<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
  <channel>
    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Stress और डिप्रेशन की होगी छुट्टी? Mental Health के लिए Super Supplement है Creatine, जानें पूरी सच्चाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/will-stress-and-depression-be-cured-creatine-super-supplement-for-mental-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्रिएटिन की सहायता से हमारे शरीर को फौरन एनर्जी मिलती है। इसलिए खेल या फिर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग अलग से क्रिएटिन सप्लीमेंट का सेवन करते हैं। यह फिजिक हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ के लिए भी लाभकारी माना जाता है। जो भी लोग फिटनेस की फील्ड में एक्टिव हैं, वह क्रिएटिन को मसल बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके सेवन से थकान कम होती है, शरीर को एनर्जी मिलती है और स्ट्रेस घटता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मेंटल हेल्‍थ के ल‍िए क्र‍िएट‍िन के क्या फायदे होते हैं।</div><div><br></div><h2>क्या है क्रिएटिन</h2><div>बता दें कि क्रिएटिन एक तरह का यौगिक कंपाउंड होता है। जो शरीर में अमीनो एसिड की मदद से बनता है। यह नेचुरल रूप से किडनी, लिवर और पैंक्र‍ियाज में बनता है। कुछ खाद्य पदार्थों में भी क्रिएिन पाया जाता है। क्रिएटिन की सहायता से मसल रिकवरी होती है। इससे मसल लॉस को कम करने और स्टैमिना को बढ़ाने में मदद मिलती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/buttermilk-a-remedy-for-serious-summer-stomach-ailments" target="_blank">Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहत</a></h3><div><br></div><h2>क्रिएटिन के मेंटल हेल्थ के लिए फायदे</h2><div>इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर थकान और स्ट्रेस को कम करने के लिए करता है।</div><div><br></div><div>यह ब्रेन फंक्शन और याददाश्त को भी सपोर्ट करने में सहायता करता है।</div><div><br></div><div>क्रिएटिन की मदद से एकाग्रता और फोकस बढ़ाने में सहायता मिलती है।</div><div><br></div><div>यह डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने के साथ मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।</div><div><br></div><h2>क्र‍िएट‍िन की कमी</h2><div>मांस-मछली को क्रिएटिन का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसलिए शाकाहारी लोगों में इसकी कमी हो सकती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि हर शाकाहारी व्यक्ति में क्रिएटिन की कमी हो। बीमार और बुजुर्ग लोगों में भी इसकी कमी हो सकती है।</div><div><br></div><h2>जानें ज्‍यादा क्र‍िएट‍िन लेने के नुकसान</h2><div>डिहाइड्रेशन की समस्या होना</div><div>मतली या फिर पेट दर्द की समस्या</div><div>पेट में गैस होना</div><div>पेट फूलना</div><div><br></div><div>वहीं अगर किसी व्यक्ति को किडनी की बीमारी है, तो आपको बिना डॉक्टर की सलाह के क्रिएटिन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाओं और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी बिना डॉक्टर की सलाह या जांच के बगैर इसका सेवन नहीं करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 11:31:39 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/will-stress-and-depression-be-cured-creatine-super-supplement-for-mental-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/24/mental-health_large_1131_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Women Health Tips: पीरियड्स में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बढ़ सकती है Bloating की दिक्कत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-eat-these-things-during-periods-it-increase-problem-of-bloating]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पीरियड्स के समय महिलाओं के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसका सीधा असर महिलाओं की एनर्जी, मूड और पाचन तंत्र पर प़ड़ता है। कई महिलाओं को इस दौरान ऐंठन, पेट दर्द, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। अक्सर महिलाओं को यह समझ नहीं आता है कि इन दिनों में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए। क्योंकि गलत खानपान न सिर्फ दर्द और असहजता बल्कि शरीर में सूजन और कमजोरी भी पैदा कर सकता है।</div><div><br></div><div>एक्सपर्ट के मुताबिक इस दौरान हल्का, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना सबसे सही होता है। वहीं पीरियड्स के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों को सीमित या पूरी तरह से टालना सही रहता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पीरियड्स के दौरान किन चीजों से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/buttermilk-a-remedy-for-serious-summer-stomach-ailments" target="_blank">Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहत</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><h2>अधिक नमक का सेवन</h2><div>पीरियड्स में ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में पानी जमा होने लगता है।</div><div><br></div><div>जिसकी वजह से शरीर में भारीपन, पेट फूलना या सूजन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।</div><div><br></div><div>नमकीन, चिप्स, पैकेज्ड फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स में नमक की ज्यादा मात्रा पाई जाती है। इसलिए सीमित मात्रा में इनता सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><div>पीरियड्स के दौरान हल्का और आरामदायक महसूस करने के लिए कम नमक वाला संतुलित खाना बेहतर ऑप्शन हो सकता है।</div><div><br></div><h2>कैफीन युक्त पेय पदार्थ</h2><div>पीरियड्स के दौरान कॉफी, चाय, कोल्ड कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कैफीन ज्यादा होता है। इसलिए यह पीरियड्स के समय असहजता बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><div>ज्यादा कैफीन का सेवन करने से शरीर में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><div>वहीं कुछ महिलाओं को इस दौरान पेट की ऐंठन और सिरदर्द बढ़ सकता है।</div><div><br></div><div>पीरियड्स में कैफीन का सेवन कम करने और इसकी जगह नारियल पानी, पानी या फिर हर्बल ड्रिंक लेना चाहिए।</div><div><br></div><h2>तला-भुना और जंक फूड</h2><div>फास्ट फूड, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, बर्गर और अन्य तली-भुनी चीजों में अनहेल्दी फैट ज्यादा मात्रा में होती है।</div><div><br></div><div>यह आपके पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव डाल सकते हैं और इससे अपच, पेट में भारीपन और गैस आदि की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>पीरियड्स में पहले ही शरीर कई हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है। ऐसे में जंक फूड का ज्यादा सेवन असहजता और पेट दर्द को बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><h2>शुगर क्रेविंग</h2><div>पीरियड्स में मीठा खाने की इच्छा अधिक होना सामान्य बात है। लेकिन ज्यादा चीनी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।</div><div><br></div><div>ज्यादा मीठा खाने से बीपी लेवल तेजी से बढ़ता और घटता है। जिस कारण थकान, मूड स्विंग्स और कमजोरी महसूस हो सकती है।</div><div><br></div><div>ज्यादा चीनी शरीर में सूजन बढ़ा सकती है।</div><div><br></div><div>इस दौरान अगर आपकी मीठा खाने का मन हो तो आप खजूर, फल या सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट आदि खा सकती हैं।</div><div><br></div><h2>कार्बोनेटेड ड्रिंक्स</h2><div>सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में एक्स्ट्रा चीनी और गैस की मात्रा ज्यादा होती है।</div><div><br></div><div>पीरियड्स के दौरान इसके सेवन से गैस बनना, पेट फूलना और असहजता बढ़ती है।</div><div><br></div><div>कई बार यह ड्रिंक्स शरीर को पर्याप्त हाइड्रेटेड नहीं कर पाते हैं।</div><div><br></div><div>पीरियड्स में कोल्ड ड्रिंक्स की जह नींबू पानी, सादा पानी, ताजे फलों का जूस या नारियल पानी आदि पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 11:14:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-eat-these-things-during-periods-it-increase-problem-of-bloating</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/24/period-pain-relief_large_1114_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/buttermilk-a-remedy-for-serious-summer-stomach-ailments]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>समर सीजन में कुछ हल्का खाने का और ठंडी-ठंडी कोल्ड ड्रिंक मिल जाए, तो मजा आ जाता है। असल में छाछ सिर्फ एक ट्रेडिशनल ड्रिंक नहीं बल्कि एक सुपरड्रिंक है, जो गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा सेवन की जाती है और यह शरीर को स्वस्थ रखती है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">इस समय लोग छाछ को पीना पसंद करते हैं, जो गर्मियों में एक बेहतरीन नेचुरल ड्रिंक मानी जाती है। छाछ को रोजाना ड्रिंक करने से आपके पेट से लेकर लिवर तक सपोर्ट प्रदान होता है। आइए आपको छाछ पीने के फायदे के बारे में बताते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>छाछ के फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब गर्मियों में तापमान बढ़ता है और हीटस्ट्रोक के कारण डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं काफी देखने को मिलती है। इस दौरान ब्लोटिंग, एसिडिटी, पाचन गड़बड़ होना और थकान जैसी तकलीफें लेकर भी लोग अस्पताल तक पहुंच जाते हैं। आइए आपको छाछ पीने के फायदे बताते हैं-</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;गट हेल्थ के लिए फायदेमंद</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस मौसम में गल्ट संबंधित कई परेशानियां झेलनी पड़ती है। रिसर्च के अनुसार, गर्मी के कारण आपकी आंतों में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है और लैक्टोबैसिस जैसे अच्छे बैक्टीरिया कम हो सकते हैं। माना जाता है कि छाछ पीना आपके गट के लिए काफी बेहतर होता है और यह एक स्टेबलाइजर की तरह काम करता है। दरअसल, छाछ में मौजूद जीवित लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया भरपूर होता है। यह सक्रिय रुप से हानिकारक स्ट्रेस से लड़ते हैं और आपके पेट को अधिक प्रोटेक्टिव म्यूकस बनाने का संकेत देते हैं। इसलिए गर्मियों में अपनी गट को नेचुरल शील्ड प्रदान करने के लिए छाछ सेवन जरुर करें।</span></div><div><br></div><div><b>एसिड रिफ्लक्स को नियंत्रित करती है छाछ</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">छाछ का सेवन केवल पाचन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट में बनने वाले अतिरिक्त अम्ल को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। इसके अलावा, छाछ पाचन प्रक्रिया को सक्रिय बनाकर पेट से भोजन को समय पर आगे बढ़ाने में मदद करती है। जब भोजन लंबे समय तक पेट में नहीं ठहरता और आसानी से आंतों तक पहुंच जाता है, तो अम्ल के वापस भोजन नली की ओर आने की आशंका काफी कम हो जाती है।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>शरीर हाइड्रेट रहता है</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">समर सीजन में हाइड्रेटेड रहना काफी जरुरी होता है। हालांकि, सिर्फ बार-बार पानी पीना शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेट नहीं कर सकता है। ऐसे में आप छाछ पी सकते हैं, जो सादे पानी से बेहतर हाइड्रेशन देती है। क्योंकि इसमें व्हे प्रोटीन के साथ-साथ सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम का सही मिश्रण होता है। जो कि शरीर को कोशिकाओं तक पानी पहुंचाने में मदद करता है।</span></div><div><br></div><div><b>लिवर के लिए फायदेमंद</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इतना ही नहीं, छाछ लिवर के हेल्थ को भी सपोर्ट करती है। छाछ MFGM (मिल्क फैट ग्लोब्यूल मेम्ब्रेन)नामक तत्व पाया जाता है। यह हेल्दी फैट्स का पावरहाउस होता है। एक अध्ययन में पता चला है कि विशेष फैट्स 'फैटी लिवर' के मार्कर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। गर्मियों में नियमित छाछ को पीना लिवर को सुरक्षा देने वाला प्रभाव प्रदान कर सकता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>आतंरिक सूजन कम होती है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अक्सर गर्मी में आंतों की परत कमजोर हो जाती है, जिससे छोटे बैक्टीरियल टॉक्सिन्स आपके ब्लडस्ट्रीम में लीक हो सकते हैं और सीधे लिवर तक पहुंच सकते हैं, जिससे लो-ग्रेड इफ्लेमेशन की शिकायत हो सकती है। यही कारण है कि हमे अक्सर गर्मी में सुस्ती और भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में छाछ पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स और हेल्दी एसिड आंतों की कोशिकाओं के लिए फ्यूल का काम करते हैं और गट लाइनिंग में बने गैप्स को सील करने और शरीर में सूजन पैदा करने वाले कारकों को कम करने में मदद करते हैं।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:27:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/buttermilk-a-remedy-for-serious-summer-stomach-ailments</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/23/buttermilk_large_1527_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Blood Sugar रहेगा कंट्रोल! Diabetes के मरीज Diet में शामिल करें ये 5 'देसी Superfoods']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/5-indian-superfoods-a-diet-formula-for-diabetes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधित बीमारी है। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण डायिबटीज की बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रीडायबिटीज और डायबिटीज में खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है। गौरतलब है कि ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का असर हमारे पूरे शरीर पर होता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपको लंबे समय से शुगर बढ़ा हुआ है, तो इसकी वजह से किडनी, हार्ट और ब्रेन सहित शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में डायबिटीज रोगियों के लिए हेल्दी डाइट बहुत जरुरी है। यदि आप एक डायबिटीज पेशेंट हैं, तो डॉक्टर द्वारा बताई हुई दवाइयों को सही तरह और सही समय से लेने के साथ ही डाइट में हेल्दी चीजों को जरुर शामिल करें।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">वैसे डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए हमारी किचन में ऐसी कई चीजें हैं, जिनका सेवन करने से आपको काफी आराम मिलेगा। गौरतलब है कि इन देसी चीजों में मौजूद गुणों की वजह से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं किन चीजों का सेवन करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>मेथी दाना</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">डायबिटीज मरीजों के लिए मेथी दाना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें घुलनशील फाइबर होते हैं, जो कि डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं और भोजन से शुगर का अब्जॉर्बशन कम करता है। इसके सेवन के बाद ब्लड शुगर स्पाइक नहीं होता है। वहीं, प्री-डायबिटीज वाले लोग यदि नियमित तौर पर मेथी का सेवन करें, तो इससे प्री-डायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरा कम हो जाएगा। वैसे यह इंसुलिन के काम करने की क्षमता को सुधारता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोलेस्ट्रोल को कम करता है। रोजाना आप 1 चम्मच मेथी दाना को रात भर पानी में भिगोएं और इसे खाली पेट लें।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>आंवला</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आंवला एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे पैनक्रियाज भी बेहतर काम करता है और इंसुलिन का सीक्रेशन बेहतर होता है।&nbsp; आंवला में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की पर्याप्त मात्रा होती है। इसको आप रोजाना 1 आंवला खा सकती हैं।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>दालचीनी</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">शुगर में दालचीनी का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में काफी सुधार होता है, जिससे ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। दालचीनी के सेवन से ब्लड शुगर लेवल स्पाइक नहीं होता है। यह डायबिटीज से होने वाले इंफ्लेमेशन को भी शांत करती है। इसके लिए आप एक छोटा टुकड़ा दालचीनी को गुनगुने पानी में खाने के बाद लें सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>करी पत्ता&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">डायबिटीज में करी पत्ता का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। इसमें ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है। यह डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है। करी पत्ता के सेवन से क्रेविंग्स को कम करता है और शुगर स्पाइक नहीं होता। इसको आप रोजाना खाली पेट 8-10 करी पत्ते चबा सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>जामुन की गुठली पाउडर</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">डायबिटीज के लिए जामुन की गुठली का पाउडर रामबाण आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। इसमें जंबोलिन और जंबोसिन होते हैं, जो शरीर में स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकते हैं। इससे हमारी सेल्स ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर तरीके से कर सकती हैं। आप जामुन की गुठली के आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ जरुर लें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:28:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/5-indian-superfoods-a-diet-formula-for-diabetes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/23/5-indian-superfoods_large_1428_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[WFH Side Effect: गोद में Laptop रखकर काम करना खतरनाक, Experts ने बताए गंभीर Side Effects]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/working-with-a-laptop-on-lap-dangerous-experts-explain-serious-side-effects]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में वर्क फ्रॉम होम या घंटों स्क्रीन पर काम करने के दौरान गोद में घंटों तक लैपटॉप को रखकर काम करने की आदत बन गई है। हालांकि भले ही यह तरीका आरामदायक लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह होता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह तरीका सीधे तौर पर आपके लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं काम करने का यह तरीका सेहत संबंधी कई समस्याओं का बुलावा है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि गोद में लैपटॉप रखकर काम करना क्या-क्या निगेटिव असर डाल सकता है।</div><div><br></div><h2>टोस्टेड स्किन सिंड्रोम</h2><div>बता दें कि लैपटॉप से निकलने वाली तेज गर्मी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। जब आप लैपटॉप को घंटों तक अपने पैरों या गोद में रखते हैं, तो यह आपकी स्किन पर बुरा असर डाल सकता है। जिसकी वजह से स्किन पर लालपन या जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं कुछ मामलों में 'टोस्टेड स्किन सिंड्रोम' भी देखा जाता है। इसमें लगातार गर्मी की वजह से स्किन पर जालीनुमा दाग पड़ जाते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/is-weight-loss-challenge-with-pcos-make-4-changes-to-diet-and-lifestyle-for-immediate-results" target="_blank">PCOS Weight Loss: PCOS में Weight Loss बना चैलेंज? Diet और Lifestyle में करें ये 4 बदलाव, तुरंत दिखेगा असर</a></h3><div><br></div><h2>मांसपेशियों में दर्द होना</h2><div>गोद में लैपटॉप रखकर काम करने से बैठने का तरीका बिगड़ जाता है। स्क्रीन को देखने के लिए लोगों को अपनी गर्दन अक्सर नीचे की ओर झुकानी पड़ती है। लंबे समय तक इस पोजिशन में रहने से कंधों, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। वहीं मांसपेशियों में भी तनाव पैदा होता है और आगे चलकर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर</h2><div>लैपटॉप की गर्मी की वजह से कई बार पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ शोध इशारा करते हैं कि लंबे समय तक तेज गर्मी के संपर्क में रहने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि इस मामले में सावधानी बरतना ही बेहतर होता है।</div><div><br></div><h2>हाथ और कलाई में खिंचाव होना</h2><div>जब आप गोद में लैपटॉप को रखकर काम करते हैं, तो हाथों और कलाई की पोजिशन असहज होती है। इस गलत एंगल में लगातार काम करने की वजह से कलाई में तेज दर्द या तनाव की समस्या हो सकती है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>जानिए बचाव के आसान तरीके</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको लंबे समय तक काम करना है। तो मेज और कुर्सी का इस्तेमाल करना सबसे आरामदायक और सेफ ऑप्शन है। इसके अलावा आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।</div><div><br></div><div>सीधे लैपटॉप को अपनी गोद में रखने की बजाय डेस्क, लैपटॉप स्टैंड या कुशन ट्रे का इस्तेमाल करें। इससे आपकी शरीर तक सीधे गर्मी नहीं पहुंचेगी और आपका पोश्चर भी सही रहेगा।</div><div><br></div><div>लगातार स्क्रीन के सामने न बैठे रहें। बल्कि हर 30-40 मिनट में एक छोटा सा ब्रेक लें।</div><div><br></div><div>काम के दौरान बीच-बीच में अपने बैठने की पोजिशन को चेंज करते रहें। इससे शरीर और मांसपेशियों को आराम मिलेगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:47:27 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/working-with-a-laptop-on-lap-dangerous-experts-explain-serious-side-effects</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/23/wfh-side-effect_large_1347_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PCOS Weight Loss: PCOS में Weight Loss बना चैलेंज? Diet और Lifestyle में करें ये 4 बदलाव, तुरंत दिखेगा असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/is-weight-loss-challenge-with-pcos-make-4-changes-to-diet-and-lifestyle-for-immediate-results]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पीसीओएस महिलाओं में होने वाली सबसे कॉमन समस्या है। यह एक हार्मोनल विकार है, जिसमें महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन यानी की एंड्रोजन का लेवल ज्यादा बढ़ने लगता है और प्रोजेस्ट्रॉन की कमी होने लगती है। इसके अलावा इस स्थिति में ओवरीज में सिस्ट भी बनने लगते हैं। वहीं इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है। इन बदलावों की वजह से महिलाओं को कई गंभीर समस्याओं का सामना एक साथ करना पड़ता है। जिसमें वेट बढ़ना सबसे आम है।</div><div><br></div><div>पीसीओएस होने पर अचानक से महिलाओं का वेट बढ़ने लगता है। वहीं इस स्थिति में वजन घटाना मुश्किल लगता है। अगर आप भी इस स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप आराम से वेट लॉस कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/this-superfood-control-pcos-women-include-5-things-in-their-diet-from-today" target="_blank">PCOS Diet Plan: PCOS को कंट्रोल करेगा ये Superfood, महिलाएं अपनी Diet में आज से ही शामिल करें ये 5 चीजें</a></h3><div><br></div><h2>डाइट</h2><div>वेट लॉस के लिए डाइट पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। पीसीओएस होने पर इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिस कारण बीपी कंट्रोल करना मुश्किल होता है। वहीं हाई बीपी वेट लॉस की मुख्य वजह हो सकता है। इसलिए इसको कंट्रोल करने के लिए उच्च फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।</div><div><br></div><div>फाइबर न सिर्फ ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, बल्कि इसके सेवन से आपको लंबे समय तक भूख भी नहीं लगती है। जिससे आप ओवरईटिंग नहीं करते हैं। वहीं इससे आपका वेट भी संतुलित बना रहता है।</div><div><br></div><div>वहीं फाइबर से अलग प्रोटीन से भरपूर चीजों को भी अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। प्रोटीन लेने से तृप्ति की भावना बढ़ती है और फूड क्रेविंग कम होती है। इससे भी आपका वेट नहीं बढ़ता है।</div><div><br></div><h2>एक्सरसाइज</h2><div>पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट कर ज्यादा कैलोरी बर्न करने में सहायता करता है। इससे भी वेट लॉस में भी सहायता मिलती है। इससे खासकर कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट हार्मोनल इंबैलेंस करने में मदद मिलती है। ऐसे में पीसीओएस वाली महिलाओं को नियमित एक्सरसाइज को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>नींद</h2><div>वेट लॉस के लिए रोजाना कम से कम 8-9 घंटे की नींद लेना जरूरी है। जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो भूख का संकेत देने वाला घ्रेलिन हार्मोन अपना कंट्रोल खो देता है। जब नींद पूरी नहीं होती है तो यह हार्मोन बढ़ जाता है। जिससे आपको बार-बार भूख का एहसास होने लगता है। ऐसे में आप ओवरईटिंग करते हैं और आपको वजन बढ़ने लगता है।</div><div><br></div><div>नींद पूरी न लेने से इंसुलिन भी बाधित हो सकता है। जिससे PCOS की स्थिति गंभीर होने लगती है। इसलिए पीसीओएस में वेट कंट्रोल करने के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है।</div><div><br></div><h2>स्ट्रेस</h2><div>वहीं वजन कम करने के लिए तनाव पर काबू पाना भी जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक तनाव, स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के स्त्राव को ट्रिगर करता है। वहीं बढ़े हुए कोर्टिसोल के लेवल से भूख बढ़ सकती है। वहीं आपकी मीठा खाने की लालसा भी ज्यादा हो सकती है। जिससे आप ओवरईटिंग करते हैं और आपको वेट बढ़ने लगता है। इसलिए इस स्थिति में वजन घटाने के लिए ज्यादा तनाव लेने से बचें।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:35:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/is-weight-loss-challenge-with-pcos-make-4-changes-to-diet-and-lifestyle-for-immediate-results</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/pcos-weight-loss_large_1635_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PCOS Diet Plan: PCOS को कंट्रोल करेगा ये Superfood, महिलाएं अपनी Diet में आज से ही शामिल करें ये 5 चीजें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/this-superfood-control-pcos-women-include-5-things-in-their-diet-from-today]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पीसीओएस यानी कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम एक कॉमन लाइफस्टाइल कंडीशन है। जिससे लाखों महिलाएं हर रोज निपटती हैं। पीसीओएस के लक्षणों में पीरियड्स क्रैंप्स, अनियमित पीरियड्स, वेट बढ़ना, फेस पर बालों का बढ़ना और मिजाज में बदलाव आदि शामिल है। लेकिन PCOS को सही डाइट से मैनेज किया जा सकता है। इसके बढ़ते लक्षणों को रोकने के लिए अपनी डाइट में कुछ बदलाव करना जरूरी है।&nbsp;</div><div><br></div><div>बता दें कि पीसीओएस सबसे आम एंडोक्रिनोपैथी है। जोकि 15% से 18% महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। लेकिन डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इस बीमारी को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे क्विक और आसान डाइट टिप्स को फॉलो करके आप पीसीओएस को कंट्रोल कर सकती हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-pcos-and-stress-5-superfoods-balance-hormones-learn-benefits" target="_blank">Hormone Balancing Foods: PCOS और Stress से हैं परेशान? ये 5 Superfoods करेंगे Hormone Balance, जानें इनके फायदे</a></h3><div><br></div><h2>डाइट टिप्स</h2><div><br></div><h2>फल और सब्जियां</h2><div>वेट लॉस और PCOS को मैनेज करने के लिए फल और सब्जियों का सेवन जरूरी है। हर दिन कम से कम पांच हिस्से सब्जियां या फल खाना जरूरी है। यह आपके शरीर को जरूरी फाइबर देता है। वहीं कम से कम 35-40 ग्राम हाई फाइबर डाइट जरूर लें।</div><div><br></div><h2>प्रोटीन</h2><div>पीसीओएस डाइट के लिए प्रोटीन भी एक बेहतरीन ऑप्शन है। आपकी डाइट में प्रोटीन जितना ज्यादा होगा, आपकी इंसुलिन सेंसिटिविटी और तृप्ति उतनी ज्यादा बेहतर होगी।</div><div><br></div><h2>हेल्दी फैट</h2><div>अपनी डाइट में वसा की मात्रा को सीमित करने की कोशिश करें। हेल्दी फैट के रूप में दैनिक कैलोरी का 30% से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। सेचुरेटेड फैट को और &lt;10 प्रतिशत कुल कैलोरी तक सीमित करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>ओमेगा-3 फैटी एसिड</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक PCOS रोगियों के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड सुपरफूड है। यह प्रजनन क्षमता में सुधार करते हैं, हार्मोन को कंट्रोल करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार करता है। साथ ही यह फेस के बालों के विकास को कम करने में सहायता करता है।</div><div><br></div><div>पीसीओएस से जूझ रहे लोगों को चीनी से परहेज करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी सूजन की वजह बनती है और शरीर में इंसुलिन लेवल को भी बढ़ा देती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:24:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/this-superfood-control-pcos-women-include-5-things-in-their-diet-from-today</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/pcos-diet-plan_large_1624_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hormone Balancing Foods: PCOS और Stress से हैं परेशान? ये 5 Superfoods करेंगे Hormone Balance, जानें इनके फायदे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-pcos-and-stress-5-superfoods-balance-hormones-learn-benefits]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>महिलाओं के शरीर में अधिकतर बदलाव हार्मोनल चेंजेस की वजह से होते हैं। फिर चाहे वह मोटापा हो, फेस पर निकलने वाले दाने हों या अचानक से वेट कम होना हो। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं अपनी सेहत का सही से ध्यान नहीं रखती हैं। घर और जिम्मेदारियों में उलझी महिलाएं न तो पूरी तरह से पोषण वाला खाना खाती हैं और न ही पर्याप्त नींद लेती हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनी डाइट में शामिल करने से आपके हार्मोन बैलेंस रहेंगे।&nbsp;</div><div><br></div><h2>फायदेमंद है ये जड़ी बूटी</h2><div>शतावरी एस्ट्रोजन को बैलेंस रखता है। पीरियड्स और फर्टिलिटी के साथ-साथ PCOS को भी यह सपोर्ट करता है। इसके अलावा शतावरी के सेवन से विटेलिटी और ल्यूब्रिकेशन को इंप्रूव करने में मदद मिलती है। रोजाना रात को आधा चम्मच शतावरी को एक गिलास दूध में मिलाकर पीना चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-ignore-a-minor-sunburn-it-can-increase-risk-of-skin-cancer" target="_blank">Health Tips: मामूली Sunburn को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Skin Cancer का जानलेवा खतरा</a></h3><div><br></div><h2>तिल के बीज</h2><div>तिल के बीज का सेवन करने से ओवेल्यूशन को इंप्रूव करने, प्रोजेस्टेरोन को सपोर्ट करने और यूट्रेस को स्ट्रेंथ देने का काम करता है। रोजाना 1 चम्मच तिल को रोस्ट करके खाएं, इससे आपको फायदा मिलेगा। रोजाना इसके सेवन से फर्टिलिटी मजबूत होती है।</div><div><br></div><h2>अश्वगंधा पाउडर</h2><div>तनाव कम करने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पीना चाहिए। यह कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को कम करने, थायराइड और PCOS को ठीक करने और स्लीप क्वालिटी सही करने में मदद करता है। जब आपका तनाव कम होगा तो आप मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।</div><div><br></div><h2>खजूर</h2><div>अगर आपको समय पर पीरियड्स नहीं आते हैं और आपको हमेशा थकान महसूस होती रहती है। तो आपको खजूर का सेवन करना चाहिए। रोजाना 2 से 3 भीगे हुए खजूर खाती हैं, तो यह आपके मेंसुरल साइकिल को इंप्रूव करने में सहायता करता है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है और फर्टिलिटी को सपोर्ट मिलता है।</div><div><br></div><h2>मोरिंगा पाउडर</h2><div>सेहत के लिए मोरिंगा फायदेमंद माना जाता है। यह इंसुलिन को बैलेंस रखता है और PCOS को भी ठीक रखने में मदद करता है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को इंप्रूव करता है। इसको रोजाना एक समय पर आधा चम्मच खाएं। आपके यह कुछ हेल्दी आदतें हार्मोन को हेल्दी बनाने में मदद करेंगी।</div><div><br></div><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><div>महिलाओं द्वारा की जाने वाली गलतियां ही हार्मोन इंबैलेंस की वजह बनती हैं।</div><div><br></div><div>हार्मोन को हेल्दी बनाने के लिए महिलाएं आयुर्वेद का सहारा ले सकती हैं।</div><div><br></div><div>इसके लिए आप खजूर, अश्वगंधा, मेथी के बीज और शतावरी जैसी पौष्टिक जड़ी-बूटियों का सेवन कर सकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-pcos-and-stress-5-superfoods-balance-hormones-learn-benefits</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/women-health_large_1407_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: मामूली Sunburn को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Skin Cancer का जानलेवा खतरा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-ignore-a-minor-sunburn-it-can-increase-risk-of-skin-cancer]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मी का मौसम आते ही लोग तेज धूप और पसीने से परेशान हो जाते हैं। गर्मियों में तेज धूप होने की वजह से जलन, रेडनेस और सनबर्न होना काफी आम समस्या है। जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सनबर्न की समस्या को मामूली समझना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि सनबर्न की समस्या भी स्किन कैंसर का रूप ले सकती है। इसलिए इससे सावधान रहने के साथ-साथ बचाव करना भी जरूरी है।</div><div><br></div><h2>स्किन कैंसर खतरा</h2><div>सूरज की किरणें जीवन के लिए ऊर्जा और विटामिन डी का स्त्रोत है। लेकिन कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकती हैं। सूर्य की पराबैंगनी किरणें स्किन की कोशिकाओं को कमजोर करके कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म दे सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/pcod-weight-loss-try-this-homemade-health-powder" target="_blank">PCOD में Hormonal Fat से हैं परेशान? फैंसी Diet नहीं, ये देसी चूर्ण है रामबाण इलाज</a></h3><div><br></div><div>विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में मेलेनोमा की वजह से करीब 60,000 लोगों की मौत हुई। इस बीमारी से पुरुषों के प्रभावित होने की संभावना महिलाओं की तुलना में ज्यादा पाई गई है।</div><div><br></div><h2>बचाव के उपाय</h2><div><br></div><h2>छाया में रहें</h2><div>दिन में 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक धूप सबसे ज्यादा तेज होती है। इसलिए इस दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।</div><div><br></div><h2>खुद को कपड़ों से ढकें</h2><div>जब भी आप धूप में निकल रहे हों, तो इस दौरान खास ध्यान रखें कि हल्के और पूरी स्किन को कवर करने वाले कपड़े पहनें। वहीं सिर को धूप से बचाने के लिए टोपी और धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।</div><div><br></div><h2>सनस्क्रीन लगाएं</h2><div>धूप में निकलने पर कम से कम एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन लगाएं।</div><div><br></div><h2>सनबर्न से बचाव</h2><div>गोरी रंग की स्किन पर सनबर्न लालिमा या गुलाबी रंग में दिखाई देता है।</div><div><br></div><div>गहरे रंग की स्किन पर जलन और खुजली के रूप में लक्षण उभर सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:26:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-ignore-a-minor-sunburn-it-can-increase-risk-of-skin-cancer</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/skin-cancer_large_1326_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PCOD में Hormonal Fat से हैं परेशान? फैंसी Diet नहीं, ये देसी चूर्ण है रामबाण इलाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/pcod-weight-loss-try-this-homemade-health-powder]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण हार्मोनल संबंधित बीमारियां परेशान करती है। PCOD लाइफस्टाइल संबंधित बीमारी है। अक्सर लड़कियां PCOD के दौरान मान लेती है, उनका वजन अधिक रहेगा या फिर PCOD में शरीर की चर्बी को कम करना पॉसिबल नहीं है, हालांकि ऐसा नहीं है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि PCOD में वजन करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन यह मान लेना कि PCOD में वजन नहीं कर पाएंगी तो इस वजह से वजन बढ़ा ही रहता है, ये पूरी तरह से गलत है। दरअसल, PCOD में होने वाले हार्मोन्स इंबैलेंस के चलते शरीर की जिद्दी चर्बी को कम करना मुश्किल होता है।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस हेल्थ कंडीशन में कई बार हार्मोन्स ऊपर-नीचे हो रहते हैं, जिनका असर हमारी स्किन, बालों, वजन, फर्टिलिटी और मूड सहित कई चीजों पर होता है। जिस वजह से लड़कियों का वजन बढ़ने लगता है।&nbsp; यदि आप PCOD में वजन कम करना चाहती है, तो एक बार घर पर इस देसी चूर्ण को जरुर बनाएं। आइए आपको बताते हैं कैसे इस देसी चूर्ण को बनाएं।</span></div><div><br></div><div><b>PCOD में वजन कम करने के लिए देसी चूर्ण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि देसी चूर्ण हार्मोन्स को बैलेंस करता है। वहीं, यह क्रेविंग्स को भी कंट्रोल करता है, स्किन और हेयर हेल्थ को भी बेहतर करता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इस चूर्ण में हेल्दी फैट्स और मिनरल्स होते हैं, जो पीसीओडी में हार्मोनल इंबैलेंस, क्रेविंग्स और मेटाबॉलिज्म के सुस्त होने की वजह से वजन बढ़ने लगता है। इसलिए रोजाना इस चूर्ण को लेने से वजन कम किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इससे डाइजेशन में सुधार होता है और ब्लोटिंग भी कम होती है। वैसे यह कोई जादुई दवा नहीं है, हां लेकिन यह वजन को मैनेज करती है।</div><div><br></div><div>&nbsp; - वैसे इसमेम फाइबर और प्रोटीन का मात्रा अधिक पाई जाती है, इसलिए यह भूख को भीं कंट्रोल करती है और बार-बार&nbsp; स्नौंकिंग करने की आदत भी कम हो जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp; - पीसीओडी में ब्लड शुगर स्पाइक काफी आम हो जाती है। इस चूर्ण को लेने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल हो जाती है और कब्ज की समस्या भी ज्यादा परेशान नहीं करती। यह मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है और कुल कैलोरी को इनटेक करता है।</div><div><br></div><div><b>घर पर कैसे तैयार करें यह देसी चूर्ण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- सबसे पहले आप फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और तरबूज के बीज लें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- फिर इनको अलग-अलग ड्राई रोस्ट कर लें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब इसे ठंडा होने दें और इसके बाद इसको अच्छे पीसकर पाउडर बना लें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसका 1 टीस्पून एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आपको कुछ हफ्तों में फर्क काफी नजर आएगा।</div><div><br></div><div>&nbsp;- वैसे यह सही डाइट और लाइफस्टाइल के लिए काफी जरुरी है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:48:15 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/pcod-weight-loss-try-this-homemade-health-powder</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/homemade-health-powder_large_1248_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[International Yoga Day: 40 में चाहिए 30 वाली Fitness? एक्सपर्ट से जानें ये Anti-aging secret]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/international-yoga-day-2026-yoga-health-feel-30-at-40-with-these-expert-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियां काफी बढ़ रही है। पहले के समय में बढ़ती उम्र में अक्सर एनर्जी, ताकत और फ्लेक्सिबिलटी की कमी से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज कई महिलाएं 40 की उम्र में थकी हुई रहती हैं और न ही फिट नजर आती है। इस उम्र में खुद को रोकने की कोशिश नहीं करें, बल्कि शरीर और मन को बेहतर तरीके से सपोर्ट करने का है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">“40 की उम्र अब नई शुरुआत का प्रतीक बनती जा रही है” यह केवल एक लोकप्रिय वाक्य नहीं, बल्कि आज की बदलती लाइफस्टाइल और सोच को दर्शाता है। आधुनिक शोध और योग विज्ञान दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि दैनिक दिनचर्या का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, पर्याप्त आराम और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाकर व्यक्ति बढ़ती उम्र के प्रभावों को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ एवं ऊर्जावान बना रह सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>बढ़ती उम्र में योग क्यों है खास?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">आज दुनियाभर में इंटरनेशनल योगा डे मनाया जा रहा है। इसलिए योग सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि शरीर, सांसों और मन के बीच संतुलन बनाने वाला प्रोसेस है। नियमित तौर पर योग करने से शरीर फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है मसल्‍स मजबूत होती है, पोश्चर सही होता है और ब्‍लड सर्कुलेशन को सपोर्ट मिलता है। योग एक्सपर्ट के अनुसार, योग का प्रभाव सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 40 की उम्र में 30 उम्र जैसी फिटनेस कैसे पाएं।</span></div><div><br></div><div><b>सिद्ध वॉक</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">खासतौर पर सिद्ध वॉक करने से फिगर-8 या इनफिनिटी शेप में धीरे-धीरे चलते हुए सांस और एकाग्रता पर ध्यान दिया जाता है। इस समय शरीर को रिलैक्स रखते हुए संतुलित गाति प्राप्त होती है।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- यह शरीर को बैलेंस और कोऑर्डिनेशन बेहतर करता है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- बॉडी की गतिशीलता बनाए रखता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- डाइजेशन और ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मन को शांत और केंद्रित रखता है।</div><div><br></div><div><b>त्रिकोणासन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">पैरों के बीच दूरी बनाकर खड़े होकर एक पैर को बाहर की ओर रखें और दोनों ही हाथों को फैलाएं। धीरे-धीरे शरीर को एक तरफ झुकाएं। सांस को सामान्य रखें।</span></div><div><br></div><div><b>फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">-पैरों को मजबूत करता है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- हिप्स और रीढ़ के फ्लेक्सिबिटी को बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- शरीर के पोश्चर और बैलेंस को बेहतर बनाता है।</div><div><br></div><div><b>भ्रामरी प्राणायाम</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस आसान को करने के लिए रीढ़ को सीधा करके बैठ जाएं। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी हल्की आवाज निकालें।</span></div><div><br></div><div><b>फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- यह मन को शांत रखता है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- तनाव कम करता है और एकाग्रता बनाए रखता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मानसिक संतुलन बनाए रखता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 10:52:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/international-yoga-day-2026-yoga-health-feel-30-at-40-with-these-expert-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/21/international-yoga-day-2026_large_1052_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer Body Cooling: Jeera या Saunf? जानें गर्मी को मात देने का रामबाण घरेलू नुस्खा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/cumin-or-fennel-learn-the-home-remedy-to-beat-the-heat]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों में लोग शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए कई उपायों को अपनाते हैं। खासतौर पर रसोई में मौजूद जीरा और सौंफ का सेवन गर्मी में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। सौंफ और जीरा दोनों ही आपके शरीर को अलग-अलग तरीके से लाभ पहुंचाती हैं। वहीं यह पाचन से लेकर शरीर की गर्मी तक को कम करने में मदद करती है। वहीं अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि गर्मी में जीरा और सौंफ में से क्या फायदेमंद है।</div><div><br></div><div>बता दें कि सौंफ और जीरा दोनों की तासीर और गुण अलग-अलग होते हैं। जीरा पाचन मजबूत करता है और सौंफ शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि गर्मियों में किसका सेवन कब और कैसे करना चाहिए। जिससे कि आपका शरीर स्वस्थ रहे और गर्मी से आपको राहत मिल सके।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/sabja-summer-superfood-panacea-for-acidity-and-body-heat-learn-about-its-health-benefits" target="_blank">Summer Health Tips: Summer Superfood है सब्जा, Acidity और Body Heat का रामबाण इलाज, जानें Health Benefits</a></h3><div><br></div><h2>जानिए गर्मी में जीरा खाने के फायदे</h2><div><br></div><h2>पाचन होगा बेहतर</h2><div>जीरा पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे अपच, गैस और ब्लोटिंग को कम करने में सहायता करता है। गर्मी के मौसम में पाचन हल्का बनाए रखने में जीरा फायदेमंद होता है।</div><div><br></div><h2>बॉडी डिटॉक्स</h2><div>जीरे का पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।</div><div><br></div><h2>वेट कंट्रोल</h2><div>सुबह खाली पेट जारी पानी पीना चाहिए। इसके सेवन से फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो सकता है। जिससे वेट कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।</div><div><br></div><h2>जानिए गर्मी में सौंफ खाने के फायदे</h2><div><br></div><h2>शरीर को मिलती है ठंडक</h2><div>सौंफ की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए गर्मियों के मौसम में इसके सेवन से शरीर को ठंडा रखने में सहायता मिलती है।</div><div><br></div><h2>एसिडिटी से राहत</h2><div>वहीं खाना खाने के बाद अगर आप सौंफ चबाते हैं, तो इससे मुंह फ्रेश रहता है और एसिडिटी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</div><div><br></div><h2>शरीर रहेगा हाइड्रेट</h2><div>वहीं सौंफ का पानी पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और इसके सेवन से डिहाइड्रेशन का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।</div><div><br></div><h2>गर्मी में क्या ज्यादा बेहतर</h2><div>अगर आपको पाचन से जुड़ी ज्यादा समस्याएं रहती हैं। जो आपके लिए जीरा अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अगर शरीर में अधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन या जलन महसूस होती है, तो सौंफ का सेवन अधिक फायदेमंद माना जाता है। वहीं कई लोग गर्मियों में सौंफ और जीरा दोनों का पानी बनाकर पीते हैं। जिससे आपके शरीर को डबल फायदा मिलता है।</div><div><br></div><h2>सेवन का तरीका</h2><div>सुबह के समय खाली पेट जीरा पानी पी सकते हैं।</div><div><br></div><div>रातभर भिगोई हुई सौंफ का पानी गर्मियों में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।</div><div><br></div><div>अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। वहीं किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:33:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/cumin-or-fennel-learn-the-home-remedy-to-beat-the-heat</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/20/health-tips_large_1033_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Thyroid में Sweet Cravings से हैं परेशान? यह Healthy Snack देगा तुरंत राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/thyroid-diet-snack-to-curb-sugar-cravings]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आप भी लंबे समय से हाइपोथायरॉइडिज्‍म की समस्या परेशान हैं। अक्सर थाइरॉइड की बीमारी में दिनभर की थकान, एनर्जी की कमी या बार-बार कुछ मीठा खाने की इच्छा जरुर होती है। अधिकांश लोग मीठे की क्रेविंग को शांत करने के लिए कई हेल्दी ऑप्शन की तलाश में रहते हैं। इस लेख में हम आपको हेल्दी स्नैक बताने जा रहे है, जिसे आप शाम की भूख के दौरान जरुर खाएं। इसको आप अपनी डाइट मे भी शामिल कर सकते हैं।</div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि केला और दालचीनी का यह कॉम्बिनेशन काफी टेस्टी होता है और इसके साथ ही यह काफी पौष्टिक स्नैक ऑप्शन है। केला नेचुरल एनर्जी देने में मदद करता है, जबकि दालचीनी इसका स्वाद बढ़ाता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>केला क्यों फायदेमंद है?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">केला में प्राकृतिक रुप से कार्बोहाइ़ड्रेट और पोटैशियम से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। वैसे यह पेट के लिए काफी लाइट माना जाता है। यह आसानी से पच भी जाता है। जब आपको अचानक से भूख लगे तो कुछ मीठा खाने का मन करे, तब केला एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>दालचीनी है फायदेमंद</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">असल में दालचीनी का कार्य केवल स्वाद बढ़ाने का नहीं, बल्कि इसकी हल्की गर्म तासीर इस स्नैक को और भी हेल्दी बना देती है। इसको बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जाता है और यह मीठी खाने की इच्छा को भी कम कर देता है।</span></div><div><br></div><div><b>कब खाएं इस हेल्दी स्नैक?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस स्नैक को आप दोपहर या फिर शाम की हल्की भूख के समय खा सकती हैं, खासकर जब कुछ मीठा खाने का मन हो।</span></div><div><br></div><div><b>इस हेल्दी स्नैक को कैसे खाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसके लिए एक केला लें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसे छोटे टुकड़ों में काट लें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके ऊपर एक चुटकी दालचीनी छिड़क दें।&nbsp;</div><div><br></div><div>इस स्वादिष्ट और क्विक स्नैक को आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। आपको बता दें कि, यह डिश थायराइड का इलाज नहीं है, बल्कि बैलेंस डाइट का एक जरुरी हिस्सा है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:15:49 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/thyroid-diet-snack-to-curb-sugar-cravings</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/19/sweet-cravings_large_1515_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer Health Tips: Summer Superfood है सब्जा, Acidity और Body Heat का रामबाण इलाज, जानें Health Benefits]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/sabja-summer-superfood-panacea-for-acidity-and-body-heat-learn-about-its-health-benefits]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मी के मौसम में शरीर में जलन, डिहाइड्रेशन, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं आम होती हैं। ऐसे में अगर आप इन समस्याओं से बचने के लिए कोई नेचुरल और सस्ता उपाय ढूंढ रही हैं, तो सब्जा सीड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। भले ही यह बीज देखने में साधारण से लगें, लेकिन इनके फायदे काफी असरदार होते हैं। इसलिए इनको 'समर सुपरफूड' भी कहा जाता है। क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर को अंदर से ठंडक मिलती है। वहीं यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सब्जा सीड्स शरीर की गर्मी और एसिडिटी को कैसे कम करते हैं और इनका सेवन कैसे करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>सब्जा सीड्स</h2><div>अगर आपको अंदर से बहुत ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है या फिर बार-बार एसिडिटी की समस्या हो रही है। तो सब्जा सीड्स इस समस्या को बैलेंस करने में मदद करता है। जब इन सीड्स को पानी में भिगोया जाता है, तो यह जेल जैसा रूप ले लेते हैं। जोकि शरीर में पानी को लंबे समय तक बनाए रखता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/avoid-these-mistakes-while-massaging-baby-know-which-oil-perfect-for-season" target="_blank">Baby Care Tips: बच्चे की मालिश में न करें ये गलती, जानें मौसम के हिसाब से कौनसा तेल है Perfect</a></h3><div><br></div><h2>सब्जा सीड्स के फायदे</h2><div>सब्जा सीड्स शरीर के तापमान को कम करने में सहायता करता है।</div><div><br></div><div>यह जेल बनाकर पानी होल्ड करता है, जिससे हाइड्रेशन बना रहता है।</div><div><br></div><div>इसके सेवन से एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या कम होती है।</div><div><br></div><div>यह पाचन के लिए हल्का और आसान होता है।</div><div><br></div><h2>कैसे लें सब्जा सीड्स</h2><div>सबसे पहले एक चम्मच सब्जा सीड्स लें।</div><div>फिर एक गिलास पानी में डालकर इनको 10 मिनट के लिए भिगो दें।</div><div>जब यह सीड्स फूलकर जेल जैसे हो जाएं, तो इनका सेवन करें।</div><div>वहीं स्वाद के लिए आप इसमें नींबू या फिर पुदीना मिला सकती हैं।</div><div><br></div><h2>ये लोग रखें सावधानी</h2><div>लो ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान रहने वाले लोगों को सब्जा सीड्स का सेवन कम करना चाहिए।</div><div><br></div><div>जिन लोगों को निगलने में दिक्कत होती है, उनको सब्जा सीड्स अच्छे से भिगोकर लेना चाहिए।</div><div><br></div><div>प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।</div><div><br></div><div>वहीं छोटे बच्चों को कम मात्रा में देना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:29:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/sabja-summer-superfood-panacea-for-acidity-and-body-heat-learn-about-its-health-benefits</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/19/summer-health-tips_large_1229_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Baby Care Tips: बच्चे की मालिश में न करें ये गलती, जानें मौसम के हिसाब से कौनसा तेल है Perfect]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/avoid-these-mistakes-while-massaging-baby-know-which-oil-perfect-for-season]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बच्चों के शरीर की मालिश उनके सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में बच्चे के शरीर की मालिश से त्वचा को फायदा मिलता है। भारत में मालिश एक पुरानी परंपरा है, जोकि बच्चे के शरीर के विकास और पोषण को बेहतर बनाती है। लेकिन बच्चे की मालिश के लिए सही तेल चुनना भी उतना ही जरूरी होता है। क्योंकि यह बच्चे के विकास के साथ-साथ मांसपेशियों, हड्डियों और पूरे स्वास्थ्य विकास में सहायता करता है।</div><div><br></div><div>आमतौर पर बच्चे के शरीर के मालिश के लिए घी या नारियल तेल का इस्तेमाल करना फायदेमंद माना जाता है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन दोनों में से क्या ज्यादा बेहतर होता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/ayurveda-diet-10-harmful-food-combinations" target="_blank">Ayurveda Tips: खराब Digestion से हैं परेशान, तो इन 10 गलत Food Combination से आज ही करें तौबा</a></h3><div><br></div><h2>घी से मालिश के फायदे</h2><div>बता दें कि आयुर्वेद में घी का इस्तेमाल स्किन के लिए खासकर फायदेमंद माना जाता है।</div><div><br></div><div>घी में विटामिन ए, डी, ई और के और नेचुरल फैट पाया जाता है। जोकि त्वचा को अंदर से पोषण देता है। बच्चे की ड्राई स्किन के लिए घी काफी फायदेमंद माना जाता है।</div><div><br></div><div>सर्दियों के मौसम में बच्चे के शरीर की घी से मालिश करने से गर्माहट मिलती है।</div><div><br></div><div>आयुर्वेद के मुताबिक बच्चे के शरीर की घी से मालिश करने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।</div><div><br></div><div>बच्चों के शरीर की घी से मालिश करने से त्वचा की नेचुरली चमक बढ़ती है और स्किन की ड्राईनेस कम होती है।</div><div><br></div><h2>घी से मालिश के नुकसान</h2><div>घी से बच्चे के शरीर की मालिश करने के लिए घी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है, लेकिन इसके कुछ अपने नुकसान भी हैं।</div><div><br></div><div>गर्मियों में बच्चों के शरीर की मालिश के लिए घी का इस्तेमाल हैवी होता है।</div><div><br></div><div>गर्मी में घी से बच्चे के शरीर की मालिश करने से त्वचा में चिपचिपाहट या दाने निकलने की समस्या भी हो सकती है।</div><div><br></div><div>अगर घी शुद्ध नहीं होता है, तो इससे मालिश करने पर इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।</div><div><br></div><h2>नारियल तेल से मालिश के फायदे</h2><div>बच्चे के शरीर की मालिश के लिए नारियल का तेल फायदेमंद और सुरक्षित माना जाता है।</div><div><br></div><div>नारियल तेल हल्का होता है और यह स्किन में आसानी से समा जाता है। इससे बच्चे को कोई असुविधा भी नहीं होती है।</div><div><br></div><div>नारियल तेल की तासीर ठंडी होता है। जोकि गर्म मौसम में यह तेल बच्चे की स्किन के लिए ज्यादा सही माना जाता है।</div><div><br></div><div>इस तेल में नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं। जोकि त्वचा को इंफेक्शन से बचाते हैं।</div><div><br></div><div>अगर नवजात की स्किन सेंसिटिव है या उसको एलर्जी की समस्या है, तो नारियल तेल बच्चे के लिए सेफ ऑप्शन हो सकता है।</div><div><br></div><h2>नारियल तेल से होने वाले नुकसान</h2><div>बच्चों की स्किन के लिए नारियल तेल फायदेमंद होने के अलावा कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।</div><div><br></div><div>सर्दियों के मौसम में नारियल तेल बच्चे के शरीर को सही तरीके से गर्माहट नहीं दे पाता है।</div><div><br></div><div>अधिक ठंडक में नारियल तेल से मालिश करने से बच्चे की त्वचा को सही तरह से नमी नहीं मिल पाती है।</div><div><br></div><h2>कौन सा तेल बेहतर</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चे के शरीर की मालिश के लिए नारियल तेल और घी दोनों की सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं। लेकिन सर्दियों में बच्चे की मालिश के लिए घी अच्छा ऑप्शन है। क्योंकि यह त्वचा को गहराई से पोषण और गर्माहट देता है। तो वहीं गर्मियों में नारियल तेल से बच्चे की मालिश करना स्किन के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि यह हल्का होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक देने का काम करता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:29:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/avoid-these-mistakes-while-massaging-baby-know-which-oil-perfect-for-season</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/18/baby-care-tips_large_1329_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ayurveda Tips: खराब Digestion से हैं परेशान, तो इन 10 गलत Food Combination से आज ही करें तौबा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/ayurveda-diet-10-harmful-food-combinations]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हममें से ज्यादातर लोग हेल्दी खाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार दो अच्छी चीजों का कॉम्बिनेशन भी शरीर के लिए सही नहीं होता। इसका सबसे कॉमन उदाहरण है बनाना शेक। ज्यादातर लोग इसे हेल्दी और न्यूट्रिशियस ड्रिंक मानकर पीते हैं, लेकिन आयुर्वेद में दूध और केले को एक साथ खाने की सलाह नहीं दी जाती।</div><div><br></div><div>आयुर्वेद मानता है कि सिर्फ यह जरूरी नहीं है कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी मायने रखता है कि किन चीजों को साथ खा रहे हैं। कुछ फूड कॉम्बिनेशन ऐसे होते हैं जिन्हें 'विरुद्ध आहार' कहा जाता है। माना जाता है कि ये पाचन पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।</div><div><br></div><h2><b>क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</b></h2><div>आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया के मुताबिक, कुछ खाद्य पदार्थों का गलत कॉम्बिनेशन पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है। इससे शरीर में अधपचा भोजन जमा होने लगता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहा जाता है।</div><div><br></div><div>समय के साथ यह गैस, पेट फूलना, भारीपन, आलस और दूसरी डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ये चीजें खराब हैं। दिक्कत तब होती है जब इन्हें गलत तरीके से या गलत चीजों के साथ खाया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/does-stomach-heat-cause-pimples-on-face-learn-full-truth-behind-this-claim" target="_blank">Summer Health: क्या पेट की गर्मी से चेहरे पर होते हैं Pimples? जानें इस दावे का पूरा सच</a></h3><div><br></div><h2><b>आयुर्वेद के अनुसार इन 10 फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए</b></h2><div><b>1. पालक और पनीर, क्यों नहीं?</b></div><div>पनीर में मौजूद कैल्शियम, पालक से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। साथ ही आयुर्वेद दो भारी चीजों को एक साथ खाने को पाचन के लिए मुश्किल मानता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प:</b> पालक को दाल के साथ खाएं और पनीर को किसी दूसरे मील में शामिल करें।</div><div><br></div><div><b>2. शहद और गर्म पानी, क्यों नहीं?</b></div><div>आयुर्वेद में शहद को गर्म करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि गर्म शहद शरीर में आसानी से नहीं पचता।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>शहद को सामान्य तापमान या हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर लें।</div><div><br></div><div><b>3. रात में दही खाना, क्यों नहीं?</b></div><div>दही को भारी माना जाता है और यह कफ बढ़ा सकता है। रात में डाइजेशन धीमा होने के कारण इससे पेट फूलना, बलगम और सुस्ती जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>दही दिन में खाएं या छाछ का सेवन करें।</div><div><br></div><div><b>4. दूध और नमक, क्यों नहीं?</b></div><div>आयुर्वेद के अनुसार दूध और नमकीन चीजों के गुण एक-दूसरे से अलग होते हैं। इन्हें साथ लेने से पाचन प्रभावित हो सकता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>दूध को अकेले पिएं। चाहें तो इसमें खजूर, केसर, इलायची या हल्दी मिला सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>5. खाना खाने के तुरंत बाद चाय, क्यों नहीं?</b></div><div>चाय में मौजूद टैनिन, खाने से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। इससे डाइजेशन भी प्रभावित हो सकता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>खाने के कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे बाद चाय पिएं।</div><div><br></div><div><b>6. खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत ठंडा पानी, क्यों नहीं?</b></div><div>बहुत ठंडे पेय पदार्थ पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं, जिससे गैस और भारीपन महसूस हो सकता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>खाने के साथ सामान्य तापमान का या हल्का गुनगुना पानी पिएं।</div><div><br></div><div><b>7. बराबर मात्रा में घी और शहद, क्यों नहीं?</b></div><div>आयुर्वेद में घी और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर खाना उचित नहीं माना गया है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>दोनों का अलग-अलग सेवन करें या बराबर मात्रा में लेने से बचें।</div><div><br></div><div><b>8. अंडे और चाय, क्यों नहीं?</b></div><div>प्रोटीन से भरपूर भोजन के तुरंत बाद चाय पीने से पोषक तत्वों के अवशोषण पर असर पड़ सकता है और पेट भारी लग सकता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>अंडा खाने के 30 से 60 मिनट बाद चाय पिएं।</div><div><br></div><div><b>9. दूध और केला, क्यों नहीं?</b></div><div>आयुर्वेद में दूध और केले को विरुद्ध आहार माना गया है। दोनों ही भारी खाद्य पदार्थ हैं और इन्हें पचाने का तरीका अलग माना जाता है। साथ खाने पर डाइजेशन धीमा हो सकता है।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>केले को स्नैक की तरह अलग खाएं। दूध पीना हो तो 1-2 घंटे का गैप रखें।</div><div><br></div><div><b>10. मछली और दूध, क्यों नहीं?</b></div><div>आयुर्वेद में मछली और दूध का मेल सबसे चर्चित विरुद्ध आहार में गिना जाता है। माना जाता है कि दोनों की तासीर अलग होती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><b>बेहतर विकल्प: </b>मछली और दूध का सेवन अलग-अलग समय पर करें और इनके बीच कम से कम 3-4 घंटे का अंतर रखें।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes" target="_blank">Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोर</a></h3><div><br></div><h2><b>आखिर में एक जरूरी बात</b></h2><div>आयुर्वेद के ये सुझाव पारंपरिक मान्यताओं और पाचन से जुड़े सिद्धांतों पर आधारित हैं। हर व्यक्ति का शरीर और डाइजेशन अलग होता है। इसलिए किसी फूड कॉम्बिनेशन से अगर आपको कोई परेशानी नहीं होती, तो जरूरी नहीं कि वही असर हर किसी पर हो।&nbsp;&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सबसे जरूरी है कि आप अपने शरीर के संकेतों को समझें, संतुलित आहार लें और ऐसी डाइट अपनाएं जो आपके शरीर को सूट करे।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:21:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/ayurveda-diet-10-harmful-food-combinations</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/17/wrong-food-combination_large_1521_80.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer Health: क्या पेट की गर्मी से चेहरे पर होते हैं Pimples? जानें इस दावे का पूरा सच]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/does-stomach-heat-cause-pimples-on-face-learn-full-truth-behind-this-claim]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों के मौसम में फेस पर पिंपल्स और एक्ने की समस्या होना आम होता है। लोग इसको पेट की गर्मी से जोड़कर देखते हैं और लोगों का मानना होता है कि शरीर में बढ़ी हुई गर्मी सीधे फेस पर दाने और एक्ने की वजह बनती है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या सच में पेट की गर्मी और एक्ने का कोई कनेक्शन होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या गर्मी के मौसम में पेट की गर्मी फेस पर एक्ने का कारण बनती है।</div><div><br></div><h2>पेट की गर्मी एक्ने वजह</h2><div>हालांकि पेट की गर्मी कोई मेडिकल टर्म नहीं है, लेकिन शरीर में बढ़ती गर्मी, डिहाइड्रेशन, गलत खानपान की आदतें और पाचन से जुड़ी समस्याएं इस मौसम में आपकी त्वचा को प्रभावित कर सकती है। वहीं सीधे तौर पर कहा जाए, तो गर्मी और गर्मी का मौसम मिलकर एक्ने की वजह बन सकते हैं। जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो पेट में सूजन और टॉक्सिन्स बढ़ते हैं। यह आपकी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की वजह बन सकती है। इससे त्वचा पर सीबम ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाती है, जोकि पोर्स को बंद कर एक्ने का रूप ले लेती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes" target="_blank">Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोर</a></h3><div><br></div><h2>गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है एक्ने</h2><div>एक्सपर्ट की मानें, तो गर्मी के मौसम में एक्ने बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।</div><div><br></div><h2>ज्यादा पसीना आना और ऑयल प्रोडक्शन</h2><div>गर्मी के मौसम में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक पसीना बनाता है। इस दौरान स्किन की ऑयल ग्लैंड्स भी ज्यादा एक्टिव हो जाती है। ऐसे में जब धूल, पसीना, तेल और बैक्टीरिया मिल जाते है। तो पोर्स बंद होने लगते हैं और एक्ने की वजह बनते हैं।</div><div><br></div><h2>डिहाइड्रेशन और शरीर की गर्मी</h2><div>गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने की वजह से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। जिससे त्वचा का संतुलन बिगड़ जाता है। कई बार बॉडी अधिक तेल बनाना शुरू कर देती है, जिससे पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है।</div><div><br></div><h2>मसालेदार और तलाभुना खाना</h2><div>गर्मियों में बहुत ज्यादा जंक फूड, तला-भुना, मसालेदार खाना और मीठे ड्रिंक्स खाने से शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है। वहीं इससे भी कुछ लोगों में एक्ने की समस्या अधिक होती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:50:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/does-stomach-heat-cause-pimples-on-face-learn-full-truth-behind-this-claim</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/17/summer-acne_large_1150_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Superfoods का मिथ! महंगे Avocado-Quinoa नहीं, ये देसी चीजें हैं असली 'Health-Booster']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/the-superfood-myth-budget-friendly-indian-diet]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में हेल्दी खाने का मतलब सिर्फ महंगे सुपरफूड्स को माना जाता है। ऐसे में एवोकाडो, ब्लूबेरीज, क्विनोआ और ड्रैगन फ्रूट जैसे फूड्स देखकर लोग मानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना जरुरी है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि कई किफायती इंडियन फूड्स भी पोषण के मामले में बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">डाइटिशियन ने बताया है कि हेल्दी डाइट का मतलब सिर्फ महंगा खाना नहीं होता, बल्कि सही जानकारी के साथ बेहतरीन ऑप्शन चयन करना है। ऐसे कई देसी फूड्स में भी फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे जरुरी न्यूट्रिशन देखने को मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं महंगे सुपरफूड्स के कुछ बजट फ्रेंडली इंडियन ऑप्शन।</span></div><div><br></div><div><b>एवोकाडो vs नारियल</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">एवोकाडो को हेल्दी फैट्स के लिए जाना जाता है, लेकिन नारियल भी अच्छे फैट्स और कई जरुरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। वैसे यह आसानी से मिलने वाला और किफायती ऑप्शन है।</span></div><div><br></div><div><b>कीवी vs आंवला</b></div><div><br></div><div><b>कीवी- लगभग ₹60 प्रति पीस</b></div><div><b>आंवला- लगभग ₹10 प्रति पीस</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">कीवी को अक्सर विटामिन C से भरपूर फल माना जाता है, लेकिन भारतीय आंवला भी इस पोषक तत्व का बेहद समृद्ध स्रोत है। आंवला न केवल शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि यह किफायती होने के कारण बेहतर और सुलभ पोषण का विकल्प भी साबित होता है।</span></div><div><br></div><div><b>ड्रैगन फ्रूट vs पपीता</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">ड्रैगन फ्रूट में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पपीता में फाइबर, विटामिन-सी और डाइजेशन में मदद करने वाला एंजाइम काफी पाया जाता है।</span></div><div><br></div><div><b>ब्लूबेरीज vs जामुन</b></div><div><b>&nbsp;</b></div><div><b>ब्लूबेरीज- लगभग ₹180 प्रति 100 ग्राम</b></div><div><b>जामुन- लगभग ₹40 प्रति 100 ग्राम</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि ब्लूबेरीज में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाई जाती है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। दूसरी तरफ, जामुन में एंटीऑक्सीडेंट्स और प्लांट बेस तत्वों का अच्छा स्रोत है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इंडियन डाइट में शामिल किया जाता है और किफायती और हेल्दी ऑप्शन माना जाता है।</span></div><div><br></div><div><b>ब्रोकली vs पत्तागोभी</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">ब्रोकली को पौष्टिक सब्जियों में गिना जाता है क्योंकि इसमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। हालांकि, पत्तागोभी भी पोषण के मामले में किसी से कम नहीं है। इसमें भरपूर फाइबर के साथ कई आवश्यक विटामिन और खनिज पाए जाते हैं, साथ ही यह किफायती होने के कारण रोजमर्रा के आहार में आसानी से शामिल की जा सकती है।</span></div><div><br></div><div><b>क्विनोआ vs ज्वार</b></div><div><br></div><div><b>क्विनोआ- लगभग ₹31.80 प्रति 100 ग्राम</b></div><div><b>ज्वार- लगभग ₹11 प्रति 100 ग्राम</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">क्विनोआ को प्रोटीन से भरपूर सुपरफूड के रूप में काफी लोकप्रियता मिली है। लेकिन ज्वार भी एक बेहद पौष्टिक पारंपरिक अनाज है, जिसमें भरपूर फाइबर, आवश्यक खनिज तत्व और ऊर्जा देने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। लंबे समय से भारतीय खानपान का हिस्सा रही ज्वार स्वास्थ्य के साथ-साथ बजट के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।</span></div><div><br></div><div>खासकर हेल्दी खाने के लिए हमेशा महंगे विदेशी सुपरफूड्स का सेवन करना जरुरी नहीं है। हमारी किचन और लोकल बाजार में मौजूद कई देसी फूड्स भी पोषण और बजट के अनुकूल भी होते हैं। जब भी आप सुपरफूड्स खरीदें, तो अपने आसपास मिलने वाले पौष्टिक ऑप्शन पर भी जरुर ध्यान दें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:47:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/the-superfood-myth-budget-friendly-indian-diet</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/17/superfoods_large_1047_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या आपका Lifestyle भी बढ़ा रहा है High Blood Pressure का रिस्क? इन गलतियों से आज ही करें तौबा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/bad-habits-fueling-high-bp-the-silent-killer-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग असंतुलित और अन्हेल्दी रुटीन का पालन कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। इसी वजह से हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। अधिक नमक का सेवन, फास्ट फूड की आदत, मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वजन, धूम्रपान और शराब का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। </div><div>चूंकि यह बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और इससे बचाव के प्रभावी उपाय।</div><div><br></div><div><b>हाई ब्लड प्रेशर के कारण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है अत्यधिक नमक का सेवन करना। प्रतिदिन अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। प्रोसेस्ड फूड चिप्स, नमकीन, अचार और बाहर का खाना अक्सर ज्यादा नमक से भरे होते हैं। इसके साथ ही लगातार काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं या मानसिक तनाव लंबे समय से बने रहने से बीपी बढ़ जाता है। दिनभर बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और मोटापा भी बढ़ने लगता है।</span></div><div><br></div><div><b>खानपान की बातों पर ध्यान दें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस बात का ध्यान रखें कि प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, तंबाकू और शराब से सेवन से धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही वजन बढ़ जाता है और पेट के आसपास की चर्बी, हृदय पर दबाव बन जाता है और बीपी बढ़ाती जाती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के तरीके</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">उच्च रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहना चाहिए। इसके साथ ही पौष्टिक और कम नमक युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। रोजाना लगभग 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें- जैसे तेज चाल से चलना या व्यायाम करना। मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें। साथ ही धूम्रपान, तंबाकू और शराब के सेवन से दूरी बनाए रखें तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना भी हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:49:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/bad-habits-fueling-high-bp-the-silent-killer-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/high-bp_large_1749_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण डायबिटीज बीमारी का खतरा बना रहता है। डायबिटीज की बीमारी एक साइलेंट किलर है, जो धीरे-धीरे शरीर को खराब करती है। पिछले कुछ सालों में भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डायबिटीज की बीमारी एक तरह का मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है जिसमें शरीर या पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या उसे इसका ठीक से उपयोग करने में दिक्कत रहती है। इसलिए शरीर में इंसुलिन की कमी होने से शुगर का स्तर बढ़ने लगता है जो किडनी, स्किन, हृदय, आंखों और ओवरऑल पूरी हेल्थ को प्रभावित करता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">आपको बता दें कि, डायबिटीज की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों, किशोर और युवा वयस्क टाइप 1 डायबिटीज से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, टाइप 2 डायबिटीज 40 वर्ष की आयु के बाद के वयस्कों में अधिक घेरती है। यह बीमारी किडनी और दिल की बीमारियों का भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर डायबिटीज से पीड़ित लोगों को सुबह हाई ब्लड शुगर महससू होता है और उनमें गले और मुंह में शुष्की, रात भर बार-बार पेशाब करने के बाद भी पेशाब की थैली का भारी होना, नजर कमजोर होना और भूख जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं&nbsp; डायबिटीज के ऐसे लक्षण जिन्हें कभी-भी नहीं भूलना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>सुबह दिखने वाले इन संकेतों को कभी न भूलें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सुबह नजर आने वाले ये लक्षण दिन में नहीं दिखते हैं, जैसे कि खुजली, थकान, कमजोरी, ज्यादा भूख लगना, ज्यादा प्यास लगना दिन और रात दोनों में हो सकता है। वजन कम होना, ठीक ना होने वाले घाव, प्राइवेट पार्ट में खुजली ये सभी लक्षण आपको दिन भर फील हो सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>डायबिटीज के अन्य लक्षण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- अधिक भूख लगना</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अचानक वजन कम होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- हाथों-पैरों में झुनझुनी होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- थकावट, कमजोरी और शुष्क त्वचा होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- घावों का धीरे-धीरे भरना</div><div><br></div><div>&nbsp;- ज्यादा प्यास लगना</div><div><br></div><div>&nbsp;- रात के समय अत्यधिक पेशाब आना</div><div><br></div><div>&nbsp;- संक्रमण और बालों का झड़ना</div><div><br></div><div>&nbsp;ये सभी लक्षण टाइप 2 डायबिटीज के आम लक्षण है। वहीं, टाइप 1 डायबिटीज में लोगों को मतली, पेट दर्द, उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:33:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/diabetes-warning-signs_large_1633_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[40 के बाद बढ़ रहा है Weight? Gym नहीं, ये 3 Home Workout हैं रामबाण इलाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/weight-loss-tips-after-40-in-womens-try-3-simple-home-fitness-exercises]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल है। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण तेजी से मोटापा बढ़ता है। 40 की उम्र में महिलाओं में थकान और वजन बढ़ने की समस्या आम है। वजन कम करने के लिए फिजिकल एक्टिविटी करना और डाइट पर खासा ध्यान दिया जाता है। अब आपको इस उम्र में वजन कम करने के लिए ज्यादा वर्कआउट करने की कोई जरुरत नहीं, बस आपको बेसिक एकसरसाइज करनी है।</div><div><br></div><div><b>हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि 40+ उम्र की महिलाओं को फिट रहने और शरीर सक्रिय रखने केलिए हैवी वर्कआउट करने की जरुरत नहीं है। बस उनको ऐसी एक्सरसाइज की जरुरत होती है, जो शरीर के अनुसार हो और पूरे दिन उन्हें एक्टिव रखें।</span></div><div><br></div><div><b>फास्‍ट वॉकिंग</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब आप बाहर जाए, तो गाड़ी लेने की जरुरत नहीं है। ब्रिस्क वॉकिंग करें और तेज चलें जिससे आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं। हालांकि अपने ऊपर ज्यादा प्रेशर न डालें। यदि आपकी सांस फूलने लगे तो तुरंत रूक जाएं और आराम करें। वैसे यह कोई रेस नहीं बस आपको रोजाना सिर्फ 15 मिनट वॉक करना है, आपको फर्क नजर आ जाएगा।</span></div><div><br></div><div><b>स्ट्रेंथ ट्रेनिंग</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">महिलाओं के लगता है कि 40 की उम्र में वजन घटाना काफी मुश्किल है, लेकिन इतना भी कठिन नहीं है। सही वेट और सही तरीके से हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर्याप्त होती है।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">40 की उम्र में वजन को कम करने के लिए महिलाओं को कुछ बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके लिए वह तीन एक्सरसाइज को रोजाना करें।</span></div><div><br></div><div><b>लाइट डंबल चेस्‍ट प्रेस&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- दोनों हाथों में हल्के डंबल पकड़ें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब डंबल्स को ऊपर करें, ध्यान रखे किं आपकी कलाई कंधों के सीध में रहे।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।</div><div><br></div><div><b>बेंट ओवर रोस</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसको करने के लिए हल्के डंबल्स पकड़ें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अब अपनी कमर से आगे की तरफ झुकें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- फिर डंबल्स को अपने हिप्स की तरफ खींचे और कंधे के ब्लेड्स को पास लाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब धीरे-धीरे वापस नीचे ले जाएं।</div><div><br></div><div><b>ग्‍लूट ब्रिज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इस एक्सरसाइज को करने के लिए पीठ के बल लेटें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अपने हिप्स को ऊपर उठाएं और ग्लूट मसल्स को टाइट करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:54:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/weight-loss-tips-after-40-in-womens-try-3-simple-home-fitness-exercises</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/weight-loss-tips_large_1554_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: आखिर रात को ही क्यों लगती है मिठाई और स्नैक्स की तलब, जानिए पूरा सच]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/why-does-hunger-and-craving-feel-stronger-at-night-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि दिनभर आप अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन रात होते-होते क्रेविंग्स बढ़ने लगती हैं। रात के समय अचानक कुछ मीठा, चॉकलेट, नमकीन या चिप्स खाने का मन करने लगता है और ऐसा लगता है कि मानो खुद पर कोई कण्ट्रोल ही ना रहा हो।&nbsp;</div><div><br></div><div>अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जिसका सामना हममें से अधिकतर लोग करते हैं। आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन रात में अनहेल्दी फूड खाने की तलब के पीछे सिर्फ भूख नहीं, बल्कि हमारे शरीर, हार्माेन और आदतों का भी बड़ा रोल होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम इस बारे में बात करते हैं-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning" target="_blank">Health Tips: Prostate Cancer बन रहा 'Silent Killer', शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor's Warning</a></h3><h2>दिनभर की थकान रिवार्ड ढूंढने पर मजबूर करती है</h2><div>जब हम पूरा दिन काम करते हैं तो इससे हमें रात में थकान व तनाव का अहसास होता है। ऐसे में हमारा दिमाग खुद को कोई छोटा सा इनाम देना चाहता है। ऐसे में हम रात में सलाद या कोई हेल्दी फूड नहीं खाना चाहते, बल्कि आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्कुट या नमकीन खाकर खुद को खुशी और संतुष्टि का एहसास देना चाहते हैं।</div><div><br></div><h2>नींद की कमी से बढ़ सकती है क्रेविंग</h2><div>अक्सर हमें क्रेविंग्स देर रात होती है। इसका सीधा सा मतलब यही है कि नींद की कमी से भी कहीं ना कहीं क्रेविंग बढ़ती है। अगर आप देर रात तक जागते हैं तो शरीर के कुछ हार्माेन प्रभावित होते हैं। जिसकी वजह से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो जाता है। ऐसे में रात में बार-बार कुछ खाने का मन करता है।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><h2>जरूरत से ज्यादा डाइटिंग</h2><div>अधिकतर लोग अपनी बॉडी को एक शेप में देखना चाहते हैं और इसलिए दिन में बहुत कम खाते हैं या फिर बेहद स्ट्रिक्ट डाइटिंग करते हैं। ऐसे में रात तक शरीर एनर्जी की कमी महसूस करने लगता है। जिससे अचानक तेज क्रेविंग शुरू हो जाती है और फिर हम खुद को रोक ही नहीं पाते हैं।</div><div><br></div><h2>रात की क्रेविंग कम करने के लिए क्या करें&nbsp;</h2><div>अगर आप रात की क्रेविंग को नेचुत तरीके से कण्ट्रोल करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ आसान तरीके आजमाएं।</div><div><br></div><div>- दिनभर पर्याप्त प्रोटीन खाएं।</div><div>- मील स्किप करने से बचें।</div><div>- रात में अच्छी नींद लें।</div><div>- तनाव कम करने के लिए खाने की जगह रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं।</div><div>- टीवी देखते समय स्नैक खाने की आदत को धीरे-धीरे बदलें।</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:43:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/why-does-hunger-and-craving-feel-stronger-at-night-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/midnight-cravings_large_1443_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Prostate Cancer बन रहा 'Silent Killer', शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor's Warning]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में धीरे-धीरे प्रोस्टेट कैंसर एक 'साइलेंट किलर' के रूप में बढ़ता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। जब तक कि यह बीमारी गंभीर रूप न ले ले, तब तक इसके बारे में पता नहीं चलता है। आखिर हमारे देश में इन गंभीर और जानलेवा बीमारी की पहचान इतनी देर में क्यों होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>जागरूकता न होना और लक्षणों की अनदेखी करना</h2><div>प्रोस्टेट कैंसर के देरी से पकड़े जाने की सबसे बड़ी वजह जागरुकता का अभाव है। अक्सर पुरुष शुरूआती लक्षणों को सिर्फ 'बढ़ती उम्र का असर' समझकर नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। वहीं लोग इन शुरुआती लक्षणों को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know" target="_blank">Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं!</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><h2>लक्षण</h2><div>पेशाब करते समय जलन महसूस होना</div><div>बार-बार पेशाब आना</div><div>रात के समय टॉयलेट के लिए बार-बार उठना</div><div>पेशाब का रुक-रुक कर आना</div><div><br></div><h2>शर्म और हिचकिचाहट</h2><div>आज भी हमारे समाज में पुरुष स्वास्थ्य संबंधी निजी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं करते हैं। प्रोस्टेट जैसी बीमारी के बारे में डॉक्टर से बात करने में शर्म और संकोच महसूस करते हैं। इसी हिचकिचाहट की वजह से पुरुष अपनी तकलीफ को छिपाते रहते हैं और सही समय पर जांच नहीं हो पाती है।</div><div><br></div><h2>सुविधाओं का अभाव</h2><div>ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। कई जगहों पर कैंसर की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं नहीं हैं। वहीं आर्थिक परेशानी और बड़े अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी की वजह से भी लोग लंबे समय तक जांच को टालते रहते हैं।</div><div><br></div><h2>रूटीन हेल्थ चेकअप न कराना</h2><div>भारत में अभी भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने का चलन काफी कम है। इसलिए डॉक्टर की सलाह है कि 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर प्रोस्टेट की जांच जरूर कराना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं, जब उनकी समस्या बर्दाश्त के बाहर होती है।</div><div><br></div><h2>समय पर स्क्रीनिंग</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कई मामलों में शुरूआती चरण में यह बीमारी बिना किसी बड़े या स्पष्ट लक्षणों के शरीर खमोशी से पनपती है। यही कारण है कि समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है। अगर बीमारी को शुरूआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो इसके इलाज के सफल होने के चांसेज काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए समाधान</h2><div>समाज में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं पुरुषों को भी यह समझना होगा कि वह बिना किसी संकोच या शर्म के डॉक्टर के सामने अपने परेशानियों को साझा कर सकते हैं। सही जानकारी, नियमित जांच और सही समय पर उठाया गया कदम इस 'साइलेंट किलर' के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:35:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/prostate-cancer_large_1135_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हम सभी दिनभर की भागदौड़ में व्यस्त रहते हैं और जब शाम को थकान होती है या काम के दबाव में स्ट्रेस फील होता है, वह एक आम बात है। जब हम बिना किसी वजह के कमजोरी महसूस करते हैं या मूड खराब रहता है, तो हम अक्सर खुद ही यह मान लेते हैं कि शायद का प्रेशर ज्यादा है या फिर नींद पूरी नहीं हुई, इसलिए यह हो रहा है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर देखा गया है कि यह मामूली थकान से ज्यादा गंभीर समस्या हो सकती हैं, जिसे हम नजरअंदाज कर रहा हैं। ये लक्षण आयरन की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। इन लक्षणों को भूलकर भी इग्नोर न करें, वरना आगे चलकर बड़ी दिक्कत हो सकती है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं-</span></div><div><b style="font-size: 1rem;">कैसे होते हैं आयरन की कमी के संकेत?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>लगातार कमजोरी और सुस्ती</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आयरन की कमी का सबसे बड़ा संकेत है, हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से शरीर के सभी अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। हर वक्त थका हुआ और कमजोरी महसूस फील करता है।</span></div><div><br></div><div><b>चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है, तो दिमाग को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलता। इस कारण से कई बार काम पर फोकस करने में परेशानी, सिरदर्द या बेवजह चिड़चिड़ापन की समस्या देखने को मिलती है।</span></div><div><br></div><div><b>सांस फूलना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप थोड़ा-सा चलने और सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, तो सांस फूलना और घबराहट हो सकती है। यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी पूरा करने के लिए दिल पर ज्यादा मेहनत करता है, जिस वजह से धड़कनें तेज हो जाती है, जिसे हमें कई बार एंग्जायटी समझते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>स्ट्रेस और आयरन की कमी में अंतर</b></div><div><br></div><div><b>त्वचा का पीलापन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपके चेहरा पीला दिखने लगा है, तो यह शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत हो सकता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>हाथ-पैर ठंडे रहना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपके हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहते हैं, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन और आयरन की कमी का संकेत है।</span></div><div><br></div><div><b>असामान्य चीजें खाने का मन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपको आयरन की गंभीर कमी है, तो मिट्टी, चॉक या कच्चे चावल खाने की इच्छा ज्यादा होगी।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:37:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/15/iron-deficiency_large_1737_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Heatwave का आंखों पर 'साइलेंट अटैक', बढ़ रहा Redness और Infection का खतरा, जानें ये Eye Care Tips]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/heatwave-attack-on-eyes-increasing-redness-and-risk-of-infection-learn-eye-care-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बढ़ती गर्मी को हम सिर्फ डिहाइड्रेशन, लू या सनबर्न से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर आपकी आंखों पर भी देखने को मिल सकता है। गर्मियों में ड्राई आइज, जल, एनर्जी और धुंधला दिखने की समस्या बढ़ जाती है। जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हीटवेव का आपकी आंखों पर क्या असर होता है और इस समस्या से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>हीटवेव आंखों को ऐसे पहुंचाती है नुकसान</h2><div><br></div><h2>टियर फिल्म का सूख जाना</h2><div>बता दें कि हमारी आंखों की सतह को सेफ और नमी बनाए रखने के लिए एक बारीक टियर फिल्म होती है। जोकि प्रदूषण, धूल और इंफेक्शन से बचाव करती है। हीटवेव के दौरान चलने वाली गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी इस नमी को तेजी से सुखा देती है। इससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या और कॉर्निया में जलन का खतरा बढ़ जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips" target="_blank">Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल</a></h3><div><br></div><h2>AC और बाहरी तापमान में बदलाव</h2><div>अक्सर लोग तेज गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर में बैठते हैं। फिर बाहर धूप में काम के लिए जाते हैं। तापमान में अचानक बदलाव और AC की ड्राई हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।</div><div><br></div><h2>बच्चों और युवाओं पर असर</h2><div>गर्मी की छुट्टियों में बच्चे और युवा लैपटॉप, मोबाइल या टैबलेट पर अधिक समय बिताते हैं। स्क्रीन देखने के दौरान हम कम पलकें झपकाते हैं। जिससे आंखों में ड्राईनेस और डिजिटल आई स्ट्रोन, खुजली, रेडनेस और जलन की समस्या बढ़ जाती है।</div><div><br></div><h2>UV रेडिएशन के नुकसान</h2><div>वहीं सुबह के 10 बजे से दोपहर के 3 बजे तक सूर्य की UV किरणों का स्तर सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान अगर सीधी धूप के संपर्क में आते हैं, तो रेटिना को नुकसान, मोतियाबिंद का तेजी से बढ़ना, फोटोकेराइटाइटिस यानी आंखों का सनबर्न और टेरीजियम जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><h2>आंखों को ऐसे रखें सुरक्षित</h2><div>जब भी आप धूप में घर से बाहर जाए, तो हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले सनग्लासेज पहनने चाहिए, जो 100% UV किरणों को रोकते हों।</div><div><br></div><div>दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, इसके अलावा आप नींबू पानी या नारियल पानी भी पी सकते हैं। इससे शरीर के साथ-साथ आंखों में भी नमी बनी रहती है।</div><div><br></div><div>जब भी आप मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करें, तो हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को कम से कम 20 सेकेंड देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।</div><div><br></div><div>जब भी बाहर से वापस आएं, तो आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोना चाहिए। इस दौरान आंखों को रगड़ने से बचें। क्योंकि ऐसा करने से इंफेक्शन फैल सकता है।</div><div><br></div><div>आंखों में रेडनेस या जलन की समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप न डालें।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:23:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/heatwave-attack-on-eyes-increasing-redness-and-risk-of-infection-learn-eye-care-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/15/eye-care_large_1323_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार शरीर में हार्मोनल बदलाव किए जाते हैं। जब हार्मोन में बदलाव होते हैं, तो व्यक्ति के मूड में बार-बार बदलाव, वजन बढ़ने और मनोदशा में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हमारे शरीर में एंडोक्राइन सिस्टम हार्मोन को सर्कुलेट करता है, जो काफी कार्यों के लिए जरुरी होता है। शरीर हेल्दी बने रहे इसलिए बॉडी में कई हार्मोन्स सटीक मात्रा में लगातार बनते हैं।</div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्मोन्स शरीर के ऐसे केमिकल मैसेंजर हैं जो मेटाबॉलिज्म, वजन, मूड, नींद, भूख प्रजनन क्षमता और एनर्जी लेवल को भी नियंत्रित करता है। अक्सर मेडिकल में देखा गया है कि अनियमित जीवनशैली के कारण&nbsp; पीएमओएस, डायबिटीज, थायरॉयड आदि या खानपान की गलत आदतें&nbsp; &nbsp;हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे आप हार्मोनल असंतुलन को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>असंतुलित हार्मोन को ठीक करने के नेचुरल उपाय</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>अपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स को एड करें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">एनसीबीआई के अनुसार, प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरुरी पोषक तत्व है। प्रोटीन शरीर को जरुरी अमीनो एसिड को प्रदान करता है, जिसकी मदद से कई जरुरी हार्मोन्स बनते हैं। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार लेने से ग्रोथ हार्मोन्स और टेस्टोस्टोरोन में बढ़ोतरी होती है। रिसर्च में बताया गया है कि अगर आप हर मील में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेते हैं, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए आप डाइट में अंडे, दालें, पनीर, दूध, दही, चिकन, सोया और टोफू का सेवन कर सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>रोजाना एक्सरसाइज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्मोनल हेल्थ के लिए नियमित रुप से फिजिकल एक्टिविटी करना बेहद जरुरी है। NIH के अनुसार प्रतिदिन व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। एनसीबीआई के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज करने में एंडोर्फिन और ग्रोथ हार्मोन एक्टिव रहता है। जिससे मूड और एनर्जी लेवल बेहतर होते हैं। इसलिए रोजाना तेज चलना, साइकलिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, योग आदि एक्सरसाइज करें।</span></div><div><br></div><div><b>वजन को नियंत्रित करता है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं, तो इसके पीछे का कारण हार्मोन असंतुलन होता है। एनसीबीआई के अनुसार, मोटापा इंसुलिन, लेप्टिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होता है, तो सूजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है और इससे हार्मोनल समस्याएं होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। वजन कम करने के लिए प्रोसेस्ड फूड, बाहर का अनहेल्दी खाना, व्हाइट ब्रेड और चीनी वाले अन्य ड्रिंक्स लेने से बचें। इसके साथ ही फिजिकली रूप से एक्टिव रहना बेहद जरुरी है।</span></div><div><br></div><div><b>तनाव न लें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इंडियन जरनल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म के अनुसार, अत्यधिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तनाव की स्थिति में ग्लूकोकोर्टिकोइड्स, कैटेकोलामाइंस, ग्रोथ हार्मोन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोनों के स्तर में बदलाव देखा जा सकता है। इनमें से कुछ बदलाव शरीर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव ग्रेव्स रोग, प्रजनन संबंधी समस्याओं और बढ़ते वजन जैसी स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।&nbsp;</span></div><div>इसलिए मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करें, अपने करीबी लोगों से खुलकर बातचीत करें, प्रकृति के बीच समय बिताएं और मनपसंद संगीत सुनकर खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें।</div><div><br></div><div><b>शुगर का सेवन कम करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के मुताबिक, अधिक मात्रा में शुगर या चीनी से बनीं चीजें खाने से एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर पर काफी प्रभाव पड़ता है। इससे महिलाएं में ओव्यूलेशन से जुड़ी&nbsp; समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही यह मेंस्ट्रुअल साइकिल को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए रोजाना अपनी डाइट में शामिल होने वाली शुगर या उससे बनी चीजों का बाहर करें। ब्रेड, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा का सेवन न करें। इसकी जगह पर आप फल, गुड़, नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:21:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/14/hormonal-imbalance_large_1621_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Internet का 'झोलाछाप' Doctor बना ChatGPT, AI की आधी से ज्यादा Medical सलाह भ्रामक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/chatgpt-health-advice-a-dangerous-risk-say-experts]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के डिजिटल दौर में तकनीकी दुनिया में काफी बदलाव आया। जबसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आया है, तब से हर एक काम काफी आसान हो गया है। आजकल लोग अपनी हेल्थ संबंधित समस्याएं तुरंत ChatGPT से पूछते हैं। डॉक्टर से बीमारी परामर्श लिए बिना सभी लोग चैटजीपीटी से बीमारियों को उपचार कर रहे हैं, क्या यह एकदम सुरक्षित और सही तरीका है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;बीमारी के लक्षणों को समझने और मेडिकल कंडिशन के बारे में जानने से लेकर डाइट, फ़िटनेस और बचाव के तरीकों पर सलाह लेने तक, कई यूजर्स हेल्थ से जुड़ी तुरंत और आसानी से मिलने वाली गाइडेंस के लिए AI-पावर्ड टूल्स का सहारा ले रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि ChatGPT डॉक्टर की जगह क्यों नहीं ले सकता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>ChatGPT टूल है डॉक्टर नहीं है</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आजकल लोग अपनी रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और टेस्ट रिजल्ट ChatGPT पर अपलोड करके सलाह ले रहे हैं, जो कि सही नहीं है। अब मन में सवाल उठता है कि एआई सच में डॉक्टर की जगह ले सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि ChatGPT मेडिकल जानकारी को समझाने में मदद कर सकता है। आपकी रिपोर्ट के कठिन शब्दों को आसान भाषा में समझा सकता है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;"> हालांकि, यह आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, बॉडी चेकअप और वास्तिवक परिस्थितियों को नहीं बता सकता है। अगर आप AI की सलाह लेकर दवा शुरु करना, बंद करना या दवाई को बदल रहे हैं, तो यह आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। गौरतलब है कि एआई एक असिस्टेंट हो सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह कभी नहीं ले सकता।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;50% मेडिकल सलाह गलत होती है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">न्यूज 18 के इंटरव्यू में हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि AI का इस्तेमाल हेल्थ के लिए इस्तेमाल करना इतना खतरनाक नहीं है। लेकिन उन्होंने खुलासा किया है कि चैटजीपीटी के द्वारा दी गई करीब 50% मेडिकल सलाह गलत होती है। इनमें से लगभग 20% जवाब अत्यधिक खतरनाक और भ्रामक होते है।</span></div><div><br></div><div><b>आईसीयू (ICU) पहुंचने का खतरा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर ऐसे मामले में सामने आए है कि जहां लोगों ने एआई के जरिए अजब-गजब डाइट प्लान या नुस्खे को अपना लिए, जिसके बाद हालत इतनी बिगड़ गई कि आईसीयू में भर्ती होना पड़ा।</span></div><div><br></div><div><b>ओपनएआई भी कर चुका है खुलासा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, ओपनएआई ने अपनी पॉलिसी में स्पष्ट कहा है कि ChatGPT कोई डॉक्टर नहीं है और इसका प्रयोग मेडिकल ट्रीटमेंट या किसी भी तरह की सलाह के लिए इस्तेमाल बिल्कुल न करें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:32:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/chatgpt-health-advice-a-dangerous-risk-say-experts</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/13/chatgpt-health-advice_large_1732_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सेहतमंद Papaya कब बन जाता है खतरनाक? Doctor से जानें किन लोगों के लिए है ये 'Slow Poison']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/doctor-warns-who-should-not-eat-papaya]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आमतौर पर पपीता का सेवन हर कोई करता है। असल में पपीता खाने की सलाह कब्ज होने पर दी जाती है। पपीता में डाइट्री फाइबर, विटामिन्स और कई सारे मिनरल्स पाए जाते हैं। हर किसी का पका पपीता काफी पसंद होता है यह मीठा और स्वादिष्ट होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए कच्चे पपीते की सब्जी और इसका सलाद खाना पसंद होता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">वैसे कुछ लोगों के लिए पपीता का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह नुकसानदायक होता है। आइए आपको बताते हैं कि पपीता खाने से किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>पपीते में कौन-से न्यूट्रिशन पाए जाते हैं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">साइंस डायरेक्ट के अनुसार, पपीते में फाइबर, फोलेट, विटामिन-C, विटामिन-A, पोटैशियम, पपेन (Papain) एंजाइम पाए जाते हैं। यह फल हमेशा पाचन को सुधारने में मदद करता है और कब्ज की दिक्कत भी दूर करता है।</span></div><div><br></div><div><b>ये लोग भूलकर भी न खाएं पपीता</b></div><div><br></div><div><b>लेटेक्स एलर्जी होने पर पपीता न खाएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपको लेटेक्स एलर्जी से समस्या है, तो आप भूलकर भी पपीता सेवन न करें, क्योंकि इससे आपको एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। पपीता में पाए जाने वाला नेचुरल लेटेक्स कुछ लोगों में क्रॉस-रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। जनरल ऑफ एलर्जी एंड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी में बताया है कि पपेन और पपीता लेटेक्स संवेदनशील लोगों में एलर्जी का कारण बनता है। असल में लेटेक्स एलर्जी पीड़ित व्यक्ति को खुजली, त्वचा पर रैशेज, होंठों में सूजन, सांस लेने में परेशानी और गले में जलन महसूस होना।</span></div><div><br></div><div><b>प्रेग्नेंसी में कच्चा पपीता खाने से बचें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">प्रेग्नेंसी के दौरान पपीता खाने की मनाही होती है। कच्चे पपीते में पाए जाने वाले लेटेक्स से बचना चाहिए। क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी में तीव्र संकुचन हो सकते हैं, जिससे समय से पहले डिलीवरी की समस्या हो सकती है। वहीं, पपीते में पाए जाने वाले पैपेन को कुछ मामलों में गर्भवस्था के दौरान महिला का शरीर इसे गलती से प्रोस्टाग्लैंडिन समझ सकते हैं। प्रोस्टाग्लैंडिन का इस्तेमाल कई बार लेबर पेन शुरु करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह गर्भ में पल रहे बच्चों को सहारा देने वाली झिल्लियों को भी कमजोर कर देती है।</span></div><div><br></div><div><b>सांस से जुड़ी समस्या</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">एनआईएच की रिपोर्ट के अनुसार, पपीते में पाए जाने वाला पैपेन एंजाइम अस्थमा से पीड़ित लोगों में सांस लेने में तकलीफ पैदा हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स बताते हैं कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को पपीते का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर को जरुर दिखाएं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>किडनी के मरीज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपको किडनी संबंधित जुड़ी कोई समस्या है, तो उनको अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पपीते में अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, जब शरीर में किसी फूड या अन्या सोर्स से पोटैशियमल की मात्रा अधिक हो जाती है, तो ऐसे में किडनी द्वारा अधिक पोटैशियमल को फिल्टर करके बाहर निकाला जा सकता है। जब किसी व्यक्ति पहले से किडनी की समस्या से पीड़ित है, तो उसको किडनी पर दबाव डालने वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><b>पपीता खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- ध्यान रहें कि हमेशा फ्रेश और पका हुए पपीता खाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- जरुरत से ज्यादा सेवन न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह के बाद ही डाइट में बदलाव करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आपको एलर्जी है, तो पपीता खाना बंद करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:04:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/doctor-warns-who-should-not-eat-papaya</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/13/papaya_large_1404_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Digestive Health Myths: दूध और मसालेदार खाने से जुड़ी इन बातों को मानते हैं सच? जानें पूरी सच्चाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/do-you-believe-these-things-about-milk-and-spicy-food-learn-full-truth]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कई लोगों का मानना है कि दूध पीने से गैस और पेट फूलने की समस्या होती है। इसकी मुख्य वजह 'लैक्टोज इनटॉलेरेंस' है। बता दें कि इसके पीछे का कारण शरीर में लैकेटेज एंजाइम की कमी होती है, जिसको दूध में मौजूद लैक्टोज पचा नहीं पाता है। आज के समय में गैस, पेट दर्द, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं आम हैं। लेकिन इनसे जुड़ी कई गलत धारणाएं आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पाचन से जुड़ी कुछ ऐसी अफवाहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सच्चाई के बारे में आपको भी जानना जरूरी है। जिससे आप अपने न सिर्फ पेट बल्कि सेहत का भी सही तरीके से ध्यान रख सकें।</div><div><br></div><h2>हर मसालेदार खाना पेट के लिए नुकसानदेह</h2><div>हालांकि यह एक आम धारणा है, लेकिन इसमें पूरी सच्चाई नहीं है। असल में मसालों का सीमित इस्तेमाल पाचन प्रोसेस को बेहतर बनाता है। जीरा, धनिया, हल्दी और अदरक जैसे मसाले पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जिससे खाना जल्दी और बेहतर तरीके से पचता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-work-stress-and-anxiety-at-office-these-lifestyle-tips-provide-relief" target="_blank">Health Tips: ऑफिस में Work Stress और Anxiety से हैं परेशान? ये Lifestyle Tips देंगे तुरंत राहत</a></h3><div><br></div><div>लेकिन समस्या तब होती है, जब बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा भोजन लगातार खाया जाता है, तो इससे जलन, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए हमेशा संतुलित मात्रा में मसालों का सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>दूध पीने से गैस बनती है</h2><div>यह बात पूरी तरह से सच नहीं है, क्योंकि दूध एक पौष्टिक आहार है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है। लेकिन कुछ लोगों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या होती है। इस दौरान शरीर दूध को ठीक से पचा नहीं पाता है। ऐसे लोगों को पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या हो सकती है। बाकी लोगों के लिए यह एक हेल्दी ड्रिंक है, जोकि हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को एनर्जी देने का काम करता है।</div><div><br></div><h2>रोजाना मल त्याग न होना</h2><div>बता दें कि हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग-अलग होता है। इसलिए मल त्याग की भी आदत अलग हो सकती है। कुछ लोगों को दिन में एक बार या फिर दो बार भी सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर लंबे समय तक पेट दर्द, कब्ज या भारीपन महसूस होता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इस स्थिति फाइबर युक्त भोजन और पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए।</div><div><br></div><h2>बार-बार एंटासिड दवाएं लेना</h2><div>भले ही एंटासिड दवाएं फौरन राहत देती हैं, लेकिन इनको बार-बार और लंबे समय तक नहीं लेना चाहिए। इनका लगातार इस्तेमाल करने से शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे अन्य सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे के कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।</div><div><br></div><h2>खाना खाने के फौरन बाद पानी पीना</h2><div>खाना खाने के फौरन बाद थोड़ी मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन खाना खाने के बाद ज्यादा पानी पीने से पाचन रस पतला हो सकता है। इससे पाचन प्रोसेस धीमा हो सकता है। इसलिए खाना खाने के बाद संतुलित मात्रा में पानी पीना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:26:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/do-you-believe-these-things-about-milk-and-spicy-food-learn-full-truth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/13/digestive-health-myths_large_1126_148.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सुबह सूजे हुए चेहरे से हैं परेशान? जानें Water Retention और Face Swelling की 5 बड़ी वजहें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/reduce-facial-swelling-doctors-water-retention-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर लोग वाटर रिटेंशन की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसके कारण लोगों को अचानक से वजन बढ़ने, जोड़ों में अकड़न आने, दर्द होने और हाथों, पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन आने की समस्या का समाना करना पड़ता है। वैसे इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाया जा सकता है।</div><div><br></div><div><b>वाटर रिटेंशन की समस्या क्यों होती है?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह जब उठते हैं, तो चेहरे पर सूजन आना एक आम समस्या है और अक्सर यह किसी गंभीर बीमारी के कारण शरीर में कुछ समय के लिए पानी जमा होने यानी वाटर रिटेंशन की वजह से होता है। रातभर में चेहरे पर फ्लूइड जमा होने के पीछे ज्यादा नमक खाना, डिहाइड्रेशन, खराब नींद, हार्मोनल बदलाव और अल्कोहल जैसी चीजें आम समस्या हैं।</span></div><div><br></div><div><b>वाटर रिटेंशन से चेहरे की सूजन को कम कैसे करें?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>हाइड्रेटेड रहें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">वाटर रिटेंशन की समस्या से राहत के लिए शरीर पानी की सही मात्रा बनाए रखना बेहद जरुरी है। असल में आपको हाइड्रेटेड रहना बहुत जरुरी है और असरदार उपायों में से एक है। जब आपके शरीर में पानी की कमी होती है, तो वह जो भी पानी बचा होगा, उसे रोककर रखने की कोशिश करता है, जिससे सूजन और बढ़ जाती है।</span></div><div><br></div><div><b>नमक युक्त खाने से बचें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप चेहरे की सूजन को कम करना चाहते हैं, तो आप नमकीन खीने की चीजों को कम करना चाहिए, क्योंकि सोडियम शरीर में फ्लूइड को रोककर रखने को बढ़ावा देता है। जिसके कारण वाटर रिटेंशन की समस्या बढ़ती है।</span></div><div><br></div><div><b>नींद में सुधार करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप वाटर रिटेंशन से राहत पाने के लिए नींद की क्वालिटी भी मायने रखते हैं, क्योंकि खराब नींद शरीर की फ्लूइड बैलेंस को नियंत्रित करने की क्षमता को बिगाड़ देती है। यह वजह है कि सुबह-सुबह चेहरा अक्सर सबसे ज्यादा सूजा हुआ दिखता है।</span></div><div><br></div><div><b>चेहरे की हल्की मसाज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">चेहरे पर हल्के हाथों से की गई मसाज या लिम्फ प्रवाह को बढ़ाने वाली तकनीकें जमा हुए अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने में सहायक हो सकती हैं, जिससे फूला हुआ चेहरा सामान्य दिखने लगता है। इसके अलावा, कुछ देर तक ठंडी पट्टी या ठंडे कपड़े से सेक करने पर त्वचा के नीचे मौजूद रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे सूजन और भारीपन में अस्थायी रूप से राहत मिल सकती है।</span></div><div><br></div><div><b>फिजिकल एक्टिविटीज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">शरीर को एक्टिव रखना बेहद जरुरी है। शारीरिक रुप से एक्टिव रहने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहती है और फ्लूइड को एक ही जगह जमा होने से रोका जा सकता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:00:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/reduce-facial-swelling-doctors-water-retention-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/12/reduce-facial-swelling_large_1800_157.jpeg" />
    </item>
  </channel>
</rss>