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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[Summer में दही खाते वक्त न करें ये Common Mistake, सेहत को होगा भारी नुकसान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/summer-diet-unlock-curd-benefits-the-right-way]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों के मौसम में दही का सेवन करना पाचन, हाइड्रेशन और गट हेल्थ के लिए काफी हेल्दी माना जाता है। क्योंकि दही में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन और गुड बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) पाए जाते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत करते हैं और शरीर को भी ठंडक पहुंचाता है। भीषण गर्मी में दही का सेवन करने से बॉडी का तापमान संतुलित रहता है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है। समर सीजन में दही खाना आमतौर पर काफी फायदेमंद माना जाता है, हालांकि यह जब भी अच्छा माना जाता है जब आप इसे सही तरीके और समय पर खाना पसंद करें। गर्मियों में दही खाया तो सेहत अच्छी बनेंगी या बिगड़ेगी, यह आपको बताते हैं।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>गर्मियों में दही खाने के फायदे</b></span></div><div><br></div><div>दही खाने से पेट हल्का और सुपाच्य होता है, इसलिए यह एसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है। जब आप लस्सी, छाछ या रायता के रुप में दही का सेवन करते हैं, तो ज्यादा फायदे मिलते हैं, क्योंकि ये शरीर को हाइड्रेट करता है और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाता है। गौरतलब है कि प्रोबायोटिक्स आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम भी मजबूत रहता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>गट हेल्थ के लिए दही का सेवन करना अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित रखते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है और शरीर पोषक तत्वों को प्रभावी तरीके से अवशोषित करता है। प्रतिदिन दही का सेवन करने से गैस, ब्लोटिंग और इर्रिटेबल बॉवेल जैसी समस्याओं में राहत दिलाता है। इसके साथ ही हेल्थ पाचन तंत्र मानसिक स्वास्थ्य को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जो कि ऊर्जा और मूड बेहतर रहता है।</div><div><br></div><div><b>गर्मियों में दही खाने का सही तरीका</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">- रात के समय दही खाने से आप बीमार हो सकते हैं या फिर सर्दी-खांसी, गले में खराश, और कफ की समस्या हो सकती है। सबसे बेहतर है कि आप दिन में दही का सेवन करें।</span></div><div><br></div><div>- इस बात का ध्यान रखें कि बहुत ही ज्यादा खट्टा या बासी दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पेट में गैस, जलन या इंफेक्शन का कारण बन सकता है।</div><div><br></div><div>- जिन लोगों के लैक्टोज इंटॉलरेंस, एलर्जी या बार-बार सर्दी-जुकाम की समस्या होती है, उन्हें दही को सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><div>- हमेशा दही को ताजा ही खाएं और लंबे समय से बाहर रखा हुआ दही का सेवन बिल्कुल भी न करें, क्योंकि गर्मी में यह जल्दी खराब होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि गर्मी में दही खाना काफी सुरक्षित है लेकिन इसको हमेशा सही मात्रा में ही सेवन करें, तो यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद मानी जाएगी और आपको गर्मी से राहत मिलेगी। इसके साथ ही आपका गट हेल्थ भी स्ट्रांग बना रहेगा।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:10:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/summer-diet-unlock-curd-benefits-the-right-way</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[मक्खन की तरह पिघलेगी जिद्दी Belly Fat, बस सुबह खाली पेट पी लें ये Magical Drink]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/sabja-seed-drink-for-weight-loss-a-diet-analysis]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण शरीर में मोटापा बढ़ने लगता है। पेट की चर्बी न केवल खूबसूरती खराब करती है और बल्कि कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पेट की चर्बी कम करना चाहिए। महिलाओं वजन को कम करने के लिए आसान और नेचुरल उपायों की तलाश में रहती हैं। इस लेख में हम आपको ऐसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सब्जा सीड्स से बना है। यदि इसको सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो यह वजन घटाने में मदद करती है। पेट की चर्बी को कम करने और डाइजेशन को सुधारने में सहायक रहती है। आपको रोजान इस ड्रिंक का सेवन करना चाहिए। इसे बनाने के लिए सही तरीके और फायदों के बारे में आपको बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>बेली फैट कम करने वाले ड्रिंक की सामग्री</b></div><div><br></div><div>सब्‍जा सीड्स- 1 चम्‍मच (लगभग 5 ग्राम)</div><div>पानी- 1 गिलास (200-250 मिली)</div><div>नींबू का रस- 1 चम्मच</div><div>शहद- 1/2 चम्मच (ऑप्शनल)</div><div><br></div><div><b>बेली फैट कम करने वाले ड्रिंक की विधि</b></div><div><br></div><div>- इसे बनाने के लिए 1 चम्मच सब्जा सीड्स लें।</div><div><br></div><div>- फिर आधा कप पानी में 10-15 मिनट तक भिगोएं।</div><div><br></div><div>- ये फूलकर जेल जैसी परत बना लेंगे।</div><div><br></div><div>- अब इसमें बाकी पानी, नींबू का रस और शहद मिलाएं।</div><div><br></div><div>- फिर इसको अच्छे से मिक्स कर लें और तुरंत ही पिएं।</div><div><br></div><div>- इस बात का ध्यान रखें कि इसको ज्यादा स्टोर न करें और दिनभर में 1-2 चम्मच से ज्यादा सब्जा सीड्स न लें। इसके साथ ही सब्जा सीड्स को भिगोकर ही लें।</div><div><br></div><div><b>ड्रिंक पीने का सही समय</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस ड्रिंक को आप सुबह खाली पेट लें। ओवरईटिंग कंट्रोल करने के लिए खाने में 30 मिनट पहले इसको ले सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>ड्रिंक पेट की चर्बी कैसे कम करती है?</b></div><div><br></div><div>- इस ड्रिंक में हाई फाइबर है, वहीं सब्जा पानी सोखकर फूलता है, जिससे पेट भी पूरे दिन भरा रहता है।</div><div><br></div><div>- अगर आपको जल्दी भूख लगती है, तो यह आपके डाइजेशन को धीमा करेगी और क्रेविंग कम होती है।</div><div><br></div><div>- यह ड्रिंक शुगर को कंट्रोल करता है। ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता है और फैट को भी स्टोर कम करता है।</div><div><br></div><div>- इसमें कूलिंग इफेक्ट पाए जाते हैं, जो शरीर की गर्मी और सूजन को कम करता है।</div><div><br></div><div>- यह बेहतर मेटाबॉलिज्म करता है, कैलोरी इनटेक कम होती है।</div><div><br></div><div><b>ड्रिंक के फायदे</b></div><div><br></div><div>- इस ड्रिंक के सेवन से पेट की चर्बी कम करता है।</div><div><br></div><div>- भूख और इमोशनल ईटिंग कंट्रोल होती है।</div><div><br></div><div>- पाचन बेहतर और ब्लोटिंग कम होती है।</div><div><br></div><div>- शरीर हाइड्रेटेड और ठंडा रहता है।</div><div><br></div><div>- यह बॉडी को डिटॉक्स करता है।</div><div><br></div><div>- त्वचा में गजब का ग्लो आता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>ड्रिंक गलत तरीके से लेने के नुकसान</b></span></div><div><br></div><div>- अगर आप सूखे बीज खाती हैं तो गले में फंसने के खतरा रहता है।</div><div><br></div><div>- ज्यादा लेने से गैस, अपच या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><div>- ओवरयूज से पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो जाता है।</div><div><br></div><div><b>किन लोगों को नहीं पीनी चाहिए ये ड्रिंक</b></div><div><br></div><div>इस ड्रिंक को लो&nbsp; BP या डाइजेशन से संबंधित समस्या से परेशान लोग पीने से बचते हैं। इसके अलावा, इसे प्रेग्नेंसी में डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं पीना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:29:21 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/sabja-seed-drink-for-weight-loss-a-diet-analysis</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: जानलेवा मलेरिया का बढ़ा खतरा, इन 5 Tips से करें अपना और परिवार का बचाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/increased-risk-of-deadly-malaria-protect-yourself-and-your-family-with-5-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मी और बारिश के मौसम में मलेरिया का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। मलेरिया जैसी बीमारी मादा Anopheles मच्छर के काटने से फैलती है। वहीं अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारत में 2022 में 1.8 लाख लोग मलेरिया का शिकार हुए थे। वहीं साल 2020 में यह आंकड़ा 32 लाख तक था। ऐसे में भारत और अन्य देशों में मलेरिया के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 25 अप्रैल को वर्ल्ड मलेरिया दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप कुछ आसान आदतों को अपनाकर आसानी से मलेरिया को मात दे सकते हैं।</div><div><br></div><h2>मलेरिया से बचाव के उपाय</h2><div><br></div><h2>साफ-सफाई का ध्यान रखें</h2><div>बता दें कि मलेरिया का मच्छर सिर्फ गंदे पानी से नहीं बल्कि साफ पानी में भी पनपता है। इसलिए घर और आसपास के क्षेत्र का पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए। घर या आसपास किसी तरह का पानी न जमा होने दें। वहीं गमले, कूलर और टायर और बाल्टी आदि में पानी न जमा रहने दें। गर्मियों में अगर आप जानवरों या पक्षियों के लिए पानी रखते हैं। तो हर 2 से 3 मिनट पर जरूर बदलें। नालियों और छत की रेगुलर बेसिस पर सफाई करनी चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/know-why-cooking-oil-rotation-is-important-for-health-in-hindi" target="_blank">Health Tips: तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर क्या असर होता है, आइए जानें</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><h2>मच्छरदानी का इस्तेमाल</h2><div>मार्केट में कई इलेक्ट्रिक रिपेलेंट या फिर क्रीम लाते हैं, जोकि मच्छर भगाने का दावा करते हैं। लेकिन इनमें केमिकल्स भी होता है, जोकि स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए रात को सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इससे मच्छर आपको नहीं काटते हैं।</div><div><br></div><h2>घर को बनाएं मच्छर-प्रूफ</h2><div>मच्छर घर के अंदर प्रवेश न कर पाए, इसके लिए अपने घर को मच्छर प्रूफ बनाएं। दरवाजों औऱ खिड़कियों पर जाली लगाएं। वहीं शाम के समय घर में मच्छर ज्यादा आते हैं। इसलिए समय से घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें।</div><div><br></div><h2>पूरी बाजू के कपड़े</h2><div>मलेरिया वाले मच्छर से खुद का बचाव करने के लिए हमेशा फुल स्लीव के कपड़े पहनें। शाम को घर से बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह से ढककर रखें। इस तरह से मच्छरों के काटने का खतरा कम होता है।</div><div><br></div><h2>अपनाएं घरेलू उपाय</h2><div>अगर आपके घर में भी मच्छर घुस गए हैं, तो कपूर रखकर या फिर नीम के पत्तों का धुआं करके इनको भगाएं। मच्छरों को घर से भगाने के लिए आप कमरे के अंदर तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:53:49 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/increased-risk-of-deadly-malaria-protect-yourself-and-your-family-with-5-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर क्या असर होता है, आइए जानें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/know-why-cooking-oil-rotation-is-important-for-health-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय किचन में कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल ही ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। अक्सर हम अपनी किचन में कुकिंग ऑयल को कई अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करते हैं। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब एक ही कुकिंग ऑयल को लंबे समय तक किचन का हिस्सा बना दिया जाता है। अगर समय-समय पर तेल बदलकर इस्तेमाल ना किया जाए तो इससे सेहत को कई तरह के नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं।</div><div><br></div><div>हालांकि, इसका मतलब हर दिन तेल बदलना नहीं है, बल्कि समय-समय पर जरूरत और खाना बनाने के तरीके के हिसाब से अलग तेल चुनना है। तो चलिए जानते हैं कि तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर किस तरह प्रभाव पड़ता है-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/vaginal-discharge-and-weakness-an-ayurvedic-fix" target="_blank">महिलाओं में White Discharge और थकान का रामबाण इलाज, अपनाएं ये 2 Ayurvedic Home Remedy</a></h3><h2>फैटी एसिड बैलेंस होता है बेहतर&nbsp;&nbsp;</h2><div>अमूमन लोग अपनी किचन में ऐसे तेलों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, जिनमें ओमेगा-6 काफी ज्यादा होता है। सूरजमुखी, सोयाबीन, कॉर्न, रिफाइंड तेल, सभी में ओमेगा-6 काफी मात्रा में पाया जाता है। वहीं अलसी, अखरोट, सरसों या कैनोला का तेल जैसे ओमेगा 3 रिच तेल कम ही भारतीय किचन में देखने को मिलते हैं। लेकिन जब आप तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करते हैं तो इससे फैटी एसिड बैलेंस करने में मदद मिलती है। याद रखें कि आपके शरीर को ओमेगा-6 और ओमेगा-3 दोनों की जरूरत होती है।&nbsp; &nbsp;</div><div><br></div><h2>शरीर को मिलता है पर्याप्त न्यूट्रिशन</h2><div>जब कुकिंग में तेल को बदल-बदलकर इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे शरीर को पर्याप्त न्यूट्रिशन मिलता है। दरअसल, ऐसा कोई तेल नहीं है, जिसमें सभी तरह के न्यूट्रिएंट्स या फैटी एसिड सही मात्रा में हों। जहां कुछ तेलों में मोनोअनसैचुरेटेड फैट ज्यादा होते हैं, कुछ में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और कुछ में ओमेगा-3 या ओमेगा-6 बेहतर मात्रा में मिलते हैं। साथ ही, तेल में अपने एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन भी मौजूद होते हैं। मसलन, कच्चे जैतून का तेल में ओलियोकैंथल नेचुरल पेनकिलर की तरह काम करता है। इसी तरह, राइस ब्रान ऑयल में पाया जाने वाला गामा-ओरिजैनॉल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। एवोकाडो तेल आंखों और स्किन के लिए अच्छा माना जाता है।</div><div><br></div><h2>सेल्स की दीवारों पर पड़ता है अच्छा असर</h2><div>यह तो हम सभी जानते हैं कि शरीर की हर कोशिका यानी सेल की दीवार चर्बी से बनी होती है। इसलिए, आप जैसा तेल खाएंगे, वैसी ही चर्बी सेल की दीवारों में लग जाएगी। ऐसे में अगर आप सिर्फ एक ही तरह का तेल खाएंगे तो इससे आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। मसलन, अगर आप सिर्फ नारियल तेल खाएंगे तो तुम्हारी सेल की दीवारें सख्त हो जाएंगी। जिसकी वजह से हार्मोन सिग्नलिंग, इम्यून सिस्टम, सब धीमा हो जाता है। इसी तरह, अगर सिर्फ ओमेगा-6 रिच तेल खाते हैं तो इससे दीवारें सूजन वाली हो जाएंगी। तेल के रोटेशन से हर कोशिका की दीवार बैलेंस्ड बनती है।</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 19:27:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/know-why-cooking-oil-rotation-is-important-for-health-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[महिलाओं में White Discharge और थकान का रामबाण इलाज, अपनाएं ये 2 Ayurvedic Home Remedy]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/vaginal-discharge-and-weakness-an-ayurvedic-fix]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपको भी पूरे दिन वजाइना में गीलापन महसूस होता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। वजाइनल डिस्चार्ज एक नहीं, कई तरह का होता है। वैसे यह कब नॉर्मल होता है और कब आपको इस पर ध्यान देने की जरुरत है, तो यह हर महिला को पता होना चाहिए। अक्सर वजाइनल डिस्चार्ज के साथ स्मैल आना, गाढ़ा डिस्चार्ज होना या डिस्चार्ज का रंग एकदम से बदल जाना सही नहीं है। दिनभर गीलापन महसूस करना और डिस्चार्ज के साथ कमजोरी भी महूसस होती है। दरअसल, ये शरीर में मौजूद कफ और कमजोर पाचन से जुड़ा है। यदि आपके साथ रोजाना यही हो रहा है, तो आपको ये उपाय जरुर करना चाहिए।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>जीरा, धनिया और सौंफ का पानी पिएं</b></div><div><br></div><div>- आपको बता दें कि, योनि में दिनभर में गीलापपन महसूस होने की दिक्कत कफ या पित्त के बढ़े हुए होने के कारण होता है। वैसे यह हार्मोनल असंतुलन की वजह भी हो सकता है।</div><div><br></div><div>- ऐसे में डाइजेशन और दोषों को बैलेंस करने में ये पानी मदद करता है।</div><div><br></div><div>- हार्मोन्स बैलेंस करने में भी यह काफी मदद करता है। ये पानी एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है। इससे वजाइना का पीएच लेवल बैलेंस होता है और खुजली, डिस्चार्ज व दुर्गंध कम होती है।</div><div><br></div><div>- इस पानी से वजाइनल डिस्चार्ज के साथ कमर दर्द और थकान भी दूर होती है और मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- इसके लिए आपको आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच धनिया के बीज और आधा चम्मच सौंफ के बीज ले सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद रातभर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह करीब आधा रह जाने तक उबालें और दिन में एक बार जरुर पिएं।</div><div><br></div><div><b>चावल का पानी पिएं</b></div><div><br></div><div>- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, चावल का पानी को आयुर्वेद में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह व्हाइट डिस्चार्ज में आराम दिलाता है, बल्कि यूटीआई की दिक्कत भी दूर होती है।</div><div><br></div><div>- वैसे ये पचाने में भी हल्का होता है। इससे हैवी पीरियड्स और ब्लीडिंग डिसऑर्डर को भी दूर करता है।</div><div><br></div><div>- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि इसकी तासीर ठंडी होती है। यह शरीर की गर्मी को दूर करता है।</div><div><br></div><div>- इसके लिए आपको 1 कटोरी चावल को एक बार धोना है।</div><div><br></div><div>- फिर इसको किसी मिट्टी के बर्तन या फिर स्टेनलेस स्टील के बर्तन में डालें।</div><div><br></div><div>- इसमें पानी भरकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें।</div><div><br></div><div>- चावल को पानी में ही थोड़ा मैश करें।</div><div><br></div><div>- इसको आप छानकर एक गिलास में भर लें और पूरे दिन में इसे कभी भी पी सकते हैं।</div><div><br></div><div>- इस बात का ध्यान रखना कि इसको स्टोर नहीं करना है, बल्कि रोज नया-ताजा बनाएं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 17:45:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/vaginal-discharge-and-weakness-an-ayurvedic-fix</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Pregnancy Planning: यह 1 'Yoga Pose' कंसीव करने में करेगा मदद, Boost होगी Fertility]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/boost-fertility-how-camel-pose-yoga-aids-conception]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अगर आप कंसवी की तैयारी कर रही हैं, तो सबसे पहले अपने खान-पान और दिनचर्या को संतुलित बनाना जरूरी है। स्वस्थ डाइट के साथ-साथ नियमित रूप से मेडिटेशन और योग करना भी बेहद फायदेमंद होता है। यदि खानपान सही नहीं होगा तो जीवनशैली अनियमित हो, शरीर में जरुरी न्यूट्रिएंट्स की कमी हो या हार्मोनल इंबैलेंस हो, तो इसका सीधा असर आपकी फर्टिलिटी पर होता है और कंसीव करने में दिक्कत आती है। कंसीव करने के लिए जितना जरुरी फर्टाइल विंडो में इंटिमेट होना, उतनी ही जरुरी बैलेंस और हेल्दी लाफस्टाइल को फॉलो करना। इस लेख में हम आपको एक ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है और गर्भधारण की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>कैमल पोज को करने का सही तरीका</b></span></div><div><br></div><div>- सबसे पहले आप योगा मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।</div><div><br></div><div>- अब अपने तलवों को फैलाना है और हाथों को एड़ियों पर रखें।</div><div><br></div><div>- रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर झुकाएं।</div><div><br></div><div>- गर्दन पर दबाव डाले बिना ऊपर की ओर देखें।</div><div><br></div><div>- कमर से घुटनों तक के हिस्से को आपको सीधा रखना है।</div><div><br></div><div>- सिर को ढीला छोड़ दें और छाती को ऊपर की तरफ उठाएं।</div><div><br></div><div>- इसको आपको कम से कम 10 सेकेंड इस पोजिशन को होल्ड करने की कोशिश करना।</div><div><br></div><div>- शुरुआत में आपको 10 सेकेंड के लिए ऐसा करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।</div><div><br></div><div>- कुछ समय इस पोजिशन को होल्ड करें और फिर वापिस नॉर्मल पोजिशन में आ जाएं।</div><div><br></div><div><b>कंसीव करने में कैसे मदद करता है कैमल पोज?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>रिप्रोडक्टिव एरिया में बढ़ता है ब्लड सर्कुलेशन</b></span></div><div><br></div><div>इस योगासन करने से पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो बेहतर होता है। इससे ओवरी और यूट्रस बेहतर तरीके से काम करता है।</div><div><br></div><div><b>हार्मोन्स को करता है बैलेंस</b></div><div><br></div><div>- इस आसन के करने से एंडोक्राइन सिस्टम को हेल्दी बनाता है और हार्मोन्स बैलेंस करने में मदद करता है।</div><div><br></div><div>- यह कंसीव करने के लिए बेहद जरुरी है। इसे करने से फर्टिलिटी भी बूस्ट होती है।</div><div><br></div><div><b>तनाव और एंग्जायटी कम होती है</b></div><div><br></div><div>&nbsp;कंसीव करने के लिए शरीर का स्ट्रेस फ्री होना जरुरी है। ऐसे में ये आसन तनाव को दूर करने में मदद करता है और मन को शांत करता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पेल्विक एरिया में लचीलापन आता है।</b></div><div><br></div><div>&nbsp;इस आसन को प्रतिदिन करने पेल्विक एरिया में लचीलापन आता है और कंसीव करने में आसानी होती है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:48:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/boost-fertility-how-camel-pose-yoga-aids-conception</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Newborn Care Tips: गर्मी में शिशु की देखभाल में न करें ये गलतियां, Health को हो सकता है नुकसान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/avoid-these-mistakes-while-caring-for-baby-in-summer-harmful-to-your-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों के मौसम में हर किसी की हालत खराब हो जाती है। बड़े लोग तो अपनी परेशानी कहकर बता देते हैं, लेकिन दिक्कत छोटे बच्चों के सामने आती है। खासकर तौर पर छोटे बच्चों के साथ। क्योंकि वह तो अपनी दिक्कत किसी को बता भी नहीं सकते हैं। ऐसे में घरवालों को छोटे बच्चों का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में अगर आपके घर में भी गर्मी में नन्हा मेहमान आया है, तो आपको उसकी देखभाल सही तरीके से करनी चाहिए।</div><div><br></div><div>ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी के मौसम में बच्चे को पसीना, गर्मी, डिहाइड्रेशन और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करके आपके बच्चे की किसी भी तरह की परेशानी कम होगी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/is-iron-levels-declining-include-5-super-foods-in-diet-to-restore-your-energy" target="_blank">Iron Deficiency: शरीर में घट रहा है Iron? अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Super Foods, लौट आएगी Energy</a></h3><div><br></div><h2>सही कपड़ों का चयन</h2><div>गर्मी के मौसम में बच्चे के लिए सही कपड़े चुनने चाहिए। इस मौसम में स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चे को हल्के फैब्रिक वाले कपड़े पहनाएं। क्योंकि हल्का सा भी मोटा फैब्रिक वाला कपड़ा उनको परेशान कर सकता है। इसलिए बच्चे को गर्मियों में सूती या लिनेन फैब्रिक के कपड़े पहनाने चाहिए।&nbsp;</div><div><br></div><h2>तापमान रखें सामान्य</h2><div>भले ही आपको कितनी ही तेज गर्मी लग रही हो, लेकिन बच्चे के हिसाब से कमरे का तापमान रखना चाहिए। क्योंकि ज्यादा ठंड में बच्चे को परेशानी हो सकती है। वहीं कमरे में तेज एसी या कूलर चलाने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे बच्चे के साथ-साथ मां को भी परेशानी होगी।</div><div><br></div><h2>घमौरियों से बचाव</h2><div>नन्हे बच्चे को घमौरियों से बचाने के लिए उनको रोजाना सादे पानी से नहलाएं। फिर उनके शरीर को अच्छे से सुखाएं। क्योंकि नमी की घमौरियों का कारण होती हैं। बच्चे के शरीर को सुखाने के बाद डॉक्टर द्वारा बताया गया पाउडर लगाएं। जिससे कि बच्चे को रैशेज न हों।</div><div><br></div><h2>रोज बदलें बेडशीट</h2><div>आमतौर पर घरों में रोजाना चादर नहीं चेंज की जाती हैं। लेकिन बच्चे की चादर को रोजाना बदलना चाहिए। चादर में लगी हल्की सी भी गंदगी बच्चे के शरीर में इंफेक्शन पैदा कर सकती है। कई बार लोगों को इंफेक्शन का कारण भी नहीं समझ आता है।</div><div><br></div><h2>दिन में न ले जाएं बाहर</h2><div>दिन के समय तेज गर्मी होती है, ऐसे में इस दौरान बच्चे को बाहर ले जाने से बचना चाहिए। खासतौर पर गर्मियों में 11 से 4 बजे के बीच बच्चे को बाहर न ले जाएं। वहीं अगर बाहर जाना बहुत जरूरी है, तो सिर को हल्के कपड़े से ढककर रखें, जिससे बच्चे को धूप और लू न लगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 13:44:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/avoid-these-mistakes-while-caring-for-baby-in-summer-harmful-to-your-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iron Deficiency: शरीर में घट रहा है Iron? अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Super Foods, लौट आएगी Energy]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/is-iron-levels-declining-include-5-super-foods-in-diet-to-restore-your-energy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आयरन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी खनिज है। आयरन खून में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जोकि ऑक्सीजन को पूरी बॉडी में पहुंचाता है। लेकिन शरीर में अगर आयरन की कमी हो जाती है, तो कई सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन आयरन की शुरूआती लक्षणों को लोग अनदेखा करते हैं। जिससे समस्या गंभीर हो सकती है। वहीं समय रहते आयरन की कमी को पहचानकर अपनी डाइट में सुधार करना जरूरी होता है।</div><div><br></div><div>आयरन युक्त भोजन और सही डाइट लेने से शरीर की एनर्जी बढ़ती है। कमजोरी दूर होती है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में आयरन की कमी ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आयरन की कमी से होने वाले लक्षणों कैसे दूर करें और इसकी कमी को कैसे दूर करें।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/is-knee-pain-making-life-difficult-3-powerful-yoga-poses-provide-instant-relief" target="_blank">Yoga For Joint Pain: क्या Knee Pain ने जीना कर दिया है मुहाल? ये 3 Powerful Yoga Asanas देंगे तुरंत आराम</a></h3><div><br></div><h2>आयरन की कमी के लक्षण</h2><div>शरीर में आयरन की कमी होने पर खून में हीमोग्लोबिन कम होने लगता है। साथ ही शरीर की एनर्जी घटने लगती है।</div><div>&nbsp;</div><div>आयरन की कमी होने पर लगातार कमजोरी, थकान और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है।</div><div>&nbsp;</div><div>होंठ और स्किन पीले पड़ सकते हैं और बाल व नाखून कमजोर हो सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>आयरन की कमी से सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>सांस लेने में परेशानी हो सकती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>वहीं आयरन की कमी से काफी ज्यादा सर्दी भी लगती है।</div><div><br></div><h2>ऐसे दूर करें आयरन की कमी</h2><div>आयरन की कमी को दूर करने से आपको अपनी डाइट में बदलाव करना चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><div>आपको अपनी डाइट में मेथी, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><div>इसके अलावा मूंगफली, चना, गुड़ और बीन्स जैसी चीजें भी आयरन का अच्छा स्त्रोत होती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>फल में आप सेब, चुकंदर और अनार आदि का सेवन कर सकती हैं।</div><div><br></div><h2>डॉक्टर से लें सलाह</h2><div>बता दें कि डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है। आयरन की सही मात्रा को अवशोषित करने के लिए आपको संतरा, नींबू आदि का सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन C की अच्छी मात्रा पाई जाती है। वहीं इन उपायों को नियमित रूप से अपनाकर शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है। साथ ही आप कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं से भी बच सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:59:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/is-iron-levels-declining-include-5-super-foods-in-diet-to-restore-your-energy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Yoga For Joint Pain: क्या Knee Pain ने जीना कर दिया है मुहाल? ये 3 Powerful Yoga Asanas देंगे तुरंत आराम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/is-knee-pain-making-life-difficult-3-powerful-yoga-poses-provide-instant-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सिर्फ उम्रदराज लोगों में ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोगों में भी जोड़ों के दर्द की समस्या देखने को मिलती है। वहीं बदलती लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट के कारण लोगों को कई तरह की सेहत संबंधी समस्याएं होती हैं। जिनमें घुटनों और कमर का दर्द आम समस्या है। अक्सर हर उम्र के लोगों को घुटनों में दर्द का अनुभव होता है। वहीं इस दर्द को कम करने के लिए आप अपनी डेली रूटीन में योग को शामिल कर सकते हैं। लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह जरूरी लेना चाहिए। लेकिन आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका अभ्यास करने से आप घुटनों के दर्द और अकड़न से राहत पा सकते हैं।</div><div><br></div><h2>इन योगासनों से पाएं घुटनों के दर्द से राहत</h2><div><br></div><h2>त्रिकोणासन</h2><div>इस आसन का अभ्यास करने से घुटने के जोड़ के आसपास की मसल्स को टारगेट करता है। इस आसन को करने से क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करने, लचीलेपन में सुधार और घुटनों की स्थिरता को बढ़ाने में मदद करता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/low-sodium-diet-hidden-health-dangers-revealed" target="_blank">आपकी Low Sodium Diet पहुंचा सकती है Brain को नुकसान! चक्कर और सिरदर्द हैं Warning Sign.</a></h3><div><br></div><h2>ऐसे करें त्रिकोणासन</h2><div>इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पैरों को करीब 3-4 फीट की दूरी पर रखकर खड़े हों।</div><div>फिर दाहिने पैर को 90 डिग्री के कोण पर बाहर की तरफ मोड़ें। वहीं बाएं पैर को थोड़ा अंदर की तरफ मोड़ें।</div><div>अपनी आर्म्स को जमीन के पैरेलल फैलाएं।</div><div>इसके बाद दाहिने पैर पर झुकें और अपर बॉडी को दाहिने पैर की तरफ नीचे रखें।</div><div>दाहिने हाथ को टखने, काफ या फर्श पर रखें, वहीं बाएं हाथ को छत की ओर बढ़ाएं।</div><div>अब दोनों पैरों को सीधा रखें और अपनी जांघ की मांसपेशियों को शामिल करें।</div><div>30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें और फिर यह दूसरी ओर से दोहराएं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>ऐसे करें वीरभद्रासन II</h2><div>खड़े होकर इस आसन की शुरूआत करें और फिर बायां पैर पीछे ले जाएं। अब दायां पैर आगे की तरफ रखें।</div><div>अपने दाहिने घुटने को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। यह टखने के साथ अलाइन हों।</div><div>अपनी आर्म्स को जमीन के समानांतर फैलाएं और हथेलियों को नीचे की ओर रखें।</div><div>अपने कंधों को ढीला रखें और फिर दाहिनी उंगलियों पर अपनी नजर रखें।</div><div>अब 30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक इस पोज में रहें और फिर दूसरी तरफ जाएं।</div><div><br></div><h2>ऐसे करें वृक्षासन</h2><div>वृक्षासन का अभ्यास करने से पहले खड़े हो जाएं और अपना वेट अपने दाहिने पैर पर डालें।</div><div>अब बाएं पैर को उठाएं और घुटने के जोड़ से बचते हुए दाहिने पैर की भीतरी जांघ पर रखें।</div><div>अपनी हथेलियों को अपनी छाती के सामने एक साथ लाएं। या अपनी बाहों को ऊपर की तरफ फैलाएं।</div><div>अब संतुलन के लिए अपनी आंखों को एक निश्चित बिंदु पर केंद्रित करें।</div><div>फिर 30 सेकेंड से एक मिनट तक इसी मुद्रा में रहें और फिर दूसरे पैर पर आ जाएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:10:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/is-knee-pain-making-life-difficult-3-powerful-yoga-poses-provide-instant-relief</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आपकी Low Sodium Diet पहुंचा सकती है Brain को नुकसान! चक्कर और सिरदर्द हैं Warning Sign.]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/low-sodium-diet-hidden-health-dangers-revealed]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">खाने में नमक यानी सोडियम की मात्रा कम रखना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है,लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा घटा देना भी सही नहीं है। लंबे समय तक बहुत कम सोडियम लेने से शरीर में कमजोरी, चक्कर आना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में सोडियम का सेवन करना ही बेहतर रहता है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">सोडियम शरीर के लिए जरूरी तत्व है, जो मांसपेशियों के सही कामकाज, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर लोग ज्यादा नमक के नुकसान के बारे में जानते हैं, लेकिन यह कम ही लोग समझते हैं कि लंबे समय तक बहुत कम सोडियम लेना भी नुकसानदेह हो सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों में लो-सोडियम डाइट अपनाने से कमजोरी, चक्कर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।</span></div><div><br></div><div>अक्सर इस समस्या को हाइपोनेट्रिया कहलाती है। आइए आपको बताते हैं सोडियम का कम होना कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसके क्या लक्षण हैं और इसे कैसे बैलेंस करें।</div><div><br></div><div><b>क्या समस्याएं होती है?</b></div><div><br></div><div>- मितली</div><div><br></div><div>- सिरदर्द</div><div><br></div><div>- मांसपेशियों में ऐंठन</div><div><br></div><div>- भ्रम</div><div><br></div><div><b>हाइपोनेट्रेमिया के ये होते हैं कारण</b></div><div><br></div><div>हाइपोनेट्रेमिया होने का सबसे बड़ा कारण होता है थोड़े ही अंतराल में ज्यादा मात्रा में पानी पी लेना, जिसकी वजह से खून में सोडियम का लेवल कम हो जाता है। ज्यादा मेहनत करने वाले खेल खेलने वाले खिलाड़ियों में भी पसीने के जरिए सोडियम का लॉस होता है। इन कारणों से भी सोडियम की मात्रा लाइट होती है-</div><div><br></div><div>- कुछ खास दवाएं</div><div><br></div><div>- हार्ट फेल्यिर, किडनी या लिवर की बीमारी और डायबिटीज</div><div><br></div><div>- लगातार डायरिया या उल्टी की समस्या बने रहना</div><div><br></div><div>- हॉर्मोन का असंतुलन</div><div><br></div><div>- अधिक मात्रा में शराब पीना</div><div><br></div><div><b>ब्रेन पर पड़ता है असर</b></div><div><br></div><div>यदि हाइपोनेट्रमिया की स्थिति में जल्द मेडिकल सहायता ना दी जाए तो ब्रेन को स्थायी रुप से नुकसान हो सकता है। इससे मुख्य रुप से ब्रेन के नर्व सेल्स डिहाइड्रेट और डैमेज होते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>सोडियम करता है ये काम</b></div><div><br></div><div>बॉडी अच्छे से काम करें, तो इसके लिए सोडियम का रोल मुख्य होता है-</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">- शरीर में फ्लूइड की मात्रा बैलेंस करना।</span></div><div><br></div><div>- नर्व्स और मसल्स के फंक्शन में मदद करना।</div><div><br></div><div>ऐसे मेंटेन करें सोडियम का लेवल</div><div><br></div><div>- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। एक बार में ज्यादा पानी पीने से बचें।</div><div><br></div><div>- इसके साथ ही हेल्दी, बैलेंस डाइट लें। फ्रोजन प्रोडक्ट या प्रोसेस फूड के लेवल को जरुर पढ़ें।</div><div><br></div><div>- खाने में ऊपर से नमक बिल्कुल न डालें और हाई सोडियम स्नैक्स लेने से बचें।</div><div><br></div><div>- शराब का सेवन ना करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:27:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/low-sodium-diet-hidden-health-dangers-revealed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Intermittent Fasting: वजन घटाने का यह Popular Trend सेहत पर पड़ सकता है भारी, जानें Side Effects]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/this-popular-weight-loss-trend-harmful-to-your-health-learn-about-its-side-effects]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' वजन घटाने और फिटनेस के लिए सबसे लोकप्रिय डाइट ट्रेंड बना हुआ है। इसमें एक व्यक्ति एक निश्चित समय के लिए उपवास करता है और बाकी समय भोजन करता है। वहीं कुछ शोध में यह सामने आया है कि बिना एक्सपर्ट की सलाह के और अधूरी जानकारी के 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' अपनाना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वहीं यह फास्टिंग सिर्फ कैलोरी को कम करने का तरीका नहीं, बल्कि यह शरीर के हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह से बदल देता है।</div><div><br></div><div>हालांकि 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' के कई लाभ भी होते हैं। तो वहीं इसके साइड इफेक्ट्स जैसे ज्यादा कमजोरी, हार्मोनल असंतुलन, चिड़चिड़ापन और पाचन संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इंटरमिटेंट फास्टिंग एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले इसके नकारात्मक पहलुओं को समझना जरूरी है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/5-foods-that-worsen-white-discharge" target="_blank">Health Alert! व्हाइट डिस्चार्ज में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकता है Infection का खतरा</a></h3><div><br></div><h2>मेंटल हेल्थ पर असर</h2><div>इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे गहरा और पहला असर हमारे हार्मोन्स और दिमाग पर होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में 'कोर्टिसोल' का लेवल बढ़ सकता है। जिस कारण नींद न आने और तनाव की समस्या होती है।</div><div><br></div><h2>महिलाओं पर असर</h2><div>इंटरमिटेंट फास्टिंग विशेष रूप से महिलाओं के लिए खतरनाक है। क्योंकि य़ह फास्टिंग महिलाओं के मासिक चक्र को बाधित कर सकता है। वहीं शुगर लेवल में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव होने से व्यक्ति को दिनभर धुंधलापन, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है।</div><div><br></div><h2>पोषक तत्वों की कमी</h2><div>इस फास्टिंग के दौरान लोग सिर्फ फैट नहीं बल्कि मांसपेशियों को धीरे-धीरे खोने लगते हैं। जब आपके शरीर को पर्याप्त समय तक पोषण नहीं मिलता है। तो शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरूकर देता है। अगर आपके आहार में प्रोटीन की सही मात्रा नहीं है, तो वेट तो कम होगा। लेकिन शरीर में ढीलापन और कमजोरी आ जाएगी। भोजन की सीमित अवधि की वजह से शरीर को मिनरल्स और विटामिन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते हैं।</div><div><br></div><h2>एक्सपर्ट की सलाह लें</h2><div>हर किसी के शरीर के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग उपयुक्त नहीं है। लो ब्लड प्रेशर, टाइप-1 डायबिटीज और ईटिंग डिसऑर्डर के शिकार लोगों को इस फास्टिंग से बचना चाहिए। अगर आप इसको शुरू करना चाहते हैं, तो अपने शरीर को अचानक से झटका देने की जगह धीरे-धीरे बदलाव करें। साथ ही पर्याप्त पानी का सेवन करें।</div><div><br></div><div>वहीं किसी डायटीशियन या डॉक्टर से परामर्श लेकर अपना डाइट चार्ट तैयार कर लें। फिटनेस का मतलब सिर्फ पतला होना नहीं बल्कि शरीर का अंदरूनी रूप से संतुलित और मजबूत होना है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:09:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/this-popular-weight-loss-trend-harmful-to-your-health-learn-about-its-side-effects</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Alert! व्हाइट डिस्चार्ज में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकता है Infection का खतरा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/5-foods-that-worsen-white-discharge]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ज्यादातर महिलाओं को व्हाइट डिस्चार्ज या सफेद पानी की समस्या रहती है। अक्सर महिलाएं समझ नहीं पाती कि इसे कैसे कंट्रोल करें। असल में कई लोग दवाइयों के साथ-साथ डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं, जबकि खान-पान का सीधा असर इस समस्या पर पड़ता है। ऐसी कई चीजों हैं जिनके खाने से समस्या और भी बढ़ सकती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>यदि आप बार-बार होने वाले डिस्चार्ज की समस्या से परेशान हैं, तो जरूरी है कि अपनी डाइट में थोड़े बदलाव करें। इस लेख हम आपको बताएंगे कि किन चीजों को अपनी डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं कौन-सी 5 चीजें, जिनको भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।</div><div><br></div><div><b>डाइट कंट्रोल क्यों जरूरी है?</b></div><div><br></div><div>व्हाइट डिस्चार्ज केवल एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर में हो रहे किसी आंतरिक असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। गलत खान-पान की आदतें इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं, इसलिए संतुलित और सही आहार लेना बहुत जरूरी है।</div><div><br></div><div><b>अनानास</b></div><div><br></div><div>अनानास की तासीर काफी एसिडिक होती है, जो शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है। इसके अधिक सेवन से वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और जलन या इरिटेशन भी महसूस हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>मशरूम</b></div><div><br></div><div>असल में मशरूम एक प्रकार का फंगस है, जो कुछ मामलों में यीस्ट&nbsp; (कैंडिडा) की ग्रोथ को बढ़ाता है और नम व ठंडी तासीर के कारण डिस्चार्ज बढ़ सकता है। यदि पहले से यीस्ट इंफेक्शन है, तो इसका सेवन भूलकर भी न करें।</div><div><br></div><div><b>पत्तागोभी और फूलगोभी</b></div><div><br></div><div>इन दोनों सब्जियों की तासीर ठंडी और नमी बढ़ाने वाली होती है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ सकती है, वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और गैस व ब्लोटिंग की समस्या भी हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>कद्दू</b></div><div><br></div><div>कद्दू की सब्जी ज्यादातर लोग कम खाना पसंद करते हैं, लेकिन आपको यह सब्जी अधिक पसंद है। आप कद्दू की सब्जी खाते हैं, तो सफेद पानी समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।</div><div><br></div><div><b>लौंग</b></div><div><br></div><div>वैसे लौंग का प्रयोग सबसे ज्यादा मसाला में किया जाता है। अगर आप लौंग का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो यह वजाइनल पीएच बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इससे इंफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है, जलन और असहजता हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>व्हाइट डिस्‍चार्ज को कंट्रोल करने के टिप्‍स</b></div><div><br></div><div>- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।</div><div><br></div><div>- डाइट प्रोबायोटिक फूड्स शामिल करें।</div><div><br></div><div>- अधिक मीठा और जंक फूड खाने से बचें।</div><div><br></div><div>- साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 11:17:58 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/5-foods-that-worsen-white-discharge</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[गर्भवती महिलाओं के लिए राहत! Pregnancy में Paracetamol Use पर बड़ा खुलासा, जानें नई Health Report]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/is-paracetamol-safe-during-pregnancy-new-study-says-yes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रेग्नेंसी के दौरान हर चीज का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है। डॉक्टर भी कहते हैं कि प्रेग्नेंट महिला को कभी भी किसी भी तरह की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को चिंता रहती है, तो उन्हें भूलकर भी कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। हल्का सा सिरदर्द, बुखार होने पर किसी भी तरह की दवा लेना चाहिए। अब मन में सवाल आता है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान पेरासिटामोल सेवन करना चाहिए या नहीं।</div><div><br></div><div><b>क्या कहती है रिसर्च?&nbsp;</b></div><div><br></div><div>द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स गायनेकोलॉजी एंड विमेंथ हेल्थ जर्नल में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के समय पेरासिटामोल लेने से बच्चों में किसी भी मानसिक विकास ऑटिज्म का खतरा नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान तेज बुखार आना डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल ले सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>क्या है स्टडी में खास&nbsp;</b></div><div><br></div><div>एक हालिया शोध में कई अध्ययनों का गहराई से विश्लेषण किया गया, जिसमें यह सामने आया कि इस दवा के उपयोग से बच्चों के विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। कुछ वर्ष पहले आई कुछ रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई गई थी कि गर्भावस्था के दौरान पेरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म और ADHD का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, नए अध्ययन के निष्कर्ष इस धारणा का समर्थन नहीं करते। इसमें स्पष्ट किया गया है कि पेरासिटामोल के सेवन और बच्चों में ऑटिज्म या ADHD के जोखिम के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।</div><div><br></div><div><b>पेरासिटामोल को खाना गलत है?</b></div><div><br></div><div>नई स्टडी से पता चला है कि पेरासिटामोल का सीधा संबंध बच्चों की सेहत से नहीं है। जैसे प्रेग्नंसी के समय बार-बार बुखार या दर्द रहना, किसी भी तरह का संक्रमण, ज्यादा तनाव और बेचैनी, जेनेटिक कारण की वजह से बच्चों के न्यूरोडेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है। इसलिए पेरासिटामोल को गलत मान लिया गया था।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:24:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/is-paracetamol-safe-during-pregnancy-new-study-says-yes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Women Health: फॉल्स लेबर पेन असली डिलीवरी दर्द नहीं, जानें दोनों के बीच का बड़ा अंतर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/false-labor-pain-not-real-labor-pain-learn-big-difference-between-two]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन हमेशा डिलीवरी का संकेत नहीं देता है। बता दें प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन कई बार प्रोड्रोमल यानी की फॉल्स लेबर पेन भी हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रोड्रोमल महिला के शरीर को असली लेबर पेन के लिए तैयार करता है। लेकिन इसको डिलीवरी की शुरूआत नहीं माना जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन प्रोड्रोमल यानी की फॉल्स लेबर पेन के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इससे कैसे निपटा जा सकता है।</div><div><br></div><h2>जानिए क्‍या है प्रोड्रोमल लेबर</h2><div>प्रोड्रोमल लेबर प्रसव प्रोसेस का एक सामान्य हिस्सा है। इस दौरान महिला के पेट में आने वाले कॉन्ट्रैक्शन और कभी-कभी एक्टिव लेबर के कॉन्ट्रैक्शन जितना दर्दनाक लग सकता है। यह समय-समय पर आते हैं और कुछ मिनटों तक ही रहते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/7-signs-your-liver-is-in-danger-health-alert" target="_blank">World Liver Day: भारत में क्यों बढ़ रहा Liver Damage का खतरा? इन 7 संकेतों को न करें Ignore</a></h3><div><br></div><div>माना जाता है कि यह कॉन्‍ट्रैक्‍शन गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म के लिए सही स्थिति में लाने में मदद करते हैं। वहीं यह महिला के गर्भाशय और पेल्विस की मांसपेशियों को सक्रिय लेबर के लिए भी तैयार करते हैं।</div><div><br></div><h2>समझा जाता है असली लेबर पेन</h2><div>प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में प्रोड्रोमल लेबर महसूस होता है। इस कारण कई महिलाएं इसको असली लेबर पेन की शुरूआत समझ लेती हैं। लेकिन इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है।</div><div><br></div><h2>कब होता है ये दर्द</h2><div>ज्यादातर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के करीब 37वें सप्ताह के आसपास प्रोड्रोमल लेबर शुरू हो सकता है। लेकिन इसकी अवधि निश्चित नहीं होती है और हर गर्भावस्था और हर महिला में यह अलग-अलग हो सकती है। कभी-कभी फॉल्स लेबर की कॉन्ट्रैक्शन कई दिनों तक भी चल सकती है।</div><div><br></div><h2>दर्द कितनी देर रहता है</h2><div>बता दें कि आमतौर पर फॉल्स लेबर कॉन्ट्रैक्शन हल्के दर्द वाले होते हैं, जोकि हर 5 मिनट में आ सकते हैं। करीब 60 सेकेंड तक रह सकते हैं। लेकिन समय का साथ इनमें बढ़ोतरी नहीं होती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि महिला की सर्विक्स फैल रही है या फिर वह सही में लेबर पेन में जा रही है</div><div><br></div><h2>प्रोड्रोमल लेबर के लक्षण</h2><div>समय के साथ ऐंठन या दर्द नहीं बढ़ना।</div><div>1 मिनट तक हर कॉन्‍ट्रेक्शन चलता है।</div><div>पेट के सामने वाले हिस्सा में कड़ापन या कसाव होना।</div><div>कॉन्‍ट्रेक्‍शन जो पांच मिनट के अंतराल पर होते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>फॉल्‍स लेबर पेन से ऐसे निपटें</h2><div>अगर रात में फॉल्स लेबर पेन शुरू हो तो थोड़ी देर सोने की कोशिश करें।</div><div>कुछ स्नैक्स खा लें।</div><div>गुनगुने पानी से नहाएं।</div><div>पानी या फिर स्पोर्ट्स ड्रिंक पिएं।</div><div>एक झपकी लें।</div><div>कोई हल्का-फुल्का काम करें।</div><div>थोड़ा समय के लिए आराम से टहलें।</div><div>इस दौरान ऐसा काम करें, जिससे आप रिलैक्स हों, जैसे- संगीत सुनना, किताबें पढ़ना, सुरक्षित हर्बल चाय पीना और ध्यान आदि करना।</div><div><br></div><h2>इन लक्षणों से समझें मह‍िला एक्‍ट‍िव लेबर पेन में है</h2><div>एक लेख में बताया गया है कि पेल्विक जांच के बिना यह बता पाना संभव नहीं होता है कि फॉल्स लेबर एक्टिव लेबर कॉन्ट्रैक्शन में बदल गए हैं या फिर नहीं।</div><div><br></div><div>लेकिन कुछ लक्षणों के द्वारा आप इसको समझ सकते हैं। जैसे- अगर कॉन्ट्रैक्शन नियमित अंतराल पर 5 मिनट से कम गैप में होने लगें, या फिर 1 मिनट से ज्यादा समय तक हर कॉन्ट्रैक्शन चले और यह स्थिति लगातार 1 घंटे से ज्यादा बनी रहे। इस स्थिति में आपको गायनोकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>डॉक्टर से कब संपर्क करें</h2><div>प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगर कॉन्ट्रैक्शन के दौरान प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग हो रही है। या फिर आपको ऐसा लग रहा है कि बच्‍चे की मूवमेंट सामान्‍य से कम हो रही है। तो इस स्थिति में आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:15:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/false-labor-pain-not-real-labor-pain-learn-big-difference-between-two</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Liver Day: भारत में क्यों बढ़ रहा Liver Damage का खतरा? इन 7 संकेतों को न करें Ignore]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/7-signs-your-liver-is-in-danger-health-alert]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज यानी 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उदेश्य है लिवर से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरुकता फैलाना, शुरुआती पहचान को बढ़ावा देना और लिवर के हेल्थ के लिए प्रति लोगों को सचेत करना है। इस साल की थीम है "सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रांग लिवर" जिसका मतलब है कि मजबूत आदतें, स्वस्थ लिवर है। भारत में लिवर की बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। सबसे डराने वाली बात तो यह है कि लिवर की बीमारी के लक्षण तब तक सामने नहीं आते, जब तक कि स्थिति बहुत गंभीर न हो जाए। इसी वजह से लिवर की बीमारियां जल्दी पता नहीं चलती है। हालांकि, कुछ संकतों पर ध्यान देने से बीमारी का पता चल जाता है। आइए आपको इन संकेतों के बारे में बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना</b></div><div><br></div><div>अगर आपको सबसे ज्यादा थकान महसूस होती है तो इसका पहला संकेत यही होता है। जब लिवर ठीक से कम नहीं करता है, तो ब्लड में टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। इससे दिमाग की काम करने की क्षमता और शरीर की एनर्जी प्राभिवत होती है।</div><div><br></div><div><b>त्वचा और आंखों का पीला पड़ना&nbsp;</b></div><div><br></div><div>जब लिवर बिलीरुबिन को ठीक तरह से संभाल नहीं पाता, तो यह शरीर में इकट्ठा होने लगता है। इसके कारण त्वचा और आंखों में पीला रंग दिखाई देने लगता है, जिसे पीलिया का संकेत माना जाता है। आमतौर पर लोग इसी बदलाव को देखकर डॉक्टर से सलाह लेते हैं, लेकिन कई बार तब तक समस्या काफी गंभीर रूप ले चुकी होती है।</div><div><br></div><div><b>भूख में कमी और वजन का अचानक गिरना</b></div><div><br></div><div>अक्सर पाया जाता है कि लिवर खराब होने पर पाचन तंत्र पर सीधा असर दिखने लगता है। भारत की 9% से 32% आबादी फैटी लिवर से परेशान है। आज की जनरेशन में भी भूख लगने जैसे लक्षण आम होते जा रहे हैं, जो लिवर का समस्या का बड़ा संकेत है।</div><div><br></div><div><b>पेट में दर्द या सूजन</b></div><div><br></div><div>पेट में तरल पदार्थ का जमा होना इस बात का संकेत होता है कि लिवर बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। भारत में सिरोसिस के मामलों का एक बड़ा कारण अत्यधिक शराब का सेवन माना जाता है, जिसके चलते पेट फूलने और सूजन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।</div><div><br></div><div><b>गहरे रंग का पेशाब और हल्का मल</b></div><div><br></div><div>यदि आपके पेशाब का रंग गहरा है और मल का रंग असामान्य रुप से हल्का है, तो यह बाइल के फ्लो में समस्या का संकेत हो सकता है। कई लोग इसे सिर्फ&nbsp; डिहाइड्रेशन समझकर इंग्नोर कर दते हैं, जो बाद में दिक्कत दे सकता है।</div><div><br></div><div><b>आसानी से चोट लगना या ब्लीडिंग होना</b></div><div><br></div><div>लिवर शरीर में खून को जमाने वाले जरूरी तत्व तैयार करता है। जब यह अंग कमजोर पड़ जाता है, तो छोटी-सी चोट लगने पर भी अधिक रक्तस्राव होने लगता है या शरीर पर आसानी से नीले निशान उभर आते हैं। कई शोधों के अनुसार, भारत में अनेक लोगों को सिरोसिस की जानकारी तब मिलती है, जब उन्हें खून बहने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।</div><div><br></div><div><b>त्वचा पर खुजली होना</b></div><div><br></div><div>अगर बिना किसी रैशेज या दाने के शरीर पर खुजली होना लिवर की बीमारी का एक छिपा हुआ लक्षण हो सकता है। यह त्वचा के नीचे बाइल सॉल्ट्स जमा होने के कारण होता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य त्वचा समझते हैं।</div><div><br></div><div><b>समय पर पहचान है जरूरी</b></div><div><br></div><div>आपको बता दें कि, लिवर अचानक से फेल नहीं होता बल्कि यह धीरे-धीरे खराब होता है और अक्सर इसमें दर्द भी नहीं होता है। इसलिए समय रहते हुए लिवर की बीमारियों के लक्षणों की पहचान करना बेहद जरुरी है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:25:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/7-signs-your-liver-is-in-danger-health-alert</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Liver Day 2026: बिना लक्षण खराब हो रहा है लिवर, Expert से जानें इसे Healthy रखने के अचूक उपाय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/world-liver-day-expert-tips-to-prevent-silent-disease]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के कारण हम सभी अपनी सेहत का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में कई तरह की बीमारियां लोगों को घेर रही है। लिवर से संबंधित बीमारियां आजकल आम होती जा रही हैं। यह हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन अक्सर लोग इसकी सेहत पर ध्यान नहीं देते। लिवर शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने, भोजन के पाचन में सहायता करने और आवश्यक प्रोटीन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।</div><div><br></div><div>जब आप गलत खानपान को अपनाती है तो लिवर पर असर पड़ता है। शुरुआत में लिवर की बीमारी के लक्षण साफ नहीं दिखते है। बाद में धीरे-धीरे बीमारी बढ़ती है। हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे (World Liver Day 2026) मनाया जाता है। आइए आपको बताते हैं लिवर खराब के संबंधित लक्षण।</div><div><br></div><div><b>खराब जीवनशैली के कारण लिवर में दिक्कत आती हैं</b></div><div><br></div><div>लिवर की सेहत बिगड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण हमारी दिनचर्या और गलत खानपान की आदतें होती हैं। जब हम नियमित रूप से ज्यादा तेल-मसालेदार भोजन, फास्ट फूड और शराब का सेवन करते हैं, तो इसका सीधा असर लिवर पर पड़ता है। इसके अलावा बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी लिवर संबंधी समस्याओं को बढ़ावा देती है। आजकल फैटी लिवर जैसी बीमारी तेजी से फैल रही है, जो शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के पनपती है। यानी आपको शुरुआत में कुछ महसूस नहीं होता, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर धीरे-धीरे प्रभावित होता रहता है।</div><div><br></div><div><b>इन संकेतों पर ध्यान देना जरुरी है</b></div><div><br></div><div>- अगर आपको बार-बार थकान महसूस होना।</div><div><br></div><div>- अचानक वजन बढ़ना या कम होना।</div><div><br></div><div>- पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द होना।</div><div><br></div><div>- आंखों या त्वचा का पीला पड़ना</div><div><br></div><div><b>लिवर को हेल्दी रखने के ये हैं आसान तरीके</b></div><div><br></div><div>- रोजाना खाने में हरी सब्जियां, फल और फाइबर जरुर खाएं।</div><div><br></div><div>- तला-भुना और जंक फूड से दूर रहे।</div><div><br></div><div>- शराब और स्मोक से दूरी बनाएं</div><div><br></div><div>- रोजाना एक्सरसाइज जरूर करें</div><div><br></div><div>- समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना बहुत जरुरी है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:52:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/world-liver-day-expert-tips-to-prevent-silent-disease</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Morning Drink: पेट की चर्बी मक्खन की तरह पिघलेगी, Gym जाए बिना होगा तेजी से Weight Loss]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/health-tip-fast-weight-loss-with-aloe-vera-juice]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के चलते वजन का बढ़ना आम हो गया है, लेकिन इसको कम करना काफी मुश्किल होता है। इसके लिए महिलाएं जिम, डाइटिंग और कठिन रुटीन को फॉलो करती हैं, फिर भी वजन कम नहीं कर पाती है। आज हम आपको इस लेख में ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जो नेचुरल भी है, असरदार भी और इसे फॉलो करना भी बेहद आसान है।</span></div><div><br></div><div>वजन कम करने के लिए आप रोजाना मॉर्निंग में एलोवेरा, आंवला और अंबा हल्दी का बना हुआ जूस जरुर पिए। यह न केवल वेट लॉस बल्कि शरीर को अंदर से जूस करके आपको हल्का, एनर्जेटिक और ग्लोइंग भी बनाता है। आइए आपको इस जूस को बनाने के फायदे बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>स्पेशल वेट लॉस जूस की सामग्री</b></div><div><br></div><div>-एलोवेरा जेल- 2 चम्‍मच</div><div>-आंवला- 1 छोटा (या 1 चम्मच आंवला जूस)</div><div>-अंबा हल्दी- 1/4 चम्‍मच (पाउडर या कच्ची)</div><div>-पुदीने की पत्तियां- 4-5</div><div>-पानी- 1 गिलास</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>स्पेशल वेट लॉस जूस कैसे लें?</b></span></div><div><br></div><div>- ऊपर बताई हुई सभी सामग्री को एक साथ ब्लेंड करें और फ्रेश जूस को तैयार करें।</div><div><br></div><div>- अब इसमें पुदीने की पत्तियां भी मिलाएं।</div><div><br></div><div>- रोजाना सुबह खाली पेट पिएं।</div><div><br></div><div>- जब आप इस जूस पी लें, कम से कम 20-30 मिनट तक कुछ भी न पिएं।</div><div><br></div><div>- इसको लगातर आप 2-3 हफ्तों तक सेवन करें।</div><div><br></div><div>इस मॉर्निंग जूस के अनगिनत फायदे</div><div><br></div><div>- यह शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे शरीर में हल्कापन फील होता है।</div><div><br></div><div>- पेट की चर्बी धीरे-धीरे मक्खन की तरह पिघलने लगती है।</div><div><br></div><div>- लिवर साफ और मजबूत बना रहता है।</div><div><br></div><div>- डाइजेशन बेहतर होता है।</div><div><br></div><div>- इस जूस के सेवन से हार्मोनल बैलेंस बेहतर होता है।</div><div><br></div><div>- स्किन और बाल हेल्दी बनते हैं।</div><div><br></div><div>- एनर्जी लेवल भी बढ़ेगा।</div><div><br></div><div><b>आंवला के फायदे</b></div><div><br></div><div>- आयरन लेवल को सही करता है।</div><div><br></div><div>- इम्यूनिटी को बूस्ट करता है।</div><div><br></div><div>- मोटापा कम करता है।</div><div><br></div><div>- त्रिदोष को बैलेंस करता है।</div><div><br></div><div>- चेहरे पर ग्लो आता है और हेयर फॉल कम होता है।</div><div><br></div><div><b>एलोवेरा के फायदे</b></div><div><br></div><div>- एलोवेरा पित्त दोष को बैलेंस करता है।</div><div><br></div><div>- वजन को कंट्रोल में रखता है।</div><div><br></div><div>- लिवर के लिए काफी फायदेमंद होता है।</div><div><br></div><div>- हार्मोनल बैलेंस को बेहतर करता है।</div><div><br></div><div><b>अंबा हल्‍दी</b></div><div><br></div><div>- डाइजेशन के लिए यह काफी अच्छी होती है।</div><div><br></div><div>- लिवर के लिए सबसे बेहतरीन है।</div><div><br></div><div>- यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है।</div><div><br></div><div>-इसमें एंटी-फंगस होती है।</div><div><br></div><div>- बालों और त्वचा के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।</div><div><br></div><div>- वजन को कम करता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:49:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/health-tip-fast-weight-loss-with-aloe-vera-juice</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[GIST Cancer: पेट दर्द, थकान को न समझें मामूली, Experts ने GIST Cancer को बताया 'Silent Killer']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/not-take-stomach-pain-and-fatigue-for-granted-experts-call-gist-cancer-silent-killer]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनियाभर में तेजी से कैंसर की बीमारी बढ़ रही है। जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में बढ़ रहा है। वहीं कुछ दशकों पहले कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ या बुजुर्गों को होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन अब बच्चे भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल अकेले भारत में 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। वहीं कुछ खास तरह के कैंसर के मामले बच्चों में ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।</div><div><br></div><div>वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट्स के हिसाब से हर साल कैंसर के नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। पर्यावरणीय प्रदूषण, खराब लाइफस्टाइल, खानपान में गड़बड़ी और समय पर रोग का पता न चलना कैंसर के खतरे को बढ़ाता जा रहा है। वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति अधिक गंभीर और चिंताजनक है। क्योंकि यहां बड़ी आबादी समय पर स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नहीं पहुंच पाती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/even-minor-injury-can-be-fatal-learn-symptoms-of-this-bleeding-disorder" target="_blank">Haemophilia Disease: मामूली चोट भी हो सकती है जानलेवा, जानें इस Bleeding Disorder के लक्षण</a></h3><div><br></div><div>हम सभी अक्सर लंग्स-ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन जैसे कैंसर के बारे में सुनते और पढ़ते रहते हैं। एक्सपर्ट की मानें, तो कुछ तरह के कैंसर काफी दुर्लभ होते हैं, जिनकी चर्चा कम होती है। ऐसा ही एक कैंसर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर है, जिसके जोखिमों के बारे में हम सभी लोगों को अलर्ट होना चाहिए।</div><div><br></div><h2>गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले</h2><div>यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तरह का कैंसर है। जोकि पाचन तंत्र में विकसित होता है। आमतौर पर यह कैंसर पेट और छोटी आंत में होता है। वहीं कुछ मामलों में यह बड़ी आंत, भोजन नली और मलाशय में भी हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले बहुत कम होते हैं, लेकिन यह अक्सर धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है। जेनेटिक म्यूटेशन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है।</div><div><br></div><div>GIST कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। यह एक तरह से सॉफ्ट टिशू सारकोमा होता है।</div><div><br></div><div>आमतौर पर ट्यूमर आपके पेट या छोटी आंत में आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनते हैं।</div><div><br></div><div>कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक इंच से छोटे हो सकते हैं। आमतौर पर इस तरह के ट्यूमर के कोई लक्षण नहीं होते हैं।</div><div><br></div><h2>गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की पहचान</h2><div>गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर और इसके हर बार लक्षण हों यह जरूर नहीं है। कई बार लोगों को इसका तब पता चलता है, जब वह किसी और वजह से सर्जरी या टेस्ट करवाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो सभी लोगों को पेट से संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए, जिससे कम समय रहते इसकी पहचान हो सके।</div><div><br></div><div>अक्सर कब्ज और थकान की दिक्कत होना।</div><div>अक्सर पेट में दर्द रहना या शौच के साथ खून आना।</div><div>बिना किसी प्रयास के वेट लॉस होना।</div><div>भूख न लगना या फिर खाने की इच्छा न होना।</div><div>वहीं उल्टी के साथ खून आना।</div><div><br></div><h2>कैंसर की वजह</h2><div>इस कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम जेनेटिक म्यूटेशन माना जाता है। अधिकतर मामलों में KIT या PDGFRA जीन में बदलाव की वजह से कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है और ट्यूमर का रूप ले लेती है। आमतौर पर यह म्यूटेशन पर जन्म के समय नहीं होता है। बाद में यह विकसित हो सकता है। इसलिए ज्यादातर मामलों में इसको वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>आमतौर पर इस कैंसर का खतरा 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में देखा जाता है।</div><div><br></div><div>कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से पीड़ित लोगों में कैंसर और ट्यूमर होने की आशंका बढ़ जाती है।</div><div><br></div><div>वहीं जिन लोगों में पहले किसी तरह का ट्यूमर रहा हो, या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो। उनमें भी यह जोखिम ज्यादा हो सकता है।</div><div><br></div><h2>बचाव</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि यह पर्यावरणीय या लाइफस्टाइल फैक्टर्स के बजाय जेनेटिक म्यूटेशन के कारण से होते हैं।</div><div><br></div><div>अब तक इसके बचाव का कोई पुख्ता तरीका नहीं खोजा गया है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे- व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें, वहीं स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखें। यह कैंसर के जोखिमों को कम करने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:39:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/not-take-stomach-pain-and-fatigue-for-granted-experts-call-gist-cancer-silent-killer</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[दिनभर का Stress और थकान मिटाएगा यह Foot Detox, जानें बॉडी को Relax करने का सीक्रेट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/the-secret-to-a-full-body-detox-is-a-foot-soak]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दिनभर की थकान, स्ट्रेस और शरीर में भारीपन से परेशान रहते हैं, तो यह लेख सिर्फ आपके लिए है। दरअसल, लंबे समय तक खड़े रहना, भागदौड़ भरी जीवनशैली और मेंटल प्रेशर के कारण आपका शरीर जरुर थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में आप इस सिंपल सा Foot Soak किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह केवल पैरों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण बॉडी रिलैक्सेशन और प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया है, जो शरीर और मन दोनों को आराम पहुंचाती है। गुनगुने पानी में कुछ देर तक पैरों को डुबोकर रखने से थकान कम होती है और रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे पूरे शरीर में ताजगी और हल्कापन महसूस होता है।</div><div><br></div><div>अगर आप खुद को एनर्जेटिक, फ्रेश और रिलैक्स महसूस करेंगी। रात को सोने से पहले इसे जरुर करें, ऐसा करने से आपको गहरी नींद और अगले दिन आप ज्यादा एक्टिव नजर आएंगे। आइए आपको बताते घर पर आप कैसे पैरों को डिटॉक्स कर सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>Detox Foot Soak की सामग्री</b></div><div><br></div><div>-गुनगुना पानी- 1 बाल्टी</div><div>-एप्सम सॉल्ट- 1 बड़ा चम्‍मच</div><div>-एप्‍पल साइडर विनेगर- 1 बड़ा चम्‍मच</div><div>-रोजमेरी की पत्तियां- 10</div><div>-अदरक (कद्दूकस या स्लाइस)- 1 छोटा चम्मच</div><div><br></div><div><b>Detox Foot Soak की विधि</b></div><div><br></div><div>- इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं।</div><div><br></div><div>- पैरों को 15-20 मिनट तक इसमें डुबोकर रखना है।</div><div><br></div><div>- इसके बाद पैरों को हल्के हाथ से नीचे से ऊपर की दिशा में ब्रश करें।</div><div><br></div><div>- इसे रात को सोने से पहले करें।</div><div><br></div><div>- इससे आपको गहरी और सुकूम भरी नींद मिलेगी और सुबह आप फ्रेश महसूस करेंगे।</div><div><br></div><div>- इसकी मदद से आपका ब्लड सर्कुलेशन और लिम्फेटिक फ्लो अच्छा रहता है।</div><div><br></div><div>Detox Foot Soak क्‍यों हैं फायदेमंद?</div><div><br></div><div>- इस डिटॉक्स Foot Soak से नर्वस सिस्टम शांत रहता और मानसिक तनाव को कम करता है, जिससे आपको अंदर से सुकून मिलता है।</div><div><br></div><div>- ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाना है, जिससे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सजीन और पोषक तत्व सही तरीके से पहुंचते हैं।</div><div><br></div><div>- पैरों और पूरे शरीर की थकान को कम करके आपको हल्का और रिलैक्स फील कराता है।</div><div><br></div><div>- शरीर के नेचुरल डिटॉक्स प्रोसेस को सपोर्ट करता है, जिससे टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं।</div><div><br></div><div>- सूजन और भारीपन कम होना, जब आप लंबे समय तक खड़ी रहती है या चलती हैं।</div><div><br></div><div>- डिटॉक्स फुट सोक मसल्स को रिलैक्स करके दर्द और अकड़न को कम करती है।</div><div><br></div><div>- इससे शरीर रिचार्ज होता है पूरे दिन की थकान दूर हो जाती है।</div><div><br></div><div>- इसके साथ ही नींद की क्वालिटी बेहतरीन बन जाती है, जिससे आप सुबह कुछ ज्यादा ही फ्रेश और एनर्जिटिक महसूस बनाते हैं।</div><div><br></div><div>- यह डिटॉक्स सोक पैरों की स्किन को सॉफ्ट और हेल्दी करता है, इससे ड्राईनेस और रफनेस कम होती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 10:43:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/the-secret-to-a-full-body-detox-is-a-foot-soak</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Haemophilia Disease: मामूली चोट भी हो सकती है जानलेवा, जानें इस Bleeding Disorder के लक्षण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/even-minor-injury-can-be-fatal-learn-symptoms-of-this-bleeding-disorder]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हीमोफीलिया एक आनुवांशिक ब्लीडिंग डिसऑर्डर होता है। इस बीमारी में ठीक तरह से ब्लड का क्लॉट नहीं बन पाता है। जिससे ब्लड लंबे समय तक पीड़ित व्यक्ति से बहता रहता है। चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा भी साबित होता है, क्योंकि ब्लड का बहना जल्दी बंद नहीं होता है। ऐसा इसलिए होता है कि ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए जरूरी क्लॉटिंग फैक्टर्स नाम के प्रोटीन की अनुपस्थिति होती है। आमतौर पर यह बीमारी पुरुषों को होती है, लेकिन बता दें कि यह बीमारी महिलाओं द्वारा फैलती है।</div><div><br></div><div>यह डिसऑर्डर कितना गंभीर है, यह ब्लड में मौजूद क्लॉटिंग फैक्टर्स की मात्रा पर निर्भर करता है। इसलिए इस बीमारी के बारे में जानना बेहद जरूरी है। जिससे कि इसके बचाव के तरीकों को अपनाया जा सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस बीमारी, इसके लक्षण और रोकथाम के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/healthy-neem-juice-are-you-drinking-it-wrong" target="_blank">नीम जूस के गंभीर Side Effects: फायदे की जगह Body को हो सकता है बड़ा नुकसान, हो जाएं अलर्ट!</a></h3><div><br></div><h2>हीमोफीलिया की वाहक</h2><div>एक्सपर्ट की मानें, तो महिलाएं हीमोफीलिया की वाहक होती हैं। हालांकि यह तब तक जिंदगी को खतरे में डालने वाला डिसऑर्डर नहीं माना जाता है, जब तक कि किसी जरूरी अंग से ब्लीडिंग न होने लगे। यह एक गंभीर रूप से कमजोर करने वाला डिसऑर्डर हो सकता है, जिसका कोई इलाज नहीं है।</div><div><br></div><div>मां या बच्चे के जीन के एक नए उत्परिवर्तन की वजह से करीब एक तिहाई मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में जब मां वाहक होती है और पिता में यह विकार नहीं होता है। तो लड़कों में हीमोफीलिया होने का 50% अंदेशा होता है। वहीं लड़कियों के वाहक होने का 50% जोखिम रहता है। इस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जब गर्दन में दर्द, धुंधली निगाह, ज्यादा नींद, बार-बार उल्टी और एक चोट से लगातार ब्‍लड बहने जैसे लक्षण दिखाई दें।</div><div><br></div><h2>हीमोफीलिया के प्रकार</h2><div>हीमोफीलिया ए</div><div>हीमोफीलिया बी</div><div>हीमोफीलिया सी</div><div><br></div><h2>लक्षण</h2><div>जोड़ों में सूजन और दर्दहोना</div><div>शरीर पर नीले-नीले निशान बनना</div><div>चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना</div><div>बिना वजह नाक से खून आना</div><div>छोटे घाव का भी देर से ठीक होना</div><div><br></div><h2>हीमोफीलिया के लिए टिप्‍स&nbsp;</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी बॉडी के वेट को बनाए रखने, मसल्स और हड्डियों की शक्ति में सुधार करने में सहायता कर सकती है। लेकिन आपको किसी भी ऐसी फिजिकल एक्टिविटी से बचना चाहिए, जोकि चोट या फिर ब्लीडिंग की वजह बन सकती है।</div><div><br></div><div>अपने दांतों और मसूड़ों की अच्छे से साफ-सफाई करें। वहीं डेंटिस्ट से सलाह ले सकते हैं कि मसूड़ों से ब्लड को बहने से कैसे रोका जाए।</div><div><br></div><div>ब्लड थिनिंग दवा जैसे कि हेपरिन और वार्फरिन से बचना चाहिए। इबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी ओवर-द-काउंटर दवाओं से बचना चाहिए।</div><div><br></div><div>वहीं ब्लड इंफेक्शन को रोकने के लिए रेगुलर टेस्ट करें और हेपेटाइटिस ए और बी इंजेक्शन से बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:53:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/even-minor-injury-can-be-fatal-learn-symptoms-of-this-bleeding-disorder</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नीम जूस के गंभीर Side Effects: फायदे की जगह Body को हो सकता है बड़ा नुकसान, हो जाएं अलर्ट!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/healthy-neem-juice-are-you-drinking-it-wrong]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब&nbsp; लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण लोग अपनी सेहत का ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखते हैं। सेहतमंद रहने के लिए लोग ज्यादातर महंगी डाइटिंग और फैंसी चीजों की तरफ जाते हैं। लेकिन हमारे आसपास मौजूद पेड़-पौधों, पत्तों और फूलों के औषधीय गुणों के बारे में जान लें और इन्हें डाइट में शामिल करें,तो आधी से ज्यादा बीमारियां से बचा जा सकता है। आयुर्वेद में नीम के पत्तों को किसी खजाना माना गया है। खून को साफ करने के लिए नीम के पत्ता सबसे अच्छा माना जाता है, वजन कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में नीम बेहद ही फायदेमंद होता है। कुछ लोग रोजाना नीम के पत्तों का जूस पीते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते हैं किन लोगों के लिए यह जूस फायदेमंद नहीं होता है। और अगर आप रोजाना इसके जूस पीने को अपनी सबसे हेल्दी आदत मान रही हैं, तो आप गलत है। नीम के पत्तों के जूस पीने के सही तरीके और मात्रा में पीना चाहिए। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>नीम के पत्तों का जूस पीने से पहले जान लें ये जरूरी बातें</b></div><div><br></div><div>हेल्थ के एक्सपर्ट बताते हैं कि नीम के पत्तों का कड़वा स्वाद हमारे शरीर में रूखापन लेकर आता है। यदि आप इसे बिना बैलेंस के रोजाना डाइट में शमिल करते हैं, तो ये शरीर के हर सेल में मौजूद नमी को बाहर खींच लेता है।</div><div><br></div><div>- नीम की तासीर की प्रकृति ठंडी और शुष्क होती है और ऐसे में इसे लंबे समय तक लेने से बॉडी में ड्राईनेस पैदा हो सकती है।</div><div><br></div><div>- अगर आप अत्यधिक कड़वी चीजों का सेवन करते हैं, तो ब्लड, मसल्स और फैट समेत शरीर के सात मुख्य टिश्यूज कमजोर होने लगते है। जिससे हेल्दी डाइट लेने के बाद भी आपको कमजोरी और थकान हो सकती है।</div><div><br></div><div>- लोग सोचते हैं कि नीम का जूस पीकर हमारी बॉडी डिटॉक्स होगी, लेकिन असल में हमारे टिश्यू मास कम होने लगता है।</div><div><br></div><div>- कड़वा रस अधिक शरीर में पहुंचता है, तो इसका असर वात रस पर पड़ता है, जिससे ऑयल कम होने लगता है और जोड़ों में अकड़न और दर्द हो सकती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- नीम का जूस पीने से स्किन अधिक ड्राई हो जाते हैं और समय से पहले एजिंग के साइन्स नजर आ सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>नीम का जूस पीने का सही तरीका</b></div><div><br></div><div>- जब आप नीम का जूस पिएं तो साथ में घी जरुर लें। ऐसा करने से आपकी सभी रुखे हर्ब्स के साथ करना चाहिए ताकि शरीर में ड्राईनेस ने आए।</div><div><br></div><div>- रोजाना नीम का जूस 15-30 मिली से ज्यादा न लें।</div><div><br></div><div>- एक्सपर्ट के सलाह लेकर ही नीम का जूस पिएं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:44:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/healthy-neem-juice-are-you-drinking-it-wrong</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Toilet में Mobile ले जाने की है आदत? आप एक खतरनाक बीमारी को दे रहे हैं न्योता, नई Research में बड़ा दावा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/habit-of-taking-mobile-phone-to-toilet-inviting-dangerous-disease-new-research-suggests]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>स्मार्टफोन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग खाते-पीते, उठते-बैठते और यहां तक कि टॉयलेट में भी फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। टॉयलेट पर बैठकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और खबरें पढ़ना भले ही एक आम आदत हो, लेकिन यह आदत सेहत के लिए ठीक नहीं है। शोधकर्ताओं के नए अध्ययन में सामने आया है कि टॉयलेट सीट पर बैठकर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में बवासीर होने का खतरा फोन न इस्तेमाल करने वालों की तुलना में 46% ज्यादा है।</div><div><br></div><div>हाल ही में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। बवासीर को मेडिकल भाषा में हेमोरॉयड्स कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गुदा और मलाशय की नसें सूज जाती हैं। जिससे जलन, दर्द और कई मामलों में रक्तस्त्राव भी हो सकता है। लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहना बवासीर के जोखिम कारकों में से एक है। क्योंकि इससे गुदा क्षेत्र की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस शोध में 125 वयस्कों को शामिल किया गया है। जोकि नियमित जांच के लिए कोलोनोस्कोपी करवाने आए थे।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/what-diplopia-condition-in-which-we-see-two-images-of-one-this-lifestyle-major-cause" target="_blank">Double Vision: क्या है 'Diplopia' बीमारी, जिसमें एक की दो तस्वीरें दिखती हैं? ये Life Style है बड़ी वजह</a></h3><div><br></div><h2>अनजाने में बिताते हैं ज्यादा समय</h2><div>शोधकर्ताओं के मुताबिक जब लोग टॉयलेट सीट पर बैठकर समाचार, सोशल मीडिया या वीडियो देखने लगते हैं। तो उनको समय का एहसास नहीं होता है। इस वजह से वह अंजाने में लंबे समय तक बैठे रहते हैं। ज्यादा देर तक बैठने से मलाशय और गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है। जिससे सूजन की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि इस अध्ययन में जोर लगाने और बवासीर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। जिससे यह संकेत मिलता है कि सिर्फ दबाव डालना ही नहीं बल्कि लंबे समय तक बैठे रहना भी बवासीर के खतरे को बढ़ाने का अहम कारण हो सकता है।</div><div><br></div><h2>ऐसे बरतें सावधानी</h2><div>विशेषज्ञों की मानें, तो टॉयलेट पर सिर्फ इतना ही समय बिताना चाहिए। जितना वास्तव में जरूरी हो। अगर मल त्याग में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि वजह शारीरिक या फिर आप फोन में व्यस्त हैं। हेल्थ एक्सपर्ट फाइबर युक्त डाइट लेने, नियमित व्यायाम करने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं। वहीं बाथरूम में स्मार्टफोन ले जाने की आदत को छोड़ना छोटा लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है।</div><div><br></div><div>भले ही स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन हर समय और हर जगह स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। टॉयलेट पर बैठकर फोन चलाने की आदत भले ही आपको मामूली लगती हो, लेकिन यह भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्या की वजह बन सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 12:28:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/habit-of-taking-mobile-phone-to-toilet-inviting-dangerous-disease-new-research-suggests</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Double Vision: क्या है 'Diplopia' बीमारी, जिसमें एक की दो तस्वीरें दिखती हैं? ये Life Style है बड़ी वजह]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/what-diplopia-condition-in-which-we-see-two-images-of-one-this-lifestyle-major-cause]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनियाभर में आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसका जोखिम देखा जा रहा है। स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक आंखें हमारे शरीर का सबसे अहम अंग हैं। यह काफी संवेदनशील भी होती हैं। इसलिए आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें एक्स्ट्रा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। लेकिन जिस तरह से हमारी डाइट और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले में काफी बढ़ गए हैं।</div><div><br></div><div>मोतियाबिंद-ग्लूकोमा आदि समस्या के बारे में अक्सर बात की जाती है। लेकिन क्या आप डबल विजन के बारे में जानते हैं। मेडिकल की भाषा में डबल विजन को डिप्लोपिया कहा जाता है। अगर आपको कोई एक चीज दो-दो दिखती हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि यह डबल विजन की समस्या हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/gond-katira-health-alert-who-should-not-consume-it" target="_blank">Summer Health: गोंद कतीरा बन सकता है 'जहर', इन 3 लोगों के लिए हैं गंभीर Side Effects</a></h3><div>&nbsp;</div><h2>डबल विजन के बारे में जानें</h2><div>इसका मतलब चीजों का दो-दो दिखना है। डबल विजन की समस्या होने पर एक चीज की दो तस्वीरें दिखती हैं।</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर दोहरी दृष्टि एक अस्थायी समस्या होती है। लेकिन यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इस समस्या की वजह से ड्राइव करने या फिर चलने-फिरने में दिक्कत होती है।</div><div><br></div><div>डॉक्टर की मानें, तो आंखों की मांसपेशियों की कमजोरी, स्ट्रोक, नसों में समस्या, थायरॉइड और ब्रेन ट्यूमर के कारण डबल विजन की समस्या हो सकती है। इसके कारणों को समझना और इलाज कराना जरूरी हो जाता है।</div><div><br></div><h2>डबल विजन की दिक्कतें</h2><div>डबल विजन का मतलब किसी वस्तु का दो दिखना होता है। वहीं डबल विजन के कारण आंखों में दर्द, सिरदर्द, शरीर का संतुलन बिगड़ने में परेशानी, चक्कर आ सकता है। डबल विजन वालों के लिए गाड़ी चलाने या पढ़ने आदि में परेशानी होती है।</div><div><br></div><div>मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 साल के बाद लोगों में डबल विजन होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शिकार लोगों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।</div><div><br></div><h2>डबल विजन की क्यों होती है समस्या</h2><div>कई समस्याओं की वजह से आपको डिप्लोपिया या फिर दोहरी दृष्टि की समस्या हो सकती है। कोई भी ऐसी चीज जो आपके दिमाग, आपकी आंखों या फिर उनको कंट्रोल करने वाली नसों और मांसपेशियों पर असर डालती हैं। इससे डिप्लोपिया की समस्या बढ़ जाती है।</div><div><br></div><div>निकट-दृष्टि दोष और दूर-दृष्टि दोष के शिकार लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।</div><div><br></div><div>ड्राई आई सिंड्रोम और मोतियाबिंद वालों में भी इसका खतरा रहता है।</div><div><br></div><div>जिन लोगों के सिर में चोट लगी है, उनमें भी डबल विजन की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>वहीं कुछ खास न्यूरोलॉजिटक या अन्य सेहत संबंधी समस्याओं जैसे स्ट्रोक, विटामिन बी1 की कमी, डायबिटीज, ब्रेन एन्यूरिज्म और थायरॉइड के मरीजों में खतरा अधिक होता है।</div><div><br></div><h2>क्या करें और कैसे बचें</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको डबल विजन है, तो इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपको यह समस्या किस कारण से है। कुछ लोगों को सिर्फ चश्मे या फिर कॉन्टैक्ट लेंस से लाभ मिल जाता है। लेकिन अगर आंखों की मांसपेशियां कमजरो होने के कारण ऐसा हो रहा है, जो फिर सर्जरी की जरूरत हो सकती है।</div><div><br></div><div>इस समस्या से बचने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन कुछ सावधानियों के साथ आप इन जोखिमों को कम कर सकती हैं। धूम्रपान न करें, इससे आंखों को ज्यादा नुकसान होता है। स्क्रीन टाइम कम करें और आंखों को चोट से बचाएं। साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 15:12:14 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer Health: गोंद कतीरा बन सकता है 'जहर', इन 3 लोगों के लिए हैं गंभीर Side Effects]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/gond-katira-health-alert-who-should-not-consume-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>धीरे-धीरे तापमान बढ़ रहा है। भीषण गर्मी और लू से बचने को लिए लोग आयुर्वेद या फिर दादी-नानी के नुस्खों को जरुर अपनाते हैं। इन्हीं में से एक है गोंद कतीरा, जो अपनी कूलिंग प्रॉपर्टीज के लिए जाना जाता है। कई लोग गर्मियों में गोंद कातीरा का सेवन करते हैं लेकिन यह सबके लिए फायदेमंद नहीं है। आइए आपको बताते हैं गोंद कतीरा किन लोगों के लिए नुकसानदायक होता है। आइए आपको गोंद कतीरा खाना सेहत पर भारी पड़ सकता है।</div><div><br></div><div><b>किन लोगों के लिए गोंद कतीरा नुकसानदायक है</b></div><div><br></div><div><b>पीरियड्स के दौरान&nbsp;</b></div><div><br></div><div>पीरियड्स के समय महिलाओं को गोंद कतीरा का सेवन करने से परहेज करना चाहिए, खासकर अगर उन्हें पहले से ही ज्यादा दर्द या ऐंठन की समस्या रहती हो। इसकी प्रकृति अत्यधिक ठंडी मानी जाती है, जो शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा कम कर सकती है। ऐसे में पेट दर्द, क्रैम्प्स या ब्लीडिंग से जुड़ी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>लो ब्लड प्रेशर की समस्या</b></div><div><br></div><div>जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर कम रहता है, उन्हें गोंद कतीरा का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए। इसकी ठंडी तासीर के कारण लो बीपी वालों को आलस, चक्कर या अधिक कमजोरी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>आईबीएस (IBS) और ब्लोटिंग&nbsp;</b></div><div><br></div><div>भले ही यह कब्ज से राहत देने में मदद करता है, लेकिन अगर आपको अक्सर पेट फूलने या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या रहती है, तो इसका सेवन आपके लिए दिक्कत बढ़ा सकता है। कुछ स्थितियों में यह पाचन बेहतर करने की बजाय पेट में गैस, भारीपन या असहजता पैदा कर सकता है।</div><div><br></div><div><b>क्या है गोंद कतीरा खाने का सही तरीका?</b></div><div><br></div><div>- गोंद कतीरा को कभी भी सूखा नहीं खाना चाहिए। इसे रात भर या कम से कम 7-8 घंटे पानी में भिगोकर रखें जब तक कि यह फूलकर क्रिस्टल जेली जैसा न हो जाए।</div><div><br></div><div>- जब आप इसका सेवन करें तो दिनभर खूब पानी पिए, क्योंकि यह फाइबर सोखता है। पानी कम पीने पर यह आंतों में फंसकर कब्ज पैदा कर सकता है।</div><div><br></div><div>- दिन में एक बार 1 से 2 चम्मच भीगा हुआ गोंद कतीरा काफी है।&nbsp;&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:31:39 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/gond-katira-health-alert-who-should-not-consume-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेट में गैस का 'गुब्बारा'? यह Magic Drink सिर्फ 2 मिनट में देगा Instant Relief]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/quick-gas-relief-with-a-2-minute-home-remedy-drink]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बिजी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार हम सभी पेट संबंधित परेशनियों से गुजरना पड़ता है। एसिडिटी, ब्लोटिंग, गैस इन सभी समस्याओं से हम सभी कभी न कभी जरुरत महसूस करते हैं। खाना खाने के बाद अचानक से पेट टाइट हो जाना, डकार न आना या असहज महसूस होना ये सभी डाइजेशन की गड़बड़ी का संकेत होता है। इन परेशनियों के चक्कर में कई लोग तो दवाओं का सेवन करने लग जाते हैं, हर बार दवा लेना भी ठीक नहीं होता है। अब आपकी किचन में ही इसका असान और असरदार इलाज छिपा हुआ है। इस लेख में हम आपको ऐसी देसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे है, जो गैस से तुरंत आराम देती है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>गैस दूर करने वाले ड्रिंक की सामग्री</b></div><div><br></div><div>- नींबू का रस- 1/2</div><div>- हींग- 1 चुटकी</div><div>- काली मिर्च- 1 चुटकी</div><div>- गुनगुना पानी- 1/2 कप</div><div><br></div><div><b>गैस के लिए मैजिक ड्रिंक कैसे बनाएं और पिएं?</b></div><div><br></div><div>- इसे बनाने के लिए सभी चीजों को अच्छी तरह से मिलाएं।</div><div><br></div><div>- धीरे-धीरे छोटे घूंट में पिएं।</div><div><br></div><div>- इसे खाने के बाद या जब भी गैस महसूस हो, तब इसका सेवन कर सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>ये ड्रिंक कैसे काम करती है?</b></div><div><br></div><div>- यह ड्रिंक फंसी हुई गैस को बाहर निकालती है।</div><div><br></div><div>- पेट की सूजन और भारीपन कम करती है।</div><div><br></div><div>- डाइजेशन को तुरंत एक्टिव करती है।</div><div><br></div><div><b>ड्रिंक में मौजूद चीजों के फायदे</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">- गुनगुने पानी के साथ नींबू का रस लेने से ब्लोटिंग की समस्या कम होती है। यह डाइजेस्टिव जूस को बढ़ाता, इसके साथ ही फैट के डाइजेशन को आसान बनाता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।</span></div><div><br></div><div>- गर्म पानी पीन से ब्लोटिंग के लिए आसान और नेचुरल उपाय है। यह डाइजेशन को बेहतर करता है। यह आंतों की मसल्स को रिलैक्स करता है और गुब्बारे की तरह फूली गैस को बाहर निकालता है।</div><div><br></div><div>- आयुर्वेद में हींग को गैस, अपच और ब्लोटिंग के लिए पारंपरिक उपाय है क्योंकि यह पेट में अग्नि को बढ़ाती है। यह एकदम कर्मिनेटिव की तरह काम करता है, डाइजेशन एंजाइम्स को एक्टिव करता है और पेट में फंसी गैस से राहत दिलाता है।</div><div><br></div><div>- काली मिर्च डाइजेशन को बेहतर बनाती है और ब्लोटिंग को कम करती है। इसमें मौजूद पिपेरिन डाइजेशन एंजाइम्स को बढ़ाता है, प्रोटीन को तोड़ता है और गैस कम करता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- इसके साथ ही यह हल्के मूत्रवर्धक की तरह काम करके शरीर में पानी की अतिरिक्त मात्रा को भी कम करता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आपको पेट में जलन हो सकती है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 14:48:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/quick-gas-relief-with-a-2-minute-home-remedy-drink</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Best Flour: Diabetes और Fatty Liver का रामबाण! Diet में शामिल करें कटहल-क्विनोआ के ये 2 Superfood आटे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/panacea-for-diabetes-and-fatty-liver-include-two-superfood-flours-jackfruit-and-quinoa-in-diet]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल में और खानपान में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हम जो भी खाते हैं या हमारी जैसी लाइफस्टाइल है, उसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट भी लोगों को अपनी दिनचर्या सही रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रिफाइंड आटा यानी मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन किया जाता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी और हृदय रोगों का खतरा भी तेजी से बढ़ता है।</div><div><br></div><div>क्योंकि शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार दुनियाभर में होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के प्रमुख कारण है। अगर हम अपनी डाइट में पौष्टिक और फाइबर वाली चीजों की मात्रा को बढ़ाते हैं, तो इससे न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि कई बीमारियों का भी खतरा कम हो सकता है। जब खानपान में सुधार की बात होती है, तो लोगों के मन में एक सवाल यह भी होता है कि सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/changing-lifestyle-poses-threat-increasing-risk-of-high-bp-and-heart-attack-in-children" target="_blank">Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेताया</a></h3><div><br></div><h2>सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा</h2><div>भारत में गेहूं का आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेहूं का आटा पाचन को बेहतर करने और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।</div><div><br></div><div>पारंपरिक गेहूं के आटे के अलावा आजकल हरे कटहल का आटा और क्विनोआ का आटा भी लोग इस्तेमाल में ला रहे हैं।</div><div><br></div><div>यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।</div><div><br></div><h2>क्विनोआ का आटा</h2><div>यह एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, यह कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसलिए इसको सुपरफूड माना जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>क्विनोआ में फाइबर, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, अमीनो एसिड, मैंगनीज, फॉस्फोरस, विटाबिन बी और फोलेट पाया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>इसमें मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करने और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>क्विनोआ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप बार-बार खाने से बच जाते हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए ये फायदे</h2><div>क्विनोआ के आटे में पोटेशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।</div><div><br></div><div>क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।</div><div><br></div><h2>हरे कटहल का आटा</h2><div>मधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है।</div><div><br></div><div>टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पेटेंटेड हरे कटहल के आटे पर नैदानिक परीक्षण में इसको मोटापे और फैटी लिवर को रोकने में कारगर बताया गया था।</div><div><br></div><h2>लिवर और शुगर के लिए फायदेमंद</h2><div>बता दें कि चूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि हरे कटहल के आटे का सिर्फ 3 महीने सेवन करने से वजन वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं यह लिवर में फैट जमने की समस्या को कम करने में प्रभावी है।</div><div><br></div><div>शोधकर्ताओं में से एक और हरे कटहल का आटा बनाने वाली कंपनी के मुताबिक गेहूं के आटे के साथ प्लेसबो समूह की तुलना में इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार पाया गया है। इससे लिपोजेनेसिस मार्करों और इंफ्लामेशन में भी काफी कमी आ सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 13:15:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/panacea-for-diabetes-and-fatty-liver-include-two-superfood-flours-jackfruit-and-quinoa-in-diet</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: मेनोपॉज में क्या खाएं? आसान डाइट टिप्स जो बदल दें आपकी हेल्थ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/diet-tips-for-menopause-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मेनोपॉज ऐसा समय होता है, जब महिला को कई तरह की समसयाओं का सामना करना पड़ता है। अचानक से वजन बढ़ना, पेट पर फैट जमा होना, बार-बार गर्मी लगना, मूड स्विंग्स और थकान का अहसास यह सब बेहद ही सामान्य है। अमूमन इस दौरान समझ में नहीं आता कि खुद को किस तरह फिट रखें। इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी डाइट व लाइफस्टाइल का ख्याल रखें।</div><div><br></div><div>चूंकि, इस फेज में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं, इसलिए स्मार्ट ईटिंग करना बेहद जरूरी होता है। अपनी डाइट में कुछ छोटे-छोटे बदलाव जैसे प्रोटीन इनटेक बढ़ाना, कैल्शियम का ध्यान रखना और प्रोसस्ड फूड को कम करने आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल जी सकती हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही डाइट टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें मेनोपॉज के दौरान फॉलो करने से आपको फायदा मिल सकता है-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/changing-lifestyle-poses-threat-increasing-risk-of-high-bp-and-heart-attack-in-children" target="_blank">Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेताया</a></h3><h2>प्रोटीन इनटेक पर दें ध्यान&nbsp;&nbsp;</h2><div>उम्र के इस पड़ाव पर मसल्स जल्दी कम होने लगता है, इसलिए शरीर में ढीलापन बढ़ने लगता है। साथ ही, शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है। ऐसे में मसल मास को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होता है कि आप अपने प्रोटीन इनटेक का खास ख्याल रखें। इसके लिए आप अपनी हर डाइट में दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, स्प्राउट्स व एग व्हाइट आदि को जरूर शामिल रखें।</div><div><br></div><h2>कैल्शियम का रखें ख्याल</h2><div>मेनोपॉज के दौरान हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए, कैल्शियम रिच फूड्स को डाइट में शामिल करना बेहद जरूरी होता है। कोशिश करे कि आप अपनी डाइट में दही, पनीर, तिल, हरी सब्जियां (पालक, मेथी) व रागी आदि को जरूर शामिल करें। इसके अलावा, अपनी हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए हर दिन 15-20 मिनट धूप भी जरूरी है।</div><div><br></div><h2>जरूर खाएं हेल्दी फैट्स</h2><div>अक्सर महिलाएं फैट का नाम सुनकर दूर भागती हैं। उन्हें लगता है कि फैट का मतलब है वजन बढ़ना, जबकि यह पूरी तरह से सच नहीं है। अगर हेल्दी फैट्स को डाइट में शामिल किया जाए तो इससे हार्मोन बैलेंस रहते हैं। इसलिए, अपनी डाइट में बादाम, अखरोट, अली के बीज व देसी घी आदि को जरूर शामिल करें।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/diet-tips-for-menopause-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेताया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/changing-lifestyle-poses-threat-increasing-risk-of-high-bp-and-heart-attack-in-children]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनियाभर में दिल की बीमारियां स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई है। बीते एक दशक का आंकड़ा उठाकर देखा जाए, तो न सिर्फ इन बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है, बल्कि कम उम्र वाले लोग भी तेजी से इसका शिकार होते जा रहे हैं। किशोरों और युवाओं में भी हार्ट अटैक और इससे होने वाली मौतों की खबरें लगातार सुनने को मिलती हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल यह भी रहता है कि क्या बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं। क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी हार्ट अटैक का जोखिम हो सकता है।</div><div><br></div><div>कुछ समय पहले तक हाई कोलेस्ट्रॉल, बढ़ती उम्र या लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों को हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता है। लेकिन अध्ययनों से यह पता चलता है कि खानपान, बदलती लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम उम्र में दिल को कमजोर बना रही हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या मासूम बच्चे इन बीमारियों से सुरक्षित हैं या फिर उनमें भी हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/9-types-of-period-pain-which-one-is-yours" target="_blank">Women's Health Alert: पीरियड का दर्द 1 नहीं 9 तरह का होता है, जानें आपका कौनसा है?</a></h3><div><br></div><h2>कम उम्र वालों में हार्ट अटैक</h2><div>हृदय रोग एक्सपर्ट की मानें, तो 20 साल से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। इसके लिए असंतुलित खानपान और गड़बड़ लाइफस्टाइल एक बड़ा कारण है।</div><div><br></div><div>ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट और चीनी से भरपूर डाइट धमनियों में फैट जमा करता है। जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और हार्ट अटैक हो सकता है।</div><div><br></div><div>वहीं व्यायाम न करना, ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहना, हाई बीपी, बढ़ता मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्थितियों ने हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>लंबे समय तक स्ट्रेस की वजह से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे हाई बीपी और हार्ट अटैक हो सकता है।</div><div><br></div><h2>10 साल से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक का जोखिम</h2><div>आमतौर पर 1 से 3 साल तक के बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। इस तरह के मामले काफी ज्यादा दुर्लभ माने जाते हैं। यह उम्र चलने-फिरने और दौड़ने वाला होता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की वजह से टॉडलर या प्री-स्कूलर बच्चों में हार्ट अटैक होना दुर्लभ है।</div><div><br></div><div>हालांकि कुछ बच्चों में हार्ट की खराबी, आनुवांशिक हार्ट और जन्मजात हृदय रोग से संबंधित समस्याओं या कावासाकी बीमारी जैसी दुर्लभ बीमारियों की वजह से दिल संबंधित रोगों और जटिलताओं का खतरा हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>ऐसे बच्चों में बहुत ज्यादा थकान, तेजी से सांस लेने, चिड़चिड़ापन और दिल की धड़कनों के अनियमित रहने का जोखिम हो सकता है। वहीं कुछ स्थितियों में गंभीर रूप लेने वाली हो सकती है।</div><div><br></div><h2>बच्चों में इस खतरे को ऐसे पहचानें</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक वयस्कों में हार्ट अटैक से उलट बच्चों को लाइफस्टाइल के कारण से हार्ट अटैक का जोखिम बहुत कम या न के बराबर होता है। जन्मजात दिल की बीमारी या फिर कावासाकी जैसे रोग ब्लड वेसल पर असर डाल सकती है। जिसकी वजह से दिल तक ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो जाता है। ऐसे में अगर आपके बच्चे में जन्मजात दिल की बीमारी है, तो कुछ लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।</div><div><br></div><div>बच्चों के चलने-दौड़ने, सीने में दर्द या मेहनत के दौरान दर्द होना चेतावनी हो सकता है।</div><div><br></div><div>बिना किसी वजह के बेहोशी और अचानक गिर जाना भी दिल की बीमारियों का संकेत है।</div><div><br></div><div>सांस लेने में तकलीफ होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।</div><div><br></div><div>दिल की धड़कन अनियमित या तेज रहना हार्ट की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>स्किन का रंग पीला या फिर नीला पड़ना भी दिल की सेहत के लिए ठीक नहीं होती है।</div><div><br></div><h2>बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा</h2><div>बच्चों में बढ़ती दिल की बीमारियों के लिए हाई बीपी को एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। एक वैश्विक विश्लेषण के मुताबिक पिछले दो दशकों में किशोरों और बच्चों में उच्च रक्तचार के मामले करीब दोगुने हो गए हैं।</div><div><br></div><div>साल 2000 में यह 3.2% से बढ़कर साल 2020 में 6% से ज्यादा हो गया है।</div><div><br></div><div>अगर समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो हाई बीपी की वजह से हृदय रोगों और हार्ट अटैक के साथ किडनी संबंधित बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़़ सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:41:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/changing-lifestyle-poses-threat-increasing-risk-of-high-bp-and-heart-attack-in-children</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Women's Health Alert: पीरियड का दर्द 1 नहीं 9 तरह का होता है, जानें आपका कौनसा है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/9-types-of-period-pain-which-one-is-yours]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>महिलाओं को हर महीना पीरियड्स आना एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है। इस दौरान हर महिला पीरियड के दर्द से गुजरती है। कुछ महिलाओं को इन दिनों काफी असहनीय दर्द होता है। वहीं, कुछ महिलाओं को हल्का दर्द महसूस होता है। अक्सर दर्द के कारण महिलाएं अपना रोजमर्रा काम करने में भी दिक्कत आती है। आमतौर पर पीरियड्स का दर्द कम करने के लिए कुछ महिलाएं पैन किलर दवाई लेती हैं, तो कुछ घरेलू नुस्खे या फिर हॉट पैचेज का सहारा लेती हैं। गौरतलब है कि कई महिलाएं नहीं जानती है कि पीरियड पेन एक नहीं बल्कि कई तरह का होता है। ज्यादातर लड़कियां नहीं जानती है कि पीरियड पेन के भी प्रकार होते है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि पीरियड्स में किस टाइप का दर्द होता है और इन 9 प्रकार के पीरियड पेन को आप कैसे पहचान सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>1 नहीं 9 तरह का होता है पीरियड पेन</b></div><div><br></div><div>- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि कई महिलाओं को हर महीने इन्हीं 9 प्रकार के पीरियड्स का पेन महसूस होते हैं। सबसे पहले पेन का प्रकार है पीरियड क्रैम्प्स यानी एकदम से तेज उठने और धीमा हो जाने वाला दर्द, ये लगभग हर महिला को होता है।</div><div><br></div><div>- इस दौरान कई महिलाओं को डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं और इस वजह से ब्लोटिंग और डाइजेस्टिव पेन होता है। ये दर्द कई महिलाओं को पूरे दिन बना रहता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- जिन महिलाओं को पीएमएस या पीरियड्स में ब्रेस्ट में भी दर्द होता है। इस समय पर होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण, ब्रेस्ट के टिश्यूज सेंसिटिव हो जाते हैं और ब्रेस्ट में दर्द महसूस होने लगता है।</div><div><br></div><div>- पीरियड्स के समय कई महिलाओं को सिर में तेज दर्द उठता है। ये दर्द कई बार माइग्रेन के दर्द से भी अधिक तेज होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- इस दौरान कई महिलाएं पैरों के दर्द से भी परेशान रहती है। अक्सर पीरियड की शुरुआत होने से पहले पैरों में तेज दर्द महसूस होने लगता है।</div><div><br></div><div>- इस दौरान कई बार ऐसा भी लगता है कि जैसे आपको पॉटी आएगी और इस वजह से पेट में मरोड़ महसूस हो सकती है।</div><div><br></div><div>- कुछ महिलाओं को ओव्युलेशन के समय भी हल्का दर्द महसूस होता है। ऐसे में यह जरुरी नहीं है कि हर लड़की को ये सभी प्रकार के दर्द महसूस हो। यह आपके शरीर की प्रकृति, लाफस्टाइल, हार्मोनल बैलेंस और खान-पान समेत कई चीजों से निर्भर करता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:57:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/9-types-of-period-pain-which-one-is-yours</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: सेंधा नमक का बढ़ता Trend बना थायराइड का कारण, जानें Doctors की क्या है राय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/increasing-trend-of-rock-salt-causing-thyroid-problems-find-out-what-doctors-think]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>नमक हम सभी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय रसोई में नमक के बिना खाने की कल्पना करना बहुत मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लोग सेंधा नमक को ज्यादा नेचुरल और मिनरल्स से भरपूर मानकर अपने डाइट में शामिल कर रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक सेंधा नमक और आयोडाइज्ड नमक के बीच सबसे बड़ा अंतर 'आयोडीन' का है।</div><div><br></div><div>आयोडाइज्ड नमक हमारी बॉडी में थायराइड ग्लैंड को सही तरीके से काम करने में सहायता करता है। बॉडी में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। जिस कारण मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। जिस कारण वजन बढ़ना, कब्ज, बालों का झड़ना और ज्यादा ठंड लगने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। सेंधा नमक के बढ़ते क्रेज की वजह से हाल ही के दिनों में 'हाइपोथायरायडिज्म' के मामलों में तेजी देखी गई है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/major-claim-in-homeopathy-vs-allopathy-debate-which-medical-system-best" target="_blank">Homeopathic Vs Allopathic: Homeopathy vs Allopathy की बहस में बड़ा दावा, बच्चों के लिए कौन सी Medical पद्धति बेस्ट? पढ़ें रिपोर्ट</a></h3><h2>आयोडीन की भूमिका</h2><div>हमारे शरीर की कोशिकाओं के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने के लिए आयोडीन बहुत जरूर है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर डाइट में आयोडीन युक्त नमक की कमी होती है, तो थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाएगी। जिस कारण शरीर के सभी सेल्स का फंक्शन धीमा पड़ जाता है। इस वजह से लोग सुस्ती और थकान महसूस करने लगते हैं।</div><div><br></div><h2>मिनरल्स की वास्तविकता</h2><div>लोगों को लगता है कि सेंधा नमक मिनरल्स का खजाना होता है। लेकिन जितना मिनरल्स आपको सेंधा नमक से मिलता है, उतना आप आसानी से सामान्य बैलेंड डाइट, सीड्स और नट्स से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही सेंधा नमक से मिनरल्स पाने के चक्कर में आप इसका ज्यादा सेवन करते हैं, तो हाई बीपी का जोखिम बढ़ सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>बढ़ते जोखिम</h2><div>जैसे-जैसे रिफाइंड नमक छोड़सकर लोग पूरी तरह से सेंधा नमक पर निर्भर हो रहे हैं। वैसे-वैसे हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में बढ़त देखी जा रही है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन को अपनी डाइट में पूरी तरह बाहर नहीं करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>क्या करना चाहिए</h2><div>बता दें कि दोनों नमकों के अपने फायदे हैं। लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक सेंधा नमक का सेवन कभी-कभी और सीमित मात्रा में करना चाहिए। लेकिन रोजाना के लिए आयोडीन युक्त नमक को प्राथमिकता दें। अगर आपको भी थायराइड की समस्या है, तो नमक के खुराक में बदलाव करने से एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 12:37:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/increasing-trend-of-rock-salt-causing-thyroid-problems-find-out-what-doctors-think</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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