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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[यदि गलती से यूपीआई भुगतान किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी या बैंक खाते में हो गया तो ऐसे वापस पाएं अपने भुगतान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/upi-payment-is-made-to-the-wrong-mobile-number-or-upi-id-here-is-how-you-can-recover-your-payment]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>डिजिटल भुगतान के आधुनिक दौर में यूपीआई से पैसे भेजना बेहद आसान हो गया है। लेकिन जल्दबाजी में गलत यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर या बैंक खाते से जुड़े व्यक्ति को यदि पैसे ट्रांसफर हो जाएं, तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गलत खाते में भेजे गए पैसे वापस मिल सकते हैं? यदि हां तो इसकी शिकायत कहां करें और बैंक कितने समय में आपकी मदद कर सकता है?</p><p>पेशेवर अनुभव बताता है कि गलत यूपीआई भुगतान होने पर घबराने के बजाय तुरंत सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। हालांकि, पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती और परिणाम मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी को भी यूपीआई भुगतान करने वक्त आपका सचेष्ट रहना जरूरी है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/from-machinery-to-employee-insurance-what-changes-is-the-government-planning-to-introduce-in-gst-2" target="_blank" rel="noopener">मशीनरी से लेकर कर्मचारी बीमा तक, रिफॉर्म या फिर आने वाला है कोई स्टॉर्म! GST 2.0 में अब क्या बदलाव करने जा रही है सरकार?</a></p><p>सवाल है कि आखिर गलत यूपीआई भुगतान होने पर क्या करें? तो जानकार बताते हैं कि निम्नलिखित 6 जरूरी कदम अवश्य और शीघ्रता पूर्वक उठाएं।</p><p>एक, सबसे पहले ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें। यूपीआई ऐप में पेमेंट हिस्ट्री खोलें और ट्रांजैक्शन आईडी, यूटीआर/आरआरएन नंबर, तारीख, रकम तथा प्राप्तकर्ता की यूपीआई आईडी का स्क्रीनशॉट सुरक्षित कर लें।</p><p>दो, यूपीआई ऐप में शिकायत दर्ज करें। जिस ऐप से भुगतान किया है, उसमें संबंधित ट्रांजैक्शन चुनकर हेल्प, सपोर्ट या रेज कंप्लेंट &nbsp;विकल्प से शिकायत करें। शिकायत का रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।</p><p>तीन, अपने बैंक को लिखित शिकायत दें। बैंक की शाखा या आधिकारिक ग्राहक सेवा से संपर्क करें। स्पष्ट बताएं कि भुगतान गलती से गलत लाभार्थी को चला गया है। ट्रांजैक्शन का विवरण और शिकायत संख्या दें तथा लिखित जवाब मांगें।</p><p>चार, प्राप्तकर्ता से संपर्क करने का प्रयास करें। यदि प्राप्तकर्ता की पहचान या संपर्क जानकारी वैध तरीके से उपलब्ध है, तो विनम्रता से रकम लौटाने का अनुरोध करें। बैंक से भी उचित प्रक्रिया के तहत सहायता मांगें। सफलतापूर्वक पूरा हुआ भुगतान अपने आप वापस नहीं होता।</p><p>पांच, एनपीसीएल के शिकायत माध्यम का उपयोग करें। यदि ऐप या बैंक से समाधान नहीं मिलता, तो एनपीसीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्प देखें।</p><p>छह, जरूरत पड़ने पर RBI के पास शिकायत करें। यदि संबंधित बैंक या विनियमित संस्था को शिकायत देने के बाद 30 दिनों में जवाब नहीं मिलता, या समाधान संतोषजनक नहीं है, तो लागू पात्रता और नियमों के अनुसार आरबीआई के शिकायत प्रबंधन पोर्टल का सहारा लिया जा सकता है।</p><p>सवाल है कि क्या गलत यूपीआई &nbsp;पेमेंट का पैसा वापस मिलना निश्चित है? तो जवाब होगा नहीं। यहां दो स्थितियों में अंतर समझना जरूरी है। पहली स्थिति और दूसरी क्या हो सकता है? &nbsp;</p><p>पहला, यदि पैसा कटा, लेकिन ट्रांजैक्शन विफल रहा तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत रकम वापस आ सकती है। &nbsp; &nbsp;&nbsp;<br>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;<br>दूसरा, ट्रांजैक्शन सफल रहा, लेकिन गलत व्यक्ति को पैसा चला गया। शिकायत और बैंक की प्रक्रिया से मदद मिल सकती है, लेकिन रिफंड सुनिश्चित नहीं है। क्योंकि बिना अनुमति किसी ने खाते से पैसा निकाला तो तुरंत बैंक को सूचित करें और इसे अनधिकृत लेनदेन के रूप में रिपोर्ट करें। &nbsp; &nbsp;</p><p>एनपीसीएल के अनुसार, विफल यूपीआई लेनदेन में पैसा वापस न आने पर बैंक से संपर्क करना चाहिए। लेकिन सफल व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान को केवल गलत यूपीआई आईडी डालने के कारण स्वतः रिवर्स नहीं किया जाता।</p><p>विशेषज्ञ बताते हैं कि निम्नलिखित गलतियों से जरूर बचें। एक, पैसा वापस दिलाने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को अतिरिक्त रकम न भेजें। दो, अपना यूपीआई पिन, ओटीपी या बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करें। तीन, पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन, डालने या अनजान कलेक्ट रिक्वेस्ट &nbsp;स्वीकार करने से बचें। चार, शिकायत के सभी दस्तावेज और बैंक का जवाब सुरक्षित रखें।</p><p>अंततोगत्वा आप यह हमेशा याद रखें कि गलत यूपीआई भुगतान होने पर जितनी जल्दी शिकायत दर्ज करेंगे, उतनी जल्दी मामले की जांच शुरू कराने का प्रयास कर सकेंगे। फिर भी पैसा वापस मिलने का निर्णय लेनदेन की प्रकृति और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। डिजिटल भुगतान की सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। भुगतान करने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और यूपीआई आईडी जांचना, गलत ट्रांसफर से बचने का सबसे आसान उपाय है।</p><p>- कमलेश पांडेय<br>वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 16:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/upi-payment-is-made-to-the-wrong-mobile-number-or-upi-id-here-is-how-you-can-recover-your-payment</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या एलआईसी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम समय पर नहीं भर पाने से पुरानी राशि डूब जाती है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-the-premium-for-an-lic-insurance-policy-is-not-paid-on-time-is-the-amount-already-paid-lost]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>एलआईसी की कोई न कोई पॉलिसी आज हर किसी के पास है, क्योंकि इसका स्लोगन है- जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी। लेकिन आमलोगों के मन में अकसर यह सवाल उठता है कि क्या एलआईसी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम समय पर नहीं भर पाने से पुरानी राशि डूब जाती है? जवाब होगा नहीं, लेकिन इस हेतु भी कुछ नियम कायदे हैं, जिन्हें हम बारीकीपूर्वक यहां पर समझेंगे।</p><p>एलआईसी पॉलिसी का प्रीमियम समय पर न भरने पर पहले से जमा की गई पूरी राशि आम तौर पर तुरंत “डूब” नहीं जाती। लेकिन आगे क्या होगा, यह पॉलिसी के प्रकार और आपने कितने वर्षों तक प्रीमियम भरा है, इस बात पर निर्भर करता है। एलआईसी के मौजूदा नियमों के अनुसार मुख्य बातें ये हैं:</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/facing-problems-with-pf-transfer-now-update-your-date-of-exit-on-the-uan-portal-from-home" target="_blank" rel="noopener">PF ट्रांसफर में आ रही है दिक्कत? अब घर बैठे UAN पोर्टल पर अपडेट करें Date of Exit</a></p><p>एक, पहले मिलता है ग्रेस पीरियड: वार्षिक, छमाही और तिमाही प्रीमियम में सामान्यतः 30 दिन की ग्रेस पीरियड। मासिक प्रीमियम में ग्रेस पीरियड 15 दिन होता है। इस अवधि में पॉलिसी चालू मानी जाती है और नियमों के अनुसार बीमा सुरक्षा जारी रहती है।</p><p>दो, ग्रेस पीरियड के बाद प्रीमियम नहीं भरा तो?: पॉलिसी लेप्स &nbsp;(व्यपगत) हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि पहले जमा किए सारे पैसे उसी क्षण खत्म हो गए। कई पॉलिसियों में पुनरुद्धार या पैड-अप जैसे विकल्प उपलब्ध होते हैं।</p><p>तीन, पुरानी पॉलिसी को फिर चालू कराया जा सकता है: एलआईसी के नियमों में लेप्स हुई पॉलिसी को कुछ शर्तों के अधीन रिवाइव करने का प्रावधान है। सामान्यतः बकाया प्रीमियम के साथ ब्याज और आवश्यक स्वास्थ्य/बीमायोग्यता संबंधी औपचारिकताएँ पूरी करनी पड़ सकती हैं। पॉलिसी के प्रकार के अनुसार रिवाइवल की समय-सीमा अलग हो सकती है।</p><p>चार, अगर कई साल प्रीमियम भर चुके हैं: कुछ पारंपरिक एलआईसी पॉलिसियों में पर्याप्त अवधि तक प्रीमियम भरने के बाद &nbsp;नॉन-फ़ॉरफ़ीचर/पेड-अप लाभ मिल सकते हैं। एलआईसी की सामान्य नीति-शर्तों में कम-से-कम 3 पूर्ण वर्षों के प्रीमियम भुगतान के बाद कुछ नॉन-फ़ॉरफ़ीचर और समर्पण मूल्य प्रावधान बताए गए हैं।</p><p>पांच, लेकिन एक महत्वपूर्ण अपवाद इस प्रकार है: कुछ विशेष पॉलिसियों में यदि एक पूर्ण वर्ष का प्रीमियम भी पूरा नहीं हुआ और आगे प्रीमियम नहीं भरा गया, तो सभी लाभ समाप्त हो सकते हैं और अब तक दिए गए प्रीमियम वापस न मिलें—उदाहरण के लिए एलआईसी के कुछ उत्पादों की शर्तों में ऐसा स्पष्ट है। इसलिए हर एलआईसी पॉलिसी पर एक ही नियम लागू नहीं होता।</p><p>आइए एक आसान उदाहरण से इसे समझते हैं। मान लीजिए आपने 10 साल की एलआईसी पॉलिसी में 6 साल प्रीमियम भरा और फिर 7वें साल का प्रीमियम नहीं भरा तो ड्यू डेट, ग्रेस पीरियड, लैप्स, रिवाइवल/पेड-अप जैसे विकल्प चुने जा सकते हैं।</p><p>इस स्थिति में पहले के 6 वर्षों की जमा राशि को केवल इसलिए स्वतः “शून्य” नहीं माना जाएगा। आपकी वास्तविक राशि/लाभ पॉलिसी के नियम, पेड-अप वैल्यू, सरेंडर वैल्यू, बोनस और रिवाइवल की स्थिति पर निर्भर करेंगे।</p><p>सबसे जरूरी बात यह है कि पॉलिसी बंद हो गई है तो उसे छोड़ने के बजाय पहले एलआईसी से उसका मौजूदा पॉलिसी की स्थिति, रिवाइवल की रकम और पेड-अप/सरेंडर वैल्यू पता करना बेहतर है। एलआईसी भी पॉलिसी स्टेटस और रिवाइवल की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कहता है।</p><p>LIC की आधिकारिक Policy Conditions उसकी वेबसाइट (https://licindia.in/hi/policy-conditions से हासिल की जा सकती है।</p><p>- कमलेश पांडेय<br>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 13:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-the-premium-for-an-lic-insurance-policy-is-not-paid-on-time-is-the-amount-already-paid-lost</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PF ट्रांसफर में आ रही है दिक्कत? अब घर बैठे UAN पोर्टल पर अपडेट करें Date of Exit]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/facing-problems-with-pf-transfer-now-update-your-date-of-exit-on-the-uan-portal-from-home]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नौकरी बदलने के बाद कर्मचारियों को अक्सर अपने पुराने प्रोविडेंट फंड (PF) अकाउंट से नए अकाउंट में बैलेंस ट्रांसफर करने या विड्रॉल फाइल करने में दिक्कत होती है। इसका सबसे आम कारण यह है कि पुरानी कंपनी ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के रिकॉर्ड में डेट ऑफ एग्जिट (Date of Exit) रिकॉर्ड नहीं किया होता है। अगर यह डेट अपडेट नहीं होती है तो आपका PF ट्रांसफर और विड्रॉल दोनों प्रोसेस रुक सकते हैं।</p><p>अगर पुरानी कंपनी का PF खाता नए खाते में ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है तो इसकी एक वजह Date of Exit यानी नौकरी छोड़ने की तारीख का EPFO रिकॉर्ड में अपडेट न होना हो सकती है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए कर्मचारी को हमेशा पुराने नियोक्ता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। EPFO सदस्य खुद UAN पोर्टल के जरिए Date of Exit अपडेट कर सकता है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/krishak-samriddhi-yojana-how-will-farmers-get-a-loan-of-rs-6-lakh" target="_blank" rel="noopener">कृषक समृद्धि योजना: किसानों को 6 लाख का लोन कैसे मिलेगा, किस्त कितनी होगी, ब्याज में छूट कितनी मिलेगी?</a></p><h2>PF ट्रांसफर के लिए Date of Exit क्यों जरूरी?</h2><p>EPFO के अनुसार, पिछली नौकरी की Date of Exit दर्ज होना ऑनलाइन PF ट्रांसफर के लिए जरूरी है। इसके बिना पुराने PF खाते की सेवा अवधि और खाते से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ने में परेशानी हो सकती है।<br><br>EPFO ने कर्मचारियों को नियोक्ता पर निर्भरता कम करने के लिए खुद Date of Exit अपडेट करने की सुविधा दी है।</p><h2>कब कर सकते हैं Date of Exit अपडेट?</h2><p>इस सुविधा का इस्तेमाल तुरंत नौकरी छोड़ने के बाद नहीं किया जा सकता। EPFO के आधिकारिक FAQ के मुताबिक:<br>- नौकरी छोड़ने के 60 दिन बाद कर्मचारी खुद Date of Exit अपडेट कर सकता है।<br>- UAN एक्टिव होना जरूरी है।<br>- UAN में आधार लिंक और सत्यापित होना चाहिए।<br>- OTP प्राप्त करने के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए।<br>- Date of Exit उस महीने की किसी तारीख को रखा जा सकता है, जिसमें पुराने नियोक्ता ने अंतिम PF योगदान किया था।</p><h2>UAN पोर्टल पर Date of Exit कैसे अपडेट करें?</h2><p>इसके लिए कर्मचारी को EPFO के Member Portal पर लॉगिन करना होगा। प्रक्रिया इस प्रकार है:<br>- EPFO Member Portal पर UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें।<br>- Manage विकल्प पर जाएं।<br>- यहां Mark Exit विकल्प चुनें।<br>- Select Employment में पुराने PF खाते को चुनें।<br>- अपनी Date of Exit और Reason of Exit दर्ज करें।<br>- Request OTP पर क्लिक करें।<br>- आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को दर्ज करें।<br>- संबंधित चेकबॉक्स में सहमति देकर Update पर क्लिक करें।<br>- इसके बाद Date of Exit अपडेट हो जाएगी।</p><h2>Date of Exit भरते समय इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>Date of Exit मनमाने तरीके से नहीं डालनी चाहिए। EPFO के अनुसार यह उस महीने के भीतर की तारीख हो सकती है, जिसमें नियोक्ता ने आखिरी PF योगदान किया था। साथ ही, एक बार Date of Exit दर्ज होने के बाद उसे बदलने की सुविधा सीमित हो सकती है, इसलिए जानकारी भरने से पहले रिकॉर्ड अच्छी तरह जांच लें।</p><h2>इसके बाद PF ट्रांसफर कैसे करें?</h2><p>Date of Exit अपडेट होने के बाद कर्मचारी ऑनलाइन PF ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। EPFO के अनुसार ट्रांसफर के लिए UAN एक्टिव होना तथा जरूरी KYC जानकारी, जैसे आधार और बैंक खाता, UAN से जुड़ा होना भी महत्वपूर्ण है।</p><h2>फ्रॉड से भी रहें सावधान</h2><p>Date of Exit अपडेट करने के नाम पर किसी एजेंट या अनजान व्यक्ति को UAN, पासवर्ड, OTP या बैंक संबंधी जानकारी न दें। EPFO अपने सदस्यों को ऐसे संवेदनशील विवरण साझा न करने की चेतावनी देता है।</p><p>अगर पुराने PF खाते की Date of Exit दर्ज नहीं है और इसी वजह से ट्रांसफर अटका हुआ है, तो 60 दिन पूरे होने के बाद कर्मचारी खुद UAN Member Portal पर इसे अपडेट कर सकता है। इससे पुराने नियोक्ता के पीछे भागने की जरूरत कम होती है और PF ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।<br><br>- जे. पी. शुक्ला</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 18:43:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/facing-problems-with-pf-transfer-now-update-your-date-of-exit-on-the-uan-portal-from-home</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कृषक समृद्धि योजना: किसानों को 6 लाख का लोन कैसे मिलेगा, किस्त कितनी होगी, ब्याज में छूट कितनी मिलेगी?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/krishak-samriddhi-yojana-how-will-farmers-get-a-loan-of-rs-6-lakh]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना शुरू की गई है। इसके तहत पात्र किसानों को कृषि और कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण देने का प्रावधान है। खास बात यह है कि ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 6 फीसदी सालाना रखी गई है। योजना का संचालन उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से किया जा रहा है।</p><h2>6 लाख रुपये &nbsp;के लोन के लिए पात्रता</h2><p>योजना मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए है। बैंक की ओर से पात्रता और ऋण स्वीकृति की जांच की जाएगी।<br>- आवेदक उत्तर प्रदेश का किसान होना चाहिए।<br>- कृषि योग्य भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज जरूरी होंगे।<br>- लोन का इस्तेमाल कृषि या कृषि आधारित गतिविधियों के लिए होना चाहिए।<br>- बैंक की ओर से दस्तावेज, भूमि और ऋण चुकाने की क्षमता की जांच की जाएगी।</p><p>केवल आवेदन करने से 6 लाख रुपये का लोन मिलना तय नहीं है। अंतिम राशि बैंक की मंजूरी पर निर्भर करेगी।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/modi-cabinet-decisions-railway-employees-bonus-idbi-bank-sale-pension-scheme-2026" target="_blank" rel="noopener">इधर विपक्ष बेकार का हो-हल्ला करता रहा, उधर Modi Cabinet ने बड़े फैसले लेकर महीने भर पहले ही जनता को दे दिया Diwali Gift</a></p><h2>ब्याज में कितनी छूट मिलेगी?</h2><p>इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ब्याज में राहत है। पहले उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की दीर्घकालीन कृषि ऋण योजनाओं में ब्याज दर करीब 11 फीसदी या उससे अधिक थी। नई योजना में पात्र किसानों के लिए प्रभावी दर 6 फीसदी रखी गई है। यानी सरकार की ओर से 5 प्रतिशत अंक का ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। यह लाभ निर्धारित समय पर किस्त चुकाने वाले पात्र किसानों को मिलता है।</p><h2>6 लाख के लोन की किस्त कितनी होगी?</h2><p>किस्त की रकम लोन की अवधि और बैंक की repayment व्यवस्था पर निर्भर करेगी। उदाहरण के लिए, यदि 6 लाख रुपये पर 6% सालाना ब्याज और समान मासिक EMI मानकर गणना करें, तो अनुमानित किस्त इस तरह हो सकती है:<br>- 5 साल: करीब 11,600 रुपये प्रति माह<br>- 10 साल: करीब 6,660 रुपये प्रति माह<br>- 15 साल: करीब 5,060 रुपये प्रति माह</p><p>ये केवल उदाहरण के लिए EMI गणना हैं। किसान की वास्तविक किस्त बैंक द्वारा तय अवधि, ब्याज गणना और ऋण की शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है। योजना के पोर्टल पर भी किस्त की गणना की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।</p><h2>किन कामों के लिए मिल सकता है लोन?</h2><p>योजना के तहत कृषि और कृषि आधारित गतिविधियों में निवेश के लिए दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई और अन्य उत्पादक कृषि गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। संबंधित ऋण श्रेणी के नियमों के अनुसार पात्रता तय होगी।</p><h2>ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?</h2><p>सरकार ने योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:<br>- आधिकारिक पोर्टल mksyldb.in पर जाएं।<br>- &nbsp;‘ऋण आवेदन करें’ विकल्प चुनें।<br>- जनपद, बैंक शाखा, तहसील और ब्लॉक की जानकारी भरें।<br>- ग्राम पंचायत और गांव का चयन करें।<br>- कितनी ऋण राशि चाहिए, इसकी जानकारी दें।<br>- मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP से सत्यापन करें।<br>- जरूरी व्यक्तिगत, भूमि और बैंक संबंधी जानकारी भरकर आवेदन पूरा करें।<br>- इसके बाद बैंक दस्तावेजों और पात्रता की जांच करेगा।</p><p>सरकार ने योजना के लिए 384 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है और अगले पांच वर्षों में करीब 5 लाख लघु एवं सीमांत किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा है। योजना का शुभारंभ 23 सितंबर 2026 को किया गया।</p><h2>कृषक समृद्धि योजना के फ़ायदे</h2><p>कृषक समृद्धि योजना उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को कई फ़ायदे देती है, जिसका मकसद उनकी फ़ाइनेंशियल स्थिरता और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाना है, जैसे -&nbsp;<br>- सस्ता लॉन्ग-टर्म एग्रीकल्चरल क्रेडिट: यह स्कीम 6% सालाना की रियायती ब्याज दर पर ₹6 लाख तक का लोन देती है, जिससे किसानों को फ़ायदेमंद खेती की चीज़ों में इन्वेस्ट करने में मदद मिलती है।<br>- इंटरेस्ट सब्सिडी: उत्तर प्रदेश सरकार एलिजिबल लोन पर 5% इंटरेस्ट सब्सिडी देती है, जिससे किसानों के लिए उधार लेने की कुल लागत कम हो जाती है।<br>- कोऑपरेटिव बैंकिंग तक पहुँच: यह स्कीम कोऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम को सपोर्ट करती है, जो किसानों को एग्रीकल्चरल क्रेडिट देने के लिए बहुत ज़रूरी है।<br>- लॉन्ग-टर्म क्रेडिट ऑप्शन: किसान एलिजिबल एग्रीकल्चरल इन्वेस्टमेंट के लिए एक अलग लॉन्ग-टर्म क्रेडिट ऑप्शन ले सकते हैं, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सिस्टम शॉर्ट-टर्म क्रेडिट के लिए है।</p><p>मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत पात्र छोटे और सीमांत किसान 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण 6 फीसदी प्रभावी ब्याज दर पर ले सकते हैं। समय पर किस्त चुकाने पर ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। हालांकि, 6 लाख रुपये अधिकतम सीमा है, हर आवेदक को इतनी राशि मिलना तय नहीं है।</p><p>लोन लेने से पहले किसान को अपनी भुगतान क्षमता, ऋण अवधि, कुल ब्याज और बैंक की अन्य शर्तों को समझ लेना चाहिए। आवेदन के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल या उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा का इस्तेमाल करें।</p><p>- जे. पी. शुक्ला</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 19:14:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[‘बिका हुआ माल वापस नहीं होगा’ लिखकर दुकानदार आपको नहीं कर सकता परेशान! जानिए आपका असली अधिकार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/a-shopkeeper-can-not-harass-you-by-writing-goods-sold-are-not-returnable]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दुकानों पर अक्सर एक बोर्ड लगा दिखाई देता है- “बिका हुआ माल वापस नहीं होगा”, “No Return, No Exchange” या “No Refund”। ऐसे बोर्ड देखकर कई ग्राहक मान लेते हैं कि सामान में खराबी निकलने पर भी दुकानदार उसे वापस लेने, बदलने या पैसा लौटाने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है।</p><p>भारत में उपभोक्ताओं को Consumer Protection Act, 2019 के तहत कई अधिकार मिले हैं। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के उपभोक्ता हैंडबुक में भी स्पष्ट किया गया है कि “Goods once sold will not be taken back”, “No exchange” या “No refund under any circumstances” जैसे बोर्ड अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आ सकते हैं और ऐसे बोर्ड अपने आप उपभोक्ता के कानूनी अधिकार खत्म नहीं कर देते।</p><h2>क्या दुकानदार हर सामान वापस लेने के लिए बाध्य है?</h2><p>यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। केवल इसलिए कि ग्राहक ने सामान खरीदने के बाद अपना मन बदल लिया, हर स्थिति में दुकानदार को सामान वापस लेकर रिफंड देना अनिवार्य नहीं हो जाता। लेकिन यदि सामान में:<br>- निर्माण संबंधी खराबी हो,<br>- सामान विज्ञापन या बताए गए विवरण के अनुरूप न हो,<br>- गलत उत्पाद दिया गया हो,<br>- सामान नकली या दोषपूर्ण हो,<br>- गुणवत्ता, मात्रा या कीमत को लेकर गलत जानकारी दी गई हो,</p><p>तो उपभोक्ता को शिकायत और उचित राहत मांगने का अधिकार है।</p><h2>दुकानदार का ‘नो रिफंड’ बोर्ड क्यों हमेशा अंतिम फैसला नहीं है?</h2><p>दुकानदार अपनी दुकान की रिटर्न पॉलिसी बना सकता है, लेकिन वह ऐसी पॉलिसी के जरिए कानून के तहत मिलने वाले उपभोक्ता अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता। यदि वस्तु में वास्तविक दोष है या उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार हुआ है तो केवल “बिका हुआ माल वापस नहीं होगा” लिख देने से दुकानदार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/did-you-open-a-pm-jan-dhan-account-with-a-zero-balance" target="_blank" rel="noopener">क्या आपने ज़ीरो बैलेंस पर खुलवाया पीएम जन धन खाता? 10000 तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा, संख्या 59 करोड़ के पार</a></p><p>उपभोक्ता को क्या राहत मिल सकती है?</p><p>Consumer Protection Act के तहत उपभोक्ता आयोग, मामले की परिस्थितियों के आधार पर:<br>- सामान की खराबी दूर करने,<br>- दोषपूर्ण सामान बदलने,<br>- भुगतान की गई राशि वापस करने,<br>- हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने,<br>- अनुचित व्यापार व्यवहार बंद करने<br>जैसे आदेश दे सकता है।<br><br>खरीदारी के बाद क्या संभालकर रखें?</p><p>किसी विवाद की स्थिति में ये चीजें आपके काम आ सकती हैं:<br>- खरीद का बिल या कैश मेमो<br>- ऑनलाइन ऑर्डर की रसीद<br>- भुगतान का प्रमाण<br>- प्रोडक्ट की फोटो या वीडियो<br>- दुकानदार या कंपनी के साथ हुई बातचीत<br>- वारंटी या गारंटी कार्ड</p><p>बिल लेना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि शिकायत के दौरान यह खरीदारी का महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकता है।</p><h2>दुकानदार सामान बदलने या पैसा लौटाने से मना करे तो क्या करें?</h2><p>सबसे पहले दुकानदार या कंपनी को लिखित या डिजिटल माध्यम से अपनी शिकायत बताएं। यदि समाधान नहीं मिलता है तो National Consumer Helpline (NCH) के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता क्या करें:<br>- टोल-फ्री नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।<br>- 1800-11-4000 पर भी शिकायत संबंधी सहायता ली जा सकती है।<br>- WhatsApp नंबर 8800001915 का उपयोग किया जा सकता है।<br>- NCH पोर्टल, मोबाइल ऐप और UMANG ऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।</p><p>NCH देशभर के उपभोक्ताओं के लिए प्री-लिटिगेशन शिकायत निवारण मंच के रूप में काम करता है और 17 भाषाओं में शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।</p><h2>उपभोक्ता आयोग में कब जा सकते हैं?</h2><p><br>यदि कंपनी या दुकानदार से समस्या का समाधान नहीं होता तो उपभोक्ता उचित Consumer Commission में शिकायत कर सकता है। Consumer Protection Act के तहत उपभोक्ता को दोषपूर्ण सामान, सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार और अन्य उपभोक्ता विवादों में राहत मांगने का अधिकार है।</p><p>एक कंज्यूमर के तौर पर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत आपके पास कई अधिकार हैं:<br>1. सुरक्षा का अधिकार: आप उन सामानों से सुरक्षित हैं जो जान और माल के लिए खतरनाक हैं।<br>2. जानकारी पाने का अधिकार: आपको सामान खरीदने से पहले उसकी क्वालिटी, मात्रा और कीमत जानने का अधिकार है।<br>3. चुनने का अधिकार: आपको अच्छी कीमतों पर अलग-अलग तरह के सामान और सर्विस मिलनी चाहिए।<br>4. सुने जाने का अधिकार: आपके हितों पर सही फोरम में विचार किया जाना चाहिए।<br>5. मुआवजे का अधिकार: अगर आपको खराब सामान या गलत तरीकों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो आप मुआवज़ा मांग सकते हैं।</p><p>अगर कोई दुकानदार आपको परेशान करता है या आपके अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो आप दुकानदार को लीगल नोटिस देकर कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं, जो सुधार की मांग करने के लिए एक फॉर्मल कम्युनिकेशन का काम करता है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट ऐसी शिकायतों को दूर करने और यह पक्का करने के लिए एक फ्रेमवर्क देता है कि आपके अधिकारों का सम्मान किया जाए।</p><p>हालांकि, केवल पसंद बदल जाने या बिना किसी दोष के सामान वापस करने का अधिकार हर मामले में स्वतः नहीं मिलता। इसलिए खरीदारी से पहले रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी पढ़ें, बिल जरूर लें और समस्या होने पर पहले दुकानदार या कंपनी से संपर्क करें। समाधान न मिलने पर National Consumer Helpline या Consumer Commission का सहारा लिया जा सकता है।</p><p>- जे. पी. शुक्ला</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 17:36:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/a-shopkeeper-can-not-harass-you-by-writing-goods-sold-are-not-returnable</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या आपने ज़ीरो बैलेंस पर खुलवाया पीएम जन धन खाता? 10000 तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा, संख्या 59 करोड़ के पार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/did-you-open-a-pm-jan-dhan-account-with-a-zero-balance]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश में बैंकिंग सुविधाओं को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) आज दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में शामिल है। इस योजना के तहत बिना बैंक खाता रखने वाले लोगों को जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा समेत कई अन्य लाभ मिल सकते हैं।</p><p>वित्त मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त 2026 तक देश में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 59.15 करोड़ खाते खोले जा चुके थे। इससे पहले 19 अगस्त 2026 तक खातों की संख्या 59.09 करोड़ दर्ज की गई थी।</p><h2>क्या है प्रधानमंत्री जन धन योजना?</h2><p>प्रधानमंत्री जन धन योजना को 28 अगस्त 2014 को राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बैंकिंग सुविधा से वंचित लोगों को बचत खाता, बीमा, पेंशन, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ना है।</p><h2>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/show-aadhar-card-and-take-a-loan-of-three-lakhs-know-what-this-scheme-is-and-the-truth" target="_blank" rel="noopener">आधार कार्ड दिखाइए तीन लाख का लोन ले जाइए, जानें क्या है ये स्कीम और सच्चाई</a><br><br>योजना के तहत पात्र व्यक्ति बैंक शाखा या बैंक मित्र के माध्यम से बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBD Account) खोल सकता है।<br><br>क्या जन धन खाता जीरो बैलेंस पर खुलता है?</h2><p>हां। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले जाने वाले बेसिक बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता नहीं होती।<br>&nbsp;</p><h2><br>योजना की मुख्य सुविधाएं:</h2><p>- जीरो बैलेंस पर बैंक खाता।<br>- जमा राशि पर बैंक के नियमों के अनुसार ब्याज।<br>- RuPay डेबिट कार्ड की सुविधा।<br>- सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में पाने के लिए DBT की सुविधा।<br>- पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा।<br>- बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर।</p><h2>क्या हर खाताधारक को मिलेंगे 10,000 रुपये?</h2><p>यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। जन धन खाता खोलते ही सभी लोगों को 10,000 रुपये नहीं मिल जाते।</p><p>जन धन योजना में 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा केवल पात्र खाताधारकों के लिए उपलब्ध है। ओवरड्राफ्ट का मतलब बैंक द्वारा तय शर्तों के आधार पर खाते में उपलब्ध बैलेंस से अधिक राशि निकालने की सुविधा है। यह मुफ्त सरकारी सहायता नहीं, बल्कि एक प्रकार की बैंकिंग क्रेडिट सुविधा है, जिसे नियमों के अनुसार वापस करना होता है।</p><h2>ओवरड्राफ्ट सुविधा के लिए क्या है नियम?</h2><p>ओवरड्राफ्ट की सुविधा बैंक की पात्रता शर्तों के अधीन होती है। बैंक खाते के संचालन, ग्राहक की पात्रता और अन्य नियमों के आधार पर फैसला करते हैं कि खाताधारक को कितनी ओवरड्राफ्ट सीमा मिलेगी। इसलिए -&nbsp;<br>- सभी जन धन खाताधारकों को अपने आप 10,000 रुपये नहीं मिलते।<br>- ओवरड्राफ्ट की राशि बैंक की मंजूरी और पात्रता पर निर्भर करती है।<br>- यह राशि बाद में चुकानी होती है।<br>- खाते से जुड़ी शर्तों की जानकारी अपने बैंक से लेना जरूरी है।</p><h2>कितनी महिलाओं के पास हैं जन धन खाते?</h2><p>वित्त मंत्रालय की 19 अगस्त 2026 तक की जानकारी के अनुसार, देश में 32.92 करोड़ महिला लाभार्थियों के जन धन खाते थे। वहीं, बड़ी संख्या में खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। 26 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 59.15 करोड़ खातों में से लगभग 32.96 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के थे।</p><h2>RuPay कार्ड पर कितना बीमा मिलता है?</h2><p>PMJDY के तहत RuPay डेबिट कार्ड की सुविधा भी दी जाती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए नए पात्र PMJDY खातों के RuPay कार्ड पर नियमों और शर्तों के अनुसार 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध है। पुराने खातों के लिए अलग शर्तें और कवर लागू हो सकते हैं।</p><h2>जन धन खाता कहां खुलवाएं?</h2><p>जन धन खाता खुलवाने के लिए:<br>- नजदीकी बैंक शाखा जाएं।<br>- बैंक मित्र या Business Correspondent से संपर्क करें।<br>- बैंक से जरूरी दस्तावेजों की जानकारी लें।<br>- खाता खोलने से पहले KYC नियमों को समझें।</p><p>योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक PMJDY पोर्टल और टोल-फ्री नंबर 1800 11 0001 तथा 1800 180 1111 का उपयोग किया जा सकता है।</p><p>प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध है और योजना के खातों की संख्या अब 59 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है।</p><p>हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 10,000 रुपये सभी खाताधारकों को स्वतः नहीं मिलते और ओवरड्राफ्ट एक क्रेडिट सुविधा है, जिसे बैंक की शर्तों के अनुसार वापस करना होता है। इसलिए ओवरड्राफ्ट लेने से पहले अपने बैंक से ब्याज, पात्रता और भुगतान की शर्तों की पूरी जानकारी जरूर लें।</p><p>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 17:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/did-you-open-a-pm-jan-dhan-account-with-a-zero-balance</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आधार कार्ड दिखाइए तीन लाख का लोन ले जाइए, जानें क्या है ये स्कीम और सच्चाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/show-aadhar-card-and-take-a-loan-of-three-lakhs-know-what-this-scheme-is-and-the-truth]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये तक का लोन दिया जा रहा है। वीडियो और विज्ञापनों में लोगों को आकर्षित करने के लिए कहा जा रहा है कि आधार कार्ड दिखाइए और आसानी से लाखों रुपये का कर्ज पाइए।</p><p>लेकिन क्या वास्तव में केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना चला रही है? इस दावे की सच्चाई जानना जरूरी है, क्योंकि फर्जी सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों से व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/here-is-how-to-apply-if-you-want-to-receive-a-monthly-pension-of-rs-5000-after-the-age-of-60" target="_blank" rel="noopener">अटल पेंशन योजना: अगर 60 की आयु के बाद हर महीने 5 हजार रुपये की पेंशन लेना चाहते हैं तो ऐसे करें आवेदन</a></p><h2>क्या है वायरल दावा?</h2><p>सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे में कहा जा रहा है कि:<br>- केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ चला रही है।<br>- हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है।<br>- लोन के लिए केवल आधार कार्ड की जरूरत है।<br>- प्रक्रिया आसान और तुरंत लोन मिलने वाली बताई जा रही है।</p><p>हालांकि, इस दावे को सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी ने फर्जी बताया है।</p><h2>PIB Fact Check ने क्या कहा?</h2><p>PIB Fact Check के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत आधार कार्ड पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये का लोन देने का दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना नहीं चला रही है। ऐसे में सरकार ने लोगों को लुभावने दावों और फर्जी योजनाओं से सावधान रहने की सलाह दी है।</p><h2>क्या सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर मिल सकता है 3 लाख का लोन?</h2><p>इस सवाल का सीधा जवाब है - नहीं, केंद्र सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें सिर्फ आधार कार्ड दिखाने पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये का लोन मिल जाए। किसी भी वैध बैंक या वित्तीय संस्था से लोन लेने के लिए आमतौर पर:<br>- पहचान संबंधी दस्तावेज<br>- पता प्रमाण<br>- आय या कारोबार से जुड़ी जानकारी<br>- बैंकिंग रिकॉर्ड<br>- पात्रता की जांच</p><p>जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। लोन की शर्तें संबंधित बैंक और योजना के अनुसार अलग-अलग होती हैं।</p><h2>फिर 3 लाख रुपये के लोन वाली बात कहां से आई?</h2><p>केंद्र सरकार की कुछ वास्तविक योजनाओं में पात्र लाभार्थियों को लोन की सुविधा मिलती है। उदाहरण के लिए, पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बिना संपार्श्विक 3 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। हालांकि, यह सभी लोगों के लिए केवल आधार कार्ड के आधार पर मिलने वाला लोन नहीं है। योजना के लिए तय पात्रता और अन्य शर्तें भी लागू होती हैं। इसलिए पीएम विश्वकर्मा जैसी वास्तविक योजना और फर्जी ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के दावे में अंतर समझना जरूरी है।</p><h2>ऐसे फर्जी लोन ऑफर से कैसे बचें?</h2><p>यदि आपको सोशल मीडिया, WhatsApp, YouTube या SMS पर 3 लाख रुपये के सरकारी लोन का ऑफर मिले, तो:<br>- किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।<br>- आधार नंबर और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।<br>- OTP, ATM PIN या UPI PIN किसी को न बताएं।<br>- लोन के नाम पर पहले पैसे जमा करने से बचें।<br>- अनजान ऐप डाउनलोड न करें।<br>- योजना की जानकारी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जांचें।</p><h2>असली सरकारी योजनाओं की जानकारी कहां देखें?</h2><p>केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के लिए MyScheme पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, किसी संदिग्ध सरकारी दावे की सच्चाई जानने के लिए PIB Fact Check की आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर है।<br><br>सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत 3 लाख रुपये मिलने का वायरल दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना नहीं चला रही है। PIB Fact Check ने भी इस दावे को गलत बताया है।<br><br>हालांकि, पीएम विश्वकर्मा जैसी कुछ वास्तविक सरकारी योजनाओं में पात्र लोगों को 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित पात्रता और शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसलिए किसी भी आकर्षक लोन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी माध्यम से जरूर जांच लें।<br><br>- जे. पी. शुक्ला</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 18:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/show-aadhar-card-and-take-a-loan-of-three-lakhs-know-what-this-scheme-is-and-the-truth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अटल पेंशन योजना: अगर 60 की आयु के बाद हर महीने 5 हजार रुपये की पेंशन लेना चाहते हैं तो ऐसे करें आवेदन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/here-is-how-to-apply-if-you-want-to-receive-a-monthly-pension-of-rs-5000-after-the-age-of-60]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अटल पेंशन योजना (APY) केंद्र सरकार की गारंटीकृत पेंशन योजना है, जिसे पेंशन फण्ड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी (PFRDA) संचालित करता है, जिसमें 60 वर्ष की उम्र के बाद चुनी गई योजना के अनुसार ₹1,000 से ₹5,000 तक की न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है। सवाल है कि अब कौन ले सकता है यह पेंशन? तो पात्रता की शर्तें हैं कि आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।उसके पास बचत बैंक खाता (SBA) या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स एकॉउंट (POSA) होना चाहिए।</p><p>खास बात यह है कि 1 अक्टूबर 2022 से आयकरदाता व्यक्ति APY में नया खाता नहीं खोल सकता। हालांकि, जो व्यक्ति उस तारीख से पहले APY में शामिल हो चुका था, उसके लिए अलग नियम लागू हैं। ₹5,000 पेंशन के लिए कितना योगदान? ₹5,000 की पेंशन के लिए योगदान आपकी उम्र और योगदान अवधि पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर आधिकारिक APY सामग्री में:</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/atal-pension-scheme-can-you-get-a-pension-of-rs-5000" target="_blank" rel="noopener">Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन?</a></p><p>ये आधिकारिक प्रकाशित योगदान-सारणी के संकेतात्मक आंकड़े हैं।</p><h2># जानिए, आवेदन कैसे करें?</h2><p>ऑफलाइन तरीका सबसे आसान है: एक, आप अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस की शाखा में जाएं। दो, APY Registration Form मांगें। तीन, नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, बैंक खाता, आधार आदि विवरण भरें। चार, ₹1,000/₹2,000/₹3,000/₹4,000/₹5,000 में अपनी पेंशन राशि चुनें। पांच, बैंक खाते से ऑटो-डेबिट की अनुमति दें। छह, फॉर्म जमा करने के बाद बैंक/पोस्ट ऑफिस से PRAN और पंजीकरण की पुष्टि प्राप्त करें। आधिकारिक फॉर्म में मासिक, त्रैमासिक या छमाही योगदान का विकल्प भी दिया गया है। सात, अटल पेंशन योजना की आधिकारिक जानकारी और फॉर्म सरकारी वेबसाइट https://jansuraksha.gov.in पर उपलब6 है।</p><h2># जानिए, मृत्यु के बाद क्या होगा?</h2><p>APY की खास बात यह है कि सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को वही पेंशन राशि मिलती रहती है। सब्सक्राइबर और जीवनसाथी दोनों की मृत्यु के बाद निर्धारित पेंशन संपत्ति नामित व्यक्ति को मिलती है, यानी निर्धारित ₹8.5 लाख का कॉर्पस नामित व्यक्ति को मिलता है। बस इतना ध्यान रखें कि ₹5,000 कोई तत्काल मिलने वाली पेंशन नहीं है। इसके लिए पात्र उम्र में APY में शामिल होकर निर्धारित योगदान करना होता है और 60 वर्ष की उम्र के बाद गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन मिलती है।</p><h2># ₹5,000 मासिक गारंटीकृत पेंशन के लिए उम्र के हिसाब से पूरी APY गणना</h2><p>यहां पर मैं ₹5,000 मासिक गारंटीकृत पेंशन के लिए उम्र के हिसाब से पूरी APY गणना दी गई है। आधिकारिक APY तालिका के अनुसार योगदान उम्र बढ़ने के साथ काफी तेजी से बढ़ता है।</p><h2># गणना: मासिक योगदान × 12 × योगदान के वर्ष.</h2><p>उदाहरण के लिए, 18 साल की उम्र में जुड़ने पर ₹210 × 12 × 42 = ₹1,05,840 कुल योगदान होगा। आधिकारिक APY दस्तावेज में भी 18 वर्ष पर ₹210 और 40 वर्ष पर ₹1,454 मासिक योगदान निर्धारित है।</p><h2># अटल पेंशन योजना (APY) में 18 से 40 वर्ष की हर प्रवेश उम्र पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन के लिए मासिक योगदान के बारे में अवगत होइए</h2><p>अटल पेंशन योजना (APY) में 18 से 40 वर्ष की हर प्रवेश उम्र पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन के लिए मासिक योगदान दिया गया है। ये आंकड़े PFRDA की आधिकारिक APY तालिका से लिए गए हैं।</p><p>सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं कि 18 साल की उम्र में शुरू करने पर ₹210/माह में ₹5,000 मासिक पेंशन का लक्ष्य है, जबकि 30 साल की उम्र में यही योगदान ₹577/माह हो जाता है। 40 साल की उम्र में ₹1,454/माह देना होगा। यानी जितनी कम उम्र में APY शुरू करेंगे, मासिक योगदान उतना कम रहेगा। तभी 60 वर्ष की उम्र के बाद चुनी गई राशि—₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000— की न्यूनतम गारंटीकृत मासिक पेंशन मिलती है।</p><p>बस एक जरूरी सावधानी बरतिए : वह यह कि ऊपर के ₹1.06 लाख से ₹3.49 लाख तक के आंकड़े केवल आपके द्वारा किए जाने वाले निर्धारित योगदान का योग हैं। इसे निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की तरह नहीं समझना चाहिए; APY में ₹5,000 पेंशन सरकार द्वारा गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन है। बस इतना ध्यान रहे कि 1 अक्टूबर 2022 से जो व्यक्ति आयकरदाता है या रहा है, वह नया APY खाता नहीं खोल सकता है। PFRDA की आधिकारिक APY जानकारी विभागीय वेबसाइट https://pfrda.org.in/hi/schemes/atal-pension-yojana-apy) पर उपलब्ध रहती है, जहां पर जाकर आप खुद से चेक कर सकते हैं।</p><p>- कमलेश पांडेय<br>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 18:17:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/here-is-how-to-apply-if-you-want-to-receive-a-monthly-pension-of-rs-5000-after-the-age-of-60</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[नॉमिनी नहीं बनाया है तो म्यूचुअल फंड का पैसा किस प्रक्रिया से मिलता है? यहां जानें जरूरी बातें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-the-process-for-claiming-mutual-fund-money-if-no-nominee-has-been-appointed]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आजकल किसी भी बैंकिंग व्यवहार में नॉमिनी को दर्ज किया जाना आम बात है, फिर भी यदि किसी वजह से म्यूचुअल फंड निवेशक की नॉमिनी दर्ज नहीं है, तब भी निवेश का पैसा खत्म नहीं होता, बल्कि निवेशक की मृत्यु के बाद यूनिट्स/रिडेम्पशन की रकम कानूनी उत्तराधिकारी (legal heirs) को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिलती है। हालांकि, नॉमिनी होने की तुलना में प्रक्रिया अधिक लंबी और दस्तावेज़-आधारित हो सकती है।</p><p>इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि नॉमिनी नहीं होने पर पैसा कैसे मिलता है? इसके लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं क्रमबद्ध रूप से-</p><p>पहला, सबसे पहले मृत्यु प्रमाणपत्र निवेशक के निधन का आधिकारिक Death Certificate प्रस्तुत करना होता है।</p><p>दूसरा, उत्तराधिकारी की पहचान यदि नॉमिनी नहीं है, तो AMC/RTA आम तौर पर यह देखता है कि दावा करने वाला व्यक्ति मृतक का वैध उत्तराधिकारी है या नहीं। इसके लिए परिस्थितियों के अनुसार इनमें से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं: (i) Legal Heir Certificate, (ii) Succession Certificate, (iii) Will/वसीयत, (iv) Probate/Letters of Administration, (v) अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेज।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/update-from-your-mobile-number-to-your-address-in-aadhaar-from-the-comfort-of-your-home" target="_blank" rel="noopener">आधार में मोबाइल नंबर से लेकर पता तक घर बैठे बदलें: 2026 की पूरी प्रक्रिया, शुल्क और जरूरी दस्तावेज</a></p><p>तीसरा, छोटे दावे में प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती है, यदि निवेश की कुल रकम निर्धारित सीमा के भीतर है, तो संबंधित AMC/RTA अपनी policy के अनुसार indemnity/affidavit, declaration, KYC और अन्य दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया कर सकता है। सीमा और दस्तावेज AMC/RTA के नियमों पर निर्भर करते हैं।</p><p>चौथा, कई कानूनी वारिस हों तो यदि मृतक के एक से अधिक legal heirs हैं, तो सभी के दावे/सहमति की आवश्यकता पड़ सकती है। एक वारिस को पैसा देने के लिए दूसरे वारिसों की NOC/consent भी मांगी जा सकती है।</p><p>पांचवां, वसीयत होने पर यदि मृतक ने वैध Will छोड़ी है, तो उसी के आधार पर अधिकार निर्धारित किया जा सकता है। बड़े या विवादित मामलों में probate अथवा succession-related court documents की जरूरत पड़ सकती है। एक महत्वपूर्ण फर्क समझिए।<br>Nominee = हमेशा अंतिम मालिक नहीं।</p><p>नॉमिनी की भूमिका मुख्यतः निवेश/संपत्ति को प्राप्त करने और आगे उचित प्रक्रिया में रखने/हस्तांतरित करने से जुड़ी होती है। वास्तविक उत्तराधिकार का निर्धारण लागू succession law और वैध वसीयत के आधार पर हो सकता है। उदाहरण: मान लीजिए किसी व्यक्ति के म्यूचुअल फंड में ₹10 लाख हैं और उन्होंने कोई nominee नहीं बनाया। मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और दो बच्चे दावा करते हैं।</p><p>ऐसे मामले में AMC/RTA सीधे किसी एक व्यक्ति को पैसा देने के बजाय: 1. मृत्यु प्रमाणपत्र, 2. KYC, 3. legal-heir/succession documents, 4. अन्य वारिसों की consent/NOC आदि मांग सकता है। दस्तावेज पूरे होने के बाद units को redeem/transfer करके निर्धारित बैंक खाते में राशि दी जा सकती है।</p><p>सच कहूं तो म्यूचुअल फंड निवेशक की मृत्यु के बाद पैसा किसे और कैसे मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि Nominee, Joint Holder और Will में से क्या मौजूद है। म्यूचुअल फंड निवेशक की मृत्यु के बाद पैसा पाने की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है:-</p><p>एक, Nominee बना हुआ है, यह सबसे आसान स्थिति है। नॉमिनी को संबंधित AMC/RTA के पास मृत्यु की सूचना देकर दावा करना होता है। सामान्यतः मांगे जाने वाले दस्तावेज हैं: मृत्यु प्रमाणपत्र, नॉमिनी का PAN/KYC, बैंक खाते का विवरण, Claim/ Transmission Form, मृतक के म्यूचुअल फंड खाते/फोलियो की जानकारी और अन्य दस्तावेज, जैसा AMC/RTA मांगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद units को नॉमिनी के नाम transmit किया जा सकता है या लागू प्रक्रिया के अनुसार उनका redemption किया जा सकता है। हमेशा ये बात ध्यान रखें कि नॉमिनी होना और अंतिम कानूनी उत्तराधिकारी होना हमेशा एक ही बात नहीं है। उत्तराधिकार का अंतिम अधिकार लागू succession law और वैध Will के अनुसार तय हो सकता है।</p><p>दो, Joint Holding है: यदि म्यूचुअल फंड folio में दो या अधिक joint holders हैं, तो मृत्यु के बाद प्रक्रिया holding mode पर निर्भर करती है। उदाहरण: A &amp; B — Joint Holding. यदि A की मृत्यु हो जाती है, तो surviving holder B को मृत्यु प्रमाणपत्र और निर्धारित transmission documents देकर units अपने नाम कराने की प्रक्रिया करनी होती है। यह स्थिति सामान्यतः अकेले निवेशक के बिना nominee होने की तुलना में सरल होती है।</p><p>तीन, Nominee नहीं है, लेकिन Will है: यहां मामला थोड़ा अलग हो जाता है। यदि निवेशक ने वैध Will (वसीयत) बनाई है, तो Will में बताए गए beneficiary/legatee के आधार पर दावा किया जा सकता है। सामान्यतः जरूरत पड़ सकती है: Death Certificate, Will की copy,<br>Claim/Transmission Form, PAN/KYC, बैंक विवरण, अन्य legal documents. कुछ मामलों में Probate/Letters of Administration आदि की आवश्यकता हो सकती है—विशेषकर जब मामला बड़ा हो, विवाद हो या लागू कानून/क्षेत्राधिकार के अनुसार इसकी आवश्यकता हो।</p><p>चार, Nominee भी नहीं और Will भी नहीं: यही स्थिति परिवार के लिए सबसे अधिक कागजी कार्रवाई वाली हो सकती है। तब दावा legal heirs द्वारा किया जाता है। परिवार को पहले यह स्थापित करना पड़ सकता है कि मृतक के वैध उत्तराधिकारी कौन हैं।</p><p>हर मामले में सभी दस्तावेज जरूरी नहीं होते। दस्तावेजों की आवश्यकता निवेश की राशि, उत्तराधिकार की स्थिति, Will और AMC/RTA की लागू प्रक्रिया के अनुसार बदल सकती है।</p><p>पांचवां, कई Legal Heirs हों तो क्या होगा?: मान लीजिए मृतक के पीछे: पत्नी, एक बेटा, एक बेटी, तीन संभावित legal heirs हैं। ऐसे में AMC/RTA यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि किसी एक व्यक्ति को भुगतान करने से दूसरे वैध उत्तराधिकारियों के अधिकार प्रभावित न हों।</p><p>इसलिए परिस्थितियों के अनुसार: सभी वारिसों की consent/NOC, एक व्यक्ति को transmission/payment या कानूनी उत्तराधिकार दस्तावेज, संबंधित वारिसों के अधिकार के अनुसार वितरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यदि परिवार में विवाद है, तो मामला अदालत तक भी जा सकता है।</p><p>छठा, अगर निवेशक पर कर्ज भी था?: यह महत्वपूर्ण बिंदु है। मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकार मिलने का अर्थ यह नहीं कि उससे जुड़े वैध दायित्व स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यदि कोई ऋण/कानूनी दावा है, तो उसकी स्थिति अलग से देखनी पड़ सकती है। इसलिए बड़ी रकम वाले निवेश में Will और Nomination और व्यवस्थित financial records रखना बहुत उपयोगी है।</p><p>सातवां, सबसे जरूरी दस्तावेजों की Master Checklist: परिवार को पहले से एक सुरक्षित जगह पर ये रिकॉर्ड रखना चाहिए: निवेश से जुड़े दस्तावेज: AMC के नाम, Folio Number, Scheme Name, Statement of Account, PAN, Nominee details, Holding mode — Single/Joint, Distributor/Platform details.</p><p>मृत्यु के बाद: Death Certificate, &nbsp;Claim/Transmission Form, Claimant का PAN, &nbsp;KYC documents, Bank proof/cancelled cheque, Legal Heir Certificate, जहां आवश्यक हो, &nbsp;Will, यदि मौजूद हो, Succession/Probate documents, जहां आवश्यक हो, NOC/Consent, जहां आवश्यक हो, Indemnity/Affidavit, जहां आवश्यक हो।</p><h2># एक बहुत उपयोगी Financial Safety File बनाइए</h2><p>परिवार की सुविधा के लिए एक “Financial Information File” बनाकर उसमें यह सूची रखें: Bank Accounts, Mutual Funds, Insurance, PPF, EPF, NPS, Demat/Shares, Bonds, Property and Loans.</p><p>हर निवेश के सामने लिखें: संस्था | Account/Folio No. | Nominee | Approx. Value | संबंधित दस्तावेज, लेकिन OTP, UPI PIN, ATM PIN, Internet Banking Password या अन्य संवेदनशील पासवर्ड इस फाइल में खुले रूप में न रखें।</p><h2># सबसे बेहतर व्यवस्था क्या है?</h2><p>यदि आप चाहते हैं कि मृत्यु के बाद परिवार को कम से कम परेशानी हो, तो आदर्श रूप से: Nominee, Valid Will, Updated KYC, सही Bank Details और परिवार को investments की जानकारी- इन पांचों को व्यवस्थित रखें। Nominee अकेला पर्याप्त नहीं है, और Will होने पर भी nominee details अपडेट रखना उपयोगी है।</p><h2># निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सलाह</h2><p>अगर आपने अभी तक म्यूचुअल फंड में nomination नहीं किया है, तो इसे जल्द पूरा करना बेहतर है। इससे मृत्यु के बाद परिवार को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और देरी से बचाया जा सकता है। और यदि आपके पास कई म्यूचुअल फंड हैं, तो हर folio में nominee की स्थिति जरूर जांचें—सिर्फ एक फंड में nominee दर्ज होना पर्याप्त नहीं है।</p><p>- कमलेश पांडेय<br>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-the-process-for-claiming-mutual-fund-money-if-no-nominee-has-been-appointed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आधार में मोबाइल नंबर से लेकर पता तक घर बैठे बदलें: 2026 की पूरी प्रक्रिया, शुल्क और जरूरी दस्तावेज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/update-from-your-mobile-number-to-your-address-in-aadhaar-from-the-comfort-of-your-home]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आधार कार्ड आज लगभग हर महत्वपूर्ण सरकारी और वित्तीय काम में इस्तेमाल होने वाला दस्तावेज है। बैंक खाता, मोबाइल कनेक्शन, पेंशन, सरकारी योजनाओं से लेकर आयकर और डिजिटल केवाईसी (KYC) तक कई सेवाओं में आधार से जुड़ी जानकारी सही और अपडेट रखना जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आधार में मोबाइल नंबर, पता या ई-मेल बदल गया है तो क्या हर बार आधार केंद्र जाना जरूरी है? जवाब है—नहीं।</p><p>2026 में UIDAI ने नए Aadhaar App के जरिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को मोबाइल से उपलब्ध कराया है। फिलहाल ऐप में मोबाइल नंबर और पता अपडेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि नाम, जन्मतिथि, लिंग और बायोमेट्रिक जैसी सभी जानकारी घर बैठे बदलने की सुविधा नहीं है। इनके लिए परिस्थितियों के अनुसार Aadhaar Enrolment/Update Centre जाना पड़ सकता है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/big-plans-of-the-samrat-government-of-bihar-for-daughters" target="_blank" rel="noopener">स्टार्टअप के लिए 2 लाख तो PhD में हर महीने 10 हजार, बेटियों के लिए बिहार की सम्राट सरकार की बड़ी योजनाएं</a></p><h2># 2026 में आधार में क्या-क्या घर बैठे बदल सकते हैं?</h2><p>एक, मोबाइल नंबर: यह 2026 में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है। UIDAI के नए Aadhaar App में Mobile Number Update की सुविधा उपलब्ध है। ऐप में मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए Aadhaar number holder को ऐप पर रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करना और आवश्यक authentication पूरा करना होता है। UIDAI के अनुसार नए ऐप में Mobile Number Update और Address Update दोनों सेवाएं उपलब्ध हैं। ध्यान रखें कि आपकी स्थिति और authentication requirements के आधार पर प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए ऐप में दिखाई देने वाले निर्देशों का पालन करें।</p><p>दो, पता: आधार में पता बदलने की सुविधा लंबे समय से myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध है और अब नया Aadhaar App भी Address Update सुविधा देता है।<br>ऑनलाइन Address Update के लिए सामान्यतः:<br>Aadhaar Number, Registered Mobile OTP, &nbsp;नया पता, संबंधित दस्तावेज और Submit की प्रक्रिया अपनानी होती है। UIDAI के अनुसार myAadhaar पर ऑनलाइन Address Update के लिए आधार से मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड होना जरूरी है और मांगे गए पते के प्रमाण (POA) का दस्तावेज अपलोड करना होता है।</p><p>तीसरा, ई-मेल: ई-मेल अपडेट की सुविधा भी Aadhaar App में उपलब्ध है। खास बात यह है कि UIDAI ने Aadhaar App के जरिए ई-मेल एड्रेस अपडेट का शुल्क 31 दिसंबर 2026 तक माफ किया है।</p><h2># अब जानिए कि किन चीजों के लिए आधार केंद्र जाना पड़ सकता है?</h2><p>हर Aadhaar detail को मोबाइल से बदलने की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। जैसे:&nbsp;<br>नाम: नाम में परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत Aadhaar Enrolment/ Update Centre जाना पड़ सकता है और वैध supporting document देना होता है।<br>जन्मतिथि: Date of Birth में बदलाव के लिए भी दस्तावेजों के साथ निर्धारित अपडेट प्रक्रिया अपनानी होती है। UIDAI ने इसके लिए अलग Standard Operating Procedure भी जारी किया है।<br>लिंग: Gender update के लिए भी Aadhaar Centre की assisted update प्रक्रिया उपलब्ध है।<br>फोटो और बायोमेट्रिक: फिंगरप्रिंट, आइरिस और फोटो जैसे biometric updates के लिए Aadhaar Centre जाना पड़ता है।&nbsp;<br>UIDAI के अनुसार biometric update में fingerprint, iris और photograph शामिल हैं। सामान्य परिस्थितियों में biometric update का शुल्क ₹125 है, जबकि निर्धारित आयु-समूहों में Mandatory Biometric Update पर विशेष छूट लागू है।</p><h2># 2026 में आधार अपडेट का शुल्क कितना है?</h2><p>UIDAI की वर्तमान शुल्क सूची के अनुसार: सेवा-शुल्क<br>Demographic Update अलग से ₹75, Biometric Update सामान्यतः ₹125, Demographic व &nbsp;Biometric Update एक साथ। Biometric update के नियमों के अनुसार, Aadhaar App से Email Update| 31 दिसंबर 2026 तक मुफ्त। myAadhaar से Document Update14 जून 2027 तक मुफ्त।<br>Aadhaar Centre पर Document Updat ₹75.<br>UIDAI की वर्तमान शुल्क सूची में demographic update के अंतर्गत नाम, लिंग, जन्मतिथि, पता, मोबाइल नंबर और ई-मेल आदि शामिल किए गए हैं। अलग से demographic update कराने की फीस ₹75 है।<br>महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के Mandatory Biometric Update के लिए अलग शुल्क नियम हैं। 7–15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शुल्क-माफी की वर्तमान व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक लागू है।</p><h2># myAadhaar से पता कैसे बदलें?</h2><p>अगर आप वेबसाइट के माध्यम से पता बदलना चाहते हैं तो प्रक्रिया मोटे तौर पर इस प्रकार है: Step 1: UIDAI के myAadhaar पोर्टल पर जाएं। Step 2: Aadhaar number से लॉगिन करें। Step 3: Registered mobile पर आए OTP से authentication करें। Step 4: Address Update विकल्प चुनें। Step 5: नया पता सावधानी से दर्ज करें। Step 6: मांगा गया Proof of Address दस्तावेज अपलोड करें। Step 7: जानकारी को Preview में अच्छी तरह जांचें। Step 8: आवश्यक शुल्क का भुगतान करें। Step 9: Request Submit करें।<br>इसके बाद आपको Update Request Number/ Reference के जरिए स्थिति ट्रैक करने की सुविधा मिल सकती है। UIDAI के अनुसार ऑनलाइन Address Update में अपलोड किए गए दस्तावेजों का verification किया जाता है।</p><h2># Aadhaar App से अपडेट कैसे करें?</h2><p>नया Aadhaar App Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। UIDAI के अनुसार ऐप में Aadhaar number डालकर, Terms/Privacy को स्वीकार करके और Face Authentication पूरा करके registration किया जा सकता है। इसके बाद उपलब्ध सेवाओं में जाकर संबंधित update विकल्प चुना जा सकता है। Aadhaar App की प्रमुख सुविधाएं: Mobile Number Update,<br>Address Update, Biometric Lock/Unlock,<br>Authentication History, e-Aadhaar Download,<br>Aadhaar Verifiable Credential Sharing, Contact Card Sharing and Update Request Tracking. UIDAI ने बताया है कि ऐप के लिए Android 9.0 या उससे ऊपर तथा iOS 16.0 या उससे ऊपर का ऑपरेटिंग सिस्टम आवश्यक है।</p><h2># Document Update क्या है?</h2><p>यह समझना बहुत जरूरी है कि Document Update और Demographic Update एक ही चीज नहीं हैं।<br>Document Update में पहचान और पते से संबंधित दस्तावेजों को आधार रिकॉर्ड के समर्थन में जमा किया जाता है। UIDAI ने myAadhaar portal पर Document Update की फीस 14 जून 2027 तक माफ की है। जबकि Aadhaar Centre पर Document Update के लिए ₹75 शुल्क निर्धारित है। इसलिए जिन लोगों ने लंबे समय से अपने आधार में पहचान या पते के प्रमाण से जुड़े दस्तावेज अपडेट नहीं किए हैं, उन्हें UIDAI की सलाह और अपने रिकॉर्ड के अनुसार Document Update पर भी ध्यान देना चाहिए।</p><h2># कौन-कौन से दस्तावेज काम आ सकते हैं?</h2><p>पता अपडेट के लिए UIDAI द्वारा स्वीकार किए जाने वाले वैध Proof of Address दस्तावेजों की सूची में विभिन्न सरकारी और अन्य निर्धारित दस्तावेज शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर UIDAI की जानकारी में पासपोर्ट, राशन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों का उल्लेख है। कुछ परिस्थितियों में बिजली, पानी या लैंडलाइन टेलीफोन बिल भी निर्धारित शर्तों के तहत स्वीकार किए जा सकते हैं। लेकिन कोई भी दस्तावेज अपलोड करने से पहले UIDAI की वर्तमान Supporting Documents List में उसकी पात्रता जरूर जांचें।</p><h2># घर बैठे अपडेट करते समय इन गलतियों से बचें:-</h2><p>एक, गलत मोबाइल नंबर न डालें: आधार में मोबाइल नंबर गलत दर्ज होने पर OTP आधारित सेवाओं में परेशानी हो सकती है। दो, पता वही लिखें जो दस्तावेज में है। तीन,&nbsp;<br>Address Update में spelling, house number, locality और PIN code को ध्यान से जांचें। तीन, खराब स्कैन/फोटो अपलोड न करें: दस्तावेज साफ और पढ़ने योग्य होना चाहिए। चार, एजेंट से सावधान रहें: आधार अपडेट के नाम पर अनधिकृत व्यक्ति को OTP या Aadhaar PIN जैसी संवेदनशील जानकारी न दें। पांच, OTP किसी से साझा न करें: UIDAI कभी भी फोन पर आपसे OTP बताने के लिए नहीं कहता।</p><h2># सबसे आसान तरीके से समझिए: 2026 में आधार अपडेट की स्थिति:</h2><p>घर बैठे/मोबाइल से उपलब्ध: मोबाइल नंबर — Aadhaar App, पता — Aadhaar App / myAadhaar, ई-मेल — Aadhaar App और Document Update — myAadhaar. वहीं, केंद्र जाकर कराने वाली प्रमुख सेवाएं: फोटो/बायोमेट्रिक, कई नाम परिवर्तन मामले, जन्मतिथि से जुड़े निर्धारित अपडेट, अन्य ऐसे अपडेट जिनके लिए physical verification/biometric capture जरूरी है। ध्यान रहे कि UIDAI की सेवाओं और नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले UIDAI के आधिकारिक पोर्टल पर वर्तमान निर्देश देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।</p><p>वस्तुतः आधार अपडेट अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। 2026 में नया Aadhaar App नागरिकों को मोबाइल नंबर और पता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी अपडेट करने की सुविधा दे रहा है। साथ ही ई-मेल अपडेट के लिए 31 दिसंबर 2026 तक शुल्क माफ है और myAadhaar पर Document Update की मुफ्त सुविधा 14 जून 2027 तक जारी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आधार की हर जानकारी घर बैठे बदली जा सकती है। नाम, जन्मतिथि, लिंग और biometric information जैसे मामलों में अभी भी निर्धारित केंद्र-आधारित प्रक्रिया लागू है। इसलिए “आधार में सब कुछ घर बैठे बदलें” के बजाय सही संदेश है—आधार की कई महत्वपूर्ण जानकारियां अब घर बैठे अपडेट करें, लेकिन सभी नहीं।</p><p>- कमलेश पांडेय<br>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 18:28:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/update-from-your-mobile-number-to-your-address-in-aadhaar-from-the-comfort-of-your-home</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[स्टार्टअप के लिए 2 लाख तो PhD में हर महीने 10 हजार, बेटियों के लिए बिहार की सम्राट सरकार की बड़ी योजनाएं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/big-plans-of-the-samrat-government-of-bihar-for-daughters]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बिहार सरकार ने बेटियों और महिलाओं की उच्च शिक्षा, स्वरोजगार और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अगस्त 2026 में बेटियों और बहनों के लिए शिक्षा, उद्यमिता और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की। इनमें PhD करने वाली छात्राओं को हर महीने 10,000 रुपये की सहायता और स्टार्टअप शुरू करने के लिए 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद शामिल है।<br><br>इन पहलों में मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप, बिहार की बेटी स्टार्टअप योजना और पुलिस दीदी अभया ब्रिगेड शामिल हैं। साथ में, वे उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना और शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास सुरक्षा में सुधार करना चाहते हैं। आईये इन योजनाओं के बारे में जानते हैं:</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-delhi-lakshmi-yojana-learn-about-the-application-process-eligibility-required-documents" target="_blank" rel="noopener">क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? जानिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और दस्तावेज से जुड़ी जरूरी बातें</a></p><h2>1. मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप</h2><p>उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप शुरू की है। योजना की मुख्य बातें:<br>- लगभग 1,000 योग्य छात्राओं को योजना का लाभ देने का प्रावधान।<br>- चयनित छात्राओं को 10,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता।<br>- यह सहायता चार साल तक दिए जाने का प्रावधान है।<br>- योजना का उद्देश्य छात्राओं को PhD और शोध कार्य के दौरान आर्थिक मदद देना है।<br><br>सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से अधिक छात्राएं उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगी।</p><h2>2. बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना</h2><p>जो बेटियां अपना कारोबार या स्टार्टअप शुरू करना चाहती हैं, उनके लिए सरकार ने बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना शुरू की है। इस योजना के तहत:<br>- महिला उद्यमियों को अपने स्टार्टअप और नवाचार के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।<br>- 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद का प्रावधान है।<br>- सहायता का उद्देश्य नए उद्यम और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।<br>- बेटियों को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने पर जोर दिया गया है।</p><p>हालांकि, योजना के तहत आवेदन, चयन और अन्य विस्तृत पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित विभाग के आधिकारिक पोर्टल से जांचना जरूरी है।</p><h2>3. बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी</h2><p>सरकार ने छात्राओं की सुरक्षा के लिए भी नई पहल की है। इसके तहत पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) के लिए 4,700 स्कूटर और मोटरसाइकिलों का लोकार्पण और फ्लैग-ऑफ किया गया। इस पहल का उद्देश्य:<br>- स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना।<br>- महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को मजबूत करना।<br>- जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता को अधिक प्रभावी बनाना।</p><h2>बेटियों को कैसे मिलेगा इन योजनाओं का लाभ?</h2><p>इन नई योजनाओं में लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा तय पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। आवेदन से पहले इन बातों की जांच करें:<br>- योजना की आधिकारिक अधिसूचना।<br>- उम्र और शैक्षणिक योग्यता।<br>- बिहार का निवास संबंधी नियम।<br>- जरूरी दस्तावेज।<br>- आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि।<br>- चयन की शर्तें।<br>- पुरानी योजनाओं से भी मिल रहा फायदा</p><p>बिहार में महिलाओं के लिए पहले से भी कई योजनाएं संचालित हैं, जिनका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार को बढ़ावा देना है। नई PhD फेलोशिप और बेटी स्टार्टअप चैलेंज जैसी पहल से अब बेटियों को उच्च शिक्षा से लेकर अपना कारोबार शुरू करने तक अतिरिक्त मदद मिलने की उम्मीद है।<br><br>बिहार सरकार की नई योजनाएं बेटियों को पढ़ाई और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। PhD करने वाली योग्य छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना के तहत महिला उद्यमियों को 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है।<br><br>हालांकि, किसी भी योजना के लिए आवेदन करने से पहले उसकी विस्तृत पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी बिहार सरकार के संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जरूर जांच लें।<br><br>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 19:14:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/big-plans-of-the-samrat-government-of-bihar-for-daughters</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? जानिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और दस्तावेज से जुड़ी जरूरी बातें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-delhi-lakshmi-yojana-learn-about-the-application-process-eligibility-required-documents]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर महिलाओं के बीच लंबे समय से चर्चा थी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार के ताजा ऐलान के अनुसार, योजना की पात्र लाभार्थियों को 1 सितंबर 2026 से 2,500 रुपये की मासिक सहायता राशि मिलना शुरू हो गई है।</p><h2>ताजा जानकारी के अनुसार:</h2><p>- पात्र महिलाओं को स्वीकृति पत्र अगस्त के अंतिम सप्ताह में दिए गए।<br>- 1 सितंबर 2026 से पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई।<br>- पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।<br>- राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/avoid-making-these-10-common-mistakes-when-investing-in-mutual-fund-schemes" target="_blank" rel="noopener">म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते समय 10 आम गलतियों को करने से बचें, तभी मुनाफा होगा</a><br>&nbsp;</p><h2><br>क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना?</h2><p>दिल्ली लक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पात्र महिलाओं को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि इस योजना से महिलाओं को घरेलू खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।<br>&nbsp;</p><h2><br>योजना के तहत:</h2><p>- पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता।<br>- लाभार्थियों को स्वीकृति और सत्यापन प्रक्रिया के बाद योजना में शामिल किया जाता है।<br>- सहायता राशि बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।<br><br>डिफ़ॉल्ट रूप से, ₹2,500 में से ₹1,500 बेनिफिशियरी महिला के रिकरिंग डिपॉजिट (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अकाउंट में जमा किए जाएंगे। बाकी ₹1,000 बेनिफिशियरी के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट से जुड़े बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जाएंगे। RD या FD में जमा की गई रकम पर 31 जुलाई, 2029 तक लॉक-इन पीरियड लागू होगा।<br>&nbsp;</p><h2><br>आवेदन और लाभार्थियों की स्थिति</h2><p>योजना शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसके लिए पंजीकरण कराया था। रिपोर्टों के अनुसार, लाखों महिलाओं ने योजना के लिए आवेदन किया और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पात्र लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए गए।<br>&nbsp;</p><h2><br>खाते में पैसा नहीं आया तो क्या करें?</h2><p>यदि आप योजना की पात्र लाभार्थी हैं और आपके खाते में राशि नहीं आई है तो इन बातों की जांच करें:<br>- आवेदन का स्टेटस जांचें।<br>- बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।<br>- आवेदन में दिए गए दस्तावेज पूरे और सही हैं या नहीं।<br>- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए SMS की जांच करें।<br>- संबंधित विभाग या आधिकारिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।<br><br>रिपोर्टों के अनुसार, गलत या अधूरी जानकारी वाले आवेदनों में सुधार या सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है।<br>&nbsp;</p><h2><br>क्या सभी महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?</h2><p>नहीं। योजना का लाभ केवल उन महिलाओं को मिलेगा जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं और जिनका आवेदन सत्यापन के बाद मंजूर किया गया है। केवल आवेदन कर देना योजना का लाभ मिलने की गारंटी नहीं है।<br>&nbsp;</p><h2><br>इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>- केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही आवेदन और स्टेटस जांचें।<br>- किसी एजेंट को अनावश्यक पैसे न दें।<br>- बैंक खाते और मोबाइल नंबर की जानकारी अपडेट रखें।<br>- स्वीकृति पत्र मिलने के बाद भी बैंक खाते की स्थिति जांचते रहें।<br>- योजना से जुड़ी नई जानकारी के लिए केवल दिल्ली सरकार के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें।<br><br>दिल्ली लक्ष्मी योजना की पहली किस्त को लेकर अब इंतजार समाप्त हो चुका है। सरकार के बाद के ऐलान के अनुसार 1 सितंबर 2026 से पात्र महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक सहायता राशि मिलना शुरू हुई। हालांकि, प्रत्येक आवेदक को लाभ तभी मिलेगा जब उसका आवेदन और पात्रता सरकार द्वारा सत्यापित और स्वीकृत हो। इसलिए जिन महिलाओं ने आवेदन किया है, उन्हें अपना स्टेटस और बैंक विवरण जरूर जांचना चाहिए।<br><br>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 19:04:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-delhi-lakshmi-yojana-learn-about-the-application-process-eligibility-required-documents</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते समय 10 आम गलतियों को करने से बचें, तभी मुनाफा होगा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/avoid-making-these-10-common-mistakes-when-investing-in-mutual-fund-schemes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल म्यूचुअल फंड में निवेश करने का प्रचलन बढ़ा है, क्योंकि इसमें थोड़ी सी जोखिम उठाने और सही रणनीति अपनाने से बैंक ब्याज या एफडी से ज्यादा रिटर्न प्राप्त होता है। इसलिए वित्तीय सलाहकार बताते हैं कि म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सबसे बड़ी गलती रिटर्न के पीछे भागना और अपने लक्ष्य, जोखिम तथा समय-अवधि को नजरअंदाज करना है।&nbsp;</div><div><br></div><div>देखा जाए तो म्यूचुअल फंड के निवेशक 10 आम गलतियाँ कर ही बैठते हैं। प्रायः हर किसी से यह हो जाती हैं। इसलिए इन गलतियों से बचें और एक बेहतर आर्थिक भविष्य प्राप्त करें। म्यूचुअल फंड निवेश की कुछ महत्वपूर्ण गलतियाँ निम्नलिखित हैं:-</div><div><br></div><div>पहला, सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना: पिछले 1–3 साल का शानदार प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है। इसलिए फंड की रणनीति, जोखिम और लंबी अवधि का प्रदर्शन भी देखें। अन्यथा भविष्य में आपको हानि उठानी पड़ सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-purchased-a-vehicle-but-did-not-transfer-the-rc-within-six-months" target="_blank">वाहन खरीदा, लेकिन छह महीने तक आरसी ट्रांसफर नहीं कराई तो बदल सकता है मालिकाना हक! सरकार लाई नया मसौदा नियम</a></h3><div>दूसरा, अपने लक्ष्य के बिना निवेश करना: बच्चों की शिक्षा, लड़की की शादी, घर, रिटायरमेंट या संपत्ति निर्माण—हर लक्ष्य के लिए निवेश की अवधि और फंड का चुनाव अलग हो सकता है। ऐसा करने में ही बुद्धिमानी होगी। इससे उपर्युक्त मौके पर आपके हाथ में सुनिश्चित धन रहेगा।</div><div><br></div><div>तीसरा, जोखिम क्षमता से ज्यादा इक्विटी में जाना: इक्विटी फंड में बाजार गिरने पर बड़ी गिरावट संभव है। इसलिए जितनी गिरावट आप मानसिक और आर्थिक रूप से सह सकते हैं, उसी के अनुसार निवेश करें। यह बात हमेशा याद रखें कि म्यूचुअल फंड मार्केट में रिस्क तो उठाना ही पड़ता है, ज्यादा गेन प्राप्त करने के लिए।</div><div><br></div><div>चौथा, बाजार गिरते ही SIP बंद कर देना: बाजार की गिरावट SIP निवेशक के लिए कम कीमत पर यूनिट खरीदने का अवसर भी हो सकती है। लेकिन केवल डर के कारण SIP रोकना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है। चूंकि यह आपकी छोटी छोटी बचत को बड़ा बना देता है। इसलिए अपेक्षित सावधानी जरूरी है।</div><div><br></div><div>पांचवां, बहुत सारे फंड खरीद लेना: कुछ निवेशक एक ही बार में बहुत सारे फंड खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि 10–15 फंड रखने से जरूरी नहीं कि विविधीकरण (diversification) बेहतर हो जाए। कई फंड एक ही कंपनियों या क्षेत्रों में निवेश कर रहे हो सकते हैं। इसलिए इस दिशा में भी अपेक्षित सावधानी जरूरी है।</div><div><br></div><div>छठा, NFO को सस्ता समझना: ₹10 की NAV वाला नया फंड जरूरी नहीं कि ₹100 NAV वाले पुराने फंड से सस्ता हो। चूंकि NAV अकेले फंड की गुणवत्ता नहीं बताती। इसलिए आंख मुदकर इन्हें खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।</div><div><br></div><div>सातवां, Expense Ratio और Exit Load को नजरअंदाज करना: निवेश से पहले खर्च, exit load और अन्य लागू शुल्क समझना जरूरी है। तभी छोटी लागत का लंबी अवधि में बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</div><div><br></div><div>आठवां, बार-बार फंड बदलना: हर कुछ महीनों में प्रदर्शन देखकर फंड बदलना निवेश को अनुशासनहीन बना सकता है। ऐसे बदलाव का फैसला फंड की मूल रणनीति और आपके लक्ष्य के आधार पर करें।</div><div><br></div><div>नौवां, कर (Tax) को नजरअंदाज करना: फंड बेचने पर लागू capital-gains tax और holding period को समझे बिना redemption का फैसला न करें। इसके लिए अनुभवी फंड मैनेजर की मदद लें।</div><div><br></div><div>दस, बिना समझे किसी की सलाह पर निवेश करना: मित्र, रिश्तेदार, सोशल मीडिया या एजेंट की सलाह उपयोगी हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने से पहले फंड के दस्तावेज, जोखिम और अपने वित्तीय लक्ष्य जरूर देखें। इससे आपको सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।</div><div><br></div><div>सबसे जरूरी मंत्र: “सही फंड” से ज्यादा महत्वपूर्ण है— सही लक्ष्य, सही अवधि, सही जोखिम, नियमित निवेश और धैर्य।</div><div><br></div><div>इसके अलावा, अपने निवेश से पहले यह भी तय करें कि आपको कितने समय बाद कितनी मोटी रकम चाहिए। उसी के आधार पर asset allocation और mutual-fund category चुनना अधिक तार्किक होता है। यही सही रणनीति होगी।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 18:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/avoid-making-these-10-common-mistakes-when-investing-in-mutual-fund-schemes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[वाहन खरीदा, लेकिन छह महीने तक आरसी ट्रांसफर नहीं कराई तो बदल सकता है मालिकाना हक! सरकार लाई नया मसौदा नियम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-purchased-a-vehicle-but-did-not-transfer-the-rc-within-six-months]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद RC (Registration Certificate) अपने नाम ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। अब केंद्र सरकार ने वाहन के मालिकाना हक के ट्रांसफर और अधिकृत डीलरों के जरिए पुराने वाहनों की बिक्री को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसमें छह महीने की समय सीमा का प्रावधान चर्चा में है।</div><div>&nbsp;</div><div>हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि छह महीने बाद मालिकाना हक बदलने का प्रस्ताव आम व्यक्ति द्वारा खरीदे गए वाहन पर सीधे लागू होने वाला नियम नहीं है। यह मुख्य रूप से उस वाहन के लिए प्रस्तावित है, जिसे पंजीकृत मालिक ने अधिकृत डीलर को सौंप दिया है और Form 29C के जरिए इसकी सूचना दी गई है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?</h2><div>सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य खासकर संगठित सेकंड-हैंड वाहन कारोबार में वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने और अंतिम खरीदार के नाम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/who-can-get-an-ayushman-card-will-taxpayers-pf-or-esic-holders-be-eligible" target="_blank">आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता है? क्या Taxpayers, PF, ESIC वाले इसके पात्र होंगे?</a></h3><h2>प्रस्ताव के मुताबिक :&nbsp;&nbsp;</h2><div>- अधिकृत डीलर को वाहन मिलने के बाद उसकी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। एक डीलर से दूसरे अधिकृत डीलर के पास वाहन जाने पर Form 29CA का इस्तेमाल प्रस्तावित है।</div><div>- डीलर से डीलर वाहन ट्रांसफर की संख्या अधिकतम दो रखने का प्रस्ताव है।</div><div>- Form 29C दाखिल होने के बाद वाहन छह महीने से ज्यादा समय तक डीलर के पास बिना Form 30 के नहीं रखा जा सकेगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>छह महीने बाद क्या होगा?</h2><div>प्रस्तावित नियम के अनुसार, यदि Form 29C दाखिल होने की तारीख से छह महीने के भीतर वाहन का मालिकाना हक Form 30 के जरिए किसी खरीदार को ट्रांसफर नहीं होता है तो वाहन का मालिकाना हक आखिरी अधिकृत डीलर के नाम अपने आप ट्रांसफर होने का प्रस्ताव है। यह बदलाव VAHAN सिस्टम में दर्ज किया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><div>उदाहरण के तौर पर, अगर किसी वाहन को मालिक ने डीलर A को सौंपा और बाद में वह डीलर B के पास चला गया, तो छह महीने की समयसीमा के भीतर अंतिम खरीदार के नाम Form 30 से ट्रांसफर होना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रस्ताव के मुताबिक आखिरी डीलर के नाम मालिकाना हक दर्ज हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या आम वाहन खरीदार को छह महीने में RC ट्रांसफर कराना होगा?</h2><div>यहां भ्रम दूर करना जरूरी है। मौजूदा सामान्य RC ट्रांसफर प्रक्रिया में खरीदार के लिए अलग समयसीमा लागू है। एक ही राज्य में वाहन की बिक्री होने पर सामान्यतः ट्रांसफर की सूचना और आवेदन निर्धारित समय में करना होता है। संबंधित परिवहन विभाग के अनुसार, सामान्य ट्रांसफर के लिए Form 29 और Form 30 का इस्तेमाल किया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>इसलिए नए मसौदे की छह महीने वाली शर्त को सीधे यह कहना कि “हर खरीदार छह महीने में RC ट्रांसफर नहीं कराएगा तो गाड़ी का मालिकाना हक बदल जाएगा”, सही नहीं होगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>Form 29CA क्यों लाया जा रहा है?</h2><div>नए मसौदे में Form 29CA को अधिकृत डीलरों के बीच वाहन की आवाजाही दर्ज करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इससे क्या होगा :&nbsp;</div><div>- किस डीलर के पास वाहन है, इसका रिकॉर्ड रहेगा।</div><div>- वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने की जानकारी VAHAN पर दर्ज होगी।</div><div>- वाहन के अंतिम खरीदार तक पहुंचने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रैक योग्य होगी।</div><div>- पुराने वाहनों की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ सकती है।</div><div>- किन वाहनों के ट्रांसफर पर रोक लग सकती है?</div><div>&nbsp;</div><div>मसौदे में प्रस्ताव है कि कुछ परिस्थितियों में वाहन का डीलर को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं:</div><div>- RC वैध नहीं होना</div><div>- इंश्योरेंस वैध नहीं होना</div><div>- PUC प्रमाणपत्र वैध नहीं होना</div><div>- पेंडिंग ट्रैफिक चालान</div><div>- बकाया टैक्स या यूजर फीस</div><div>- वाहन से जुड़ा कुछ कानूनी या आपराधिक मामला</div><div>- वाहन पर हायर-पर्चेज, लीज या हाइपोथिकेशन जैसी देनदारी होना।</div><div>&nbsp;</div><h2>अभी क्या है स्थिति?</h2><div>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम कानून नहीं। मंत्रालय ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान किस रूप में लागू होंगे।</div><div>&nbsp;</div><h2>वाहन मालिक और खरीदार क्या करें?</h2><div>- वाहन खरीदने के बाद RC ट्रांसफर को टालें नहीं।</div><div>- Form 29 और Form 30 की प्रक्रिया समय पर पूरी करें।</div><div>- खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।</div><div>- वाहन का इंश्योरेंस और PUC वैध रखें।</div><div>- पेंडिंग चालान और टैक्स की स्थिति जांचें।</div><div>- सेकंड-हैंड वाहन खरीदते समय VAHAN रिकॉर्ड की जांच करें।</div><div>&nbsp;</div><div>सरकार के नए मसौदे का मुख्य उद्देश्य पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री में मालिकाना हक और डीलर-से-डीलर वाहन की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करना है। छह महीने की प्रस्तावित सीमा खासतौर पर अधिकृत डीलर के पास रखे वाहन से जुड़ी है। इसे हर निजी खरीदार पर लागू होने वाला नया छह महीने का RC नियम समझना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक मसौदा है, इसलिए वाहन मालिकों और खरीदारों को अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत भी वाहन खरीदने के बाद RC अपने नाम कराने में देरी करना उचित नहीं है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 19:39:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-purchased-a-vehicle-but-did-not-transfer-the-rc-within-six-months</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता है? क्या Taxpayers, PF, ESIC वाले इसके पात्र होंगे? ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/who-can-get-an-ayushman-card-will-taxpayers-pf-or-esic-holders-be-eligible]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी&nbsp; PM-JAY सरकार का हेल्थकेयर प्रोग्राम है जो हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देता है, जो एम्पैनल्ड सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>आयुष्मान कार्ड क्या है?</h2><div>आयुष्मान कार्ड एक डिजिटल हेल्थ कार्ड है जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PMJAY) के तहत जारी किया जाता है। योग्य लाभार्थी आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल करके पूरे भारत में पैनल वाले अस्पतालों में हर परिवार को हर साल ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज का फ़ायदा उठा सकते हैं। यह&nbsp; कार्ड सभी योग्य लाभार्थियों के लिए सस्ती और आसानी से मिलने वाली हेल्थकेयर पक्का करता है और सेकेंडरी और टर्शियरी केयर हॉस्पिटलाइज़ेशन तक पहुँच देता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/have-you-not-used-your-credit-card-for-a-long-time" target="_blank">Credit Card Closure: क्या आपने लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया? तो जानिए कैसे हो सकता है आपका नुकसान?</a></h3><h2>आयुष्मान कार्ड की एलिजिबिलिटी</h2><div>PM-JAY के लिए एलिजिबल होने के लिए व्यक्ति को सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) 2011 के डेटा के साथ-साथ राज्य-स्पेसिफिक बेनिफिशियरी डेटाबेस और तय ऑक्यूपेशनल कैटेगरी में आना चाहिए। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के लिए अलग-अलग हैं।&nbsp;</div><div>आयुष्मान कार्ड के लिए एलिजिबल शहरी और ग्रामीण परिवारों की लिस्ट ये है:</div><div>&nbsp;</div><h2>I. शहरी परिवार</h2><div>- कचरा बीनने वाले</div><div>- भिखारी</div><div>- घरेलू कामगार</div><div>- स्ट्रीट वेंडर, फेरीवाले, मोची या सड़कों पर काम करने वाले दूसरे सर्विस प्रोवाइडर</div><div>- कंस्ट्रक्शन वर्कर, राजमिस्त्री, प्लंबर, लेबर, वेल्डर, पेंटर, कुली, सिक्योरिटी गार्ड और दूसरे सिर पर बोझा ढोने वाले वर्कर</div><div>- सफाई कर्मचारी, सैनिटेशन वर्कर और माली</div><div>- घर से काम करने वाले वर्कर, हैंडीक्राफ्ट वर्कर, कारीगर और दर्जी</div><div>- ट्रांसपोर्ट वर्कर, कंडक्टर, ड्राइवर, गाड़ी खींचने वाले, ड्राइवर और कंडक्टर के हेल्पर और रिक्शा चलाने वाले</div><div>- असिस्टेंट, दुकान में काम करने वाले, छोटी जगहों पर चपरासी, डिलीवरी असिस्टेंट, हेल्पर, वेटर और अटेंडेंट</div><div>- इलेक्ट्रीशियन, असेंबलर, मैकेनिक और रिपेयर वर्कर</div><div>- धोबी और चौकीदार</div><div><br></div><h2>II. ग्रामीण परिवार</h2><div>- एक कमरे वाले कच्चे घरों में रहने वाले परिवार</div><div>- जिन परिवारों में 16-59 साल की उम्र का कोई एडल्ट सदस्य नहीं है</div><div>- SC/ST परिवार</div><div>- जिन परिवारों में एक विकलांग सदस्य है, लेकिन कोई गैर-विकलांग एडल्ट सदस्य नहीं है</div><div>- जिन परिवारों में 16-59 साल की उम्र का कोई एडल्ट पुरुष सदस्य नहीं है</div><div>- बिना ज़मीन वाले परिवार जो हाथ से काम करके रोज़ाना काम करते हैं</div><div><br></div><h2>III. सीनियर सिटिज़न</h2><div>- ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के 70 साल से ज़्यादा उम्र के सभी सीनियर सिटिज़न जो सीनियर सिटिज़न पहले से आयुष्मान भारत PMJAY (AB PMJAY) के तहत कवर हैं, वे हर साल ₹5 लाख तक का एक्स्ट्रा टॉप-अप कवर पाने के लिए एलिजिबल हैं</div><div>- जो सीनियर सिटिज़न पहले से ही दूसरी पब्लिक हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, जैसे कि एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS), सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS), या आयुष्मान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) का फायदा ले रहे हैं, वे अपनी मौजूदा स्कीम जारी रख सकते हैं या AB PMJAY में बदल सकते हैं</div><div>- प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी या एम्प्लॉई स्टेट इंश्योरेंस (ESI) स्कीम के तहत कवर सीनियर सिटिज़न AB PMJAY के लिए एलिजिबल हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>आयुष्मान भारत योजना के तहत क्या कवर होता है?</h2><div>PMJAY लिस्टेड सेकेंडरी और टर्शियरी केयर कंडीशन के लिए परिवार के सभी सदस्यों को ₹5,00,000 तक का कैशलेस कवर देता है। आयुष्मान भारत योजना स्कीम इलाज के इन हिस्सों पर होने वाले खर्चों को कवर करती है:</div><div>- मेडिकल जांच, इलाज और कंसल्टेशन</div><div>- इंटेंसिव और नॉन-इंटेंसिव केयर सर्विस</div><div>- दवा और मेडिकल कंज्यूमेबल्स</div><div>- डायग्नोस्टिक और लैबोरेटरी जांच</div><div>- इलाज के दौरान होने वाली दिक्कतें</div><div>- रहने के फायदे</div><div>- मेडिकल इम्प्लांटेशन सर्विस</div><div>- मरीज़ को खाना</div><div>- हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले का चार्ज 3 दिन तक</div><div>- हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद 15 दिन तक फॉलो-अप केयर</div><div>&nbsp;</div><h2>आयुष्मान कार्ड के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स</h2><div>आयुष्मान कार्ड रजिस्ट्रेशन, बेनिफिशियरी वेरिफिकेशन या e-KYC के दौरान इन डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ सकती है:</div><div>- पहचान वेरिफिकेशन और आधार-बेस्ड ऑथेंटिकेशन के लिए आधार कार्ड</div><div>- OTP वेरिफिकेशन के लिए आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर</div><div>- एलिजिबल राज्यों में बेनिफिशियरी सर्च के लिए राशन कार्ड या फैमिली ID</div><div>- एड्रेस प्रूफ</div><div>- PAN कार्ड या दूसरा पहचान प्रूफ</div><div>- इनकम सर्टिफिकेट, अगर लागू हो</div><div>- जाति सर्टिफिकेट, जहाँ ज़रूरी हो</div><div>- फैमिली-बेस्ड वेरिफिकेशन के लिए फैमिली रिलेशनशिप प्रूफ</div><div>- पासपोर्ट-साइज़ फोटो</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या Taxpayer आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है?</h2><div>केवल आयकरदाता होने या न होने से पात्रता तय नहीं होती। सामान्य PM-JAY में निर्धारित लाभार्थी सूची और पात्रता शर्तें देखी जाती हैं।&nbsp; केंद्र सरकार ने आय की परवाह किए बिना सभी 70+ नागरिकों को AB PM-JAY के तहत स्वास्थ्य कवर देने का फैसला किया है। यानी इस आयु वर्ग के लिए आयकरदाता होना बाधा नहीं है।</div><div><br></div><h2>क्या PF कटने वाले कर्मचारी आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं?</h2><div>सिर्फ किसी कर्मचारी के वेतन से EPF/PF का पैसा कटना यह तय नहीं करता कि वह आयुष्मान योजना का पात्र है या नहीं। यानी PF खाता होना अपने आप में न पात्रता देता है और न ही अपात्र बनाता है। 70 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति की पात्रता योजना के निर्धारित रिकॉर्ड और राज्य के नियमों के आधार पर जांची जानी चाहिए।</div><div><br></div><h2>क्या ESIC वाले कर्मचारी पात्र हैं?</h2><div>ESIC (Employees' State Insurance Corporation) एक अलग सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था है। इसलिए केवल ESIC में पंजीकरण होने से किसी व्यक्ति को अपने आप AB PM-JAY का लाभार्थी नहीं माना जा सकता।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/who-can-get-an-ayushman-card-will-taxpayers-pf-or-esic-holders-be-eligible</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Credit Card Closure: क्या आपने लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया? तो जानिए कैसे हो सकता है आपका नुकसान?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/have-you-not-used-your-credit-card-for-a-long-time]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>Credit Card Closure: क्या आपके पास ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिसे आपने लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया है? यदि हां, तो इसे नजरअंदाज करना हमेशा सही रणनीति नहीं है। वजह यह कि लंबे समय तक कार्ड का इस्तेमाल न करने से हर स्थिति में सीधे आपका CIBIL Score खराब नहीं होता, लेकिन कार्ड पर लगने वाले शुल्क, कार्ड के बंद होने और कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट में बदलाव जैसी परिस्थितियां आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित कर सकती हैं।</div><div><br></div><div>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि RBI के मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई क्रेडिट कार्ड एक वर्ष से अधिक समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया है, तो कार्ड जारी करने वाली कंपनी को कार्डधारक को सूचित करके उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू करनी होती है। यदि सूचना के 30 दिनों के भीतर कार्डधारक की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता, तो बकाया राशि के भुगतान के अधीन कार्ड बंद किया जा सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/free-legal-advice-for-women-how-and-where-to-get-help" target="_blank">महिलाओं के लिए मुफ्त कानूनी सलाह, कैसे और कहां मिलेगी मदद? जानें</a></h3><div>सवाल है कि क्या लंबे समय तक कार्ड इस्तेमाल न करने से CIBIL Score खराब हो जाता है? तो जवाब होगा कि सीधे तौर पर ऐसा कहना सही नहीं होगा। क्योंकि CIBIL के अनुसार क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में भुगतान इतिहास, क्रेडिट utilisation, क्रेडिट इतिहास की अवधि, लेन-देन का इतिहास और नए/बंद किए गए खातों जैसी जानकारी शामिल होती है। इसलिए केवल कार्ड का इस्तेमाल न करना और कार्ड को बंद कर देना—इन दोनों को एक ही बात नहीं समझना चाहिए।</div><div><br></div><div>असली असर कार्ड बंद होने के बाद पड़ सकता है। मान लीजिए आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं: - कार्ड A की लिमिट: ₹1 लाख, - कार्ड B की लिमिट: ₹2 लाख- कुल उपलब्ध लिमिट: ₹3 लाख। अगर कार्ड A बंद हो जाता है तो आपकी कुल उपलब्ध लिमिट घटकर ₹2 लाख रह जाएगी। यदि दूसरे कार्ड पर पहले से बकाया राशि है, तो आपकी credit utilisation ratio बढ़ सकती है।</div><div><br></div><div>CIBIL भी बताता है कि उपलब्ध क्रेडिट में बदलाव और utilisation आपके स्कोर को प्रभावित कर सकते हैं।</div><div><br></div><h2># समझिए कि पुराना क्रेडिट कार्ड बंद करना क्यों नुकसानदेह हो सकता है?</h2><div><br></div><div>यदि कोई कार्ड कई वर्षों से चल रहा है और उसका भुगतान इतिहास अच्छा है, तो वह आपके क्रेडिट इतिहास की लंबाई का हिस्सा है। CIBIL के अनुसार पुराने क्रेडिट खातों की अवधि और अच्छा repayment history आपके क्रेडिट प्रोफाइल के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसलिए केवल इसलिए कि कार्ड का इस्तेमाल कम हो रहा है, सबसे पुराने और अच्छे रिकॉर्ड वाले कार्ड को तुरंत बंद कर देना हमेशा समझदारी नहीं है।</div><div><br></div><h2>सवाल है कि क्या इस्तेमाल न करने पर Annual Fee देनी पड़ सकती है?</h2><div><br></div><div>यह आपके कार्ड के नियम और शर्तों पर निर्भर करता है। कुछ क्रेडिट कार्ड पर annual/renewal fee होती है, जबकि कुछ कार्ड lifetime-free होते हैं। इसलिए कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि उससे जुड़े सभी शुल्क अपने-आप समाप्त हो जाएंगे। बल्कि&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कार्डधारक को अपने कार्ड की fee structure और statement नियमित रूप से देखनी चाहिए।</span></div><div><br></div><h2># RBI का महत्वपूर्ण नियम: एक साल तक इस्तेमाल नहीं किया तो क्या होगा?</h2><div><br></div><div>यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे क्रेडिट कार्ड धारकों को जानना चाहिए। RBI के नियमों के अनुसार, यदि क्रेडिट कार्ड एक वर्ष से अधिक समय तक इस्तेमाल नहीं हुआ, तो कार्ड जारीकर्ता को कार्डधारक को सूचित करके उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू करनी होती है। यदि सूचना के 30 दिनों के भीतर कार्डधारक जवाब नहीं देता, तो बकाया राशि के भुगतान के अधीन कार्ड बंद किया जा सकता है। इसके बाद कार्ड बंद होने की सूचना Credit Information Companies को भी अपडेट करनी होती है।</div><div><br></div><div>एक और दिलचस्प बात यह है कि RBI के नियमों में 'used' होने के लिए केवल खरीदारी ही जरूरी नहीं है। Statement generate करना, PIN बदलना या transaction controls में बदलाव करना जैसे कुछ cardholder-initiated actions भी उपयोग माने जा सकते हैं। हालांकि केवल customer care पर सामान्य बातचीत करना usage नहीं माना जाता।</div><div><br></div><h2># क्रेडिट कार्ड बंद करवाना हो तो आपके अधिकार क्या हैं?</h2><div><br></div><div>यदि आप स्वयं कार्ड बंद करवाना चाहते हैं और सभी बकाया चुका चुके हैं, तो RBI के नियम आपके लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा देते हैं। कार्ड जारीकर्ता को closure request मिलने के बाद सात working days के भीतर कार्ड बंद करना होता है। इसके लिए ग्राहक को helpline, email, IVR, website, internet banking या mobile app जैसे विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराने होते हैं। केवल डाक से आवेदन भेजने पर जोर नहीं दिया जा सकता।</div><div><br></div><div>यदि सभी dues clear हैं और issuer सात working days के भीतर कार्ड बंद नहीं करता, तो नियमों के अनुसार ₹500 प्रति calendar day की देरी की penalty cardholder को देनी होती है, जब तक account बंद नहीं हो जाता।</div><div><br></div><h2># कार्ड बंद करने से पहले इन 7 बातों का ध्यान रखें</h2><div><br></div><div>1. सबसे पहले outstanding dues चेक करें। कार्ड बंद करने से पहले पूरा बकाया साफ करें।</div><div><br></div><div>2. Annual fee देखें। अगर कार्ड पर भारी annual fee है और उसका उपयोग नहीं हो रहा, तो उसे बनाए रखने का आर्थिक लाभ कम हो सकता है।</div><div><br></div><div>3. कार्ड की credit limit देखें। यदि यह आपकी कुल उपलब्ध credit limit का बड़ा हिस्सा है, तो इसे बंद करने&nbsp; बंद होने के बाद यह सुनिश्चित करें कि credit bureau report में account सही तरीके से 'closed' दिख रहा है।</div><div><br></div><h2># क्या हर unused credit card बंद कर देना चाहिए?</h2><div><br></div><div>नहीं। यदि कार्ड lifetime-free है, उसका repayment history अच्छा है और वह आपकी कुल credit limit को मजबूत रखता है, तो उसे बनाए रखना कई लोगों के लिए बेहतर हो सकता है। दूसरी तरफ, यदि कार्ड पर लगातार शुल्क लग रहा है, उसका कोई उपयोग नहीं है, खर्च पर नियंत्रण की समस्या है या आपके पास जरूरत से ज्यादा कार्ड हैं, तो closure उचित हो सकता है। CIBIL भी सलाह देता है कि पुराने खातों को बंद करने से पहले उनकी उम्र, credit utilisation और आपके पूरे credit profile पर संभावित प्रभाव को समझना चाहिए।</div><div><br></div><h2># निष्कर्ष: कार्ड रखना है या बंद करना है?</h2><div><br></div><div>लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल न करना अपने-आप में CIBIL Score खराब होने की गारंटी नहीं है। असल सवाल यह है कि कार्ड पर शुल्क कितना है? कार्ड कितना पुराना है? उसकी credit limit कितनी है? आपके पास अन्य कितने कार्ड हैं? और कार्ड बंद होने के बाद आपकी कुल credit utilisation कितनी हो जाएगी? इसलिए किसी पुराने क्रेडिट कार्ड को सिर्फ इसलिए बंद न करें कि वह लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है। पहले अपने पूरे credit profile को देखें और फिर फैसला लें। सबसे जरूरी बात: कार्ड बंद करने से पहले outstanding dues साफ करें, closure confirmation प्राप्त करें और बाद में अपनी CIBIL/credit report में account status की जांच जरूर करें।</div><div><br></div><div># RBI के नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक समय तक unused credit card पर issuer को closure process शुरू करने से पहले cardholder को सूचित करना होता है। वहीं CIBIL के अनुसार credit utilisation, payment history, credit history की अवधि और closed accounts सहित कई कारक credit score को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए “एक साल कार्ड इस्तेमाल नहीं किया तो CIBIL Score खराब हो जाएगा” कहना भ्रामक है।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 17:39:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/have-you-not-used-your-credit-card-for-a-long-time</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[महिलाओं के लिए मुफ्त कानूनी सलाह, कैसे और कहां मिलेगी मदद? जानें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/free-legal-advice-for-women-how-and-where-to-get-help]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कानूनी विवाद में वकील की फीस और अन्य खर्च कई बार लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाते हैं। खासकर घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद, तलाक, भरण-पोषण, कार्यस्थल पर उत्पीड़न या अन्य कानूनी मामलों में महिलाओं को जानकारी और कानूनी सहायता की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकार की मुफ्त कानूनी सहायता व्यवस्था महिलाओं के लिए काफी उपयोगी है।</div><div>&nbsp;</div><div>सबसे खास बात यह है कि किसी महिला को मुफ्त कानूनी सहायता पाने के लिए केवल कम आय वाली होना जरूरी नहीं है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत महिला होने के आधार पर भी मुफ्त कानूनी सेवाएं ली जा सकती हैं। NALSA के अनुसार आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिला भी मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन कर सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-a-masked-aadhaar-card-know-how-it-keeps-your-bank-account-safe-from-fraud" target="_blank">Masked Aadhaar Card क्या है, जानें कैसे यह आपके बैंक अकाउंट को फ्रॉड से रखता है सेफ?</a></h3><h2>किन मामलों में मिल सकती है मदद?</h2><div>मुफ्त कानूनी सहायता केवल अदालत में वकील उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसमें जरूरत के अनुसार निम्नलिखित चीज़ें शामिल हो सकती है:</div><div>- कानूनी सलाह और मार्गदर्शन</div><div>- अदालत में वकील की सहायता</div><div>- कानूनी दस्तावेज तैयार कराने में मदद</div><div>- अपील या अन्य कानूनी प्रक्रिया में सहायता</div><div>- उपयुक्त मामलों में कोर्ट फीस और अन्य कानूनी खर्च</div><div>- विवाद को समझौते या लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने में सहायता</div><div>&nbsp;</div><h2>किन महिलाओं को मिल सकती है मुफ्त कानूनी सहायता?</h2><div>महिला होने के आधार पर पात्रता मिलती है। यानी केवल यह वजह कि महिला आर्थिक रूप से सक्षम है, उसे इस सुविधा से बाहर नहीं करती। NALSA में यह स्पष्ट किया गया है कि महिला अपनी आय या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन कर सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>कहां मिलेगी मुफ्त कानूनी मदद?</h2><div>महिलाएं अपनी जरूरत के अनुसार इन संस्थाओं से संपर्क कर सकती हैं:</div><div>- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA): आमतौर पर जिला अदालत परिसर में कार्यालय होता है।</div><div>- तालुका/तहसील विधिक सेवा समिति (TLSC): स्थानीय स्तर पर कानूनी सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है।</div><div>- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA): राज्य स्तर पर सहायता उपलब्ध होती है।</div><div>- NALSA (National Legal Services Authority): राष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शन और सहायता मिल सकती है।</div><div>- Legal Aid Clinic: कई स्थानों पर पैरालीगल वॉलंटियर और पैनल वकील प्रारंभिक सहायता देते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>ऑनलाइन भी कर सकते हैं आवेदन</h2><div>मुफ्त कानूनी सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। NALSA के पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट से भी आवेदन किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>आवेदन में सामान्य तौर पर अपनी पहचान, संपर्क विवरण और कानूनी समस्या से जुड़ी जानकारी देनी होती है। जरूरत के अनुसार संबंधित दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>15100 पर भी मिल सकती है कानूनी सहायता</h2><div>जरूरी कानूनी मदद के लिए NALSA की टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। वहां से महिला को आगे की प्रक्रिया और संबंधित विधिक सेवा संस्था के बारे में मार्गदर्शन मिल सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>उत्तर प्रदेश में कहां संपर्क करें?</h2><div>उत्तर प्रदेश में महिलाएं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) या अपने जिले के DLSA से संपर्क कर सकती हैं। UPSLSA के अनुसार महिला और बच्चे मुफ्त कानूनी सेवाओं के पात्र वर्ग में शामिल हैं। आवेदन लिखित रूप से, निर्धारित फॉर्म के जरिए या कुछ परिस्थितियों में मौखिक रूप से भी किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या आवेदन के लिए कोई फीस लगती है?</h2><div>नहीं। NALSA के अनुसार मुफ्त कानूनी सहायता के आवेदन फॉर्म को लेने या जमा करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली कानूनी सेवाएं भी मुफ्त होती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>कानूनी परेशानी में आर्थिक स्थिति को मदद लेने की राह में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। महिलाओं के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सलाह, वकील और अन्य कानूनी सहायता का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी DLSA/TLSC से संपर्क करें या 15100 पर कानूनी सहायता के लिए मार्गदर्शन लें। आवेदन करने से पहले संबंधित संस्था से अपने मामले की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर ले लें।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/free-legal-advice-for-women-how-and-where-to-get-help</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Masked Aadhaar Card क्या है, जानें कैसे यह आपके बैंक अकाउंट को फ्रॉड से रखता है सेफ?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-a-masked-aadhaar-card-know-how-it-keeps-your-bank-account-safe-from-fraud]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आधार आज कई सरकारी और निजी सेवाओं में पहचान के दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल होता है। बैंकिंग और दूसरी सेवाओं में KYC के लिए भी आधार का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आधार नंबर को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से बचना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए Masked Aadhaar का विकल्प दिया गया है। इसमें आधार नंबर के ज्यादातर अंक छिपे रहते हैं और केवल आखिरी चार अंक दिखाई देते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या होता है Masked Aadhaar?</h2><div>UIDAI के मुताबिक, Masked Aadhaar में आधार नंबर के पहले आठ अंक ‘xxxx-xxxx’ से छिपा दिए जाते हैं, जबकि केवल अंतिम चार अंक दिखाई देते हैं। यानी 12 अंकों का पूरा आधार नंबर दस्तावेज पर नजर नहीं आता।&nbsp; यह e-Aadhaar का ही एक रूप है। इसका मकसद जरूरत के मुताबिक पहचान का दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए आधार नंबर के अनावश्यक खुलासे को कम करना है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/atal-pension-scheme-can-you-get-a-pension-of-rs-5000" target="_blank">Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन?</a></h3><h2>क्या Masked Aadhaar से बैंक अकाउंट सुरक्षित रहता है?</h2><div>यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। Masked Aadhaar अपने आप बैंक अकाउंट को फ्रॉड से सुरक्षित नहीं करता। इसका फायदा मुख्य रूप से यह है कि आपका पूरा आधार नंबर हर जगह साझा नहीं होता।</div><div>&nbsp;</div><div>UIDAI स्पष्ट करता है कि केवल आधार नंबर की जानकारी से कोई व्यक्ति बैंक खाते से पैसे नहीं निकाल सकता। बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए बैंक का PIN, OTP और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। इसलिए Masked Aadhaar को सुरक्षा की एक अतिरिक्त सावधानी के तौर पर देखा जा सकता है, न कि बैंक फ्रॉड से बचाव की गारंटी के रूप में।</div><div>&nbsp;</div><h2>Masked Aadhaar इस्तेमाल करने के फायदे</h2><div>- पूरा 12 अंकों का आधार नंबर सामने नहीं आता।</div><div>- दस्तावेज की कॉपी साझा करते समय आधार नंबर के अनावश्यक खुलासे का जोखिम कम होता है।</div><div>- पहचान सत्यापन के लिए जरूरत के मुताबिक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।</div><div>- आधार नंबर को सार्वजनिक रूप से साझा करने से बचने में मदद मिलती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>Masked Aadhaar कैसे डाउनलोड करें?</h2><div>Masked Aadhaar को UIDAI की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।</div><div>- UIDAI के MyAadhaar पोर्टल पर जाएं।</div><div>- Download Aadhaar विकल्प चुनें।</div><div>- अपना आधार नंबर या उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज करें।</div><div>- OTP के जरिए सत्यापन करें।</div><div>- डाउनलोड के विकल्प में Masked Aadhaar चुनें।</div><div>- PDF डाउनलोड करके सुरक्षित रखें।</div><div>&nbsp;</div><div>UIDAI के अनुसार e-Aadhaar को MyAadhaar पोर्टल या mAadhaar ऐप के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान</h2><div>Masked Aadhaar इस्तेमाल करने के साथ इन सावधानियों का भी ध्यान रखें:</div><div>- बैंक का OTP किसी के साथ साझा न करें।</div><div>- ATM PIN, UPI PIN और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड गोपनीय रखें।</div><div>- अनजान लिंक पर क्लिक करके बैंकिंग जानकारी न भरें।</div><div>- किसी अनजान व्यक्ति को आधार की कॉपी जरूरत से ज्यादा साझा न करें।</div><div>- सार्वजनिक जगहों या सोशल मीडिया पर आधार की पूरी कॉपी पोस्ट न करें।</div><div>- संदिग्ध बैंक कॉल आने पर खुद बैंक के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।</div><div>&nbsp;</div><div>UIDAI यह भी बताता है कि आधार नंबर का इस्तेमाल अपने आप बैंकिंग फ्रॉड करने के लिए नहीं किया जा सकता; बैंक खाते की सुरक्षा के लिए PIN और OTP जैसी गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना जरूरी है। ज्यादा सुरक्षा चाहिए तो UID लॉक कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>अगर आप आधार की सुरक्षा को और मजबूत करना चाहते हैं तो UIDAI की Aadhaar Lock/Unlock सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। UIDAI के अनुसार Aadhaar (UID) लॉक करने के बाद UID, UID Token और VID के जरिए बायोमेट्रिक, डेमोग्राफिक और OTP आधारित authentication नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर इसे बाद में अनलॉक किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>Masked Aadhaar उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प है, जिन्हें पहचान दस्तावेज साझा करने की जरूरत पड़ती है लेकिन वे अपना पूरा आधार नंबर सार्वजनिक नहीं करना चाहते। इसमें पहले आठ अंक छिपे रहते हैं और केवल आखिरी चार अंक दिखाई देते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>हालांकि, इसे बैंक खाते की सुरक्षा की गारंटी नहीं समझना चाहिए। बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए OTP, PIN, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। जरूरत के अनुसार Masked Aadhaar और UIDAI की अन्य सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल करके आधार संबंधी जोखिम को कम किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:53:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-a-masked-aadhaar-card-know-how-it-keeps-your-bank-account-safe-from-fraud</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/atal-pension-scheme-can-you-get-a-pension-of-rs-5000]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana - APY) देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और आम नागरिकों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>अटल पेंशन योजना (APY) 2026 क्या है?</h2><div>अटल पेंशन योजना 2026 एक सरकारी रिटायरमेंट स्कीम है, जिसे PFRDA रेगुलेट करता है। यह हर काम करने वाले भारतीय को सब्सक्राइबर के 60 साल का होने के बाद ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 की गारंटीड मंथली पेंशन देती है। यह अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर के लाखों लोगों के लिए बनाई गई है - दुकानदार, ड्राइवर, डिलीवरी वर्कर, घरेलू हेल्पर, किसान और सेल्फ-एम्प्लॉयड — जिनके पास EPF या फॉर्मल पेंशन नहीं है। जब आप जवान होते हैं तो आप हर महीने थोड़ी सी रकम देते हैं, यह आपके बैंक अकाउंट से ऑटो-डेबिट हो जाती है और 60 साल की उम्र से आपको ज़िंदगी भर एक फिक्स्ड पेंशन मिलती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>किसे और कैसे मिलेगी 5,000 रुपये मासिक पेंशन?&nbsp;&nbsp;</h2><div>अटल पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये की अधिकतम मासिक पेंशन प्राप्त करने की शर्तें और प्रक्रिया निम्नलिखित हैं:</div><div>- पात्रता और आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष के बीच का कोई भी भारतीय नागरिक इस योजना से जुड़ सकता है।&nbsp;&nbsp;</div><div>-&nbsp; 20 वर्षों का न्यूनतम योगदान: योजना के नियमानुसार, 60 वर्ष की आयु में पेंशन शुरू होने के लिए कम से कम 20 वर्षों तक नियमित योगदान करना अनिवार्य है।&nbsp;&nbsp;</div><div>- योगदान की राशि उम्र पर आधारित: 5,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन पाने के लिए आपकी मासिक किस्त (Premium) इस बात पर निर्भर करती है कि आपने किस उम्र में अकाउंट खुलवाया है।&nbsp;</div><div>- यदि आप 18 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो 5,000 रुपये की पेंशन के लिए आपको प्रति माह केवल 210 रुपये जमा करने होंगे।</div><div>- यदि आप 30 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 577 रुपये जमा करने होंगे।</div><div>- यदि आप अंतिम सीमा यानी 40 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 1,454 रुपये का योगदान देना होगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>अटल पेंशन योजना की मुख्य विशेषताएं और नियम&nbsp;&nbsp;</h2><div>- आयकर दाताओं पर प्रतिबंध: 1 अक्टूबर 2022 से लागू नए नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति इनकम टैक्स भरते हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।&nbsp;&nbsp;</div><div>- ऑटो-डेबिट सुविधा: बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते से आपकी तय किस्त (मासिक, तिमाही या छमाही) अपने आप कट जाती है।&nbsp;&nbsp;</div><div>- पति/पत्नी को सुरक्षा: सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद समान पेंशन राशि (5,000 रुपये प्रतिमाह) उनके जीवनसाथी को मिलती है।&nbsp;&nbsp;</div><div>- नॉमिनी को कॉरपस राशि: पति और पत्नी दोनों के निधन के बाद संचित पेंशन फंड (लगभग 8.5 लाख रुपये) नामांकित व्यक्ति (Nominee) को सौंप दिया जाता है।&nbsp;&nbsp;</div><div>- टैक्स लाभ: इस योजना में जमा की गई राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1) और 80CCD (1B) के तहत कर छूट का लाभ भी मिलता है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>कौन एलिजिबल है ?</h2><div>- कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो</div><div>- सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए</div><div>- अकाउंट से जुड़ा एक वैलिड आधार नंबर होना चाहिए</div><div>- एक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (ट्रांज़ैक्शन और बैलेंस अलर्ट के लिए) होना चाहिए&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>अटल पेंशन योजना के फायदे&nbsp;</h2><div>- एक आम फ़ायदा जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, वह यह है कि आपकी ज़िंदगी के बाद आपकी सेविंग्स का क्या होता है। जहाँ ज़्यादातर लोग पेंशन पेमेंट पर ध्यान देते हैं, वहीं अटल पेंशन योजना (APY) आपके परिवार के लिए एक मज़बूत फ़ाइनेंशियल सेफ़्टी नेट भी देती है।</div><div>- आपकी मौत होने पर आपके जीवनसाथी को बिना किसी रुकावट के वही पेंशन मिलती रहती है। आपके और आपके जीवनसाथी दोनों के गुज़र जाने के बाद पूरी जमा की गई रकमआपके नॉमिनी को ट्रांसफ़र कर दी जाती है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी सेविंग्स आपके परिवार को फ़ायदा पहुँचाती रहे और डूबे नहीं।</div><div>&nbsp;</div><h2>अप्लाई / एनरोल कैसे करें - स्टेप-बाय-स्टेप 2026</h2><div>- पक्का करें कि आपका सेविंग्स अकाउंट है: आपके पास एक एक्टिव सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए जो आपके आधार से लिंक हो और एक चालू मोबाइल नंबर हो।</div><div>- अपना पेंशन स्लैब चुनें: तय करें कि आपको 60 साल के बाद कितनी पेंशन चाहिए - ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 हर महीने। पेंशन जितनी ज़्यादा होगी, मंथली कंट्रीब्यूशन भी उतना ही ज़्यादा होगा।</div><div>- अपना कंट्रीब्यूशन चेक करें: अपनी अभी की उम्र के हिसाब से अपनी सही मंथली रकम देखने के लिए ऑफिशियल APY कंट्रीब्यूशन चार्ट का इस्तेमाल करें। एक मोटे तौर पर, 18 साल की उम्र में ₹5,000 पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹210/महीना खर्च आता है, जबकि 40 साल की उम्र में उतनी ही पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹1,454/महीना खर्च आता है।&nbsp;</div><div>- नेट बैंकिंग या ब्रांच से अप्लाई करें: अपने बैंक के नेट बैंकिंग में लॉग इन करें और "अटल पेंशन योजना" देखें, या अपने बैंक या पोस्ट-ऑफिस ब्रांच में जाकर APY रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म मांगें। आप enps.nsdl.com के ज़रिए भी एनरोल कर सकते हैं।</div><div>- APY फ़ॉर्म भरें और आधार दें: अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नॉमिनी की जानकारी और चुनी हुई पेंशन रकम डालें। आपकी पहचान वेरिफ़ाई करने के लिए आधार-बेस्ड eKYC का इस्तेमाल किया जाता है।</div><div>- ऑटो-डेबिट सेट अप करें: अपने सेविंग्स अकाउंट से अपने कंट्रीब्यूशन के ऑटो-डेबिट को ऑथराइज़ करें। आप मंथली, क्वार्टरली या हाफ-ईयरली डिडक्शन चुन सकते हैं।</div><div>- काफ़ी बैलेंस रखें: ऑटो-डेबिट की तारीख पर काफ़ी बैलेंस रखें ताकि कंट्रीब्यूशन बिना किसी पेनल्टी के हो जाए।</div><div>- अपना PRAN पाएं: एनरोल होने के बाद आपको एक PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) मिलेगा। आप इसका इस्तेमाल अपना APY स्टेटमेंट और पेंशन स्टेटस चेक करने के लिए करेंगे।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 17:46:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/atal-pension-scheme-can-you-get-a-pension-of-rs-5000</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[टेलीमैटिक्स के सहारे अब आपके गाड़ी चलाने के तरीके से तय होगा बीमा प्रीमियम, समझिए कैसे?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/with-the-help-of-telematics-your-insurance-premium-will-now-be-determined-by-your-driving-habits]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>किसी भी वाहन धारक के लिए थर्ड पार्टी बीमा बहुत जरूरी होता है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तीसरे व्यक्ति को हुई जान-माल की क्षति की भरपाई की जा सके। लेकिन बीमा कम्पनियों ने अब जो नया रुख अख्तियार किया है, उसका सार-सत्य यह है कि अब आपके गाड़ी चलाने के तरीके से ही यह तय होगा कि आपको कितना बीमा प्रीमियम देना होगा। यानी कि रफ ड्राइविंग करने वालों को अब ज्यादा बीमा प्रीमियम अदा करना पड़ेगा। इस हेतु बीमा कम्पनियों ने टेलीमैटिक्स तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है।</div><div><br></div><div>वस्तुतः टेलीमैटिक्स (Telematics) एक ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहन में लगे सेंसर, जीपीएस, मोबाइल ऐप या OBD (On-Board Diagnostics) डिवाइस के जरिए गाड़ी चलाने से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाता है। फिर बीमा कंपनियां इस डेटा का विश्लेषण करके यह तय करती हैं कि चालक कितना सुरक्षित वाहन चलाता है और उसी के आधार पर अब बीमा प्रीमियम भी तय किया जा सकता है। इससे वाहन धारकों और चालकों की जेब कटनी स्वाभाविक है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons" target="_blank">बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक</a></h3><h2># जानिए, टेलीमैटिक्स कैसे काम करती है?</h2><div><br></div><div>आपको पता होना चाहिए कि दिन प्रतिदिन तकनीकी दुनिया में नए नए बदलाव आ रहे हैं। इसी तरह से टेलीमैटिक्स तकनीक भी है जो आपके वाहन में लगी होती है और निम्नलिखित जानकारियां रिकॉर्ड करती है:- वह वाहन की गति (Speed), अचानक ब्रेक लगाने या तेज एक्सेलरेशन की आदत, तीखे मोड़ (Harsh Cornering), रात में वाहन चलाने की आवृत्ति, प्रतिदिन या प्रतिवर्ष तय की गई दूरी, दुर्घटना या टक्कर की जानकारी, वाहन की लोकेशन और यात्रा का पैटर्न भी समझती है और उसका विश्लेषण करती है।</div><div><br></div><h2># समझिए, इससे बीमा प्रीमियम कैसे तय होगा?</h2><div><br></div><div><b>सुरक्षित चालक:</b> यदि आप नियमों का पालन करते हैं, सीमित गति रखते हैं और सावधानी से वाहन चलाते हैं, तो प्रीमियम कम हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>जोखिमपूर्ण चालक: </b>तेज रफ्तार, बार-बार अचानक ब्रेक, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन जैसी आदतें प्रीमियम बढ़ा सकती हैं।</div><div><br></div><h2>इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं-&nbsp;</h2><div>अच्छे ड्राइवरों को कम प्रीमियम का लाभ। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा। दुर्घटना होने पर तेज क्लेम प्रक्रिया। चोरी होने पर वाहन की लोकेशन ट्रैक करने में मदद। ड्राइविंग व्यवहार सुधारने के लिए फीडबैक।</div><div><br></div><h2>इससे जुड़ी संभावित चुनौतियां इसप्रकार हैं-</h2><div>निजता (Privacy) को लेकर चिंता। हर समय लोकेशन और ड्राइविंग डेटा रिकॉर्ड होना। डेटा सुरक्षा और उसके दुरुपयोग का जोखिम।</div><div><br></div><h2>भारत में स्थिति निम्नलिखित है:-</h2><div>भारत में कुछ बीमा कंपनियां Usage-Based Insurance (UBI) और Pay As You Drive/Pay How You Drive जैसे मॉडल पर टेलीमैटिक्स आधारित मोटर बीमा योजनाएं शुरू कर चुकी हैं। भविष्य में यह व्यवस्था और व्यापक होने की संभावना है।</div><div><br></div><div>निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि टेलीमैटिक्स मोटर बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब केवल वाहन का मॉडल या इंजन क्षमता ही नहीं, बल्कि आप वाहन कितनी जिम्मेदारी से चलाते हैं, यह भी आपके बीमा प्रीमियम को प्रभावित कर सकता है। इससे सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहन मिलेगा और जिम्मेदार चालकों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 17:20:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/with-the-help-of-telematics-your-insurance-premium-will-now-be-determined-by-your-driving-habits</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dream Home का सपना होगा सच: Home Loan और Smart Financial Planning की पूरी विस्तृत जानकारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/complete-information-on-getting-your-dream-home-housing-loans-and-financial-planning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत जैसे देश में अपना घर होना न केवल एक बुनियादी आवश्यकता है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और व्यक्तिगत गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। आज के समय में संपत्ति की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अपनी जमा पूंजी से सीधा घर खरीदना लगभग असंभव सा हो गया है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान <a href="https://www.herohousingfinance.com/hi" target="_blank">हाउसिंग लोन </a>की सुविधा प्रदान करते हैं। यह ऋण न केवल आपको घर खरीदने में मदद करता है, बल्कि आपको वित्तीय रूप से व्यवस्थित भी बनाता है।</div><div><br></div><h2>संक्षिप्त सारांश:</h2><div><b>- ऋण की सीमा: </b>बैंक आमतौर पर संपत्ति के कुल बाजार मूल्य का 75% से 90% तक ही हाउसिंग लोन प्रदान करते हैं; शेष राशि का प्रबंध स्वयं करना होता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- वित्तीय योजना: </b>घर खरीदने से पहले अपने बजट का सही आकलन करें और होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करके अपनी मासिक किश्तों की योजना बनाएं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पात्रता मानदंड:</b> ऋण की स्वीकृति मुख्य रूप से आपकी आय की स्थिरता, आयु और 650 से अधिक के अच्छे क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- कर में छूट: </b>भारत<span style="font-size: 1rem;">सरकार आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आवास ऋण के मूलधन और ब्याज भुगतान पर महत्वपूर्ण टैक्स लाभ प्रदान करती है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><b>- आवश्यक दस्तावेज: </b>आवेदन के लिए पहचान पत्र, आय के प्रमाण (वेतन पर्ची/आयकर रिटर्न) और संपत्ति के कानूनी कागजात तैयार रखना अनिवार्य है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अवधि का चयन: </b>अपनी पुनर्भुगतान क्षमता के अनुसार ऋण की अवधि चुनें। लंबी अवधि में ईएमआई कम होती है, जबकि छोटी अवधि में कुल ब्याज का भुगतान कम करना पड़ता है।</div><div><br></div><div>इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि भारत में आवास ऋण की प्रक्रिया क्या है, इसके लाभ क्या हैं और आप कैसे अपनी किश्तों का प्रबंधन कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable" target="_blank">जानिए, 1 अगस्त से किन-किन नियमों में बदलाव आएगा? कीमतें होंगी ऊपर नीचे या रहेंगी स्थिर!</a></h3><h2>आवास ऋण: एक महत्वपूर्ण वित्तीय कदम</h2><div>जब आप अपने लिए एक घर चुनने की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो सबसे पहले मन में वित्तीय बजट का विचार आता है। भारत में हाउसिंग लोन लेने की प्रक्रिया पिछले एक दशक में काफी सरल और पारदर्शी हो गई है। डिजिटल क्रांति ने इसे और भी सुगम बना दिया है, जहाँ आप घर बैठे विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों की तुलना कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>ऋण लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का सही आकलन करना अनिवार्य है। आपको यह समझना होगा कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा ऋण की अदायगी में जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह होती है कि आप ऑनलाइन उपलब्ध होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करें। यह उपकरण आपको यह समझने में मदद करता है कि ऋण की राशि, ब्याज दर और समय सीमा के आधार पर आपकी मासिक किश्त कितनी बनेगी। इससे आप भविष्य में आने वाले वित्तीय दबाव से बच सकते हैं।</div><div><br></div><h2>ऋण के लिए पात्रता और मापदंड</h2><div>भारत में ऋणदाता संस्थान किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले आवेदक की साख की गहन जांच करते हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>1. आय की स्थिरता:</b> बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप ऋण चुकाने में सक्षम हैं। यदि आप किसी प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं या आपका अपना सफल व्यवसाय है, तो ऋण मिलने की संभावना अधिक होती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. साख अंक (क्रेडिट स्कोर): </b>आपका पिछला वित्तीय व्यवहार कैसा रहा है, यह आपके साख अंक से पता चलता है। 650 से अधिक का अंक आदर्श माना जाता है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div><b>3. आयु सीमा:</b> आमतौर पर 21 वर्ष से 60-65 वर्ष की आयु तक के लोगों को ऋण दिया जाता है। युवा आवेदकों को लंबी अवधि के लिए ऋण मिलने की सुविधा होती है।</div><div><br></div><h2>हाउसिंग लोन के प्रकार और चयन</h2><div>भारतीय बाजार में कई तरह के ऋण विकल्प उपलब्ध हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- नया घर खरीदने के लिए ऋण: </b>यह सबसे प्रचलित प्रकार है, जो नई बनी हुई संपत्ति या निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- गृह सुधार ऋण: </b>यदि आप अपने पुराने घर की मरम्मत या नवीनीकरण करना चाहते हैं, तो इसके लिए भी बैंक धन उपलब्ध कराते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- भूमि खरीद ऋण: </b>कई लोग निवेश के उद्देश्य से या भविष्य में घर बनाने के लिए खाली जमीन खरीदना चाहते हैं, बैंक इसके लिए भी विशिष्ट योजनाएं प्रदान करते हैं।</div><div><br></div><h2>वित्तीय योजना और प्रबंधन</h2><div>ऋण लेना केवल धन प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अगले 15 से 30 वर्षों के लिए एक जिम्मेदारी स्वीकार करना है। इसलिए, आवेदन करने से पहले आपको अपनी बचत और खर्चों का एक खाका तैयार करना चाहिए। जब आप हाउसिंग लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक संपत्ति के कुल मूल्य का केवल 75 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक ही वित्त पोषित करते हैं। शेष राशि, जिसे 'डाउन पेमेंट' कहा जाता है, उसका प्रबंध आपको अपनी बचत से करना होता है।</div><div><br></div><div>अपनी किश्तों की योजना बनाने के लिए <a href="https://www.herohousingfinance.com/hi/calculators/home-loan-emi-calculator" target="_blank">होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर</a> का सही उपयोग करना बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। आप अलग-अलग ब्याज दरों और समय अवधि को डालकर देख सकते हैं कि कौन सा विकल्प आपके मासिक बजट में सटीक बैठता है। उदाहरण के लिए, यदि आप लंबी अवधि चुनते हैं तो आपकी मासिक किश्त कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज भुगतान बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, छोटी अवधि में किश्तें भारी होंगी परंतु आप कर्ज से जल्दी मुक्त हो पाएंगे।</div><div><br></div><h2>आवश्यक दस्तावेजों की सूची</h2><div>भारत में हाउसिंग लोन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको एक सुव्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख हैं:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पहचान पत्र: </b>आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र।</div><div><b>- आय प्रमाण:</b> वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए पिछले 3 महीनों की वेतन पर्ची और पिछले 2 वर्षों का आयकर रिटर्न। व्यवसायियों के लिए लाभ-हानि खाता और बैलेंस शीट।</div><div><b>- संपत्ति के कागजात: </b>विक्रेता के साथ किया गया अनुबंध, संपत्ति की श्रृंखला के दस्तावेज और स्थानीय निकाय से प्राप्त अनुमति पत्र।</div><div><br></div><h2>कर लाभ और सरकारी प्रोत्साहन</h2><div>भारत सरकार देश के नागरिकों को अपना घर लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसके कारण आयकर अधिनियम के तहत कई छूट प्रदान की जाती हैं। आवास ऋण के मूलधन और ब्याज, दोनों के भुगतान पर आयकर में महत्वपूर्ण कटौती प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, 'प्रधानमंत्री आवास योजना' जैसी सरकारी पहलों ने ब्याज पर सब्सिडी प्रदान करके निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए हाउसिंग लोन को और अधिक किफायती बना दिया है।</div><div><br></div><h2>अंतिम सुझाव और निष्कर्ष</h2><div>अपना घर खरीदना एक बड़ा निवेश है। जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचें। बाजार में प्रचलित ब्याज दरों पर नजर रखें और समय-समय पर अपने ऋण को कम ब्याज दर वाले बैंक में स्थानांतरित करने (बैलेंस ट्रांसफर) के विकल्पों पर भी विचार करें।</div><div><br></div><div>याद रखें, एक अच्छी तरह से नियोजित हाउसिंग लोन आपके भविष्य की नींव को मजबूत करता है। अपनी क्षमता का आकलन करें, सही संपत्ति का चुनाव करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। सही योजना के साथ, आपके अपने घर का सपना अवश्य पूरा होगा।</div><div><br></div><h2>अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)</h2><div><b>प्रश्न 1.&nbsp; हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि कितनी हो सकती है?</b>&nbsp;</div><div>भारत में अधिकांश बैंक और वित्तीय संस्थान 30 वर्ष तक की अधिकतम अवधि के लिए हाउसिंग लोन प्रदान करते हैं। यह अवधि आपकी सेवानिवृत्ति की आयु और आपकी ऋण चुकाने की क्षमता पर निर्भर करती है। लंबी अवधि चुनने से आपकी मासिक किश्त कम हो जाती है।</div><div><br></div><div><b>प्रश्न 2. क्या मैं समय से पहले अपने ऋण का भुगतान कर सकता हूँ?</b></div><div>हाँ, आप अपनी सुविधा के अनुसार ऋण का समय से पहले भुगतान (प्री-पेमेंट) कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग ब्याज दर वाले ऋणों पर बैंक कोई अतिरिक्त जुर्माना या शुल्क नहीं वसूल सकते। भुगतान से पहले अपनी बचत का आकलन करने के लिए होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर की सहायता लेना उपयोगी रहता है।</div><div><br></div><div><b>प्रश्न 3. सह-आवेदक होने के क्या लाभ हैं?&nbsp;</b></div><div>यदि आप अपने जीवनसाथी या परिवार के किसी सदस्य को सह-आवेदक के रूप में जोड़ते हैं, तो आपकी कुल आय बढ़ जाती है, जिससे अधिक ऋण राशि मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, यदि सह-आवेदक एक महिला है, तो कई बैंक ब्याज दरों में विशेष छूट भी प्रदान करते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:20:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/complete-information-on-getting-your-dream-home-housing-loans-and-financial-planning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, 1 अगस्त से किन-किन नियमों में बदलाव आएगा? कीमतें होंगी ऊपर नीचे या रहेंगी स्थिर!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों की नजर किसी भी माह की पहली तारीख पर टिकी रहती है, क्योंकि उस दिन सैलरी तो आती ही है, साथ ही किस मासिक नियम से उनके ऊपर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और किससे नहीं, यह भी पता चल जाता है। साथ ही तरह तरह की कागजी औपचारिकता के प्लस-माइनस का भी पता चल जाता है। इस बार भी 1 अगस्त 2026 से आम लोगों पर असर डालने वाले कई नियम और कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इनमें कुछ बदलाव हर महीने होने वाली नियमित समीक्षा हैं, जबकि कुछ नए नियामकीय परिवर्तन हैं, जिन्हें जानना-समझना और उसी के अनुरूप खुद को ढालना जरूरी है ताकि बच्चों का जीवन प्रभावित नहीं हो।&nbsp;</div><div><br></div><h2>प्राप्त जानकारी के मुताबिक, होने वाले मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:-</h2><div><b>पहला, एलपीजी सिलेंडर की कीमतें:</b> तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को घरेलू (14.2 किग्रा) और व्यावसायिक (19 किग्रा) एलपीजी के दाम संशोधित करती हैं। इसलिए 1 अगस्त से आपके शहर में गैस सिलेंडर सस्ता या महंगा हो सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>दूसरा, बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड: </b>कुछ बैंक क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट, सर्विस चार्ज, एसएमएस शुल्क और अन्य बैंकिंग शुल्क में बदलाव लागू कर सकते हैं। इसलिए अपने बैंक की सूचना गौरपूर्वक अवश्य देखें।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons" target="_blank">बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक</a></h3><div><b>तीसरा, सीकेवाईसी (CKYC) 2.0:</b> नई केंद्रीय केवाईसी प्रणाली का चरणबद्ध लागू होना शुरू होगा, जिससे भविष्य में बार-बार केवाईसी दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत कम होगी और पहचान सत्यापन अधिक सुरक्षित होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>चौथा, जीएसटी (GST) नियम:</b> ई-इनवॉइस और ई-वे बिल से जुड़े नियमों में बदलाव होंगे। इसका सीधा प्रभाव व्यापारियों और कंपनियों पर पड़ेगा, आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष असर हो सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पांचवां, रेलवे तत्कल टिकट: </b>रेलवे आरक्षण काउंटर पर तत्कल टिकट के लिए टोकन व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे भीड़ कम करने और प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>छठा, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR):</b> जिन करदाताओं ने समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं किया है, उन्हें अब विलंब शुल्क (लेट फीस) देना पड़ सकता है।</div><div><br></div><div><b>सातवां, होम लोन और ईएमआई (EMI):</b> 3 अगस्त से शुरू होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यदि रेपो रेट में बदलाव होता है, तो आने वाले दिनों में होम लोन, वाहन ऋण, एफडी और EMI पर असर पड़ सकता है। यह बदलाव 1 अगस्त से तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि MPC के निर्णय पर निर्भर करेगा।&nbsp;</div><div><br></div><h2>समझिए, क्या महंगा और क्या सस्ता हो सकता है?</h2><div><br></div><div><b>एक, एलपीजी सिलेंडर:</b> कीमतें बदलकर ऊपर जा सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>दो, बैंकिंग सेवाएं:</b> बैंक के अनुसार शुल्क बढ़ या घट सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>तीन, रेस्टोरेंट/होटल: </b>यदि व्यावसायिक एलपीजी महंगी होती है तो लागत बढ़ सकती है।</div><div><br></div><div><b>चार, पेट्रोल-डीजल</b> पर 1 अगस्त से कोई सार्वदेशिक नया नियम घोषित नहीं है; इनके दाम सामान्य मूल्य निर्धारण व्यवस्था के अनुसार बदलते रहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:50:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में 15 फरवरी 2021 से हर फोर-व्हीलर, चाहे वह प्राइवेट हो या कमर्शियल, के लिए FASTag होना ज़रूरी है। FASTag कार की विंड शील्ड पर चिपकाया जाता है और RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टेक्नोलॉजी और एक डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करके टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट करने में मदद करता है।</div><div>&nbsp;</div><div>देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान को आसान बनाने के लिए FASTag अनिवार्य किया गया है। हालांकि कई बार वाहन मालिकों को ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है, जब FASTag में पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद वह ब्लैकलिस्ट (Blacklisted) या हॉटलिस्ट (Hotlisted) हो जाता है। ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर परेशानी के साथ अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>इसके अलावा, 1 अप्रैल 2021 से कार इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए भी FASTags ज़रूरी हो गए हैं। भारत में पब्लिक सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए कम से कम एक थर्ड-पार्टी फोर-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी की ज़रूरत होती है। हालांकि, कई बार ऐसा हो सकता है कि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट हो जाए, जिससे आप टोल देने के लिए इसका इस्तेमाल न कर पाएं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected" target="_blank">किन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों में होते हैं ये कारण</a></h3><h2>ब्लैकलिस्टेड FASTag क्या है?</h2><div>ब्लैकलिस्टेड FASTag का मतलब है कि आपका FASTag अकाउंट जारी करने वाली एजेंसी ने कुछ समय के लिए या हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया है। ऐसा कई वजहों से हो सकता है, जैसे बैलेंस कम होना, नियमों का पालन न करना वगैरह। ब्लॉकलिस्टिंग से बचने के लिए आपको उन दिक्कतों को तुरंत ठीक करना होगा जिनकी वजह से यह हुआ, जैसे उनके अकाउंट का बैलेंस भरना, गाइडलाइंस का पालन करना, टैग प्लेसमेंट को ठीक करना, किसी भी बकाया वायलेशन पेनल्टी को क्लियर करना, और संदिग्ध फ्रॉड को ठीक करना। ज़रूरी कदम उठाकर और जारी करने वाली एजेंसी, FASTag के साथ सहयोग करके आप उनके टैग की फंक्शनैलिटी को ठीक कर सकते हैं और आसान और कुशल टोल पेमेंट सर्विस का मज़ा लेते रह सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>बैलेंस होने के बाद भी FASTag क्यों होता है ब्लैकलिस्ट?</h2><div>1. केवाईसी (KYC) अधूरी होना : यदि FASTag जारी करने वाले बैंक या एजेंसी के पास आपकी KYC पूरी नहीं है या अपडेट नहीं है तो FASTag को अस्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।</div><div>2. चेसिस नंबर या वाहन विवरण में गड़बड़ी: वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर या अन्य जानकारी गलत दर्ज होने पर सिस्टम FASTag को अमान्य मान सकता है।</div><div>3. टैग का सही तरीके से न लगना: यदि FASTag वाहन की विंडशील्ड पर सही स्थान पर नहीं लगा है, क्षतिग्रस्त हो गया है या RFID चिप काम नहीं कर रही है तो स्कैनिंग में समस्या आ सकती है।</div><div>4. बैंक या सिस्टम से जुड़ी तकनीकी समस्या: कई बार बैंक सर्वर, भुगतान नेटवर्क या टोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण भी FASTag अस्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट दिखाई दे सकता है।</div><div>5. एक ही वाहन पर एक से अधिक FASTag: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नियमों के अनुसार एक वाहन के लिए केवल एक सक्रिय FASTag होना चाहिए। एक से अधिक सक्रिय टैग होने पर कार्रवाई की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>FASTag ब्लैकलिस्ट होने पर क्या होगा?</h2><div>- टोल प्लाजा पर FASTag स्कैन नहीं होगा।</div><div>- आपको नकद या अन्य माध्यम से भुगतान करना पड़ सकता है।</div><div>- नियमों के अनुसार कई मामलों में दोगुना टोल शुल्क भी देना पड़ सकता है।</div><div>- यात्रा के दौरान अनावश्यक देरी हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>FASTag को दोबारा एक्टिव कैसे करें?</h2><div>- KYC अपडेट कराएं: यदि KYC लंबित है तो संबंधित बैंक या FASTag जारीकर्ता के पोर्टल, मोबाइल ऐप या शाखा में जाकर KYC पूरी करें।</div><div>- वाहन की जानकारी सत्यापित करें : वाहन नंबर, आरसी और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, इसकी जांच करें। किसी गलती की स्थिति में बैंक या जारीकर्ता से अपडेट कराएं।</div><div>- FASTag की स्थिति जांचें: अपने बैंक, FASTag ऐप या ग्राहक सेवा के माध्यम से टैग का स्टेटस देखें। कई जारीकर्ता ऑनलाइन ब्लैकलिस्ट का कारण भी बताते हैं।</div><div>- ग्राहक सेवा से संपर्क करें: यदि समस्या तकनीकी है तो FASTag जारी करने वाले बैंक या एजेंसी की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।</div><div>- नया FASTag लें (यदि आवश्यक हो): यदि टैग क्षतिग्रस्त हो गया है या RFID चिप काम नहीं कर रही है तो नया FASTag जारी कराया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><div>- FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें।</div><div>- समय-समय पर KYC अपडेट करते रहें।</div><div>- वाहन बेचने पर पुराने FASTag को बंद कर दें।</div><div>- एक ही वाहन के लिए दूसरा FASTag सक्रिय न रखें।</div><div>- यात्रा से पहले FASTag की स्थिति और बैलेंस की जांच कर लें।</div><div>&nbsp;</div><div>FASTag में बैलेंस होने के बावजूद KYC अधूरी होने, वाहन की गलत जानकारी, तकनीकी खराबी या एक से अधिक सक्रिय टैग जैसी वजहों से यह ब्लैकलिस्ट हो सकता है। इसलिए केवल रिचार्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि KYC और वाहन संबंधी जानकारी को भी अपडेट रखना जरूरी है। यदि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट हो गया है तो संबंधित बैंक या जारीकर्ता से संपर्क कर इसे आसानी से दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:34:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[किन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों में होते हैं ये कारण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बीमारी या दुर्घटना के समय आर्थिक सुरक्षा देने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण साधन है। हालांकि कई बार पॉलिसीधारकों को तब बड़ा झटका लगता है जब अस्पताल में इलाज के बाद उनका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। अधिकांश मामलों में क्लेम किसी तकनीकी कारण या पॉलिसी की शर्तों का पालन नहीं करने की वजह से अस्वीकृत होता है। इसलिए पॉलिसी खरीदने के साथ-साथ उसके नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><h2>किन कारणों से हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?</h2><h2>1. पहले से मौजूद बीमारी (Pre-existing Disease) की जानकारी छिपाना</h2><div>पॉलिसी लेते समय यदि आपने पहले से मौजूद किसी बीमारी, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की जानकारी नहीं दी है और बाद में जांच में यह सामने आ जाता है तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए आवेदन के समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही देना जरूरी है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best" target="_blank">कंपनी वाला बीमा बेस्ट है या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस? यहां दूर करें कन्फ्यूजन</a></h3><h2>2. वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना</h2><div>अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ बीमारियों और पहले से मौजूद रोगों के लिए वेटिंग पीरियड होता है। यदि इस अवधि के दौरान इलाज कराया जाता है तो क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।</div><div>&nbsp;</div><h2>3. पॉलिसी में शामिल न होने वाला इलाज</h2><div>हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ एक्सक्लूजन (Exclusions) होते हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी, केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए किए गए उपचार, कुछ वैकल्पिक उपचार या पॉलिसी में शामिल न किए गए मेडिकल खर्चों का क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>4. समय पर बीमा कंपनी को सूचना न देना</h2><div>कैशलेस इलाज या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में बीमा कंपनी या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को तय समय के भीतर सूचना देना जरूरी होता है। देरी होने पर क्लेम प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>5. दस्तावेज अधूरे या गलत होना</h2><div>अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज अधूरे या गलत होने पर भी क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>6. पॉलिसी का लैप्स होना</h2><div>यदि समय पर प्रीमियम जमा नहीं किया गया और पॉलिसी लैप्स हो गई, तो उस अवधि में किए गए इलाज का क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें?
</h2><div>- पॉलिसी खरीदते समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही दें।</div><div>- पॉलिसी के नियम, कवरेज और एक्सक्लूजन ध्यान से पढ़ें।</div><div>- वेटिंग पीरियड की जानकारी रखें।</div><div>- अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा कंपनी को समय पर सूचना दें।</div><div>- इलाज से जुड़े सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखें।</div><div>- समय पर प्रीमियम का भुगतान करें और पॉलिसी को सक्रिय रखें।</div><div>&nbsp;</div><h2>यदि क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?</h2><div>यदि आपको लगता है कि क्लेम गलत तरीके से अस्वीकार किया गया है तो सबसे पहले बीमा कंपनी से लिखित कारण मांगें। इसके बाद कंपनी की ग्रिवेंस रिड्रेसल (शिकायत निवारण) प्रणाली में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यदि समस्या का समाधान नहीं होता तो इंश्योरेंस ओम्बुड्समैन या भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के शिकायत पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div>लेकिन, यह पक्का करने के लिए कि आपका क्लेम रिजेक्ट न हो, खरीदते समय सभी पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में ईमानदारी से बताएं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के अंदर इंश्योरेंस कंपनी को बताएं और जमा करने के लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें।</div><div>&nbsp;</div><div>हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे ज्यादातर मामलों में गलत जानकारी देना, वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना, पॉलिसी की शर्तों की अनदेखी और दस्तावेजों में कमी जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं। थोड़ी सावधानी और सही जानकारी के साथ इन समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के बाद केवल प्रीमियम भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सभी शर्तों और प्रक्रियाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 18:44:15 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[कंपनी वाला बीमा बेस्ट है या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस? यहां दूर करें कन्फ्यूजन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। नौकरीपेशा लोगों को अक्सर कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है, जबकि कई लोग अलग से रिटेल (पर्सनल) हेल्थ इंश्योरेंस भी खरीदते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों में कौन-सा विकल्प बेहतर है और क्या केवल कंपनी के बीमा पर निर्भर रहना सही है?</p><p>वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों योजनाओं के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं। इसलिए फैसला अपनी जरूरत, परिवार की स्वास्थ्य आवश्यकताओं और भविष्य की योजना को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans" target="_blank" rel="noopener">पेंशन की टेंशन खत्म, इन Investment Plans से करें अपना बुढ़ापा सिक्योर</a></p><h2 class="">क्या होता है कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस?</h2><p>कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस वह पॉलिसी होती है जिसे कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए समूह बीमा (Group Health Insurance) के रूप में खरीदती है।</p><h2 class="">मुख्य विशेषताएं:</h2><p>- प्रीमियम का भुगतान आमतौर पर कंपनी करती है।</p><p>- कर्मचारी को अलग से पॉलिसी खरीदने की जरूरत नहीं होती।</p><p>- कई मामलों में पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing Diseases) को भी शुरुआती समय से कवर किया जा सकता है।</p><p>- कैशलेस इलाज के लिए अस्पतालों का नेटवर्क उपलब्ध रहता है।</p><h2 class="">क्या होता है रिटेल (पर्सनल) हेल्थ इंश्योरेंस?</h2><p>रिटेल या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस वह पॉलिसी होती है जिसे व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार स्वयं खरीदता है।</p><h2 class="">मुख्य विशेषताएं:</h2><p>- बीमा राशि (Sum Insured) अपनी जरूरत के अनुसार चुनी जा सकती है।</p><p>- पॉलिसी नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहती है।</p><p>- नो-क्लेम बोनस, ऐड-ऑन कवर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।</p><p>- लंबे समय तक निरंतर कवरेज बनाए रखना आसान होता है।</p><h2 class="">कॉर्पोरेट और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस में अंतर</h2><h2 class="">1. कवरेज</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: कंपनी द्वारा तय बीमा राशि मिलती है।</p><p>- रिटेल प्लान: अपनी जरूरत और बजट के अनुसार कवरेज चुन सकते हैं।</p><h2 class="">2. नौकरी बदलने का असर</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: नौकरी छोड़ने या बदलने पर बीमा कवर समाप्त हो सकता है।</p><p>- रिटेल प्लान: नौकरी से कोई संबंध नहीं होता, इसलिए कवरेज जारी रहता है।</p><h2 class="">3. प्रीमियम</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: प्रीमियम का खर्च आमतौर पर कंपनी उठाती है।</p><p>- रिटेल प्लान: प्रीमियम का भुगतान स्वयं करना होता है।</p><h2 class="">4. लंबी अवधि की सुरक्षा</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: रोजगार पर निर्भर।</p><p>- रिटेल प्लान: जीवन के अलग-अलग चरणों में लगातार सुरक्षा प्रदान करता है।</p><p>क्या केवल कंपनी के बीमा पर निर्भर रहना सही है?</p><p>वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि केवल कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:</p><p>- नौकरी बदलने पर कवरेज समाप्त हो सकता है।</p><p>- रिटायरमेंट के बाद कंपनी का बीमा उपलब्ध नहीं रहता।</p><p>- कई बार कंपनी का सम इंश्योर्ड बड़े इलाज के लिए पर्याप्त नहीं होता।</p><p>- नौकरी छूटने की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य सुरक्षा खत्म हो सकती है।</p><h2 class="">किसे कौन-सा विकल्प चुनना चाहिए?</h2><p>- यदि आप नौकरीपेशा हैं और कंपनी हेल्थ इंश्योरेंस देती है, तब भी अपनी और परिवार की जरूरतों के अनुसार एक रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर विचार करें।</p><p>- यदि आप स्वरोजगार करते हैं या फ्रीलांसर हैं तो रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।</p><p>- जिन परिवारों में बुजुर्ग सदस्य या गंभीर बीमारियों का जोखिम अधिक है, उन्हें पर्याप्त बीमा राशि वाली व्यक्तिगत पॉलिसी पर ध्यान देना चाहिए।</p><h2 class="">पॉलिसी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>- पर्याप्त सम इंश्योर्ड चुनें।</p><p>- नेटवर्क अस्पतालों की सूची जांचें।</p><p>- वेटिंग पीरियड और एक्सक्लूजन को ध्यान से पढ़ें।</p><p>- क्लेम सेटलमेंट रेशियो और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता की जानकारी लें।</p><p>- प्रीमियम के साथ मिलने वाले लाभों की तुलना करें।</p><p>कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि कई मामलों में एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। कंपनी का बीमा तत्काल सुरक्षा देता है, जबकि व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यदि बजट अनुमति देता है तो दोनों का संयोजन भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों से बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकता है।</p><p>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:40:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेंशन की टेंशन खत्म, इन Investment Plans से करें अपना बुढ़ापा सिक्योर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सरकार ने सीनियर सिटिज़न्स को रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित ज़िंदगी देने के लिए कई पेंशन प्लान लागू किए हैं। ये प्लान रेगुलर इनकम देने के लिए बनाए गए हैं, ताकि रिटायर लोग बिना किसी पैसे की तंगी के आरामदायक ज़िंदगी जी सकें।</div><div>&nbsp;</div><div>अगर आपकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है तो बैंकों और पोस्ट ऑफिस में FD, सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम, ELSS, NSC और पेंशन प्लान पांच सबसे अच्छे इन्वेस्टमेंट हैं जिनसे सीनियर सिटिज़न को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one" target="_blank">एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन की खो गई है ओरिजिनल रसीद? जानें नया दस्तावेज कैसे बनवाएं</a></h3><h2>फिक्स्ड डिपॉजिट</h2><div>फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या टर्म डिपॉजिट किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में शुरू किए जा सकते हैं। ये फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के पास मौजूद सबसे सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाली स्कीम में से एक हैं।</div><div><br></div><div>- ज़्यादातर बैंकों में सीनियर सिटिजन को आम लोगों की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट पर 25 से 50 बेसिस पॉइंट ज़्यादा इंटरेस्ट रेट मिलता है।</div><div>- FD शुरू करने के लिए कम से कम 7 दिन और ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल का समय चाहिए।</div><div>- आप FD अकाउंट में जितना चाहें उतना अमाउंट डाल सकते हैं, जिसकी शुरुआत 100 रुपये से होती है।</div><div>- आप या तो FD पर मिलने वाले इंटरेस्ट को समय-समय पर अपने सेविंग्स अकाउंट में जमा करवा सकते हैं या मैच्योरिटी के समय पूरी अमाउंट - प्रिंसिपल और इंटरेस्ट - निकाल सकते हैं।</div><div>- अगर आप उस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट शुरू करते हैं जिसमें आपका पहले से अकाउंट है, तो चीजें आसान हो जाएंगी।</div><div>- भारत में पोस्ट ऑफिस 1 से 5 साल की टर्म डिपॉजिट स्कीम और बैंक FD की तुलना में ज़्यादा इंटरेस्ट रेट देते हैं।</div><div>- अगर तुरंत ज़रूरत हो तो आप पेनल्टी देकर टर्म खत्म होने से पहले अमाउंट निकाल सकते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और हर समय के लिए ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं। इसलिए अगर आप अपना पैसा FD में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं तो ठीक से रिसर्च करें और ऐसी स्कीम ढूंढें जो आपको ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा दे।</div><div>&nbsp;</div><h2>पेंशन प्लान</h2><div>पेंशन प्लान एक अच्छा तरीका है जिससे आप काम करना बंद करने के बाद रेगुलर इनकम पा सकते हैं। कई तरह के पेंशन प्लान मौजूद हैं। एक तरह के प्लान में आप एक ही डिपॉजिट में बड़ी रकम इन्वेस्ट कर सकते हैं और दूसरे तरह के प्लान में आप रेगुलर तौर पर छोटी रकम जमा कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>- कुछ प्लान में कम से कम इन्वेस्टमेंट Rs. 200 जितना कम है।</div><div>- ये प्लान 3-7% इंटरेस्ट देते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कंपनी के साथ पेंशन प्लान रखते हैं।</div><div>- लॉक-इन पीरियड 3 साल जितना कम हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस उम्र में प्लान शुरू करते हैं और आप किस इंस्टीट्यूशन से प्लान खरीद रहे हैं।</div><div>- EPF और PPF भी पेंशन प्लान के ही टाइप हैं, जहाँ आप रेगुलर डिपॉजिट करते हैं और इंटरेस्ट कमाते हैं,&nbsp; PPF अभी 7.1% सालाना (Q4 FY 2025-26 तक) दे रहा है, जबकि EPF रेट EPFO हर साल बताता है।</div><div>- लॉक-इन पीरियड के बाद - PPF के लिए 15 साल और रिटायरमेंट के बाद या जब आप EPF के लिए काम करना बंद कर देते हैं - आप एकमुश्त रकम निकाल सकते हैं।</div><div>- हालांकि, इस निकासी पर टैक्स बेनिफिट पाने के लिए आपको प्रोविडेंट फंड का एक हिस्सा एन्युइटी प्लान में फिर से इन्वेस्ट करना होगा। एन्युइटी प्लान पेंशन प्लान की तरह ही होते हैं, जिसमें आपको ज़िंदगी भर के लिए एक गारंटीड रकम मिलेगी।</div><div>&nbsp;</div><h2>सिनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)&nbsp;</h2><div>मौजूदा समय में यह बुजुर्गों के लिए सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है। इसमें तिमाही आधार पर (Quarterly) ब्याज का भुगतान होता है और टैक्स बेनिफिट (80C) भी मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)&nbsp;</h2><div>इसमें इक्विटी और डेट का अच्छा मिश्रण मिलता है। रिटायरमेंट पर एकमुश्त (Lumpsum) रकम के साथ-साथ लाइफटाइम रेगुलर पेंशन का विकल्प मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) / LIC प्लान्स&nbsp;</h2><div>एलआईसी के तत्काल एन्युटी (Immediate Annuity) प्लान्स, जहां एकमुश्त रकम जमा करके तुरंत मासिक या सालाना पेंशन शुरू की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>म्यूचुअल फंड में SWP (Systematic Withdrawal Plan)&nbsp;</h2><div>यह आज के समय का सबसे स्मार्ट विकल्प माना जाता है। एकमुश्त राशि को किसी अच्छे हाइब्रिड या लार्ज-कैप फंड में डालकर हर महीने एक तय रकम (पेंशन की तरह) निकाली जा सकती है। इससे बची हुई रकम पर ग्रोथ भी मिलती रहती है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 17:52:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन की खो गई है ओरिजिनल रसीद? जानें नया दस्तावेज कैसे बनवाएं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन लेते समय गैस एजेंसी उपभोक्ता को सब्सक्रिप्शन वाउचर (SV) या कनेक्शन रसीद जारी करती है। यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि गैस कनेक्शन आपके नाम पर पंजीकृत है। भविष्य में गैस कनेक्शन ट्रांसफर कराने, एजेंसी बदलने या स्वामित्व से जुड़े कुछ मामलों में इसकी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में यदि यह ओरिजिनल रसीद खो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। गैस कंपनी से डुप्लीकेट दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या है सब्सक्रिप्शन वाउचर (SV)?</h2><div>यह एलपीजी कनेक्शन का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। इसमें उपभोक्ता का नाम, ग्राहक संख्या, पता और कनेक्शन का विवरण दर्ज रहता है। इसे भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है। रसीद खो जाए तो सबसे पहले क्या करें?</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026" target="_blank">1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, जानिए नई फीस दर और आवेदन का तरीका</a></h3><h2>यदि ओरिजिनल रसीद या SV खो गया है, तो सबसे पहले:</h2><div>- अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करें।</div><div>- ग्राहक संख्या (Consumer Number) और पंजीकृत मोबाइल नंबर अपने पास रखें।</div><div>- यदि ग्राहक संख्या याद नहीं है, तो आधार, मोबाइल नंबर या पते की मदद से एजेंसी रिकॉर्ड खोज सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>डुप्लीकेट रसीद कैसे बनवाएं?</h2><div>1. गैस एजेंसी जाएं: जिस एजेंसी से आपने कनेक्शन लिया है, वहां जाकर डुप्लीकेट SV के लिए आवेदन करें।</div><div>2. आवेदन पत्र भरें: एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए आवेदन फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरें। कुछ एजेंसियां साधारण लिखित आवेदन भी स्वीकार करती हैं।</div><div>3. पहचान पत्र जमा करें: आमतौर पर निम्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:</div><div>- आधार कार्ड</div><div>- पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस (यदि आवश्यक हो)</div><div>- पंजीकृत मोबाइल नंबर</div><div><br></div><div>4. सत्यापन प्रक्रिया: एजेंसी आपके रिकॉर्ड का सत्यापन करेगी। जानकारी सही मिलने पर डुप्लीकेट दस्तावेज जारी कर दिया जाएगा।</div><div><br></div><div>5. शुल्क (यदि लागू हो): कुछ तेल विपणन कंपनियां या एजेंसियां डुप्लीकेट दस्तावेज जारी करने के लिए नाममात्र का शुल्क ले सकती हैं। इसकी जानकारी संबंधित एजेंसी से प्राप्त की जा सकती है।</div><div><br></div><div>6. अपनी नई रसीद पाएं: नई रसीद जारी होने के बाद आपको यह आपके LPG कनेक्शन के नाम पर मिलेगी।</div><div>&nbsp;</div><h2>ऑनलाइन भी मिल सकती है मदद</h2><div>यदि आपका कनेक्शन इंडियन ऑयल (Indane), भारत पेट्रोलियम (Bharatgas) या हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas) का है तो आप संबंधित कंपनी के आधिकारिक पोर्टल या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करके अपने कनेक्शन का विवरण देख सकते हैं। कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, हालांकि डुप्लीकेट SV जारी करने की प्रक्रिया एजेंसी के माध्यम से ही पूरी हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>किन परिस्थितियों में पड़ती है जरूरत?</h2><div>- गैस कनेक्शन दूसरे शहर में ट्रांसफर कराने पर</div><div>- कनेक्शन का स्वामित्व बदलने पर</div><div>- रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान</div><div>- किसी विवाद या दस्तावेजी जांच की स्थिति में</div><div>&nbsp;</div><h2>ध्यान रखने योग्य बातें</h2><div>- गैस कनेक्शन से जुड़े सभी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें।</div><div>- अपना मोबाइल नंबर और ई-केवाईसी (e-KYC) अपडेट रखें।</div><div>- केवल अधिकृत गैस एजेंसी या संबंधित तेल विपणन कंपनी से ही संपर्क करें।</div><div>- किसी अनधिकृत व्यक्ति को अपने ग्राहक नंबर या ओटीपी की जानकारी साझा न करें।</div><div>&nbsp;</div><div>यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि नई रसीद पाने का प्रोसेस आपकी लोकेशन और आप जिस खास LPG डिस्ट्रीब्यूटर के साथ काम कर रहे हैं, उसके आधार पर अलग हो सकता है। हमेशा पक्का करें कि आप अपने LPG कनेक्शन में किसी भी दिक्कत से बचने के लिए सही तरीके अपना रहे हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>एलपीजी कनेक्शन की ओरिजिनल रसीद या सब्सक्रिप्शन वाउचर खो जाने पर नया दस्तावेज बनवाना कठिन नहीं है। अपनी गैस एजेंसी में आवेदन, पहचान सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डुप्लीकेट दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए यदि आपकी रसीद गुम हो गई है तो बिना देरी किए संबंधित गैस एजेंसी से संपर्क करें और अपने कनेक्शन के रिकॉर्ड को अपडेट रखें।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 17:49:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[EPFO New Rules: PF क्लेम में देरी पर Officer की कटेगी Salary, लगेगा 12% का भारी जुर्माना]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/new-social-security-code-faster-pf-claim-settlement]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खासतौर पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तीन नई योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है। बता दें कि, इसमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-2026 शामिल है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इन नई योजनाओं को तहत डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन और बीमा दावों का समय पर निपटा लें।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">नई व्यवस्था के मद्देनजर अगर भविष्य निधि, पेंशन या बीमा का दावा सभी आवश्यक डॉक्यूमेंट के साथ पूरा होने के बाद 20 दिनों के अंदर ही निपटा लें। वरना इस मामले में आयुक्त पर 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज लगेगा।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आपको बताते चलें कि, यह रकम संबंधित अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि, इससे दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिलेगा।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले भी देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे स्पष्ट रुप से 12 प्रतिशत तय किया है। पहले अधिकारियों को पीएफ पर घोषित ब्याज दर के अनुसार भुगतान करना पड़ सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>कर्मचारी और नियोक्ताओं का अंशदान पहले की तरह ही रहेगा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, नई योजनाएं लागू होने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि योजना-1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना-1971, कर्मचारी पेंशन योजना-1995 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-1976 की जगह लेंगी।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">जबकि कर्मचारियों व नियोक्ताओं के अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह कर्मचारी और नियोक्ताओं के कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देंगे। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 फीसदी राशि पेंशन योजना में मिलेगी, वहीं केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत का योगदान देगी।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, जो नई योजनाएं बनी गई हैं, उनमें नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, जिससे सदस्य निकासी, पेंशन, बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ कंप्लीट ऑनलाइन और बिना देरी के लिया जा सकता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:12:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/new-social-security-code-faster-pf-claim-settlement</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, जानिए नई फीस दर और आवेदन का तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार ने पासपोर्ट नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। दरअसल, विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट आवेदन शुल्क में संशोधन किया है। नया संशोधित शुल्क ताज़ा आवेदन, पासपोर्ट रिन्यूअल (Re-issue), तत्काल (Tatkal) सेवा और खोए/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के मामलों पर लागू होगा। बताया गया है कि यदि आप 1 जुलाई 2026 के बाद पासपोर्ट आवेदन करेंगे तो आपको नई शुल्क दरों के अनुसार ही भुगतान करना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्राप्त विभागीय जानकारी के मुताबिक, नई फीस की मुख्य श्रेणियां इस प्रकार हैं, जो क्रमशः सेवा, पुरानी फीस और नई फीस को अभिव्यक्त करती हैं। कहने का आशय यह कि 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब ₹1,500 के बजाए ₹2,500 में बनेगा, जो ₹1000 अधिक है। इसी प्रकार 36 पेज वाला तत्काल (Tatkal) पासपोर्ट के लिए अब ₹3,500 के बजाए ₹5,000 देने होंगे, जो ₹1500 ज्यादा है। इसी प्रकार से 60 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब ₹2,000 की जगह ₹3,500 में बनेगा, यानी इस सेवा के लिए भी ₹1500 अधिक भुगतान करना पड़ेगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/so-much-confusion-regarding-citizenship-documents-is-not-right" target="_blank">नागरिकता के दस्तावेजों पर इतना भ्रम ठीक नहीं..</a></h3><div>वहीं, 60 पेज के तत्काल (Tatkal) पासपोर्ट के लिए अब ₹4,000 की जगह ₹6,000 देने होंगे, यानी कि इस कोटि में भी 2000 की बढ़ोतरी की गई है, जो सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट, नाबालिगों के पासपोर्ट तथा अन्य पासपोर्ट सेवाओं की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, कुछ श्रेणियों, जैसे पात्र वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों के लिए निर्धारित रियायतें जारी हैं।&nbsp;</div><div>सवाल है कि आप अपना पासपोर्ट आवेदन कैसे करें? तो जवाब होगा कि पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर पंजीकरण करें। फिर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। उसके बाद आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। पुनः निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। ततपश्चात नज़दीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र/पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र में अपॉइंटमेंट बुक करें। साथ ही दस्तावेज़ सत्यापन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करें। यह सबकुछ होने के बाद आपके आवेदनों व अद्यतन जानकारियों का पुलिस सत्यापन किया जाएगा, जिसमें सबकुछ सही मिलने और प्रशासनिक विवेक की संतुष्टि के बाद पासपोर्ट जारी किया जाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><h2># देशभर में और भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होंगे</h2><div><br></div><div>केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से मिली अद्यतन जानकारी के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से ही देशभर के विभिन्न विभागों में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की सेवाओं पर पड़ेगा, जबकि कुछेक चीजें मुफ्त भी होंगी। इनमें से कुछ बदलाव 1 जुलाई से सीधे प्रभावी हैं, जबकि कुछ जुलाई महीने के दौरान लागू होने वाली समय-सीमाएँ या नियामकीय परिवर्तन हैं। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—</div><div><br></div><div>एक, आधार में ईमेल अपडेट मुफ्त: 1 जुलाई से निर्धारित अवधि के लिए आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा, क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव: कुछ State Bank of India द्वारा निर्गत क्रेडिट कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट नियम बदलेंगे। जहां कुछ कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट और लाभों में बदलाव होगा, वहीं कुछ खर्चों पर मिलने वाले रिवॉर्ड कम या समाप्त किए गए हैं। जबकि HDFC Bank के कुछ कार्डों पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस की नई शर्तें लागू होंगी, क्योंकि इसके नियम बदले गए हैं और लाउंज सुविधा के लिए न्यूनतम खर्च जैसी नई शर्तें लागू की गई हैं।</div><div><br></div><div>तीसरा, बैंकों की मिस-सेलिंग पर RBI के नए नियम:यदि बैंक ग्राहक को गलत तरीके से वित्तीय उत्पाद बेचते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और ग्राहक संरक्षण के नए प्रावधान लागू होंगे।&nbsp;</div><div><br></div><div>चौथा, आयकर रिटर्न (ITR): ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। जुलाई में समय पर रिटर्न दाखिल करने पर विशेष ध्यान देना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>पांचवां, रेलवे नियमों में कुछ बदलाव होंगे: रेलवे की कुछ परिचालन और यात्री सुविधाओं से जुड़े नियमों में संशोधन लागू होंगे।&nbsp;</div><div><br></div><div>छठा, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी कीमतें: हर महीने की तरह 1 जुलाई को इनकी कीमतों की समीक्षा होगी, इसलिए नई दरें घोषित हो सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>सातवां, रेलवे के कुछ टिकटिंग और परिचालन नियमों में संशोधन लागू होंगे, जिसके दृष्टिगत यात्रियों को नए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। खासकर घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों की दरों में बदलाव संभव है।</div><div><br></div><div>आठवां, EPFO 3.0: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़ी नई डिजिटल सेवाओं का विस्तार शुरू होने की संभावना है।</div><div><br></div><div>नौवां, कारों की कीमतें: कुछ वाहन कंपनियाँ 1 जुलाई से कीमतों में वृद्धि लागू कर सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दसवां, पेट्रोल और डीज़ल: सरकार ने वाणिज्यिक खरीदारों पर लगाए गए अस्थायी बिक्री प्रतिबंध 1 जुलाई से हटाने का निर्णय लिया है। इससे सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बहाल होगी।&nbsp;</div><div><br></div><h2># समझिए, आम नागरिक पर सबसे अधिक असर किन बदलावों का पड़ेगा?&nbsp;</h2><div>पासपोर्ट बनवाने वालों पर, आयकर रिटर्न भरने वालों पर, SBI और HDFC क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं पर, बैंक ग्राहकों पर (RBI के नए नियम), LPG/CNG/PNG उपभोक्ताओं पर और रेल यात्रियों पर। स्वाभाविक है कि इससे महंगाई भी बढ़ेगी।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:35:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[आखिर ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी कैसे होती है? और इससे कैसे बचें? समझिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-does-cyber-fraud-involving-e-challans-take-place-and-how-can-you-avoid-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपको पता है कि किसी भी अनजान मैसेज पर क्लिक करेंगे तो बैंक खाता हो सकता है खाली? जी हां,&nbsp; आजकल यही हो रहा है। खासकर साइबर अपराधी फर्जी ई-चालान (E-Challan) के नाम पर एसएमएस (SMS), व्हाट्सऐप (WhatsApp) और ई-मेल (E-mail) भेजकर लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दरअसल, ऐसे संदेशों में लिखा होता है कि आपका ट्रैफिक चालान बकाया है, तुरंत भुगतान करें, अन्यथा वाहन जब्त हो सकता है या लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। लिहाजा लोग इनके झांसे में आ जाते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-to-get-your-ayushman-card-made-what-is-the-annual-limit-for-free-medical-treatment" target="_blank">AB-PMJAY: जानिए कैसे बनेगा आपका आयुष्मान कार्ड? वर्षपर्यंत कितने रुपये का मिलेगा मुफ्त इलाज?</a></h3><h2># समझिए, ठगी कैसे होती है?</h2><div>फर्जी एसएमएस या व्हाट्सऐप संदेश- "आपका ₹2,000 का चालान बकाया है।"......"24 घंटे में भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।".....नकली लिंक संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही आप नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। वहां वाहन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण या यूपीआई पिन (UPI PIN) मांगा जाता है। वहीं, मैलवेयर का खतरा भी रहता है क्योंकि कुछ लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में हानिकारक ऐप डाउनलोड हो जाता है। इससे ठग ओटीपी (OTP) बैंकिंग जानकारी और व्यक्तिगत डेटा चुरा सकते हैं।</div><div><br></div><h2># आखिर कैसे पहचानें फर्जी ई-चालान?</h2><div>संदेश में भेजे गए लिंक का डोमेन संदिग्ध हो। अत्यधिक डराने या जल्द भुगतान का दबाव बनाया जाए। भुगतान के लिए निजी मोबाइल नंबर या UPI ID दी गई हो। वर्तनी और भाषा संबंधी कई गलतियां हों। आपने कोई ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ा हो, फिर भी चालान का संदेश आए।</div><div>&nbsp;</div><div>सुरक्षित रहने के उपाय: किसी भी एसएमएस या व्हाट्सऐप लिंक पर सीधे क्लिक न करें। ई-चालान की जांच केवल सरकारी पोर्टल पर करें। OTP, UPI PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। मोबाइल में केवल आधिकारिक ऐप ही इंस्टॉल करें। संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे रिपोर्ट करें और ब्लॉक करें।</div><div><br></div><h2># ई-चालान की जांच कहां करें?</h2><div>भारत में ट्रैफिक चालान की वास्तविक स्थिति देखने के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें: Parivahan eChallan Portal⁠. वहीं, यदि ठगी हो जाए तो क्या करें? तुरंत बैंक और यूपीआई (UPI) सेवा प्रदाता को सूचित करें। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। फिर साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: National Cyber Crime Reporting Portal.</div><div><br></div><h2># जानिए, आपका अधिकार क्या है?</h2><div>यदि आप समय रहते 1930 पर शिकायत कर देते हैं, तो कई मामलों में संदिग्ध खाते में गई राशि को फ्रीज कराकर वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। हमेशा यह याद रखें कि कोई भी वैध सरकारी विभाग व्हाट्सऐप संदेश भेजकर आपसे ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक पासवर्ड नहीं मांगता। ई-चालान का संदेश मिलने पर पहले उसकी सत्यता जांचें, फिर ही कोई भुगतान करें।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:59:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-does-cyber-fraud-involving-e-challans-take-place-and-how-can-you-avoid-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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