<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
  <channel>
    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
    <item>
      <title><![CDATA[Pride Hotels लाएगा 1000 करोड़ रुपये का IPO, दिसंबर तक बाजार में दस्तक की तैयारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/pride-hotels-plans-1000-crore-ipo-by-december-for-expansion]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आतिथ्य क्षेत्र की कंपनी प्राइड होटल्स इस साल दिसंबर तक अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी कर रही है। इस निर्गम का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये हो सकता है। प्राइड होटल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सत्येन जैन ने पीटीआई-से कहा, ‘‘कंपनी तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।</p><p>पिछले 12 माह में उसने नौ नए होटल खोले हैं। यह इंदौर में नौवां होटल है।’’
इसके साथ ही प्राइड होटल्स के पोर्टफोलियो में अब कुल 40 संपत्तियां हो गई हैं। इनमें आठ होटल कंपनी के स्वामित्व वाले हैं, जबकि 32 होटल प्रबंधन अनुबंध के तहत संचालित किए जा रहे हैं।</p><p>कंपनी ने अगले डेढ़ से दो साल में खुलने वाले 32 और होटल के लिए समझौते किए हैं। इनके शुरू होने के बाद कंपनी का पोर्टफोलियो करीब 72 संपत्तियों तक पहुंच सकता है। जैन ने कहा कि कंपनी का ध्यान चार प्रमुख क्षेत्रों पर है।</p><p>इनमें मौजूदा बाजारों में विस्तार, बड़े विवाह एवं एमआईसीई (मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन) होटल को लक्ष्य बनाना, नए पर्यटन स्थलों में प्रवेश और तीर्थस्थलों पर विस्तार शामिल है। उन्होंने कहा कि तीर्थ पर्यटन कंपनी के लिए तेजी से उभरता अवसर है। उनके अनुसार, छुट्टी मनाने वाले पर्यटकों के मुकाबले तीर्थयात्रियों के बार-बार आने की संभावना अधिक होती है।</p><p>पुरी जैसे स्थानों में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ विवाह समारोहों से जुड़ा कारोबार भी कंपनी के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। कंपनी अपने पोर्टफोलियो में स्वामित्व वाले होटल की हिस्सेदारी भी बढ़ाने की योजना बना रही है। वहीं, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, बेहतर हवाई एवं सड़क संपर्क और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं से घरेलू अवकाश पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p><p>प्राइड होटल्स ने अक्टूबर, 2025 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल किए थे और जनवरी, 2026 में उसे आईपीओ लाने की मंजूरी मिल गई थी। दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम में ₹260 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे तथा प्रवर्तकों एवं प्रवर्तक समूह की इकाइयों द्वारा 3.92 करोड़ तक शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) लाई जाएगी। बाजार विशेषज्ञों ने निर्गम का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है।</p><p>जैन ने कहा कि हमारी योजना इस साल दिसंबर तक आईपीओ लाने की है। आईपीओ से प्राप्त धन का इस्तेमाल मौजूदा होटल के नवीनीकरण, कर्ज चुकाने और सामान्य कंपनी कामकाज के लिए किया जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 05:32:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/pride-hotels-plans-1000-crore-ipo-by-december-for-expansion</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Space Economy में बड़ी चुनौती, Cambridge Study का दावा US के मुकाबले काफी महंगी है ISRO की Rocket Launching]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/major-challenge-in-space-economy-cambridge-study-claims-isros-rocket-launches-are-more-expensive]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत जब चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के साथ अपना तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है, उसी दौरान देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की लागत को लेकर एक नई बहस सामने आई है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और इटली के ट्यूरिन पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन में भारत की रॉकेट प्रक्षेपण लागत को दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में सबसे अधिक बताया गया है।</div><div><br></div><div>अर्थशास्त्रियों एलेसियो टेर्ज़ी और फ्रांसेस्को निकोली के शोध के अनुसार, 2025 में भारत में लो अर्थ ऑर्बिट में एक किलोग्राम भार पहुंचाने की औसत लागत करीब 13,302 डॉलर रही। इसके मुकाबले अमेरिका में यह लागत 3,225 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। जापान में 5,287 डॉलर, चीन में 5,809 डॉलर, रूस में 6,682 डॉलर और यूरोप में 9,897 डॉलर प्रति किलोग्राम आंकी गई है। अध्ययन के मुताबिक, वैश्विक औसत लागत 3,868 डॉलर रही है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार यह अध्ययन 1960 से 2025 के बीच हुए 6,740 से अधिक रॉकेट प्रक्षेपणों के आंकड़ों पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने सरकारी दस्तावेजों, अकादमिक अध्ययनों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों को एक समान आधार पर रखकर लागत का आकलन किया है।</div><div><br></div><div>हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अध्ययन के निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया है। इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने इसे गलत आंकड़ों पर आधारित बताया है। पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने भी कहा कि केवल प्रति किलोग्राम लागत से किसी देश की वास्तविक प्रक्षेपण अर्थव्यवस्था का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक बड़े पैमाने पर प्रक्षेपण करने वाली कंपनियों को अधिक संख्या में अभियानों के कारण लागत में स्वाभाविक लाभ मिलता है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अमेरिका की कम लागत के पीछे स्पेसएक्स की पुन: उपयोग होने वाली रॉकेट तकनीक को बड़ा कारण माना जाता है। फाल्कन-9 के पहले चरण को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्रक्षेपण की लागत कम होती है। 2025 में स्पेसएक्स ने करीब 165 फाल्कन-9 प्रक्षेपण किए थे। इसके मुकाबले इसरो की स्थापना 1969 में हुई और अब तक उसके कुल प्रक्षेपणों की संख्या करीब 105 बताई जाती है।</div><div><br></div><div>भारत ने भी दोबारा उपयोग होने वाले प्रक्षेपण यान की दिशा में काम शुरू किया है। दोबारा उपयोग होने वाले प्रक्षेपण यान के प्रौद्योगिकी परीक्षण किए जा चुके हैं, जबकि अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान भी इसी दिशा में विकसित किया जा रहा है। निजी क्षेत्र की स्काईरूट एयरोस्पेस भी विक्रम श्रृंखला के रॉकेटों के जरिए छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण बाजार में जगह बनाने की कोशिश कर रही है।</div><div><br></div><div>भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार अगले दशक में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को करीब 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य देख रही है। ऐसे में कम लागत, अधिक प्रक्षेपण, स्वदेशी तकनीक और पुन: उपयोग की क्षमता भविष्य की प्रतिस्पर्धा में अहम भूमिका निभाने वाली हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि अध्ययन ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर सवाल नहीं उठाया है, बल्कि बदलती वैश्विक प्रक्षेपण अर्थव्यवस्था की ओर ध्यान दिलाया है। चंद्रयान-3 जैसी उपलब्धियों के बाद अब भारत के सामने चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों में बेहतर काम करने की अपनी पुरानी क्षमता को बड़े पैमाने की उत्पादन व्यवस्था और पुन: उपयोग वाली तकनीक के साथ कैसे जोड़ा जाए। यही आने वाले वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता तय करने वाला प्रमुख सवाल है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 20:09:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/major-challenge-in-space-economy-cambridge-study-claims-isros-rocket-launches-are-more-expensive</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/isro_large_2010_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SBI-ICICI Bank की बड़ी उपलब्धि, RBI Swap Facility के जरिए विदेशी मुद्रा भंडार में भारी इज़ाफा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/achievement-for-sbi-and-icici-significant-boost-to-foreign-exchange-reserves-via-rbi-swap-facility]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष मुद्रा अदला-बदली सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने में तेज बढ़त दर्ज की है। 21 अगस्त तक कुल 72.8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाली विदेशी मुद्रा जमा का है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एफसीएनआरबी जमा के जरिए 65.4 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी से 4.9 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी से 2.6 अरब डॉलर मिले हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, बैंकों की विदेशी मुद्रा जुटाने की रफ्तार पिछले कुछ सप्ताह में काफी तेज हुई है। 31 जुलाई तक कुल राशि 40.8 अरब डॉलर थी, जो 13 अगस्त को बढ़कर 56.9 अरब डॉलर और 21 अगस्त को 72.8 अरब डॉलर हो गई। यानी केवल तीन सप्ताह में बैंकों ने करीब 32 अरब डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा जुटाई है। इस दौरान एफसीएनआरबी जमा भी 36.7 अरब डॉलर से बढ़कर 65.4 अरब डॉलर हो गई है।</div><div><br></div><div>इस अभियान में एचएसबीसी, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक प्रमुख भूमिका में रहे हैं। पहले के बैंकवार आंकड़ों में एचएसबीसी ने करीब 6 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि जुटाई थी। भारतीय स्टेट बैंक ने 4 अरब डॉलर और आईसीआईसीआई बैंक ने 3.7 अरब डॉलर जुटाए। एचडीएफसी बैंक ने 1.4 अरब डॉलर, कोटक महिंद्रा बैंक ने 1.7 अरब डॉलर और एक्सिस बैंक ने 1.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि जुटाई थी। कुछ बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि इस सुविधा से बैंकों को विदेशी मुद्रा में धन जुटाने का अवसर मिलता है, जबकि मुद्रा विनिमय से जुड़े जोखिम के प्रबंधन में आरबीआई की भूमिका रहती है। तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली पात्र एफसीएनआरबी जमाओं को रियायती डॉलर-रुपया अदला-बदली सुविधा का लाभ मिलता है। इन जमाओं पर नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक तरलता अनुपात से जुड़ी नियामकीय राहत भी दी जाती है।</div><div><br></div><div>इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी फायदा हुआ है। 15 अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 10 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। बैंकरों का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक भंडार 728 अरब डॉलर के अब तक के उच्चतम स्तर को पार कर सकता है।</div><div><br></div><div>तेज प्रतिक्रिया को देखते हुए आरबीआई ने एफसीएनआरबी जमा जुटाने की समयसीमा पहले कर दी है। पहले बैंक 30 सितंबर तक पात्र जमा जुटा सकते थे, लेकिन अब केवल 31 अगस्त तक जुटाई गई जमाएं इस सुविधा के लिए मान्य होंगी। इन जमाओं से जुड़ी आरबीआई के साथ मुद्रा अदला-बदली 11 सितंबर तक की जा सकेगी। वहीं बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी के लिए सुविधा 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। आरबीआई ने समयसीमा में बदलाव का कारण इस योजना को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया और बढ़े हुए विदेशी मुद्रा प्रवाह को बताया है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:48:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/achievement-for-sbi-and-icici-significant-boost-to-foreign-exchange-reserves-via-rbi-swap-facility</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/sbi-icici_large_1948_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[iPhone के बाद भारत में बनेंगे MacBook और iPad, Ashwini Vaishnaw ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर दिया बड़ा बयान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/after-iphones-macbooks-ipads-to-be-manufactured-in-india-ashwini-vaishnaw-makes-a-major-statement]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सरकार अब केवल मोबाइल फोन की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती है। मोबाइल फोन विनिर्माण योजना शुरू करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया कि एप्पल भारत में आईफोन के अलावा मैकबुक और आईपैड जैसे दूसरे उत्पादों का निर्माण भी शुरू कर सकती है। उनसे जब इस संभावना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि ऐसा हो सकता है।</div><div><br></div><div>बता दें कि सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की लागत वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को पांच वर्षों के लिए लागू किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसका उद्देश्य भारत में मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कलपुर्जों का स्थानीय निर्माण, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला, उत्पाद डिजाइन और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना है।</div><div><br></div><div>नई योजना में भारतीय मोबाइल ब्रांडों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक सरकार को उम्मीद है कि अगले 10 से 14 महीनों में तीन संभावित भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में आ सकती हैं। इन कंपनियों को अपने लक्षित बाजार के अनुसार बेहतर डिजाइन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारतीय ब्रांड को योजना का लाभ लेने के लिए भारत में पंजीकृत कंपनी होना जरूरी होगा। उसका बौद्धिक संपदा अधिकार और व्यापार चिह्न भारत में होना चाहिए। कंपनी का प्रबंधन भारतीय नागरिकों के नियंत्रण में होना और 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों की होनी चाहिए। इसके साथ भारत में ही अनुसंधान और डिजाइन की क्षमता विकसित करना भी जरूरी होगा।</div><div><br></div><div>इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि अनुसंधान और विकास के लिए भी अलग प्रोत्साहन रखा गया है। भारतीय ब्रांडों को पांच प्रतिशत का मूल प्रोत्साहन मिलेगा। घरेलू स्तर पर प्रमुख कलपुर्जे खरीदने पर 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, जबकि भारतीय डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए तीन प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि सरकार मोबाइल फोन के साथ पूरी आपूर्ति श्रृंखला को देश में विकसित करना चाहती है। डिस्प्ले, कैमरा, बाहरी ढांचा, बैटरी और यूएसबी तार जैसे कलपुर्जों की घरेलू खरीद बढ़ाने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।</div><div><br></div><div>पिछली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के दौरान भी भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है। निवेश 20,587 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था। मोबाइल उत्पादन करीब 11.62 लाख करोड़ रुपये रहा। मोबाइल फोन निर्यात भी तेजी से बढ़ा है और भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है।</div><div><br></div><div>नई योजना के तहत सरकार को पांच वर्षों में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल उत्पादन और लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के निर्यात की उम्मीद है। इससे करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इस तरह सरकार की कोशिश अब भारत को केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि डिजाइन, तकनीक और अनुसंधान के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने की है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:29:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/after-iphones-macbooks-ipads-to-be-manufactured-in-india-ashwini-vaishnaw-makes-a-major-statement</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/ashwini-vaishnaw_large_1929_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump Stock Market: ट्रंप ने किए 1000 सौदे, 263 करोड़ डॉलर के बड़े लेनदेन का खुलासा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/donald-trump-stock-market-trump-executed-1000-trades-massive-263-billion-transaction-revealed]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निवेश से जुड़ी गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। अमेरिका के सरकारी नैतिकता कार्यालय की ओर से शनिवार को जारी वित्तीय खुलासे के मुताबिक ट्रंप ने जून में 1,000 से अधिक प्रतिभूति लेनदेन किए। इन सभी सौदों की कुल अनुमानित कीमत 7.81 करोड़ डॉलर से 26.31 करोड़ डॉलर के बीच बताई गई है। अमेरिकी नियमों के तहत प्रत्येक सौदे की वास्तविक राशि के बजाय एक निर्धारित मूल्य सीमा बताई जाती है।</div><div><br></div><div>मौजूदा जानकारी के अनुसार, जून में ट्रंप के निवेश में बर्कशायर हैथवे, वीजा, मास्टरकार्ड और सिंटास जैसी बड़ी कंपनियां शामिल रहीं। उन्होंने 18 जून को बर्कशायर हैथवे के 10 लाख से 50 लाख डॉलर मूल्य के शेयर खरीदे और 24 जून को इसकी कुछ हिस्सेदारी बेची। इसी तरह मेटा के 10 लाख से 50 लाख डॉलर मूल्य के शेयर 18 जून को बेचे गए, जबकि बाद में महीने में छोटी मात्रा में फिर खरीदारी की गई।</div><div><br></div><div>ट्रंप के सौदों में पालांटिर भी खास तौर पर शामिल रही। उन्होंने 3 जून को 1,001 से 15,000 डॉलर मूल्य के शेयर खरीदे। इसके बाद 16 जून को 15,001 से 50,000 डॉलर और 18 जून को 5 लाख से 10 लाख डॉलर मूल्य के शेयर बेचे। 23 और 24 जून को उन्होंने फिर इस कंपनी के शेयर खरीदे। यह खरीद अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून को हुए शांति समझौते के बाद हुई थी।</div><div><br></div><div>बता दें कि जून में सबसे बड़ा एकल लेनदेन 22 जून को हुआ, जब ट्रंप ने वैनगार्ड समूह के एक निवेश कोष में 50 लाख से 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य की हिस्सेदारी बेची। इसके अलावा कॉइनबेस, वीजा और होम डिपो जैसी कंपनियों से जुड़े लेनदेन भी खुलासे में दर्ज हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि ट्रंप की निवेश गतिविधियों का यह सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 2025 में उन्होंने 21,000 से अधिक प्रतिभूति सौदे किए थे। उन सौदों का कुल अनुमानित मूल्य 60 करोड़ से 1.86 अरब डॉलर के बीच था। कई मौकों पर एक ही प्रतिभूति की खरीद और बिक्री एक ही दिन में किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।</div><div><br></div><div>राष्ट्रपति के निवेश को लेकर हितों के टकराव का मुद्दा भी उठता रहा है। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप के निवेश स्वतंत्र रूप से संचालित खातों में रखे गए हैं और राष्ट्रपति या उनके परिवार का निवेश संबंधी फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंग्ल ने कहा कि निवेश कंप्यूटर आधारित मॉडल के जरिए स्वतंत्र प्रबंधकों द्वारा किए जाते हैं।</div><div><br></div><div>ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने भी पहले कहा है कि संपत्तियां एक ऐसे न्यास में हैं जिसे स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाता है। व्हाइट हाउस के मुताबिक निवेश संबंधी फैसलों में राष्ट्रपति या उनके परिवार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में सौदों और राष्ट्रपति पद से जुड़े बाजार प्रभावों के कारण इन खुलासों पर नजर बनी हुई है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/donald-trump-stock-market-trump-executed-1000-trades-massive-263-billion-transaction-revealed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/donald-trump_large_1903_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[FSSAI ने Marche Retail का लाइसेंस 30 दिन के लिए निलंबित किया, SDP Industries पर भी कार्रवाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/fssai-suspends-marche-retail-license-and-bans-sdp-industries-ghee]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में मार्शे रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। साथ ही, दमन स्थित एसडीपी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को घी के सभी प्रकार के उत्पाद बेचने से रोक दिया है। एफएसएसएआई ने रविवार को सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट में कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन सामने आने के बाद उसने नयी दिल्ली स्थित मार्शे रिटेल का लाइसेंस निलंबित किया है और दमन स्थित एसडीपी इंडस्ट्रीज के खिलाफ प्रतिबंध आदेश जारी किया है।</p><p>नियामक ने कहा कि मार्शे रिटेल के खाद्य कारोबार परिसर के निरीक्षण और उसके बाद की जांच में गंभीर खामियां पाई गईं। निरीक्षण के दौरान परिसर के डिजाइन, संचालन संबंधी नियंत्रण, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, खाद्य संचालकों के प्रशिक्षण और अनिवार्य रिकॉर्ड रखने से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया था। एफएसएसएआई ने मार्शे रिटेल का लाइसेंस 30 दिन के लिए निलंबित किया है।</p><p>कंपनी को तत्काल सभी खाद्य कारोबार गतिविधियां बंद करने और पाई गई कमियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है। एसडीपी इंडस्ट्रीज के मामले में एफएसएसएआई ने नियमों का पालन नहीं करने वाले घी उत्पादों और मिलावट संबंधी चिंताओं को लेकर प्रतिबंध आदेश जारी किया है। नियामक ने कहा कि प्रवर्तन निरीक्षण और नमूनों की जांच के दौरान कंपनी के कई घी उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।</p><p>इनमें ‘श्रध्धा’, ‘श्री सारस’ और ‘गोकुल’ जैसे ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले घी के विभिन्न उत्पाद शामिल हैं। एफएसएसएआई ने कहा कि घी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच में ए-सिटोस्टेरॉल पाया गया। यह एक वनस्पति स्टेरॉल है, जिसकी घी में मौजूदगी नहीं होनी चाहिए।</p><p>इसके अलावा वसा अम्लों की संरचना भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। इन निष्कर्षों से घी में बाहरी या वनस्पति वसा की मौजूदगी का संकेत मिला और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई। स्टेरॉल कार्बनिक अणुओं और वसा की एक श्रेणी है जो पेड़-पौधों, पशुओं और कवक में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 15:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/fssai-suspends-marche-retail-license-and-bans-sdp-industries-ghee</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/fssai-suspends-marche-retail-license-and-bans-sdp-industries-ghee_large_20260823155223117_46febc9_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Real Estate कंपनियों की बिक्री 21% गिरी, Q1 में 40,000 करोड़ रुपये की बुकिंग]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/listed-real-estate-companies-sales-booking-drops-twenty-one-percent-in-q1]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश की 28 प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों की सामूहिक बिक्री बुकिंग चालू वित्त वर्ष की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में 21 प्रतिशत घटकर करीब 40,000 करोड़ रुपये रह गई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कुछ बड़ी कंपनियों ने आवासीय परियोजनाएं शुरू नहीं कीं, जिससे बिक्री पर असर पड़ा। निवेशकों को दी गई प्रस्तुतियों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 28 प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों की कुल बिक्री बुकिंग यानी पूर्व-बिक्री चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 39,964 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले इसी अवधि में 50,900 करोड़ रुपये थी।</p><p>बिक्री बुकिंग में सबसे बड़ा योगदान आवास क्षेत्र का रहा। बिक्री बुकिंग के मामले में गोदरेज प्रॉपर्टीज सबसे बड़ी सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनी रही। उसकी बिक्री बुकिंग जून तिमाही में 8,651 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 7,082 करोड़ रुपये थी।</p><p>कुल 28 कंपनियों में से 19 ने बिक्री-बुकिंग में वृद्धि दर्ज की। इनमें गोदरेज प्रॉपर्टीज, लोढ़ा, सोभा, मैक्स एस्टेट्स, पूर्वांकरा, कल्पतरु, एम्बैसी डेवलपमेंट्स, महिंद्रा लाइफस्पेस, रेमंड रियल्टी, सनटेक रियल्टी, कोल्टे-पाटिल, श्रीराम प्रॉपर्टीज, अजमेरा रियल्टी, अरविंद स्मार्टस्पेसेज, टार्क, श्री लोटस डेवलपर्स, अरिहंत सुपरस्टक्चर्स, आर्केड और सूरज एस्टेट शामिल हैं। वहीं, डीएलएफ, प्रेस्टीज, ओबेरॉय रियल्टी, सिग्नेचर ग्लोबल, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट, ब्रिगेड, आशियाना हाउसिंग और एल्डेको नौ सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों ने बिक्री बुकिंग में गिरावट दर्ज की।</p><p>आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु स्थित प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड 6,579.3 करोड़ रुपये की बिक्री बुकिंग के साथ अप्रैल-जून तिमाही में दूसरे स्थान पर रही। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 12,126.4 करोड़ रुपये थी। मुंबई स्थित लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड की बिक्री बुकिंग बढ़कर 4,630 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 4,450 करोड़ रुपये थी।</p><p>वहीं, बेंगलुरु स्थित सोभा लिमिटेड की बिक्री बुकिंग 2,079 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,656 करोड़ रुपये हो गई। सिग्नेचर ग्लोबल 1,970 करोड़ रुपये की बिक्री बुकिंग के साथ पांचवें स्थान पर रही। एक साल पहले उसकी बिक्री बुकिंग 2,640 करोड़ रुपये थी।</p><p>बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड की बिक्री बुकिंग 11,425 करोड़ रुपये से घटकर महज 657 करोड़ रुपये रह गई। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कोई परियोजना शुरू नहीं की। रियल एस्टेट सलाहकारों के अनुसार, इन सूचीबद्ध कंपनियों की सामूहिक बिक्री में गिरावट के पीछे प्रमुख कंपनियों द्वारा नई परियोजनाएं शुरू नहीं करना, पिछले साल का ऊंचा आधार प्रभाव और पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण संभावित घर खरीदारों का सतर्क रुख जैसे कारक रहे।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 15:32:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/listed-real-estate-companies-sales-booking-drops-twenty-one-percent-in-q1</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/listed-real-estate-companies-sales-booking-drops-twenty-one-percent-in-q1_large_20260823153235755_70427d2_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SBI Vision 2030: 200 लाख करोड़ का कारोबार और Indian Economy में बड़ी भूमिका, बोले Chairman CS Setty]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-vision-2030-target-200-lakh-crore-business-milestone]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का कुल कारोबार वर्ष 2030 तक बढ़कर करीब ₹200 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि मौजूदा वृद्धि दर को देखते हुए 2030 तक एसबीआई का कुल कारोबार ₹170-180 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है और इसके ₹200 लाख करोड़ के स्तर को छूने की भी संभावना है। उस समय बैंक अपनी 75वां स्थापना दिवस मनाएगा। 
  एसबीआई की स्थापना एक जुलाई, 1955 को संसद के कानून के तहत हुई थी। 
   देश के सबसे बड़े ऋणदाता एसबीआई का कुल कारोबार जून, 2026 के अंत में बढ़कर ₹110.01 लाख करोड़ हो गया है। इसमें बैंक के कुल ऋण और अग्रिम शामिल हैं।</p><p>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">बैंक ने पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पहली बार ₹100 लाख करोड़ के कुल कारोबार का आंकड़ा पार किया था।
 शेट्टी ने कहा कि एसबीआई की वृद्धि की गति भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से गहराई से जुड़ी हुई है। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती है, तो बैंक के बही-खाते में सालाना करीब 11-12 प्रतिशत की वृद्धि की क्षमता है। ऐसी स्थिति में बैंक का कारोबार लगभग हर छह वर्ष में दोगुना हो सकता है।
</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">  शेट्टी ने पीटीआई-के साथ साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि 2030 के लिए ₹200 लाख करोड़ का कोई औपचारिक लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, बल्कि यह मौजूदा वृद्धि के आधार पर संभावित स्तर है।
 एसबीआई ने अपने ‘दृष्टिकोण 2030’ के तहत ग्राहकों, कर्मचारियों, शेयरधारकों तथा सरकार और नियामकों-इन चार प्रमुख हितधारकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है। बैंक का लक्ष्य ग्राहकों के अनुभव में सुधार, कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन और देश की आर्थिक वृद्धि में अपनी भूमिका को मजबूत करना है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">
 शेट्टी ने कहा कि बैंक कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों को समर्थन देने के साथ बचत जुटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
 उन्होंने कहा कि सूक्ष्म स्तर पर ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखना महत्वपूर्ण लक्ष्य है। 
 पूंजी के मोर्चे पर एसबीआई साझा इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) अनुपात करीब 12 प्रतिशत और पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) करीब 15 प्रतिशत बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> वहीं, बैंक लगातार अपनी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाकर लागत-से-आय अनुपात में करीब 2-3 प्रतिशत अंक की कमी लाने पर भी ध्यान दे रहा है।
 चेयरमैन ने कहा कि विशेष लक्ष्य और आंकड़े हर साल अनुमान और प्रगति के आधार पर बदलते हैं। लेकिन ये व्यापक लक्ष्य विभिन्न आर्थिक चक्रों में एसबीआई की रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।</span></p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 14:24:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-vision-2030-target-200-lakh-crore-business-milestone</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/sbi-vision-2030_large_1424_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Share Market में इस हफ्ते Crude Oil और वैश्विक घटनाक्रम तय करेंगे दिशा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/share-market-outlook-crude-oil-us-fed-jackson-hole-economic-cues]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। रिलायंस ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी पर करीबी नजर रखेंगे।</p><p>खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों से ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान, टिकाऊ वस्तुओं के ऑर्डर और उपभोक्ता भरोसे से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती तथा फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में भी महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश प्रवाह और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।</p><p>ऑनलाइन कारोबार एवं संपत्ति प्रौद्योगिकी कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह तीन प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही परिणाम और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दीर्घावधि की अमेरिकी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी।</p><p>इससे सितंबर की नीतिगत बैठक से पहले केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार बनी महंगाई के जोखिम और श्रम बाजार में नरमी के संकेतों के बीच संतुलन को लेकर संकेत मिल सकते हैं। पोनमुडी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है।</p><p>इससे होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने इस महीने भारतीय शेयरों में खरीदारी तेज की है और अगस्त में अब तक 23,544 करोड़ रुपये का निवेश किया है। पिछले सप्ताह बीएसई के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में 468.42 अंक की गिरावट रही, जबकि एनएसई का निफ्टी 114 अंक नीचे रहा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि निफ्टी में लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली सुधार की उम्मीद है।</p><p>उन्होंने कहा कि बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 13:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/share-market-outlook-crude-oil-us-fed-jackson-hole-economic-cues</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/share-market-outlook-crude-oil-us-fed-jackson-hole-economic-cues_large_20260823134222238_4712d60_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PNG Connection को बढ़ावा देने के लिए राज्यों में तैनात होंगे Nodal Officer]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/centre-asks-states-to-appoint-nodal-officers-for-png-connections]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार ने घरों में पाइप के जरिये प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की पहुंच और इस्तेमाल बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। ये अधिकारी गैस वितरण कंपनियों और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के साथ समन्वय कर उन घरों को पाइप वाली रसोई गैस से जोड़ने में मदद करेंगे, जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने 21 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा कि पीएनजी सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक सुविधाजनक ईंधन है।</p><p>इसका इस्तेमाल बढ़ने से रसोई गैस सिलेंडर यानी एलपीजी की ढुलाई का बोझ कम होगा और शहरों में तैयार किए गए गैस वितरण ढांचे का बेहतर उपयोग हो सकेगा। मंत्रालय चाहता है कि इस मामले में जिला-स्तर पर हस्तक्षेप हो। मंत्रालय एक ऐसा नियामकीय ढांचा लागू करने वाला है जिसके तहत परिवार ऐसे इलाकों में एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन दोनों एक साथ नहीं रख सकेंगे जहां पाइप वाली गैस उपलब्ध है।</p><p>सरकार का यह कदम ऐसे उठाया आया है जब इस साल पश्चिम एशिया में संकट के दौरान एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति समुद्री मार्गों पर निर्भर रहती है। संकट के दौरान घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देनी पड़ी थी।</p><p>इसके मुकाबले घरेलू पीएनजी आपूर्ति पर संकट का असर अपेक्षाकृत कम रहा। घरेलू पीएनजी क्षेत्र को घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की प्राथमिकता वाली आपूर्ति मिलने के कारण यह संकट से बचा रहा। सरकार अब उन क्षेत्रों में एलपीजी से पीएनजी की ओर तेजी से बदलाव करना चाहती है, जहां पाइप वाली गैस पहुंच चुकी है।</p><p>पीएनजी को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन बिछाने, निर्माण, परिचालन और विस्तार तथा अन्य सुविधाओं) आदेश 2026 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा तीन के तहत एलपीजी नियंत्रण आदेश को अधिसूचित किया है। नए अधिसूचित नियमों के तहत ऐसे इलाकों में घरों को एक साथ एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी। नोटिस दिए जाने के बाद पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है।</p><p>इसके लिए प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठित की जाएगी। समिति आवासीय सोसायटी और पात्र घरों की पहचान करेगी, नोटिस जारी करेगी तथा उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता और कनेक्शन शिविर आयोजित करेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि पीसीसी व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब तक के अनुभव से पता चला है कि इसे समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग जरूरी है।</p><p>जिला प्रशासन को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और आवासीय समितियों से पाइपलाइन बिछाने के लिए रास्ता उपलब्ध कराने, एलपीजी वितरकों और गैस वितरण कंपनियों के बीच समन्वय कराने, उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान और पीएनजी अपनाने की निगरानी में मदद करनी होगी। मंत्रालय ने राज्यों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को इस काम के लिए नामित करने को कहा है। प्रत्येक जिले में कम से कम जिला आपूर्ति अधिकारी स्तर के एक अधिकारी को पीसीसी से जोड़ा जाएगा।</p><p>सरकार का मानना है कि पीएनजी का विस्तार खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ भारत की ऊर्जा आपूर्ति को अंतरराष्ट्रीय संकट और समुद्री परिवहन में होने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक जुझारू बनाएगा। सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इस मामले को प्राथमिकता से लें। सरकार ने राज्यों से स्पष्ट किया है कि वह समयबद्ध तरीके से पीएनजी की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 13:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/centre-asks-states-to-appoint-nodal-officers-for-png-connections</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/23/centre-asks-states-to-appoint-nodal-officers-for-png-connections_large_20260823131219630_d01a59c_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Starbucks भारत में तेजी से बढ़ाएगा Stores, शहरों में नेटवर्क डेंसिटी बढ़ाने पर जोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/tata-starbucks-to-aggressively-expand-stores-across-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत में स्टारबक्स एक बार फिर तेजी से स्टोर खोलने की रणनीति पर लौटने की तैयारी में है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लि. (टीसीपीएल) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुनील डिसूजा ने कहा कि पिछले डेढ़-दो साल में कंपनी ने अपने कारोबारी मॉडल को नए सिरे से तैयार करने पर ध्यान दिया है और अब कारोबार में सुधार के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। टाटा स्टारबक्स ने लगातार चार तिमाहियों में ‘समान स्टोर बिक्री’ में वृद्धि दर्ज की है।</p><p>डिसूजा के मुताबिक, बिक्री में अब तेजी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में कंपनी दोबारा आक्रामक तरीके से स्टोर की संख्या बढ़ाएगी। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और अमेरिकी कंपनी स्टारबक्स कॉरपोरेशन के 50:50 अनुपात की संयुक्त उद्यम कंपनी टाटा स्टारबक्स इस समय भारत में करीब 500 स्टारबक्स कैफे संचालित करती है।</p><p>डिसूजा ने कहा कि कंपनी का ध्यान केवल नए शहरों में पहुंच बढ़ाने पर नहीं होगा, बल्कि मौजूदा शहरों में स्टोर की संख्या बढ़ाने पर भी रहेगा। स्टारबक्स फिलहाल करीब 80 शहरों में मौजूद है और कंपनी का मानना है कि यह संख्या पर्याप्त है। आगे विस्तार में शहरों के भीतर स्टोर की घनत्व बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जाएगा।</p><p>उन्होंने बताया कि किसी शहर में पांच से अधिक स्टोर होने पर व्यापक दक्षता मिलती है। इससे डिलिवरी और रसोई दक्षता से परिचालन करते हैं। पिछले करीब दो वर्षों के दौरान कंपनी ने स्टोर के आकार, प्रति स्टोर पूंजीगत खर्च और पेय पदार्थों की कीमतों समेत अपने पूरे कारोबारी मॉडल की समीक्षा की।</p><p>कंपनी ने इस अवधि का इस्तेमाल कारोबार को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए किया। जून तिमाही में टाटा स्टारबक्स का राजस्व 11 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान चार नए स्टोर खोले गए, जिनमें कोलकाता और नयी दिल्ली के दो रिजर्व स्टोर भी शामिल हैं।</p><p>इन स्टोरों से कंपनी के प्रीमियम पोर्टफोलियो को मजबूती मिली है। जून तिमाही के अंत तक कंपनी के भारत में 498 स्टारबक्स स्टोर थे। उन्होंने कहा कि टीसीपीएल के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने जून में कंपनी की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि टाटा स्टारबक्स की दीर्घावधि की महत्वाकांक्षा चीन के स्तर पर पहुंचने की है।</p><p>चीन में कंपनी के करीब 8,000 स्टोर हैं। टीसीपीएल की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बीते वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त उद्यम का राजस्व सात प्रतिशत बढ़कर 1,367 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा कम होकर 98.95 करोड़ रुपये रहा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 11:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/tata-starbucks-to-aggressively-expand-stores-across-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Commerce Secretary का South America दौरा 24 अगस्त से, ब्राजील और चिली से व्यापार पर चर्चा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/commerce-secretary-rajesh-agrawal-visits-south-america-for-trade-talks]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत अपनी व्यापार विविधीकरण रणनीति के तहत दक्षिण अमेरिका पर विशेष ध्यान दे रहा है। इस क्रम में चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील को महत्वपूर्ण निर्यात बाजार के रूप में देखा जा रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल 24 से 28 अगस्त तक इन देशों की यात्रा करेंगे।</p><p>एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। अग्रवाल अर्जेंटीना और ब्राजील में संयुक्त व्यापार बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जबकि चिली के साथ प्रस्तावित वृहद व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत और चिली के बीच व्यापार समझौते को व्यापक बनाने की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है।</p><p>दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दे अभी लंबित हैं, जिनमें बाजार पहुंच और महत्वपूर्ण खनिज प्रमुख हैं। भारत और चिली ने 2006 में तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) लागू किया था और अब इसे वृहद आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) में बदलने की दिशा में बातचीत चल रही है। प्रस्तावित सीईपीए में डिजिटल सेवाओं, निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को शामिल करने की संभावना है।</p><p>चिली लातिनी अमेरिकी क्षेत्र में भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच अब तक चार दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसका अंतिम दौर दिसंबर, 2025 में नयी दिल्ली में हुआ था। इस बीच, चिली में दिसंबर, 2025 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद सरकार बदल गई है।</p><p>जोस एंतोनियो कास्त के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 11 मार्च, 2026 को कार्यभार संभाला। इसके बाद अभी तक औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों के अनुसार, नयी चिली सरकार समझौते को लेकर इच्छुक है और दोनों पक्ष लंबित मुद्दों का समाधान तलाश रहे हैं।</p><p>अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ बातचीत में भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। मर्कोसुर में ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं। भारत-मर्कोसुर पीटीए एक जून, 2009 से लागू है और इसमें करीब 450 शुल्क लाइन ही शामिल हैं।</p><p>दोनों पक्ष अब इसके दायरे को व्यापक बनाने पर विचार कर रहे हैं। भारत और मर्कोसुर के बीच नए सिरे से बातचीत शुरू करने के लिए शर्तों को अंतिम रूप देने पर चर्चा जारी है। वाणिज्य सचिव की यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।</p><p>भारत के लिए अर्जेंटीना और ब्राजील बड़े बाजार हैं और इन देशों में भारतीय मूल के लोगों की भी अच्छी संख्या है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के विकल्प भी तलाश रहे हैं, जिससे भारत के लिए व्यापारिक अवसर बढ़ सकते हैं। भारत और ब्राजील के बीच बातचीत में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चल रहा चीनी विवाद भी उठ सकता है।</p><p>ब्राजील ने भारत की गन्ना उत्पादकों को दी जाने वाली घरेलू सहायता और चीनी निर्यात से जुड़ी कुछ नीतियों पर सवाल उठाए हैं। भारत ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए कहा है कि उसकी चीनी संबंधी नीतियां डब्ल्यूटीओ के तहत उसकी प्रतिबद्धताओं और अधिकारों के अनुरूप हैं। भारत और अर्जेंटीना के बीच 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 25.5 प्रतिशत बढ़कर 5.96 अरब डॉलर हो गया।</p><p>इसमें भारत का निर्यात 1.01 अरब डॉलर और आयात 4.95 अरब डॉलर रहा। भारत और ब्राजील के बीच व्यापार 23.48 प्रतिशत बढ़कर 15 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात करीब सात अरब डॉलर और आयात आठ अरब डॉलर रहा।</p><p>वहीं, भारत-चिली द्विपक्षीय व्यापार में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। 2025-26 में यह 66.45 प्रतिशत बढ़कर 6.25 अरब डॉलर हो गया। भारत ने चिली को 1.22 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 5.03 अरब डॉलर का आयात किया।</p><p>कुल मिलाकर, दक्षिण अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना भारत की नए बाजारों की तलाश, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 11:02:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/commerce-secretary-rajesh-agrawal-visits-south-america-for-trade-talks</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mahindra Scorpio Lifestyler पिकअप से वैश्विक निर्यात बढ़ाएगी कंपनी, नए बाजारों की तलाश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/mahindra-scorpio-lifestyler-pickup-global-launch-and-export-strategy]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घरेलू वाहन विनिर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) अपने नए पिकअप वाहन ‘स्कॉर्पियो लाइफस्टाइलर’ के जरिये वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी -वाहन एवं कृषि क्षेत्र राजेश जेजुरिकर ने कहा कि इस पिकअप को दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और लातिनी अमेरिका जैसे बाजारों में उतारने की योजना है। कंपनी ने हाल ही में ‘महिंद्रा स्कॉर्पियो लाइफस्टाइलर’ का अनावरण किया है।</p><p>यह वाहन भारत में अप्रैल, 2027 में बाजार में आएगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसे ‘महिंद्रा लाइफस्टाइलर’ नाम से पेश किया जाएगा। जेजुरिकर ने कहा कि लाइफस्टाइलर को वैश्विक बाजारों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और यह कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और लातिनी अमेरिका के अलावा दक्षिण-पूर्व एशियाई (आसियान) बाजारों में भी इस वाहन के लिए संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।</p><p>उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल इंडोनेशिया को छोड़कर आसियान क्षेत्र के अन्य बाजारों में मौजूद नहीं है। ऐसे में नए उत्पादों के साथ इन बाजारों में प्रवेश करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। महिंद्रा की वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के वाहन कारोबार का निर्यात 41,030 इकाई पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 34,709 वाहन के मुकाबले 18.2 प्रतिशत अधिक है।</p><p>कंपनी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे बाजारों में अपने एसयूवी मॉडल निर्यात करती है। जेजुरिकर के मुताबिक, लाइफस्टाइलर की भारत में भी अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से पांच वर्षों में ऐसे भारतीय ग्राहकों की संख्या बढ़ी है जो यात्रा, कैंपिंग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों के लिए अपने साथ जरूरी सामान ले जाना पसंद करते हैं।</p><p>ऐसे ग्राहकों के लिए लाइफस्टाइलर एक उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कॉफी बागान के मालिक से लेकर दोस्तों और परिवार के साथ ‘कैंपिंग’ पर जाने वाले लोगों तक, इस तरह के वाहन के लिए नए ग्राहक वर्ग उभर रहे हैं। महिंद्रा के इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है।</p><p>जेजुरिकर ने बताया कि पिछले 16-17 महीनों में कंपनी की कुल एसयूवी बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग शून्य से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई है। इस वृद्धि में बीई 6, एक्सईवी 9ई और एक्सईवी 9एस जैसे मॉडलों की अहम भूमिका रही है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 10:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/mahindra-scorpio-lifestyler-pickup-global-launch-and-export-strategy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NITI Aayog Report: देश में 8.7 करोड़ युवा पढ़ाई और रोजगार से हैं दूर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/niti-aayog-skill-development-report-on-unemployed-indian-youth]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने और स्थानीय जरूरतों तथा उभरते क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया है।</p><p>नीति आयोग ने ‘विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नयी कल्पना’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा कि यह अनुमान वर्ष 2021 में किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (78वें दौर) के आंकड़ों पर आधारित है। आयोग ने देश के कार्यबल और शिक्षार्थियों को बेहतर प्रभाव के लिए पांच वर्गों में बांटा है। इनमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक एवं अनौपचारिक तथा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवाओं का वर्ग और महिलाएं शामिल हैं।</p><p>नीति आयोग ने कहा, ‘‘शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवा आय के अभाव और पहले की शिक्षा पर हुए खर्च के कारण कई चुनौतियों का सामना करते हैं। विद्यार्थी अक्सर अपनी मौजूदा आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ शुल्क आधारित कौशल प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाते हैं।’’
रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवाओं और महिलाओं के लिए किफायती या सब्सिडी वाले प्रशिक्षण विकल्पों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। इसमें कहा गया कि खासकर कम आय वाले परिवारों के विद्यार्थी पहले ही कॉलेज के शुल्क और कई मामलों में निजी ट्यूशन के खर्च से दबाव में रहते हैं।</p><p>ऐसे में पारंपरिक डिग्री के साथ अतिरिक्त शुल्क आधारित कौशल प्रशिक्षण में निवेश करना कई लोगों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पाता। आयोग ने कहा कि इसके कारण कई विद्यार्थी स्नातक के बाद परिवार की आर्थिक मदद के लिए स्थायी आय वाले किसी भी रोजगार को चुन लेते हैं, भले ही वहां वेतन कम हो। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्नातक करने वाले केवल 8.25 प्रतिशत लोग ही अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर रहे हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 18:32:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/niti-aayog-skill-development-report-on-unemployed-indian-youth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/niti-aayog-skill-development-report-on-unemployed-indian-youth_large_20260822183225329_0d2f3b5_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Delhi Master Plan 2047: टीओडी क्षेत्र के पट्टा भूखंड होंगे फ्रीहोल्ड, DDA ने तय किए नियम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/delhi-master-plan-2047-tod-leasehold-plots-to-become-freehold]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (टीओडी) के अंतर्गत आने वाले व्यक्तिगत भूखंडों को फ्रीहोल्ड में बदला जा सकेगा। इस पहल का मकसद निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने सहित अन्य लक्ष्यों को हासिल करना है। ‘फ्रीहोल्ड’ दर्जा मिलने के बाद संबंधित जमीन और उस पर बने ढांचे का पूर्ण तथा स्थायी स्वामित्व मालिक के पास होगा।</p><p>वहीं, पट्टा व्यवस्था में जमीन का स्वामित्व दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) जैसी सरकारी संस्था के पास रहता है और पट्टाधारक को केवल उसके इस्तेमाल का अधिकार मिलता है। मास्टर प्लान के अनुसार, पूरे टीओडी क्षेत्र को विकास क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिससे इस गलियारे में परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी। दिल्ली मास्टर प्लान -2047 में कहा गया, ‘‘समेकित टीओडी भूखंड का हिस्सा पट्टे के आधार रहने वाले व्यक्तिगत भूखंड सभी बकाया राशि के भुगतान और मंजूरी की शर्त पर फ्रीहोल्ड माने जाएंगे।</p><p>हालांकि, पट्टे पर दिए गए संस्थागत भूखंडों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।’’
मास्टर प्लान के अनुसार, टीओडी परियोजनाओं की मंजूरी और भवन योजनाओं को स्वीकृति डीडीए नोडल एजेंसी देंगी। दिल्ली में वर्तमान में कई संपत्तियां पट्टा व्यवस्था के तहत हैं, जिसमें जमीन का स्वामित्व डीडीए के पास रहता है। लेकिन दिल्ली मास्टर प्लान-2047 पट्टा व्यवस्था से मुक्त होकर फ्रीहोल्ड स्वामित्व का रास्ता तैयार करता है।</p><p>डीडीए ने शनिवार को जारी बयान में कहा, ‘‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को अधिसूचित कर उनका विकास सीधे डीडीए करेगा। नए शहरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर पड़ोस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पार्क, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 18:02:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/delhi-master-plan-2047-tod-leasehold-plots-to-become-freehold</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/delhi-master-plan-2047-tod-leasehold-plots-to-become-freehold_large_20260822180223422_5e340cc_.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[UP में डीलरों के लिए Sugar भंडारण सीमा तय, जमाखोरी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/cm-yogi-assures-sufficient-sugar-stock-in-uttar-pradesh]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाया कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है इसलिए लोगों को इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार, योगी ने कहा कि प्रदेश की चीनी मिलों में वर्तमान में 179.38 लाख कुंतल चीनी का भंडार उपलब्ध है।</p><p>उन्होंने बताया कि चीनी मिलों ने जून और जुलाई में 235 लाख कुंतल चीनी की बिक्री की है। मुख्यमंत्री ने एक समीक्षा बैठक में कहा कि सहकारी चीनी मिलों में 23.60 लाख कुंतल, निगम की चीनी मिलों में 5.28 लाख कुंतल और निजी चीनी मिलों में 150.50 लाख कुंतल चीनी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जून और जुलाई में चीनी मिलों द्वारा बेची गई 235 लाख कुंतल चीनी में से अधिकांश अभी भी खुले बाजार में उपलब्ध है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/yogi-adityanath-directs-strict-measures-for-ncr-air-pollution-and-stubble-management" target="_blank" rel="noopener">NCR Air Pollution पर CM Yogi Adityanath सख्त, पराली प्रबंधन के निर्देश</a></h3><p>आवश्यकता पड़ने पर चीनी मिलों का संचालन 15 अक्टूबर से शुरू किया जाए। योगी ने लोगों से अपील की कि चीनी की कमी की बात कहकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को चीनी की कालाबाजारी करने और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/yogi-adityanath-highlights-buddhist-tourism-at-up-japan-investment-summit" target="_blank" rel="noopener">Yogi Adityanath बोले, बौद्ध पर्यटन बनेगा UP और Japan के मजबूत संबंधों का आधार</a></h3><p>मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी डीलर 30 दिन से अधिक का चीनी भंडार नहीं रख सकेगा और एक समय में 400 टन से अधिक चीनी का भंडारण भी नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रति माह 10 मीट्रिक टन चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता भी 15 दिन से अधिक का भंडार नहीं रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि चीनी मिलें भी अपने मासिक कोटे के तहत बेची गई चीनी को बिक्री की तारीख से सात दिन से अधिक समय तक गोदाम में नहीं रखेंगी।</p><p>मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले की सभी पंजीकृत चीनी मिलों तथा थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और उपलब्ध भंडार की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्राप्त की जाए। उन्होंने निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडारण करने या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही जिलों में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार निगरानी रखने को कहा।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/japan-semiconductor-team-to-visit-uttar-pradesh-for-tech-investment" target="_blank" rel="noopener">UP में Semiconductor निवेश को बढ़ावा देगी जापानी टीम, CM Yogi से मिले राजदूत Ono</a></h3><p>योगी ने कहा कि चीनी की कृत्रिम कमी पैदा करने या कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी की स्थिति में इसकी जानकारी तत्काल शासन को दी जाए। बयान के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि पेराई सत्र 2026-27 में 28.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होने का अनुमान है। इससे करीब 90 लाख टन चीनी के उत्पादन की संभावना है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:57:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/cm-yogi-assures-sufficient-sugar-stock-in-uttar-pradesh</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/cm-yogi-assures-sufficient_large_20260822165718067_be9e813_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ladakh Airports: थॉइस और कारगिल से शुरू होंगी नागरिक उड़ानें, एलजी ने की समीक्षा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/ladakh-lg-reviews-thoise-and-kargil-commercial-flight-preparations]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हवाई संपर्क के विस्तार के मद्देनजर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नुब्रा घाटी स्थित थॉइस हवाई अड्डे और कारगिल हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ान परिचालन शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा की। लोक भवन के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि सक्सेना ने नयी दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायुसेना, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और लद्दाख प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि बैठक में थॉइस और कारगिल हवाई अड्डों से नागरिक उड़ानों का परिचालन शुरू करने के लिए बुनियादी ढांचे, नियामकीय और संचालन संबंधी मुद्दों को दूर करने पर चर्चा की गई।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/former-generals-support-army-after-ladakh-gen-z-tourist-video-goes-viral" target="_blank" rel="noopener">Ladakh विवाद: सुरक्षाकर्मियों के समर्थन में आए VK Singh और पूर्व सैन्य अधिकारी</a></h3><p>प्रवक्ता ने कहा कि ये दोनों हवाई अड्डे रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं तथा यहां से नागरिक उड़ानें शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलेगा। बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने दोनों हवाई अड्डों में समयबद्ध तरीके से परिचालन शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थॉइस और कारगिल से उड़ान सेवाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेहतर क्षेत्रीय संपर्क और लद्दाख के समावेशी विकास के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएंगी।</p><p>उन्होंने कहा कि इससे कारगिल, द्रास, तुरतुक और सियाचिन आधार शिविर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन की अपार संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रवक्ता के अनुसार बैठक में भारतीय वायुसेना ने नुब्रा में नए नागरिक टर्मिनल के निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित करने को मंजूरी दी। वहीं, रनवे के पुनर्निर्माण का काम नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/ladakh-to-get-jammu-kashmir-high-court-bench-says-amit-shah" target="_blank" rel="noopener">Ladakh में High Court पीठ की होगी स्थापना, अमित शाह बोले- दूर-दराज तक पहुंचेगा न्याय</a></h3><p>उन्होंने बताया कि थॉइस हवाई अड्डे पर पुराने चार्टर्ड उड़ान टर्मिनल का नवीनीकरण करने के बाद दिसंबर से नागरिक उड़ान सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कारगिल हवाई अड्डे के संबंध में निर्णय लिया गया कि एक सितंबर को उपराज्यपाल की मौजूदगी में भारतीय वायुसेना, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संयुक्त टीम हवाई अड्डे का निरीक्षण करेगी, ताकि नागरिक उड़ानों के संचालन की तैयारियों का आकलन किया जा सके।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:57:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/ladakh-lg-reviews-thoise-and-kargil-commercial-flight-preparations</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/ladakh-lg-reviews-thoise_large_20260822165712360_c3a6839_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Karnataka में Analog Paneer के उत्पादन और बिक्री पर एक साल का बैन लगा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/karnataka-bans-analog-paneer-production-and-sale-for-one-year]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>कर्नाटक सरकार ने जन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनजर ‘एनालॉग’ पनीर (गैर डेयरी) की बिक्री, उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त श्रीनिवास के. ने बयान में कहा, ‘‘विभाग ने 17 अगस्त को अधिसूचना जारी कर राज्य में एनालॉग/गैर-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण, आपूर्ति, थोक और खुदरा बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया है।’’ अधिकारियों के अनुसार, ‘एनालॉग’ पनीर दूध से तैयार किए जाने वाले सामान्य पनीर का विकल्प है, जिसे दूध के बजाए वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल कर बनाया जाता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/karnataka-ias-officer-gyanendra-kumar-gangwar-missing-kempegowda-airport" target="_blank" rel="noopener">Karnataka IAS Officer ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार लापता, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मिली आखिरी लोकेशन</a></h3><p>उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों को उपभोक्ताओं के सामने ‘पनीर’ के रूप में लेबल नहीं किया जा सकता, न ही उनका विपणन या बिक्री इस नाम से की जा सकती है। विभाग ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) नियम, 2011 के तहत पनीर एक मानकीकृत खाद्य उत्पाद है, जिसे दूध से तैयार किया जाता है। पनीर में दूध की वसा एक प्रमुख घटक होती है और उसकी जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल मान्य नहीं है।</p><p>विभाग ने कहा कि कर्नाटक में पनीर के कई नमूनों की जांच की गई और उनमें मिलावट नहीं पाई गई। हालांकि, जन स्वास्थ्य के हित में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। यह आदेश फ्रोजन मिठाई, प्रोसेस्ड चीज और मिश्रित वसा स्प्रेड जैसे मानकीकृत खाद्य उत्पादों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि इनके लिए अलग-अलग मानक पहले से तय हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/bombay-high-court-denies-relief-to-thane-restaurant-over-analog-paneer" target="_blank" rel="noopener">Bombay High Court ने Analog Paneer परोसने वाले ठाणे के होटल को राहत देने से किया इनकार</a></h3><p>विभाग ने खाद्य कारोबारियों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी खाद्य उत्पाद या व्यंजन की तैयारी में एनालॉग/गैर-डेयरी पनीर का इस्तेमाल, भंडारण, आपूर्ति या बिक्री नहीं करें।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/karnataka-bans-analog-paneer-production-and-sale-for-one-year</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/karnataka-bans-analog-paneer_large_20260822160601033_dc04215_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump ने कनाडा पर 50% Import Duty लगाई, ओटावा भी करेगा जवाबी कार्रवाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/us-imposes-fifty-percent-tariff-on-canadian-goods-as-canada-retaliates]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिका ने कनाडा के 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर शनिवार को 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया। इसके जवाब में कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई करने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने के लिए आखिरी समय में हुईं बातचीत के विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है।</p><p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए इन आयात शुल्कों का असर कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामानों के लगभग पांच प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक बयान में कहा, कनाडा अपने कामगारों और व्यवसायों की रक्षा के लिए उन शुल्कों का डॉलर के मुकाबले डॉलर से जवाब देगा। कनाडा की जवाबी कार्रवाई से व्यापार संघर्ष और बढ़ गया है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/edmonton-gurdwara-screwdriver-attack-in-canada-two-injured" target="_blank" rel="noopener">Canada के Edmonton Gurdwara में पेचकस से हमला, ग्रंथी समेत दो लोग घायल</a></h3><p>इससे अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह समझौता तीनों देशों के उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि कनाडा ने इस्पात, एल्युमीनियम, ऑटो और लकड़ी (लंबर) पर अमेरिकी शुल्कों में छूट की मांग की थी, जिसे देने के लिए अमेरिका तैयार नहीं था।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/us-to-impose-50-percent-tariff-on-canada-imports-worth-20-billion-dollars" target="_blank" rel="noopener">US लगाएगा Canada के उत्पादों पर 50% Tariff, 20 अरब डॉलर के आयात पर होगा असर</a></h3><p>अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने आधी रात से कुछ समय पहले संवाददाताओं से बातचीत के दौरान एक बयान पढ़ते हुए कहा,, ‘‘इस सप्ताह की शुरुआत में जिन शर्तों पर सहमति बनी थी, कनाडा ने उनके आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से आज रात इनकार कर दिया। ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने कनाडा को अपने बाजार में प्रमुख निर्यातक देशों के बीच सबसे अनुकूल शर्तें देने की पेशकश की थी, लेकिन कनाडा ने बाद में नई मांगें रख दीं और पहले की कुछ प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया। इससे पिछले कुछ दिनों में बनी सहमति का संतुलन बिगड़ गया।</p><p>कार्नी ने बातचीत विफल होने के लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्रस्तावित शर्तों में अंतिम समय में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदायक थे तथा उन्होंने किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। कार्नी ने कहा कि उन्होंने बातचीत निलंबित कर दी है और कनाडाई वार्ता दल को ओटावा लौटने का निर्देश दिया है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/will-donald-trump-reform-us-elections-using-the-sir-model" target="_blank" rel="noopener">SIR मॉडल से अमरीकी चुनाव सुधारेंगे डोनाल्ड ट्रंप? क्या भारतीय चुनाव प्रणाली से प्रेरित है 'सेव अमेरिका एक्ट'</a></h3><p>कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार आने वाले दिनों में कनाडाई कामगारों और व्यवसायों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा करेगी। ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव दूरदर्शी था और इसमें एक ऐतिहासिक आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारी शामिल थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/us-imposes-fifty-percent-tariff-on-canadian-goods-as-canada-retaliates</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/us-imposes-fifty-percent_large_20260822155602146_fb1a569_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[MPPMCL और UPPCL में Power Banking का करार, 2000 MW सौर ऊर्जा खरीदेंगे दोनों राज्य]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/madhya-pradesh-and-uttar-pradesh-sign-power-banking-agreement]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश ने मौसम के हिसाब से बिजली की मांग में होने वाले अंतर को देखते हुए इसकी खरीद, आपूर्ति की व्यवस्था और मध्यम अवधि में बिजली बैंकिंग व्यवस्था तलाशने के लिए एक समझौता किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के बीच यह समझौता शुक्रवार को लखनऊ में हुआ।</p><p>एमपीपीएमसीएल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी पंकज स्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि समझौते के दौरान मध्यप्रदेश के ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन आशीष कुमार गोयल मौजूद थे। स्वामी ने बताया कि मध्यप्रदेश में अक्टूबर से मार्च तक रबी मौसम के दौरान, मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में खपत के कारण बिजली की मांग चरम पर रहती है जबकि उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर के बीच खरीफ और गर्मी के महीनों में मांग अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बिजली की मांग के अलग-अलग स्वरूप के कारण उत्पादन क्षमता का अधिक प्रभावी ढंग से साझा उपयोग किया जा सकता है और बिजली खरीद की लागत कम की जा सकती है।</p><p>समझौते के तहत दोनों राज्यों ने प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से 2,000 मेगावाट की एकीकृत सौर ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्षमता की खरीद की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से बिजली संसाधनों के कुशल साझा उपयोग, परिसंपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और दीर्घकालिक बिजली संसाधन उपलब्धता की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि इस पहल से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।</p><p>इससे बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा होंगे। दोनों राज्यों ने संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, ग्रिड में लचीलापन और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने तथा महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से मध्यम अवधि की सुनिश्चित बिजली बैंकिंग व्यवस्था तलाशने पर भी सहमति जताई है। स्वामी ने बताया कि समझौते पर एमपीपीएमसीएल के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जी. एस. खानूजा और यूपीपीसीएल के निदेशक (योजना) दीपक रायजादा ने हस्ताक्षर किए।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/madhya-pradesh-and-uttar-pradesh-sign-power-banking-agreement</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/madhya-pradesh-and-uttar_large_20260822155606614_91791a4_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PropTiger Report: Housing Sales में 6 प्रतिशत गिरावट, 8 बड़े शहरों में सुस्ती]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/housing-sales-fall-six-percent-in-eight-major-cities-proptiger]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच खरीदारों के सतर्क रुख के कारण देश के आठ प्रमुख शहरों में मकानों की बिक्री चालू कैलेंडर वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में छह प्रतिशत घटकर 91,729 इकाई रह गई। रियल एस्टेट परामर्श कंपनी प्रॉपटाइगर ने यह जानकारी दी। पिछले साल की इसी तिमाही में 97,674 मकानों की बिक्री हुई थी।</p><p>सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनी ऑरम प्रॉपटेक लिमिटेड की आवासीय संपत्ति कारोबार इकाई प्रॉपटाइगर ने आठ प्रमुख शहरों के आवासीय बाजार पर अपनी रिपोर्ट ‘रियल इनसाइट’ जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद में मकानों की बिक्री घटी। वहीं चेन्नई और हैदराबाद में बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p><p>परामर्श कंपनी ने बिक्री में गिरावट के लिए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रोजगार पर कृत्रिम मेधा (एआई) के संभावित प्रभाव के बीच संभावित मकान खरीदारों के सतर्क रुख को जिम्मेदार ठहराया। आंकड़ों के अनुसार, एमएमआर में मकानों की बिक्री अप्रैल-जून तिमाही में सात प्रतिशत घटकर 24,112 इकाई रह गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 25,939 इकाई थी। दिल्ली-एनसीआर में बिक्री सात प्रतिशत घटकर 9,352 इकाई रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 10,051 इकाई थी।</p><p>पुणे में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 21 प्रतिशत घटकर 12,642 इकाई रह गई। पिछले साल अप्रैल-जून में यहां 15,962 इकाइयों की बिक्री हुई थी। बेंगलुरु में बिक्री नौ प्रतिशत घटकर 14,186 इकाई रही, जो पिछले साल 15,628 इकाई थी।</p><p>अहमदाबाद में बिक्री 20 प्रतिशत घटकर 7,541 इकाई रह गई, जो एक साल पहले 9,451 इकाई थी। कोलकाता में भी बिक्री नौ प्रतिशत घटकर 3,517 इकाई रह गई, जो पिछले साल 3,847 इकाई थी। प्रॉपटाइगर डॉट कॉम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रकाश तेजवानी ने कहा, ‘‘2026 की दूसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि भारत का आवासीय बाजार कमजोर नहीं हो रहा है, बल्कि परिपक्व हो रहा है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:17:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/housing-sales-fall-six-percent-in-eight-major-cities-proptiger</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/housing-sales-fall-six_large_20260822151802164_468069a_24.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[₹7,000 crore का मेगा प्लान: PNGRB ने GAIL की 1,800 किमी लंबी LPG Pipeline को दी मंजूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/pngrb-approves-gail-7000-crore-lpg-pipeline-expansion]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>तेल क्षेत्र के नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी नई एलपीजी पाइपलाइनों के विकास को मंजूरी दे दी है। इससे देश के कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग एक-चौथाई का विस्तार होगा। इस पहल का मकसद ईंधन आपूर्ति को अधिक लचीला बनाना और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना है।
 पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने एक बयान में कहा कि उसने तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।</p><p>
 सरकारी कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं से पीएनजीआरबी द्वारा अधिकृत कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क लगभग 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा, जो लगभग 23.5 प्रतिशत की वृद्धि है।
 यह विस्तार ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत आयातित एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर है, जिसकी थोक आपूर्ति तटीय आयात टर्मिनलों पर पहुंचती है और फिर देश भर के उपभोग केंद्रों तक पहुंचाई जाती है। </p><p>एक बड़े पाइपलाइन नेटवर्क से देश के भीतरी इलाकों में एलपीजी पहुंचाने की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।
 मंजूरी दी गई तीन नई परियोजनाएं हैं- चेर्लापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र) तक 556 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, झांसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड) तक 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, और शिकारपुर (महाराष्ट्र) से गोवा और हुबली (कर्नाटक) तक 633 किलोमीटर लंबी लाइन।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:44:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/pngrb-approves-gail-7000-crore-lpg-pipeline-expansion</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/lpg-pipeline-expansion_large_1445_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[India-Mauritius Partnership: अगले 5 साल तक Indian Oil करेगा मॉरीशस की फ्यूल डिमांड पूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/indian-oils-strategic-5-year-supply-agreement-explained]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत और मॉरीशस ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच साल के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
 इस समझौते के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) मॉरीशस की पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की आयात जरूरत को पूरा करेगा।
 इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्रमुख ऊर्जा सुरक्षा साझेदार के रूप में भूमिका मजबूत होगी।
 पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 20-21 अगस्त को मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा के दौरान इस समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। </p><p>इसके साथ ही दोनों देशों की सरकारों के बीच तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हुआ। इसमें पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण और जैव ईंधन के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
 एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आईओसी और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच हुआ दीर्घकालिक बिक्री एवं खरीद समझौता मॉरीशस को ईंधन की सुनिश्चित आपूर्ति उपलब्ध कराएगा और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करेगा।
 बयान में कहा गया कि हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के बाहर किसी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी द्वारा किया गया यह पहला दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता है।
</p><p> समझौते के तहत आईओसी मॉरीशस की पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की पूरी आयात जरूरत पूरी करेगी।
 अलग से आईओसी ने बताया कि मॉरीशस के मेर रूज में एमएपी लैंड स्थित 27,500 टन क्षमता वाली समुद्री ईंधन भंडारण सुविधा का निर्माण 2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश से किया गया है। इससे मॉरीशस की समुद्री ईंधन आपूर्ति क्षमता बढ़ने और उसे रणनीतिक समुद्री ईंधन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
 यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक ईंधन बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधानों के बीच देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। </p><p>पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी अस्थिरता ने भी ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के महत्व को बढ़ाया है।
 भारत एक प्रमुख तेल शोधन केंद्र के रूप में उभरा है। देश की 23 रिफाइनरियों से हर साल करीब 26.7 करोड़ टन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन होता है और भारत परिष्कृत ईंधन का शुद्ध निर्यातक है।</p><p> भारत पहले से ही पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है और क्षेत्र के अन्य देशों सहित विभिन्न बाजारों में भी बड़ी मात्रा में ईंधन का निर्यात करता है।
 मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान भी भारत ने नेपाल और भूटान को आपूर्ति की अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करना जारी रखा, जो क्षेत्र के लिए एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में उसकी स्थिति को दर्शाता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 14:37:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/indian-oils-strategic-5-year-supply-agreement-explained</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/india-mauritius-partnership_large_1437_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[IOC Mauritius को करेगा 5 साल तक पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति, दोनों देशों में हुआ समझौता]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/india-and-mauritius-sign-five-year-fuel-supply-agreement-with-ioc]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत और मॉरीशस ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच साल के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) मॉरीशस की पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की आयात जरूरत को पूरा करेगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्रमुख ऊर्जा सुरक्षा साझेदार के रूप में भूमिका मजबूत होगी।</p><p>पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 20-21 अगस्त को मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा के दौरान इस समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही दोनों देशों की सरकारों के बीच तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हुआ। इसमें पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण और जैव ईंधन के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।</p><p>एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आईओसी और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच हुआ दीर्घकालिक बिक्री एवं खरीद समझौता मॉरीशस को ईंधन की सुनिश्चित आपूर्ति उपलब्ध कराएगा और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करेगा। बयान में कहा गया कि हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के बाहर किसी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी द्वारा किया गया यह पहला दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता है। समझौते के तहत आईओसी मॉरीशस की पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की पूरी आयात जरूरत पूरी करेगी।</p><p>अलग से आईओसी ने बताया कि मॉरीशस के मेर रूज में एमएपी लैंड स्थित 27,500 टन क्षमता वाली समुद्री ईंधन भंडारण सुविधा का निर्माण 2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश से किया गया है। इससे मॉरीशस की समुद्री ईंधन आपूर्ति क्षमता बढ़ने और उसे रणनीतिक समुद्री ईंधन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक ईंधन बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधानों के बीच देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।</p><p>पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी अस्थिरता ने भी ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के महत्व को बढ़ाया है। भारत एक प्रमुख तेल शोधन केंद्र के रूप में उभरा है। देश की 23 रिफाइनरियों से हर साल करीब 26.7 करोड़ टन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन होता है और भारत परिष्कृत ईंधन का शुद्ध निर्यातक है।</p><p>भारत पहले से ही पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है और क्षेत्र के अन्य देशों सहित विभिन्न बाजारों में भी बड़ी मात्रा में ईंधन का निर्यात करता है। मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान भी भारत ने नेपाल और भूटान को आपूर्ति की अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करना जारी रखा, जो क्षेत्र के लिए एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में उसकी स्थिति को दर्शाता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/india-and-mauritius-sign-five-year-fuel-supply-agreement-with-ioc</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US लगाएगा Canada के उत्पादों पर 50% Tariff, 20 अरब डॉलर के आयात पर होगा असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/us-to-impose-50-percent-tariff-on-canada-imports-worth-20-billion-dollars]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिका कनाडा के साथ बातचीत के असफल रहने के मद्देनजर उससे आयात किए जाने वाले 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर शनिवार को 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी में है। ऐतिहासिक रूप से करीबी सहयोगी रहे दोनों देशों के पहले से तनावपूर्ण संबंधों में इस घटनाक्रम से और खटास आने की संभावना है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने आधी रात से कुछ समय पहले पत्रकारों के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एक बयान पढ़ते हुए कहा, ‘‘इस सप्ताह की शुरुआत में जिन शर्तों पर सहमति बनी थी, कनाडा ने उनके आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से आज रात इनकार कर दिया।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/edmonton-gurdwara-attack-suspect-arrested-after-injuring-two-in-canada" target="_blank" rel="noopener">Edmonton Gurdwara Attack: कनाडा में अरदास के दौरान पेचकस से हमला, 2 लोग घायल और आरोपी गिरफ्तार</a></h3><p>अमेरिका ने कनाडा को अपने बाजार में अन्य बड़े निर्यातकों के मुकाबले सबसे बेहतर व्यापारिक सुविधाएं देने की पेशकश की थी लेकिन कनाडा ने नयी मांगें रख दीं और कुछ पुरानी प्रतिबद्धताओं से भी पीछे हट गया। इससे पिछले कुछ दिनों में बनी सहमति का संतुलन बिगड़ गया।’’ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसके जवाब में कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से प्रस्तावित शर्तों में अंतिम समय में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक हैं तथा इससे किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले आयात शुल्क का असर कनाडा से हर साल अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान के करीब पांच प्रतिशत पर पड़ेगा। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर ‘टंग डिप्रेसर’ (गला जांचने के लिए जीभ दबाने में इस्तेमाल की जाने वाली पट्टी) तक शामिल हैं।</p><p>हालांकि, इसका राजनीतिक असर आर्थिक प्रभाव से कहीं अधिक होने की संभावना है। दोनों देशों ने पिछले साल एक-दूसरे के साथ 880 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार किया था। ये शुल्क पहले बुधवार को रात 12 बजकर एक मिनट से लागू होने थे लेकिन ट्रंप ने बातचीत जारी रखने के लिए समयसीमा तीन दिन बढ़ा दी थी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/indian-national-jay-goswami-arrested-in-us-elder-fraud-case" target="_blank" rel="noopener">US Fraud: बुजुर्गों से 75 लाख डॉलर ठगने का आरोपी Jay Goswami गिरफ्तार</a></h3><p>इसके बावजूद दोनों देश तय समय के भीतर किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 10:47:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/us-to-impose-50-percent-tariff-on-canada-imports-worth-20-billion-dollars</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/prabhasakshi-image_large_111323_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Paytm ने Vijay Shekhar Sharma का वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, 4 साल से नहीं हुआ था बदलाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/paytm-board-proposes-salary-revision-for-ceo-vijay-shekhar-sharma]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मोबाइल भुगतान क्षेत्र की अग्रणी कंपनी पेटीएम की मूल कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के निदेशक मंडल ने अपने संस्थापक विजय शेखर शर्मा के वेतन में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। एक स्वतंत्र अध्ययन में पाया गया था कि समान पदों की तुलना में शर्मा का मौजूदा पारिश्रमिक काफी कम है, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में फिर से नियुक्ति के बाद 19 अगस्त 2022 से शर्मा के मूल पारिश्रमिक में कोई बदलाव नहीं हुआ।</p><p>कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के नोटिस में यह भी कहा गया कि शर्मा ने स्वेच्छा से अपने पारिश्रमिक को अपरिवर्तित रखने का अनुरोध किया था। शर्मा ने वित्त वर्ष 2025-26 में अनुलाभों सहित कुल 4.33 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक प्राप्त किया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 4.5 करोड़ रुपये से कम था। इसके अलावा, उन्होंने 2025 में अपने 2.10 करोड़ ईएसओपी (कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना) को भी स्वेच्छा से छोड़ दिया था और वर्तमान में कंपनी में उनके पास कोई ईएसओपी नहीं है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/sports/brazil-football-tour-india-huge-opportunity-says-im-vijayan" target="_blank" rel="noopener">Brazil टीम का भारत दौरा युवा खिलाड़ियों के लिए यादगार बनेगा: IM Vijayan</a></h3><p>शर्मा का प्रस्तावित पारिश्रमिक कुछ अन्य समकक्ष सूचीबद्ध फिनटेक कंपनियों की तुलना में काफी कम है। ग्रो के सह-संस्थापक और प्रमुख ललित केशरे ने वित्त वर्ष 2024-25 में एकमुश्त प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन सहित कुल 188 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त किया था, जबकि पाइन लैब्स के सीईओ अमरीश राउ को वित्त वर्ष 2024-25 में 9.5 करोड़ रुपये का कुल वेतन मिला और नवंबर 2025 में कंपनी के आईपीओ से कुछ दिन पहले उन्हें 243 करोड़ रुपये के शेयर विकल्प आवंटित किए गए थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 09:54:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/paytm-board-proposes-salary-revision-for-ceo-vijay-shekhar-sharma</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/paytm-board-proposes-salary_large_20260822095409910_d6f0b08_15.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jindal Steel और IIT Hyderabad के बीच समझौता, संस्थान में बनेगा उत्कृष्टता केंद्र]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/jindal-steel-partners-with-iit-hyderabad-for-advanced-steel-solutions]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>जिंदल स्टील और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद ने बुनियादी ढांचे, इंजीनियरिंग, निर्माण और रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में उन्नत इस्पात समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है। इस्पात कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इस साझेदारी के तहत आईआईटी हैदराबाद में उच्च क्षमता, मूल्यवर्धित और लागत-दक्षता वाले इस्पात उत्पादों एवं समाधानों के लिए जिंदल स्टील उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि यह केंद्र उन्नत इस्पात ग्रेड के इस्तेमाल की संभावनाओं की पहचान करने और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए डिजाइनरों, सलाहकारों, इंजीनियरों, ईपीसी कंपनियों और उपकरण विनिर्माताओं के साथ काम करेगा।</p><p>जिंदल स्टील के प्रबंध निदेशक वी. आर. शर्मा ने कहा कि आईआईटी हैदराबाद के साथ साझेदारी भारत के बुनियादी ढांचे, इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्रों में उच्च क्षमता और लागत-दक्षता वाले इस्पात के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आईआईटी हैदराबाद की तकनीकी क्षमता और जिंदल स्टील की विनिर्माण, धातुकर्म तथा इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को मिलाकर उत्कृष्टता केंद्र विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत, हल्के, तेज और अधिक दक्ष समाधान विकसित करेगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 09:51:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/jindal-steel-partners-with-iit-hyderabad-for-advanced-steel-solutions</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/22/jindal-steel-partners-with_large_20260822095200899_b67aad6_24.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Haryana में AgriStack पर किसानों का पंजीकरण 24 अगस्त तक पूरा करने के निर्देश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/haryana-cm-directs-farmers-registration-on-agristack-by-august-24]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को सभी जिलों को अगले तीन दिन में किसानों का एग्रीस्टैक मंच पर लक्षित पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया। इसके लिए 24 अगस्त की शाम तक की समयसीमा तय की गई है। उन्होंने उपायुक्तों को राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय करने तथा युद्धस्तर पर पंजीकरण अभियान पूरा कराने के निर्देश दिए।</p><p>एग्रीस्टैक मंच केंद्र सरकार ने किसानों को विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी और प्रभावी तरीके से दिलाने के लिए विकसित किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस मंच पर पंजीकृत किसानों को एक विशिष्ट किसान पहचान पत्र दिया जाएगा। साथ ही, उनके कृषि भूमि के भूखंडों को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा।</p><p>मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह मंच इसलिए शुरू किया है ताकि विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से किसानों तक पहुंचाया जा सके। एग्रीस्टैक के तहत प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट किसान पहचान पत्र दिया जा रहा है और उसकी कृषि भूमि को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर किसी किसान के किसी विशेष खेत में बोई गई फसल का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।</p><p>इसके अलावा गांवों और कृषि भूमि का डिजिटल तथा भौगोलिक मानचित्रण भी किया जा सकेगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 23:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/haryana-cm-directs-farmers-registration-on-agristack-by-august-24</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/Images/prabhasakshi-news-image.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[FDI Policy में बदलाव का असर, सीमा साझा करने वाले देशों के लिए Automatic Route से मिली बड़ी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/impact-of-changes-in-fdi-policy-major-relief-for-bordering-nations-via-the-automatic-route]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में विदेशी निवेश को लेकर नियमों में बदलाव का असर अब दिखने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, संशोधित व्यवस्था के तहत 20 अगस्त तक 29 विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रस्ताव दर्ज किए गए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए देश में कुल 4,895.65 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। निवेश से जुड़े पक्ष मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन द्वीप जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। ये निवेश सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, सूचना एवं संचार सेवाओं, विनिर्माण, दवा, आंकड़ा केंद्र और परिवहन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं।</div><div><br></div><div>मौजूदा जानकारी के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों का सामने आना भारत की विदेशी निवेश व्यवस्था में हालिया बदलाव के बाद हुआ है। सरकार ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश के नियमों में कुछ राहत दी है। अब ऐसे विदेशी निवेशकों को, जिनकी किसी सीमा साझा करने वाले देश से गैर-नियंत्रणकारी लाभकारी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, कुछ शर्तों के साथ स्वत: मार्ग से निवेश करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित क्षेत्र में तय निवेश सीमा, प्रवेश शर्तों और रिपोर्टिंग नियमों का पालन जरूरी है।</div><div><br></div><div>बता दें कि भारत ने अप्रैल 2020 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को कड़ा किया था। उस समय सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश या ऐसे निवेश जिनका लाभकारी मालिकाना हक किसी संबंधित देश में स्थित व्यक्ति या संस्था के पास था, उनके लिए सरकारी मंजूरी जरूरी कर दी गई थी। यह बदलाव उस समय देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच किया गया था।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अब इस व्यवस्था में बदलाव प्रेस नोट-2, 2026 के माध्यम से किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 15 मार्च को यह बदलाव जारी किया था, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े नियमों में जरूरी संशोधन 1 मई को अधिसूचित किए गए।</div><div><br></div><div>सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से निवेशकों को नियमों को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और निवेश प्रक्रिया में लगने वाला समय घटेगा। साथ ही इससे देश में कारोबार करना आसान बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। हालांकि स्वत: मार्ग की सुविधा मिलने के बावजूद निवेशकों को क्षेत्रवार नियमों और अनिवार्य रिपोर्टिंग का पालन करना होगा।</div><div><br></div><div>इस बदलाव के तहत लाभकारी स्वामित्व का आकलन धनशोधन निवारण नियम, 2005 में तय मानकों के अनुरूप करने की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे में सरकार ने निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ निगरानी की व्यवस्था को भी बनाए रखा है। 20 अगस्त तक दर्ज 29 प्रस्ताव इसी बदली हुई व्यवस्था के शुरुआती प्रभाव को दिखाते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 23:20:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/impact-of-changes-in-fdi-policy-major-relief-for-bordering-nations-via-the-automatic-route</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/21/fdi_large_2320_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Welspun Corp का US Business चमका, ₹17,200 करोड़ की Massive Deal से Order Book पहुंची रिकॉर्ड स्तर पर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/welspun-corp-us-business-shines-order-book-hits-record-levels-following-a-massive-?17200-cr-deal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वेलस्पन कॉर्प लिमिटेड के लिए अमेरिका से आई एक बड़ी कारोबारी खबर ने कंपनी की स्थिति और मजबूत कर दी है। कंपनी को अमेरिका स्थित अपनी विनिर्माण इकाई से पाइप की आपूर्ति के लिए 1.8 अरब डॉलर यानी करीब 17,200 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी के इतिहास में यह किसी एक सौदे के तहत मिला अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है।</div><div><br></div><div>कंपनी ने गुरुवार देर रात शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस ऑर्डर की आपूर्ति वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी। हालांकि, वेलस्पन कॉर्प ने ग्राहक का नाम, पाइप की कुल मात्रा या उनकी विशेष किस्म के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।</div><div><br></div><div>इस नए सौदे के बाद कंपनी की वैश्विक ऑर्डर बुक भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, अब यह बढ़कर करीब 4.4 अरब डॉलर हो गई है। कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर आने वाले वर्षों के लिए उसकी आय को अधिक स्पष्टता देगा और अमेरिका में उसके परिचालन की क्षमता और गुणवत्ता को भी दर्शाता है।</div><div><br></div><div>बता दें कि अमेरिका वेलस्पन कॉर्प के लिए भारत के बाद सबसे बड़ा बाजार है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल राजस्व में अमेरिकी कारोबार की हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत रही थी। इसी अवधि में भारत से कंपनी को 71.7 प्रतिशत राजस्व मिला, जबकि अन्य विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी करीब 1.1 प्रतिशत रही।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि वेलस्पन पिछले कुछ समय से अमेरिकी ऊर्जा ढांचे में बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए वहां अपनी उत्पादन क्षमता मजबूत कर रही है। अमेरिका में तरलीकृत प्राकृतिक गैस की बढ़ती जरूरत, बिजली की खपत में वृद्धि और तेल पाइपलाइन से जुड़े नए निवेश ने पाइप की मांग को सहारा दिया है।</div><div><br></div><div>कंपनी के हालिया तिमाही परिणामों से भी अमेरिकी कारोबार में मजबूती के संकेत मिले थे। वेलस्पन ने बताया था कि उसकी अमेरिका स्थित सर्पिल पाइप उत्पादन इकाई वित्त वर्ष 2027-28 तक के लिए काफी हद तक बुक है। मांग बढ़ने के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जिनमें ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े आंकड़ा केंद्रों की बढ़ती बिजली जरूरत शामिल है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों के अनुसार, आंकड़ा केंद्रों के विस्तार से अमेरिका में बिजली उत्पादन और उसके वितरण के लिए नए बुनियादी ढांचे की जरूरत बढ़ रही है। इसके साथ ही तेल और गैस क्षेत्र में पाइपलाइन परियोजनाओं में दोबारा तेजी आने से पाइप बनाने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।</div><div><br></div><div>वेलस्पन के लिए नया ऑर्डर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में कंपनी की पकड़ और गहरी होगी। लंबे समय तक चलने वाला यह सौदा कंपनी को आने वाले वित्त वर्षों में उत्पादन और राजस्व की बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकता है।</div><div><br></div><div>कंपनी ने कहा है कि यह ऑर्डर उसके कारोबार के आकार, उत्पाद की गुणवत्ता और बड़े स्तर पर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की क्षमता पर मजबूत भरोसा दिखाता है। अमेरिका में ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते निवेश के बीच वेलस्पन कॉर्प अब अपनी वैश्विक विस्तार रणनीति को और मजबूत करने की स्थिति में है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 23:11:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/welspun-corp-us-business-shines-order-book-hits-record-levels-following-a-massive-?17200-cr-deal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/21/pipe-manufacturing_large_2311_145.jpeg" />
    </item>
  </channel>
</rss>