनकी कानूनी टीम को दिया जा चुका था।</div><div><br></div><div><b>PNB धोखाधड़ी के असर पर भी विचार किया गया</b></div><div>अदालत ने कथित PNB धोखाधड़ी का फ़ायरस्टार ग्रुप पर पड़े असर का भी ज़िक्र किया। जस्टिस टिंकलर ने कहा कि 2018 में धोखाधड़ी के आरोप सामने आने के बाद, यह मानना ​​उचित था कि फ़ायरस्टार कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है, जिससे उधार देने वालों के लिए जोखिम बढ़ गया है।</div><div><br></div><div>फ़ैसले में फ़रवरी 2018 में मोदी के भेजे गए एक ईमेल का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने माना था कि इस स्थिति ने ग्रुप की अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ पूरी करने की क्षमता पर असर डाला है।</div><div><br></div><div>अपने अंतिम फ़ैसले में, अदालत ने नीरव मोदी की साइन की हुई पर्सनल गारंटी को सही ठहराया और पुष्टि की कि बैंक ऑफ़ इंडिया मूल रक़म के साथ-साथ लागू ब्याज भी वसूलने का हकदार है।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:34:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/setback-for-nirav-modi-from-london-court-ordered-to-pay-100-crore-to-bank-of-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Donald Trump को उनके ही देश ने दिया बड़ा झटका! US सीनेट ने पास किया ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव, जानिए इस ऐतिहासिक वोटिंग के मायने]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-resolution-to-halt-war-with-iran-here-what-this-historic-vote-means]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही पार्टी के नियंत्रण वाली सीनेट में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी जनता के बीच बेहद अलोकप्रिय हो चुके ईरान संघर्ष को लेकर रिपब्लिकन-नियंत्रित US सीनेट ने ट्रंप प्रशासन को आगे किसी भी सैन्य संघर्ष से रोकने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव पास कर दिया है। यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब पिछले हफ्ते ही दोनों देशों ने तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। आइए समझते हैं कि इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के पीछे का गणित क्या है और इसका ईरान संघर्ष पर क्या असर पड़ेगा।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/nfosys-rakes-in-billions-from-ai-nandan-nilekani-makes-a-bold-claim-technology-wont-take-away-jobs" target="_blank">Infosys की AI से अरबों की कमाई, Nandan Nilekani का बड़ा दावा- Technology नौकरियां नहीं छीनेगी</a></h3><div><br></div><div>यह प्रस्ताव 50-48 वोटों से पास हुआ। इसमें चार रिपब्लिकन सीनेटरों -- सुसान कॉलिन्स (मेन), लिसा मुर्कोव्स्की (अलास्का), बिल कैसिडी (लुइसियाना) और रैंड पॉल (केंटकी) -- ने इसके समर्थन में वोट दिया। हालांकि, डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन (पेंसिल्वेनिया) ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।</div><div><br></div><div>इसके अलावा, रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक (पेंसिल्वेनिया) और मिच मैककोनेल (केंटकी) मौजूद नहीं थे, जिससे प्रस्ताव पास होने में आसानी हुई। गौरतलब है कि इनमें से किसी ने भी पहले युद्ध प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया था।</div><div><br></div><div>यह प्रस्ताव पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 215-208 वोटों से पास हुआ था, जिसमें चार रिपब्लिकन ने इसके पक्ष में वोट दिया था।</div><div><br></div><div><b>क्या इस वोट का ईरान संघर्ष पर असर पड़ेगा?</b></div><div>हालांकि यह प्रस्ताव बहुत कम अंतर से पास हुआ, लेकिन एक अधिकारी ने CNN को बताया कि संघर्ष पर इसका "कोई असर नहीं" पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव कुछ रिपब्लिकन (मैककॉर्मिक और मैककोनेल) की अनुपस्थिति के कारण ही पास हो पाया।</div><div><br></div><div>अधिकारी ने कहा, "समवर्ती प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास नहीं जाते हैं और इनका कोई कानूनी बल नहीं होता है।" उन्होंने बताया कि हालांकि प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई रोकने का निर्देश देता है, लेकिन "ऐसी कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं हो रही है जिससे अमेरिकी सेना को हटाया जा सके, क्योंकि 7 अप्रैल को युद्धविराम के साथ ही शत्रुतापूर्ण कार्रवाई खत्म हो गई थी।"</div><div><br></div><div>हालांकि, डेमोक्रेट्स ने कहा है कि वे "यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी संभावनाओं पर विचार करेंगे कि एग्जीक्यूटिव (कार्यपालिका) कांग्रेस की इच्छा का पालन करे", जो उनके अनुसार इस संघर्ष के पूरी तरह खिलाफ है।</div><div><br></div><div>मंगलवार के प्रस्ताव को पेश करने वाले डेमोक्रेट नेता ग्रेग मीक्स के हवाले से 'द गार्डियन' ने कहा, "कांग्रेस ने कभी भी इस विफल युद्ध को अधिकृत नहीं किया था, और राष्ट्रपति के पास निश्चित रूप से हमारी सहमति के बिना इसे अनिश्चित काल तक जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है, जैसा कि संविधान की मांग है।"</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/sports/fih-pro-league-india-beats-pakistan-4-3-in-london-hockey" target="_blank">Hockey Thriller: India ने Pakistan को 4-3 से हराया, London में अंतिम पलों तक चला रोमांच।</a></h3><div><br></div><div><b>US-ईरान युद्ध</b></div><div>पिछले हफ्ते, US और ईरान ने तीन महीने से अधिक समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। शांति समझौते पर ट्रंप और उनके ईरानी समकक्ष मसूद पेज़ेशकियन ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की जांच के लिए सहमत नहीं होता, तो वे ईरान के साथ बातचीत रोक सकते थे।</div><div><br></div><div>ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांति समझौते का विवादित मुद्दा बना हुआ है। हालांकि ईरान का कहना है कि यह सिर्फ़ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि इस मध्य-पूर्वी देश के पास बहुत ज़्यादा संवर्धित यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-resolution-to-halt-war-with-iran-here-what-this-historic-vote-means</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[India-US Trade Agreement | $500 अरब के 'मिशन 500' के बेहद करीब पहुंचे मोदी और ट्रंप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-us-trade-agreement-modi-and-trump-inch-closer-to-the-500-billion-dollar-mission-500]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों महाशक्तियां एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के ‘‘बेहद करीब’’ पहुंच चुकी हैं। यह समझौता पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी शर्तों पर 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल भारतीय बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोल देगा।<span style="font-size: 1rem;">अमेरिकी संसद परिसर ‘कैपिटल हिल’ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्रालय में उप सहायक मंत्री बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। यह कार्यक्रम 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) द्वारा आयोजित किया गया था।</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/nsa-ajit-doval-tells-chinese-foreign-minister-wang-yi-both-nations-should-respect" target="_blank">India-China Bilateral Relations: NSA Ajit Doval ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से कहा- 'एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं का सम्मान करें दोनों देश'</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p>
 उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप और मोदी के बीच बनी सहमति के बाद शुरू हुई व्यापार वार्ताओं का उल्लेख किया और कहा, ‘‘ हम इस रिश्ते को बैठकों से नहीं, बल्कि परिणामों से माप रहे हैं।’’
 मॉरिसन ने कहा, ‘‘ जब हमने फरवरी 2026 में व्यापार पर विचार किया, तो हमने इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की मंशा जताई थी। हम अब इसके बहुत, बहुत करीब हैं।’’</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/major-block-deal-in-vedanta-sparks-a-stir-share-price-plunges-8-causing-panic-among-investors" target="_blank">Vedanta में बड़ी Block Deal से हड़कंप, Share Price 8% लुढ़का, निवेशकों में मची खलबली।</a></h3><p>
</p><p> उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए पारस्परिक एवं लाभकारी शर्तों पर खोलेगा।
 उन्होंने कहा, ‘‘ प्रशासन ‘मिशन 500’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को हासिल करना है।’’
 मॉरिसन ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर अंतरिम व्यापार समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ चर्चा के लिए भारत की यात्रा पर हैं।</p><p><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-us-trade-agreement-modi-and-trump-inch-closer-to-the-500-billion-dollar-mission-500</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[China के पड़ोसी देश पर जयशंकर का बड़ा ऐलान, सिखाएंगे अंग्रेजी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/jaishankar-major-announcement-regarding-a-neighbor-of-china-english-will-be-taught]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने बताया है कि एक देश भारत से अंग्रेजी सीखना चाहता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह देश सिर्फ और सिर्फ दो देशों के साथ बॉर्डर शेयर करता है और वह दोनों देश महाशक्तियां हैं। जो देश भारत से अंग्रेजी सीखना चाहता है, वह रूस और चीन के बीचोंबीच स्थित है। इस देश का नाम मंगोलिया है। मंगोलिया के पास एक ऐसा खजाना है जो भारत की तकदीर बदल सकता है। अब इसी मंगोलिया ने भारत से कहा है कि हमें अंग्रेजी सिखा दो। मजे की बात देखिए कि दो महाशक्तियो के बीच बैठा मंगोलिया भारत से बॉर्डर शेयर नहीं करता है, लेकिन इसके बावजूद भारत को अपना तीसरा पड़ोसी बोल रहा है। बौद्ध धर्म के चलते मंगोलिया भारत को अपना आध्यात्मिक पड़ोसी भी बोल रहा है। दरअसल, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर मंगोलिया के दौरे पर हैं। मंगोलिया की 85% अर्थव्यवस्था रूस और चीन पर निर्भर है। लेकिन पिछले 4 सालों से रूस यूक्रेन के साथ उलझा है। तो वहीं चीन लगातार मंगोलिया पर राजनीतिक दबाव बनाता रहता है। ऐसे में मंगोलिया भारत के साथ अपने स्ट्रेटेजिक रिलेशन तेजी से बढ़ा रहा है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-rattled-by-protests-in-pok-india-calls-desperate-attempt-to-divert-attention" target="_blank">PoK में Protest से बौखलाया Pakistan, भारत बोला- Human Rights से ध्यान भटकाने की हताश कोशिश</a></h3><div>भारत के लिए भी मंगोलिया बेहद जरूरी है। मंगोलिया अपनी लोकेशन के चलते तो भारत के लिए जरूरी है ही लेकिन इसके अलावा मंगोलिया के पास 90 हजार टन यूरेनियम और रेयर अर्थ मिनरल्स हैं जो भारत की न्यूक्लियर एनर्जी डिफेंस सेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी है। कुछ समय पहले ही भारत मंगोलिया में एक ऑयल रिफाइनरी भी खोल चुका है। मंगोलिया की लोकेशन और उसके नेचुरल रिसोर्सेज की कीमत क्या है? वो 2015 में पता चला जब नरेंद्र मोदी इस देश की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2022 में राजनाथ सिंह भारत के वो पहले रक्षा मंत्री बने, जिन्होंने मंगोलिया का दौरा किया। राजनाथ सिंह चीन के पड़ोसी देश के साथ रक्षा समझौते कर आए। भारत चाहता है कि चीन का हर पड़ोसी उसका दोस्त बने। बहरहाल मोटे-मोटे तौर पर आप समझ चुके हैं कि मंगोलिया को भारत की और भारत को मंगोलिया की जरूरत क्यों है। लेकिन अब सवाल आता है कि मंगोलिया भारत से अंग्रेजी क्यों सीखना चाहता है? दरअसल इसके पीछे भी चीन है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो वैसे तो मंगोलिया पर रूसी भाषा का प्रभाव दिखता है। लेकिन पिछले कई सालों से चीन इस देश में अपनी मेंडरीन भाषा फैलाना चाहता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान चीन मंगोलिया का एक बड़ा हिस्सा कब्जा चुका है जिसे चीन ने इनर मंगोलिया का नाम दिया। चीन पड़ोसी देशों की जमीन पर कब्जा करने के लिए सलामी स्लाइसिंग रणनीति पर काम करता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/impact-of-us-iran-deal-path-cleared-for-indian-ships-through-hormuz" target="_blank">US-Iran Deal का असर, Hormuz से भारतीय जहाज़ों का रास्ता खुला, MEA ने बताया मौजूदा हाल</a></h3><div>सलामी स्लाइसिंग का मतलब होता है किसी चीज को धीरे-धीरे काटकर अपने कब्जे में लेना। चीन बिना किसी बड़े युद्ध या विवाद के धीरे-धीरे टुकड़ों-टुकड़ों में पड़ोसी देशों की जमीन या समुद्री क्षेत्रों पर कब्जा करता है। चीन एक बार में पूरी जमीन हड़पने के बजाय धीरे-धीरे मामूली कदम उठाता है। इसी को सलामी स्लाइसिंग कहा जाता है। इस रणनीति के तहत चीन अपनी भाषा और अपनी जनता का भी इस्तेमाल करता है। चीन अपने पड़ोसी देशों में धीरे-धीरे अपने नागरिकों को बसाता है। वहां पर अपनी मेंडरीन भाषा का प्रचार शुरू कर देता है। चीन ने यही काम तिब्बत में किया है। सबसे पहले तो चीन ने तिब्बत में अपने लोगों को बसाया। वहां के स्कूलों में भाषा को अनिवार्य कर दिया। आज पूरा तिब्बत चीन के कब्जे में है। चीन यही काम मंगोलिया में धीरे-धीरे कर रहा है। मंगोलिया से छीने गए इनर मंगोलिया इलाके में चीन पहले ही अपनी जनसंख्या को बढ़ा चुका है। अब इस इलाके से भी 10-10 चीनी लोग मेन मंगोलिया में घुस रहे हैं। मंगोलिया के लोगों को मेंडरीन भाषा सिखा रहे हैं। मंगोलिया की जनता भी चीनी लोगों के झांसे में आ जाती है। मेंडरीन बोलना शुरू कर देती है। क्योंकि चीन की ताकत देखकर आम मंगोलियाई भी मेंडरीन बोलना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह मंगोलिया के लिए बहुत बड़ा खतरा है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:57:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/jaishankar-major-announcement-regarding-a-neighbor-of-china-english-will-be-taught</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US-Iran Deal का असर, Hormuz से भारतीय जहाज़ों का रास्ता खुला, MEA ने बताया मौजूदा हाल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/impact-of-us-iran-deal-path-cleared-for-indian-ships-through-hormuz]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत ने मंगलवार को बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए हुए समझौते (MoU) के बाद, भारत आने वाले 11 जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रे हैं, जबकि भारतीय झंडे वाले 10 जहाज़ अभी भी फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) इलाके में हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय झंडे वाले दस जहाज़ अभी भी फ़ारस की खाड़ी इलाके में हैं। इसके अलावा, हमारे दो भारतीय जहाज़ इस तरफ़ से फ़ारस की खाड़ी में गए हैं। MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले ग्यारह जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रे हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब समुद्री रास्ते के इस बेहद अहम और संकरे हिस्से (chokepoint) के आसपास लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है; यह हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाइड्रोकार्बन और लिक्विफाइड गैस की ढुलाई के लिए मुख्य रास्ता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-major-announcement-record-oil-shipments-pass-through-the-strait-of-hormuz" target="_blank">Donald Trump का बड़ा ऐलान, Strait of Hormuz से निकला रिकॉर्ड तेल, दुनिया हुई ज्यादा महफूज़</a></h3><div>हालांकि पिछले हफ़्ते वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शुरुआती समझौते (MoU) के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ट्रैफ़िक के लिए खोल दिया गया था, लेकिन शनिवार को लेबनान के अंदर इज़राइल के सैन्य हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने इस जलमार्ग को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। इसी दौरान, हाल की घटनाओं के बाद इस अहम रास्ते से कमर्शियल शिपिंग ट्रैफ़िक में तेज़ी आई है। स्वतंत्र समुद्री ट्रैकिंग एजेंसियों ने पिछले कुछ दिनों में कमर्शियल शिपिंग ट्रैफ़िक में बढ़ोतरी दर्ज की है। यह ट्रांसपोर्ट वॉल्यूम में साफ़ सुधार का संकेत है, जो 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से आई भारी रुकावटों के बाद हुआ है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/tehran-swings-action-following-deal-washington-pezeshkian-arrives-in-pakistan-to-discuss-roadmap" target="_blank">Washington से डील के बाद एक्शन में Tehran, Roadmap पर चर्चा के लिए Pakistan पहुंचे Pezeshkian</a></h3><div>कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को कम से कम 36 रिसोर्स कैरियर (संसाधन ढोने वाले जहाज़) होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रे। यह फ़रवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से देखे गए सबसे व्यस्त ऑपरेशनल समय में से एक था।</div><div>पिछले हफ़्ते हुए ईरान-अमेरिका समझौते (MoU) ने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का डिप्लोमैटिक समय शुरू किया। यह समझौता महीनों की सीधी सैन्य झड़पों के बाद हुआ, जिसने पश्चिम एशियाई एनर्जी कॉरिडोर को बुरी तरह अस्थिर कर दिया था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों को उलट-पुलट कर दिया था।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:52:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/impact-of-us-iran-deal-path-cleared-for-indian-ships-through-hormuz</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Washington से डील के बाद एक्शन में Tehran, Roadmap पर चर्चा के लिए Pakistan पहुंचे Pezeshkian]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/tehran-swings-action-following-deal-washington-pezeshkian-arrives-in-pakistan-to-discuss-roadmap]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान मंगलवार को पाकिस्तान के एक दिन के सरकारी दौरे पर पहुँचे। इस दौरे का मुख्य मकसद ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते को लागू करने और आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना है। दौरे के दौरान, वे राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से मुलाक़ात करेंगे और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ बातचीत करेंगे। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और व्यापार, ऊर्जा, सीमा सुरक्षा, लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सहयोग को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा करने की भी उम्मीद है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और अमेरिका ने स्विट्ज़रलैंड में बातचीत की है और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। सरकारी चैनल PTV के मुताबिक, पेज़ेशकियन नूर खान एयरबेस पर उतरे, जहाँ राष्ट्रपति ज़रदारी, प्रधानमंत्री शरीफ़ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने पहले ही बताया था कि ईरानी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री शरीफ़ के निमंत्रण पर यह राजकीय यात्रा कर रहे हैं। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार, सीनेट के चेयरमैन और नेशनल असेंबली के स्पीकर भी उनसे मुलाक़ात करेंगे। ईरान के राष्ट्रपति के तौर पर पेज़ेशकियन की पाकिस्तान की यह दूसरी यात्रा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/mea-unequivocal-response-our-energy-security-is-based-on-national-interest" target="_blank">MEA का दो टूक जवाब: हमारी Energy Security राष्ट्रीय हित पर आधारित, 1.4 अरब लोगों को देंगे सस्ती ऊर्जा</a></h3><div>सरकारी मीडिया ने बताया कि पेज़ेशकियन एक हाई-लेवल डेलीगेशन के साथ 'मिनाब 168' नाम के स्पेशल प्लेन से इस्लामाबाद पहुँचे। उनका मकसद देश पर हुए अमेरिकी हमलों के पीड़ितों, खासकर मिनाब स्कूल के उन 168 छात्रों को श्रद्धांजलि देना था जो इन हमलों में मारे गए थे। रवाना होने से पहले, ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी यात्रा का मकसद "इंटरनेशनल लॉ के तहत मेमोरैंडम को पूरी तरह लागू करना" है। सरकारी 'प्रेस टीवी' के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इस समझौते से वेस्ट एशिया में स्थिरता और सुरक्षा को मज़बूत करने में मदद मिलेगी। एक्स पर एक पोस्ट में पेज़ेशकियन ने कहा कि बातचीत की कामयाबी इस बात पर निर्भर करती है कि तय की गई ज़िम्मेदारियों को पूरी तरह माना जाए और उन्हें ठीक-ठीक लागू किया जाए।" उन्होंने आगे कहा, "इस रास्ते पर कितनी प्रगति हुई है, यह तय की गई ज़िम्मेदारियों को असल में निभाने से पता चलेगा। समझौते में लिखी बातों से अलग बयान देने से बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद नहीं मिलती।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-major-announcement-record-oil-shipments-pass-through-the-strait-of-hormuz" target="_blank">Donald Trump का बड़ा ऐलान, Strait of Hormuz से निकला रिकॉर्ड तेल, दुनिया हुई ज्यादा महफूज़</a></h3><div>विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे से इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद चल रही कूटनीतिक बातचीत और आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करने का एक अहम मौका मिलेगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मस्कट से इस्लामाबाद पहुँचे। वे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के प्रबंधन पर ओमान के नेताओं के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ के साथ मस्कट गए थे। यह दौरा रविवार और सोमवार को स्विट्जरलैंड में लेक ल्यूसर्न समिट में ईरान और अमेरिका के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद हो रहा है। ये बातचीत इस्लामाबाद MoU के तहत हुई थी, जिस पर अमेरिका और ईरान ने गुरुवार को क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए भी इस MoU पर हस्ताक्षर किए थे।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:40:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/tehran-swings-action-following-deal-washington-pezeshkian-arrives-in-pakistan-to-discuss-roadmap</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump का बड़ा ऐलान, Strait of Hormuz से निकला रिकॉर्ड तेल, दुनिया हुई ज्यादा महफूज़]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/trump-major-announcement-record-oil-shipments-pass-through-the-strait-of-hormuz]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि तेहरान के साथ वॉशिंगटन की नई कूटनीतिक समझ लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में अभूतपूर्व समुद्री गतिविधियां देखी गईं। ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से 19 मिलियन बैरल तेल का प्रवाह हुआ। 'ट्रुथ सोशल' पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में, ट्रंप ने पिछले सप्ताह ईरान के साथ हुई कूटनीतिक समझौते के नतीजों की सराहना की। इस द्विपक्षीय समझौते के असर पर खुशी जताते हुए ट्रंप ने लिखा, "तेल की कीमतें तेजी से गिर रही हैं और दुनिया अब कहीं अधिक सुरक्षित जगह बन गई है!</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states" target="_blank">ईरान को अमेरिका का सम्मान करना सीखना होगा, ट्रंप की नई नसीहत</a></h3><div>व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में इन बातों को आगे बढ़ाते हुए, ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल का ट्रांसपोर्ट पिछले दिन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने इस घटनाक्रम को एक अहम उपलब्धि बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए यह ज़रूरी समुद्री रास्ता पूरी तरह से खुला और बिना किसी रुकावट के काम कर रहा है। ट्रंप ने कहा कल हमने इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले तेल की मात्रा से कहीं ज़्यादा तेल हासिल किया! हमारे पास तेल का ज़बरदस्त बहाव है। यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है। इस घटनाक्रम के पीछे के बड़े कूटनीतिक लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन ने दो अहम रणनीतिक लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए हैं: इस रास्ते से दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रखना और ईरान के परमाणु बम बनाने के रास्ते को हमेशा के लिए रोकना। क्षेत्रीय स्थिरता की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, ट्रंप ने शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उनका प्रशासन मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-took-a-dig-at-nato-mocked-italy-and-put-starmer-in-his-place" target="_blank">NATO को रगड़ा, इटली का उड़ाया मजाक, स्टार्मर की दिखा दी हैसियत, अलग मूड में नजर आए ट्रंप</a></h3><div>उन्होंने कहा कि हमारे पास दो चीज़ें हैं! हमारे पास एक खुला जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) है और एक ऐसा देश है जिसके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। इस रणनीतिक बदलाव के तहत, अमेरिका ने सोमवार को ईरानी कच्चे तेल की खेप पर लगी आर्थिक रोक को कुछ समय के लिए हटा दिया। यह कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उस घोषणा के बाद उठाया गया जिसमें कहा गया था कि तेहरान संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को देश में फिर से आने की अनुमति देगा। स्विट्जरलैंड के आलीशान बुर्गेनस्टॉक रिज़ॉर्ट में हुई अहम कूटनीतिक बातचीत के बाद वेंस ने पत्रकारों से कहा कि हमने एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी नींव रखी है।" यह बातचीत अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रही सैन्य दुश्मनी को खत्म करने के मकसद से की जा रही है। इस अहम प्रगति पर तेहरान का पक्ष रखते हुए, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि "परमाणु मुद्दे पर बहुत संक्षिप्त चर्चा हुई, लेकिन विवरण पर कोई चर्चा नहीं हुई।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:35:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/trump-major-announcement-record-oil-shipments-pass-through-the-strait-of-hormuz</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NATO को रगड़ा, इटली का उड़ाया मजाक, स्टार्मर की दिखा दी हैसियत, अलग मूड में नजर आए ट्रंप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/trump-took-a-dig-at-nato-mocked-italy-and-put-starmer-in-his-place]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिसके पीछे पड़ जाते हैं उसका क्या हश्र करते हैं यह तो आप बखूबी जानते हैं। उस व्यक्ति का मजाक उड़ाना हो, उस संस्थान की खिल्लियां उड़ानी हो, इससे ट्रंप कभी पीछे नहीं हटते।&nbsp; यही हाल उन्होंने अब एक तरफ जहां ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर का किया है, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलिनी का किया है, तो दूसरी तरफ वो नाटो के पीछे भी हाथ धोकर पड़ गए हैं। ईरान मामले में नाटो ने जिस तरह से अमेरिका का साथ देने से इंकार किया, उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ट्रिगर कर दिया है। और यही वजह है कि गाहे बगाहे उन्हें कोई भी मौका मिलता है, वह नाटो हो या ब्रिटेन पीएम हो या फिर इटली की पीएम हो। उसका मजाक उड़ाने से वो पीछे नहीं हटते।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states" target="_blank">ईरान को अमेरिका का सम्मान करना सीखना होगा, ट्रंप की नई नसीहत</a></h3><div>&nbsp;अब एक बार फिर कीर स्टार्मर के इस्तीफे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिप्पणी की है और उन्होंने कहा है कि कीर स्टार्मर कोई चर्चिल नहीं है। और तो और उन्होंने यह भी कह दिया कि कीर स्टार्मर ने हमारा साथ देने की जगह पर ऐसी भद्दी बात बोली कि उसका कोई सर पैर ही नहीं था। कीर स्टार्मर को लेकर उन्होंने कहा कि जब हमने उन्हें टेस्ट करने के लिए यह कहा कि आओ इस युद्ध में हमारा साथ दो तो केर स्टार्मर ने कहा कि आप युद्ध जीत जाएंगे तो हम आपके साथ खड़े हो जाएंगे।&nbsp; कमोबेश सिर्फ यह रवैया कि स्टार्मर का नहीं था बल्कि इटली से लेकर तमाम देशों तक ने उनका साथ देने से इंकार किया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready" target="_blank">Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयार</a></h3><div>इस वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज है। हाल में पीट हेक्सेथ ने भी एक बैठक में हिस्सा लिया तो नाटो 3.0 बनाने की बात कह दी। यानी कि भागीदारी का हिसाब किताब होगा। अमेरिका ताकत लगाएगा तो उसके बदले में वह पैसा वसूलेगा। इसके अलावा अब प्लानिंग यह भी है कि अमेरिका नाटो से अपने सैनिक साझेदारी को कम करेगा और अपने सैनिकों की संख्या भी घटाएगा। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में अब नाटो के साथ अमेरिका की लड़ाई सड़क पर दिखाई देने लगी है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:22:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/trump-took-a-dig-at-nato-mocked-italy-and-put-starmer-in-his-place</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[PoK में Protest से बौखलाया Pakistan, भारत बोला- Human Rights से ध्यान भटकाने की हताश कोशिश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-rattled-by-protests-in-pok-india-calls-desperate-attempt-to-divert-attention]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ की हालिया युद्ध की धमकी का कड़ा जवाब दिया। भारत ने कहा कि यह बयान इस्लामाबाद की ओर से मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की एक हताशा भरी कोशिश है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब नई दिल्ली ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही बेरहम कार्रवाई का मुद्दा उठाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की टिप्पणियों के बारे में हमने रिपोर्ट देखी हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/mea-hits-back-at-pakistan-empty-threats-says-it-is-trying-to-divert-the-world-attention" target="_blank">युद्ध करेंगे...Pakistan की गीदड़ भभकी पर MEA का पलटवार, कहा- दुनिया का ध्यान भटका रहे</a></h3><p> ऐसे बयान पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताशा भरी कोशिशें हैं। हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह और पूरी सख्ती के साथ खारिज करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में जो हालात बन रहे हैं, वे पाकिस्तान की उस दशकों पुरानी नीति का सीधा नतीजा हैं जिसके तहत वह अपने गैर-कानूनी और ज़बरदस्ती किए गए कब्ज़े वाले इलाकों में लोगों का सुनियोजित आर्थिक शोषण करता है, उन्हें बुनियादी अधिकारों से वंचित रखता है और प्रशासनिक दमन करता है। पाकिस्तानी सरकार ने इसके जवाब में बेहद बर्बर पुलिसिया कार्रवाई की है, जिसमें ज़रूरी सामान और दवाओं की सप्लाई रोकना, इंटरनेट बंद करना और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ़ जानलेवा बल का इस्तेमाल करना शामिल है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/british-prime-minister-resigns-name-of-the-new-pm-will-shake-india" target="_blank">ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने दिया इस्तीफा, भारत को हिला देगा नए PM का नाम</a></h3><p>अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा कि PoK में विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया जाए। जायसवाल ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, इसके कारण कई लोगों की जान चली गई है। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कामों, गलत हरकतों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार ठहराएगा। यह बयान आसिफ़ की उस चेतावनी के तीन दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर इस्लामाबाद को लगा कि सिंधु नदी प्रणाली पर भारत के कदम पाकिस्तान की जल सुरक्षा के लिए नुकसानदेह हैं, तो वह सैन्य कार्रवाई कर सकता है। शनिवार को एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस पल हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:17:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-rattled-by-protests-in-pok-india-calls-desperate-attempt-to-divert-attention</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने दिया इस्तीफा, भारत को हिला देगा नए PM का नाम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/british-prime-minister-resigns-name-of-the-new-pm-will-shake-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ब्रिटेन में एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। ब्रिटेन में मुस्लिम वोट बैंक पर टिकी लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद की स्टारमर के खिलाफ थे। जिसके बाद उन्हें प्रेशर में इस्तीफा देना पड़ गया। कीर स्टार्मर 7 सालों में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले पांचवें प्रधानमंत्री बन गए हैं। बहरहाल की स्टार्मर के इस्तीफे के बाद जिस शख्स के अगला प्रधानमंत्री बनने की सबसे ज्यादा उम्मीद है वो शख्स भारत के लिए सरदर्द बन सकता है क्योंकि ब्रिटेन के इस अगले संभावित प्रधानमंत्री का बयान सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। खबरें हैं कि एंडी बर्नहम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बताया जाता है कि एंडडी बर्नहम पिछले 40 सालों में लाखों ब्रिटिश बच्चियों का रेप करने वाले पाकिस्तानी मुस्लिमों के प्रति काफी नरम रुख रखते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/swearing-by-his-brother-netanyahu-gave-india-a-game-changing-capability" target="_blank">जब तक मैं PM हूं...भाई की कसम खाकर नेतन्याहू ने दी भारत को चौंकाने वाली ताकत!</a></h3><div>एंडी बर्नहम चाहते थे कि ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स का मामला दब जाए। दावे के मुताबिक एंडडी बर्नहम ने पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स की शिकार लड़कियों पर ही आरोप लगा दिया कि तुम इस मामले को प्रोपोगेंडा बना रही हो। उन्होंने मैनचेस्टर और पूरे देश में ग्रूमिंग गैंग्स की जांच को रोकने की कोशिश की। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स बीते जमाने की बातें हो गई हैं। जबकि इस बात के सबूत हैं कि आज भी ब्रिटेन में छोटी बच्चियों को शिकार बनाया जा रहा है। यहां तक कि उस इलाके में भी जहां से एंडी बर्नहम आते हैं। एंडी बर्नहम ने तो दोष पीड़ितों पर ही मड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह तक मानने से इंकार कर दिया कि जिन लड़कियों के साथ दुष्कर्म हुआ है, वह बच्चियां थी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/britain-suffers-its-seventh-blow-in-the-tenth-year-of-brexit" target="_blank">Brexit के 10वें साल में ब्रिटेन को 7वां झटका! लेबर पार्टी के 'चाणक्य' कीर स्टार्मर खुद अपनी ही बिछाई बिसात में कैसे मात खा गए?</a></h3><div>पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स ने अनगिनत छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया। उनका शोषण किया। यहां तक कि उनकी हत्या भी कर दी। लेकिन मुस्लिम वोट बैंक पर टिकी लेबर पार्टी ने आंखें मूंद ली।&nbsp; हैरानी की बात देखिए कि 2 दिन पहले ही एक ब्रिटिश सांसद रूप लॉ ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की जिसमें पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स की क्रूरता के बारे में बताया गया। इस रिपोर्ट में उन लड़कियों के बयान दर्ज हैं जिन्हें पाकिस्तानी मुस्लिमों ने अपना शिकार बनाया था।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 17:45:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/british-prime-minister-resigns-name-of-the-new-pm-will-shake-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[युद्ध करेंगे...Pakistan की गीदड़ भभकी पर MEA का पलटवार, कहा- दुनिया का ध्यान भटका रहे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/mea-hits-back-at-pakistan-empty-threats-says-it-is-trying-to-divert-the-world-attention]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत ने निलंबित सिंधु जल संधि पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ के "हम युद्ध करेंगे" वाले बयान की कड़ी आलोचना की। भारत ने कहा कि ये टिप्पणियां इस्लामाबाद की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं। नई दिल्ली का यह बयान आसिफ़ की उस धमकी के कुछ ही दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर संकट आया तो वह भारत के खिलाफ़ युद्ध छेड़ देंगे। इससे पहले, भारत ने कहा था कि सिंधु जल संधि को रोके रखने का उसका फ़ैसला बदला नहीं जाएगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready" target="_blank">Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयार</a></h3><div>मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों के बारे में हमने इस मामले पर रिपोर्ट देखी हैं। ऐसी बातें पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताशा भरी कोशिशें हैं। हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह और पूरी सख्ती के साथ खारिज करते हैं। जयसवाल ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के मौजूदा हालात का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की उस दशकों पुरानी नीति का सीधा नतीजा है, जिसके तहत वह अपने अवैध और ज़बरदस्ती किए गए कब्ज़े वाले इलाकों में लोगों का सुनियोजित आर्थिक शोषण करता है, उन्हें बुनियादी अधिकारों से वंचित रखता है और प्रशासनिक दमन करता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-propaganda-fails-again-air-force-tender-proves-all-36-rafale-fighter-jets-are-operational" target="_blank">Pakistan का प्रोपेगैंडा फिर फेल, Air Force के टेंडर ने साबित किया- सभी 36 Rafale लड़ाकू विमान Operational हैं</a></h3><div>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने आम नागरिकों के साथ निंदनीय व्यवहार किया है और अत्यधिक क्रूरतापूर्ण नीतियां अपनाई हैं, जिनमें ज़रूरी सामान और दवाओं की आपूर्ति रोकना, इंटरनेट बंद करना और निहत्थे नागरिकों के ख़िलाफ़ घातक बल का इस्तेमाल करना शामिल है। जयसवाल ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, इसके कारण कई लोगों की जान चली गई है। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कामों, गलत हरकतों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराएगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:58:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/mea-hits-back-at-pakistan-empty-threats-says-it-is-trying-to-divert-the-world-attention</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Lebanon पर US-Iran Deal से इज़राइल को झटका, नेतन्याहू बोले- सेना नहीं हटाएंगे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/israel-dealt-a-blow-by-us-iran-deal-regarding-lebanon-netanyahu-says-military-will-not-withdraw]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अंतरिम शांति समझौते और हाल ही में स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बीच, इज़राइल ईरान के खिलाफ़ युद्ध में अमेरिका के साथ शामिल था। चिंता है कि ट्रम्प प्रशासन लेबनान में तेहरान की स्थिति मज़बूत कर सकता है; लेबनान से बेंजामिन नेतन्याहू ने इज़राइली सेना को हटाने से इनकार कर दिया है। यह युद्ध फरवरी 2026 में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुआ था और अब यह ऐसे मोड़ पर है जहाँ वाशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत कर रहा है, और इज़राइल लेबनान को लेकर उलझन में फँसा हुआ है। पिछले हफ़्ते अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते (MOU) में लेबनान में लड़ाई रोकने की बात भी शामिल है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/fifth-round-of-talks-between-israel-and-lebanon-in-washington-today" target="_blank">Washington में Israel-Lebanon के बीच आज 5वें दौर की वार्ता, Peace Agreement पर टिकीं निगाहें</a></h3><div>इस मसौदे का पहला ही बिंदु कहता है: अमेरिका, ईरान और मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी इस समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर कर रहे हैं ताकि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। साथ ही, वे यह भी तय कर रहे हैं कि अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे, एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या उसकी धमकी से बचेंगे, और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, सोमवार को नेतन्याहू ने ऐसा लगा कि US-Iran MoU को नज़रअंदाज़ कर दिया और कहा कि इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक बनी रहेगी जब तक उन्हें अपने लोगों की सुरक्षा के लिए इसकी ज़रूरत होगी। स्विट्ज़रलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच तकनीकी बातचीत पूरी होने के बाद, अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि नेतन्याहू की सरकार को चिंता है कि अमेरिका लेबनान में ईरान के प्रभाव को बढ़ा सकता है, जिससे इस इलाके में इज़राइल की कार्रवाई करने की आज़ादी पर असर पड़ सकता है। Axios ने दो इज़राइली सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/heated-exchange-between-iran-and-uae-at-brics-meeting" target="_blank">BRICS बैठक में Iran और UAE के बीच तीखी झड़प, US-इजरायल के हमलों में साथ देने का लगा आरोप</a></h3><div>खबरों के मुताबिक, इज़राइली अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ईरान के साथ ट्रंप की नई समझ, लेबनान में ईरानी प्रॉक्सी संगठन हिज़्बुल्लाह की ताकत को कम करने के लिए इज़राइल और अमेरिका की सामूहिक कोशिशों को असल में कमज़ोर कर देगी।&nbsp;उन्हें इस बात की भी चिंता है कि अब जब भी इज़राइल लेबनान पर हमला करने की योजना बनाएगा, तो वॉशिंगटन शायद उस पर आपत्ति जता सकता है; साथ ही, ट्रंप का भी दबाव है कि इज़राइली सेना को दक्षिणी लेबनान से हटा लिया जाए।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:47:30 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/israel-dealt-a-blow-by-us-iran-deal-regarding-lebanon-netanyahu-says-military-will-not-withdraw</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[BRICS बैठक में Iran और UAE के बीच तीखी झड़प, US-इजरायल के हमलों में साथ देने का लगा आरोप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/heated-exchange-between-iran-and-uae-at-brics-meeting]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया। ईरानी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से यूएई पर आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल के ऑपरेशन के दौरान इस्लामिक रिपब्लिक के ख़िलाफ़ हुए सैन्य हमलों में UAE सीधे तौर पर शामिल था। भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप-सचिव ग़दीर निज़ामीपुर ने उच्च-स्तरीय सुरक्षा फ़ोरम के दौरान अमीराती प्रतिनिधिमंडल की कड़ी आलोचना करते हुए उनके दावों का कड़ा खंडन किया। इसमें कहा गया है कि सभा को संबोधित करते हुए नेज़ामीपुर ने यूएई के प्रतिनिधि द्वारा तेहरान पर पहले लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया और इसके बजाय चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर सीधे टकराव का रुख अपनाया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready" target="_blank">Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयार</a></h3><div>दूतावास ने लिखा, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप-सचिव डॉ. ग़दीर नेज़ामीपुर ने नई दिल्ली में #BRICS देशों की सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक में बोलते हुए, संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हालिया संकट शुरू करने के लिए अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाते हुए, नेज़ामीपुर ने अपनी आलोचना का दायरा बढ़ाते हुए UAE को भी इसमें शामिल किया। उन्होंने कहा कि यूएई ने न केवल अपने क्षेत्र का इस्तेमाल हमलों के लिए एक अड्डे के तौर पर करने दिया, बल्कि उन अभियानों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया जिनका निशाना ईरानी बुनियादी ढांचा था।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/major-victory-for-iran-oil-sanctions-lifted-how-will-india-reap-a-massive-benefit" target="_blank">Iran की बड़ी जीत, तेल से हट गया बैन, भारत को कैसे इससे होगा बंपर फायदा?</a></h3><div>इलाके में हाल की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा: 'पूरी दुनिया ने देखा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हमले और संकट की शुरुआत अमेरिका और ज़ायोनी शासन ने की थी। इनमें से कुछ हमले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ज़मीन पर बने ठिकानों से किए गए थे। फिर भी, इन दुश्मन जैसे कामों की निंदा करने के बजाय, UAE ने सीधे तौर पर हमले में हिस्सा लिया और अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों पर हमले के लिए करने दिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/fifth-round-of-talks-between-israel-and-lebanon-in-washington-today" target="_blank">Washington में Israel-Lebanon के बीच आज 5वें दौर की वार्ता, Peace Agreement पर टिकीं निगाहें</a></h3><div>यूएई के प्रतिनिधिमंडल से सीधे अपील करते हुए, नेज़ामीपुर ने नीति में बदलाव का आग्रह किया और 'प्रचार और जोखिम भरे साहसिक कार्यों'के खतरों के बारे में चेतावनी दी। पोस्ट में कहा गया हमें उम्मीद है कि संयुक्त अरब अमीरात, प्रचार और जोखिम भरे साहसिक कार्यों में शामिल होने के बजाय, अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों का सम्मान करेगा और शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग का रास्ता चुनेगा। सेशन के दौरान डिप्टी सेक्रेटरी ने एक विज़ुअल डिस्प्ले का भी इस्तेमाल किया, जिसमें मिनाब के उन छात्रों की तस्वीर दिखाई गई, जिनकी मौत कथित तौर पर क्षेत्रीय संघर्ष के शुरुआती दिनों में हुई थी। दूतावास ने लिखा, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी ने मिनाब के शहीद छात्रों की तस्वीर भी दिखाई ताकि इन हमलों के मानवीय नतीजों की ओर प्रतिभागियों का ध्यान खींचा जा सके। उन्होंने कहा, इस पोस्टर में उन बच्चों को दिखाया गया है जो अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के पहले दिन मारे गए थे।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:34:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/heated-exchange-between-iran-and-uae-at-brics-meeting</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pakistan का प्रोपेगैंडा फिर फेल, Air Force के टेंडर ने साबित किया- सभी 36 Rafale लड़ाकू विमान Operational हैं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-propaganda-fails-again-air-force-tender-proves-all-36-rafale-fighter-jets-are-operational]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पाकिस्तान के बार-बार किए जा रहे इन दावों को कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने कई राफेल फाइटर जेट खो दिए थे, भारतीय वायु सेना (IAF) के एक आधिकारिक दस्तावेज़ ने एक बार फिर गलत साबित कर दिया है। इस दस्तावेज़ में अभी सर्विस में मौजूद सभी 36 राफेल जेट के पूरे बेड़े के लिए 'ब्रिज सपोर्ट' की मांग की गई है। जून में जारी और 'इंडिया टुडे' द्वारा हासिल किए गए एयर हेडक्वार्टर के 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल' (RFP) में सभी 36 राफेल फाइटर जेट के लिए पांच महीने के 'ब्रिज सपोर्ट पैकेज' के लिए बोलियां मंगाई गई हैं। यह वही संख्या है जो भारत ने 2016 में सरकार-से-सरकार के बीच हुए समझौते के तहत फ्रांस से खरीदी थी। इस दस्तावेज़ में सितंबर 2026 के बाद भी फ्लीट को चालू रखने के लिए मेंटेनेंस, लॉजिस्टिक्स और टेक्निकल सपोर्ट की मांग की गई है। पांच महीने की सपोर्ट अवधि के दौरान लगभग 2,250 फ्लाइंग आवर्स की योजना बनाई गई है। इस 'ब्रिज सपोर्ट' व्यवस्था का मकसद यह पक्का करना है कि जब तक लंबे समय के लिए सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट फाइनल नहीं हो जाता, तब तक कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/defence-minister-rajnath-singh-statement-on-the-an-32-crash" target="_blank">AN-32 Crash पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh का बयान, देश जवानों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है</a></h3><div>RFP सीधे तौर पर पाकिस्तान के उस दावे को गलत साबित करता है कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत के कई राफेल जेट नष्ट हो गए थे। अगर कोई विमान नष्ट हुआ होता, तो मेंटेनेंस प्रपोज़ल में दिखाए गए बेड़े की संख्या कम होती। पाकिस्तान ने आधिकारिक बयानों और सुनियोजित सोशल मीडिया कैंपेन के ज़रिए बार-बार दावा किया था कि उसके सैनिकों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत के कई राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। भारत ने इन दावों को लगातार गलत जानकारी और दुष्प्रचार करार दिया और पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह IAF के ऑपरेशन की सफलता को कमतर दिखाने के लिए प्रोपेगैंडा कैंपेन चला रहा है। ताज़ा घटनाक्रम उन पुराने सबूतों को और मज़बूत करता है जिनसे पाकिस्तान के दावों पर पहले ही शक पैदा हो गया था। जिन राफेल विमानों के टेल नंबरों के बारे में पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया था कि वे "नष्ट" हो गए हैं, उनकी बाद में ऑपरेशनल उड़ान भरते हुए तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिससे इस्लामाबाद के दावों की पोल और खुल गई।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/a-dire-challenge-to-china-set-to-become-atmanirbhar-bharat-ultimate-weapon" target="_blank">IAF का गेम चेंजर Kamikaze Drone: China को सीधी चुनौती, बनेगा आत्मनिर्भर भारत का 'ब्रह्मास्त्र'</a></h3><div>ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल बेड़े ने अहम भूमिका निभाई और पाकिस्तान के अंदर मौजूद ठिकानों पर सटीक हमले किए। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान विमानों ने उम्मीद के मुताबिक काम किया और उन्होंने किसी भी तरह के युद्ध-जनित नुकसान के दावों को बार-बार खारिज किया है। जून 2026 का टेंडर अब वह ताज़ा आधिकारिक रिकॉर्ड है जो भारत के इस रुख की पुष्टि करता है कि उसका राफेल बेड़ा पूरी तरह सुरक्षित है; इससे विमानों के नष्ट होने के पाकिस्तान के बार-बार किए जाने वाले दावों को एक और झटका लगा है। इस बीच, भारत 'मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट' (MRFA) प्रोग्राम के तहत फ्रांस की डिफेंस कंपनी 'डसॉल्ट एविएशन' से 114 और राफेल फाइटर जेट खरीदने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इस प्रस्तावित खरीद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हाल ही में हुई बातचीत में चर्चा हुई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि राफेल प्रोग्राम पर बातचीत आगे बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 'मेक इन इंडिया' पहल पर ज़ोर दिया और भारत व फ्रांस के बीच भविष्य के डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए मिलकर डेवलपमेंट, डिज़ाइन और प्रोडक्शन करने वाले फ्रेमवर्क की वकालत की।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:15:34 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-propaganda-fails-again-air-force-tender-proves-all-36-rafale-fighter-jets-are-operational</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Washington में Israel-Lebanon के बीच आज 5वें दौर की वार्ता, Peace Agreement पर टिकीं निगाहें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/fifth-round-of-talks-between-israel-and-lebanon-in-washington-today]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इज़राइल और लेबनान मंगलवार (स्थानीय समय) को वाशिंगटन डीसी में बातचीत के एक और दौर में शामिल होने वाले हैं। CNN ने विदेश विभाग के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत का यह पांचवां दौर राजनीतिक और सैन्य मुद्दों पर सत्रों के साथ होगा। वाशिंगटन का लक्ष्य "व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते" पर प्रगति करना है, जो अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) पर बातचीत के पहले दौर के पूरा होने के बाद हो रहा है। ये बैठकें लेबनान में हाल ही में फिर से लागू हुए संघर्ष-विराम (सीज़फायर) के बीच हो रही हैं, जहाँ हिज़्बुल्लाह और इज़राइल द्वारा घातक उल्लंघन ने अमेरिका-ईरान बातचीत को पटरी से उतारने का खतरा पैदा कर दिया है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/beyond-the-ceasefire-will-the-world-move-towards-non-violence" target="_blank">युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?</a></h3><div>विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत के इस पांचवें दौर में राजनीतिक और सैन्य मुद्दों पर सत्र शामिल होंगे, क्योंकि वाशिंगटन व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते पर आगे बढ़ना चाहता है। दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत का चौथा दौर इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी विदेश विभाग में शुरू हुआ था, जिसमें दोनों देशों के उच्च-स्तरीय राजनयिक शामिल हुए थे, जबकि सीमा-पार सक्रिय शत्रुता जारी थी। संबंधित राजनयिक समूहों का नेतृत्व अमेरिका में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर और वाशिंगटन में लेबनान की प्रतिनिधि नाडा हमादेह मोवाद ने किया। रुबियो के वरिष्ठ सलाहकार डैनियल हॉलर ने भी सत्रों में भाग लिया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states" target="_blank">ईरान को अमेरिका का सम्मान करना सीखना होगा, ट्रंप की नई नसीहत</a></h3><div>वार्ता के बाद, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जोर देकर कहा कि इज़राइल और लेबनान कुछ ही दिनों में शांति संधि करने में सक्षम हैं, और समझौते में एकमात्र बाधा के रूप में हिज़्बुल्लाह की उपस्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि लेबनान में इज़राइल का कोई क्षेत्रीय दावा नहीं है। हिज़्बुल्लाह ही बाधा है। ईरान के बिना हिज़्बुल्लाह का कोई अस्तित्व नहीं है। यह वार्ता लेबनान में जारी गतिरोध के बीच हुई, क्योंकि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को नजरअंदाज करते हुए अपने राष्ट्र और नागरिकों की रक्षा करने के अपने संकल्प की पुष्टि की, और कहा कि इज़राइली रक्षा बल (आईडीएफ) दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बने रहेंगे, जबकि स्विट्जरलैंड में हुई चतुर्भुजीय बैठक में लेबनान में शत्रुता समाप्त करने के लिए एक "संघर्ष-निवारक क्षेत्र" बनाने पर सहमति बनी थी।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:08:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/fifth-round-of-talks-between-israel-and-lebanon-in-washington-today</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[G7 Summit के बाद जापान की PM Takaichi का Delhi दौरा, PM Modi के साथ चीन पर बनेगी नई रणनीति?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/japan-pm-takaichi-to-visit-delhi-g7-summit-will-new-strategy-regarding-china-be-formulated-pm-modi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के अगले महीने 1 से 3 जुलाई तक भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आने की उम्मीद है। सूत्रों ने मंगलवार सुबह बताया कि "लॉजिस्टिकल दिक्कतों" की वजह से उनकी यात्रा नई दिल्ली में होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के अलावा गुवाहाटी पर भी यात्रा के संभावित स्थान के तौर पर विचार किया गया था और जापानी पक्ष को इसका प्रस्ताव भी दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची की घरेलू व्यस्तताओं को देखते हुए, उनके भारत आने और यहां से जाने के बीच का समय काफी कम है। इसे और राजधानी के बाहर यात्रा करने से जुड़ी अतिरिक्त लॉजिस्टिकल दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए, यात्रा के दिल्ली में ही होने की संभावना है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/japan-draws-a-red-line-at-the-g7-summit" target="_blank">G7 Summit में Japan ने खींची 'रेड लाइन', China की चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया खास प्लान!</a></h3><div>उन्होंने कहा कि इसमें कुछ ऐसे प्रोग्राम भी शामिल किए जा सकते हैं जिन्हें लेकर दोनों पक्ष उत्साहित हैं, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा मिल सके। पिछले हफ्ते, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि जापान के प्रधानमंत्री के 1 जुलाई को गुवाहाटी आने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर-स्तरीय बातचीत करने की संभावना है। मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "जापान की माननीय प्रधानमंत्री, महामहिम सनाए ताकाइची के 1 जुलाई से गुवाहाटी आने और माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodiji के साथ शिखर-स्तरीय बातचीत करने की संभावना है। जापान की स्थानीय मीडिया ने हाल ही में खबर दी थी कि ताकाइची जुलाई की शुरुआत में असम का दौरा करने वाली हैं। निक्केई की 18 जून की रिपोर्ट के अनुसार, उनके साथ 50 से ज़्यादा जापानी कंपनियों और संगठनों के नेता भी होंगे।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/modi-japan-summit-guwahati-assam-northeast-development" target="_blank">Japan PM से दिल्ली की बजाय गुवाहाटी में क्यों मिलेंगे मोदी? क्या करने जा रही है मोदी और हिमंता की जोड़ी?</a></h3><div>इस बीच, NHK की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा और अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में सहयोग के ठोस उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह चर्चा पिछले साल पीएम मोदी की जापान यात्रा के दौरान घोषित अगले दशक के लिए जापान-भारत के संयुक्त विज़न पर आधारित होगी। इस महीने की शुरुआत में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ताकाइची के साथ अपनी बैठक में, पीएम मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और जापान विभिन्न क्षेत्रों में अपने संबंधों को और गहरा करना जारी रखेंगे, जिसमें व्यापार और निवेश प्राथमिकता वाले क्षेत्र बने रहेंगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:04:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/japan-pm-takaichi-to-visit-delhi-g7-summit-will-new-strategy-regarding-china-be-formulated-pm-modi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[India-US Trade Deal: दिल्ली में गोयल-ग्रीर की हाई-लेवल मीटिंग, खुलेंगे नए आर्थिक अवसर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-us-trade-deal-high-level-meeting-between-goyal-and-greer-in-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को नई दिल्ली में अंतरिम समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए मुलाकात की। इस समझौते की शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने की थी।</div><div>भारत में अमेरिकी दूतावास के आधिकारिक अकाउंट ने बताया कि वे एक निष्पक्ष और आपसी व्यापार समझौते को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार खुलें और दोनों देशों को फायदा हो। एक्स पर आधिकारिक अकाउंट के अनुसार, वाणिज्य भवन में हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में अंतरिम समझौते और एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते, दोनों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस महत्वपूर्ण बातचीत के लिए राजदूत ग्रीर के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और एक वरिष्ठ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।</div><div>जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए अंतरिम समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए मुलाकात की। बयान में कहा गया है कि अमेरिका एक निष्पक्ष और आपसी व्यापार समझौते को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार खुलें और दोनों देशों को फायदा हो। इससे पहले, मंत्री पीयूष गोयल ने वाणिज्य विभाग में आए अमेरिकी अधिकारियों का स्वागत किया और व्यापार संबंधों के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और उनके साथ आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया, जो चल रही बातचीत का हिस्सा थे।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/major-victory-for-iran-oil-sanctions-lifted-how-will-india-reap-a-massive-benefit" target="_blank">Iran की बड़ी जीत, तेल से हट गया बैन, भारत को कैसे इससे होगा बंपर फायदा?</a></h3><div>एक्स पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा मेंराजदूत जेमिसन ग्रीर, राजदूत सर्जियो गोर और उनके प्रतिनिधिमंडल का हार्दिक स्वागत है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक बातचीत की उम्मीद है। इस बीच, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) राजदूत जेमिसन ग्रीर के साथ अपनी बैठक का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि चल रही बातचीत से अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ होगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states" target="_blank">ईरान को अमेरिका का सम्मान करना सीखना होगा, ट्रंप की नई नसीहत</a></h3><div>एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि आज नई दिल्ली में मंत्री पीयूष गोयल और राजदूत ग्रीर के साथ मिलकर बहुत अच्छा लगा। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत चल रही है। एक्स पर एक और पोस्ट में, गोर ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) राजदूत जेमिसन ग्रीर की भारत यात्रा का स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से "दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और अमेरिका-भारत आर्थिक साझेदारी काफी मज़बूत होगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:00:21 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-us-trade-deal-high-level-meeting-between-goyal-and-greer-in-delhi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ईरान को अमेरिका का सम्मान करना सीखना होगा, ट्रंप की नई नसीहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान-इज़राइल युद्ध खत्म होने के बाद शांति बनाए रखने में तेहरान की ओर से सम्मान दिखाना सबसे अहम बात होगी। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने से तेल की भारी आपूर्ति शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने सोमवार को अपने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, "जब तक वे हमारा सम्मान करते हैं - मैं 'डर' शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहता क्योंकि यह सही शब्द नहीं है - लेकिन जब तक वे हमारा सम्मान करते हैं, हमें कोई परेशानी नहीं होगी। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने इस अहम शिपिंग रूट को बंद कर दिया था, जिससे उस इलाके के बाहर भी ईंधन की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई थीं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/major-victory-for-iran-oil-sanctions-lifted-how-will-india-reap-a-massive-benefit" target="_blank">Iran की बड़ी जीत, तेल से हट गया बैन, भारत को कैसे इससे होगा बंपर फायदा?</a></h3><div>हालांकि लड़ाई रोकने और रास्ता फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम समझौता हुआ था, लेकिन मुख्य रास्ता अभी भी बारूदी सुरंगों (माइंस) की वजह से बंद है, जबकि सप्ताहांत में दर्जनों जहाज़ों ने इस इलाके से सफलतापूर्वक गुज़रकर दिखाया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ ने सोमवार को ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रबंधन ईरान ही करेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक। स्विट्ज़रलैंड से लौटते समय विमान में ईरानी सरकारी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि हम इस जलडमरूमध्य को आवाजाही के लिए फिर से चालू कर पाएंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक अर्थव्यवस्था में खुशहाली वापस ला पाएंगे।&nbsp;</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready" target="_blank">Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयार</a></h3><div>घालीबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार रात ओमान पहुँचे, जहाँ उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसैदी के साथ शांति प्रयासों और जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से सुरक्षित आवाजाही के बारे में बातचीत की। अंतरिम समझौते के तहत, अमेरिकी ट्रेजरी ने सोमवार को ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में छूट देने के लिए 60 दिन का लाइसेंस जारी किया। खास बात यह है कि इस लाइसेंस से ईरानी तेल का अमेरिका में आयात हो सकेगा; अमेरिका ने 1990 के दशक के बाद से ईरानी तेल का कोई खास आयात नहीं किया है। इस जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ी है। एनालिटिक्स फर्म 'केप्लर' (Kpler) के डेटा के अनुसार, सप्ताहांत (वीकेंड) में 71 बार जहाज गुजरने की पुष्टि हुई; शनिवार को सबसे ज़्यादा 35 जहाज गुजरे, जबकि युद्ध से पहले यहाँ रोजाना औसतन 100 से 130 जहाज गुजरते थे। बारूदी सुरंगों वाले बीच के रास्ते (सेंट्रल चैनल) से बचने के लिए, जहाज ईरानी जलक्षेत्र से होकर जाने वाले संकरे उत्तरी रास्ते या ओमान के जलक्षेत्र से होकर जाने वाले दक्षिणी रास्ते को चुन रहे हैं। बाजार की प्रतिक्रिया कमोडिटी की कीमतों में दिखी; ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.2 प्रतिशत गिरकर 77.52 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले के लगभग 70 डॉलर के स्तर के करीब पहुँच रही है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:51:41 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-have-to-learn-to-respect-the-united-states</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[UK में Keir Starmer अर्श से फर्श पर, प्रचंड बहुमत के 2 साल बाद ही क्यों देना पड़ा इस्तीफा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/keir-starmer-in-uk-why-did-he-have-to-resign-just-two-years-after-a-landslide-victory]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>ब्रिटेन के राजनीतिक इतिहास में पांच जुलाई 2024 का दिन केअर स्टॉर्मर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया था। आम चुनाव में 174 सीट के प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बाद वह पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में ‘डाउनिंग स्ट्रीट’ (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) पहुंचे थे। 
लेकिन सत्ता की यह शानदार शुरुआत महज दो वर्ष के भीतर ही ऐसे मोड़ पर पहुंच गई, जहां उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। आखिर हालात यहां तक कैसे पहुंच गए?
भावनाओं और गरिमा से परिपूर्ण केअर स्टॉर्मर का इस्तीफा भाषण कई लोगों के लिए इसलिए भी चौंकाने वाला था, क्योंकि उनके अनुसार सरकार ने अपने कार्यकाल में ऐसी कई उपलब्धियां हासिल की थीं, जिनकी अपेक्षा आमतौर पर लेबर पार्टी के किसी प्रधानमंत्री से की जाती है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/king-of-the-north-returns-to-uk-politics-will-andy-burnham-become-the-next-pm" target="_blank">UK की सियासत में 'King of the North' की वापसी, क्या Andy Burnham बनेंगे अगले PM?</a></h3><p>
</p><p>न्यूनतम वेतन बढ़ाया गया, श्रमिकों के रोजगार अधिकारों को मजबूत किया गया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में उपचार के लिए प्रतीक्षा सूची कम हुई, पांच लाख बच्चों को गरीबी से बाहर निकालने की दिशा में प्रगति हुई और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने वृद्धि दर्ज की, भले ही इसकी रफ्तार धीमी रही हो। 
 स्टॉर्मर के समर्थकों की नजर में वह (निवर्तमान प्रधानमंत्री) आंडबरविहीन और मर्यादित व्यक्ति हैं, जो राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए पूरी गंभीरता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल अलग थी। सांसदों को मतदाताओं के बीच अक्सर स्टॉर्मर के प्रति गहरी नाराजगी और तीखे विरोध का सामना करना पड़ता था।</p><p><span style="font-size: 1rem;">वर्ष 2024 में ‘‘बदलाव’’ लाने के उनके वादे के पूरा नहीं होने की शिकायतों के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से गिरती चली गई।
अतीत में कई प्रधानमंत्रियों को भी इस तरह जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। वर्ष 1980-81 में मार्गरेट थैचर का कार्यकाल भी इसका उदाहरण पेश करता है, लेकिन बाद में उन्होंने लगातार दो और आम चुनाव जीते। फिर भी आज की स्थिति अलग प्रतीत होती है और यही वजह है कि स्टॉर्मर को महसूस हुआ कि अब पद छोड़ने का समय आ गया है।
इतने बड़े बहुमत के बावजूद उनकी सरकार कभी बहुत लोकप्रिय नहीं रही। उनकी पार्टी की जीत का बड़ा कारण सत्ता में रही कंजर्वेटिव पार्टी के प्रति, खासकर बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस के कार्यकाल से जुड़ी विफलताओं के बाद व्यापक असंतोष था।</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/how-will-pm-change-in-britain-without-a-general-election-keir-starmer-resignation" target="_blank">Britain में बिना General Election कैसे बदलेगा PM? जानें Keir Starmer के इस्तीफे का पूरा गणित</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">स्टॉर्मर की जीत ऐसे चुनाव में हुई थी, जिसमें मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तरों में से एक था और उनकी पार्टी को केवल 33.7 प्रतिशत वोट मिले थे।

 ‘स्टॉर्मरवाद जैसी कोई चीज नहीं’
 
 नयी सरकार दिशाहीन नजर आई, क्योंकि वह देश के लिए कोई प्रेरक और स्पष्ट दृष्टिकोण पेश नहीं कर सकी। स्वयं स्टॉर्मर ने एक बार कहा था, “स्टॉर्मरवाद जैसी कोई चीज नहीं है और न कभी होगी।”
 स्टॉर्मर का तरीका गंभीर तो था, लेकिन तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित था; (तथा) उन्हें विचारों या सिद्धांतों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। इसका परिणाम यह हुआ कि जब दक्षिणपंथी जनवादी राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाली निगेल फराज की ‘‘रिफॉर्म यूके’’ और वामपंथी जनवादी राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले जैक पोलांस्की के ‘ग्रीन्स’ जैसे दल मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर रहे थे, तब सरकार उनसे कटी हुई दिखाई दी।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">स्टॉर्मर ऐसे समय में मध्यमार्गी सरकार की पेशकश कर रहे थे, जब ब्रिटेन की राजनीति का रुझान तेजी से केंद्र से दूर, अधिक ध्रुवीकृत और भावनात्मक राजनीति की ओर बढ़ रहा था।
सरकार शुरुआत से ही चुनौतियों में घिर गई। उसने सबसे पहले गरीबतम पेंशनभोगियों को छोड़कर अन्य सभी के लिए शीतकालीन ईंधन सहायता में कटौती का फैसला किया। इस कदम के राजनीतिक प्रभावों का सही आकलन नहीं किया गया और मतदाताओं ने इसे नकारात्मक रूप से लिया।
इसके कुछ समय बाद सरकार ने तेजी से बढ़ रहे कल्याणकारी खर्च में कटौती का प्रयास किया। दोनों ही मुद्दों पर उसे अपने फैसले वापस लेने पड़े और यही सरकार की पहचान बन गया।
मानो इतना सब भी काफी नहीं था, तभी अमेरिका में राजदूत के रूप में पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति का फैसला सरकार के लिए भारी पड़ गया।</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/keir-starmer-emotional-farewell-from-downing-street-says-i-always-put-the-uk-first" target="_blank">10 Downing Street से Keir Starmer की भावुक विदाई, बोले- मैंने हमेशा UK को पहले रखा</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">जेफ्री एप्स्टीन से जुड़ी फाइलों में हुए खुलासे सार्वजनिक होने के बाद यह नियुक्ति राजनीतिक रूप से विनाशकारी साबित हुई। ईमानदारी और नैतिकता की छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे स्टॉर्मर इस पूरे घटनाक्रम में असहाय और अक्षम नजर आए।
हालांकि मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बढ़ती महंगाई थी। सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने और रोजगार अधिकारों को मजबूत करने जैसे कदम उठाकर कामकाजी गरीबों की स्थिति सुधारने की कोशिश की, लेकिन बहुत से लोगों को लगा कि उनकी जिंदगी में कोई वास्तविक बदलाव नहीं आया है और वे अब भी मितव्ययिता तथा आर्थिक दबाव के दौर में जी रहे हैं।
मई 2026 में इंग्लैंड के स्थानीय चुनावों के नतीजे इसी भावना को दर्शाते है।</span></p><p>लेबर पार्टी को केवल 17 प्रतिशत वोट मिले, जबकि ‘रिफॉर्म यूके’ ने 26 प्रतिशत मत हासिल किए।
वेल्स में लेबर पार्टी को पहली बार सेनेड की सत्ता गंवानी पड़ी और क्षेत्रीय राष्ट्रवादी पार्टी प्लेड काम्री ने उसे पीछे छोड़ दिया। हालात इतने प्रतिकूल रहे कि वेल्श लेबर तीसरे स्थान पर खिसक गई और पार्टी की नेता एलुनेड मॉर्गन भी अपनी सीट बचाने में असफल रहीं।
रिफॉर्म यूके की संभावित सरकार का खतरा ही वह कारण बना जिसने लेबर सांसदों को चिंतित कर दिया और स्टॉर्मर के समर्थन की जमीन खिसका दी। मेकरफील्ड में एंडी बर्नहैम की जीत ने संकेत दिया कि वह खोए हुए मतदाताओं को पार्टी में वापस ला सकते हैं। मेकरफील्ड में मई में रिफॉर्म यूके ने अधिकांश परिषद सीट जीती थीं।
 लेबर सरकारों को ब्रिटेन के मुख्यतः दक्षिणपंथी मीडिया परिदृश्य के ध्रुवीकरण वाले प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/britain-suffers-its-seventh-blow-in-the-tenth-year-of-brexit" target="_blank">Brexit के 10वें साल में ब्रिटेन को 7वां झटका! लेबर पार्टी के 'चाणक्य' कीर स्टार्मर खुद अपनी ही बिछाई बिसात में कैसे मात खा गए?</a></h3><p> </p><p>यह मीडिया अक्सर असंतोष और अलगाव की भावना को हवा देता है तथा प्रवासियों और कथित रूप से ‘‘जनता से कटे हुए’’ अभिजात वर्ग के प्रति नाराजगी को बढ़ावा देता है।
ऐसा लगता था कि स्टॉर्मर चाहते थे कि लोग जटिल मुद्दों को गहराई और संतुलन के साथ समझें, ताकि उनके विवेकपूर्ण समाधान निकल सकें, लेकिन शायद वह दौर अब खत्म हो रहा है। मतदाता ज्यादातर यह चाहते हैं कि राजनीति से तुरंत असर दिखे। ऐसा लगता है कि बहुत से लोगों को रोज़गार और स्वास्थ्य जैसे मामलों पर किए गए कामों के बारे में पता ही नहीं है।
 कुछ लोगों को लगता है कि अपराध और आव्रजन बढ़ रहे हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। इसके बावजूद जनधारणा और तथ्यों के बीच की इस खाई को पाटना स्टॉर्मर सरकार के लिए आसान नहीं रहा। ऐसे दौर में, जब जनवादी राजनीति भावनाओं और त्वरित संदेशों के बल पर आगे बढ़ रही हो, स्टॉर्मर का तथ्य-आधारित और प्रशासनिक दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से संघर्ष करता दिखाई दिया।
</p><p>इतिहासकार स्टॉर्मर को किस रूप में याद करेंगे, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे क्या होता है।
यदि लेबर सत्ता में रहते हुए खुद को नए सिरे से मजबूत करने में सफल होती है तो स्टॉर्मर को ऐसे नेता के रूप में देखा जाएगा जिसने लेबर को फिर से शासन करने योग्य पार्टी बनाया और देश तथा विदेश में मौजूद जटिल चुनौतियों से जूझने का प्रयास किया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका प्रदर्शन घरेलू राजनीति की तुलना में बेहतर रहा। उन्होंने यूक्रेन के प्रति समर्थन बनाए रखा, फलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी और ब्रिटेन को ट्रंप के ईरान युद्ध से दूर रखा।
लेकिन यदि अगला आम चुनाव रिफॉर्म यूके जीतती है, तो इतिहास उन्हें उस नेता के रूप में भी देख सकता है जिसके कार्यकाल ने फराज सरकार के लिए रास्ता तैयार किया।
उनका इस्तीफा भाषण एक ऐसे ईमानदार नेता की तस्वीर पेश करता है, जिसने गंभीरता, जिम्मेदारी और जनकल्याण की भावना के साथ अपने देश की सेवा करने का प्रयास किया।
स्टॉर्मर हमेशा कहते रहे कि ब्रिटेन को नयी दिशा देने में दस वर्ष लगेंगे। उनकी बदकिस्मती रही कि उन्हें केवल दो वर्ष ही मिले।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:32:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/keir-starmer-in-uk-why-did-he-have-to-resign-just-two-years-after-a-landslide-victory</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Brexit के 10वें साल में ब्रिटेन को 7वां झटका! लेबर पार्टी के 'चाणक्य' कीर स्टार्मर खुद अपनी ही बिछाई बिसात में कैसे मात खा गए?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/britain-suffers-its-seventh-blow-in-the-tenth-year-of-brexit]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आखिरकार सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए ब्रिटेन के 63 साल के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने सत्ताधारी लेबर पार्टी का नेता पद भी छोड़ने की घोषणा की। इसके साथ ही स्टार्मर 10 साल में ऐसे छठे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा है। आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट से स्टार्मर ने कहा कि मेरी लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में अगुआई करने के लिए सही व्यक्ति हूं। मेरे लिए देश पहले है और मैंने देश हित में इस्तीफे का यह फैसला लिया है। भावुक भाषण में स्टार्मर ने कहा कि दो साल पहले पीएम का पद संभालना सबसे गर्व का पल था। 14 वर्षों बाद देश में लेबर पार्टी की सरकार सत्ता में आई। लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। भावी पीएम को पूरा सपोर्ट करूंगा। 2024 में स्टार्मर ने लेबर पार्टी को बंपर जीत दिलाई थी। अब उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब लेबर पार्टी में उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। पार्टी के 100 से ज्यादा सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/king-of-the-north-returns-to-uk-politics-will-andy-burnham-become-the-next-pm" target="_blank">UK की सियासत में 'King of the North' की वापसी, क्या Andy Burnham बनेंगे अगले PM?</a></h3><h2>स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों</h2><div>कीर स्टार्मर की लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादो, नीतिगत यू टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा न कर पाने से स्टार्मर की छवि को नुकसान पहुंचा। अमेरिकी दूत पीटर मैडेलसन का नाम एपस्टीन फाइल्स में आने से काफी आलोचना हुई। प्रवासी विरोधी रुख वाली रिफॉर्म यूके ने लगातार जनमत सर्वेक्षणों में बढ़त हासिल की।</div><h2>शुरुआती 100 दिन</h2><div>उनकी सरकार के शुरुआती 100 दिनों में ही जिन्हें अक्सर नए नेताओं के लिए 'हनीमून पीरियड' माना जाता है स्टार्मर की मुश्किलें शुरू हो गईं। उन पर और उनके कैबिनेट के अन्य मंत्रियों पर हज़ारों पाउंड कीमत के फ़ुटबॉल मैच और कॉन्सर्ट के टिकट और तोहफ़े लेने के आरोप लगे। फ्रीबीज़ गेट (मुफ़्त तोहफ़ों का मामला) कहे जाने वाले इस विवाद के कारण स्टारमर को जनता की भारी नाराज़गी का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी लोकप्रियता रेटिंग गिर गई। हालाँकि उन्होंने तोहफ़ों और टिकटों का खर्च वापस कर दिया और चंदे के लिए कड़े नियम लागू किए, लेकिन तब तक काफ़ी नुकसान हो चुका था। पद संभालने के दो महीने के भीतर ही, 43% वोटर उन्हें एक बुरा प्रधानमंत्री मानने लगे थे। 15 जून, 2026 तक यह आँकड़ा बढ़कर 73% हो गया। लगभग 1 करोड़ पेंशनभोगियों के लिए सर्दियों में ईंधन पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती करके नेशनल हेल्थ सर्विस को मज़बूत करने की उनकी कोशिशें, सज़ा पूरी होने से पहले 1,700 कैदियों को रिहा करने का फ़ैसला, चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर सू ग्रे को बहुत ज़्यादा पैसे देने से जुड़ा विवाद और अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए लगभग 8 अरब डॉलर की खर्च में कटौती का वादा—इन सभी बातों को जनता और पार्टी के सदस्यों ने पसंद नहीं किया। एक और बात जिसकी वजह से उनकी अपनी पार्टी के सांसदों के साथ उनका टकराव हुआ, वह थी "दो-बच्चों तक ही बेनिफ़िट की सीमा" वाली नीति को जारी रखने का उनका फ़ैसला। यह नीति 2017 में कंज़र्वेटिव पार्टी ने शुरू की थी और तब से लेबर पार्टी इसका ज़ोरदार विरोध करती आ रही थी। इस विवादित नीति का मकसद माता-पिता को मिलने वाली चाइल्ड सपोर्ट (यूनिवर्सल क्रेडिट या चाइल्ड टैक्स क्रेडिट के तौर पर) को सिर्फ़ पहले दो बच्चों तक सीमित करना था। ब्रिटेन में यह नीति बहुत अलोकप्रिय थी और स्टारमर ने इसे इसी साल अप्रैल में खत्म किया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/keir-starmer-emotional-farewell-from-downing-street-says-i-always-put-the-uk-first" target="_blank">10 Downing Street से Keir Starmer की भावुक विदाई, बोले- मैंने हमेशा UK को पहले रखा</a></h3><h2>क्या 17 जुलाई तक मिलेगा नया पीएम ?</h2><div>कीर स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी का नया नेता और पीएम चुने जाने तक मै पद पर बना रहूंगा। लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी, 9 जुलाई से नामाकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से पहले नए नेता का चुनाव करने की कोशिश होगी। अगर पार्टी किसी एक उम्मीदवार पर सहमत होती है तो नया पीएम जुलाई मध्य तक पद संभाल सकता है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार हुए तो चुनाव होगा। तब 1 सितंबर से पहले नेता चुन लिया जाएगा।</div><h2>ब्रेक्जिट का चक्रव्यूह: 10 साल बाद कहाँ खड़ा है ब्रिटेन?</h2><div>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कुर्सी से स्टार्मर का इस्तीफा ठीक उस मोड़ पर आया है, जब पूरा देश यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने यानी ब्रेक्जिट के ऐतिहासिक फैसले की दसवीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद, आज ब्रेक्जिट को लेकर ब्रिटेन की जनता का मूड पूरी तरह बदल चुका है। दस साल पहले, ब्रेक्जिट समर्थकों ने मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर ईयू से अलग होने के लिए वोट किया था—संप्रभुता, प्रवासियों पर नियंत्रण और आर्थिक समृद्धि। लेकिन एक दशक लंबा वक्त गुजरने के बाद भी ब्रिटेन आज भी संघर्ष की आग में झुलस रहा है। ब्रिटिश सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है। घटता राजस्व, रिकॉर्ड कर्ज, टैक्स में भारी बढ़ोतरी और कमरतोड़ महंगाई। गैर-ईयू प्रवासियों को रोकने के मामले में सरकार को करारी नाकामी हाथ लगी है। कस्टम्स की पेचीदगियों और कागजी कार्रवाई ने स्थानीय बिजनेसेज का दम घोंट दिया है। यही वजह है कि आज कम से कम 57% ब्रिटिश नागरिक खुले तौर पर यह मानते हैं कि यूरोपीय संघ को छोड़ने का उनका फैसला एक बहुत बड़ी भूल थी। भले ही लेबर पार्टी ने शुरुआत में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह का विरोध किया था और वह यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद स्टार्मर की रणनीति बिल्कुल अलग थी। वह ईयू में दोबारा शामिल हुए बिना 'यूके-ईयू रीसेट' यानी केवल रिश्तों को सुधारना चाहते थे। राजनीतिक रूप से उनके पास हाथ-पैर मारने की ज्यादा जगह नहीं थी, खासकर ऐसे समय में जब कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट ने पहले से ही कराह रही ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को आईसीयू (ICयू) में धकेल दिया। ब्रेक्जिट के पूरे 10 साल बाद भी, दोनों पक्षों के बीच व्यापार, कृषि निर्यात, युवाओं की आवाजाही, बॉर्डर कंट्रोल और ब्रिटिश सामानों पर लगने वाली गैर-टैरिफ पाबंदियों जैसे पेचीदा सवाल आज भी जस के तस बने हुए हैं। यही वो कांटे हैं जो 'यूके-ईयू रीसेट' की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहे हैं।</div><h2>विदेश में कामयाबियाँ, देश में मुश्किलें</h2><div>घरेलू मोर्चे पर उनकी नाकामियाँ इतनी बड़ी थीं कि विदेश नीति में मिली कामयाबियाँ उनकी भरपाई नहीं कर सकीं। विदेश नीति में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अच्छे संबंध बनाए (कम से कम फरवरी 2026 में ईरान युद्ध शुरू होने तक), अपने यूरोपीय समकक्षों की तुलना में टैरिफ़ का बहुत फ़ायदेमंद समझौता किया, भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता किया और EU के साथ संबंधों को नए सिरे से बेहतर बनाने की अच्छी शुरुआत की। हालांकि उनकी शुरुआत पहले से ही कमज़ोर आधार से हुई थी, लेकिन "बदलाव" का उनका वादा कभी पूरा नहीं हो सका। उनके कार्यकाल में बार-बार इस्तीफ़े, काम में कमियां, नीतियों में अचानक बदलाव, पार्टी के अंदर झगड़े और नेतृत्व को लेकर खींचतान जैसी बातें देखने को मिलीं। वह एक ऐसा ठोस नीतिगत एजेंडा लागू करने में संघर्ष करते रहे जो गैर-EU देशों से बढ़ते आप्रवासन को नियंत्रित कर सके, ब्रिटेन के चरमराते स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बना सके और दक्षिणपंथी अतिवाद के उभार को रोक सके।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:18:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/britain-suffers-its-seventh-blow-in-the-tenth-year-of-brexit</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[11 देशों के सामने धुरंधर स्टाइल में NSA डोभाल ने दिया धांसू बयान, हर तरफ होने लगी चर्चा!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/nsa-doval-delivered-a-powerful-statement-in-a-commanding-style-before-11-nations]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ब्रिक्स के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक चल रही है। यह बैठक बहुत अहम है। दो दिनों की इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे हैं। इसमें समूह के 11 सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुख शामिल हो रहे हैं। इन देशों में भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई भी शामिल है। यह बैठक बहुत खास है। इस बैठक में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि मित्रों, हम बहुत ही उथल-पुथल भरे समय में मिल रहे हैं। दुनिया सैन्य संघर्षों और जटिल सुरक्षा समस्याओं से घिरी हुई है। यह भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक तनावों और विघटनकारी तकनीकों का सामना कर रही है। ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सुरक्षा मामलों के लिए जिम्मेदार उच्च पदस्थ अधिकारियों की 16वीं बैठक में आप सभी का स्वागत है। आज आपकी उपस्थिति और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के प्रति आपकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए मैं आप में से प्रत्येक को धन्यवाद देता हूं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/11-nations-participate-in-doval-meeting-china-iran-and-others-gather" target="_blank">डोभाल की बैठक में 11 देश शामिल, चीन-ईरान सबका लगा जमावड़ा</a></h3><div>न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि हमारे साधन और संस्थागत तंत्र भी इन संघर्षों को हल करने या कम करने के लिए तेजी से अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। बहुपक्षवाद (Multilateralism) कमजोर हो रहा है। ब्रिक्स की कल्पना एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना और 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की आवाज को मजबूत करना था। इसने वैश्विक शासन में सुधार और संस्थागत सुधारों की भी परिकल्पना की थी। ब्रिक्स देशों का यह समूह एक बहुत ही विशेष गठबंधन है, जो शांति, प्रगति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है। और मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि यह दिन-प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/brics-turns-the-tide-china-makes-a-major-announcement-immediately-upon-arriving-in-india" target="_blank">दुश्मनी खत्म, दोस्ती शुरू,  BRICS ने पलट दी बाजी! भारत पहुंचते ही चीन का बड़ा ऐलान</a></h3><div>यह कोई साधारण समूह नहीं है। यह 4.1 अरब (4.1 बिलियन) लोगों का घर है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49% यानी करीब आधा हिस्सा है। साथ मिलकर, यह वैश्विक संपत्ति के निर्माण में 31 से 32 ट्रिलियन डॉलर (यानी $31.5 ट्रिलियन) का योगदान देता है। यह जीडीपी (GDP) वैश्विक हिस्सेदारी के 30% से भी अधिक है। इसके पास 42 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक का भूभाग है, जो हमारे ग्रह का 28% हिस्सा है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका वैश्विक विस्तार है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/nsa-doval-delivered-a-powerful-statement-in-a-commanding-style-before-11-nations</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>स्विट्जरलैंड से आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया की उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं। सालों की दुश्मनी, प्रतिबंधों और सेनेट टकराव के बाद अब अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। स्विट्जरलैंड के बर्गन स्टॉक में घंटों चली हाई लेवल बैठक के बाद दोनों देशों ने 6 दिनों के अंदर एक फाइनल समझौते तक पहुंचने के लिए रोड मैप तैयार करने पर सहमति जताई है। क़तर और पाकिस्तान ने इस बैठक को उत्साहजनक और सकारात्मक बताया है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट युद्ध होर्मुज स्टेट पर तनाव, इजराइल, लेबनान संघर्ष और ईरान अमेरिका के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया था। लेकिन अब पहली बार ऐसा लग रहा है कि दोनों देश टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-coming-to-india-for-trade-deal-major-announcement-by-us-ambassador" target="_blank">ट्रेड डील करने भारत आ रहा US, अमेरिकी राजदूत का बड़ा ऐलान</a></h3><div>अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की। जबकि ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीवाफ ने मोर्चा संभाला। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अलथानी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बैठक में तय हुआ कि एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। न्यूक्लियर प्रोग्राम, आर्थिक प्रतिबंधों और विवाद निपटारे जैसे संवेदनशील मुद्दों के लिए अलग-अलग वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे। दोनों देशों के बीच गलतफहमी रोकने के लिए एक सीधा कम्युनिकेशन चैनल भी तैयार किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इस बातचीत का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल ट्रांजिट मार्ग माना जाता है। सऊदी अरब, ईरानक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से दुनिया को तेल सप्लाई करते हैं। पिछले कुछ महीनों में इस जलमार्ग को लेकर पैदा हुआ तनाव ने तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया था। अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है तो हुमूज स्टेट को लेकर भी अनिश्चितता कम हो सकती है। इस बीच लेबनान में भी हालात कुछ बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/deal-has-gone-up-in-smoke-where-has-netanyahu-triggered-an-explosion-now" target="_blank"> Iran US Peace Deal Cancel: तेल लेने गई डील, नेतन्याहू में अब कहां धमाका कर दिया?</a></h3><div>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि पाकिस्तान और क़तर की मध्यस्था से लेबनान युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। इजराइल ने सीमावर्ती इलाकों में कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। हालांकि उसने यह भी साफ़ कर दिया कि सुरक्षा खतरा खत्म होने तक उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी। दूसरी तरफ हिजबुल्ला ने कहा कि वह तभी पूरी तरह हमले रोकेगा जब इजरायल सैनिकों की वापसी का भरोसा देगा। यानी शांति की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन रास्ता अभी आसान नहीं है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की वापसी, प्रॉक्सी समूह की गतिविधियां और इजराइल लेबदनान विवाद जैसे कई मुद्दे हैं जिन पर अभी अंतिम सहमति बननी बाकी है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि बर्निन स्ट्रोक की यह बैठक अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नई शुरुआत का संकेत दे रही है। आने वाले 60 दिन तय करेंगे कि यह कूटनीतिक पहल मिडिल ईस्ट को स्थाई शांति की ओर ले जाती है या फिर यह उम्मीद भी पिछले प्रयासों की तरह अधूरी रह जाती है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/attack-if-you-dare-an-open-challenge-iran-has-silenced-trump" target="_blank">दम है तो करो हमला...खुला चैलेंज, ईरान ने कर दी ट्रंप की बोलती बंद</a></h3><div>इधर स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका कतर पाकिस्तान की मिडिएटरशिप में बात कर रहे थे। उधर कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लाफान में भयंकर धमाका हो गया। पहले से ही ईरान के हमलों में तबाह हुए रास लाफान प्लांट में जो धमाका हुआ है वो इतना जबरदस्त था कि 18 लोगों का पता ही नहीं चल रहा है कि वह कहां गायब हो गए। या तो वह पूरी तरह राख में तब्दील हो गए या फिर भाप ही बन गए। इस धमाके में कम से कम 54 लोगों के जख्मी होने की खबर है। जानकारी के मुताबिक होर्मुज की नाकेबंदी हटने के बाद टर्मिनल को दोबारा चलाने के लिए तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान भीषण धमाका हुआ और आग लग गई। क़तर की सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि यह विस्फोट तकनीकी खराबी के कारण रास लफान औद्योगिक शहर में हुआ। इसके बाद लापता लोगों की तलाश के लिए नागरिक सुरक्षा टीमों ने क़तर के अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव समूह के साथ मिलकर अभियान शुरू किया।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:43:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/has-an-understanding-been-reached-between-iran-and-the-us-regarding-lebanon-a-60-day-plan-is-ready</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[बलूचिस्तान की शेरनी से क्यों डरी मुनीर की आर्मी? उम्रकैद की सजा का ऐलान होते ही पाकिस्तान में भड़की आग]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/why-was-munir-army-afraid-of-the-lioness-of-balochistan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पाकिस्तान के अशांत प्रांत यानी कि बलूचिस्तान से एक बड़ी और विवादास्पद खबर सामने आई है। बलोच अधिकारियों की मुखर आवाज और बलचिस्तान की शेरनी के नाम से चर्चित एक्टिविस्ट मेहरंग बलोच को&nbsp; एंटी टेररिज्म कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुना दी है।&nbsp; यह फैसला जुलाई 2024 में ग्वादर में आयोजित बलोच&nbsp; सभा और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक सुरक्षा अधिकारियों की मौत से जुड़े मामले सामने आए। अदालत ने बलूच कमेटी&nbsp; &nbsp;बीवाईसी के नेता सिगुतुल्लाह शाह को भी दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। हालांकि इस फैसले ने पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और बलूच समुदाय के बीच भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। अब बीवाईसी और मेहरंग के समर्थकों का यह आरोप है कि यह मुकदमा राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित था और इसका मकसद बलूच आंदोलन को कुचलना है। संगठन का यह कहना है कि अदालत ने कमजोर और संदिग्ध सबूतों के आधार पर यह फैसला दिया है और दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इसे कानून के शासन और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का हिस्सा बता रही है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/60-trucks-bound-for-pakistan-set-ablaze-what-was-found-inside-caused-a-stir" target="_blank">पाकिस्तान जा रहे 60 ट्रकों को लगा दी आग, अंदर जो निकला, मचा हड़कंप!</a></h3><div>महरंग बलोच पिछले कुछ वर्षों से बलस्तान में कथित जबरन गायब किए गए लोगों को लेकर मानवाधिकार उल्लंघनों और संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार की मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं और यह कारण है कि उनकी गिरफ्तारी और अब उम्र कैद की सजा को बलोच राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह मामला सिर्फ एक एक्टिविस्ट की सजा का नहीं है बल्कि उस बलूचिस्तान का है जिस पर दुनिया की बड़ी शक्तियों की नजर इस वक्त टिकी हुई है। प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना, रेयर अर्थ, मिनरल्स और अरब सागर से जुड़ी रणनीतिक स्थिति के कारण बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और भू राजनीति का एक केंद्र बन चुका है। और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीपेक और ग्वादर पोर्ट प्रोजेक्ट के जरिए यहां अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है। और ऐसे में माना यह जा रहा है कि इससे यानी कि जो कदम सरकार की ओर से उठाया गया इससे हालात बहुत ज्यादा खराब होने की संभावना है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/taliban-entered-pakistan-and-carried-out-airstrike" target="_blank">इधर भारत ने भेजी मदद, उधर Taliban ने पाकिस्तान में घुसकर किया एयरस्ट्राइक</a></h3><h2>बलस्तान पाकिस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?</h2><div>सबसे पहले बात करते हैं पाकिस्तान के कुल भूभाग की तो लगभग 44% हिस्सा बलस्तान में इसका है और ऐसे में अरब सागर से जुड़ा सबसे रणनीतिक प्रांत और ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान का भविष्य का व्यापारिक हब रहा है।&nbsp; बता दें कि ईरान और अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय जो सीमाएं हैं जो यहां का पूरा एरिया है वो लगता है और ऐसे में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी कि सेपेक का ये सबसे बड़ा केंद्र रहा है और दूसरी तरफ ऊर्जा और खनिज संसाधनों का ये सबसे बड़ा भंडार रहा है और यही वजह है कि बार-बार यहां पर अपने इस्तेमालों के लिए पाकिस्तान कई बार ऐसे कदम उठा लेता है जिसे लेकर कई सवाल पाकिस्तान की नीति को लेकर उठते रहे हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का रणनीति आधार रहा है और इसलिए बता दें कि पाकिस्तान की नजर उस हिस्से पर रहती है और देखिए 44% हिस्सा बलिस्तान में लगता है और यहां पर जो नेचुरल खनिज है यह बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे लेकर अलग-अलग तरीके से पाकिस्तान यहां पर कदम उठाते रहता है और वहां पर लोगों पर जुल्म ढा रहा है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:41:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/why-was-munir-army-afraid-of-the-lioness-of-balochistan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[PoK में आजादी के लिए उतरे 70 हजार लोग, युद्ध को तैयार!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/70000-people-take-to-the-streets-in-pok-for-freedom-ready-for-war]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अब कुल 70 हजार से अधिक लोग पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग कितने ज्यादा भड़के हुए हैं पाकिस्तान की सरकार पर। क्योंकि पाकिस्तान की सरकार जिस तरीके से पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर अपना राज कायम रखने के लिए आम लोगों पर जुल्म सितम कर रही है। उसको लेकर आखिरकार लोगों ने फुल एंड फाइनल मूड बना लिया है जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर आम आवाम का यह फूटता हुआ गुस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा है। हर कश्मीरी का गुस्सा&nbsp; प्रदर्शन में दिख रहा है, वो एक दिन, दो दिन, तीन दिन, चार दिन नहीं बताया जा रहा है कि करीब-करीब 14 दिन से यही कमोबेश हालत है पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर जहां पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। और हालात ऐसे हैं साथियों जहां लोग खुलेआम यह कह रहे हैं कि अब जो हक है वह लेकर रहेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें जान क्यों ना देनी पड़ जाए।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/drone-strikes-launched-deep-inside-pakistan-isis-bases-destroyed" target="_blank">Pakistan के अंदर घुसकर ड्रोन हमला शुरू, अफगान ने ISIS अड्डे उड़ाए, हर तरफ हाहाकार!</a></h3><div>इस आंदोलन में बच्चे, इस आंदोलन में बूढ़े, इस आंदोलन में जवान हर कोई शामिल है। क्योंकि हर किसी की मांग है बड़ी संख्या में शामिल होकर कि अब पाकिस्तान से उन्हें आजादी चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ वो लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे का विरोध जिस तरीके से रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में बीते 11 दिनों से दिख रहा है। जहां 70ज़ से अधिक प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। उससे पता चलता है कि हालात सामान्य नहीं है। और यह मुनीर जो पूरी दुनिया में घूम के ढिंढोरा पीट रहा है अपने मीडिएशन का। यह जो शहबाज शरीफ है जो कह रहा है कि वह दुनिया में शांति लाने के लिए काम कर रहा है वो उसके अपने ऑक्यूपेशन के अंदर उसके कब्जाए हुए जमीन पर विद्रोह की आग जल रही है और हालात ऐसे हैं कि इस वक्त अगर उस भीड़ के सामने मुनीर चला जाए तो मुझे नहीं पता कि वह भीड़ क्या करेगी। इंटेलिजेंस सूत्र कहते हैं कि कई कस्बों और गांवों में भी नए विरोध प्रदर्शन। इसके बाद शुरू हो गई इन तस्वीरों के बाद और बताया जाता है कि सुधनोती जिले के तरार खेल में करीब 10 12 साल के स्कूली बच्चे सार्वजनिक चौराहे पर भी इकट्ठा हुए आजादी के नारे लगाए। मढोल इलाके में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकाला। महिलाओं ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इसके साथ ही इलाके के में जो कब्जे और अधिकारों की कमी का विरोध हो रहा है। रावलकोट के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर कई स्कूली बच्चे तख्तियां लेकर पहुंचे। इन तख्तियों पर लिखा था कि पाकिस्तानी सेना बाहर आ गई है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/swearing-by-his-brother-netanyahu-gave-india-a-game-changing-capability" target="_blank">जब तक मैं PM हूं...भाई की कसम खाकर नेतन्याहू ने दी भारत को चौंकाने वाली ताकत!</a></h3><div>पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों को मार रही है। कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हो रहा है। हमें बुनियादी अधिकार चाहिए। हमें मुफ्त शिक्षा चाहिए। आंदोलन में बच्चे की भागीदारी की सबसे अहम तस्वीरों में से एक माना जा रहा है। क्योंकि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा चिंता का कारण है कि भाई बच्चों तक को आवाज उठानी पड़ रही है पाकिस्तान के इस ऑक्यूपेशन की। इससे जो संकेत मिल रहा है वो ये कि पीओके में राजनीतिक दबाव, आर्थिक परेशानियां, सेना का जो एक तरीके से दमनकारी नीति है युवा पीढ़ी के अंदर इससे बड़ी नाराजगी है, गुस्सा है, आग बबूला है और इसीलिए यह आंदोलन की जो शक्ल है वो भड़कती जा रही है और इस आंदोलन के प्रमुख आयोजक सरदार अमन खान ने रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में जो है हजारों लोगों को संबोधित भी किया है। हूं। आप समेत एक एक खान से कहता हूं। पूरी कौम से कहता हूं इन 53 चोरों समेत पाकिस्तान का कोई सियासतदान उसके बाद कश्मीर की गलियों में नहीं आ सकता। नहीं आ सकता। अगर हम जिंदा नहीं रहेंगे तो तुम भी इस कदर में जिंदा नहीं रहोगे। अमन का पैगाम है। अमन का पैगाम ये है कि जो मुतालबात हमारे हैं वो मुतालबात जो तुमने मायने किए हुए हैं वो मुतालबात पूरे करो। जायज मुतालबात पूरे करो। यहां के लोगों को जो है वो मौका दो। यहां के आवाम को मौका दो। यही तुम्हारे पास रास्ता है। इसके अलावा तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है। और हमारे पास ऑप्शन है। हमारे पास अल्हम्दुलिल्लाह ऑप्शन है। तुम्हारे पास कोई ऑप्शन नहीं है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:29:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/70000-people-take-to-the-streets-in-pok-for-freedom-ready-for-war</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[दम है तो करो हमला...खुला चैलेंज, ईरान ने कर दी ट्रंप की बोलती बंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/attack-if-you-dare-an-open-challenge-iran-has-silenced-trump]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि मंडल स्विट्जरलैंड के दावोंस में बातचीत की मेज पर बैठे हैं। पाकिस्तान और क़तर इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाते दिखे। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा भी हुई। लेकिन इसी बीच एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तल्की बढ़ती नजर आ रही है। तनाव की वजह बने हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने लेबनान में हिजबुल्ला को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए तो अमेरिका उस पर पहले से ज्यादा भीषण हमला करेगा। बकायदा ट्रंप ने लिखा था कि ईरान को अपने प्रॉक्सी समूह को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना चाहिए। नहीं तो अमेरिका बहुत कड़ी कारवाई करेगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/high-voltage-drama-at-the-us-iran-meeting-why-did-iran-flare-up-jd-vance-was-left-watching" target="_blank">US-Iran Meeting में हाई-वोल्टेज ड्रामा, बैठक में क्यों भड़क गया ईरान, देखते रह गए JD Vance और हैरान शहबाज शरीफ</a></h3><div>ट्रंप की चेतावनी पर अब ईरान ने भी बेहद सख्त और सीधे शब्दों में जवाब दिया। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने साफ कह दिया कि उनका देश अमेरिकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी धमकियों का असर होता तो आज अमेरिका ऐसी निराशाजनक स्थिति में नहीं होता। ग़ालिबफ़ ने कहा कि क्या उन्हें नहीं लगता कि अगर उनकी धमकियों का कोई असर होता तो वे आज ऐसी निराशाजनक स्थिति में नहीं होते। हम अमेरिकी धमकियों की परवाह नहीं करते। उन्हें अपने बयानों को लेकर सावधान रहना चाहिए। हमारी सेना उन्हें अलग तरह से जवाब देने के लिए तैयार है। वह चाहे कुछ भी कहें हम कारवाई करने वाले लोग हैं। ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया जब एक हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी और उसके बाद पहली बार प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हो रही है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/amid-rising-tensions-over-lebanon-netanyahu-gives-a-blunt-reply-to-trump" target="_blank">Lebanon पर बढ़ते तनाव के बीच Netanyahu का Trump को दो टूक जवाब- हमारी राय हमेशा एक नहीं होती।</a></h3><div>अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल है। जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई खुद मोहम्मद बागेरी कर रहे हैं। इसी बीच लेबनान पर इजराइल के बढ़ते हमलों का हवाला देते हुए ईरान ने हुर्मज स्टेट को फिर से बंद करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग खुला है और जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हुर्मज स्टेट को लेकर सामने आई खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। कुल मिलाकर एक तरफ अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ धमकियों और जवाबी चेतावनीयों ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट के हालात को बेहद नाजुक बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि दावोस में जारी वार्ता आगे बढ़ती है या फिर बयानबाजी का यह नया दौर क्षेत्र को एक बार फिर बड़े टकराव की ओर धकेल देता है। स्विट्जरलैंड का आलीशान बुरगिन स्टॉक रिसोर्ट मेज पर सजे चार देशों के झंडे और हवा में तैरती युद्ध जैसी कड़वाहट लेक लूज़ समिट में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक तरफ दुनिया की सुपर पावर अमेरिका है तो दूसरी तरफ अपने कड़े तेवरों के लिए मशहूर ईरान।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/swearing-by-his-brother-netanyahu-gave-india-a-game-changing-capability" target="_blank">जब तक मैं PM हूं...भाई की कसम खाकर नेतन्याहू ने दी भारत को चौंकाने वाली ताकत!</a></h3><div>क़तर और पाकिस्तान बिजोलिए की कुर्सी पर बैठे हैं। लेकिन कैमरों के फ्लैश चमकने से ठीक पहले कूटनीति का जो नरमगरम नजारा दिखा वह हैरान करने वाला है। इस महा बैठक की शुरुआत ही भारी कड़वाहट और तनाव के साए में हुई। कैमरे तैयार थे लेकिन ईरानी प्रतिनिधि मंडल ने अमेरिकी दल के साथ पहले से तय हैंडशेक यानी हाथ मिलाने और जॉइंट फोटो ऑफ से साफ मना कर दिया। सार्वजनिक तौर पर हाथ ना मिलाकर ईरान ने यह सख्त संदेश दिया है कि वह अमेरिका के सामने झुकने वाला नहीं है। कूटनीतिक दूरियों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस पाकिस्तान और क़तर के राष्ट्र अध्यक्षों के साथ मीडिया को संबोधित कर रहे थे तब ईरान ने उस मंच से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। ईरान वैश्विक मीडिया के सामने अमेरिका को एक तरफ़ा नैरेटिव सेट करने का कोई मौका नहीं देना चाहता था। लेकिन इसी कड़े विरोध के बीच एक नरमी तब दिखी जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बेहद गर्मजशी से गले लगाया। ईरान ने जता दिया कि वह दुनिया से अलग-थलग नहीं है। बस उसकी लड़ाई वाशिंगटन से है। बंद कमरे के अंदर का नजारा किसी साइलेंट वॉर से कम नहीं था।&nbsp;</div><div><p class="MsoNormal">Stay updated with Latest International News in Hindi <a href="https://www.prabhasakshi.com/international">https://www.prabhasakshi.com/international</a>&nbsp;on Prabhasakshi<o:p></o:p></p></div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:27:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/attack-if-you-dare-an-open-challenge-iran-has-silenced-trump</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[दुश्मनी खत्म, दोस्ती शुरू,  BRICS ने पलट दी बाजी! भारत पहुंचते ही चीन का बड़ा ऐलान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/brics-turns-the-tide-china-makes-a-major-announcement-immediately-upon-arriving-in-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पिछले कई सालों से भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव, सैन्य गतिरोध और रिश्तों में कड़वाहट देखी गई है। लेकिन इन सबके बावजूद एक बार फिर यह दोनों देश अपने संबंधों को पटरी पर लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात हुई। दोनों देशों ने इस मुलाकात में संवाद बढ़ाने, मतभेद संभालने और सहयोग को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है। इस बैठक के तुरंत बाद दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि भारत और चीन एक दूसरे के कॉम्पिटिटर्स या दुश्मन नहीं बल्कि पार्टनर हैं। चीन की ओर से बकायदा एक रीड आउट भी जारी किया गया। इस रीड आउट में वांग यी ने कहा कि भारत चीन का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/amid-rising-tensions-in-the-middle-east-the-uae-is-eyeing-india" target="_blank">Middle East में बढ़े तनाव के बीच UAE की भारत पर नजर, BrahMos-AkashTeer पर बड़ी Defense Deal संभव</a></h3><div>राष्ट्रपति जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में दोनों देशों के रिश्ते अब पहले से बेहतर हो रहे हैं। दोनों नेताओं की राय है कि भारत और चीन एक दूसरे के पार्टनर हैं। कंपिटिट नहीं। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के रूप में भारत और चीन को लंबी सोच के साथ मिलकर काम करना चाहिए। दोनों देशों को सहयोग बढ़ाकर अपने विकास और पूरे ग्लोबल साउथ की तरक्की में योगदान देना चाहिए। वांग यी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, संवाद और अन्य क्षेत्रों में सहयोग धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रहा है और सीमा पर भी स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे के महत्वपूर्ण हितों का सम्मान करना चाहिए और सीमा विवाद को पूरे रिश्ते पर हावी नहीं होने देना चाहिए। वहीं चीन की ओर से जारी किए गए इस रीड आउट के मुताबिक अजीत डोभाल ने कहा कि हाल की भारत चीन नेताओं की बैठकों ने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा तय की है। भारत भी मानता है कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार हैं। भारत चीन के साथ मिलकर रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है। मतभेदों को समझदारी से संभालना चाहता है और दोनों देशों के लिए फायदे वाले नतीजे हासिल करना चाहता है। एनएसए डोभाल ने यह भी कहा कि भारत चीन की संप्रभुता और मुख्य चिंताओं का सम्मान करता है और ताइवान के मुद्दे पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/teh-tak-exclusive-international-borders-of-india-part-4" target="_blank">International Borders of India | क्या Act East Policy पटरी से उतर रही है? |Teh Tak Part 4</a></h3><div>दोनों देशों को मिलकर बहुपक्षवाद को मजबूत करना चाहिए और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल के अनुसार दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की विस्तृत समीक्षा की और संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में हो रही प्रगति का संज्ञान लिया। विदेश मंत्रालय ने डोबाल बांग के बीच हुई इस चर्चा को रचनात्मक और दूरदर्शी करार दिया है। आपको बता दें 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने डटी रही। लेकिन पिछले करीब एक साल में दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य बनाने और तनाव कम करने की दिशा में कई कदम उठाए। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद दोनों देशों ने अपनी सेनाओं को पीछे हटाया। बाद में डेपसांग और डेमचक जैसे बाकी बचे प्रमुख विवादित क्षेत्रों के लिए सैनिकों को हटाने पर सहमति बनी। जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना गया। इसके बाद कजान में पीएम मोदी और जिमपिंग की मुलाकात हुई जिसमें आपसी संबंधों को बेहतर बनाने और संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/india-makes-a-bold-move-as-hormuz-opens-up-shifting-its-strategy-by-purchasing-oil-from-russia" target="_blank">Hormuz Strait खुलते ही India का बड़ा दांव, Russia-UAE से रिकॉर्ड तेल खरीदकर बदली रणनीति</a></h3><div> दोनों पक्षों ने यह संकेत दिया कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाते हुए सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी चीन के तियांजिन शहर में आयोजित एसईओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। वहां उन्होंने कहा था कि भारत चीन के साथ ऐसे संबंध चाहता है जो आपसी भरोसे सम्मान और एक दूसरे की चिंताओं को समझने की भावना पर आधारित हो। भारत का मानना है कि दोनों देशों के रिश्ते सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने चाहिए और इसके लिए वह प्रतिबद्ध हैं।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:17:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/brics-turns-the-tide-china-makes-a-major-announcement-immediately-upon-arriving-in-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Pakistan के अंदर घुसकर ड्रोन हमला शुरू, अफगान ने ISIS अड्डे उड़ाए, हर तरफ हाहाकार!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/drone-strikes-launched-deep-inside-pakistan-isis-bases-destroyed]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आतंकिस्तान के अंदर घुसकर तालिबान ने अपना बदला लेना शुरू कर दिया है और ऐसा पहली बार हुआ है जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाने के लिए ड्रोन बरसाए हो। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में ऐसी भयंकर तबाही मचा दी है जिसके बाद शहबाज और मुनीर कुछ भी बोलने या करने लायक नहीं बचे हैं। इस्लामाबाद में हाई अलर्ट है, डर है और मीटिंग पर मीटिंग चल रही है कि कैसे इस कोहराम से बचा जाए। कहावत है जो जिसके लिए गड्ढा खोदता है उसी में वह खुद गिरता है और पाकिस्तान इस बार गिरा नहीं बल्कि आग में लिपट चुका है और अफगान ने पाक को भस्म करने की कसम भी खा ली है। दरअसल बता दें कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक की थी। तालीबान का दावा है कि इन हमलों में आम नागरिक मारे गए जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल थी। उस वक्त काबुल ने यह साफ कहा था कि इस कार्रवाही का जवाब दिया जाएगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/swearing-by-his-brother-netanyahu-gave-india-a-game-changing-capability" target="_blank">जब तक मैं PM हूं...भाई की कसम खाकर नेतन्याहू ने दी भारत को चौंकाने वाली ताकत!</a></h3><div>तब पाकिस्तान को लगा था कि मामला कुछ दिनों में शांत हो जाएगा। लेकिन असली झटका अभी बाकी था। क्योंकि अब तालीबान यह दावा कर रहा है कि उसने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जवाबी कारवाही की है। तालीबान का कहना है कि उसके लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तुखा में मौजूद आईएसआईएस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया है। अफगान की तरफ से यह दावा किया गया कि इन जगहों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों की प्लानिंग, कोऑर्डिनेशन और लॉन्चिंग के लिए किया जाता था। और यहीं से शुरू होता है इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट। सालों से पाकिस्तान दुनिया को यही बताता आया है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार कारवाही करता है। पाकिस्तान का कहना होता है कि अगर उसकी सुरक्षा को खतरा होगा तो वो दूसरे देश की सीमा के अंदर जाकर भी कार्रवाही करेगा। लेकिन इस बार तालिबान ने पाकिस्तान की ही उसी दलील को उसी के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यानी अफगानिस्तान का कहना है कि उसकी सुरक्षा को खतरा था।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/india-military-strength-vs-pakistan-analysis" target="_blank">अगर धमकी देते देते पाकिस्तान ने सचमुच युद्ध छेड़ दिया तो भारत क्या करेगा?</a></h3><div>इसलिए उसने पाकिस्तान के अंदर मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाया जिन्हें वो खतरा मानता है और यही वो बात है जिसने इस्लामाबाद की टेंशन को कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया है क्योंकि अब मामला सिर्फ एक हमले का नहीं है| मामला इस बात का है कि पाकिस्तान जिस तर्क का इस्तेमाल सालों से करता आया अपने जिहादियों के द्वारा नफरत फैलाता आया अब वही तर्क उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान के किला अब्दुल्ला और चगाई इलाके के अलावा खेबर पख्तूनखा के कुछ क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। तालीबान का दावा है कि इन इलाकों में आईएसआईएस, खुरासान से जुड़े नेटवर्क और सुविधाएं मौजूद थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। सबसे बड़ा मैसेज यह है कि तालीबान पहली बार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसके खिलाफ सीमा पार कारवाही होगी तो जवाब भी सीमा के उस पार पहुंच सकता है। यानी अब लड़ाई सिर्फ बॉर्डर पर नहीं बल्कि रणनीति और संदेश की भी है। और यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए यह घटना सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी बन गई है।&nbsp;&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">Stay updated with Latest International News in Hindi </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;">https://www.prabhasakshi.com/international</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:17:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/drone-strikes-launched-deep-inside-pakistan-isis-bases-destroyed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Prabhasakshi NewsRoom: China से J-10CE Fighter Jets खरीदने वाला है Bangladesh, इससे India पर क्या असर पड़ेगा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/bangladesh-china-j10ce-fighter-jet-deal-india-warning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बांग्लादेश अब खुलकर उस मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है जहां वह चीन के साथ अपने सामरिक रिश्तों को खतरनाक स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। खबर है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान ढाका 24 चीनी J-10 CE बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की खरीद पर आगे बढ़ सकता है। यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो यह दक्षिण एशिया की शक्ति संतुलन रेखाओं को बदलने वाली एक बड़ी सामरिक चाल होगी। यही कारण है कि इस घटनाक्रम पर नई दिल्ली की नजर बेहद पैनी है।</div><div><br></div><div>सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश अगस्त तक इस समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहता है। प्रत्येक विमान की कीमत लगभग चालीस करोड़ डॉलर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह चीनी प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा था ताकि बातचीत को तेजी दी जा सके। दूसरी ओर बांग्लादेशी अधिकारी चीन के विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ अलग बैठकों में सौदे के अंतिम बिंदुओं पर चर्चा करने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह रक्षा खरीद चीन की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह भारत के चारों ओर सामरिक दबाव का घेरा कसना चाहता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/for-the-first-time-china-trembled-because-of-india-putins-mentor-declared" target="_blank">भारत से पहली बार कांपा चीन, पुतिन के गुरु बोले हिंदू आ रहे हैं!</a></h3><div>हम आपको यह भी बता दें कि ढाका और बीजिंग के बीच केवल लड़ाकू विमान ही चर्चा का विषय नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सत्रह दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की तैयारी है जिनमें पंद्रह समझौता ज्ञापन, दो औपचारिक समझौते, एक प्रोटोकाल और एक कार्य योजना शामिल है। रक्षा सहयोग, आधारभूत ढांचा, व्यापार, निवेश और सामरिक साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने की तैयारी हो रही है। बांग्लादेश के विदेश सचिव ने चीन को अपना अत्यंत करीबी मित्र, रणनीतिक साझेदार और विकास सहयोगी बताया है। यह बयान अपने आप में संकेत देता है कि ढाका किस दिशा में बढ़ रहा है।</div><div><br></div><div>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तीस्ता परियोजना भी बातचीत के केंद्र में है। यही वह मुद्दा है जिस पर चीन लंबे समय से नजर गड़ाए बैठा है। यदि चीन को तीस्ता क्षेत्र में गहरी घुसपैठ का अवसर मिलता है तो यह भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता बन सकता है। चीन पहले ही हिंद महासागर से लेकर हिमालय तक अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ा चुका है। अब यदि बांग्लादेश भी उसी धुरी पर तेजी से आगे बढ़ता है तो भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियां कई गुना बढ़ सकती हैं।</div><div><br></div><div>हालांकि यहां बांग्लादेश को एक बात बेहद स्पष्ट रूप से समझनी होगी। भारत और बांग्लादेश का रिश्ता केवल सीमाओं का रिश्ता नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति, भाषा, व्यापार, जल, सुरक्षा और भावनात्मक साझेदारी का संबंध है। 1971 के युद्ध में भारत ने जिस तरह बांग्लादेश की मुक्ति के लिए निर्णायक भूमिका निभाई थी, उसे कोई मिटा नहीं सकता। आज भी बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, व्यापारिक पहुंच, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन निवेश दे सकता है, हथियार दे सकता है, लेकिन वह वह भरोसा नहीं दे सकता जो भारत ने हर संकट में बांग्लादेश को दिया है।</div><div><br></div><div>ढाका को यह भी समझना होगा कि चीन का इतिहास कर्ज, दबाव और सामरिक नियंत्रण की राजनीति से भरा पड़ा है। जिन देशों ने आंख बंद करके चीनी परियोजनाओं और रक्षा सौदों पर भरोसा किया, वह बाद में आर्थिक और राजनीतिक दबाव के जाल में फंस गए। पड़ोस में श्रीलंका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बांग्लादेश यदि केवल तत्काल लाभ देखकर चीन की गोद में बैठने की कोशिश करेगा तो आने वाले समय में उसकी सामरिक स्वतंत्रता कमजोर पड़ सकती है।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि तारिक रहमान ग्रीष्मकालीन दावोस सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, नवाचार और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा होगी। वह जलवायु नेतृत्व पर मुख्य भाषण भी देंगे और कजाकिस्तान, मंगोलिया, वियतनाम तथा दक्षिण कोरिया के नेताओं से मुलाकात करेंगे। लेकिन असली चर्चा की धुरी चीन और बांग्लादेश के बढ़ते सामरिक संबंध ही रहने वाले हैं।</div><div><br></div><div>बहरहाल, नई दिल्ली ढाका की हर चाल पर नजर बनाये हुए है क्योंकि यदि दक्षिण एशिया में चीन की घुसपैठ इसी गति से बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में पूरा क्षेत्र नए तनावों का अखाड़ा बन सकता है। यहां बांग्लादेश को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वह इस भ्रम में न रहे कि चीनी J-10 CE बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान भारत के लिए कोई निर्णायक चुनौती बन जाएंगे। भारतीय वायुसेना के पास रॉफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं जिनमें मेटियोर जैसी घातक लंबी दूरी की मिसाइलें लगी हैं। इसके अलावा सुखोई 30 एमकेआई, तेजस, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, एस-400 रक्षा कवच और अत्याधुनिक रडार नेटवर्क भारत को कई स्तरों पर बढ़त देते हैं। भारतीय वायुसेना के पायलटों का युद्ध अनुभव, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और बहुस्तरीय रक्षा ढांचा चीन निर्मित विमानों की चमक को मिनटों में फीका कर सकता है। सच यह है कि चीनी J-10 CE लड़ाकू विमान केवल शक्ति प्रदर्शन का औजार बन सकता है, लेकिन भारत की सामरिक क्षमता के सामने वह किसी भी निर्णायक संघर्ष में ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा। बांग्लादेश को समझना होगा कि भारत केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि तकनीक, प्रशिक्षण, युद्ध अनुभव और व्यापक सैन्य समन्वय के बल पर क्षेत्र की सबसे मजबूत शक्ति बना हुआ है।</div><div><br></div><div>बांग्लादेश को भी यह याद रखना चाहिए कि भूगोल बदलता नहीं। भारत उसका सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी है। चीन हजारों किलोमीटर दूर बैठा रणनीतिक खेल खेल सकता है, लेकिन संकट की घड़ी में सबसे पहले भारत ही खड़ा दिखाई देता है। इसलिए ढाका को संतुलन, समझदारी और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ना होगा, वरना चीन की चमकदार कूटनीति के पीछे छिपा सामरिक जाल उसके लिए भारी पड़ सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 11:31:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/bangladesh-china-j10ce-fighter-jet-deal-india-warning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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