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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[मकान मालिक सावधान! किराएदार ने दिया आधार-पैन? ऐसे करें असली-नकली की पहचान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/landlords-beware-has-the-tenant-provided-their-aadhaar-or-pan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आधार कार्ड भारत में एक ज़रूरी डॉक्यूमेंट है, जिसका इस्तेमाल सरकारी सर्विस का इस्तेमाल करने, सीधे फ़ायदे पाने और नौकरी के लिए एप्लीकेशन और स्कूल में एडमिशन जैसे अलग-अलग कामों के लिए पहचान वेरिफ़ाई करने के लिए किया जाता है। यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) द्वारा जारी किए गए आधार कार्ड में बायोमेट्रिक और डेमोग्राफ़िक जानकारी होती है और इसकी पहचान एक यूनिक 12-डिजिट नंबर से होती है। इसकी अहमियत को देखते हुए आधार कार्ड का असली होना पक्का करना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब जब इसका इस्तेमाल पहचान वेरिफ़िकेशन के लिए किया जाता है, जैसे कि मकान मालिक प्रॉपर्टी किराए पर देते समय।</div><div><br></div><div>आज के दौर में किसी को अपना मकान या दुकान किराए पर देते समय सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। अमूमन मकान मालिक पहचान के तौर पर किराएदार से आधार कार्ड और पैन (PAN) कार्ड की प्रतियां मांगते हैं। लेकिन डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग से अब नकली और जाली दस्तावेज बनाना बेहद आसान हो गया है। शातिर अपराधी नकली पहचान पत्र देकर मकान किराए पर लेते हैं और बाद में गैर-कानूनी गतिविधियों या अवैध कब्ज जैसी गंभीर समस्याओं को अंजाम देते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000" target="_blank">PM Svanidhi Credit Card: 30000 की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड कैसे बनेगा, यहां जानें पूरा प्रोसेस</a></h3><h2>1. आधार कार्ड के असली या नकली होने की पहचान कैसे करें?</h2><div>भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई बेहतरीन और मुफ्त डिजिटल साधन उपलब्ध कराए हैं। किसी भी किराएदार का आधार जांचने के लिए इन तरीकों का उपयोग करें:</div><div><br></div><div><b>- एम-आधार (mAadhaar) ऐप से क्यूआर कोड स्कैनिंग:</b> यह सबसे आसान और अचूक तरीका है। अपने स्मार्टफोन में आधिकारिक 'mAadhaar' ऐप डाउनलोड करें। ऐप में दिए गए क्यूआर कोड स्कैनर को खोलें और किराएदार के आधार कार्ड पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करें। यदि आधार असली है तो स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नाम, लिंग, राज्य, फोटो और अन्य विवरण दिखाई देंगे। जाली आधार होने पर क्यूआर कोड स्कैन नहीं होगा या विवरण मेल नहीं खाएंगे।</div><div><br></div><div><b>- आधिकारिक पोर्टल से ऑनलाइन सत्यापन:</b> आप यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट (www.uidai.gov.in) पर जाकर 'Verify an Aadhaar Number' सेवा का उपयोग कर सकते हैं। वहाँ आधार संख्या और कैप्चा दर्ज करने पर यदि वह नंबर वैध है तो स्क्रीन पर उसकी पुष्टि हो जाएगी और व्यक्ति की अनुमानित आयु सीमा (जैसे 30-40 वर्ष), लिंग और राज्य का नाम दिखाई देगा।</div><div><br></div><div><b>- सुरक्षा फीचर्स की भौतिक जांच:</b> असली आधार कार्ड पर अशोक स्तंभ का लोगो, भारत सरकार का वाटरमार्क और एक विशेष सुरक्षा धागा या पैटर्न होता है। केवल साधारण फोटोकॉपी पर भरोसा करने के बजाय मूल (Original) कार्ड को ध्यान से देखें।</div><div><br></div><h2>2. पैन (PAN) कार्ड को सत्यापित करने का सही तरीका</h2><div>आयकर विभाग ने भी पैन कार्ड की प्रामाणिकता जांचने के लिए ऑनलाइन माध्यम दिए हैं ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके:</div><div><br></div><div><b>- 'वेरिफाई योर पैन' (Verify Your PAN) सेवा: </b>आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (www.incometax.gov.in/iec/foportal) पर जाएं। होमपेज पर 'Quick Links' के अंतर्गत 'Verify Your PAN' पर क्लिक करें। यहाँ किराएदार का पैन नंबर, उनका पूरा नाम (जैसा पैन पर है), जन्म तिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करें। विवरण सही होने पर स्क्रीन पर 'PAN is Active and details are matching with PAN database' का संदेश दिखाई देगा।</div><div><br></div><div><b>- पैन क्यूआर कोड स्कैनर ऐप: </b>आयकर विभाग के 'PAN QR Code Reader' मोबाइल ऐप के जरिए पैन कार्ड पर मौजूद क्विक रिस्पांस (QR) कोड को स्कैन करके भी कार्ड धारक का असली नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि का मिलान किया जा सकता है।</div><div><br></div><h2>मकान मालिकों के लिए अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय</h2><div>दस्तावेजों की जांच के अलावा, कानूनी रूप से सुरक्षित रहने के लिए इन बातों का पालन अवश्य करें:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) अनिवार्य: </b>केवल दस्तावेज जांचना काफी नहीं है। अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर या राज्य पुलिस के आधिकारिक ऐप के माध्यम से किराएदार का पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। यह कानूनी रूप से भी कई शहरों में अनिवार्य है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- लिखित रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement): </b>हमेशा 11 महीने का पंजीकृत या नोटरीकृत रेंट एग्रीमेंट बनवाएं। इसमें किराएदार के मूल पते और गवाहों के हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से होने चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पड़ोसी या पिछले मकान मालिक से फीडबैक:</b> यदि संभव हो तो किराएदार के कार्यस्थल (Office) या उनके पिछले मकान मालिक से उनके व्यवहार और पृष्ठभूमि के बारे में संक्षिप्त जानकारी लें।</div><div><br></div><div>सतर्कता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। एक मकान मालिक के रूप में थोड़ी सी जल्दबाजी या लापरवाही आपको बड़े कानूनी विवाद में डाल सकती है। किराएदार को चाबी सौंपने से पहले ऊपर बताए गए सरकारी पोर्टलों के जरिए उनके आधार और पैन कार्ड का मिलान अवश्य करें।</div><div><br></div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:24:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/landlords-beware-has-the-tenant-provided-their-aadhaar-or-pan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[PM Svanidhi Credit Card: 30000 की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड कैसे बनेगा, यहां जानें पूरा प्रोसेस]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>केंद्र सरकार ने रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडर्स (सड़क किनारे दुकान लगाने वाले) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के दायरे को और व्यापक कर दिया है। सरकार ने इस योजना के तहत अब 'पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड' की अनूठी सुविधा शुरू की है। यह रुपे (RuPay) प्लेटफॉर्म पर आधारित एक लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है, जिसकी अधिकतम सीमा (Limit) 30,000 रुपये तक तय की गई है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड क्या है?</h2><div>PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड एक RuPay-बेस्ड कार्ड है जो एक रेगुलर क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है। आप इसका इस्तेमाल रोज़मर्रा की चीज़ें खरीदने, बिल भरने और डिजिटल पेमेंट करने के लिए कर सकते हैं। इसकी शुरुआत Rs. 10,000 की लिमिट से होती है, जिसे बाद में बढ़ाकर Rs. 30,000 कर दिया जाता है। इस कार्ड का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि 20 से 50 दिनों के अंदर पेमेंट करने पर कोई ब्याज नहीं लगता है। यह कार्ड 5 साल के लिए वैलिड होता है और UPI से लिंक होता है, जिससे QR कोड स्कैनिंग के ज़रिए पेमेंट किया जा सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026" target="_blank">पासपोर्ट बनवाना हो जाएगा आसान, जानें पासपोर्ट से जुड़े 2026 के नियम और कानून</a></h3><h2>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड में 30,000 की लिमिट कैसे मिलती है?</h2><div>यह क्रेडिट कार्ड विशेष रूप से छोटे दुकानदारों को दैनिक व्यापारिक आवश्यकताओं और आपातकालीन खर्चों के लिए 'ऑन-डिमांड' लोन (ऋण) की सुविधा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। क्रेडिट लिमिट का गणित इस प्रकार काम करता है:</div><div>- शुरुआती लिमिट (Initial Limit): कार्ड जारी होने पर शुरुआत में इसकी क्रेडिट लिमिट 10,000 रुपये तय की जाती है।</div><div>- 30,000 रुपये की अधिकतम लिमिट: जब लाभार्थी इस कार्ड का उपयोग करता है और समय पर इसके बिल का भुगतान (Satisfactory Usage) करता है तो बैंक द्वारा इसकी लिमिट को धीरे-धीरे बढ़ाकर अधिकतम 30,000 रुपये कर दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>इस क्रेडिट कार्ड की मुख्य विशेषताएं और लाभ</h2><div>यह कार्ड सामान्य वाणिज्यिक क्रेडिट कार्डों से काफी अलग और बेहद किफायती है:</div><div>- लाइफटाइम फ्री कार्ड: इस कार्ड को बनवाने के लिए कोई जॉइनिंग फीस, एक्टिवेशन शुल्क या सालाना रिन्यूअल फीस नहीं देनी होती। यह पूरी तरह निशुल्क है।</div><div>- ब्याज मुक्त अवधि: कार्ड धारकों को ट्रांजैक्शन की तारीख से 20 से 50 दिनों तक की ब्याज मुक्त (Interest-Free) अवधि मिलती है।</div><div>- यूपीआई लिंकेज (UPI Linkage): चूंकि यह रुपे (RuPay) नेटवर्क पर आधारित है, इसलिए इसे भीम (BHIM) या अन्य यूपीआई ऐप्स से लिंक किया जा सकता है। इसके बाद रेहड़ी-पटरी वाले सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके भी इस लिमिट से भुगतान कर सकते हैं।</div><div>- रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक: इस कार्ड से प्रति 100 रुपये के खर्च पर रिवॉर्ड पॉइंट मिलते हैं। इसके अलावा डिजिटल बिक्री और थोक खरीद पर सरकार द्वारा निर्दिष्ट कैशबैक का लाभ भी मिलता है।</div><div>- ईएमआई (EMI) सुविधा: यदि कोई दुकानदार एक साथ पूरा बिल नहीं चुका पाता है तो 2,500 रुपये से अधिक के बिल को आसान मासिक किश्तों (EMI) में बदलने की सुविधा भी उपलब्ध होती है।</div><div>- रोकथाम/प्रतिबंध: इस कार्ड से एटीएम (ATM) या पीओएस (POS) मशीन के जरिए कैश (नकद) निकालने की अनुमति नहीं है। साथ ही, कुछ प्रतिबंधित श्रेणियों (जैसे सट्टा, विदेशी होटल आदि) में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।</div><div>&nbsp;</div><h2>कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता)</h2><div>इस क्रेडिट कार्ड का लाभ हर किसी को नहीं मिल सकता। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:</div><div>- आवेदक मुख्य रूप से 'पीएम स्वनिधि योजना' का मौजूदा लाभार्थी होना चाहिए।</div><div>- यह कार्ड उन स्ट्रीट वेंडर्स को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाता है जिन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के तहत लिए गए अपने दूसरे टर्म लोन (Term Loan) को समय पर और सफलतापूर्वक चुका दिया है।</div><div>- आवेदक के पास शहरी स्थानीय निकाय (ULB) द्वारा जारी वेंडिंग प्रमाणपत्र या पहचान पत्र होना चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्रेडिट कार्ड बनवाने की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया</h2><div>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और कागज़ रहित (Paperless) रखा गया है:</div><div>- आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले पीएम स्वनिधि की आधिकारिक वेबसाइट (www.pmsvanidhi.mohua.gov.in) पर जाएं या इसके आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड करें।</div><div>- यूएएन/लॉगिन विवरण दर्ज करें: अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो) के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन करें।</div><div>- क्रेडिट कार्ड विकल्प का चयन: डैशबोर्ड पर दिए गए 'PM SVANidhi Credit Card Application' के लिंक पर क्लिक करें।</div><div>- विवरण भरें और बैंक चुनें: अपनी मेंबर आईडी और बुनियादी व्यावसायिक विवरण दर्ज करें। इसके बाद उस बैंक का चयन करें जहाँ आपका पीएम स्वनिधि लोन खाता सक्रिय है (जैसे यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि)।</div><div>- ओटीपी सत्यापन: आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करके सबमिट करें।</div><div>- सत्यापन और प्रेषण: बैंक अधिकारी आपके डिजिटल रिकॉर्ड और पिछले लोन के पुनर्भुगतान के इतिहास (Credit Discipline) की जांच करेंगे। सब कुछ सही पाए जाने पर कार्ड स्वीकृत कर दिया जाएगा और इसकी डिजिटल प्रति आपके ऐप में सक्रिय हो जाएगी।</div><div>&nbsp;</div><div>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड छोटे व्यापारियों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने और उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने का सरकार का एक बेहद सराहनीय कदम है। यदि आप भी एक स्ट्रीट वेंडर हैं और अपनी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी रखते हैं तो आज ही इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाएं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:49:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[पासपोर्ट बनवाना हो जाएगा आसान, जानें पासपोर्ट से जुड़े 2026 के नियम और कानून]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार ने 2026 के लिए पासपोर्ट नियमों का एक नया सेट जारी किया है, जिसे देश भर में एप्लिकेंट्स के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस को आसान बनाने, सिक्योरिटी को मज़बूत करने और सर्विस डिलीवरी को तेज़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये अपडेटेड नियम, जो 15 फरवरी के बाद पूरी तरह से लागू होंगे, पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू करने को ज़्यादा आसान बनाने के साथ-साथ फ्रॉड और बेवजह की देरी की गुंजाइश को कम करने के लिए हैं। एप्लिकेंट्स से कहा जा रहा है कि वे आखिरी समय में रिजेक्शन या प्रोसेसिंग में दिक्कतों से बचने के लिए नई ज़रूरतों के बारे में पहले से ही जान लें।</div><div>&nbsp;</div><div>अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले और विदेश जाने का सपना देखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट आवेदन और नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित, आधुनिक और सुगम बना दिया है। तकनीक के समावेश के साथ अब नियमों को इस तरह बदला गया है कि आम लोगों को बिचौलियों के चक्कर न काटने पड़ें और उनका पासपोर्ट कम से कम समय में बनकर घर पहुँच जाए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds" target="_blank">यदि आप निवेशकर्ता हैं और बेहतर मुनाफा चाहते हैं तो यह जानिए कि कब लगाएं PPF में पैसा और कब निवेश करें Mutual Fund में?</a></h3><h2>2026 में पासपोर्ट से जुड़े प्रमुख बदलाव और नियम</h2><div>पासपोर्ट प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी नियमों और तकनीक में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं:</div><div>- चिप-आधारित ई-पासपोर्ट (e-Passport) का रोलआउट: अब भारत में चरणबद्ध तरीके से 'ई-पासपोर्ट' जारी किए जा रहे हैं। इन नए पासपोर्ट के कवर में एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप (RFID Chip) और एक एंटीना लगा होता है। इसमें आवेदक का नाम, जन्म तिथि, डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रूप से स्टोर रहता है। इससे हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी और जाली पासपोर्ट बनाना नामुमकिन होगा।</div><div>- बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता: 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद पैदा हुए बच्चों के पासपोर्ट आवेदन के लिए 'बर्थ सर्टिफिकेट' (Birth Certificate) को जन्म तिथि के मुख्य और अनिवार्य दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है।</div><div>- वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को फीस में छूट: 'नॉर्मल' कैटेगरी के तहत नए पासपोर्ट आवेदन पर वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) और नाबालिगों (8 वर्ष से कम आयु) को सरकारी शुल्क में 10% की विशेष छूट दी जा रही है।</div><div>- डिजिलॉकर (DigiLocker) का एकीकरण: अब आवेदकों को दस्तावेजों की ढेर सारी हार्ड कॉपी ले जाने की जरूरत नहीं है। आवेदन करते समय आप अपने जरूरी दस्तावेज सीधे डिजिलॉकर से लिंक कर सकते हैं। हालांकि, पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) पर सत्यापन के लिए एक बार मूल (Original) दस्तावेज साथ रखना सुरक्षित रहता है।</div><div>- एम-पासपोर्ट पुलिस ऐप (mPassport Police App): पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुलिस कर्मियों को विशेष ऐप दिए गए हैं। अब वे आपके घर आकर सीधे टैबलेट या मोबाइल से डिजिटल रिपोर्ट सबमिट करते हैं, जिससे पहले लगने वाला 2-3 सप्ताह का समय घटकर अब महज कुछ दिन रह गया है।</div><div>&nbsp;</div><h2>पासपोर्ट आवेदन की आसान प्रक्रिया: चरण-दर-चरण</h2><div>नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने को री-इश्यू (Re-issue) कराने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है:</div><div>- पंजीकरण: पासपोर्ट सेवा की आधिकारिक वेबसाइट (www.passportindia.gov.in) या 'mPassport Seva' ऐप पर जाकर नया यूजर अकाउंट बनाएं।</div><div>- फॉर्म भरना: लॉगिन करने के बाद 'Apply for Fresh Passport/Re-issue' विकल्प पर क्लिक करें और फॉर्म में अपनी सटीक जानकारी भरें।</div><div>- फीस और अपॉइंटमेंट: 'Pay and Schedule Appointment' पर क्लिक करके अपने नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) का चयन करें। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन (UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड) के माध्यम से करें।</div><div>- केंद्र का दौरा: निर्धारित समय पर अपने मूल दस्तावेजों के साथ केंद्र पर जाएँ। वहाँ आपके बायोमेट्रिक्स (उंगलियों के निशान और फोटो) लिए जाएंगे।</div><div>- पुलिस वेरिफिकेशन और डिलीवरी: पुलिस सत्यापन सफल होने के बाद आपका पासपोर्ट स्पीड पोस्ट के जरिए सीधे आपके घर के पते पर भेज दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>आवेदन के लिए आवश्यक मुख्य दस्तावेज</h2><div>एक सामान्य वयस्क आवेदक के लिए निम्नलिखित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं:</div><div>- पते का प्रमाण (कोई एक): आधार कार्ड, बिजली बिल, पानी का बिल, गैस कनेक्शन का प्रमाण या बैंक पासबुक।</div><div>- जन्म तिथि का प्रमाण (कोई एक): आधार कार्ड, पैन कार्ड, मैट्रिक (10वीं) की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र।</div><div>&nbsp;</div><h2>सुरक्षा और सतर्कता संबंधी सुझाव</h2><div>- आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें: इंटरनेट पर 'passportindia' नाम से मिलती-जुलती कई फर्जी वेबसाइटें सक्रिय हैं जो भारी फीस वसूलती हैं। हमेशा केवल आधिकारिक .gov.in डोमेन वाली वेबसाइट का ही उपयोग करें।</div><div>- डाटा की शुद्धता: आवेदन फॉर्म में आपके नाम की स्पेलिंग, माता-पिता का नाम और जन्म तिथि ठीक वैसी ही होनी चाहिए जैसी आपके आधार या पैन कार्ड पर अंकित है। विसंगति होने पर आवेदन होल्ड पर डाला जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>ई-पासपोर्ट की शुरुआत और डिजिटल वेरिफिकेशन के कारण अब भारतीय पासपोर्ट वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहद शक्तिशाली और सुरक्षित हो गया है। नियमों की सही जानकारी और सही दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर आपका पासपोर्ट बिना किसी बाधा के समय पर बनकर तैयार हो जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:07:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[यदि आप निवेशकर्ता हैं और बेहतर मुनाफा चाहते हैं तो यह जानिए कि कब लगाएं PPF में पैसा और कब निवेश करें Mutual Fund में?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>निवेश की दुनिया में अक्सर लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर में अपनी गाढ़ी कमाई से बमुश्किल की जाने वाली बचत का रुपया-पैसा कहाँ लगाएं, जहां पर वह डूबे नहीं, बल्कि सुरक्षित भी रहे। ऐसे में आप अपना रुपया-पैसा पीपीएफ (Public Provident Fund) में लगाएं या एमएफ (Mutual Fund) में। क्योंकि सच यह है कि दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है और सही समय पर सही विकल्प चुनना ही आपके लिए अधिक महत्वपूर्ण है।</div><div><br></div><div>इसलिए आइए आज आपको बताते हैं कि कब पीपीएफ में निवेश करें और कब एमएफ में।</div><div><br></div><h2>पहले हम बात करते हैं कि पीपीएफ (PPF) में निवेश कब न करें?&nbsp;</h2><div><br></div><div>आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि Public Provident Fund (PPF) उन लोगों के लिए बेहतर है जो अपनी पूंजी की सुरक्षा चाहते हैं। साथ ही एक निश्चित और जोखिम-मुक्त रिटर्न पसंद करते हैं। इसके अलावा, टैक्स भी बचाना चाहते हैं। और तो और, 15 वर्ष या उससे अधिक की लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं। चूंकि इसका महत्वपूर्ण फंडा यह है कि PPF में हर महीने की 5 तारीख से पहले पैसा जमा करने पर उस महीने का ब्याज भी मिलता है। इसलिए यदि आप मासिक निवेश करते हैं तो 1 से 5 तारीख के बीच जमा करना अधिक फायदेमंद माना जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026" target="_blank">FIR कराना हो जाएगा आसान, जब जानेंगे 2026 के कानून</a></h3><h2>अब हम बात करते हैं कि Mutual Fund (MF) में कब निवेश करें?</h2><div><br></div><div>तो यह गांठ बांध लीजिए कि Mutual Fund उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो महंगाई को मात देने वाला रिटर्न चाहते हैं। साथ ही लंबी अवधि (10-15 वर्ष या अधिक) के लिए निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ उतार-चढ़ाव (रिस्क) सहन कर सकते हैं। और तो और संपत्ति निर्माण (Wealth Creation) का लक्ष्य रखते हैं। चूंकि इसका महत्वपूर्ण फंडा यह है कि Mutual Fund में "सही समय" पकड़ने की बजाय SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए नियमित निवेश करना अधिक प्रभावी माना जाता है। जो कि बाजार ऊपर हो या नीचे, SIP लागत को औसत कर देती है।</div><div><br></div><div>सवाल है कि किसे चुनें? आपके निवेशक का लक्ष्य क्या है? आपके पास बेहतर विकल्प क्या है? आपकी पूंजी सुरक्षा कितनी है। चूंकि पीपीएफ से टैक्स बचत होती है, रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित फंड रहता है और लंबी अवधि में अधिक रिटर्न रिटर्न मिलता है। जबकि म्युचुअल फंड धन सृजन (Wealth Creation) के लिए अच्छा है, बशर्ते कि आप संतुलित रणनीति अपनाएं।</div><div><br></div><div>जहां तक PPF&nbsp; और Mutual Fund में सबसे असरदार रणनीति की बात है तो वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि निवेशक दोनों का संयोजन रखें। एक ओर सुरक्षा और टैक्स लाभ के लिए PPF अच्छा है तो संपत्ति निर्माण और महंगाई से आगे निकलने के लिए Equity Mutual Fund SIP बेहतर है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति हर महीने ₹10,000 निवेश करना चाहता है, तो वह ₹3,000–₹4,000 PPF में और शेष राशि अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP में लगा सकता है। इससे सुरक्षा और वृद्धि दोनों का लाभ मिल सकता है।</div><div><br></div><div>निष्कर्षतः यह कहा जा&nbsp; सकता है कि यदि आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है तो PPF बेहतर है। और यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा धन बनाना है तो Mutual Fund अधिक उपयुक्त हो सकता है। वहीं, दोनों का संतुलित मिश्रण अधिकांश निवेशकों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी रणनीति साबित हो सकता है। हाँ, यहां पर यह सदैव ध्यान रखें कि Mutual Fund बाजार जोखिमों के अधीन हैं, जबकि PPF अपेक्षाकृत सुरक्षित सरकारी योजना है। लिहाजा, निवेश का निर्णय अपनी आयु, लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समयावधि को ध्यान में रखकर करें।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:15:20 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[FIR कराना हो जाएगा आसान, जब जानेंगे 2026 के कानून]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत FIR 2023 में लागू हुई और यह भारत के क्रिमिनल प्रोसीजर कानूनों में एक बड़ा बदलाव है। यह FIR दर्ज करने का एक साफ और व्यवस्थित तरीका पेश करता है और इसका मकसद कानून लागू करने को तेज़ और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत FIR के नियमों में सेक्शन 173 और 174 में बड़े बदलाव किए गए हैं, जो इस बात पर फोकस करते हैं कि कोर्ट कानूनों को कैसे समझते हैं और सिस्टम गलत इस्तेमाल से कैसे बचाता है। नए एक्ट में ये अपडेट पहले के कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) को भी बेहतर बनाते हैं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div>भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव हो चुके हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) पूरी तरह प्रभावी हैं। इन नए कानूनों का सबसे बड़ा और सीधा लाभ आम जनता को प्राथमिकी यानी एफआईआर (FIR) दर्ज कराने में मिल रहा है। पहले जहाँ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब नए नियमों ने इस प्रक्रिया को बेहद सुगम, पारदर्शी और तकनीक-अनुकूल बना दिया है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years" target="_blank">2 साल तक अकाउंट इस्तेमाल न करने पर क्या होता है? जानिए Inactive Account पर क्या पड़ता है असर</a></h3><div>&nbsp;</div><h2>FIR क्या है?</h2><div>FIR (First Information Report) एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट है जिसे पुलिस किसी कॉग्निजेबल या नॉन-कॉग्निजेबल अपराध के होने की जानकारी मिलने पर तैयार करती है। यह क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का पहला स्टेप है और यह देखता है कि लॉ एनफोर्समेंट अथॉरिटी रिपोर्ट किए गए अपराधों पर तुरंत एक्शन लेती हैं या नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, FIR रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए ज़ीरो FIR, E-FIR और शुरुआती पूछताछ को शामिल करके नए प्रोविज़न लाए गए हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>1. ई-एफआईआर (e-FIR): थाने जाने की मजबूरी खत्म</h2><div>नए कानून की धारा 173 (BNSS) के तहत अब कोई भी नागरिक इलेक्ट्रॉनिक संचार (E-mail या आधिकारिक पोर्टल) के माध्यम से किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की शिकायत दर्ज करा सकता है।</div><div>प्रक्रिया: आपको पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता नहीं है। आप संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट या ऐप पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।</div><div>अनिवार्य शर्त: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत भेजने के बाद शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर संबंधित थाने जाकर उस पर हस्ताक्षर करने होंगे। हस्ताक्षर होने के बाद ही इसे आधिकारिक तौर पर एफआईआर के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था विशेषकर चोरी, मोबाइल गुम होने या संपत्ति से जुड़े मामलों में आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है।</div><div>&nbsp;</div><h2>2. जीरो एफआईआर (Zero FIR) को मिला कानूनी दर्जा</h2><div>अक्सर देखा जाता था कि जब कोई पीड़ित किसी थाने में शिकायत लेकर जाता था तो पुलिस 'क्षेत्राधिकार' (Jurisdiction) का बहाना बनाकर उसे उस इलाके के थाने में जाने को कहती थी जहाँ अपराध हुआ है। इससे कीमती समय बर्बाद होता था और अपराधियों को भागने का मौका मिलता था।</div><div>&nbsp;</div><div>नया नियम: अब कोई भी व्यक्ति भारत के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है, चाहे अपराध उस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुआ हो या नहीं।</div><div>आगे की कार्रवाई: पुलिस तुरंत 'जीरो एफआईआर' दर्ज करेगी और प्रारंभिक जांच शुरू कर देगी। इसके बाद, उस एफआईआर को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने में स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>3. प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) के लिए सख्त समय सीमा</h2><div>झूठे मुकदमों पर लगाम लगाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नए कानून में एक विशेष प्रावधान किया गया है। जिन अपराधों में सजा 3 से 7 वर्ष के बीच है, वहाँ पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करने के बजाय प्राथमिक जांच कर सकती है।</div><div>समय सीमा: पुलिस अधिकारी को ऐसी जांच 14 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।</div><div>निर्णय: जांच में प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर ही एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिससे बेकसूर लोगों को प्रताड़ना से बचाया जा सके।</div><div>&nbsp;</div><h2>4. पीड़ितों के लिए डिजिटल अधिकार और पारदर्शिता</h2><div>नए कानून केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जांच की प्रगति में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं:</div><div>मुफ्त प्रति का अधिकार: एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी एक प्रति (Copy) शिकायतकर्ता या पीड़ित को तुरंत और पूरी तरह मुफ्त (Free of Cost) दी जाएगी।</div><div>90 दिनों में प्रोग्रेस अपडेट: अब पुलिस के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वह एफआईआर दर्ज होने के 90 दिनों के भीतर पीड़ित को जांच की प्रगति (Progress Report) की जानकारी दे। इसे एसएमएस या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी साझा किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे तो क्या करें?</h2><div>यदि कोई थाना प्रभारी (SHO) आपकी वैध शिकायत पर भी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करता है तो नए कानून के तहत आपके पास निम्नलिखित वैधानिक विकल्प हैं:</div><div>पुलिस अधीक्षक (SP) को आवेदन: आप अपनी शिकायत लिखित रूप में या डाक द्वारा संबंधित जिले के एसपी (Superintendent of Police) को भेज सकते हैं। यदि वे संतुष्ट होते हैं तो खुद जांच करेंगे या संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देंगे।</div><div>न्यायिक मजिस्ट्रेट का रुख: यदि वहाँ से भी राहत नहीं मिलती तो आप धारा 175 (BNSS) के तहत सीधे इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मजिस्ट्रेट के पास पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और जांच के आदेश देने का पूर्ण अधिकार है।</div><div>&nbsp;</div><div>नया कानूनी ढांचा पूरी तरह से नागरिक-केंद्रित (Citizen-centric) है। तकनीक के समावेश और जवाबदेही तय होने से अब पुलिस के लिए किसी पीड़ित को टालना आसान नहीं होगा। एक जागरूक नागरिक के रूप में इन नियमों को जानना और समझना ही आपके अधिकारों की सबसे बड़ी सुरक्षा है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:20:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[2 साल तक अकाउंट इस्तेमाल न करने पर क्या होता है? जानिए Inactive Account पर क्या पड़ता है असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हम सभी के पास एक बैंक अकाउंट होता है जो हमने स्कूल या कॉलेज के दौरान खोला था। या जब हमारी सैलरी किसी दूसरी कंपनी के ज़रिए आती थी। या क्योंकि किसी दोस्त ने कहा, “बस खोल लो, कोई नुकसान नहीं है।” लेकिन सालों बाद पासबुक गायब है, ATM कार्ड एक्सपायर हो गया है और आपने उसे कभी छुआ तक नहीं है।</div><div>&nbsp;</div><div>तो क्या होता है जब आप लंबे समय तक अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करते? क्या बैंक इसे बंद कर सकता है? क्या कोई चार्ज जमा हो रहा है? क्या आपका पैसा गायब हो जाएगा?</div><div>&nbsp;</div><div>बैंक अकाउंट तब "इनएक्टिव" होता है जब लगातार 12 महीने तक कस्टमर की तरफ से कोई ट्रांज़ैक्शन—जैसे, डिपॉज़िट, विड्रॉल, फंड ट्रांसफर, या इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन नहीं हुआ हो। अगर यह 24 महीने तक इनएक्टिव रहता है तो अकाउंट को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के नियमों और दूसरे देशों के ऐसे ही नियमों के तहत कानूनी तौर पर "डॉर्मेंट" माना जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future" target="_blank">जरूर जोड़ लें PF अकाउंट में नॉमिनी, वरना भविष्य में हो सकती है दिक्कत</a></h3><div>कई लोग नौकरी बदलने, शहर बदलने या एक से अधिक बैंक खाते होने की वजह से कुछ अकाउंट लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन यदि किसी बैंक खाते में लंबे समय तक कोई लेन-देन नहीं होता तो वह Inactive Account या बाद में Dormant Account की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ता है और ग्राहकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या होता है जब अकाउंट दो साल तक इस्तेमाल नहीं किया जाता है?</h2><div>जब आपका अकाउंट डॉर्मेंट मार्क हो जाता है तो बैंक कई सर्विसेज़ पर रोक लगा देते हैं। हो सकता है कि आप ATM से पैसे न निकाल पाएं, ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन के लिए पैसे न डाल पाएं या अकाउंट के बदले जारी किए गए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल न कर पाएं। सेविंग्स पर इंटरेस्ट अभी भी मिलता रहता है और डिविडेंड या रिफंड अभी भी क्रेडिट किए जा सकते हैं, लेकिन आप अकाउंट को तब तक आज़ादी से इस्तेमाल नहीं कर सकते जब तक इसे फिर से एक्टिवेट न कर दिया जाए। यह मुख्य रूप से नज़रअंदाज़ किए गए या छोड़े गए अकाउंट के खिलाफ फ्रॉड और गलत इस्तेमाल से बचाव के तौर पर किया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>जब यह बंद हो जाता है तो क्या होता है?</h2><div>- आप ऑनलाइन ट्रांसफर, ATM से पैसे नहीं निकाल सकते या डेबिट कार्ड से पेमेंट नहीं कर सकते।</div><div>- चेक बुक इनवैलिड हो सकती हैं।</div><div>- बैंक अकाउंट स्टेटमेंट या SMS अलर्ट भेजना बंद कर सकते हैं।</div><div>- कुछ मामलों में अकाउंट आपके नेट बैंकिंग डैशबोर्ड से हटा दिया जाता है।</div><div>- सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपको सेविंग्स या ऑटो-FD-लिंक्ड अकाउंट जैसे कुछ अकाउंट पर कंपाउंड इंटरेस्ट मिलना बंद हो जाता है।</div><div><br></div><div>एक डॉर्मेंट अकाउंट सिर्फ़ ऑपरेशनल परेशानी से ज़्यादा दिक्कतें पैदा कर सकता है। अकाउंट पर सभी बकाया इंस्ट्रक्शन, ऑटो-पेमेंट या डायरेक्ट डेबिट इनवैलिड हो जाएँगे। अगर डॉर्मेंट अकाउंट में पेमेंट किया जाता है तो सैलरी, टैक्स क्रेडिट या इन्वेस्टमेंट रिटर्न जैसे ज़रूरी क्रेडिट छूटने का भी रिस्क रहता है। साथ ही, अगर ज़्यादा समय तक इसे ठीक नहीं किया जाता है तो अनक्लेम्ड बैलेंस आखिरकार एक सेंट्रल अथॉरिटी, जैसे कि भारत में डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>बंद अकाउंट को फिर से एक्टिवेट कैसे करें?</h2><div>बंद अकाउंट को फिर से एक्टिवेट करना आम तौर पर आसान होता है, लेकिन इसके लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। आपको पहचान और पते के सबूत के साथ ब्रांच जाना होगा और फिर से एक्टिवेट करने के लिए लिखकर रिक्वेस्ट देनी होगी। कुछ बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के ज़रिए भी रीएक्टिवेट करने की सुविधा देते हैं, अगर यह नई KYC जानकारी से जुड़ा हो। अगर यह ऑथेंटिकेट हो जाता है तो बैंक नॉर्मल एक्टिविटी फिर से शुरू कर देगा और आप अपना अकाउंट हमेशा की तरह चला सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>2 साल तक इस्तेमाल न होने पर बैंक अकाउंट Inactive या Dormant हो सकता है, जिससे ट्रांजेक्शन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि सही प्रक्रिया अपनाकर खाते को दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है। बैंकिंग सुविधाओं में बाधा से बचने के लिए अपने खाते का नियमित उपयोग और समय-समय पर निगरानी करना जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:58:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जरूर जोड़ लें PF अकाउंट में नॉमिनी, वरना भविष्य में हो सकती है दिक्कत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आप जानते हैं कि हर साल 40% से ज़्यादा EPF बेनिफिट्स इसलिए बिना क्लेम के रह जाते हैं क्योंकि मेंबर्स ने सही नॉमिनेशन फाइल नहीं किया था? एक EPF मेंबर के तौर पर यह पक्का करना कि आपकी मेहनत की कमाई आपकी गैरमौजूदगी में आपके अपनों तक पहुंचे, सिर्फ़ एक ज़िम्मेदार फाइनेंशियल प्लानिंग ही नहीं है बल्कि यह आपके परिवार के भविष्य के लिए ज़रूरी सुरक्षा भी है। EPFO यूनिफाइड पोर्टल पर ई-नॉमिनेशन की शुरुआत ने इस प्रोसेस में बड़ा बदलाव किया है, फिर भी कई मेंबर्स अभी भी इस ज़रूरी काम को सही तरीके से पूरा करने में मुश्किल महसूस करते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन (EPFO) मेंबर्स को अपने EPF अकाउंट के लिए परिवार के सदस्यों को नॉमिनेट करने की सुविधा देता है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में फंड ट्रांसफर आसानी से हो सके। बाद में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए नॉमिनी की डिटेल्स अपडेट करना बहुत ज़रूरी है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure" target="_blank">शीघ्रतापूर्वक कर्ज चुकाने यानी लोन फोरक्लोजर के बाद भी सिबिल स्कोर घटने का क्या कारण होता है? समझिए</a></h3><h2>एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) क्या है?</h2><div>एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) भारत की मुख्य सोशल सिक्योरिटी एजेंसियों में से एक है, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट के तहत काम करती है। इसे 1951 में एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविज़न्स (EPF&amp;MP) एक्ट के ज़रिए बनाया गया था और यह पूरे भारत में एम्प्लॉइज के लिए प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस स्कीम को रेगुलेट और मैनेज करने के लिए ज़िम्मेदार है। EPFO इंटरनेशनल वर्कर्स के लिए दूसरे देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी आसान बनाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रोविडेंट फंड अकाउंट में नॉमिनी कैसे जोड़ें?</h2><div>एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन अकाउंट होल्डर्स को अपने परिवार के सदस्यों की सोशल सिक्योरिटी और वेल-बीइंग के लिए नॉमिनी जोड़ने की सुविधा देता है। EPFO मेंबर आसानी से EPFO वेबसाइट के ज़रिए अपने PF नॉमिनी ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>नॉमिनेशन से EPF अकाउंट होल्डर के PF कंट्रीब्यूशन, इंटरेस्ट, EDLI और पेंशन के फायदे अकाउंट होल्डर की अचानक मौत होने पर नॉमिनी को ट्रांसफर हो जाते हैं। नॉमिनेशन हो जाने के बाद EPF मेंबर नॉमिनेशन को ऑनलाइन अपडेट या बदल सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>EPF नॉमिनी अपडेट ऑनलाइन कैसे करें, यह जानने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स देखें:</h2><div>- स्टेप 1: EPFO नॉमिनेशन अपडेट के लिए पहला स्टेप है ऑफिशियल EPFO मेंबर ई-सेवा पोर्टल पर जाना, इस लिंक https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/ का इस्तेमाल करना। अपना UAN और पासवर्ड डालें और फिर कैप्चा कोड डालें। अब ‘साइन इन’ पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 2: ‘मैनेज’ टैब पर माउस ले जाएं और ‘ई-नॉमिनेशन’ चुनें। आप यहां अपने अभी के नॉमिनी देख पाएंगे। अगर आपका कोई नॉमिनी नहीं है तो आपको एक जोड़ना होगा।</div><div>- स्टेप 3: अगले पेज पर जाएं और ‘एंटर न्यू नॉमिनेशन’ पर क्लिक करें। आपकी ‘प्रोफाइल’ डिटेल्स पॉप अप हो जाएंगी; ‘प्रोसीड’ पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 4: नया नॉमिनी जोड़ने या अपने अभी के नॉमिनी की डिटेल्स अपडेट करने के लिए ‘फैमिली डिक्लेरेशन’ के अंदर ‘हां’ पर क्लिक करें। (सिर्फ पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता को ही परिवार माना जाता है। अगर मेंबर्स अपने भाई-बहनों को नॉमिनी बनाना चाहते हैं तो उन्हें 'नहीं' बताना होगा)।</div><div>- स्टेप 5: नॉमिनी की डिटेल्स दें - आधार कार्ड नंबर, नाम, जन्मतिथि, जेंडर, रिश्ता, पता, बैंक डिटेल्स, गार्जियन (अगर नॉमिनी माइनर है) और फोटो। आगे बढ़ने के लिए 'Save Family Details' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 6: अगर आप कोई और नॉमिनी जोड़ना चाहते हैं, तो 'Add now' पर क्लिक करें और उनकी डिटेल्स डालें।</div><div>- स्टेप 7: हर नॉमिनी के हिस्से का अमाउंट डालें और फिर 'Save EPF Nomination' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 8: 'Pending Nomination' के अंदर, 'E-Sign' ऑप्शन पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 9: अगर e-Sign रजिस्टर्ड नहीं है तो स्क्रीन पर एक डायलॉग बॉक्स दिखेगा। 'Proceed' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 10: आधार से e-KYC सर्विस डेटा के लिए अपनी मंज़ूरी देने के लिए बॉक्स चुनें।</div><div>- स्टेप 11: अपना आधार कार्ड नंबर डालें और आपके रजिस्टर्ड फ़ोन नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। यह OTP डालें और फिर 'Submit' चुनें।&nbsp;</div><div>- स्टेप 12: OTP वेरिफ़ाई करने के बाद EPFO नए नॉमिनी को रजिस्टर करेगा। नॉमिनेशन हिस्ट्री देखने और नॉमिनी का स्टेटस चेक करने के लिए ‘मैनेज’ टैब के अंदर "ई-नॉमिनेशन" पर क्लिक करें।</div><div>&nbsp;</div><div>नॉमिनेशन हिस्ट्री में नए जोड़े गए या अपडेट किए गए नॉमिनी का स्टेटस ‘नॉमिनेशन सक्सेसफुल’ के तौर पर दिखेगा और पिछले नॉमिनेशन की डिटेल्स भी दिखेंगी। कृपया याद रखें कि सिर्फ़ पहला नॉमिनेशन ही वैलिड है और यह पिछले सभी नॉमिनेशन को ओवरराइड करता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PF अकाउंट में नॉमिनी जोड़ना क्यों जरूरी है?</h2><div>यदि खाताधारक की अचानक मृत्यु हो जाए तो PF खाते में जमा रकम, पेंशन और बीमा लाभ पाने के लिए नॉमिनी की जानकारी बेहद अहम होती है। नॉमिनी दर्ज नहीं होने पर परिवार को क्लेम प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार प्रमाण की जरूरत पड़ सकती है साथ ही साथ PF राशि निकालने में भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>नॉमिनी जोड़ने या अपडेट करने के लिए ज़रूरी चीज़ें</h2><div>नॉमिनेशन प्रोसेस शुरू करने से पहले पक्का कर लें कि आपके पास ये चीज़ें हैं:</div><div>- एक्टिवेटेड UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर)</div><div>- EPFO के साथ लिंक्ड आधार और PAN</div><div>- OTP वेरिफिकेशन के लिए आधार के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर</div><div>- नॉमिनी की फ़ोटो की स्कैन की हुई कॉपी (ऑप्शनल)</div><div>- नॉमिनी का आधार नंबर (पसंदीदा लेकिन ज़रूरी नहीं)</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:51:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[शीघ्रतापूर्वक कर्ज चुकाने यानी लोन फोरक्लोजर के बाद भी सिबिल स्कोर घटने का क्या कारण होता है? समझिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>यदि आपने समय से पहले ही कर्ज यानी लोन चुका दिया, जिसे "लोन फोरक्लोजर/प्री-क्लोजर" कहा जाता है और&nbsp; उसके बाद भी आपका सिबिल स्कोर गिर गया हो, तो यह प्रथम दृष्टया यानी पहली नजर में भले ही अजीब सा लगता है। लेकिन क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम ऐसा होने के पीछे कई तकनीकी पहलुओं पर काम करता है। इसलिए कई बार “जल्दी कर्ज चुकाना” भी अस्थायी रूप से आपके स्कोर घटा देता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>कहा भी जाता है कि कोई भी कार्य न तो समय से पहले करना चाहिए और न ही समय के बाद, बल्कि उसे उचित समय पर ही करना चाहिए। खासकर कर्ज जैसे वित्तीय लेन-देन के मामले में। अब आइए समझते हैं कि आखिर सिबिल स्कोर क्यों गिर जाता है?</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana" target="_blank">पीएम मुद्रा योजना में किस कैटेगरी में कितना लोन मिलता है?</a></h3><div>पहला, पुराना लोन एकाउंट बंद हो जाता है: जब आप लोन फोरक्लोज करते हैं, तो वह अकाउंट “बंद” दिखने लगता है। यदि वह आपका पुराना और अच्छे भुगतान रिकॉर्ड वाला अकाउंट था, तो आपकी “क्रेडिट हिस्ट्री लेंथ” कम मानी जाती है, जिससे स्कोर थोड़ा गिर सकता है।</div><div><br></div><div>दूसरा, क्रेडिट मिक्स प्रभावित होता है: क्रेडिट ब्यूरो यह भी देखते हैं कि आपके पास किस प्रकार के कर्ज हैं: जैसे-सिक्योर्ड लोन (होम/कार), अनसिक्योर्ड लोन (पर्सनल/क्रेडिट कार्ड)। यदि आपने एकमात्र होम लोन या ऑटो लोन बंद कर दिया, तो आपका क्रेडिट मिक्स कमजोर हो सकता है।</div><div><br></div><div>तीसरा, अचानक एक्टिव क्रेडिट कम होना: स्कोरिंग मॉडल यह भी देखते हैं कि आप सक्रिय रूप से क्रेडिट को जिम्मेदारी से संभाल रहे हैं या नहीं। सभी लोन जल्दी बंद होने पर कुछ समय के लिए “एक्टिव क्रेडिट बेहवीयर” कम दिख सकता है।</div><div><br></div><div>चौथा, फोरक्लोजर की रिपोर्टिंग: कुछ मामलों में बैंक “फोरक्लोज्ड” स्टेटस अपडेट करते हैं। हालांकि यह डिफॉल्ट नहीं होता, लेकिन कुछ एल्गोरिद्म इसे सामान्य ईएमआई कम्पलीशन से अलग तरीके से पढ़ते हैं।</div><div><br></div><div>पांचवां, बैंक द्वारा रिपोर्टिंग डिले या एरर कई बार:&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लोन बंद हो गया लेकिन सिबिल में “आउटस्टैंडिंग” दिखता रहता है या “सेटल्ड” अपडेट हो जाता है। "सेटल्ड" शब्द स्कोर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसका मतलब होता है कि पूरा भुगतान नहीं हुआ।</span></div><div><br></div><div>छठा, “क्लोज्ड” और “सेटल्ड” में बड़ा अंतर: चूंकि ये दोनों शब्द लोन भुगतान की प्रवृति के द्योतक होते हैं जो&nbsp;&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनकी स्थिति, अर्थ और स्कोर पर असर डालता है। यहां क्लोज्ड का मतलब होता है कि पूरा लोन सही तरीके से चुका दिया गया है जो सकारात्मक स्थिति है। जबकि सेटल्ड का मतलब होता है कि बैंक से समझौता कर कम रकम चुकाई गई है जो नकारात्मक स्थिति का द्योतक होता है। इसलिए फोरक्लोजर के बाद अपनी सिबिल रिपोर्ट जरूर जांचें।</span></div><div><br></div><div>सातवां, आगे क्या करना चाहिए?: बैंक से फोरक्लोजर लेटर संभालकर रखें। नो ड्यूज सर्टिफिकेट, लोन क्लोज़र लेटर, एनओसी जरूर लें। वहीं सिबिल ऑफिसियल वेबसाइट पर सिबिल रिपोर्ट चेक करें और देखें कि लोन क्लोज्ड दिख रहा है या नहीं, कोई ओवरड्यू तो नहीं दिख रहा है, या फिर "सेटल्ड" तो नहीं लिखा हुआ है। वहीं कोई गलती होने पर तुरंत डिस्प्यूट रेज करें, यानी कि यदि रिपोर्ट गलत है, तो तत्क्षण डिस्प्यूट दर्ज करें।</div><div><br></div><div>आठवां, फोरक्लोजर के बाद क्रेडिट कार्ड का उपयोग संतुलित रखें: क्रेडिट कार्ड में क्रेडिट यूटिलाइजेशन कम रखें। साथ ही क्रेडिट कार्ड की ईएमआई/बिल समय पर भरें तो स्कोर वापस सुधर जाता है। सवाल है कि आखिर स्कोर कितने समय में सुधरता है? तो यह जान लीजिए कि आमतौर पर 30–90 दिनों में सुधार शुरू हो जाता है। यदि बाकी रीपेमेंट हिस्ट्री अच्छी है, तो स्कोर फिर बढ़ने लगता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>सबसे अंतिम और महत्वपूर्ण बात यह है कि लोन जल्दी चुकाना वित्तीय अनुशासन का संकेत है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकतर मामलों में सिबिल स्कोर की गिरावट अस्थायी होती है, बशर्ते आपकी रिपोर्ट में कोई तकनीकी गलती या “सेटल्ड” एंट्री न हो।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:13:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पीएम मुद्रा योजना में किस कैटेगरी में कितना लोन मिलता है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) जैसी स्कीम की वजह से भारत में छोटा बिज़नेस शुरू करना बहुत आसान हो गया है। चाहे आप छोटी दुकान खोलना चाहते हों, डेयरी फार्म चलाना चाहते हों, टेलरिंग यूनिट शुरू करना चाहते हों या अपने मौजूदा बिज़नेस को बढ़ाना चाहते हों, आप बिना किसी कोलैटरल के ₹20 लाख तक का लोन ले सकते हैं। केंद्र सरकार ने यह स्कीम 8 अप्रैल 2015 को शुरू की थी ताकि यह पक्का किया जा सके कि छोटे एंटरप्रेन्योर, खासकर महिलाओं और पहली बार बिज़नेस शुरू करने वालों को साहूकारों पर निर्भर न रहना पड़े। अकेले पहली बार एंटरप्रेन्योर्स को 12.15 करोड़ से ज़्यादा लोन देने के साथ PM मुद्रा लोन स्कीम भारत सरकार की एक सफल फ्लैगशिप स्कीम साबित हुई है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना क्या है?</h2><div>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई थी। यह स्कीम नॉन-कॉर्पोरेट, नॉन-फार्म माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को फाइनेंशियल मदद देती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment" target="_blank">आयुष्मान कार्ड से आप अपने शहर के किस अस्पताल में करवा सकते हैं मुफ्त इलाज? यहां जानें</a></h3><div>Rs.20 लाख तक के लोन देती है (उन एंटरप्रेन्योर्स के लिए जिन्होंने ‘तरुण’ कैटेगरी के तहत लोन सक्सेसफुली चुका दिया है)। लोन रीजनल रूरल बैंक (RRBs), कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, MFIs, और NBFCs देते हैं। एप्लीकेंट सीधे पार्टिसिपेटिंग लेंडर्स से कॉन्टैक्ट कर सकते हैं या उद्यमीमित्र पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>मुद्रा लोन के मुख्य उद्देश्य</h2><div>मुद्रा लोन के मुख्य उद्देश्य इस पकार&nbsp; हैं:</div><div>- अवधि और ब्याज दरें: बैंक के पॉलिसी फैसलों पर निर्भर करता है</div><div>- लोन सुविधा : कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट और टर्म लोन</div><div>- लोन अमाउंट: 10 लाख रुपये तक (बजट 2024 में 20 लाख रुपये तक का प्रस्ताव)</div><div>- प्रोसेसिंग फीस : शिशु कैटेगरी के लिए (50,000 रुपये तक के लोन) – कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं&nbsp;</div><div>- किशोर और तरुण कैटेगरी के लिए – फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पर निर्भर करता है</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन स्कीम के तहत लोन कैटेगरी</h2><div>PM मुद्रा लोन स्कीम आपके बिज़नेस की ज़रूरत और उसके स्टेज के आधार पर लोन को चार कैटेगरी में बांटती है। इस तरह, पहली बार स्ट्रीट वेंडर और एक अच्छी तरह से जमी हुई छोटी फैक्ट्री के मालिक, दोनों को एक सही ऑप्शन मिल सकता है।</div><div><br></div><div><b>1. शिशु- </b>₹50,000 तक के लोन। यह पहली बार एंटरप्रेन्योर और नए माइक्रो बिज़नेस के लिए बनाया गया है जो अभी शुरू हो रहे हैं। इस कैटेगरी के लिए आपको डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं है और डॉक्यूमेंटेशन बहुत कम है। शिशु लोन 7 से 10 वर्किंग डेज़ में अप्रूव हो सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>2. किशोर-</b> ₹50,000 से ₹5 लाख तक के लोन। यह उन बिज़नेस के लिए है जो पहले ही शुरू हो चुके हैं और उन्हें बढ़ाने या अपने ऑपरेशन को स्टेबल करने के लिए फंड की ज़रूरत है। इस स्टेज पर एक बेसिक बिज़नेस प्लान की ज़रूरत हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>3. तरुण- </b>₹5 लाख से ₹10 लाख तक के लोन। यह कैटेगरी उन अच्छी तरह से जमे-जमाए माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ के लिए है जो अपना बिज़नेस बढ़ाना चाहते हैं, इक्विपमेंट खरीदना चाहते हैं या वर्किंग कैपिटल बढ़ाना चाहते हैं। आमतौर पर ITR और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की ज़रूरत होती है।</div><div><br></div><div><b>4. तरुण प्लस-</b> ₹10 लाख से ₹20 लाख तक के लोन। यह कैटेगरी यूनियन बजट 2024-25 में शुरू की गई थी और यह सिर्फ़ उन एंटरप्रेन्योर के लिए है जिन्होंने पहले ही तरुण लोन सक्सेसफुली चुका दिया है। यह अच्छे रीपेमेंट डिसिप्लिन को रिवॉर्ड देता है और बढ़ते बिज़नेस को ज़्यादा क्रेडिट पाने में मदद करता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन 2026 के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया</h2><div>ज़्यादातर भारतीय नागरिक जो छोटा नॉन-फार्म बिज़नेस चला रहे हैं या चलाने की प्लानिंग कर रहे हैं, वे अप्लाई कर सकते हैं। अप्लाई करने से पहले आपको ये बातें चेक करनी होंगी:</div><div>- नागरिकता और उम्र: आपकी उम्र 18 से 65 साल के बीच होनी चाहिए।</div><div>- बिज़नेस टाइप: आपका बिज़नेस मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विसेज़ में होना चाहिए। खेती से जुड़ी एक्टिविटीज़ जैसे पोल्ट्री, डेयरी, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और फ़ूड प्रोसेसिंग भी कवर होती हैं, लेकिन डायरेक्ट क्रॉप लोन एलिजिबल नहीं हैं।</div><div>- बिज़नेस स्ट्रक्चर: लोग, मालिक, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियाँ और सेल्फ-एम्प्लॉयड प्रोफेशनल सभी अप्लाई कर सकते हैं।</div><div>- कोई लोन डिफॉल्ट नहीं: आप किसी भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के डिफॉल्टर नहीं होने चाहिए।</div><div>- तरुण प्लस कंडीशन: सिर्फ़ पिछले तरुण बॉरोअर जिनका रीपेमेंट रिकॉर्ड साफ हो, वे ही तरुण प्लस कैटेगरी के तहत ₹10 लाख से ज़्यादा के लोन के लिए एलिजिबल हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स</h2><div>लोन कैटेगरी के हिसाब से ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स थोड़े अलग हो सकते हैं। हालाँकि, PM मुद्रा लोन के लिए ज़रूरी बेसिक डॉक्यूमेंट्स इस तरह हैं:</div><div>- आइडेंटिटी प्रूफ: आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस (कोई भी एक)।</div><div>- एड्रेस प्रूफ: आधार कार्ड, हाल का बिजली या टेलीफ़ोन बिल (2 महीने से ज़्यादा पुराना नहीं), या पासपोर्ट।</div><div>- बिज़नेस प्रूफ: GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, ट्रेड लाइसेंस या संबंधित लाइसेंस की कॉपी।</div><div>- बैंक स्टेटमेंट: आपके मौजूदा बैंक का पिछले 6 महीने का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट।</div><div>- फ़ोटो: एप्लीकेंट के 2 हाल के पासपोर्ट-साइज़ फ़ोटो।</div><div>- SC/ST/OBC सर्टिफ़िकेट (अगर लागू हो, क्योंकि इससे आपको खास ट्रीटमेंट मिल सकता है)।</div><div>&nbsp;</div><h2>मुद्रा लोन के फ़ायदे</h2><div>मुद्रा लोन के खास फ़ायदे नीचे दिए गए हैं:</div><div>- कोई कोलैटरल ज़रूरी नहीं: सिक्योरिटी के तौर पर कोई एसेट गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि MUDRA लोन अनसिक्योर्ड होते हैं।</div><div>- फाइनेंस तक आसान पहुँच: कम से कम डॉक्यूमेंटेशन और आसान प्रोसेस से फंडिंग ज़्यादा आसानी से मिल जाती है।</div><div>- कम इंटरेस्ट रेट: ट्रेडिशनल बिज़नेस लोन की तुलना में, इंटरेस्ट रेट आम तौर पर ज़्यादा अफ़ोर्डेबल होते हैं।</div><div>- कई लोन कैटेगरी: बिज़नेस स्टेज और फंडिंग की ज़रूरतों के आधार पर, ऑप्शन में शिशु, किशोर, तरुण और तरुणप्लस शामिल हैं।</div><div>- फ्लेक्सिबल लोन ऑप्शन: वर्किंग कैपिटल लोन, टर्म लोन, ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी और दूसरे फाइनेंसिंग सॉल्यूशन देता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:11:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[आयुष्मान कार्ड से आप अपने शहर के किस अस्पताल में करवा सकते हैं मुफ्त इलाज? यहां जानें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) भारत सरकार की एक खास हेल्थकेयर पहल है। यह हर परिवार को सेकेंडरी और टर्शियरी हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए हर साल ₹5 लाख तक देती है, जिससे 50 करोड़ से ज़्यादा लोगों (भारत की आबादी का लगभग 40%) को फ़ायदा होता है। इस स्कीम में लगभग 1,949 मेडिकल प्रोसीजर शामिल हैं, जिसमें हार्ट सर्जरी, कैंसर केयर और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे ज़रूरी इलाज शामिल हैं, ये सभी पैनल वाले हॉस्पिटल में कैशलेस तरीके से किए जाते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>आयुष्मान कार्ड क्या है?</h2><div>आयुष्मान कार्ड भारत सरकार की एक हेल्थ स्कीम का हिस्सा है जो गरीब और ज़रूरतमंद परिवारों को हर साल ₹5 लाख तक का मुफ़्त मेडिकल इलाज दिलाने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी भी लिस्टेड हॉस्पिटल में अपना आयुष्मान कार्ड और अपना आधार कार्ड दिखाना होगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm" target="_blank">मखाना उत्‍पादन के ल‍िए 71 हजार तो खेत के ल‍िए 2 लाख रुपये दे रही सरकार</a></h3><div>आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश भर में लाखों लोग हेल्थ बेनिफिट्स ले रहे हैं। इस स्कीम का मुख्य मकसद गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को गंभीर बीमारियों का फ्री इलाज देना है। इस स्कीम के तहत, आयुष्मान कार्ड होल्डर्स बिना कोई फीस दिए सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट हॉस्पिटल में हॉस्पिटल का खर्च उठा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM आयुष्मान योजना के फ़ायदे</h2><div>आपके शहर के ज़्यादातर सरकारी अस्पताल आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़े हुए हैं। इन बड़े अस्पतालों में ज़िला अस्पताल, राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज और बड़े शहरों के अस्पताल शामिल हैं। कार्ड होल्डर्स को इन अस्पतालों में मुफ़्त इलाज, सर्जरी, मेडिकल टेस्ट और दवाएँ मिलती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>इस स्कीम का मकसद यह पक्का करना है कि पैसे की कमी की वजह से कोई भी मरीज़ इलाज से वंचित न रहे। इस स्कीम में सरकारी अस्पतालों में कई तरह के इलाज और सर्जरी शामिल हैं, जिसमें कार्डियक सर्जरी, किडनी की समस्याएँ, कैंसर का इलाज और जनरल सर्जरी शामिल हैं। ये सभी हेल्थकेयर सर्विस उपलब्ध हैं।</div><h2>&nbsp;<br>कैसे चेक करें कि कौन से हॉस्पिटल पैनल में हैं?</h2><div>अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके शहर या इलाके के कौन से हॉस्पिटल आयुष्मान कार्ड से इलाज करते हैं तो सबसे आसान तरीका ऑनलाइन है। सबसे पहले आयुष्मान भारत स्कीम के ऑफिशियल पोर्टल https://hospitals.pmjay.gov.in/Search/ पर जाएं और Find Hospitals सेक्शन पर क्लिक करें। यहां आपको अपना राज्य, जिला, शहर या पिनकोड डालने का ऑप्शन मिलेगा।</div><div>&nbsp;</div><div>आप सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटल भी चुन सकते हैं। अपनी जानकारी डालने के बाद Search पर क्लिक करें, जिससे आपके इलाके के सभी पैनल में शामिल हॉस्पिटल की लिस्ट दिखेगी। इस लिस्ट में हर हॉस्पिटल का नाम, पता, कॉन्टैक्ट नंबर और उपलब्ध सर्विस शामिल हैं। किसी भी हॉस्पिटल की पूरी जानकारी और पैनल में शामिल इलाज पैकेज देखने के लिए उस पर क्लिक करें। मदद के लिए सीधे हॉस्पिटल से संपर्क करें या PMJAY हेल्पलाइन 14555 या 1800-11-4477 पर कॉल करें।</div><div>&nbsp;</div><h2>PMJAY एलिजिबिलिटी</h2><div>यह वेरिफ़ाई करने के लिए कि आप आयुष्मान कार्ड के लिए एलिजिबल हैं या नहीं:</div><div>- सबसे पहले आप beneficiary.nha.gov.in पर जाएं।</div><div>- अपना स्टेटस चेक करने के लिए अपना मोबाइल नंबर या आधार नंबर डालें।</div><div>- मदद के लिए PMJAY हेल्पलाइन से संपर्क करें या पास के किसी पैनल वाले हॉस्पिटल में जाएं।</div><div>- एलिजिबलिटी ग्रामीण और शहरी परिवारों के लिए सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) 2011 पर आधारित है।</div><div>&nbsp;</div><div>आयुष्मान कार्ड जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत है। सही जानकारी होने पर आप अपने शहर के सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>इलाज से पहले अस्पताल की एम्पैनल्ड सूची जरूर जांचें और सभी दस्तावेज साथ रखें, ताकि बिना परेशानी कैशलेस इलाज मिल सके।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 19:02:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मखाना उत्‍पादन के ल‍िए 71 हजार तो खेत के ल‍िए 2 लाख रुपये दे रही सरकार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बिहार सरकार ने नेशनल मखाना बोर्ड के तहत फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए मखाना डेवलपमेंट स्कीम शुरू की है, जिसमें खेती से लेकर एक्सपोर्ट तक सप्लाई चेन में सब्सिडी दी जाएगी। इस स्कीम का मकसद मखाना, जिसे फॉक्स नट्स भी कहते हैं, के प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ाकर किसानों की इनकम बढ़ाना है। बिहार भारत में मखाना का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। इस पहल से विशेष रूप से कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल जैसे क्षेत्रों के किसानों को लाभ होगा।</div><div><br></div><div>अधिकारियों ने कहा कि मखाना की खेती करने वाले किसान मॉडर्न तरीके अपनाने और प्रोडक्शन बेहतर करने के लिए 71,600 रुपये तक की मदद के हकदार होंगे। राज्य में मखाना की खेती और प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी और अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/these-3-small-mistakes-are-the-reason-why-most-insurance-claims-are-rejected" target="_blank">इन 3 छोटी गलतियों की वजह से ज्यादातर इंश्योरेंस क्लेम होते हैं रिजेक्ट, यहां जानें डिटेल्स</a></h3><h2>किसानों और यूनिट्स के लिए कितने तक सब्सिडी?</h2><div>इस स्कीम के तहत सरकार ज़रूरी फाइनेंशियल मदद दे रही है:</div><div>- प्रति हेक्टेयर खेती की लागत: ₹97,000</div><div>- सब्सिडी: 75% तक यानि ₹71,600 प्रति हेक्टेयर</div><div>- खेत/तालाब विकास और संरचना तैयार करने के लिए करीब ₹2 लाख तक का अनुदान दिया जा रहा है</div><div>- यह सहायता पात्र किसानों को योजना की शर्तों के अनुसार दी जाती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए सब्सिडी:</h2><div>- माइक्रो यूनिट्स: ₹5 लाख</div><div>- मीडियम यूनिट्स: ₹1.5 करोड़</div><div>- बड़ी यूनिट्स: ₹3.5 करोड़</div><div>- इसके अलावा, किसानों को खेत लेवल पर प्रोडक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स के लिए ₹2 लाख की मदद मिलेगी&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>किन किसानों को मिलेगा लाभ?</h2><div>- बिहार के पंजीकृत किसान</div><div>- मखाना की खेती करने वाले या शुरू करने के इच्छुक किसान</div><div>- तालाब आधारित खेती करने वाले किसान</div><div>- किसान समूह और एफपीओ (FPO) भी पात्र हो सकते हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>किन कामों के लिए मिलती है सहायता?</h2><div>- मखाना उत्पादन : बीज और खेती की लागत और आधुनिक तकनीक अपनाने में सहायता</div><div>- खेत/तालाब विकास: तालाब की खुदाई या मरम्मत, खेती के लिए बुनियादी ढांचा तथा जल प्रबंधन व्यवस्था</div><div>- प्रोसेसिंग और भंडारण : कुछ योजनाओं में प्रोसेसिंग यूनिट और स्टोरेज के लिए भी सहायता उपलब्ध होती है</div><div>&nbsp;</div><h2>एलिजिबिलिटी और एप्लीकेशन प्रोसेस</h2><div>स्कीम के लिए अप्लाई करने के लिए किसानों को ये करना होगा:</div><div>- बिहार का रहने वाला हो</div><div>- आधार कार्ड हो</div><div>- बैंक अकाउंट हो</div><div>- ज़मीन के मालिकाना हक के डॉक्यूमेंट्स हों</div><div>&nbsp;</div><h2>एप्लीकेशन इन तरीकों से जमा किए जा सकते हैं:</h2><div>- सबसे पास का कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)</div><div>- बिहार एग्रीकल्चर ऐप</div><div>- ऑफिशियल पोर्टल: horticulture.bihar.gov.in</div><div>&nbsp;</div><h2>उद्देश्य&nbsp;</h2><div>इस स्कीम को इसलिए बनाया गया है:</div><div>- मखाना का प्रोडक्शन बढ़ाना</div><div>- बेहतर बीज और खेती की मॉडर्न तकनीक देना</div><div>- पारंपरिक औजारों की जगह एडवांस्ड इक्विपमेंट लाना</div><div>- प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को मज़बूत करना</div><div>- बेहतर प्रोडक्टिविटी और कीमत तय करके किसानों की इनकम दोगुनी करना</div><div>&nbsp;</div><div>मखाना डेवलपमेंट स्कीम बिहार की पारंपरिक खेती को एक मॉडर्न, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्री में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अच्छी सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और ग्लोबल मार्केटिंग पहल के साथ, इस स्कीम से किसानों की इनकम में काफी बढ़ोतरी होने और ग्लोबल मखाना मार्केट में बिहार की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।</div><div>&nbsp;</div><div>मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है। उत्पादन से लेकर खेत और तालाब विकास तक मिलने वाली सब्सिडी खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद करेगी।</div><div>&nbsp;</div><div>जो किसान मखाना की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना आर्थिक सहायता के साथ आधुनिक खेती अपनाने का अच्छा मौका है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:14:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पर्सनल लोन अप्रूवल पाने के लिए आवेदन को मजबूत बनाने के आसान कदम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/simple-steps-to-strengthen-your-personal-loan-application-for-approval]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वित्तीय आपातकाल कभी चेतावनी देकर नहीं आते। चाहे अचानक आया मेडिकल बिल हो या घर की तत्काल मरम्मत, आपको अक्सर तुरंत पैसों की ज़रूरत पड़ती है। जबकि कई प्लेटफ़ॉर्म तुरंत लोन प्रदान करते हैं, लेकिन उसका “approved” स्टेटस मिलना पूरी तरह आपकी प्रोफ़ाइल पर निर्भर करता है।</div><div><br></div><div>ऋणदाता अपना पैसा देने से पहले आपकी बैंकिंग और क्रेडिट हिस्ट्री में कुछ विशेष पैटर्न देखते हैं। यदि आप उनके मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो आपका आवेदन लगातार रिजेक्शन के चक्र में फँस जाता है। इस पोस्ट में आपका स्वागत है, जो बताती है कि आप अपने आवेदन को वेरिफिकेशन में आसानी से कैसे पास करवा सकते हैं।</div><div><br></div><h2>पर्सनल लोन पात्रता को जल्दी सुधारने के टिप्स</h2><div><br></div><div>यहाँ आपके पर्सनल लोन की पात्रता सुधारने के तरीके दिए गए हैं –</div><div><br></div><h2>आज ही अपनी क्रेडिट रिकॉर्ड ठीक करें</h2><div>जैसे ही आप अपना PAN दर्ज करते हैं, <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.lendingplate" target="_blank">पर्सनल लोन ऐप</a> सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर निकालती है। इसे अपनी वित्तीय प्रतिष्ठा समझिए। 750 से ऊपर का स्कोर आपको सबसे अच्छे टर्म्स दिलाता है। यदि आपका स्कोर इससे थोड़ा कम है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आप छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाकर इस स्कोर को बढ़ा सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal" target="_blank">क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?</a></h3><div>क्या आपके क्रेडिट कार्ड पर ₹2000 का बकाया है? उसे अभी चुका दें। ऐसे छोटे क्लोज़र कुछ ही हफ्तों में आपकी रिपोर्ट पर सकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं। साथ ही, गलतियों की जाँच करें। कई बार महीनों पहले बंद किया गया लोन अभी भी “active” दिखता है। उसे सही करवाने से आपकी पात्रता तेजी से बढ़ सकती है।</div><div><br></div><h2>अपनी आय और कर्ज़ के बीच संतुलन रखें</h2><div>ऋणदाता एक फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं जिसे Debt-to-Income Ratio कहा जाता है। वे देखते हैं कि आपकी ₹20,000+ सैलरी का कितना हिस्सा पहले से अन्य EMI में जा रहा है। यदि आपकी आय का 60% पहले से ही खर्च हो रहा है, तो नया ऋणदाता आपको उच्च जोखिम वाला मानेगा। उन्हें डर रहता है कि एक और बिल जुड़ने पर आप डिफॉल्ट कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>ऐसे में कोशिश करें कि कोई छोटा लोन जो खत्म होने वाला हो, उसे बंद कर दें। यहाँ तक कि फोन या फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन को बंद करने से भी आपकी “repayment capacity” क्रेडिट एल्गोरिदम की नजर में बढ़ जाती है।</div><div><br></div><h2>हर आय स्रोत का प्रमाण दें</h2><div>अधिकतर लोग केवल अपनी बेसिक सैलरी स्लिप दिखाते हैं। यह एक बड़ी गलती है। यदि आपको परफॉर्मेंस बोनस, ट्रैवल अलाउंस या किराये से अतिरिक्त आय मिलती है, तो उसका भी दस्तावेज़ दें। अपनी ITR या Form 16 के जरिए अपनी कुल कमाई दिखाएँ।</div><div><br></div><div>जब ऋणदाता देखते हैं कि आपके पास कई आय स्रोत हैं, तो उन्हें आपके इंस्टेंट कैश लोन चुकाने की क्षमता पर अधिक भरोसा होता है। इससे ₹2.5 लाख की ऊपरी सीमा तक लोन मिलना आसान हो जाता है।</div><div><br></div><h2>अपने बैंक स्टेटमेंट को ठीक करें</h2><div>आपका बैंक स्टेटमेंट आपकी जीवनशैली की झलक देता है। ऋणदाता पिछले तीन महीनों में खासकर “return” मार्क्स देखते हैं। कम बैलेंस के कारण एक भी चेक बाउंस या ECS फेल होने से आपकी संभावना तुरंत खत्म हो सकती है। इससे ऋणदाता को लगता है कि आप अव्यवस्थित हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं।</div><div><br></div><div>आवेदन से पहले के 90 दिनों में सुनिश्चित करें कि हर ऑटो-डेबिट पहली बार में सफल हो। साथ ही, बार-बार “low balance” अलर्ट से बचें। खाते में थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखना आपकी वित्तीय परिपक्वता दिखाता है।</div><div><br></div><h2>अपने डिजिटल दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार करें</h2><div>तकनीकी रिजेक्शन सबसे ज्यादा परेशान करने वाले होते हैं क्योंकि उनका आपके पैसों से कोई संबंध नहीं होता। यदि आपके आधार पर लिखा नाम PAN या बैंक अकाउंट से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम उसे फ्लैग कर देता है। यह समस्या अक्सर मिडिल नेम या स्पेलिंग की गलती के कारण होती है।</div><div><br></div><div>सुनिश्चित करें कि आपके KYC दस्तावेज़ एक जैसे हों। ऐप इस्तेमाल करते समय दस्तावेज़ों की साफ फोटो लें। यदि टेक्स्ट धुंधला होगा या कोने कटे होंगे, तो ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन उसे रिजेक्ट कर देगा। अपने फोन में पिछली तीन सैलरी स्लिप की डिजिटल PDF तैयार रखना समय बचाता है।</div><div><br></div><h2>बहुत ज्यादा आवेदन करने से बचें</h2><div>जब आपको मेडिकल इमरजेंसी लोन चाहिए होता है, तो एक साथ दस अलग-अलग ऋणदाताओं के पास आवेदन करने का मन करता है। ऐसा मत करें। हर आवेदन के साथ ऋणदाता आपकी क्रेडिट फाइल पर “hard enquiry” करते हैं।</div><div>कम समय में बहुत अधिक enquiry आपको “credit hungry” दिखाती है। इससे लगता है कि आप वित्तीय परेशानी में हैं। इसलिए पहले एक या दो ऐसे ऋणदाता चुनें जो आपकी प्रोफ़ाइल के अनुसार हों, फिर आवेदन करें। यदि दूसरी जगह आवेदन करना ही पड़े, तो कुछ महीनों का अंतर रखें।</div><div><br></div><h2>डिजिटल लेंडिंग चैनलों की गति</h2><div>पारंपरिक बैंकिंग में कागज़ों का ढेर और शाखा के कई चक्कर शामिल होते हैं। आधुनिक NBFC ने सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है। अब आप दिल्ली या भारत के किसी भी हिस्से से अपने घर में बैठकर आवेदन कर सकते हैं। 100% डिजिटल प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी गति है।</div><div><br></div><div>क्योंकि सिस्टम आपके डेटा को एल्गोरिदम से जांचता है, इसलिए आपको कुछ ही मिनटों में निर्णय मिल जाता है। इसमें कोई मानवीय पक्षपात नहीं होता। यदि आपका डेटा साफ है, तो लगभग 30 मिनट में पैसा आपके खाते में पहुँच सकता है। यही कारण है कि अपनी डिजिटल “financial footprint” को साफ रखना इतना महत्वपूर्ण है।</div><div><br></div><h2>वे गलतियाँ जो आपके फंड को रोक सकती हैं</h2><div><b>- कैश में सैलरी –</b> ऋणदाता नकद आय को सत्यापित नहीं कर सकते। यदि आपका नियोक्ता हाथ में वेतन देता है, तो जल्दी लोन मिलना लगभग असंभव हो जाता है। सुनिश्चित करें कि सैलरी बैंक ट्रांसफर से मिले।</div><div><b>- बार-बार नौकरी बदलना – </b>यदि आप हर तीन महीने में नौकरी बदलते हैं, तो आप अस्थिर दिखते हैं। ऋणदाता कम से कम 6 महीने की निरंतर नौकरी पसंद करते हैं।</div><div><b>- जॉइंट अकाउंट से आवेदन –</b> लोन डिस्बर्सल के लिए आमतौर पर आपके नाम का प्राइमरी सेविंग अकाउंट चाहिए होता है। साझा अकाउंट वेरिफिकेशन फेल कर सकता है।</div><div><b>- गलत जानकारी देना –</b> पुराना ऑफिस पता या आधिकारिक ईमेल की जगह पर्सनल ईमेल देने से बैकग्राउंड चेक में देरी हो सकती है।</div><div><br></div><h2>अपनी उधार लेने की क्षमता बनाना</h2><div>पात्रता सुधारना एक बार का काम नहीं है। यह ऐसी प्रोफ़ाइल बनाने के बारे में है जो हमेशा “loan-ready” रहे। अपने कर्ज़ कम रखकर और दस्तावेज़ अपडेट रखकर आप ऋणदाताओं के पसंदीदा ग्राहक बन जाते हैं। शुरुआत में आपको छोटा अमाउंट मिल सकता है, लेकिन समय पर भुगतान करने से आपकी लिमिट बढ़ती जाती है।</div><div><br></div><div>इसी तरह आप कम तनाव के साथ पर्सनल लोन सुरक्षित कर सकते हैं। हमेशा प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर (आमतौर पर सालाना 12% से 36%) की जाँच करें। जानकारी रखने वाला उधारकर्ता ही योग्य उधारकर्ता होता है।</div><div><br></div><h2>अंतिम विचार</h2><div>लोन की पात्रता पूरी करना स्थिरता दिखाने के बारे में है। यदि आपकी आय कम से कम ₹20,000 है, आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपके दस्तावेज़ व्यवस्थित हैं, तो आप आधा रास्ता पहले ही तय कर चुके हैं। कई जगह आवेदन करने के जाल से बचें और साफ बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने पर ध्यान दें।</div><div><br></div><div><a href="https://lendingplate.com/personal-loan" target="_blank">डिजिटल लेंडिंग</a> की दुनिया गति पर आधारित है, इसलिए आप जितने अधिक व्यवस्थित होंगे, पैसा उतनी जल्दी आपके खाते में आएगा। चाहे शादी का खर्च हो, मेडिकल बिल हो या कोई उपभोक्ता खरीदारी, आपकी वित्तीय अनुशासन ही वह चीज़ है जो आपके लिए दरवाज़ा खोलती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 19:56:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/simple-steps-to-strengthen-your-personal-loan-application-for-approval</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[इन 3 छोटी गलतियों की वजह से ज्यादातर इंश्योरेंस क्लेम होते हैं रिजेक्ट, यहां जानें डिटेल्स]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/these-3-small-mistakes-are-the-reason-why-most-insurance-claims-are-rejected]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इंश्योरेंस का मकसद मन की शांति देना है, जब ज़िंदगी में अचानक कोई मुश्किल आती है - चाहे वह कार एक्सीडेंट हो, मेडिकल इमरजेंसी हो, घर में आग लग जाए, या कोई ट्रिप खराब हो जाए। लेकिन, अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम अचानक रिजेक्ट हो जाए तो यह शांति खत्म हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div>क्लेम रिजेक्ट होना कोई नई बात नहीं है। हर साल हज़ारों क्लेम ऐसे कारणों से रिजेक्ट हो जाते हैं जिन्हें अक्सर रोका जा सकता है। यह आर्टिकल इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के सबसे आम कारणों के बारे में बताता है, बताता है कि क्लेम प्रोसेस कैसे काम करता है और इन महंगी गलतियों से बचने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स देता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal" target="_blank">क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?</a></h3><h2>इंश्योरेंस क्लेम क्या है?</h2><div>इंश्योरेंस क्लेम एक फॉर्मल रिक्वेस्ट है जो पॉलिसी होल्डर अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर हुए नुकसान या डैमेज के लिए कम्पेनसेशन या कवरेज के लिए इंश्योरेंस कंपनी से करता है। यह इंश्योरेंस कंपनी से फाइनेंशियल मदद मांगने का आपका तरीका है ताकि आप किसी अनचाही घटना से उबर सकें। इंश्योरेंस क्लेम कई वजहों से फाइल किए जा सकते हैं, जैसे कार एक्सीडेंट, प्रॉपर्टी का नुकसान, मेडिकल खर्च, या जान का नुकसान भी।</div><div>&nbsp;</div><h2>इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस को समझना</h2><div>इससे पहले कि हम जानें कि क्लेम क्यों रिजेक्ट होते हैं, यह समझना ज़रूरी है कि यह प्रोसेस आम तौर पर कैसे काम करता है:</div><div>- घटना होना – कुछ ऐसा होना जो आपकी पॉलिसी में कवर होता है (जैसे, कार एक्सीडेंट, बीमारी, चोरी)।</div><div>- नोटिफ़िकेशन – आप एक तय टाइमफ़्रेम के अंदर अपनी इंश्योरेंस कंपनी को इन्फ़ॉर्म करते हैं।</div><div>- डॉक्यूमेंटेशन – आप पुलिस रिपोर्ट, रसीदें, मेडिकल रिपोर्ट वगैरह जैसे प्रूफ़ देते हैं।</div><div>- असेसमेंट – इंश्योरेंस कंपनी क्लेम की जांच और मूल्यांकन करती है।</div><div>- फ़ैसला – नतीजों और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर क्लेम को मंज़ूरी दी जाती है या नामंज़ूर किया जाता है।</div><div>हालांकि यह प्रोसेस सीधा लगता है, लेकिन एक भी गलती आपके पूरे क्लेम को पटरी से उतार सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्ट होने की 3 सबसे आम गलतियां</h2><div><b>1. गलत या अधूरी जानकारी देना (Non-Disclosure)</b></div><div>- पॉलिसी लेते समय स्वास्थ्य, आय या जोखिम से जुड़ी जानकारी छिपाना</div><div>- मेडिकल हिस्ट्री, धूम्रपान/शराब की आदतें न बताना</div><div>- बीमा कंपनियां इसे मटेरियल फैक्ट छिपाना मानती हैं</div><div>नतीजा: क्लेम के समय कंपनी जांच में यह सामने आने पर दावा खारिज कर सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. पॉलिसी की शर्तें और कवरेज न समझना</b></div><div>- क्या-क्या कवर है और क्या नहीं, इसकी जानकारी न होना</div><div>- वेटिंग पीरियड, एक्सक्लूजन (Exclusions) को नजरअंदाज करना, जैसे - कुछ बीमारियां शुरुआती वर्षों में कवर नहीं होतीं</div><div>नतीजा: ऐसे मामलों में क्लेम “नियमों के तहत” रिजेक्ट कर दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>3. समय पर क्लेम न करना या दस्तावेज अधूरे देना</b></div><div>- क्लेम की सूचना देने में देरी करना&nbsp;</div><div>- जरूरी दस्तावेज (बिल, रिपोर्ट, FIR आदि) जमा न करना</div><div>- गलत फॉर्म या अधूरी जानकारी देना&nbsp;</div><div>नतीजा: प्रक्रिया अधूरी होने के कारण क्लेम अस्वीकृत हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>किन बातों का रखें खास ध्यान?</b></div><div>क्लेम करते समय निम्नलिखित बातों&nbsp; ध्यान रखना आवश्यक होता है :&nbsp;</div><div>- पॉलिसी खरीदते समय पूरी और सही जानकारी दें</div><div>- सभी शर्तों (Terms &amp; Conditions) को ध्यान से पढ़ें</div><div>- इलाज/दुर्घटना के तुरंत बाद कंपनी को सूचित करें</div><div>- सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और समय पर जमा करें</div><div>- एजेंट या कंपनी से किसी भी शंका पर लिखित पुष्टि लें</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?</h2><div>क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए अक्सर तैयारी, ट्रांसपेरेंसी और कम्युनिकेशन की ज़रूरत होती है। यहाँ कुछ यूनिवर्सल टिप्स दिए गए हैं:</div><div>- अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को रेगुलर रिव्यू करें</div><div>- अपनी इंश्योरेंस कंपनी को ज़िंदगी में होने वाले किसी भी बदलाव (जैसे, घर बदलना, हेल्थ कंडीशन, नौकरी में बदलाव) के बारे में अपडेट करें</div><div>- कीमती सामान और रसीदों का पेपर और डिजिटल रिकॉर्ड रखें</div><div>- पॉलिसी खरीदने से पहले सवाल पूछें और साफ़ करें कि क्या कवर है और क्या नहीं</div><div>- अपनी इंश्योरेंस कंपनी के ऐप या कस्टमर सर्विस का इस्तेमाल करके उनके डॉक्यूमेंटेशन और रिपोर्टिंग प्रोसेस को समझें</div><div>&nbsp;</div><div>इंश्योरेंस आपकी सुरक्षा के लिए होता है, लेकिन यह तभी काम करता है जब आप समझते हैं कि यह कैसे काम करता है। ज़्यादातर क्लेम इसलिए मना नहीं किए जाते हैं कि इंश्योरेंस कंपनियाँ आपको धोखा देना चाहती हैं, बल्कि इसलिए मना किए जाते हैं क्योंकि ऐसी गलतियाँ होती हैं जिनसे बचा जा सकता है, गलतफ़हमियाँ होती हैं, या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होता है।</div><div>&nbsp;</div><div>अपनी पॉलिसी को पढ़ने के लिए समय निकालकर, अपनी जानकारी को अपडेट रखकर और सही डॉक्यूमेंट जमा करके, आप सफल क्लेम की संभावना को काफ़ी बढ़ा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 19:24:32 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>घर खरीदना हर परिवार का बड़ा सपना होता है, जिसे पूरा करने के लिए अधिकांश लोग होम लोन लेते हैं। लेकिन अगर लोन चुकाने के दौरान कमाने वाले व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। ऐसे जोखिम से बचाव के लिए होम लोन इंश्योरेंस अहम भूमिका निभाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>लोन लेने वाले हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि अगर जल्द ही उनके साथ कुछ अनहोनी हो गई तो वे अपने घर के लोन का बकाया नहीं चुका पाएंगे। कंज्यूमर नहीं चाहता कि उनकी असमय मौत के बाद होम लोन लेने का बोझ उनके परिवार पर पड़े। क्योंकि होम लोन एक लंबे समय के लोन से जुड़ा होता है जो 30 साल तक चल सकता है, इसलिए यह बात लोन लेने वाले के दिमाग में बार-बार आती है। इसलिए, लोन लेने वालों के लिए यह समझदारी है कि वे इसे ध्यान में रखें और उसी के हिसाब से प्लान बनाएं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस क्या होता है?</h2><div>होम लोन इंश्योरेंस, जिसे होम लोन प्रोटेक्शन प्लान (HLPP) भी कहते हैं, लगभग हर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन द्वारा दी जाने वाली एक स्कीम है जिसमें इंश्योरर, लोन देने वाले या बैंक को लोन लेने वाले के बकाया या बचे हुए होम लोन कवर इंश्योरेंस अमाउंट का पेमेंट करता है, अगर अचानक कोई ऐसी स्थिति आ जाए, जैसे कि लोन लेने वाले की मौत हो जाए। आप अपनी इंश्योरेंस की मूल ज़रूरतों का पता लगाने के लिए हाउसिंग लोन इंश्योरेंस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy" target="_blank">जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?</a></h3><div>आसान शब्दों में कहें तो होम लोन प्रोटेक्शन प्लान या होम लोन इंश्योरेंस एक इंश्योरेंस प्लान है। होम लोन इंश्योरेंस में मौत होने पर इंश्योरेंस कंपनी बैंकों, NBFCs, या हाउसिंग फाइनेंस फर्मों के साथ होम लोन का बाकी हिस्सा चुकाती है। पॉलिसी का टर्म आमतौर पर लोन के टर्म जितना ही होता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस के प्रकार</h2><div>कई लोन देने वाली कंपनियाँ लोन लेने वालों को 3 मुख्य प्रकार के होम इंश्योरेंस देती हैं। इन प्लान को रिड्यूसिंग कवर प्लान, हाइब्रिड प्लान और लेवल प्लान के तौर पर बांटा गया है। तीनों प्लान के बीच मुख्य अंतर यह है:</div><div>- लेवल कवरेज प्लान: इंश्योर्ड व्यक्ति का प्रोटेक्शन कवरेज पूरे लोन टर्म में एक जैसा रहता है।</div><div>- हाइब्रिड कवरेज प्लान: लोन के पहले साल में कवरेज पूरा होता है। समय के साथ लोन बैलेंस अमाउंट कम होने पर यह कम होने लगता है।</div><div>- रिड्यूसिंग कवर प्लान: समय बीतने के साथ कवरेज और बकाया लोन दोनों कम हो जाते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस खरीदने के फ़ायदे</h2><div><b>- फाइनेंशियल सिक्योरिटी:</b> जब किसी लोन लेने वाले की मौत हो जाती है और उसके डिपेंडेंट लोन नहीं चुका पाते हैं तो लोन देने वाले को घर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने और लोन वसूलने के लिए उसे बेचने का अधिकार होता है। हालांकि, ऐसा करने के लिए लोन देने वाले को बहुत ज़्यादा फोरक्लोज़र फीस देनी पड़ती है।</div><div><b>- फ़ैमिली प्रोटेक्शन: </b>डिपेंडेंट को फ़ाइनेंशियल बोझ से बचाता है, मतलब होम लोन इंश्योरेंस पॉलिसी किसी मुसीबत की हालत में किसी के परिवार और डिपेंडेंट को लोन से बचाती है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी बकाया हाउस लोन अमाउंट को कवर करेगी, इसलिए आपके अपने सुरक्षित रहेंगे।</div><div><b>- मन की शांति:</b> इमरजेंसी में स्ट्रेस कम करता है, यानी जब आप होम लोन प्रोटेक्शन प्लान खरीदते हैं तो आप ऐसे ऐड-ऑन कवर चुन पाएंगे जो आपको परमानेंट डिसेबिलिटी, गंभीर बीमारियों और नौकरी जाने से बचाते हैं। यह इमरजेंसी की हालत में आपकी सुरक्षा करेगा।</div><div><b>- टैक्स फ़ायदे:</b> सेक्शन 80C/80D के तहत प्रीमियम एलिजिबल हैं।</div><div><b>- क्लेम में आसानी:</b> लेंडर के साथ सीधे कोऑर्डिनेट किया जाता है, जिससे पेमेंट आसान हो जाता है।</div><div><br></div><div>ये फ़ायदे होम लोन इंश्योरेंस को ज़िम्मेदार होमओनरशिप का एक ज़रूरी हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा, अगर आपके पास ये ऐड-ऑन हैं तो आपका बकाया लोन पेमेंट न केवल पॉलिसी होल्डर की मौत की हालत में, बल्कि लोन लेने वाले की डिसेबिलिटी या गंभीर बीमारी की हालत में भी किया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><div>हालांकि अपने परिवार को हाउस लोन इंश्योरेंस से सुरक्षित रखना सही है, लेकिन आपको इसके नुकसानों के बारे में भी पता होना चाहिए, जैसे कि आपके कुल खर्चे बढ़ सकते हैं। इसके बजाय, आप एक आसान टर्म प्लान चुन सकते हैं, जो आपको आपकी सभी मौजूदा देनदारियों, जिसमें आपका मॉर्गेज भी शामिल है, के लिए सस्ता इंश्योरेंस कवरेज देता है। जब आप होम लोन लेते हैं तो आप एक फाइनेंशियल ज़िम्मेदारी लेते हैं जो लोन के समय के आधार पर कई सालों तक जारी रहेगी। हालांकि, क्योंकि आप यह अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि लोन के 20 साल से ज़्यादा के समय में क्या हो सकता है, इसलिए होम लोन इंश्योरेंस खरीदकर लोन को सुरक्षित करना एक अच्छा विचार है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 19:16:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Insurance Policy में बीमारी छुपाना पड़ सकता है भारी, इसे Fraud मानकर रद्द हो सकता है क्लेम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-conceal-a-pre-existing-disease]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हेल्थ इंश्योरेंस में Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, पॉलिसी रद्द हो सकती है और भविष्य में इंश्योरेंस मिलना भी मुश्किल हो सकता है। पूर्व शोध IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार हर साल लगभग 8 से 10 लाख क्लेम PED या उससे जुड़ी शर्तों की वजह से रिजेक्ट हो जाते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>जब आप अपना हेल्थ इंश्योरेंस कराते है, तो कंपनी आपकी पुरानी बीमारी यानी Pre-existing Disease का रिकॉर्ड मांगती है। यदि आप ऐसे मेंं झूठ बोलते है या जानकारी छुपाते हैं, तो कंपनी आपकी पॉलिसी तुरंत रद्द कर सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह 'अतुल्य विश्वास' (Uberrimae Fidei) के सिद्धांत का उल्लंघन है, जिसे बीमा कंपनी और कानून धोखाधड़ी मानते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy" target="_blank">जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?</a></h3><div>अगर आप यह गलती कर चुके हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम स्वीकार नहीं करेगी या आपका प्रीमियम बढ़ा देगी। आइए जानते हैं, क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई के साथ बचने के तरीके क्या है।</div><div><br></div><h2>Pre-existing Disease छुपाने के नुकसान</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रद्द हो सकता है, साथ ही कुछ केस में प्रीमियम महंगा हो सकता है। इसीलिए अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाने की गलती न करें:</div><div>- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द होने पर आपकी वर्तमान तक जमा की गई प्रीमियम राशि वापस नहीं की जाती है।</div><div>- यदि एक कंपनी PED छुपाने के कारण पॉलिसी कैंसिल करती है, तो दूसरी कंपनी आसानी से हेल्थ इंश्योरेंस नहीं देती है।</div><div>- यदि आप कंपनी से अपनी बीमारी जानबूझकर छुपाते है तो इसे बीमा कंपनी फ्रॉड मान सकती है, जिससे आपके ऊपर कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है।</div><div>- अगर क्लेम के समय अस्पताल के रिकॉर्ड से पुरानी बीमारी का पता चलता है, तो कई कंपनी क्लेम देने से साफ मना कर सकती है।</div><div><br></div><h2>वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक बात</h2><div>सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में किसी भी बीमारी को छुपाना महंगा पड़ सकता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेते समय सही जानकारी नहीं देते हैं, तो बीमा कंपनी क्लेम रद्द कर सकती है। इससे आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए हमेशा पूरी और सही जानकारी दें।</div><div><br></div><div>आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक विकल्प नहीं बल्कि बड़ी जरूरत है। आमतौर पर आप किसी भी अच्छी कंपनी से बीमा ले सकते है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले सभी विकल्पों की तुलना करना बेहद आवश्यक है। बेहतर तुलना करने के लिए आप वेटिंग पीरियड, प्रीमियम, को-पेमेंट, कवरेज और मिलने वाले लाभ को ध्यान में रख सकते है। बेहतर फैसले लेने के लिए आप भरोसेमंद प्लेटफॉर्म जैसे <a href="https://www.policybazaar.com/health-insurance/senior-citizen-health-insurance/" target="_blank">Policybazaar </a>की मदद ले सकते हैं, पॉलिसीबाजार सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तुलना करने, इंश्योरेंस खरीदने और रिन्यू कराने&nbsp; की सुविधा प्रदान करता है।</div><div><br></div><h2>क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई&nbsp;</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस में क्लेम रिजेक्शन सभी बीमारियों पर लागू नहीं होता हैं। निम्न बीमारियों को छुपाने से आपको क्लेम मिलना मुश्किल हो सकता है या बहुत लंबे वेटिंग पीरियड तक रुकना पड़ सकता है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- डायबिटीज: </b>अगर आपने शुगर छुपाई है, तो किडनी फेलियर, हार्ट अटैक या रेटिनोपैथी (आंखों की समस्या) का क्लेम रिजेक्ट हो सकता हैं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- हायपरटेंशन (High BP): </b>बीपी छुपाने पर स्ट्रोक या पैरालिसिस का क्लेम नहीं मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अस्थमा: </b>अगर आपने बताया नहीं हैं कि आपको सालों से साँस की दिक्कत है, तो फेफड़ों से जुड़े किसी भी गंभीर इलाज का पैसा कंपनी नहीं देगी।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- थायराइड:</b> इसके कारण होने वाले हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी सर्जरी का क्लेम रुक सकता है।</div><div><br></div><div>अगर आप अपनी बीमारी को कंपनी को पहले ही बता देते है या बाद में भी बताते है, तो कंपनी निम्न शर्तों के साथ उसे स्वीकार कर लेती है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- वेटिंग पीरियड के बाद: </b>अगर आपने बताया है कि आपको 'पथरी' या 'मोतियाबिंद' जैसा कोई भी बीमारी है, तो कंपनी 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड देती है। इस समय के बाद आपको हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम आसानी से मिल सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अन्य बीमारियाँ: </b>ऐसी बीमारियाँ जो पॉलिसी लेने के बाद हुई हैं, जैसे डेंगू, मलेरिया, एक्सीडेंट, या अचानक हुआ अपेंडिक्स, तो उनका क्लेम मिलता है। हालांकि इसके लिए भी वेटिंग पीरियड हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- दुर्घटना - </b>यदि आपके साथ दुर्भाग्यवश कोई दुर्घटना हो जाती है, तो इसके लिए हेल्थ इंश्योरेंस में कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता है, ऐसी स्थिति में कंपनी आपका क्लेम स्वीकार करती है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>इंश्योरेंस कंपनी को कैसे पता चलता है?</h2><div>बीमा कंपनी, हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम देने से पहले, मेडिकल रिपोर्ट की सहायता से पहले से मौजूद बीमारी का पता लगाती है। साथ ही, जब आप अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे होते हैं, तो डॉक्टर आपको डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary) देते हैं, जिससे पता चल जाता है कि बीमारी कब से है। इसके अलावा अगर आपकी उम्र 45 से ज्यादा है या आप बड़ी बीमा राशि ले रहे हैं, तो कंपनी खुद आपके टेस्ट करवाती है।</div><div><br></div><div>ज्यादातर मामलों में डॉक्टर की रिपोर्ट में यह जानकारी आ जाती है कि आपको बीमारी कब से हैं। यदि आप बड़ा क्लेम 2 साल के भीतर लेने की कोशिश करते हैं, तो बीमा कंपनी पुराने फैमिली डॉक्टर, पुराने अस्पताल रिकॉर्ड और यहां तक कि आपके पास के केमिस्ट शॉप पर भी पूछ सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>क्लेम रिजेक्शन से बचने के तरीके</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यदि आपने बीमा कंपनी से Pre-existing Disease छुपाने की गलती की है, तो पॉलिसी कराने के 15 दिन के अंदर कंपनी को मेल करके सूचित कर दें। इससे आप फ्रॉड के केस से बच सकते है, हालाँकि, इससे हो सकता है, कि आपका प्रीमियम लगभग 15% तक बढ़ जाए, लेकिन यह भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा लेता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पॉलिसी के नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़े, प्रीमियम का भुगतान समय पर करें, सभी दस्तावेज पूरे रखें और समय रहते पॉलिसी रिन्यू कराएं। अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो जाती है, तो आपके पिछले सभी 'वेटिंग पीरियड' के लाभ खत्म हो जाते हैं साथ ही नए क्लेम मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। इन सभी बातों पर ध्यान देकर क्लेम रिजेक्शन से बचा जा सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>निष्कर्ष&nbsp;</h2><div>सभी बीमा कंपनियाँ ईमानदारी और भरोसे के साथ काम करती हैं। यदि पॉलिसीधारक अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाता है, तो इसे फ्रॉड माना जाता है। ऐसे मामले में न केवल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, बल्कि भविष्य में किसी अन्य बीमा कंपनी से भी हेल्थ इंश्योरेंस मिलना भी कठिन हो जाता है। साथ ही, अब तक जो प्रीमियम आपने भरा है, वह वापस नहीं मिलता है। इसलिए हमेशा पॉलिसी फॉर्म में सही और पूरी जानकारी देना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम माना जाता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:07:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-conceal-a-pre-existing-disease</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) असंगठित क्षेत्र के गरीब श्रमिकों के लिए एक सरकारी पेंशन योजना है, जिसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये की पेंशन मिलती है। वो भी तब, जब आपने लगभग 55–200 रुपये प्रति माह इस फंड में योगदान दिया हो, जो कि उम्र के हिसाब से निर्धारित है। फिर इसमें सरकार आपके योगदान के बराबर ही अतिरिक्त राशि जमा करती है, जिससे लंबे समय में 3000 ₹ प्रतिमाह की पेंशन व्यवस्था बनती है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>#&nbsp; समझिए, PM SYMY क्या है? यह किसके लिए है?</h2><div><br></div><div>PM SYMY एक “केंद्रीय क्षेत्र की पेंशन योजना” है जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों (रेहड़ी पटरी वाले, मजदूर, घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, एग्रीकल्चर वर्कर आदि) के लिए 2019 में शुरू की गई थी। इसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय चलाता है और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पेंशन फंड के रूप में काम करता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/11-years-of-pm-mudra-yojana-pm-modi-said-the-dream-of-self-employment-of-youth-has-come-true" target="_blank">PM Mudra Yojana के 11 साल: PM Modi बोले- युवाओं के Self-Employment का सपना हुआ साकार</a></h3><h2># जानिए, आखिर महज 55 रुपये में 3000 रुपये की पेंशन कैसे?</h2><div><br></div><div>दरअसल, PM SYMY में आपकी प्रवेश आयु (Entry Age) के हिसाब से आपको मासिक योगदान 55 से 200 रुपये के बीच देना होता है; जिसके बाद सरकार उतनी ही राशि आपके लिए जमा करती है, यानी कुल 110 से 400 रुपये प्रति माह तक फंड में जाता है। जैसे: अगर आप 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं तो आप 55 रुपया/माह, और सरकार 55 रुपया/माह देती है (कुल 110 रुपया)। इस तरह लगभग 20–40 साल तक श्रमिक से योगदान लिया जाता है, जिससे 60 साल की उम्र तक पैसे ब्याज सहित बढ़ जाते हैं और फिर पेंशन के रूप में 3000 रुपये/माह वापस आते हैं। कहने का तातपर्य यह कि जितनी कम उम्र में आप जुड़ते हैं, फंड को उतने ज्यादा साल के लिए ब्याज लगता है, इसलिए आपका अपना मूल योगदान बहुत कम (जैसे 55 रुपये) ही रह जाता है, लेकिन लंबे समय में यह 3000 ₹/माह तक पहुँच जाता है। वर्तमान में यह योजना 18–40 साल के असंगठित श्रमिकों के लिए खुली है, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है और जो EPFO, ESIC या NPS के सदस्य नहीं हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2># देखिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) में घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?</h2><div><br></div><div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) में घर बैठे ऑनलाइन आवेदन दो तरीकों से कर सकते हैं: पहला, सीधा ऑनलाइन (सेल्फ रजिस्ट्रेशन), या कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से आवेदन, जहाँ आपकी ओर से ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है। लिहाजा, नीचे बताए हुए तरीके से आप अपने मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर से सीधा ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए चरण दर चरण (स्टेप वाइज) फॉर्म भरकर आप निम्नलिखित तरीके से जमा करें।</div><div><br></div><div>पहला, बेसिक जानकारी और लिंक: PM SYMY के ऑफिशियल पोर्टल: maandhan.in पर जाकर “PM Shram Yogi Maandhan” / “Mandhan” या लॉगिन/ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन वाला सेक्शन ढूँढें। यहाँ आप सेल्फ इनरोलमेंट (Self Enrollment) ऑप्शन चुनकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा, ऑनलाइन आवेदन के स्टेप: आप पोर्टल खोलें और फिर रजिस्टर/लॉगिन ब्राउज़र में maandhan.in खोलें, तब ऊपरी नेविगेशन बार में “Enroll / Apply” / “Self Enrollment” वाले लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद अपना 10 डिजिट मोबाइल नंबर दर्ज करें; और उस पर आए OTP को वैलिडेट करके लॉगिन करें। उसके बाद&nbsp; छह स्टेप फॉर्म भरें।पोर्टल पर आमतौर पर 6 स्टेप वाला एनरोलमेंट फॉर्म दिखता है: चरण 1: पर्सनल डिटेल्स – नाम, जन्म तिथि, पता, लिंग, उम्र, आदि। चरण 2: आधार और e Shram/कार्ड डिटेल्स – आधार नंबर, e Shram कार्ड नंबर (अगर हो तो) दर्ज करें। चरण 3: बैंक डिटेल्स – बचत बैंक खाता, आईएफएससी, नाम आदि। यहाँ ऑटो डेबिट की सुविधा चुननी होती है, ताकि हर महीने योगदान बैंक से कट सके। मैन्डेट फॉर्म अपलोड करें। पोर्टल से मैन्डेट फॉर्म (Mandate Form) डाउनलोड करें, उसे भरकर स्कैन/मोबाइल की फोटो लें। चरण 4: इस फॉर्म की स्कैन कॉपी या फोटो अपलोड करें (JPG/PDF आदि फॉर्मेट में)। चरण 5: फिर, भुगतान करें। फॉर्म वेरिफाई होने के बाद आपको पहली सदस्यता/फीस का भुगतान करना होता है, जो आपकी उम्र के हिसाब से 55–200 रुपये प्रति माह तक हो सकती है। भुगतान ऑनलाइन गेटवे या नियत समय पर बैंक ऑटो डेबिट से होता है। चरण 6: सफल रजिस्ट्रेशन और कार्ड- सफल आवेदन के बाद आपको पीएम SYM यूनिक आईडी / कार्ड नंबर मिलता है, जिससे आप भविष्य में नेट बैंकिंग या योजना के पोर्टल पर स्टेटस चेक कर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>तीसरा, अगर आप ऑफलाइन/सीएससी से करवाना चाहें किसी नजदीकी CSC / जिला श्रम विभाग / उपायुक्त कार्यालय पर जाएँ। अपने साथ ले जाएँ: आधार कार्ड, बचत बैंक खाता पासबुक/IFSC, और फोटो आईडी/पता प्रमाण (जैसा लोकल अधिकारी बोले)। सीएससी ऑपरेटर आपका आधार बायोमेट्रिक वेरिफाई करके ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरेगा, आप एक बार नकद भुगतान करेंगे और बाद में आपका बैंक खाता ऑटो डेबिट शुरू हो जाता है।</div><div><br></div><div>चौथा, जरूरी चेतावनी / टिप्स: आपकी आयु 18–40 साल और मासिक आय 15,000 रुपये या कम होनी चाहिए, और आप EPFO/ESIC/NPS या किसी और सरकारी पेंशन योजना के लाभार्थी नहीं होने चाहिए। फॉर्म भरते समय मोबाइल नंबर, आधार, बैंक आईडी और खाता नंबर सही सही दें; छोटी सी गलती से आपको पेंशन या लॉगिन इंटरफेस में दिक्कत हो सकती है।</div><div><br></div><h2># प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM SYM) योजना के लिए पात्रता की साफ साफ शर्तें जानिए</h2><div><br></div><div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM SYM) योजना के लिए पात्रता कुछ साफ साफ शर्तों पर निर्भर करती है, जो मुख्यतः उम्र, आय और काम के प्रकार से जुड़ी हैं।</div><div>मुख्य पात्रता शर्तें:&nbsp; आयु सीमा: आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। मासिक आय: आवेदक की मासिक आय ₹15,000 या उससे कम होनी चाहिए।</div><div>असंगठित क्षेत्र का कामगार: आवेदक असंगठित क्षेत्र में काम कर रहा हो, जैसे:रेहड़ी पटरी वाले, निर्माण श्रमिक, दिहाड़ी मजदूर,घरेलू कामगार, कृषि श्रमिक, रिक्शा चालक, बीड़ी श्रमिक, बुनकर, मछुआरे आदि।&nbsp;</div><div><br></div><div>किसे छोड़ा जाता है / अपात्रता: संगठित क्षेत्र के लाभार्थी नहीं होना: अगर आप EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि), ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) या NPS (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) के सदस्य हैं, तो PM SYM के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। आयकरदाता नहीं होना: जो इनकम टैक्स भुगतानकर्ता हैं (यानी आय के आधार पर आयकर देने वाले), वे आमतौर पर इस योजना के लिए अपात्र गिने जाते हैं। अन्य सरकारी पेंशन योजना: अगर आपको पहले से ही किसी अन्य सरकारी पेंशन/सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा है, तो आप PM SYM में जुड़ने के लिए पात्र नहीं हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>अन्य जरूरी जानकारी निम्नलिखित है- आधार और बैंक खाता: आवेदक के पास आधार कार्ड और सक्षम बचत बैंक खाता (IFSC के साथ) होना चाहिए, क्योंकि योगदान बैंक खाते से ऑटो डेबिट होता है।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:19:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सड़क पर स्टंटबाजी करना पड़ेगा भारी, वकील से जानें कितने साल की जेल और जुर्माने की राशि?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/doing-stunts-on-the-road-will-prove-costly-know-from-the-lawyer-how-many-years-of-jail]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रेसिंग और स्टंट ड्राइविंग को बहुत खतरनाक काम माना जाता है, जिससे पब्लिक सेफ्टी के साथ-साथ ड्राइवर और पैसेंजर की सेफ्टी को भी गंभीर खतरा होता है। भारत में मोटर व्हीकल एक्ट पब्लिक सड़कों पर इस तरह की लापरवाही से ड्राइविंग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाता है और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। गैर-कानूनी स्ट्रीट रेसिंग और स्टंट ड्राइविंग की बढ़ती घटनाओं की वजह से इन खतरनाक कामों को रोकने के लिए सख्ती से कार्रवाई करने पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।</div><div>&nbsp;</div><div>सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए सड़कों पर स्टंटबाजी (Stunt Driving) का चलन बढ़ रहा है। लेकिन यह न केवल आपकी बल्कि दूसरों की जान के लिए भी खतरा है। कानून के मुताबिक, सड़क पर स्टंट करना गंभीर अपराध है और इसके लिए भारी जुर्माना, लाइसेंस सस्पेंशन और जेल तक हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker" target="_blank">जानिए, बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर कैसे मिलेगा सालाना किराया से 100 गुना तक ज्यादा मुआवजा?</a></h3><h2>स्टंट ड्राइविंग और रेसिंग क्या होती है?&nbsp;</h2><div>रेसिंग का मतलब है कोई भी कॉम्पिटिशन जिसमें गाड़ियों को तेज़ स्पीड में चलाया जाता है, आम तौर पर मनोरंजन के लिए, बिना अधिकारियों की इजाज़त के पब्लिक सड़कों पर।</div><div>&nbsp;</div><div>स्टंट ड्राइविंग में खतरनाक हरकतें करना शामिल है जैसे ड्रिफ्टिंग, व्हीलीज़, बर्नआउट, या कोई और जोखिम भरा काम जिससे ड्राइवर, पैसेंजर और सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों को खतरा हो।</div><div>&nbsp;</div><h2>स्टंटबाजी को कानून कैसे देखता है?</h2><div>भारत में सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों को मुख्यतः मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (Motor Vehicles Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत देखा जाता है। स्टंटबाजी को आमतौर पर इन श्रेणियों में रखा जाता है:</div><div>- खतरनाक ड्राइविंग (Dangerous Driving)</div><div>- लापरवाही से वाहन चलाना</div><div>- सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालना</div><div>&nbsp;</div><h2>स्टंट ड्राइविंग के लिए कानून:</h2><div>- फाइन: मोटर व्हीकल एक्ट (खासकर सेक्शन 184) के तहत, पब्लिक सड़कों पर लापरवाही से गाड़ी चलाने या स्टंट करने पर ₹5,000 या उससे ज़्यादा का जुर्माना लग सकता है।</div><div>- कैद: अगर स्टंट ड्राइविंग या रेसिंग की वजह से किसी को गंभीर चोट लगती है या मौत हो जाती है तो नियम तोड़ने वाले को 1 साल या उससे ज़्यादा की जेल हो सकती है।</div><div><br></div><div>अगर लापरवाही से गाड़ी चलाने या रेसिंग करने से पब्लिक प्रॉपर्टी को बहुत ज़्यादा नुकसान होता है या दूसरों को चोट लगती है तो नियम तोड़ने वाले को ज़्यादा जेल हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>कितनी हो सकती है सजा और जुर्माना?</h2><h2>1. खतरनाक ड्राइविंग (Motor Vehicles Act, Section 184)</h2><div><b>पहली बार अपराध:</b> 6 महीने तक की जेल या&nbsp; ₹1,000 से ₹5,000 तक जुर्माना</div><div>&nbsp;</div><div><b>दोबारा अपराध: </b>2 साल तक की जेल या&nbsp; ₹10,000 तक जुर्माना</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. लापरवाही से वाहन चलाना (IPC Section 279) :</b> 6 महीने तक की जेल&nbsp; या ₹1,000 तक जुर्माना या दोनों</div><div><br></div><div><b>3. जान को खतरे में डालना (IPC Section 336/337/338) :</b> अगर किसी को चोट पहुंचती है तो 3 महीने से 2 साल तक की सजा और जुर्माना भी लग सकता है</div><div><br></div><div><b>4. गंभीर दुर्घटना या मौत की स्थिति: </b>IPC Section 304A के तहत 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों भी लग सकता है&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>लाइसेंस और वाहन पर क्या कार्रवाई हो सकती है?</h2><div>- ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है</div><div>- वाहन को जब्त (Seize) किया जा सकता है</div><div>- दोबारा लाइसेंस पाने में मुश्किलें आ सकती हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>वकीलों की क्या सलाह है?</h2><div>- सड़क पर स्टंट करना “एंटरटेनमेंट” नहीं, बल्कि कानूनी जोखिम है</div><div>- पुलिस अब ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई कर रही है</div><div>- सोशल मीडिया पर वीडियो डालना भी आपके खिलाफ सबूत बन सकता है</div><div>&nbsp;</div><h2>युवाओं के लिए जरूरी संदेश</h2><div>- खाली सड़कों पर भी स्टंट करना सुरक्षित नहीं और न ही इसे कानूनी मान्यता&nbsp;</div><div>- रेसिंग या स्टंट के लिए केवल अधिकृत ट्रैक का उपयोग करें</div><div>- अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें</div><div>&nbsp;</div><div>सड़क पर स्टंटबाजी करना भारी पड़ सकता है - न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि कानूनी और सामाजिक रूप से भी। भारत में स्टंट ड्राइविंग एक गंभीर अपराध है क्योंकि इससे पब्लिक सेफ्टी और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों को बड़ा खतरा होता है। ऐसी एक्टिविटीज़ के लिए भारी फाइन, लाइसेंस सस्पेंशन, गाड़ी इंपाउंडमेंट और जेल भी हो सकती है। ड्राइवरों के लिए यह ज़रूरी है कि वे इस तरह की लापरवाही वाली हरकतों से बचें और अपनी और सड़क पर दूसरों की सेफ्टी पक्का करने के लिए ट्रैफिक कानूनों का पालन करें। सुरक्षित ड्राइविंग ही सबसे अच्छा विकल्प है - क्योंकि सड़क पर जिम्मेदारी ही असली समझदारी है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:31:28 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/doing-stunts-on-the-road-will-prove-costly-know-from-the-lawyer-how-many-years-of-jail</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर कैसे मिलेगा सालाना किराया से 100 गुना तक ज्यादा मुआवजा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वर्ष 2021 में बैंक लॉकर सुविधा के लिए विभिन्न संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जो विगत 1 जनवरी 2022 से लागू हैं। इनके तहत बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर बैंक की जिम्मेदारी तय की गई है। साथ ही ग्राहक की लापरवाही के बारे में भी नियमसम्मत जानकारी उपलब्ध कराई गई है ताकि किसी भी प्रकार का नीतिगत विरोधाभास नहीं बचे। यही वजह है कि बैंक लॉकर के धंधे में तेजी आई है।</div><div><br></div><div>इस बारे में मुख्य गाइडलाइंस निम्नलिखित है- आरबीआई के अनुसार, बैंक लॉकर की सामग्री का इन्वेंटरी रखने या उसके मूल्य की जांच करने का अधिकार बैंक को नहीं है।हां, लॉकर हायरर&nbsp; को अवैध या खतरनाक वस्तुएं रखने की मनाही है, और बैंक को अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है। इसलिए लॉकर एग्रीमेंट में ये शर्तें शामिल होनी चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/old-regime-has-come-under-discussion-amid-the-new-income-tax-draft-rules" target="_blank">नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियमों के बीच चर्चा में आई Old Regime, फिर से बन सकती है फायदेमंद; इन्हें मिलेगी राहत</a></h3><h2># बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती, लूट या कर्मचारी धोखाधड़ी से नुकसान होने पर बैंक सालाना लॉकर किराए के 100 गुना मुआवजा देगा</h2><div>जहां तक मुआवजे की प्रक्रिया की बात है तो बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती, लूट या कर्मचारी धोखाधड़ी से नुकसान होने पर बैंक सालाना किराए के 100 गुना मुआवजा देगा। उदाहरणस्वरूप, यदि सालाना किराया 4000 रुपये है, तो अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकते हैं।वहीं, प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र लापरवाही के मामले में बैंक जिम्मेदार नहीं होता है।</div><div><br></div><div>उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने बैंक लॉकर नियमों को 2021 से कई चरणों में अपडेट किया है, जिसमें 2025 में बायोमेट्रिक एक्सेस, सीसीटीवी और क्लेम निपटान पर नए निर्देश शामिल हैं। ये 31 दिसंबर 2025 तक पूरी तरह लागू हों चुके हैं। सुरक्षा उपाय के तहत, बैंकों को लॉकर रूम में बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) सत्यापन, 24x7 सीसीटीवी (180 दिन फुटेज) और एक्सेस पर एसएमएस/ईमेल अलर्ट अनिवार्य करना होगा। वहीं ड्यूल-की सिस्टम बरकरार रहेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>जहां तक मुआवजा और दायित्व की बात है तो बैंक की गलती से नुकसान पर सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा मिलेगा। जबकि नकदी, हथियार या खतरनाक वस्तुएं रखना प्रतिबंधित है; और 3 साल निष्क्रियता पर बैंक लॉकर खोल सकते हैं। वहीं, क्लेम निपटान हेतु मृत ग्राहक के लॉकर/खाते क्लेम पर सभी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों में निपटारा अनिवार्य है, जबकि देरी पर मुआवजा मिलेगा। ये नियम 31 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं। इसके तहत स्टैंडर्ड एग्रीमेंट और नॉमिनेशन अपडेट जरूरी है।</div><div><br></div><div>बैंक लॉकर से नुकसान होने पर आरबीआई (RBI) गाइडलाइंस के अनुसार, बैंक सालाना किराए के 100 गुना तक मुआवजा देगा, यदि नुकसान बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती या कर्मचारी धोखाधड़ी से हुआ हो तो। वहीं मुआवजे की गणना के लिए निम्न उदाहरण दिए गए हैं, जिसके मुताबिक, यदि आपका लॉकर किराया ₹3,000 सालाना है, तो अधिकतम ₹3,00,000 (3,000 x 100) मिल सकता है, भले ही सामान की कीमत इससे ज्यादा हो।यह सीमा किराए पर आधारित है, क्योंकि बैंक लॉकर सामग्री का मूल्यांकन नहीं करता। सवाल है कि आखिर कब यह मुआवजा नहीं मिलेगा, तो जवाब होगा कि प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र गलती (जैसे गलत PIN) पर बैंक जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं दावा साबित करने के लिए एफआईआर, सीसीटीवी सबूत जरूरी हैं; जबकि अतिरिक्त बीमा कराना उचित होता है।</div><div><br></div><h2># यदि कुछ गड़बड़ हुआ है तो दावा कैसे करें?</h2><div>अब सवाल है कि यदि कुछ गड़बड़ हुआ है तो दावा कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि नुकसान की सूचना बैंक को तुरंत दें और पुलिस में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराएं। जिसके बाद बैंक को सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, एक्सेस लॉग और जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। तब मौजूदा लॉकर धारकों के लिए 1 जनवरी 2023 तक एग्रीमेंट अपडेट करना अनिवार्य था और अब नए नियमों के मुताबिक ही बैंक और ग्राहक में एग्रीमेंट बन रहे हैं।</div><div><br></div><h2># RBI लॉकर नियमों में "एक्ट ऑफ गॉड" क्या है? इससे बचने के लिए करवा सकते हैं वस्तु बीमा!</h2><div>आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में "एक्ट ऑफ गॉड" प्राकृतिक आपदाओं को संदर्भित करता है। एक्ट ऑफ गॉड की परिभाषा के तहत प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं, जो मानवीय नियंत्रण से बाहर होती हैं, जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान, बिजली गिरना या सुनामी। इनमें बैंक की कोई लापरवाही नहीं मानी जाती। लिहाजा मुआवजे पर इसका प्रभाव पड़ता है। चूंकि ऐसी आपदाओं से लॉकर में सामान नष्ट या गायब होने पर बैंक कोई मुआवजा नहीं देगा। इसलिए ऐसी आफत से बचने के लिए बैंक को लॉकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होते हैं, जैसे सीसीटीवी और मजबूत ताले। वहीं, चोरी या बैंक कर्मचारी की गलती में 100 गुना किराए तक मुआवजा मिल सकता है। वहीं इस क्षति से बचने के लिए आप लॉकर वस्तु बीमा करवा सकते हैं, ताकि आपके क्षति की भरपाई संभव हो सके।</div><div><br></div><h2># समझिए, आरबीआई लॉकर नियमों में एक्ट ऑफ गॉड के अलावा और किन स्थितियों में बैंक मुआवजा नहीं देगा</h2><div>हालांकि, आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में एक्ट ऑफ गॉड के अलावा भी कुछ स्थितियां हैं जहां बैंक मुआवजा नहीं देगा। जैसे, ग्राहक की लापरवाही यानी कि अगर ग्राहक लॉकर की कुंजी खो देता है, गलत व्यक्ति को पहुंच देता है या लॉकर का अनधिकृत उपयोग करता है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। वहीं लॉकर समझौते में हस्ताक्षर न करने या नियमों का पालन न करने पर भी मुआवजा नहीं मिलेगा। वहीं, अन्य अपवाद स्वरूप बैंक द्वारा लॉकर बीमा न कराने पर भी, नुकसान की कुल राशि का भुगतान नहीं होगा- केवल वार्षिक किराए के 100 गुना तक सीमित रहता है। जबकि युद्ध, दंगा या आतंकवादी हमले जैसी घटनाओं में भी बैंक की दायित्व सीमा लागू हो सकती है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के समान छूट मिलती है। इसलिए हमेशा लिखित समझौता जांचें।&nbsp;</div><div><br></div><div>आपको यह पता होना चाहिए कि विभिन्न बैंकों में लॉकर किराया आकार, स्थान (मेट्रो/शहरी/ग्रामीण) और बैंक नीति पर निर्भर करता है, जो सालाना जीएसटी (GST) सहित लिया जाता है। ये शुल्क 2026 में अपडेटेड हैं और बदल सकते हैं। यदि प्रमुख बैंकों के किराए की तुलना करनी है तो सटीक जानकारी के लिए बैंक शाखा से संपर्क करें। यह भी जान लें कि लॉकर किराया अग्रिम लिया जाता है, और 3 साल का एक सावधि जमा (FD) भी जरूरी हो सकता है।</div><div><br></div><h2># बैंकों में लॉकर लेने के लिए एफडी (FD) की आवश्यकता पर नियम जानिए</h2><div>चूंकि बैंकों में लॉकर लेने के लिए एफडी (FD) की आवश्यकता कई बार लगाई जाती है, लेकिन यह आरबीआई (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, वैकल्पिक है। एफडी (FD) की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं- कई बैंक लॉकर किराए की वसूली सुनिश्चित करने के लिए 3 साल के किराए के बराबर एफडी (FD) मांगते हैं, जिसका ब्याज किराए में समायोजित होता है। इससे किराया बकाया रहने पर बैंक सुरक्षित रहता है। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक लॉकर आवंटन के लिए एफडी (FD) या बीमा अनिवार्य नहीं कर सकते; केवल किराया और शुल्क ही पर्याप्त हैं। ऐसे में यदि बैंक जबरदस्ती करें, तो शिकायत दर्ज कराएं। कुछ बैंक इसे स्वेच्छा नीति के रूप में रखते हैं ताकि लॉकर उपलब्धता प्रबंधित रहे।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:03:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियमों के बीच चर्चा में आई Old Regime, फिर से बन सकती है फायदेमंद; इन्हें मिलेगी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/old-regime-has-come-under-discussion-amid-the-new-income-tax-draft-rules]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम की बहस को चुपचाप बदल सकता है। हालांकि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 ने एक बड़ा स्ट्रक्चरल रीसेट और टैक्स की भाषा को आसान बनाया, लेकिन ज़्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए असली सवाल आसान है: क्या मैं ज़्यादा टैक्स बचाऊंगा? नया एक्ट और नियम 1 अप्रैल, 2026 (टैक्स साल 2026–27) से लागू होंगे।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div>नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियम 2026 के सामने आने के बाद एक बार फिर Old Tax Regime चर्चा में है। अब तक सरलता और कम दरों के कारण New Tax Regime को बढ़त मिल रही थी, लेकिन प्रस्तावित बदलावों ने पुराने सिस्टम को फिर प्रतिस्पर्धी बना दिया है।</div><div>&nbsp;</div><div>हालांकि ये नियम अभी ड्राफ्ट फॉर्म में हैं, लेकिन ये सिर्फ प्रोसेस और लिमिट बदलने से कहीं ज़्यादा हैं। ड्राफ्ट नियम चुपचाप यह बताते हैं कि कई नई छूट, एग्ज़ेम्प्शन और ज़्यादा लिमिट से मुख्य रूप से पुराने टैक्स सिस्टम के तहत टैक्सपेयर्स को फ़ायदा हो सकता है, खासकर सैलरी पाने वाले परिवारों को। ये बदलाव इस बात की शुरुआती झलक देते हैं कि दोनों सिस्टम के बीच बैलेंस कैसे बन सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/you-are-credit-card-holder-understand-the-5-significant-changes-taking-effect-from-april-1-2026" target="_blank">यदि आप क्रेडिट कार्ड्स धारक हैं तो 1 अप्रैल 2026 से होने वाले 5 महत्वपूर्ण बदलावों को समझिए</a></h3><h2>क्यों फिर चर्चा में आया Old Regime?</h2><div>- ड्राफ्ट नियमों में भत्तों (Allowances) और छूट (Exemptions) को बढ़ाने का प्रस्ताव है</div><div>- इससे टैक्सेबल इनकम कम हो सकती है</div><div>- कई मामलों में कुल टैक्स बोझ घट सकता है</div><div>- वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिक राहत मिलने की संभावना</div><div><br></div><div>ड्राफ्ट के अनुसार, वेतन से जुड़े भत्तों और सुविधाओं की सीमा बढ़ाने से कर योग्य आय घटेगी और टैक्स कम देना पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं?</h2><div>- शिक्षा और हॉस्टल भत्ता में बड़ा इजाफा</div><div>- शिक्षा भत्ता: ₹100 से बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह (प्रस्तावित)</div><div>- हॉस्टल भत्ता: ₹300 से बढ़ाकर ₹9000 प्रति माह</div><div>- HRA (हाउस रेंट अलाउंस) और अन्य वेतन भत्तों में राहत</div><div>- अधिक डिडक्शन और छूट का दायरा बढ़ाया गया</div><div><br></div><div>कुल मिलाकर, कई मामलों में टैक्सेबल इनकम में बड़ी कमी हो सकती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>कितना हो सकता है फायदा?</h2><div>- ₹20 लाख सालाना कमाने वाला व्यक्ति करीब ₹1.25 लाख तक बचा सकता है</div><div>- ₹35 लाख आय पर लगभग ₹1.4 लाख तक की बचत संभव</div><div>- कुछ मामलों में कुल छूट 70–75% तक बढ़ने की संभावना</div><div>&nbsp;</div><div>कई सैलरी पाने वाले लोगों के लिए, खासकर जिनके बच्चे हैं, ज़्यादा किराया और स्ट्रक्चर्ड अलाउंस हैं, अब जवाब शायद अपने आप “नहीं” न हो। क्योंकि नियम अभी भी ड्राफ़्ट स्टेज में हैं, इसलिए फ़ाइनल वर्शन बदल सकता है। लेकिन अलाउंस बूस्ट ने निश्चित रूप से पुराने टैक्स सिस्टम को फिर से बातचीत में ला दिया है।</div><div>&nbsp;</div><h2>किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है Old Regime?</h2><h2>1. वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried Class)</h2><div>- जिनकी सैलरी में HRA, LTA, भत्ते शामिल हैं</div><div>- कंपनी से मिलने वाले लाभ (Perks) ज्यादा हैं</div><div><br></div><h2>2. टैक्स सेविंग निवेश करने वाले</h2><div>- जो 80C, 80D, NPS, होम लोन जैसी कटौतियों का पूरा फायदा लेते हैं</div><div><br></div><h2>3. परिवार वाले करदाता</h2><div>- बच्चों की शिक्षा, किराया, मेडिकल खर्च वाले लोग</div><div>- अधिक भत्तों का लाभ उठा सकते हैं</div><div><br></div><h2>4. मिडिल क्लास टैक्सपेयर</h2><div>- जिनकी आय मध्यम है और खर्च/डिडक्शन ज्यादा हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या New Regime अभी भी बेहतर है?</h2><div>New Regime अभी भी डिफॉल्ट सिस्टम है, क्योंकि इसमें:</div><div>- कम टैक्स दरें</div><div>- कम कागजी काम</div><div>- सरल गणना</div><div>- लेकिन इसमें ज्यादातर डिडक्शन और छूट नहीं मिलती</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या बदलेंगे टैक्स स्लैब?</h2><div>- ड्राफ्ट नियमों में टैक्स स्लैब या दरों में बदलाव नहीं है</div><div>- बदलाव मुख्य रूप से छूट और भत्तों में हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>ध्यान रखने वाली जरूरी बातें</h2><div>- यह अभी ड्राफ्ट (प्रस्ताव) है, अंतिम कानून नहीं</div><div>- संसद की मंजूरी के बाद ही लागू होगा</div><div>- हर व्यक्ति के लिए सही विकल्प अलग होगा</div><div>- दोनों रेजीम का तुलनात्मक विश्लेषण जरूरी</div><div>&nbsp;</div><div>नए ड्राफ्ट नियमों ने Old Tax Regime को फिर से प्रासंगिक बना दिया है। खासकर वेतनभोगी और डिडक्शन का लाभ लेने वाले करदाताओं के लिए यह अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने आय, खर्च और निवेश के आधार पर दोनों विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><div>हाल के सालों में 80% से ज़्यादा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स कम टैक्स रेट और कम डिडक्शन की वजह से नए सिस्टम में शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि, पुराने सिस्टम में टैक्सपेयर्स एग्ज़ेम्प्शन और डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। चैलेंज हमेशा ब्रेकइवन पॉइंट तक पहुंचना रहा है। आने वाले समय में यह तय होगा कि टैक्सपेयर्स के लिए सरलता (New Regime) ज्यादा मायने रखती है या बचत (Old Regime)।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:01:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/old-regime-has-come-under-discussion-amid-the-new-income-tax-draft-rules</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[यदि आप क्रेडिट कार्ड्स धारक हैं तो 1 अप्रैल 2026 से होने वाले 5 महत्वपूर्ण बदलावों को समझिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/you-are-credit-card-holder-understand-the-5-significant-changes-taking-effect-from-april-1-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्रेडिट कार्ड्स धारक के लिए नया वित्त वर्ष कुछ नसीहत देता प्रतीत हो रहा है, क्योंकि आप यदि कतिपय सावधानियों को नजरअंदाज करेंगे तो किसी आयकर जोखिम में फंस जाएंगे। जी हां, नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नए इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत कुछ बड़े बदलाव लागू होने वाले हैं, जिनसे हर कार्ड होल्डर को अपनी टैक्स संबंधी आदतों पर नज़र रखनी जरूरी होगी।&nbsp;</div><div><br></div><div>वैसे तो ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, लेकिन यदि लागू होते हैं तो आपके लिए कुछ सावधानियां बरतना बेहद ज़रूरी होंगी। इसी के दृष्टिगत हम यहां 5 मुख्य बदलावों के बारे में बार करेंगे, जो निम्नलिखित हैं:-</div><div><br></div><div><b>पहला, बड़े बिल भुगतान की रिपोर्टिंग:</b> यदि कोई व्यक्ति एक साल में क्रेडिट कार्ड के कुल बिलों का भुगतान ₹10 लाख या उससे ज़्यादा डिजिटल तरीके से करता है, तो बैंक इस जानकारी को आयकर विभाग को भेज सकता है। इसके अलावा, ₹1 लाख या उससे ज़्यादा के कैश भुगतान पर भी रिपोर्टिंग का प्रावधान है, जिससे बड़े ट्रांजैक्शन पर सीधी निगरानी बढ़ जाएगी। लिहाजा, इस विषय में यदि आप सावधानी नहीं बरतेंगे तो आय कर के दायरे में आ सकते हैं और आपके आय-व्यय की निगरानी बढ़ सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-will-sebi-new-rules-curb-volatility-in-gold-and-silver-etfs" target="_blank">आखिर सेबी के नए नियम गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में उतार-चढ़ाव पर कैसे लगाम लगाएंगे? जानिए</a></h3><div><b>दूसरा, पैन (PAN) नम्बर की अनिवार्यता और डिटेल्ड रिकॉर्डिंग: </b>अधिकांश बड़े क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन या भुगतान पर पैन (PAN) की लागू सीमा को सख्ती से माना जा सकता है, यानी बिना पैन (PAN) या गलत पैन (PAN) वाले ट्रांजैक्शन पर अधिक नज़र रखी जाएगी। इससे आपके उच्च मूल्य वाले खर्च (जैसे- शॉपिंग, ट्रैवेल, ईएमआई इत्यादि) का रिकॉर्ड कर विभाग (टैक्स डिपार्टमेंट)&nbsp; के लिए आसानी से ट्रेस करने योग्य हो जाएगा, जिससे आपके आय से मेल खाने की जांच तेज़ हो सकती है। इसलिए आपको सभी खर्चे बुद्धिमानी से और नियमों के दायरे में करनी चाहिए।</div><div><br></div><div><b>तीसरा, टैक्स भुगतान में क्रेडिट कार्ड का नया विकल्प: </b>नए ड्राफ्ट रूल्स के तहत कुछ टैक्स भुगतान (जैसे टीडीएस/टीसीएस जैसी रकमें या विशेष कैटेगरी के टैक्स) क्रेडिट कार्ड से भी ऑनलाइन किए जा सकेंगे, जो पहले सीमित था। हालांकि इसके लिए लिमिट, चार्ज और टाइम फ्रेम भी फिक्स हो सकते हैं, ताकि बड़े बड़े टैक्स भुगतान को भी ट्रैक किया जा सके।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>चौथा, कंपनी/कॉर्पोरेट कार्ड पर टैक्स प्रावधान: </b>कंपनी के नाम से जारी क्रेडिट कार्ड के निजी उपयोग (जैसे व्यक्तिगत खर्च) पर अगर बिना उचित दस्तावेज़ या अप्रूवल के बड़े खर्च किए जाते हैं, तो उन्हें टैक्स योग्य व्यय/बेनिफिट माने जाने का ड्राफ्ट प्रावधान है। इससे कॉर्पोरेट कार्ड के गलत उपयोग पर फाइन या टैक्स लाइबिलिटी बढ़ सकती है, और कंपनी/कर्मचारी दोनों को अलग अलग रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत होगी।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पांचवां, ट्रांजैक्शन ट्रेसिबिलिटी और ऑडिट रिस्क: </b>क्रेडिट कार्ड से किए गए उच्च मूल्य वाले खर्च और भुगतान टैक्स डिपार्टमेंट को आसानी से दिख सकेंगे, जिससे आपके आईटी रिटर्न और खर्च के बीच मिसमैच की जांच बढ़ेगी। ऐसे में यदि आपकी आय रिपोर्ट की तुलना में क्रेडिट कार्ड पर अत्यधिक खर्च दिखाई दें, तो लिंक अप उसरवेंस या स्पलेंडिड लाइफ स्टाइल आधारित जांच का रिस्क बढ़ सकता है। कहने का तातपर्य यह कि आप कर विभाग के राडार पर होंगे।</div><div><br></div><h2># कार्ड होल्डर के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स:&nbsp;</h2><div><br></div><div>पहला, अपने क्रेडिट कार्ड खर्च को नियंत्रित रखें और अनावश्यक बड़े ट्रांजैक्शन से बचें, खासकर जब आपकी आय रिपोर्ट कम हो। दूसरा, पैन (PAN) सही और अपडेटेड रखें, और कंपनी कार्ड का सख्ती से केवल व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करें, साथ में बिलिंग और अप्रूवल का प्रूफ ज़रूर सेव करें। तीसरा, अपने क्रेडिट कार्ड खर्च को टैक्स फ्रेंडली बनाने के लिए कदम उठाएं।</div><div><br></div><div>चूंकि, ये आने वाले क्रेडिट कार्ड नियम यानी इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल्स 2026 के तहत होने वाले नए बदलाव मुख्य रूप से अधिक ट्रांजैक्शन ट्रेसिबिलिटी, सख्त रिपोर्टिंग और टैक्स ऑडिट रिस्क ला रहे हैं, जिसका सीधा असर क्रेडिट कार्ड यूजर्स के खर्च, टैक्स लाइबिलिटी और फाइनेंशियल बिहेवियर पर पड़ेगा। इसे आप निम्नलिखित बिन्दुओं से समझ सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>पहला, ज़्यादा ट्रांजैक्शन स्क्रूटनी:</b> अगर आपके क्रेडिट कार्ड से एक साल में ₹10 लाख या उससे ज़्यादा का बिल डिजिटल तरीके से चुकता किया जाता है, तो ये डिटेल आयकर विभाग के पास पहुंच सकती है। इससे आपके खर्च के पैटर्न (लक्ज़री शॉपिंग, ट्रैवल, बड़े बड़े व्यय) पर सीधी नज़र पड़ेगी और अगर आपकी घोषित आय आपके खर्च से मेल नहीं खाती तो नोटिस या लिंक अप जांच का रिस्क बढ़ जाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>दूसरा, पर्सनल खर्च और टैक्स रिस्क:</b> अब कंपनी कार्ड का व्यक्तिगत इस्तेमाल (जैसे शॉपिंग, ट्रैवल, फैमिली एक्सपेंडिचर) अगर बिना साफ दस्तावेज़ के होता है, तो उसे टैक्स योग्य पर कसा/बेनिफिट माना जा सकता है। इसका अर्थ आपके लिए अतिरिक्त टैक्स लायबिलिटी या एम्प्लॉयर की ओर से टीडीएस/प्रोफिट इन किंड की जांच भी बढ़ सकती है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>तीसरा, पैन (PAN) और डॉक्यूमेंटेशन की सख्ती:</b> बड़े ट्रांजैक्शन पर पैन (PAN) की सही और अनिवार्यता पर ज़ोर रहेगा; गलत/मिसिंग पैन (PAN) वाले बड़े खर्च टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर ज़्यादा दिखेंगे। इसलिए कार्ड यूज़र्स को बिल्स, बुकिंग कन्फर्मेशन, इम्प्लॉयर अप्रूवल जैसी डॉक्यूमेंटेशन को अब और भी साफ और आसानी से ट्रेस करने लायक रखना पड़ेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>चतुर्थ, टैक्स भुगतान में काफी आसानी: </b>अब कुछ टैक्स भुगतान क्रेडिट कार्ड से भी किए जा सकते हैं, जिससे कैश/डेबिट की तुलना में अस्थायी रूप से कैशफ्लो और रिवॉर्ड्स के फायदे मिल सकते हैं। लेकिन यहां भी लिमिट, चार्ज और रिवॉर्ड पॉलिसी के नियम सख्त हो सकते हैं, ताकि टैक्स भुगतान को भी डिजिटल ट्रेसिबल रखा जा सके।</div><div><br></div><div><b>पांचवां, खपत व्यवहार और बैंक पॉलिसी पर असर:</b> चूंकि बैंक कार्ड इंस्टीट्यूशन भी हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन रिपोर्टिंग (एसएफटी जैसी) और केवाईसी (KYC) नॉर्म्स के तहत काम करेंगे, इसलिए कॉमन यूज़र्स पर स्पेंड पैटर्न मॉनिटरिंग, रिवॉर्ड लिमिटेशन या कैप जैसे बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। बहरहाल, ज़्यादातर यूज़र्स के लिए सबसे बड़ा असर यह होगा कि अत्यधिक खर्च को “सामान्य जीवन शैली” के साथ टैक्स ऑडिट के नज़रिए से मिलाकर देखा जाएगा, इसलिए रेस्पॉन्सिबल स्पेंडिंग और रिकॉर्ड कीपिंग अब और ज़रूरी हो जाएगी।&nbsp;</div><div><br></div><h2># समझिए क्या आपके लिए खास खतरा है?</h2><div><br></div><div>अगर आप मध्यम आय, नियमित खर्च और टेंपरेट क्रेडिट कार्ड यूज़ करते हैं तो इन बदलावों से सीधा टैक्स असर सीमित रहेगा, लेकिन रिपोर्टिंग स्तर बढ़ जाएगा। अगर आप बड़े बड़े लक्ज़री खर्च, फ्रीक्वेंट ट्रैवल, या कंपनी कार्ड से निजी उपयोग करते हैं, तो टैक्स ऑडिट रिस्क और टैक्स लायबिलिटी बढ़ने की संभावना ज़्यादा है। इसलिए अपना आय स्तर, कार्ड यूज़ और खर्च पैटर्न को समझकर चलना बेहद जरूरी है।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 12:34:53 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/you-are-credit-card-holder-understand-the-5-significant-changes-taking-effect-from-april-1-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आखिर सेबी के नए नियम गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में उतार-चढ़ाव पर कैसे लगाम लगाएंगे? जानिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-will-sebi-new-rules-curb-volatility-in-gold-and-silver-etfs]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सेबी (SEBI) ने गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (ETF) में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित यानी कम करने के लिए कतिपय नए नियम प्रस्तावित किए हैं, जो मूल्य निर्धारण और प्राइस बैंड पर केंद्रित हैं। सेबी ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में उतार चढ़ाव को कम करने के लिए वैल्यूएशन (NAV तय पाकरने की प्रक्रिया) और बाजार स्तर के नियमों में बड़े बदलाव लाए हैं; जो आगामी 1 अप्रैल 2026 से पूरे वित्त वर्ष 2026–27 की शुरुआत से लागू हो रहे हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>आर्थिक विश्लेषकों का दावा है कि ये बदलाव निवेशकों के लिए अधिक स्थिरता और पारदर्शिता ला सकते हैं। क्योंकि इनका मकसद निवेशकों को अत्यधिक अस्थिरता और “पैनिक सेलिंग” से बचाते हुए गोल्ड सिल्वर ईटीएफ (ETF) को ज्यादा पारदर्शी और स्थिर उपकरण बनाना है। ऐसे में सवाल उठता है कि नए मूल्य निर्धारण नियम क्या हैं और इन नए नियमों में क्या क्या बदल रहे हैं जो लागू होंगे?&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-pension-linking-how-to-link-aadhaar-with-your-pension-account-here-the-easy-way" target="_blank">Aadhaar-Pension Linking: पेंशन अकाउंट से आधार कैसे ल‍िंक करें? ये है आसान तरीका</a></h3><div>पहला, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से भारतीय स्पॉट प्राइस लागू होंगे। जिसके दृष्टिगत अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) की वैल्यू तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों की जगह भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों (जैसे NSE, BSE) पर गोल्ड सिल्वर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के स्पॉट प्राइस को आधार बनाया जाएगा। दरअसल, सेबी का कहना है कि ये स्पॉट कीमतें घरेलू आपूर्ति मांग, टैक्स, डिलीवरी और लोकल ट्रेडिंग को बेहतर दर्शाती हैं, जिससे NAV ज्यादा रियल टाइम और भरोसेमंद होगा।</div><div><br></div><div>चूंकि अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) में भौतिक सोना-चांदी की वैल्यूएशन, भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के पोल्ड स्पॉट प्राइस (PSP) पर आधारित होगी, न कि एलएमबीए (LBMA) जैसे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर। इससे एनएवी (NAV) कैलकुलेशन में पारदर्शिता बढ़ेगी और घरेलू बाजार से बेहतर जुड़ाव होगा। एएमएफआई (AMFI), सेबी (SEBI) के परामर्श से एकसमान वैल्यूएशन पॉलिसी बनाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा, नेट एसेट वैल्यू (NAV) और मार्केट प्राइस में ज्यादा संगति स्थापित होगी। चूंकि अब ईटीएफ (ETF) की नेट एसेट वैल्यू (NAV) का कैलकुलेशन सीधे घरेलू स्पॉट प्राइस पर आधारित होगा, जिससे ईटीएफ (ETF) की ट्रेडिंग कीमत (मार्केट प्राइस) और नेट एसेट वैल्यू (NAV) के बीच फर्क कम होगा। इससे निवेशकों को अलग अलग गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ (ETF) की कीमतों की तुलना करना आसान होगी और “गलत बेंचमार्क” पर आधारित वैल्यूएशन की गड़बड़ी भी कम होगी।&nbsp;</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों की राय है कि ऐसा होने से जारी उतार-चढ़ाव पर लगाम लगेगा। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 में गोल्ड-सिल्वर कीमतों के तेज उतार-चढ़ाव के बाद सेबी (SEBI) ने प्राइस बैंड रिव्यू का प्रस्ताव दिया है। जिसके मुताबिक गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (ETF) के लिए शुरुआती बैंड ±6% का होगा, जो 15 मिनट कूलिंग ऑफ के बाद ±20% तक फ्लेक्स हो सकेगा। वो भी दिन में अधिकतम दो बार। वहीं बेस प्राइस T-2 NAV के बजाय T-1 क्लोजिंग NAV/प्राइस पर शिफ्ट हो सकता है, ताकि बाजार से बेहतर अलाइनमेंट हो।&nbsp;</div><div><br></div><div>समझा जाता है कि इससे निवेश पर असर पड़ेगा। क्योंकि ये नियम ईटीएफ (ETF) की अस्थिरता कम करेंगे, जिससे पैनिक सेलिंग रुकेगी और लॉन्ग-टर्म निवेशक सुरक्षित रहेंगे। वहीं, पारदर्शी वैल्यूएशन से विभिन्न ईटीएफ (ETF) के बीच तुलना आसान होगी, हालांकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को प्राइस बैंड से प्रतिबंध लग सकता है। गोल्ड ईटीएफ (ETF) ने पिछले साल 82% तक रिटर्न दिया है, जबकि सिल्वर ईटीएफ (ETF) ने 168-171%, ऐसे में स्थिरता से निवेश आकर्षक बनेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>पहला सवाल है कि आखिर उतार चढ़ाव पर असर क्या होगा? तो यह जान लीजिए कि अत्यधिक रात भर की उछाल पर लगाम लगेगा। चूंकि पिछले समय में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) की कीमतों में अक्सर रात के सेशन में बड़ा उतार चढ़ाव देखा गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों, फॉरेक्स और अलग अलग वैल्यूएशन मॉडल के कारण माना जाता था। इसलिए नए नियमों के तहत बेस प्राइस (base price) और प्राइस बैंड (price band) की रिव्यू भी हुई है, जिससे शॉर्ट टर्म की अस्थिरता और अत्यधिक उछाल पतन को काबू में करने की कोशिश की गई है।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा सवाल है कि आखिर निवेशकों के लिए क्या फायदे होंगे? तो यह जान लीजिए कि इससे ज्यादा पारदर्शिता आएगी। चूंकि भारतीय एक्सचेंज की स्पॉट कीमतें खुले और ट्रेसेबल होती हैं, जिससे शिकायतें और गड़बड़ी की आशंका कम होती है। वहीं, कम ओवर वॉल्यूएशन/अंडर वॉल्यूएशन की आशंका भी कम होगी। मसलन, जब सभी फंड एक ही स्पॉट प्राइस मॉडल पर चलेंगे, तो NAV और मार्केट प्राइस के बीच अनुचित प्रीमियम डिस्काउंट की संभावना घटेगी।&nbsp;</div><div><br></div><div>तीसरा सवाल है कि आपके पोर्टफोलियो पर क्या असर होगा? तो यह जान लीजिए कि ट्रेडिंग शैली को थोड़ा बदलना पड़ सकता है। यदि आप गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ (ETF) को शॉर्ट टर्म स्पेकुलेशन के लिए इस्तेमाल करते हैं तो नए प्राइस बैंड और भारतीय स्पॉट आधारित वैल्यूएशन की वजह से रात के सेशन में बहुत तेज उछाल आने की संभावना कम हो सकती है। इसका मायने है कि थोड़ा कम बोलैटिलिटी लेकिन ज्यादा “भरोसेमंद” ट्रेडिंग, जो लॉन्ग टर्म होल्डर्स के लिए फायदेमंद है।&nbsp;</div><div><br></div><div>चौथा सवाल है कि क्या एक्टिव इक्विटी फंड्स में सोना चांदी अलोकेशन भी बढ़ेगा? तो जवाब होगा कि हां, क्योंकि सेबी ने इक्विटी म्यूचुअल फंड को अब पोर्टफोलियो का तक़रीबन 35% तक सोना चांदी में लगाने की इजाज़त दी है, जिससे ज़्यादा फंड अपने इक्विटी फंड्स में गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ (ETF) या फिजिकल धातु में निवेश बढ़ा सकते हैं। इसका असर यह हो सकता है कि आपके इक्विटी फंड में भी अनजाने में गोल्ड सिल्वर एक्सपोज़र बढ़ जाए; अगर आप पहले से ही गोल्ड ETF या SGB में भारी निवेश कर रखे हैं तो ओवर एलोकेशन का खतरा हो सकता है, इसलिए अपने पोर्टफोलियो की गोल्ड सिल्वर एक्सपोज़र दोबारा देख लेना उचित रहेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>दरअसल, सेबी (SEBI) के नए नियमों के मुताबिक, एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड अपने कुल पोर्टफोलियो का अधिकतम 35% हिस्सा सोना और चांदी (Gold Silver) जैसी कीमती धातुओं में निवेश कर सकते हैं। सवाल है कि इस 35% का वास्तव में क्या मतलब है? तो यह जान लीजिए कि सबसे पहले ऊपरी इक्विटी नियम पूरा होते हैं (जैसे लार्ज कैप, मल्टी कैप आदि योजनाओं में 65–80% तक इक्विटी में रखने की बाध्यता), उसके बाद जो शेष एसेट होगा, उसका अधिकतम 35% गोल्ड, सिल्वर और InvITs जैसे विकल्पों में लगाया जा सकेगा। कहने का तातपर्य यह कि यदि आपके इक्विटी फंड में नियमानुसार 70% इक्विटी रखनी जरूरी है, तो शेष 30% के बीच अधिकतम 35% (कुल पोर्टफोलियो का ~10–11% तक) सोना चांदी में जा सकता है, हालांकि अधिकतर फंड मैनेजर पूरी 35% सीमा भरने में संकोच कर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>पांचवां सवाल है कि आखिर इसका आपके निवेश पर क्या असर होगा? तो यह जान लीजिए कि अगर आप पहले से SGB, गोल्ड ETF या फिजिकल गोल्ड में डिपॉजिट कर रहे हैं और अब आपके इक्विटी फंड भी गोल्ड सिल्वर लेने लगेंगे, तो आपके कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड सिल्वर एक्सपोज़र बढ़ कर ओवर एलोकेशन की स्थिति में जा सकता है। ऐसे में यह ठीक रहता है कि आप हर इक्विटी फंड की फैक्टशीट या स्कीम डॉक्यूमेंट में चेक करें कि वह वास्तव में गोल्ड सिल्वर में कितना निवेश कर रहा है, और अगर कर भी रहा है, तो कुल पोर्टफोलियो में धातुओं का कुल हिस्सा (SGB + गोल्ड ETF + इक्विटी फंड में गोल्ड) कितना हो रहा है।</div><div><br></div><div>सेबी के नए नियमों से इक्विटी फंड्स के रिटर्न पर सीधा बड़ा बढ़ा घटा नहीं होगा, बल्कि रिटर्न की ‘प्रकृति’ और ‘स्थिरता’ बदल सकती है। यह असर ज्यादातर तब दिखेगा जब फंड मैनेजर वास्तव में सोना चांदी (जैसे गोल्ड ईटीएफ (ETF) या फिजिकल धातु में अपने पोर्टफोलियो का 35% तक हिस्सा लगाने लगेंगे। इससे मार्केट की तेजी में रिटर्न थोड़ा धीमा हो सकता है जब शेयर बाजार में ज़ोरदार तेजी चल रही होगी, तब सोना चांदी आमतौर पर इक्विटी जितनी तेज़ी नहीं दिखाते (लंबी अवधि में भी गोल्ड का कंपाउंड ग्रोथ इक्विटी से कम रहता है)।&nbsp;</div><div><br></div><div>वहीं, अगर आपका इक्विटी फंड 20–25% तक गोल्ड सिल्वर में जा जाता है, तो उसी तेजी वाले दौरान उस फंड का रिटर्न शुद्ध स्टॉक वाले फंड की तुलना में थोड़ा कम रह सकता है, क्योंकि धातुओं का भाग ओवर ऑल रिटर्न को थोड़ा “डिल्यूट” कर देगा। इससे मार्केट में गिरावट या झटके में नुकसान कम और स्थिरता बढ़ेगी। चूंकि गोल्ड आम तौर पर क्राइसिस या गिरावट के दौरान अपने विपरीत या कम से कम धीमे गिरावट में चलता है, जिससे यह पोर्टफोलियो स्टेबलाइज़र की तरह काम करता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>वैसे में अगर बाजार में भारी ड्रॉडाउन होता है, तो गोल्ड सिल्वर वाले इक्विटी फंड का नुकसान उन फंडों से कम रह सकता है जो पूरी तरह सिर्फ शेयरों में हैं, जिससे आपको उसी जोखिम लेवल पर थोड़ा ज्यादा शांति और लॉस कंट्रोल मिल सकती है। इसलिए अब यह समझना होगा कि आपके लिए क्या मायने रखता है? अगर आप शुद्ध इक्विटी ग्रोथ चाहते हैं और उच्च बोलैटिलिटी स्वीकार है, तो ऐसे फंड जो गोल्ड सिल्वर में ज्यादा एलोकेशन रखेंगे, तेज तेजी वाले दौर में थोड़ा कम रिटर्न देंगे।&nbsp;</div><div><br></div><div>ऐसे में यदि आप रिस्क मैनेजमेंट और ड्रॉडाउन कम करना चाहते हैं, तो गोल्ड सिल्वर एक्सपोज़र वाले इक्विटी फंड आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं, बशर्ते आपने अपने कुल पोर्टफोलियो में अलग से भी गोल्ड (एसजीबी, गोल्ड ईटीएफ) न ज्यादा भर रखा हो, वरना आपका कुल गोल्ड एक्सपोज़र बहुत ज्यादा हो जाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>तो यह जान लीजिए कि गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) में भौतिक सोना-चांदी की वैल्यूएशन अब भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के पोल्ड स्पॉट प्राइस पर आधारित होगी, न कि एलएमबीए (LBMA) जैसे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर। इससे एनएवी (NAV) कैलकुलेशन में पारदर्शिता बढ़ेगी और घरेलू बाजार से बेहतर जुड़ाव होगा। एएमएफआई (AMFI), सेबी (SEBI) के परामर्श से एकसमान वैल्यूएशन पॉलिसी बनाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:17:04 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-will-sebi-new-rules-curb-volatility-in-gold-and-silver-etfs</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Aadhaar-Pension Linking: पेंशन अकाउंट से आधार कैसे ल‍िंक करें? ये है आसान तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-pension-linking-how-to-link-aadhaar-with-your-pension-account-here-the-easy-way]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल आधार कई सरकारी सर्विस और स्कीम का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है। आधार का इस्तेमाल लगभग हर सर्विस में पहचान वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है, चाहे वह बैंक अकाउंट हो, मोबाइल नंबर हो, गैस सब्सिडी हो या पेंशन हो। ऐसे में पेंशन अकाउंट, खासकर EPF (एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड) से आधार को लिंक करना फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि पेंशन अकाउंट से आधार को लिंक करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन इससे आपकी पहचान और डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करना आसान हो जाता है। इससे भविष्य में क्लेम, पेंशन ट्रांसफर और दूसरी सर्विस में देरी की संभावना कम हो सकती है। अच्छी बात यह है कि आप आसानी से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अपने पेंशन अकाउंट से आधार को लिंक कर सकते हैं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div>सरकार द्वारा विभिन्न पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता और लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार लिंकिंग को महत्वपूर्ण बनाया गया है। पेंशन खाते से आधार जोड़ने से भुगतान में देरी, फर्जीवाड़ा और त्रुटियों की संभावना कम होती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>आधार-पेंशन लिंकिंग क्यों जरूरी है?</h2><div>- सही लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित होती है</div><div>- पेंशन का सीधा बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) आसान होता है</div><div>- फर्जी या डुप्लीकेट खातों पर रोक लगती है</div><div>- समय पर भुगतान मिलने में मदद मिलती है</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-authentication-is-failing-because-the-otp-is-not-reaching-your-phone" target="_blank">आपके फोन तक ओटीपी नहीं पहुंचने से आधार ऑथेंटिकेशन हो रहा फेल! जानिए ऐसा क्यों हो रहा है?</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><h2>ऑफलाइन कैसे लिंक करें?</h2><div>- इसके लिए आपको आधार-EPF सीडिंग एप्लीकेशन फॉर्म भरना होगा। यह फॉर्म EPFO ऑफिस से मिल सकता है।</div><div>- फॉर्म भरते समय आपको अपना नाम, UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर), मोबाइल नंबर और आधार नंबर जैसी जानकारी देनी होगी।</div><div>- आपको अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और UAN की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी भी जमा करनी होंगी।</div><div>- फॉर्म और डॉक्यूमेंट जमा करने के बाद अधिकारी आपकी डिटेल्स वेरिफाई करेंगे।</div><div>- वेरिफिकेशन पूरा होने पर आपका आधार आपके EPF अकाउंट से लिंक हो जाएगा और आपको SMS या ईमेल से एक नोटिफिकेशन मिलेगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>ऑनलाइन कैसे लिंक करें?</h2><div>अगर आपके पास UAN और पासवर्ड है तो आप घर बैठे अपना आधार लिंक कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए:</div><div>- EPFO की यूनिफाइड मेंबर पोर्टल वेबसाइट पर जाएं।</div><div>- अपने UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें।</div><div>- मेन्यू में जाएं और 'KYC' ऑप्शन चुनें।</div><div>- यहां आपको अपने बैंक, PAN और आधार की डिटेल्स डालने के ऑप्शन मिलेंगे।</div><div>- आधार सेक्शन में अपना आधार नंबर और नाम (जैसा आपके आधार पर लिखा है) डालें।</div><div>- सबमिट करने के बाद आपकी एप्लीकेशन 'पेंडिंग KYC' में दिखेगी।</div><div>- वेरिफिकेशन के बाद यह 'अप्रूव्ड KYC' सेक्शन में दिखेगी, जिसका मतलब है कि आपका आधार सफलतापूर्वक लिंक हो गया है।</div><div>&nbsp;</div><h2>मोबाइल बैंकिंग/एप के जरिए</h2><div>- संबंधित बैंक का मोबाइल ऐप खोलें</div><div>- प्रोफाइल या सर्विस सेक्शन में जाएं</div><div>- “Link Aadhaar” विकल्प चुनें</div><div>- आधार नंबर डालकर OTP से वेरिफाई करें</div><div>&nbsp;</div><div>इस तरह, आप आसानी से अपने आधार कार्ड को अपने पेंशन अकाउंट से लिंक कर सकते हैं। इससे आपकी पहचान का वेरिफिकेशन आसान हो जाएगा, आपके क्लेम की प्रोसेसिंग तेज़ हो जाएगी और आपके सरकारी रिकॉर्ड अपडेट रहेंगे।</div><div>&nbsp;</div><h2>पेंशन धारकों के लिए जरूरी बातें</h2><div>- मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए, तभी ओटीपी वेरिफिकेशन संभव होगा</div><div>- नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरण बैंक व आधार में मेल खाना चाहिए</div><div>- लिंकिंग के बाद स्टेटस की पुष्टि बैंक या एसएमएस के जरिए जरूर करें</div><div>- किसी भी समस्या पर बैंक हेल्पलाइन या शाखा से संपर्क करें</div><div>&nbsp;</div><div>अपने आधार को अपने पेंशन खाते से जोड़ना एक सरल प्रक्रिया है जो आपके पेंशनभोगी अनुभव को काफी बेहतर बना सकता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से यह काम आसानी से किया जा सकता है। समय रहते आधार लिंकिंग पूरा कर लेने से भविष्य में किसी भी तरह की भुगतान संबंधी परेशानी से बचा जा सकता है। ऊपर बताए गए चरणों का पालन करके आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके भुगतान सुचारू और कुशलता से किए जाएं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 17:21:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-pension-linking-how-to-link-aadhaar-with-your-pension-account-here-the-easy-way</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आपके फोन तक ओटीपी नहीं पहुंचने से आधार ऑथेंटिकेशन हो रहा फेल! जानिए ऐसा क्यों हो रहा है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-authentication-is-failing-because-the-otp-is-not-reaching-your-phone]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल व्यक्तिगत पहचान के लिए आधार नम्बर का इस्तेमाल अनिवार्य हो चुका है। ऐसे में ऐन वक्त पर यदि आधार ऑथेंटिकेशन फेल हो जाए, तो लोगों के परेशान होना स्वाभाविक है। ऐसी समस्या प्रायः सर्वर डाउन होने या गलत नम्बर दर्ज रहने से आती है। जानकारों का कहना है कि आधार ओटीपी (OTP) न आने या ऑथेंटिकेशन फेल होने की समस्या आम है, जो मोबाइल नंबर, नेटवर्क या सर्वर से जुड़ी हो सकती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इसलिए आइए हमलोग यहां जानते हैं कि इसका मुख्य कारण क्या है और इसका समाधान क्या हो सकता है। इस आम समस्या के मुख्य कारण की बात करें तो गलत या अपंजीकृत नंबर इसका पहला कारण समझा जाता है। आमतौर पर आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर किसी कारण बस बंद रहना, या उसका बदल जाना या फिर कभी लिंक ही न किया जाना इसकी वहज हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/are-you-someone-loan-guarantor-if-the-borrower-defaults-on-the-loan" target="_blank">क्या आप भी हैं किसी के लोन गारंटर: उधारकर्ता ने लोन नहीं चुकाया तो आपको भरना पड़ेगा, इसलिए ये सावधानियां हैं जरूरी</a></h3><div>वहीं नेटवर्क की समस्या इसका दूसरा प्रमुख कारण है। कम सिग्नल, डीएनडी (DND) ऑन होने या फिर एसएमएस (SMS) इनबॉक्स फुल या टेलीकॉम डिले भी इस समस्या का कारण हो सकता है। वहीं तीसरे प्रमुख कारण के रूप में सर्वर डाउन होने को लिया जाता है। यूआईडीएआई (UIDAI) सर्वर पर लोड, मेंटेनेंस होने या फिर तकनीकी गड़बड़ी, खासकर पीक आवर्स (सुबह 10-दोपहर 2, शाम 6-10) में, की वजह से भी ऐसा हो सकता है। जिसे धैर्यपूर्वक समझने की जरूरत होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>वहीं, अन्य कारणों में नंबर लॉक होना, समयबद्ध देरी (2-3 मिनट रुकें) या सिस्टम ग्लिच होना भी हो सकता है। लिहाजा इसका तुरंत समाधान करने के लिए नेटवर्क चेक करें, डीएनडी ऑफ करें और 2-3 मिनट इंतजार करें। जबकि इस समस्या के समाधान का एक स्थायी विकल्प यह है कि एमआधार (mAadhaar) ऐप डाउनलोड कर टाइम-बेस्ड ओटीपी (OTP) इस्तेमाल करें। या फिर आप आप myaadhaar.uidai.gov.in पर "Verify Email/Mobile Number" से लिंक चेक कर सकते हैं। इसके लिए सुबह जल्दी (6-9 AM) या फिर रात में देर से (11 PM-2 AM) ट्राई करें जब ट्रैफिक कम हो।&nbsp;</div><div><br></div><div>वहीं एक दिक्कत यह भी आती है कि नंबर अपडेट कैसे करें? क्योंकि यह ऑनलाइन संभव नहीं होता और इसके लिए नजदीकी आधार एनरोलमेंट सेंटर पर जाना होता है। फिर नम्बर अपडेट करने के बाद 24-48 घंटे रुकना पड़ता है, फिर टेस्ट करें। यदि अब भी आपको समस्या का समाधान न मिले तो UIDAI टोल-फ्री नम्बर 1947 पर कॉल करके मदद लें या फिर resident.uidai.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।&nbsp;</div><div><br></div><h2># एमआधार (mAadhaar) ऐप से TOTP (टाइम-बेस्ड OTP) जनरेट करना आसान है, जो SMS OTP न आने पर वैकल्पिक रूप से करता है काम&nbsp;</h2><div>आपको पता होना चाहिये कि एमआधार (mAadhaar) ऐप से TOTP (टाइम-बेस्ड OTP) जनरेट करना आसान है, जो SMS OTP न आने पर वैकल्पिक रूप से काम करता है। आप यह जान लीजिए कि यह 6-अंकीय कोड हर 30 सेकंड बदलता है। इसलिए यह ऐप डाउनलोड करें गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) से, फिर "mAadhaar" सर्च कर डाउनलोड करें (UIDAI द्वारा, 100M+ डाउनलोड्स)। आधार रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर वाले फोन पर इंस्टॉल करें।</div><div><br></div><div>पुनः TOTP जनरेट करने के स्टेप्सऐप ओपन करें और आधार नंबर से लॉगिन करें (पहली बार रजिस्टर करें)। फिर "My Aadhaar" या "मेरा आधार" सेक्शन में जाएं। यहां "TOTP" या "TOTP Generate" ऑप्शन चुनें। 6-अंकीय TOTP कोड ऐप पर दिखेगा, जो 30 सेकंड वैलिड रहेगा। इसे आधार ऑथेंटिकेशन फॉर्म में इस्तेमाल करें। जरूरी टिप्स यह है कि SMS परमिशन दें ताकि ऐप OTP पढ़ सके। इसके लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क जरूरी होता है, क्योंकि WiFi पर कभी-कभी समस्या होती है। इसलिए मल्टीप्रोफाइल सपोर्ट: 3 प्रोफाइल ऐड कर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2># एमआधार (mAadhaar) ऐप का TOTP UIDAI की वेबसाइट या ऐप पर आधार सेवाओं के लिए SMS OTP के विकल्प के रूप में होता है इस्तेमाल&nbsp;</h2><div>एमधार (mAadhaar) ऐप का TOTP UIDAI की वेबसाइट या ऐप पर आधार सेवाओं के लिए SMS OTP के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है। यह बिना नेटवर्क के ऑफलाइन भी काम करता है। जानिए कहाँ इस्तेमाल करें e-Aadhaar डाउनलोड: myaadhaar.uidai.gov.in पर "Download Aadhaar" चुनें, TOTP ऑप्शन सिलेक्ट करें। आधार अपडेट/लॉक: पता बदलना, UID लॉक/अनलॉक, स्टेटस चेक। VID जनरेट: वर्चुअल ID बनाना। अन्य: PF e-KYC, बैंकिंग या सरकारी पोर्टल जहां आधार OTP मांगा जाए। समझिए कैसे इस्तेमाल करें: mAadhaar ऐप में प्रोफाइल ओपन कर "TOTP" या "Show TOTP" टैप करें। फिर 6-अंकीय कोड नोट करें (30 सेकंड वैलिड)। UIDAI साइट/ऐप पर SMS OTP की जगह TOTP डालें और सबमिट करें। समय सिंक रखें: ऐप का समय फोन से मैच हो। फायदे और सावधानियां: फायदे: नेटवर्क इंडिपेंडेंट, तेज। सावधानी: ऐप सिक्योर रखें, TOTP शेयर न करें।&nbsp;</div><div><br></div><h2># TOTP का उपयोग UID लॉक करने के लिए UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट या mAadhaar ऐप पर&nbsp; किया जा सकता है आसानी से&nbsp;</h2><div>TOTP का उपयोग UID लॉक करने के लिए UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट या mAadhaar ऐप पर आसानी से किया जा सकता है। यह SMS OTP न आने पर सुरक्षित विकल्प है। UID लॉक करने के स्टेप्स : https://myaadhaar.uidai.gov.in पर जाएं और "My Aadhaar" &gt; "Aadhaar Lock &amp; Unlock" चुनें। "UID Lock" पर क्लिक करें, अपना 12-अंकीय आधार नंबर, पूरा नाम और पिन कोड भरें। कैप्चा पूरा करने के बाद "Send OTP" के बजाय "TOTP" विकल्प चुनें। फिर&nbsp; mAadhaar ऐप खोलें, TOTP जनरेट करें (6-अंकीय कोड) और उसे वेबसाइट पर एंटर करें। "Submit" पर क्लिक करें; सफल होने पर कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। जरूरी टिप्स: आधार रजिस्टर्ड मोबाइल पर mAadhaar ऐप होना चाहिए; TOTP 30 सेकंड वैलिड रहता है। लॉक होने पर कोई अनधिकृत ऑथेंटिकेशन नहीं हो पाएगा। अनलॉक के लिए नया VID जनरेट करें।&nbsp;</div><div><br></div><h2># आधार UID लॉक होने पर आपकी पहचान की सुरक्षा बढ़ जाती है, लेकिन कुछ सेवाएं प्रभावित होती हैं, समझिए कैसे</h2><div>आधार UID लॉक होने पर आपकी पहचान की सुरक्षा बढ़ जाती है, लेकिन कुछ सेवाएं प्रभावित होती हैं। यह बायोमेट्रिक, OTP या डेमोग्राफिक आधारित ऑथेंटिकेशन को पूरी तरह रोक देता है। प्रभावित सेवाएं: बायोमेट्रिक KYC बंद: फिंगरप्रिंट, आईरिस या फेस से कोई वेरीफिकेशन नहीं होगा, जैसे बैंक खाता खोलना, सिम कार्ड लेना या पासपोर्ट अपडेट। OTP आधारित काम रुकें: SMS OTP से e-Aadhaar डाउनलोड, अपडेट या सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। डायरेक्ट UID वेरीफिकेशन: बैंकिंग, गैस सब्सिडी या IRCTC जैसी सेवाओं में सीधा आधार नंबर काम नहीं करेगा। अप्रभावित रहेंगी सेवाएं, VID से काम चलेगा: वर्चुअल ID (16-अंकीय) जनरेट कर इस्तेमाल करें, जो लॉक के बावजूद वैलिड रहता है। e-KYC कुछ जगह: VID या TOTP सपोर्ट वाली जगहों पर संभव। फायदे : फ्रॉड से बचाव; अनधिकृत इस्तेमाल असंभव। जरूरत पर mAadhaar ऐप या UIDAI साइट से आसानी से अनलॉक करें।</div><div><br></div><h2># लॉक आधार के साथ डायरेक्ट UID, बायोमेट्रिक या OTP आधारित सेवाएं रुक जाती हैं, जबकि कुछ वैकल्पिक तरीके से काम चलता रहता है, इसे जानिए</h2><div>लॉक आधार के साथ डायरेक्ट UID, बायोमेट्रिक या OTP आधारित सेवाएं रुक जाती हैं, लेकिन कुछ वैकल्पिक तरीके से काम चलता रहता है। मुख्य रूप से VID (वर्चुअल ID) पर निर्भर रहें। चलने वाली सेवाएं VID आधारित KYC: बैंक खाते, सिम कार्ड, पासपोर्ट या IRCTC जैसी जगहें जहां 16-अंकीय VID स्वीकार हो (UIDAI साइट से नया VID जनरेट करें)। TOTP से UIDAI सेवाएं: mAadhaar ऐप के TOTP से e-Aadhaar डाउनलोड, लॉक/अनलॉक या अपडेट स्टेटस चेक। ऑफलाइन दस्तावेज: आधार कार्ड कॉपी दिखाकर राशन, पेंशन या मैनुअल वेरीफिकेशन जहां बायोमेट्रिक न लगे। सीमाएं: बिना अनलॉक के फिंगरप्रिंट/आईरिस KYC पूरी तरह बंद। हमेशा नया VID इस्तेमाल करें, जो 24 घंटे या 10 मिनट के लिए वैलिड होता है।</div><div><br></div><h2># लॉक आधार को ऐसे करें अनलॉक&nbsp;</h2><div>लॉक आधार को अनलॉक करना आसान है, मुख्य रूप से UIDAI वेबसाइट या SMS के जरिए। SMS OTP न आने पर TOTP या VID इस्तेमाल करें। वेबसाइट से अनलॉक स्टेप्स https://myaadhaar.uidai.gov.in पर जाएं, "My Aadhaar" &gt; "Aadhaar Lock/Unlock Services" चुनें। "Unlock UID" बटन क्लिक करें। नया 16-अंकीय VID (Virtual ID) दर्ज करें (UIDAI साइट से पहले जनरेट करें)। कैप्चा भरें और "Send OTP" या "Use TOTP" चुनें। mAadhaar ऐप से TOTP कोड डालें या रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP भरें। "Submit" करें; कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। SMS से अनलॉक1947 पर "UNLOCK UID के अंतिम 4/8 अंक OTP" भेजें।टिप्सअनलॉक के बाद सेवाएं तुरंत बहाल हो जाती हैं।समस्या हो तो 1947 पर कॉल करें।&nbsp;</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:45:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/aadhaar-authentication-is-failing-because-the-otp-is-not-reaching-your-phone</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[क्या आप भी हैं किसी के लोन गारंटर: उधारकर्ता ने लोन नहीं चुकाया तो आपको भरना पड़ेगा, इसलिए ये सावधानियां हैं जरूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/are-you-someone-loan-guarantor-if-the-borrower-defaults-on-the-loan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>जब लोगों को पैसों की जरूरत होती है तो वे अक्सर लोन के लिए बैंकों का रुख करते हैं। लेकिन बैंक लोन मंजूर करने से पहले ग्राहक से कई औपचारिकताएं पूरी करने को कहता है। एक सामान्य जरूरत लोन गारंटर देना या सिक्योरिटी के तौर पर कीमती सामान गिरवी रखना है। इससे साफ पता चलता है कि अगर उधारकर्ता लोन नहीं चुका पाता है तो गारंटर भी जिम्मेदार हो जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>लेकिन अगर मुख्य उधारकर्ता लोन चुकाने में विफल रहता है तो गारंटर को कितना भुगतान करना होगा? बैंकों ने इस बारे में स्पष्ट नियम बनाए हैं। उधारकर्ताओं और गारंटर दोनों के लिए इन नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। किसी रिश्तेदार या मित्र की मदद के लिए लोग अक्सर लोन गारंटर बन जाते हैं। लेकिन यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी होती है। यदि उधारकर्ता (Borrower) समय पर कर्ज नहीं चुकाता है तो बैंक या वित्तीय संस्था सीधे गारंटर से वसूली कर सकती है। ऐसे में गारंटर बनने से पहले जोखिम समझना बेहद जरूरी है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-can-i-get-board-and-lodging-for-rs-3000-a-month" target="_blank">3000 रुपये महीने में कैसे मिलेगा रहना-खाना? 'आकांक्षा' छात्रावास में बुक‍िंग का Step-by-Step तरीका</a></h3><h2>गारंटर की जिम्मेदारी क्या होती है?</h2><div>- गारंटर, उधारकर्ता के कर्ज की सह-जिम्मेदारी लेता है।</div><div>- डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक पूरा बकाया, ब्याज और पेनल्टी गारंटर से वसूल सकता है।</div><div>- गारंटर की क्रेडिट हिस्ट्री (CIBIL स्कोर) पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>गारंटर को सहमत होने से पहले क्या करना चाहिए?</h2><div>अगर आप किसी के लोन गारंटर बनने का प्लान बना रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें:</div><div>- कर्ज लेने वाले से लोन इंश्योरेंस लेने के लिए कहें। इससे डिफ़ॉल्ट होने पर आपका रिस्क कम करने में मदद मिलती है।</div><div>- सहमत होने से पहले कर्ज लेने वाले की फाइनेंशियल हालत और रीपेमेंट की क्षमता को समझने की कोशिश करें।</div><div>- ध्यान रखें कि अगर कर्ज लेने वाला रीपेमेंट नहीं कर पाता है तो आपके अपने CIBIL स्कोर पर बुरा असर पड़ सकता है।</div><div>- सभी लोन एग्रीमेंट डॉक्यूमेंट्स ध्यान से पढ़ें। गारंटर की लायबिलिटीज़ साफ़-साफ़ लिखी होनी चाहिए।</div><div><br></div><h2>लोन डिफ़ॉल्ट होने पर बैंक क्या एक्शन लेते हैं?</h2><div>अगर कोई लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर लोन नहीं चुका पाता है तो बैंक उसे लोन डिफ़ॉल्टर मान लेता है। ऐसा होने पर:</div><div>- लोन लेने वाले का CIBIL स्कोर काफ़ी गिर जाता है, जिससे उसकी क्रेडिट रेटिंग पर असर पड़ता है।</div><div>- बैंक लोन के बदले गिरवी रखी गई किसी भी प्रॉपर्टी की नीलामी शुरू कर सकता है।</div><div>- लोन लेने वाले को भविष्य में लोन मिलने की संभावना तेज़ी से कम हो जाती है।</div><div>- कई मामलों में अगर लोन लेने वाले से रिकवरी नहीं हो पाती है तो गारंटर से संपर्क किया जाता है और उसे ज़िम्मेदार ठहराया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>ये महत्वपूर्ण सावधानियां रखना बेहद जरूरी</h2><div>1. उधारकर्ता की वित्तीय स्थिति जांचें : जिस व्यक्ति के लिए आप गारंटर बन रहे हैं, उसकी आय, नौकरी और भुगतान क्षमता को समझें। केवल रिश्ते या भावनाओं के आधार पर निर्णय न लें।</div><div>2. लोन की शर्तें पूरी तरह पढ़ें: ब्याज दर, अवधि, EMI और पेनल्टी की जानकारी लें। यह समझें कि डिफॉल्ट की स्थिति में आपकी कितनी जिम्मेदारी होगी।&nbsp;</div><div>3. हमेशा चेक करें कि लोन लेने वाले ने लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस लिया है या नहीं।</div><div>4. अपनी भुगतान क्षमता का आकलन करें: अगर उधारकर्ता भुगतान नहीं करता है तो क्या आप EMI भर सकते हैं? अपनी आय और खर्च के अनुसार निर्णय लें, ताकि भविष्य में वित्तीय संकट न हो।</div><div>5. लिखित समझौता (Agreement) रखें: उधारकर्ता के साथ एक अनौपचारिक लिखित समझौता रखें कि वह समय पर भुगतान करेगा। इससे विवाद की स्थिति में आपके पास सबूत रहेगा।</div><div>6. लोन की नियमित निगरानी करें : समय-समय पर EMI भुगतान की स्थिति जांचते रहें। बैंक स्टेटमेंट या अलर्ट्स पर नजर रखें, ताकि डिफॉल्ट का पता जल्दी चल सके।</div><div>7. जोखिम कम करने के विकल्प सोचें : यदि संभव हो तो गारंटर बनने के बजाय को-एप्लिकेंट (Co-applicant) बनने या अन्य विकल्पों पर विचार करें। बड़ी राशि के लोन में गारंटर बनने से पहले दो बार सोचें।</div><div>&nbsp;</div><div>गारंटर बनने में काफी रिस्क और ज़िम्मेदारियाँ होती हैं। कमिट करने से पहले आपको कानूनी बातों और संभावित फाइनेंशियल बोझ को पूरी तरह समझना चाहिए। अगर बॉरोअर पैसे नहीं चुकाता है तो लायबिलिटी गारंटर पर चली जाएगी। हालाँकि गारंटी से पीछे हटना मुश्किल होता है और इसके लिए अक्सर लेंडर की मंज़ूरी की ज़रूरत होती है, लेकिन लायबिलिटी आमतौर पर गारंटर की मौत के बाद उनकी एस्टेट के पास रहती है और जब तक कोई और सहमति न हो, परिवार के सदस्यों पर नहीं बढ़ती है। गारंटी की शर्तों को अच्छी तरह से रिव्यू करना और बॉरोअर की फाइनेंशियल स्थिति को समझना रिस्क कम करने के लिए ज़रूरी कदम हैं। पूरी जानकारी होने और ज़रूरी सावधानी बरतने से, आप गारंटर बनने के बारे में ज़्यादा सुरक्षित फैसला ले सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 15:40:42 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/are-you-someone-loan-guarantor-if-the-borrower-defaults-on-the-loan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[3000 रुपये महीने में कैसे मिलेगा रहना-खाना? 'आकांक्षा' छात्रावास में बुक‍िंग का Step-by-Step तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-can-i-get-board-and-lodging-for-rs-3000-a-month]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>घर से बाहर दूसरे शहर में काम करने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है रहने-खाने के लिए एक सुरक्षित ठिकाने की खोज। इस समस्या का समाधान बिहार सरकार ने निकाला है। वहीं, पटना के IAS कॉलोनी, (रूपसपुर) में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास - ‘आकांक्षा’ का शुभारंभ किया गया है। मुजफ्फरपुर, पटना के बाद अब गयाजी, दरभंगा और भागलपुर में भी ऐसे ही छात्रावास खोलने की योजना है। इसका संचालन महिला बाल विकास निगम के तहत किया जाता है। इसमें 50 महिलाओ के रहने की सुविधा है। छात्रावास में अधीक्षक, सहायक अधीक्षक, रसोइया समेत अन्य आवश्यक कर्मी भी मौजूद होंगे।</div><div>&nbsp;</div><div>महंगे शहरों में पढ़ाई या नौकरी के दौरान सस्ती और सुरक्षित रहने की व्यवस्था बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कई राज्य सरकारें और संस्थाएं कम लागत वाले छात्रावास संचालित करती हैं, जिनमें ‘आकांक्षा’ जैसे मॉडल खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। सीमित बजट, करीब 3000 रुपये मासिक में रहने और खाने की सुविधा इन्हीं योजनाओं के जरिए संभव होती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/do-not-overlook-certain-factors-when-renting-a-bank-locker" target="_blank">बैंक लॉकर लेते समय नहीं करें कुछ बातों को नजरअंदाज अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा</a></h3><h2>क्या है ‘आकांक्षा’ छात्रावास योजना?</h2><div>आकांक्षा’ छात्रावास आमतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), छात्र-छात्राओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बनाए जाते हैं। इनका उद्देश्य कम खर्च में सुरक्षित आवास और बुनियादी भोजन उपलब्ध कराना है।</div><div>&nbsp;</div><div>छात्रावास में रहने के लिए महिलाओं को किसी तरह का कोई किराया नहीं देना होगा। उन्हें केवल भोजन का खर्च उठाना होगा जो तीन हजार रुपए प्रति माह है। यहां बेड, लॉकर, टेबल, कुर्सी, 24 घंटे CCTV की निगरानी, बिजली, शुद्ध पीने का पानी के लिए RO, मनोरंजन के लिए टीवी, मुफ्त में WIFI आदि की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस चार मंजिले छात्रावास में प्रतेक तल पर दो किचन मौजूद है जिसे महिलाएं जरुरत के मुताबिक उपयोग कर सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>मुख्य सुविधाएं:</h2><div>- कम किराए में कमरा/डॉर्मिटरी</div><div>- सस्ती या सब्सिडी वाली मेस सुविधा</div><div>- पढ़ाई के लिए शांत वातावरण</div><div>- सुरक्षा और बेसिक सुविधाएं (पानी, बिजली, स्वच्छता)</div><div>&nbsp;</div><h2>3000 रुपये में कैसे मैनेज होता है रहना-खाना?</h2><div>इस बजट में रहना-खाना संभव होने के पीछे कुछ कारण हैं:</div><div>- सरकारी सब्सिडी: किराया बाजार दर से काफी कम रखा जाता है</div><div>- साझा आवास (Sharing): एक कमरे में 2–4 लोगों की व्यवस्था</div><div>- कम लागत वाली मेस: थाली आधारित या सीमित मेन्यू</div><div>- न्यूनतम सुविधाएं: केवल आवश्यक सुविधाएं, लग्जरी नहीं</div><div>&nbsp;</div><h2>आकांक्षा छात्रावास के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे होगा?</h2><div>इच्छुक महिलाएं महिला एवं बाल विकास निगम के अधिकारिक पोर्टल पर आवेदन कर सकती है। हालांक‍ि अभी तक आवेदन प्रक्र‍िया शुरू नहीं हुई है। इसमें पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवासन की सुविधा मौजूद करायी जायेगी। इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया की जाएगी, जिसके आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदन का तरीका इस प्रकार है -&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>STEP-1</h2><div>- महिला एवं बाल विकास निगम के पोर्टल https://wcdc.bihar.gov.in/ पर जाएं।</div><div>- यहां आपको नीचे टिकर ‘कामकाजी महिला छात्रावास में प्रवेश, ’ चलता दिखेगा, उस पर क्लिक करें</div><div>- अब मोबाइल या कंप्यूटर पर नया लॉगिन फॉर्म https://miswcdc.bihar.gov.in/publicweb/wwh/LoginForwwh.aspx खुलेगा</div><div><br></div><h2>STEP-2</h2><div>- आवेदन करने के लिए पहले आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा, Click Here for Registration पर क्लिक करें</div><div>- मांगी गई जानकारी भरकर रज‍िस्‍ट्रेशन करें</div><div><br></div><h2>STEP-3</h2><div>- अब अपने Registration Number और मोबाइल OTP से लॉगिन करें</div><div>- इसके बाद आवेदन फॉर्म को भरें और Save as Draft करें</div><div>- फॉर्म में भरी सभी जानकारी को अच्छे से चेक करें और Submit कर दें</div><div>- फॉर्म जमा होने के बाद Application ID मिल जाएगी</div><div>- इस आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट निकालकर रख लीजिए</div><div><br></div><h2>STEP-4</h2><div>- अब फोटो और डिजिटल सिग्नेचर अपलोड करना होगा</div><div>- ध्यान रहे कि फोटो 50KB से ज्यादा न हो</div><div>- सिग्नेचर का साइज भी 20KB से ज्यादा नहीं होना चाहिए</div><div>- अन्य दस्तावेज भी 200KB से ज्यादा साइज के न हों</div><div>&nbsp;</div><h2>आवेदन के लिए पात्रता (Eligibility)&nbsp;</h2><div>आमतौर पर जरूरी शर्तें, जैसे -&nbsp;</div><div>- छात्र या प्रतियोगी परीक्षार्थी होना</div><div>- आय सीमा (EWS/निम्न आय वर्ग)</div><div>- स्थानीय/राज्य निवास प्रमाण</div><div><br></div><h2>आवश्यक दस्तावेज&nbsp;</h2><div>- पासपोर्ट साइज फोटो</div><div>- आय प्रमाण पत्र</div><div>- पहचान पत्र&nbsp;</div><div>- एडमिशन/कोचिंग का प्रमाण (यदि लागू हो)</div><div>&nbsp;</div><div>3000 रुपये मासिक में रहना-खाना सामान्य बाजार में कठिन है, लेकिन ‘आकांक्षा’ जैसे छात्रावास इस चुनौती का व्यावहारिक समाधान देते हैं। सही जानकारी, समय पर आवेदन और पात्रता पूरी करने पर कम बजट में सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 14:57:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-can-i-get-board-and-lodging-for-rs-3000-a-month</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बैंक लॉकर लेते समय नहीं करें कुछ बातों को नजरअंदाज अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/do-not-overlook-certain-factors-when-renting-a-bank-locker]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आधुनिक बैंकिंग प्रणाली में बैंक लॉकर एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित ग्राहक सुविधा है जहां कोई भी सक्षम ग्राहक अपने गहने, दस्तावेज़ और कीमती वस्तुएं रख सकते हैं। यह बैंक की एक मजबूत कोठरी में होता है और आरबीआई के नियमों द्वारा संचालित होता है। लिहाजा, बैंक लॉकर लेते समय यदि कुछ खास बातों को आप नजरअंदाज करेंगे तो बाद में पछताना भी पड़ेगा।</div><div><br></div><div>सबसे पहले यह जान लीजिए कि बैंक लॉकर लेने के लिए ग्राहक का बैंक खाता होना जरूरी है। जबकि किराया लॉकर के आकार, स्थान (मेट्रो शहरों में अधिक और बैंक विशेष पर निर्भर करता है, जो आमतौर पर ₹1,000 से ₹10,000 सालाना प्लस जीएसटी होता है। इसके अलावा, आपको यह भी पता होना चाहिए कि लॉकर का समझौता हस्ताक्षरित होता है, जिसमें नामांकन या उत्तरजीविता क्लॉज का विकल्प रहता है। इसका लाभ उच्च सुरक्षा है क्योंकि चोरी, आग या डकैती से बचाव के लिए बैंक जिम्मेदार होता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-are-the-different-types-of-mutual-funds-and-how-to-make-the-right-investment" target="_blank">म्यूचुअल फंड्स कितने प्रकार के होते हैं और कैसे करें सही निवेश? यहां जानें जरूरी बातें</a></h3><div>वहीं सुविधाजनक पहुंच के लिहाज से बैंकिंग घंटों में उपलब्ध है, इसलिए घर पर रखने से बेहतर है। साथ ही बीमा प्रावधान भी है जिससे नुकसान पर बैंक सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा देता है (जैसे ₹5,000 किराया तो ₹5 लाख तक)। हालांकि इसकी कुछेक हानियां भी है। जैसे सीमित मुआवजा यानी लॉकर में रखी वस्तुओं का मूल्य अधिक होने पर भी मुआवजा किराए पर आधारित रहता है, इसलिए निजी बीमा जरूरी है। जबकि&nbsp; किराया और पहुंच की दृष्टि से सालाना खर्च और बैंकिंग समय तक ही उपलब्ध है। साथ ही सबूत की जरूरत है, क्योंकि नुकसान पर ग्राहक को सामान का प्रमाण देना पड़ता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इसलिए लॉकर के उपयोग का टिप्स यह है कि केवल अनुमत वस्तुएं जैसे गहने, कागजात ही रखें, नकदी या अवैध चीजें न रखें। साथ ही यह भी ध्यान में रखें नियमित किराया न चुकाने पर लॉकर सील हो सकता है। साथ ही निजी इंश्योरेंस से पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करें। रही बात&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">बैंक लॉकर लेते समय कई महत्वपूर्ण बातें नजरअंदाज करने की तो यह तय मानिए कि ऐसी लापरवाही बरतने से बाद में आपको परेशानी हो सकती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div>लिहाजा आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, सावधानीपूर्वक सभी निर्णय लेना जरूरी है, अन्यथा लेने के देने भी पड़ सकते हैं।</div><div><br></div><div>पहली सावधानी बैंक चयन को लेकर बरतें। सही बैंक चुनें जो घर के नजदीक हो और अच्छी सेवा प्रदान करता हो। पहले से खाता होने पर प्रक्रिया आसान होती है, अन्यथा एफडी की शर्त लग सकती है।</div><div><br></div><div>दूसरी सावधानी बैंक में खाता रखने की आवश्यकता है। इसलिए लॉकर के लिए बैंक में सक्रिय सेविंग्स या करेंट अकाउंट जरूरी है, कुछ बैंक 6 महीने पुराना खाता और न्यूनतम बैलेंस मांगते हैं।</div><div><br></div><div>तीसरी सावधानी एग्रीमेंट पढ़ने से जुड़ी है, इसलिए लॉकर समझौते की सभी शर्तें ध्यान से पढ़ें, जिसमें किराया, अतिरिक्त शुल्क (चाबी खोने, ज्यादा विजिट पर) शामिल हैं।</div><div><br></div><div>चौथी सावधानी नॉमिनी के नामांकन करने को लेकर है। नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) नियुक्त करें और उसके अधिकार समझें, इस्सेबमृत्यु पर प्रक्रिया आसान हो जाती है।</div><div><br></div><div>पांचवी सावधानी बीमा सीमा जागरूकता को लेकर है। ध्यान रहे कि बैंक की जिम्मेदारी किराए के 100 गुना तक सीमित है (जैसे ₹5000 किराया तो ₹5 लाख तक), और यह भी चोरी-आग पर ही लागू होता है। इसलिए प्राइवेट इंश्योरेंस लें।</div><div><br></div><div>छठी सावधानी सामान की सूची को लेकर बरतें। आप लॉकर में रखी वस्तुओं जैसे गहने, दस्तावेज की लिस्ट, फोटो और रसीदें सुरक्षित रखें; नकदी, या हथियार न रखें। हर विजिट पर अपडेट करें।</div><div><br></div><div>सातवीं सावधानी किराया समय पर दें, क्योंकि 3 साल तक किराया न देने पर बैंक लॉकर तोड़कर नीलाम कर सकता है; इसलिए नियमित उपयोग और सील-ताला चेक करें।</div><div><br></div><div>बता दें कि बैंक लॉकर में नुकसान पर आरबीआई नियमों के अनुसार बैंक अधिकतम सालाना किराए के 100 गुना तक मुआवजा देता है, लेकिन केवल बैंक की लापरवाही यानी चोरी, आग, डकैती के मामलों में। प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की गलती पर कोई मुआवजा नहीं मिलता। वहीं मुआवजा गणना सालाना लॉकर किराए × 100 तक सीमित होता है, भले ही वास्तविक नुकसान इससे ज्यादा हो। किराया जितना अधिक, मुआवजा सीमा उतनी ज्यादा।उदाहरण स्वरूप ₹2,000 सालाना किराया है तो अधिकतम ₹2,00,000 मुआवजा मिल सकता है। ₹3,000 किराया है तो अधिकतम ₹3,00,000. जबकि ₹5,000 किराया है तो अधिकतम ₹5,00,000.&nbsp;</div><div><br></div><div>इसकी क्लेम प्रक्रिया यह है कि घटना पर तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं, ततपश्चात बैंक को सूचना दें, और क्लेम फॉर्म भरें जिसके जांच के बाद राशि खाते में आती है। इस हेतु सामान की सूची की फोटो रखें। वहीं सावधानियों के तौर पर कीमती सामान का अलग बीमा कराएं, क्योंकि बैंक बीमा नहीं करता। एक बात और लॉकर में भूलकर भी नकदी या अवैध वस्तु न रखें।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 14:33:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/do-not-overlook-certain-factors-when-renting-a-bank-locker</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[म्यूचुअल फंड्स कितने प्रकार के होते हैं और कैसे करें सही निवेश? यहां जानें जरूरी बातें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-are-the-different-types-of-mutual-funds-and-how-to-make-the-right-investment]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में म्यूचुअल फंड को मुख्य रूप से स्ट्रक्चर, एसेट क्लास, इन्वेस्टमेंट के मकसद और रिस्क प्रोफ़ाइल के आधार पर बांटा जाता है। ये कैटेगरी इन्वेस्टर को ऐसी स्कीम चुनने में मदद करती हैं जो उनके फाइनेंशियल लक्ष्यों, लिक्विडिटी की ज़रूरतों और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से हों। मुख्य तरह के फंड में इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और मनी मार्केट फंड शामिल हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>म्यूचुअल फंड भारत के सबसे पसंदीदा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में से एक बन गए हैं, जो डाइवर्सिफिकेशन, प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट और कई तरह के एसेट क्लास तक आसान एक्सेस देते हैं। चाहे आप पहली बार इन्वेस्टर हों या लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो बना रहे हों, अलग-अलग तरह के म्यूचुअल फंड को समझने से आपको क्लैरिटी और कॉन्फिडेंस के साथ इन्वेस्ट करने में मदद मिलती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>म्यूचुअल फंड क्या होता है?</h2><div>म्यूचुअल फंड एक इन्वेस्टमेंट का तरीका है जो कई इन्वेस्टर्स से पैसा इकट्ठा करके स्टॉक्स, बॉन्ड्स और दूसरी सिक्योरिटीज़ के अलग-अलग तरह के पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट करता है, जिसे प्रोफेशनल फंड मैनेजर मैनेज करते हैं। हर इन्वेस्टर के पास फंड की यूनिट्स या शेयर्स होते हैं और इन यूनिट्स की वैल्यू नेट एसेट वैल्यू (NAV) से पता चलती है, जो अंदरूनी इन्वेस्टमेंट्स के परफॉर्मेंस के आधार पर ऊपर-नीचे होती रहती है। इन्वेस्टर्स सीधे तौर पर अलग-अलग सिक्योरिटीज़ के मालिक नहीं होते; वे खुद फंड के शेयर्स के मालिक होते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/can-you-get-a-personal-loan-even-with-a-low-salary" target="_blank">कम सैलरी पर भी मिलेगा पर्सनल लोन? जानिए आपकी इनकम के हिसाब से कितनी होगी लोन लिमिट</a></h3><div>आज के समय में म्यूचुअल फंड निवेश आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसमें छोटी रकम से भी लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना होती है। लेकिन निवेश से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं और आपके लिए कौन-सा सही है।</div><div>&nbsp;</div><div>भारत में म्यूचुअल फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड बाजार को नियंत्रित करता है और निवेशकों को जागरूक करने का काम Association of Mutual Funds in India करता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>म्यूचुअल फंड्स के मुख्य प्रकार</h2><div>&nbsp;</div><h2>1. इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Funds)</h2><div>- पैसा मुख्य रूप से शेयर बाजार में लगाया जाता है।</div><div>- फायदे: : लंबे समय में अधिक रिटर्न की संभावना और महंगाई को मात देने में मददगार होता है ।</div><div>- जोखिम: बाजार गिरने पर नुकसान भी हो सकता है।</div><div>- किसके लिए सही: जो 5–10 साल या उससे ज्यादा निवेश कर सकते हैं और&nbsp; जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं।</div><div><br></div><h2>2. डेट म्यूचुअल फंड (Debt Funds)</h2><div>- पैसा सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे सुरक्षित साधनों में लगाया जाता है</div><div>- फायदे:अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न।&nbsp;</div><div>- जोखिम: कम जोखिम और रिटर्न इक्विटी से कम होता है।</div><div>- किसके लिए सही: जो सुरक्षित निवेश चाहते हैं और कम समय के लक्ष्य वाले निवेशक हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>3. हाइब्रिड म्यूचुअल फंड (Hybrid Funds)</h2><div>- इक्विटी + डेट दोनों में निवेश।</div><div>- फायदे: जोखिम और रिटर्न में संतुलन और कम उतार-चढ़ाव।</div><div>- किसके लिए सही: मध्यम जोखिम वाले निवेशक और पहली बार निवेश करने वाले लोग।</div><div><br></div><h2>4. इंडेक्स फंड (Index Funds)</h2><div>- किसी शेयर बाजार इंडेक्स को कॉपी करते हैं।&nbsp;</div><div>- फायदे: कम खर्च (Low Expense Ratio) और बाजार के औसत रिटर्न के करीब प्रदर्शन।&nbsp;</div><div>- जोखिम: बाजार गिरेगा तो फंड भी गिरेगा।&nbsp;</div><div>- किसके लिए सही: लंबी अवधि के धैर्यवान निवेशक।&nbsp;</div><div><br></div><h2>5. सेक्टोरल/थीमैटिक फंड</h2><div>- किसी खास सेक्टर में निवेश जैसे IT, बैंकिंग, फार्मा।</div><div>- फायदे: सही समय पर बड़ा मुनाफा।</div><div>- जोखिम: सेक्टर गिरा तो भारी नुकसान।</div><div>- किसके लिए सही: अनुभवी निवेशक।</div><div>&nbsp;</div><h2>सही म्यूचुअल फंड कैसे चुनें?</h2><div>1. अपने लक्ष्य तय करें</div><div>- घर खरीदना</div><div>- बच्चों की पढ़ाई</div><div>- रिटायरमेंट</div><div>- आपातकालीन फंड</div><div>&nbsp;</div><h2>2. निवेश अवधि समझें</h2><div>- 1–3 साल&nbsp; - डेट फंड</div><div>- 3–5 साल -&nbsp; हाइब्रिड फंड</div><div>- 5+ साल&nbsp; - इक्विटी फंड</div><div>&nbsp;</div><h2>3. जोखिम उठाने की क्षमता पहचानें</h2><div>- कम जोखिम - डेट फंड</div><div>- मध्यम जोखिम - हाइब्रिड फंड</div><div>- अधिक जोखिम - इक्विटी फंड</div><div>&nbsp;</div><h2>4. SIP से निवेश करें</h2><div>SIP (Systematic Investment Plan) के फायदे:</div><div>- हर महीने छोटी रकम निवेश</div><div>- बाजार गिरे-चढ़े तो औसत लागत कम होती है</div><div>- आदत बनती है बचत की</div><div>&nbsp;</div><h2>5. पिछले प्रदर्शन पर ही भरोसा न करें</h2><div>- फंड मैनेजर का अनुभव</div><div>- खर्च अनुपात (Expense Ratio)</div><div>- जोखिम स्तर</div><div>- फंड का स्थायित्व</div><div>&nbsp;</div><h2>निवेश करते समय जरूरी सावधानियां</h2><div>- बिना समझे किसी की सलाह पर पैसा न लगाएं</div><div>- ज्यादा रिटर्न के लालच में जोखिम भरे फंड न चुनें</div><div>- समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करें</div><div>- टैक्स प्रभाव को भी समझें</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 19:46:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-are-the-different-types-of-mutual-funds-and-how-to-make-the-right-investment</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कम सैलरी पर भी मिलेगा पर्सनल लोन? जानिए आपकी इनकम के हिसाब से कितनी होगी लोन लिमिट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/can-you-get-a-personal-loan-even-with-a-low-salary]]></guid>
      <description><![CDATA[<h2>पर्सनल लोन क्या होता है?</h2><div>पर्सनल लोन एक बिना गारंटी (नो कोलेटरल) ऋण होता है जिसे आप अपनी व्यक्तिगत जरूरतों जैसे मेडिकल खर्च, शादी, यात्रा, शिक्षा, आदि के लिए ले सकते हैं। यह आम तौर पर बैंक या NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) के माध्यम से मिलता है। पर्सनल लोन में आय, नौकरी की स्थिरता, CIBIL स्कोर, मौजूदा EMI बोझ जैसे कई फैक्टर ध्यान में रखे जाते हैं।</div><h2><br>क्या कम सैलरी पर भी पर्सनल लोन मिलता है?</h2><div>हाँ, कम सैलरी पर भी पर्सनल लोन मिल सकता है, लेकिन इसकी मंज़ूरी और लोन राशि आपके इनकम, क्रेडिट हिस्ट्री और वित्तीय प्रोफ़ाइल पर निर्भर करती है। पारंपरिक बैंक अक्सर कुछ न्यूनतम सैलरी लिमिट रखते हैं, जैसे ₹25,000–₹30,000 प्रति माह, लेकिन कई NBFCs और कुछ बैंक ₹15,000–₹20,000 या उससे भी कम सैलेरी वालों को भी लोन देने लगे हैं। इनकम के अलावा, क्रेडिट स्कोर (CIBIL), नौकरी की स्थिरता और मौजूदा कर्ज/EMI बोझ भी मंज़ूरी को प्रभावित करते हैं। बेहतर क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मिलना आसान होता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/get-a-huge-subsidy-of-up-to-60-percent-on-solar-pumps-under-pm-kusum-yojana" target="_blank">PM कुसुम योजना के तहत सोलर पंप पर पाएं 60% तक की भारी सब्सिडी</a></h3><h2>पर्सनल लोन की पात्रता के मुख्य कारक</h2><div>- मासिक आय : बैंक/लेंडर यह देखते हैं कि आपकी आय से आप किस हद तक EMI चुका सकते हैं।</div><div>- कई बैंक न्यूनतम सैलरी ₹25,000–₹30,000 रखते हैं, लेकिन कुछ संस्थाएं कम आय वालों को भी लोन देती हैं।</div><div>- FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) : यह अनुपात यह सुनिश्चित करता है कि आपकी कुल EMI किसी तय प्रतिशत यानी 40–50% से ज्यादा न हो। अगर आपकी सैलरी कम है तो इसी अनुपात के हिसाब से लोन राशि तय होती है।</div><div>- क्रेडिट स्कोर (CIBIL) : अच्छा क्रेडिट स्कोर (जैसे 700+) होने पर लोन की मंज़ूरी आसान होती है और ब्याज दर भी बेहतर मिल सकती है।</div><div>- नौकरी की स्थिरता और अनुभव : नौकरी में स्थिरता और अनुभव का समय भी महत्वपूर्ण होता है। ज़्यादा अनुभव और निरंतर आय आपको बेहतर लोन राशि दिलवा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>आपकी सैलरी के हिसाब से कितनी लोन सीमा मिल सकती है?</div><div>आम बैंकिंग सिस्टम के अनुसार पर्सनल लोन राशि अलग अलग होती है। असली राशि अलग-अलग लेंडर्स की पॉलिसी पर निर्भर करेगी। जैसे -&nbsp;</div><div>- बहुत कम सैलरी (₹10,000–₹20,000) : मल्टीप्लायर मेथड के अनुसार आपका लोन लगभग ₹1.5 लाख से ₹2.8 लाख तक हो सकता है, अगर कोई और मौजूदा EMI नहीं चल रही है।</div><div>- ₹20,000–₹30,000 सैलरी : ₹20,000 की सैलरी पर आप आम तौर पर ₹4–₹6 लाख तक का लोन ले सकते हैं लेकिन यह आपकी EMI क्षमता पर निर्भर होती है। ₹30,000 सैलरी पर रेंज बढ़कर ₹5–₹8 लाख तक पहुंच सकता है।</div><div>- ₹40,000–₹60,000 सैलरी : इस सैलरी ब्रैकेट पर कई बैंक आपको ₹8 लाख से ₹15 लाख तक पर्सनल लोन दे सकते हैं।</div><div>- ₹75,000 और ज़्यादा सैलरी : ज़्यादा सैलरी वालों को ₹15 लाख से ₹25 लाख या इससे ज़्यादा पर्सनल लोन की इजाज़त मिल सकती है, ज़रूरी बाकी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया भी पूरे होने चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h2>ध्यान देने योग्य बातें</h2><div>- क्रेडिट स्कोर का महत्व : जितना बेहतर आपका क्रेडिट स्कोर, जितनी ज़्यादा संभावना लोन की मंज़ूरी की होती है। कम स्कोर वाले उधारकर्ता को लोन मिलना मुश्किल हो सकता है या उन्हें ज़्यादा ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।</div><div>- EMI बोझ और FOIR : यदि आपकी पहले से दूसरी ऋण की EMI चल रही है तो आपकी पात्रता कम हो सकती है। बैंक FOIR नियम के तहत यह तय करते हैं कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में सुरक्षित रूप से खर्च हो सकता है।</div><div>- नौकरी का प्रकार : स्थिर सरकारी नौकरी, प्रतिष्ठित प्राइवेट जॉब या लंबे समय का अनुभव आपकी पात्रता बढ़ा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>डॉक्यूमेंटेशन</h2><div>सब्सिडी पर निम्न डॉक्यूमेंट ज़रूरी होते हैं:</div><div>- पहचान (PAN, आधार)</div><div>- पता प्रमाण</div><div>- अंतिम 3–6 महीने की सैलरी स्लिप्स</div><div>- बैंक बैलेंस</div><div>- नौकरी का प्रमाण / कंपनी डॉक्यूमेंट</div><div>&nbsp;</div><div>कम सैलरी पर भी पर्सनल लोन संभव है, लेकिन लोन की राशि आपकी आय, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता और मौजूदा फाइनेंशियल देनदारियों पर निर्भर करती है। छोटे सैलरी ब्रैकेट में भी आप लाखों का लोन पा सकते हैं, लेकिन यह ज़रूरी है कि&nbsp; आप अपनी फाइनेंशियल प्रोफ़ाइल को मजबूत रखें। लोन आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता ऑनलाइन कैलकुलेटर से चेक कर लें तथा विभिन्न लेंडरों के प्रस्ताव की तुलना करें।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 19:49:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/can-you-get-a-personal-loan-even-with-a-low-salary</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PM कुसुम योजना के तहत सोलर पंप पर पाएं 60% तक की भारी सब्सिडी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/get-a-huge-subsidy-of-up-to-60-percent-on-solar-pumps-under-pm-kusum-yojana]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत एक कृषि देश है और यहाँ के किसानों के लिए सिंचाई हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली की अनिश्चित आपूर्ति खेती की लागत को बढ़ा देती है। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय में वृद्धि करना है।</div><div><br></div><h2>PM कुसुम योजना क्या है?</h2><div>PM कुसुम योजना, या प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, भारत सरकार की एक स्कीम है जिसे मार्च 2019 में खेती में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। यह सोलर पंप और पावर प्लांट के लिए फाइनेंशियल मदद देकर किसानों की मदद करती है, जिससे डीज़ल और ग्रिड बिजली पर उनकी निर्भरता कम होती है और इनकम बढ़ती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/in-this-state-the-government-will-now-bear-the-expenses-of-serious-diseases" target="_blank">Chikitsa Pratipoorti Yojana 2025: इस राज्य में अब गंभीर बीमारियों का सरकार उठाएगी खर्च, जानें योजना का कौन उठा सकता है फायदा</a></h3><div>यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत किसानों को अपने खेतों में सौर ऊर्जा संचालित पंप (Solar Pumps) लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। योजना को मुख्य रूप से तीन घटकों (Components) में बांटा गया है:</div><div><br></div><div>- घटक A: बंजर भूमि पर छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना।</div><div>- घटक B: स्टैंडअलोन सोलर पंपों की स्थापना (जहाँ बिजली ग्रिड नहीं है)।</div><div>- घटक C: मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण (Solarization)।</div><div><br></div><h2>PM-KUSUM के मुख्य उद्देश्य</h2><div>यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई लागत कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। डीजल पंपों को सौर पंपों से बदलकर प्रदूषण घटाती है और अतिरिक्त बिजली बेचने का मौका देती है। प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:</div><div>- खेती का डी-डीज़लाइज़ेशन: PM-KUSUM का एक मुख्य लक्ष्य सोलर पावर वाले पंपों को बढ़ावा देकर सिंचाई के लिए डीज़ल पर निर्भरता कम करना है। यह बदलाव न केवल किसानों के लिए फ्यूल की लागत कम करता है, बल्कि कार्बन एमिशन को कम करके एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी में भी योगदान देता है।</div><div>- किसानों के लिए एनर्जी सिक्योरिटी: इस स्कीम का मकसद किसानों को भरोसेमंद और सस्ती एनर्जी देना है, जिससे यह पक्का हो सके कि उन्हें सिंचाई और खेती के दूसरे कामों के लिए बिजली मिले। यह ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर ज़रूरी है जहाँ बिजली की सप्लाई में उतार-चढ़ाव हो सकता है।</div><div>- किसानों की इनकम बढ़ाना: किसानों को सोलर पावर से अपनी बिजली बनाने में मदद करक यह स्कीम उन्हें ज़्यादा एनर्जी वापस ग्रिड को बेचने की इजाज़त देती है, जिससे इनकम का एक और सोर्स बनता है। इससे उनकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी काफी बढ़ सकती है।</div><div>- रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देना: PM-KUSUM, पूरे एनर्जी मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा बढ़ाने के भारत के कमिटमेंट से मेल खाता है। यह स्कीम डीसेंट्रलाइज़्ड सोलर पावर प्लांट लगाने में मदद करती है, जिससे 2030 तक नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्स से 40% इंस्टॉल्ड कैपेसिटी पाने के नेशनल गोल में मदद मिलती है।</div><div>- सस्टेनेबल खेती के लिए मदद: यह पहल इको-फ्रेंडली सिंचाई सिस्टम के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है, जिससे खेती के सस्टेनेबल तरीकों को बढ़ावा मिलता है। सोलर पंप देकर यह स्कीम पानी बचाने और खेती के पुराने तरीकों से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद करती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>सब्सिडी का गणित: कितना होगा लाभ?</h2><div>इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इस पर मिलने वाली भारी सब्सिडी है, जो किसानों के वित्तीय बोझ को कम करती है:</div><div>- केंद्र सरकार की हिस्सेदारी: केंद्र सरकार कुल लागत का 30% हिस्सा सब्सिडी के रूप में देती है।</div><div>- राज्य सरकार की हिस्सेदारी: संबंधित राज्य सरकार भी 30% तक का अनुदान प्रदान करती है।</div><div>- किसानों का योगदान: किसान को कुल लागत का केवल 10% से 40% (राज्यवार भिन्नता के आधार पर) भुगतान करना होता है।</div><div>- ऋण सुविधा: शेष राशि के लिए बैंक से आसान किश्तों पर ऋण लेने की सुविधा भी उपलब्ध है।</div><div>- विशेष राज्यों के लिए: उत्तर-पूर्वी राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र की सब्सिडी 50% तक हो सकती है।</div><div><br></div><h2>योजना के मुख्य लाभ</h2><div>- मुफ्त सिंचाई: एक बार सोलर पंप लगने के बाद बिजली बिल या डीजल के खर्च से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।</div><div>- अतिरिक्त आय का स्रोत: यदि किसान अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करता है तो वह उसे सरकार (डिस्कॉम) को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकता है।</div><div>- दिन में सिंचाई: सोलर पंप सूर्य की रोशनी से चलते हैं, जिससे किसानों को रात के समय खेतों में पानी देने की समस्या से छुटकारा मिलता है।</div><div>- पर्यावरण संरक्षण: यह स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।</div><div><br></div><h2>आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता</h2><div>इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने अनिवार्य हैं:</div><div>- आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र।</div><div>- भूमि के दस्तावेज (जमाबंदी या खसरा-खतौनी की नकल)।</div><div>- बैंक खाता विवरण (पासबुक की प्रति)।</div><div>- मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)।</div><div>- आवेदक के पास सिंचाई के लिए जल का स्रोत होना आवश्यक है।</div><div><br></div><h2>आवेदन कैसे करें?</h2><div>पीएम कुसुम योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया मुख्य रूप से ऑनलाइन है। किसान अपने राज्य के ऊर्जा विभाग (Renewable Energy Department) या आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>कई फर्जी वेबसाइटें इस योजना के नाम पर पंजीकरण शुल्क मांगती हैं। कृपया केवल सरकारी वेबसाइटों (जैसे www.mnre.gov.in) का ही उपयोग करें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें।</div><div><br></div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 19:20:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/get-a-huge-subsidy-of-up-to-60-percent-on-solar-pumps-under-pm-kusum-yojana</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Fund of Funds: एक निवेश, अनेक मौके, क्या है निवेश का यह यूनिक तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/fund-of-funds-one-investment-many-opportunities-what-is-this-unique-way-of-investing]]></guid>
      <description><![CDATA[<h2>फंड ऑफ फंड्स (FOF) क्या है?</h2><div>फंड ऑफ फंड्स (FoF) या सुपर फंड एक तरह का म्यूचुअल फंड है जो आपको एक ही इन्वेस्टमेंट के ज़रिए कई फंड में इन्वेस्ट करने की सुविधा और फ़ायदे देता है। फंड ऑफ फंड्स का मतलब है एक तरह का म्यूचुअल फंड जो दूसरे म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करता है। इसलिए, सीधे स्टॉक या दूसरे इंस्ट्रूमेंट में इन्वेस्ट करने के बजाय, फंड मैनेजर अलग-अलग म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट करता है।</div><div>&nbsp;</div><div>हाल के सालों में फंड-ऑफ-फंड्स अप्रोच बढ़ा है, खासकर पेंशन फंड और एंडोमेंट जैसे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के बीच जो रिस्क को बांटना और ज़्यादा से ज़्यादा रिटर्न पाना चाहते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/did-not-receive-your-itr-refund-for-2025-follow-this-method-get-rid-of-your-problems-instantly" target="_blank">ITR Refund 2025 नहीं मिला? अपनाएं ये तरीका झटपट परेशानी होगी दूर</a></h3><div>हालांकि, FOF अपनी कई लेयर की फीस के लिए बदनाम हैं। आप न केवल उस फंड के लिए पेमेंट करते हैं जिसमें आपने सीधे इन्वेस्ट किया है, बल्कि उन फंड्स के लिए भी पेमेंट करते हैं जहां एसेट मैनेजर आपका कैपिटल लगाता है। FOF इन्वेस्टिंग को और भी मुश्किल बना देते हैं, क्योंकि एडिशनल फंड्स का एलोकेशन आपके रिपोर्ट किए गए एलोकेशन से और भी अलग होता है। आईये यहाँ हम जानते&nbsp; हैं कि ये फंड कैसे काम करते हैं और उनके पोटेंशियल फायदे और नुकसान क्या हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>FOF की प्रमुख विशेषताएं&nbsp;</h2><div>- FOFs ज़्यादा डाइवर्सिफिकेशन के लिए दूसरे फंड्स में इन्वेस्टमेंट को पूल करते हैं।</div><div>- फंड मैनेजर अलग-अलग तरह के फंड्स में डाइवर्सिफिकेशन करने और ऐसी एक्सपर्टाइज़ पाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं जो उनके पास नहीं हो सकती।</div><div>- आम तौर पर इन्वेस्टर्स को दूसरे फंड्स की तुलना में ज़्यादा एक्सपेंस रेशियो की उम्मीद करनी पड़ती है।</div><div>- FOFs अपने ज़्यादा इन्वेस्टमेंट एक्सपोजर की वजह से ज़्यादा स्टेबल लेकिन कम रिटर्न का पोटेंशियल देते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>FoF कैसे काम करता है?</h2><div>- म्यूचुअल फंड अलग-अलग सिक्योरिटीज़, जैसे इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करते हैं। वे अपने इन्वेस्टर्स की ओर से कंपनी के स्टॉक्स और डेट पेपर्स में इन्वेस्ट करते हैं।</div><div>- FoF दूसरे म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करता है। यहां, फंड मैनेजर अंडरलाइंग इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी के आधार पर एक ही फंड या अलग-अलग फंड हाउस के फंड्स में इन्वेस्ट कर सकता है।</div><div>- FOF इन्वेस्टर्स से कैपिटल इकट्ठा करके और उसे अंडरलाइंग फंड्स में लगाकर काम करते हैं। ज़्यादातर, FOF मैनेजर इन फंड्स को उनके परफॉर्मेंस, मैनेजमेंट क्वालिटी और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी के आधार पर चुनते हैं। इसमें ड्यू डिलिजेंस शामिल है, जिसमें पिछले रिटर्न, रिस्क के माप और फंड मैनेजर्स की एक्सपर्टीज़ का एनालिसिस शामिल है।</div><div>&nbsp;</div><h2>FoF का उद्देश्य क्या है?</h2><div>फंड-ऑफ-फंड्स स्ट्रैटेजी के पीछे मुख्य आइडिया यह है कि अलग-अलग हेज फंड स्ट्रैटेजी को एक ही पोर्टफोलियो में मिलाकर, इन्वेस्टर अलग-अलग फंड में इन्वेस्ट करने के मुकाबले कम रिस्क के साथ ज़्यादा रिटर्न पा सकते हैं। इस डाइवर्सिफिकेशन का मकसद फंड इन्वेस्टिंग में मौजूद उतार-चढ़ाव को कम करना है, जिससे संभावित मुनाफे के लिए ज़्यादा स्टेबल रास्ता मिलता है। फंड ऑफ फंड्स सभी तरह की स्ट्रैटेजी के लिए मिलते हैं और इनमें हेज, एक्सचेंज-ट्रेडेड, म्यूचुअल, प्राइवेट इक्विटी और दूसरे फंड शामिल हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>फंड ऑफ फंड्स (FOFs) के प्रकार</h2><div>फंड ऑफ फंड्स, फंड के इन्वेस्टमेंट के मकसद के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। नीचे FOFs के अलग-अलग प्रकार दिए गए हैं:</div><div>- एसेट एलोकेटर या मल्टी-एसेट फंड: एसेट एलोकेटर या मल्टी-एसेट फंड अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसी कमोडिटी में इन्वेस्ट करते हैं। यह आपको पोर्टफोलियो रिस्क को कम करके बेहतर रिटर्न पाने के लिए अलग-अलग एसेट क्लास में अपने इन्वेस्टमेंट को डायवर्सिफाई करने में मदद करता है।</div><div>- इंटरनेशनल फंड ऑफ फंड्स: इंटरनेशनल FOFs इंटरनेशनल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं, जो ग्लोबल कंपनियों में इन्वेस्ट करते हैं। इन इंटरनेशनल FOFs में इन्वेस्टर्स को किसी विदेशी ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोलने की परेशानी के बिना बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में इनडायरेक्ट एक्सपोजर मिलता है।&nbsp;</div><div>- ETF-बेस्ड फंड ऑफ़ फंड्स : ETF, या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, एक मार्केटेबल सिक्योरिटी है जो NIFTY 50 या BSE SENSEX जैसे बड़े मार्केट इंडेक्स की नकल करने वाले इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स की बास्केट में इन्वेस्ट करता है। ETFs में इन्वेस्ट करने के लिए, एक ट्रेडिंग डीमैट अकाउंट ज़रूरी है।</div><div>- गोल्ड फंड ऑफ़ फंड्स: इन्वेस्टर गोल्ड ETFs की यूनिट्स खरीदकर सोने में इन्वेस्ट कर सकते हैं। ये गोल्ड ETFs 99.5% प्योरिटी वाले सोने में इन्वेस्ट करते हैं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>FOF में इन्वेस्ट करने के फायदे</h2><div>- प्रीमियम इन्वेस्टमेंट के मौकों तक एक्सेस: FOF अक्सर खास इन्वेस्टमेंट के मौकों तक एक्सेस देते हैं, जिन तक इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स शायद नहीं पहुंच पाते।&nbsp;</div><div>- डायवर्सिफिकेशन: FOF अलग-अलग अंडरलाइंग फंड में इन्वेस्ट करके कई एसेट क्लास और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी में रिस्क को फैलाकर बहुत अच्छा डायवर्सिफिकेशन देते हैं।&nbsp;</div><div>- प्रोफेशनल मैनेजमेंट: FOF का एक और बड़ा फायदा उनका प्रोफेशनल मैनेजमेंट है। अनुभवी फंड मैनेजर पूरी ड्यू डिलिजेंस करते हैं, क्वालिटी फंड चुनते हैं और पोर्टफोलियो को लगातार मॉनिटर और रीबैलेंस करते हैं।&nbsp;</div><div>- सिंपल इन्वेस्टमेंट प्रोसेस: FOFs कई फंड्स को एक ही इन्वेस्टमेंट व्हीकल में बंडल करके इन्वेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाते हैं। यह सुविधा इन्वेस्टर्स को हर इन्वेस्टमेंट पर खुद रिसर्च और मैनेज किए बिना बड़े मार्केट एक्सपोजर और शायद असरदार डाइवर्सिफिकेशन पाने में मदद करती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 18:12:01 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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