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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, RBI बुलेटिन में घरेलू मांग को मिला श्रेय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-bulletin-indian-economy-resilient-amid-global-tensions-domestic-demand]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती महंगाई और मौजूदा व्यापार तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और लक्षित नीतिगत उपाय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शुक्रवार को जारी बुलेटिन में यह बात कही गई। अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक वाले लेख के मुताबिक, पश्चिम एशिया में नए सिरे से भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने महंगाई का दबाव बढ़ाया है।</p><p>इसके चलते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाई हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल की ऊंची दरों ने भी राजकोषीय और वित्तीय स्थिरता पर इसके असर को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। लेख के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से 2026 और 2027 के लिए वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का अनुमान बढ़ाने के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कई बड़े जोखिम बने हुए हैं।</p><p>इनमें बढ़ती महंगाई, ऊंचा सार्वजनिक कर्ज और राजकोषीय स्थिरता से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं। हालांकि, कृत्रिम मेधा (एआई) से मिलने वाले लाभ और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव कुछ राहत देने वाले कारक हैं। लेख में कहा गया है कि ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद भारत में घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को समर्थन मिला है।</p><p>उद्योग और सेवा क्षेत्र के महत्वपूर्ण आंकड़ें भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाते हैं। आरबीआई के लेख के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई हाल के महीनों में बढ़ी है और इसका असर अधिक क्षेत्रों तक फैलने के संकेत मिले हैं। ऐसे में मौद्रिक नीति के रुख में इसके अनुरूप बदलाव की जरूरत हो सकती है।</p><p>लेख में कहा गया है, विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने कई नियामकीय उपाय किए हैं, जिनसे वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है। एफसीएनआर (बी) अदला-बदली सुविधा के तहत मजबूत प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार को भी समर्थन मिला। अगस्त में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेश से भेजे गए धन के प्रवाह में मजबूती आई।</p><p>अगस्त, 2026 में एफडीआई प्रवाह मजबूत बना रहा। संचार, विविध सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में कुल एफडीआई का दो-तिहाई से अधिक निवेश आया। अमेरिका, सिंगापुर और मॉरीशस से करीब 72 प्रतिशत एफडीआई प्रवाह हुआ।</p><p>बुलेटिन के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में 19 तारीख तक भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख रहा। वैश्विक तनाव बढ़ने, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा प्रभावित हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली से विदेशी निवेश पर दबाव पड़ा, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार बने रहे।</p><p>आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 22:23:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-bulletin-indian-economy-resilient-amid-global-tensions-domestic-demand</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए FSDC की बैठक, साइबर सुरक्षा रणनीति पर मंथन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/nirmala-sitharaman-chairs-fsdc-meeting-on-financial-reforms-cybersecurity]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की बैठक में घरेलू निवेश परिवेश को मजबूत करने, पूंजी प्रवाह को बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्र के सुधारों को गति देने पर विचार-विमर्श किया गया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक सीतारमण ने परिषद से आग्रह किया कि वह बढ़ती भू-राजनीतिक बाधाओं और वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनजर अधिक और पूर्व-निर्धारित अंतराल पर अपनी बैठकें आयोजित करे। प्रमुख वित्तीय नियामकों से बनी एफएसडीसी वित्तीय स्थिरता, क्षेत्र के विकास और अंतर-नियामक समन्वय को बढ़ावा देने वाली शीर्ष सरकारी निकाय है।</p><p>परिषद ने अपनी 30वीं बैठक में भारतीय वित्तीय क्षेत्र में साइबर मजबूती की समीक्षा की और वित्तीय क्षेत्र नियामकों तथा साइबर सुरक्षा एजेंसियों से मिलकर बने एक अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) द्वारा तैयार की गई वित्तीय क्षेत्र साइबर सुरक्षा रणनीति (एफएससीएसएस) पर विचार किया। बयान में कहा गया कि एफएससीएसएस के क्रियान्वयन से भारतीय वित्तीय क्षेत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस चर्चा में महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए भारत की तैयारियों और सुरक्षा प्रणालियों की मजबूती, तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की साइबर सुरक्षा तैयारियों पर भी विचार किया गया।</p><p>बयान में कहा गया कि वित्तीय क्षेत्र में विनियामक सुधार और डिजिटल आधुनिकीकरण के महत्व को देखते हुए, एफएसडीसी ने फिनटेक क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और वित्तीय परिसंपत्तियों तथा अन्य वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियों के लिए टोकन व्यवस्था की संभावनाओं पर चर्चा की। एफएसडीसी ने पिछले निर्णयों और बजट घोषणाओं को लागू करने के लिए एक रणनीति तैयार करने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की, जिसमें घरेलू निवेश परिवेश को मजबूत करना और निवेश के लिए संसाधन प्रवाह में सुधार करना शामिल था। वित्त मंत्री ने संबंधित नियामकों और हितधारकों से यह भी आग्रह किया कि वे लावारिस पड़ी परिसंपत्तियों (बैंक जमा, लाभांश, शेयर, डाकघर खाते, बीमा और पेंशन फंड आदि) को उनके असली मालिकों को वापस करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।</p><p>एफएसडीसी ने आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली एफएसडीसी उप-समिति द्वारा की गई गतिविधियों और परिषद के लंबित पिछले निर्णयों पर की गई कार्रवाई का भी संज्ञान लिया। बैठक में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया और राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने भी भाग लिया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की सचिव पल्लवी जैन गोविल और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन भी बैठक में शामिल हुए।</p><p>बैठक में वित्तीय क्षेत्र के नियामक - सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय, इरडा के चेयरपर्सन अजय सेठ और पीएफआरडीए के चेयरपर्सन एस रमण भी मौजूद थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:53:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/nirmala-sitharaman-chairs-fsdc-meeting-on-financial-reforms-cybersecurity</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Shivraj Singh Chouhan ने NMMS App का उन्नत वर्जन किया लॉन्च]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/shivraj-singh-chouhan-launches-upgraded-nmms-app-to-curb-fake-attendance]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत फर्जी हाजिरी रोकने के लिए शुक्रवार को राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप का उन्नत संस्करण पेश किया। ऐप के नए संस्करण में सुरक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है। साथ ही, नेटवर्क संपर्क की असुविधा वाले क्षेत्रों में भी ऑफलाइन माध्यम से हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।</p><p>चौहान ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना, उनकी मजदूरी सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से तथा निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो।”
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से जवाबदेही मजबूत होनी चाहिए, लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्याओं के कारण वास्तविक श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास और अन्य एजेंसियों के तकनीकी सहयोग से विकसित इस उन्नत ऐप में उपकरण-स्तर की सुरक्षा जांच, कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित चेहरे का सत्यापन, ‘सजीवता पहचान’ और ऐप की नकल बनाने तथा उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपाय शामिल किए गए हैं। चौहान ने कहा कि फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने और दूसरे व्यक्तियों के नाम पर मजदूरी का दावा किए जाने की शिकायतों के मद्देनजर सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी हो गया था।</p><p>नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर कार्यस्थलों पर ऑफलाइन हाजिरी दर्ज की जा सकेगी। मस्टर रोल बंद होने के बाद नेटवर्क बहाल होने पर इन प्रविष्टियों को अपलोड किया जा सकेगा। बुजुर्ग श्रमिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और मोबाइल उपकरणों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का सामना करने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध है।</p><p>चौहान ने कहा, “जिन लोगों को रोजगार की जरूरत है, उन्हें काम उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
चौहान ने यह भी बताया कि देशभर में 10.997 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके साथ ही दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ किसान आईडी बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश अब केवल 30,000 आईडी दूर है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/shivraj-singh-chouhan-launches-upgraded-nmms-app-to-curb-fake-attendance</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Tata Sons जैसी बड़ी NBFC के लिए रजिस्ट्रेशन और लिस्टिंग जरूरी, RBI गवर्नर का बयान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/tata-sons-nbfc-registration-and-stock-listing-mandatory-rbi-governor-sanjay-malhotra]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किए जाने को सही ठहराते हुए कहा कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी एनबीएफसी और मुख्य निवेश कंपनियों (सीआईसी) के लिए केंद्रीय बैंक के साथ पंजीकृत होना जरूरी है। मल्होत्रा ने यहां एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में शिरकत करते हुए कहा कि टाटा संस जैसी बड़ी एनबीएफसी और सीआईसी समूह की कंपनियों के शीर्ष पर होती हैं और धन जुटाने के लिए समूह की कंपनियों के बहीखाते का इस्तेमाल करती हैं। इससे सार्वजनिक धन के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा होता है।</p><p>मल्होत्रा ने कहा, सार्वजनिक धन कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंकों और अन्य माध्यमों से आता है। इसलिए ऐसी कंपनियों का आरबीआई के साथ पंजीकरण जरूरी है। हालांकि, जिन सीआईसी की सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच नहीं है, उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट है।</p><p>आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यदि कोई कंपनी आरबीआई की परिभाषा के तहत एनबीएफसी या सीआईसी की श्रेणी में आती है और उसकी सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच है, तो उसे पंजीकरण कराना होगा। यदि वह ऊपरी स्तर की श्रेणी में आती है, तो उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध भी होना होगा। पिछले महीने आरबीआई ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की अर्जी खारिज कर दी थी।</p><p>इससे टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना बढ़ गई है। टाटा संस को सितंबर, 2022 में ऊपरी स्तर की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंपनी ने मार्च, 2024 में पंजीकरण से बाहर होने के लिए आवेदन किया था और इस श्रेणी से बाहर निकलने की पात्रता हासिल करने के क्रम में अपना कर्ज भी चुका दिया था।</p><p>इस बीच, टाटा संस का निदेशक मंडल संभावित सूचीबद्धता से जुड़े कदम आगे बढ़ा चुका है। हालांकि, समूह के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ने के बीच कंपनी ने अन्य विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही है। इस बीच, मल्होत्रा ने यह बात दोहराई कि आरबीआई की प्राथमिकता मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है।</p><p>उन्होंने कहा कि सीमेंट और इस्पात की बिक्री, ऋण वृद्धि, कर संग्रह और वाहन बिक्री जैसे संकेतक अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों को दर्शाते हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के संतोषजनक दायरे के भीतर है, लेकिन खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों से जुड़े आपूर्ति पक्ष के दबाव चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने चालू वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत बताया।</p><p>डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई किसी खास विनिमय दर का लक्ष्य नहीं रखता है। केंद्रीय बैंक का जोर किसी निश्चित स्तर का बचाव करने के बजाय विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित स्थितियां बनाए रखने और उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने पर है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/tata-sons-nbfc-registration-and-stock-listing-mandatory-rbi-governor-sanjay-malhotra</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ashwini Vaishnaw ने तय किया लक्ष्य, 23 अक्टूबर 2028 तक भारत में बनेंगे अपने Brand के फोन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/ashwini-vaishnaw-sets-target-for-indian-designed-mobile-phones-by-2028]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारत में मोबाइल फोन बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब सरकार की नजर अपना मोबाइल ब्रांड तैयार करने पर है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया है कि 23 अक्टूबर 2028 तक देश में ऐसे मोबाइल फोन उपलब्ध होंगे, जिन्हें भारतीय कंपनियां डिजाइन करेंगी, भारत में ही बनाएंगी और अपने ब्रांड के नाम से बेचेंगी। उनका कहना है कि भारत भी मोबाइल फोन के कारोबार में एप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के बराबर अपनी पहचान बना सकता है।</p><p>अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के दौरान यह बात कही। उन्होंने तारीख का जिक्र करते हुए कहा कि 23 अक्टूबर 2028 को भारत के पास अपने डिजाइन, निर्माण और ब्रांड वाले मोबाइल फोन होंगे। हालांकि, यह सरकार का लक्ष्य और मंत्री का दावा है। इसे पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों को तकनीक, निर्माण और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी।</p><p>मोबाइल फोन तैयार करना कितना मुश्किल काम है, इसे समझाने के लिए मंत्री ने बातचीत के दौरान एनडीटीवी के प्रधान संपादक राहुल कंवल से उनका मोबाइल फोन भी लिया। उन्होंने बताया कि एक छोटे से फोन में रेडियो तरंगों के जरिए संचार करने की व्यवस्था, एंटीना, गणना करने वाला हिस्सा, मेमोरी, कैमरा, स्क्रीन और बिजली को नियंत्रित करने वाले कई उपकरण लगाने पड़ते हैं। इन सभी हिस्सों को कम जगह में इस तरह जोड़ना होता है कि फोन का वजन, बिजली की खपत और काम करने की क्षमता सही बनी रहे। यही वजह है कि मोबाइल फोन का डिजाइन तैयार करना काफी जटिल होता है।</p><p>मंत्री के मुताबिक, करीब 3 साल पहले भारतीय डिजाइनरों को मोबाइल फोन के मुख्य सर्किट बोर्ड को खुद तैयार करने की चुनौती दी गई थी। इस पहल में 2 कंपनियां आगे आईं। इनमें से एक कंपनी का डिजाइन एक बड़ी अमेरिकी दूरसंचार सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ने चुना। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उस भारतीय कंपनी ने 5जी से आगे की तकनीक वाला मोबाइल फोन तैयार करके संबंधित कंपनी को दिया है और यह फोन ग्राहकों तक भी पहुंच चुका है। उनके अनुसार, पिछले साढ़े 3 वर्षों में भारत ने ऐसी तकनीक विकसित करने की क्षमता हासिल की है, जिसका इस्तेमाल अब अपना मोबाइल ब्रांड बनाने में किया जा सकता है।</p><p>उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि मोबाइल फोन का भारतीय डिजाइन, ब्रांड और उससे जुड़ी बौद्धिक संपदा देश में ही रहे। मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे फोन बड़ी संख्या में बिकेंगे। हालांकि, बाजार में उनकी सफलता कीमत, गुणवत्ता, तकनीकी सुविधाओं और ग्राहकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।</p><p>गौरतलब है कि अश्विनी वैष्णव ने देश में विनिर्माण क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए पिछली कांग्रेस सरकारों की नीतियों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद आर्थिक बदलावों से मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला, लेकिन 2004 से 2014 के बीच नियंत्रण वाली नीतियों के कारण काम प्रभावित हुआ। उनके मुताबिक, 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया है।</p><p>मंत्री ने कहा कि भारत अब मोबाइल फोन, ड्रोन, मिसाइल, रेलगाड़ियों और आधुनिक उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इलेक्ट्रॉनिक सामान देश से निर्यात होने वाली तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है और जल्द ही दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है। ऐसे में भारतीय मोबाइल ब्रांड की योजना देश में तकनीकी क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 20:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/ashwini-vaishnaw-sets-target-for-indian-designed-mobile-phones-by-2028</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Brent Crude में तेजी से US Dollar के मुकाबले Rupee 12 पैसे फिसलकर 94.93 पर बंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/indian-rupee-falls-12-paise-against-us-dollar-to-settle-at-94-point-93]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>शुक्रवार को भारतीय रुपये की कमजोरी लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे गिरकर 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने रुपये पर दबाव बनाया। बाजार के जानकारों के मुताबिक, सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती तनातनी से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।</p><p>बता दें कि गुरुवार को भी रुपया 43 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 94.81 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने 94.78 पर कारोबार शुरू किया। कारोबार के दौरान यह गिरकर 94.98 के निचले स्तर तक पहुंचा और अंत में 94.93 पर बंद हुआ। लगातार दूसरे दिन गिरावट से विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव की स्थिति बनी हुई है।</p><p>विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत वायदा कारोबार में 1.01% बढ़कर 114.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर आयात का खर्च बढ़ता है और डॉलर की मांग में तेजी आ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।</p><p>घरेलू शेयर बाजार में भी शुक्रवार को कमजोरी रही। सेंसेक्स 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 87.65 अंक टूटकर 22,600 पर आ गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से ₹3,458.70 करोड़ के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है।</p><p>हालांकि, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार दोपहर 12:03 बजे तक इस निर्गम के लिए 19.75 करोड़ उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 136.32 करोड़ शेयरों की मांग आई थी, यानी इसे करीब 7 गुना चंदा मिला। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में मांग 14.46 गुना रही। इस श्रेणी में घरेलू वित्तीय संस्थानों ने 34.51 करोड़ और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 26.95 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई। गौरतलब है कि रुपये की आगे की चाल अब कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक डॉलर की मजबूती पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:32:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/indian-rupee-falls-12-paise-against-us-dollar-to-settle-at-94-point-93</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[SBI ने ग्राहकों का धन सुरक्षित बताया, 3897 खातों के संदिग्ध Data Leak की जांच शुरू]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-assures-customer-funds-safe-probes-suspected-leak-of-3897-records]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने शुक्रवार को ग्राहकों को भरोसा दिया कि उनके खाते में जमा राशि और धन सुरक्षित हैं। बैंक ने साथ ही कहा कि उसने डार्क वेब पर व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी वाले 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड के संदिग्ध खुलासे की जांच शुरू कर दी है। एसबीआई ने बुधवार को कहा था कि वह अपने जोखिम खुफिया सेवा प्रदाता, रक्षा साइबर एजेंसी और साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन से 16 अक्टूबर को मिली चेतावनी के बाद संदिग्ध डेटा खुलासे की जांच कर रहा है।</p><p>बैंक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, हम दोहराते हैं कि आपके खाते की शेष राशि और धन हमारे पास सुरक्षित हैं। एसबीआई ने ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग तौर-तरीकों का पालन करने की सलाह दी और उन्हें किसी के भी साथ अपने ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा नहीं करने को कहा। बैंक ने ग्राहकों से संदिग्ध कॉल, संदेशों और ईमेल के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया।</p><p>उसने कहा, हाल की साइबर घटना के संबंध में पिछली पोस्ट के बाद, बैंक ने व्यक्तिगत रूप से उन सभी ग्राहकों को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से सूचित कर दिया है जिनसे जुड़ी जानकारी इसमें शामिल पायी गयी थी। एसबीआई ने बुधवार को कहा था कि डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड के प्रारंभिक विश्लेषण से 3,897 ऐसे ग्राहक रिकॉर्ड की पहचान हुई जिनमें पंजीकृत मोबाइल नंबर, जन्म तिथि, नाम, लिंग, ईमेल पते और आवासीय पते सहित संवेदनशील जानकारी शामिल थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:23:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-assures-customer-funds-safe-probes-suspected-leak-of-3897-records</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Swiggy Instamart का घाटा बढ़कर 895 करोड़ हुआ, Nomura और Nuvama ने घटाया Target Price]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/nomura-and-nuvama-cut-swiggy-target-price-after-big-losses]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>ऑनलाइन खाना पहुंचाने वाली कंपनी स्विगी के शेयरों में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर बीएसई पर 15% टूटकर ₹179.65 पर आ गया। इस गिरावट से कंपनी के बाजार मूल्य में एक ही दिन में करीब ₹9,000 करोड़ की कमी आ गई। निवेशकों की चिंता की सबसे बड़ी वजह इंस्टामार्ट कारोबार में लगातार बढ़ता घाटा है। कंपनी के खाने की आपूर्ति वाले कारोबार में अच्छी बढ़त के बावजूद त्वरित सामान वितरण के कारोबार पर होने वाला खर्च बाजार को परेशान कर रहा है।</p><p>स्विगी के दूसरी तिमाही के नतीजे सामने आने के बाद कई वित्तीय संस्थानों ने कंपनी के शेयर का अनुमानित मूल्य घटा दिया। जेएम फाइनेंशियल ने अपनी ‘रिड्यूस’ सलाह बरकरार रखते हुए लक्ष्य मूल्य ₹255 से घटाकर ₹200 कर दिया। नुवामा ने भी लक्ष्य ₹255 से कम करके ₹200 कर दिया। नोमुरा ने खरीदने की सलाह बनाए रखी, लेकिन लक्ष्य मूल्य ₹435 से घटाकर ₹300 कर दिया। एमके ग्लोबल ने भी अपना लक्ष्य ₹350 से घटाकर ₹310 कर दिया। इन बदलावों से साफ है कि बाजार को इंस्टामार्ट के घाटे को लेकर चिंता बनी हुई है।</p><p>बता दें कि इंस्टामार्ट के शुद्ध ऑर्डर मूल्य में दूसरी तिमाही के दौरान पिछली तिमाही के मुकाबले 13.4% की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद कारोबार का योगदान मार्जिन बिगड़कर शून्य से नीचे 1.4% पर पहुंच गया, जबकि पिछली तिमाही में यह शून्य से नीचे 0.3% था। कारोबार का समायोजित परिचालन घाटा भी ₹778 करोड़ से बढ़कर ₹895 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस दौरान 69 नए डार्क स्टोर खोले, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 1,240 हो गई। प्रति स्टोर ऑर्डर भी 1,089 से बढ़कर 1,192 हुए, लेकिन इस सुधार के साथ खर्च भी बढ़ा है।</p><p>जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में इंस्टामार्ट के घाटे और मुनाफे तक पहुंचने की संभावनाओं पर सवाल उठाए हैं। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि इंस्टामार्ट का घाटा इस तिमाही में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। प्रबंधन के अनुसार, मौजूदा कारोबार के मुकाबले करीब 2.3 गुना आकार हासिल करने पर यह कारोबार बराबरी की स्थिति में पहुंच सकता है। इसके लिए सालाना आधार पर शुद्ध ऑर्डर मूल्य लगभग ₹6,000 करोड़ होना चाहिए, जबकि अभी यह करीब ₹2,600 करोड़ है। कंपनी का अनुमान है कि प्रति ऑर्डर ₹30 का योगदान मिलने पर बराबरी की स्थिति हासिल की जा सकती है।</p><p>हालांकि, निवेशकों के लिए केवल कारोबार बढ़ना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी देखना है कि घाटा कितनी जल्दी कम होता है। एमके ग्लोबल के मुताबिक, इंस्टामार्ट को लगातार मजबूत तेजी, ग्राहकों को दोबारा जोड़ने, बेहतर कमाई और स्टोरों के अधिक इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा।</p><p>स्विगी के दूसरे कारोबार प्लेटफॉर्म इनोवेशंस का घाटा भी ₹131 करोड़ से बढ़कर ₹162 करोड़ हो गया। इसमें टोइंग शामिल है। जेएम फाइनेंशियल ने टोइंग को अलग कारोबार के रूप में चलाने के समर्थन पर सवाल उठाते हुए इसे बंद करने और संसाधनों को मुख्य खाने की आपूर्ति वाले कारोबार में लगाने की सलाह दी है। उसके मुताबिक, टोइंग और स्विगी के मुख्य कारोबार में रेस्तरां, डिस्ट्रिब्यूटर और ग्राहकों का बड़ा हिस्सा साझा है, जिससे एक कारोबार दूसरे की बिक्री को प्रभावित कर सकता है।</p><p>दूसरी ओर, स्विगी का खाना पहुंचाने वाला कारोबार कंपनी की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। इस कारोबार का सकल ऑर्डर मूल्य सालाना आधार पर 17.7% बढ़कर ₹10,054 करोड़ हो गया। समायोजित परिचालन लाभ भी 42% बढ़कर ₹341 करोड़ पहुंच गया। लाभ का मार्जिन पिछले साल के 2.8% से बढ़कर 3.4% हो गया। नोमुरा का अनुमान है कि यह कारोबार वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में ₹1,300 करोड़ से ₹1,900 करोड़ तक परिचालन लाभ दे सकता है।</p><p>गौरतलब है कि स्विगी की तेजी प्रतिद्वंद्वी इटरनल के मुकाबले भी धीमी रही है। जहां स्विगी के खाने के कारोबार का सकल ऑर्डर मूल्य 17.7% बढ़ा, वहीं इटरनल के त्वरित सामान वितरण कारोबार का शुद्ध ऑर्डर मूल्य पिछली तिमाही के मुकाबले 22.2% बढ़ा। ऐसे में स्विगी के सामने चुनौती है कि वह इंस्टामार्ट का घाटा घटाए, ग्राहकों को बनाए रखे और अपने मुख्य कारोबार की बढ़त भी तेज करे। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी तेजी के साथ मुनाफे का संतुलन कैसे बनाती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 19:11:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/nomura-and-nuvama-cut-swiggy-target-price-after-big-losses</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[WhatsApp और Telegram चलाने के लिए 2027 से उसी फोन में एक्टिव SIM रखना होगा अनिवार्य]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/cyber-fraud-prevention-to-make-sim-binding-mandatory-for-whatsapp-and-telegram]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अगर आप भी व्हाट्सऐप या टेलीग्राम चलाने के लिए एक फोन में सिम रखते हैं और दूसरे फोन में इंटरनेट के जरिए मैसेज भेजते हैं, तो आने वाले समय में आपके लिए नियम बदल सकते हैं। सरकार के प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग नियमों के तहत 1 जनवरी 2027 से संदेश भेजने वाले ऐप चलाने के लिए संबंधित मोबाइल नंबर की सक्रिय सिम उसी उपकरण में मौजूद होना जरूरी हो सकता है। दूरसंचार विभाग ने इन नियमों को लागू करने के लिए कंपनियों को 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है।</p><p>बता दें कि इन प्रस्तावित नियमों का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और भारतीय मोबाइल नंबरों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, कुछ धोखेबाज भारतीय सिम कार्ड लेकर उन नंबरों से संदेश भेजने वाले ऐप पर खाते बनाते हैं और बाद में विदेश से उनका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों के जरिए लोगों को ठगने, उनकी निजी जानकारी हासिल करने और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे मामलों में धोखाधड़ी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।</p><p>प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और ऐसे दूसरे ऐप, जिन पर खाता बनाने के लिए भारतीय मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है, उन्हें यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि खाते से जुड़ी सिम सक्रिय हो और संबंधित उपकरण में मौजूद हो। यदि यूजर सिम निकाल देता है, उसे बंद करवा देता है या वह खराब हो जाती है, तो ऐप की कुछ सुविधाएं रुक सकती हैं। सेवाएं दोबारा शुरू करने के लिए उसी नंबर की वैध और सक्रिय सिम या ई-सिम की जरूरत पड़ सकती है।</p><p>गौरतलब है कि सरकार ने उद्योग जगत से मिले सुझावों के बाद कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। इसका अर्थ है कि 1 जनवरी 2027 से पहले संबंधित कंपनियों को जरूरी बदलाव करने होंगे। हालांकि, नियमों के अंतिम क्रियान्वयन और अलग-अलग ऐप पर उनके असर की पूरी जानकारी सामने आने तक यूजर्स को इसे प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही समझना चाहिए।</p><p>इन नियमों का असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो व्हाट्सऐप चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सिम दूसरे फोन में रखते हैं और ऐप किसी अन्य उपकरण पर चलाते हैं। इसी तरह, खाता बनाने के बाद सिम निकाल देने वाले या केवल वाई-फाई के जरिए ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी परेशानी हो सकती है। दो सिम वाले फोन इस्तेमाल करने वालों को भी अपने खाते से जुड़े नंबर की सक्रियता पर ध्यान देना होगा।</p><p>हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि 1 जनवरी 2027 से व्हाट्सऐप किसी खास आईफोन या एंड्रॉयड फोन पर चलना बंद कर देगा। प्रस्तावित बदलाव फोन के ब्रांड या उसके ऑपरेटिंग सिस्टम के बजाय सिम की मौजूदगी और खाते की पहचान से जुड़े हैं। ई-सिम इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी केवल इसलिए परेशानी होने की आशंका नहीं है कि उनके पास भौतिक सिम कार्ड नहीं है, बशर्ते संबंधित ई-सिम सक्रिय हो और नियमों की शर्तें पूरी करती हो।</p><p>स्नैपचैट के इस व्यवस्था के दायरे में आने की संभावना कम बताई गई है, जबकि सिग्नल पर नियम किस तरह लागू होंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन दोनों ऐप के बारे में अंतिम स्थिति की पुष्टि जरूरी होगी।</p><p>सिम-बाइंडिंग का आसान मतलब है कि संदेश भेजने वाले ऐप का खाता सक्रिय मोबाइल कनेक्शन से जुड़ा रहे। सरकार को उम्मीद है कि इससे फर्जी खातों और साइबर अपराध पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे अपने खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को सक्रिय रखें और नियम लागू होने से पहले संबंधित ऐप की आधिकारिक जानकारी पर नजर बनाए रखें।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:30:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/cyber-fraud-prevention-to-make-sim-binding-mandatory-for-whatsapp-and-telegram</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Infosys का Q2 Net Profit 6 प्रतिशत बढ़कर 7823 करोड़ हुआ, AI Revenue में उछाल दर्ज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/infosys-net-profit-rises-6-percent-to-rs-7823-crore-in-second-quarter]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनी इन्फोसिस ने सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 6% बढ़कर ₹7,823 करोड़ पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹7,364 करोड़ का मुनाफा कमाया था। ऊर्जा और उपयोगिता क्षेत्र के ग्राहकों से बढ़ती मांग के साथ एआई से जुड़ी सेवाओं पर कंपनियों के खर्च में बढ़ोतरी को इस प्रदर्शन की अहम वजह माना जा रहा है।</p><p>कंपनी की ऑपरेशन से होने वाली आय में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में इन्फोसिस का राजस्व 11% बढ़कर ₹49,244 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह ₹44,490 करोड़ था। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि तकनीकी सेवाओं की मांग और बड़े कारोबारी सौदों से कंपनी को फायदा मिल रहा है।</p><p>बता दें कि इन्फोसिस के निदेशक मंडल ने शेयरधारकों के लिए ₹26 प्रति शेयर अंतरिम लाभांश घोषित किया है। यह पिछले साल की तुलना में 13% अधिक है। कंपनी ने लाभांश पाने के योग्य शेयरधारकों का निर्धारण करने के लिए 3 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। वहीं, लाभांश का भुगतान 11 नवंबर 2026 को किया जाएगा। अंतरिम लाभांश का मतलब है कि कंपनी वित्त वर्ष के अंतिम नतीजों से पहले ही अपने शेयरधारकों को मुनाफे का एक हिस्सा देती है।</p><p>इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक सलिल पारेख ने बताया कि कंपनी को दूसरी तिमाही में 5.2 अरब डॉलर के बड़े सौदे मिले हैं। इनमें 2 अरब डॉलर से अधिक का एक बड़ा सौदा भी शामिल है। उनके मुताबिक, इससे जटिल तकनीकी बदलावों और कारोबारी जरूरतों के लिए कंपनी पर वैश्विक ग्राहकों के भरोसे का पता चलता है।</p><p>पारेख ने कहा कि कंपनी की कुल आय में एआई से जुड़ी सेवाओं की हिस्सेदारी 10.5% रही। इन सेवाओं से होने वाली आय में पिछली तिमाही के मुकाबले 29% की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि इन्फोसिस वैश्विक कंपनियों को एआई की रणनीति बनाने में सलाह दे रही है और इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता तथा विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए निवेश कर रही है।</p><p>कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जयेश संघराजका ने बताया कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद दूसरी तिमाही में ऑपरेटिंग लाभ का मार्जिन 21% रहा। लागत पर नियंत्रण और कामकाज की दक्षता बढ़ाने से कंपनी को यह स्तर बनाए रखने में मदद मिली। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी का मुक्त नकदी प्रवाह 928 मिलियन डॉलर रहा, जो शुद्ध मुनाफे का 113.3% है।</p><p>गौरतलब है कि वैश्विक आईटी कंपनियों के लिए एआई अब कारोबार बढ़ाने का प्रमुख क्षेत्र बन रही है। ऐसे में इन्फोसिस के नतीजे बताते हैं कि बड़े सौदों, तकनीकी सेवाओं की मांग और लागत नियंत्रण पर उसका ध्यान बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में इसी रफ्तार से आय और मुनाफे में बढ़ोतरी जारी रख पाती है या नहीं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/infosys-net-profit-rises-6-percent-to-rs-7823-crore-in-second-quarter</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Kerala की 6000 नर्सों ने बढ़ाया India-Germany का भरोसा, बोले Piyush Goyal]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-india-always-ensures-safety-of-citizens-in-conflict]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया भर के संकटग्रस्त इलाकों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुश्किल हालात में लोगों को वापस घर लाने के लिए सरकार ने केवल एडवाइजरी जारी करने से कहीं बढ़कर काम किया है। बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा कि भारत ने हमेशा विदेशों में मुश्किलों का सामना कर रहे अपने नागरिकों की भलाई सुनिश्चित की है, और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के नागरिकों को भी वहां से सुरक्षित निकालने में मदद की है। गोयल ने कहा, "ज्यादातर अन्य देश सिर्फ एक एडवाइजरी जारी कर देते हैं। एडवाइजरी यह होती है कि 'घर वापस आ जाओ'। लेकिन कैसे आना है? यह सरकार की समस्या नहीं होती। असल में, हम अक्सर भारतीयों के साथ-साथ दूसरे देशों के लोगों को भी वहां से सुरक्षित बाहर निकालते हैं और उनकी मदद करते हैं।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/piyush-goyal-blames-europe-for-carbon-emissions-at-berlin-global-dialogue" target="_blank" rel="noopener">गड़बड़ी आपने की और जिम्मेदार भारत को ठहरा रहे, पीयूष गोयल ने हंसते-हंसते ही यूरोप को रुला दिया</a></h3><p><br>रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने (इवैक्यूएशन) के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने बताया कि जब यह संघर्ष शुरू हुआ, तब वहां लगभग 22,000 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से ज्यादातर छात्र थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस निकासी प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने दिल्ली में एक विशेष टीम बनाई ताकि पूरे अभियान का समन्वय (कोऑर्डिनेशन) किया जा सके, और भारतीय नागरिकों की वापसी को आसान बनाने के लिए चार वरिष्ठ मंत्रियों को पड़ोसी देशों में भेजा। गोयल ने बताया कि संघर्ष के और गंभीर होने से पहले ही सरकार ने यूक्रेन में रह रहे भारतीयों से घर लौट आने की अपील की थी, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद हालात और भी मुश्किल हो गए। उन्होंने कहा, "उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में एक विशेष टीम गठित की, जिसकी वे खुद निगरानी करते थे, समन्वय करते थे, फीडबैक लेते थे और लगातार मार्गदर्शन व सलाह देते थे।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-govt-to-bear-certification-cost-for-small-exporters" target="_blank" rel="noopener">सूक्ष्म व छोटे Exporters के प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार: Piyush Goyal</a></h3><p><br>मंत्री की इन बातों से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किस तरह काम करता है और सरकार किस तरह सुनियोजित तरीके से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर जोर देती है। इसके अलावा, गोयल ने 1960 के दशक में केरल से पश्चिमी जर्मनी गई 6,000 नर्सों के योगदान का भी जिक्र किया। उस समय वहां नर्सिंग प्रोफेशनल्स की भारी कमी थी। उन्होंने कहा कि इन नर्सों के काम ने भारत और जर्मनी के बीच एक गहरा और स्थायी भरोसा कायम करने में मदद की। उन्होंने बताया, "1960 के दशक में जब पश्चिमी जर्मनी के अस्पतालों में नर्सों की भारी कमी थी, तो उन्होंने केरल से 6,000 नर्सों को आमंत्रित किया। वे वहां अस्पतालों और केयर होम्स में काम करने गईं, मरीजों की बेहतरीन देखभाल की, जर्मनी में परिवारों की मदद की और फिर एक नए देश में अपना जीवन बसाया।" गोयल ने कहा कि इन नर्सों का योगदान केवल स्वास्थ्य सेवा तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसने दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत किया और उनके बीच भरोसे को गहरा किया। उन्होंने कहा, "उन 6,000 नर्सों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, और न ही इसे कम करके आंका जा सकता है। मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में दोनों देशों के रिश्ते एक 'रणनीतिक साझेदारी' (स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) में बदल गए हैं। पिछले साल दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे किए, और इस साल वे अपने राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब भारत और जर्मनी व्यापार, निवेश, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और जर्मनी अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करना चाहते हैं, और दोनों तरफ के कारोबारी इसका पूरा लाभ उठाने की कोशिश में हैं। उभरते अवसरों पर, जिनमें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसर भी शामिल हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:51:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-india-always-ensures-safety-of-citizens-in-conflict</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RBI Data: विदेशी मुद्रा भंडार 5.01 अरब डॉलर गिरकर 721.02 अरब डॉलर पर आया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/india-forex-reserves-drop-5-billion-dollars-721-billion-rbi-data]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश का विदेशी मुद्रा भंडार 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 5.01 अरब डॉलर घटकर 721.02 अरब डॉलर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 8.58 अरब डॉलर घटकर 726.03 अरब डॉलर रहा था।</p><p>प्रवासी भारतीयों की जमा पर विशेष रियायती अदला-बदली योजना के तहत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने से चार सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के उच्चतम स्तर 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। इस योजना के जरिये बैंकों ने करीब 133 अरब डॉलर की रिकॉर्ड राशि जुटाई थी। हालांकि, इसके बाद से विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट आ रही है।</p><p>विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में तेज गिरावट की वजह विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) संसाधनों का उपयोग और आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री के जरिये रुपये का संभालना है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का प्रमुख हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 5.76 अरब डॉलर घटकर 591.85 अरब डॉलर रही। डॉलर के संदर्भ में व्यक्त विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है।</p><p>केंद्रीय बैंक ने बताया कि आलोच्य सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 706 करोड़ डॉलर बढ़कर 105.8 अरब डॉलर हो गया। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) तीन करोड़ डॉलर बढ़कर 18.58 अरब डॉलर हो गए। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित जमा 1.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.79 अरब डॉलर हो गया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:37:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/india-forex-reserves-drop-5-billion-dollars-721-billion-rbi-data</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bihar में 1.21 लाख करोड़ के Investment प्रस्ताव, 68 हजार नौकरियों की उम्मीद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/bihar-receives-rs-121-lakh-crore-investment-proposals-68000-jobs]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बिहार में वर्ष 2025 से अब तक 1.21 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े 1,091 प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 68,807 से अधिक रोजगार पैदा होने का अनुमान है। राज्य सरकार पात्र निवेशकों को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (बीआईपीपी) के तहत मुफ्त भूमि भी उपलब्ध करा रही है। बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।</p><p>उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश बढ़ाने के लिए निवेशक अनुकूल नीतियों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूत करने और रोजगार सृजन पर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में उद्योगों के लिए 14,600 एकड़ से अधिक नई भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम चल रहा है। इसके तहत 25 जिलों में 28 स्थानों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है।</p><p>उन्होंने कहा कि बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने वित्त वर्ष 2025-26 से अब तक 521 औद्योगिक इकाइयों को 727 एकड़ भूमि आवंटित की है। इन इकाइयों से 18,380 करोड़ रुपये का निवेश आने और 49,167 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि राज्य में 94 औद्योगिक क्षेत्रों का नेटवर्क विकसित किया गया है।</p><p>उद्यमियों को जल्द उत्पादन शुरू करने की सुविधा देने के लिए 32 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में तैयार औद्योगिक ढांचा भी उपलब्ध कराया गया है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी गई हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को गया जिले के डोभी में 1,670 एकड़ में विकसित होने वाली बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड परियोजना का शुभारंभ करेंगे और इसका वेब पोर्टल भी पेश करेंगे।</p><p>इसके बाद भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने बताया कि इस परियोजना में विनिर्माण इकाइयों के लिए आधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां साझा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र और एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।</p><p>मंत्री ने कहा कि बिहार सेमीकंडक्टर नीति, 2026 के जरिए उच्च प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पटना में 171 करोड़ रुपये के निवेश से 15 एकड़ भूमि पर नया प्रौद्योगिकी केंद्र विकसित किया जा रहा है। राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित करने का प्रस्ताव भी जल्द मंत्रिमंडल के समक्ष भेजा जाएगा।</p><p>इस अवसर पर हथकरघा एवं रेशम निदेशक डॉ. विद्यानंद सिंह और एमएसएमई निदेशक अमन समीर भी मौजूद थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:37:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/bihar-receives-rs-121-lakh-crore-investment-proposals-68000-jobs</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SBI Card को दूसरी तिमाही में भारी मुनाफा, 778 करोड़ रुपये पहुंचा शुद्ध लाभ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-card-q2-net-profit-rises-75-percent-to-rs-778-crore]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड (एसबीआई कार्ड) का वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 75 प्रतिशत बढ़कर 778 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का 2025-26 की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में शुद्ध लाभ 445 करोड़ रुपये रहा था। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) प्रवर्तित क्रेडिट कार्ड कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 5,302 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 5,136 करोड़ रुपये थी।</p><p>ब्याज आय बढ़कर 2,511 करोड़ रुपये हो गई, जबकि अन्य स्रोतों से आय बढ़कर 2,630 करोड़ रुपये रही। कंपनी की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ। 30 सितंबर, 2026 तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) कुल कर्ज के 1.90 प्रतिशत पर आ गई, जो एक साल पहले 2.85 प्रतिशत थी।</p><p>शुद्ध एनपीए भी पिछले साल की समान तिमाही के 1.29 प्रतिशत से घटकर 0.77 प्रतिशत पर आ गया। कंपनी ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप जुलाई-सितंबर तिमाही में परिसंपत्तियों के मूल्य में कमी और डूबे कर्ज से संबंधित खर्च 37 प्रतिशत घटकर 819 करोड़ रुपये रह गए, जो एक साल पहले 1,293 करोड़ रुपये थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:30:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-card-q2-net-profit-rises-75-percent-to-rs-778-crore</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sensex 126 अंक टूटा, लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ 73,124 पर बंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-drops-126-points-nifty-settles-at-22600-as-crude-oil-spikes]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच जाने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट रही। सेंसेक्स 126 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 88 अंक नुकसान में रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच चौतरफा बिकवाली और महंगाई से कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले असर की चिंता ने निवेशक धारणा को प्रभावित किया।</p><p>बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 797.02 अंक तक गिरकर 72,452.37 अंक पर आ गया था। एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,600 अंक पर बंद हुआ।</p><p>कारोबार के दौरान यह 315.65 अंक तक गिरकर 22,372 अंक पर आ गया था। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील और अदाणी पोर्ट्स में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। इनके साथ ट्रेंट, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, भारतीय स्टेट बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी नुकसान में रहे।</p><p>दूसरी ओर, इटर्नल, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी इंडिया, इन्फोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में तेजी रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.10 प्रतिशत बढ़कर 114.42 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा, वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने चुनिंदा आईटी शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार की धारणा कमजोर रखी।</p><p>कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की चिंता बढ़ी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, निफ्टी की तुलना में मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में अधिक गिरावट आना चिंता का विषय है। ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों से व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ा है।</p><p>नायर ने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव के सूचकांक इंडिया वीआईएक्स में वृद्धि भी निकट भविष्य में अस्थिरता का संकेत देती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं, जबकि कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण वैश्विक बाजारों में जारी बिकवाली से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो रही है। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआीआई) ने 2,891.32 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।</p><p>एशिया के अन्य बाजारों में चीन का शंघाई कंपोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का सूचकांक कॉस्पी बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्की सूचकांक गिरावट में रहा। यूरोपीय बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी बृहस्पतिवार को नुकसान में बंद हुए थे।</p><p>इससे पहले बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 अंक और निफ्टी 123.70 अंक गिरकर 22,687.65 अंक पर बंद हुए थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 17:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-drops-126-points-nifty-settles-at-22600-as-crude-oil-spikes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Driving Licence में नाम और पता अपडेट करने पर शुल्क हटाने की तैयारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/transport-ministry-proposes-fee-waiver-for-driving-licence-address-change]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>ड्राइविंग लाइसेंस में नाम और पता बदलवाने पर लगने वाला शुल्क जल्द ही खत्म हो सकता है। इसके साथ, लाइसेंस पर चालक का ‘ब्लड ग्रुप’, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क नंबर दर्ज करना भी अनिवार्य करने की तैयारी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लाइसेंस संबंधी नियमों के मसौदे में इन बदलावों का प्रस्ताव रखा है।</p><p>मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के लिए यह मसौदा जारी किया है। मंत्रालय ने भारतीय और विदेशी नागरिकों को जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग रंग योजना रखने का भी प्रस्ताव किया है। मसौदे के अनुसार, लाइसेंस में नाम और पते जैसे व्यक्तिगत विवरण बदलने के आवेदनों पर लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को 15 दिन के भीतर फैसला करना होगा।</p><p>आवेदन खारिज करने की स्थिति में उन्हें इसकी वजह भी बतानी होगी। मंत्रालय ने उम्र और पते के प्रमाण के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट या नोटरी के समक्ष शपथपत्र देने की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। इसके बजाय आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र सहित विभिन्न दस्तावेजों को पहचान, उम्र और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई है।</p><p>मसौदे में उम्र और पते के प्रमाण के तौर पर शपथपत्र और जीवन बीमा पॉलिसी स्वीकार करने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, आधार सत्यापन के जरिये पूरी की जाने वाली कुछ ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस सेवाओं के लिए शुल्क में छूट देने की भी योजना है। मंत्रालय ने सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रम के आकलन में उत्तीर्ण होने के लिए जरूरी अंकों की सीमा 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी किया है।</p><p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों में बदलाव के ये प्रस्ताव आकलन प्रावधानों को सख्त बनाने के मकसद से रखे गए हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस लैमिनेटेड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) कार्ड के रूप में जारी या नवीनीकृत किए जाएंगे। मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर संबंधित पक्षों से प्रकाशन की तारीख से 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/transport-ministry-proposes-fee-waiver-for-driving-licence-address-change</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dark Web पर डेटा लीक के दावे के बीच SBI की सफाई, 3897 ग्राहकों के बैंक खाते बिल्कुल सुरक्षित]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/state-bank-of-india-informs-affected-customers-following-cyber-attack]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने उन सभी ग्राहकों को अलग-अलग सूचित किया है जो एक साइबर हमले से प्रभावित हुए थे, जिसके कारण ग्राहकों के रिकॉर्ड ऑनलाइन उजागर हो गए थे। एक्स पर एक पोस्ट में SBI ने बताया कि उसने ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए इन ग्राहकों को सूचित कर दिया है। बैंक ने कहा कि हाल ही में हुई साइबर घटना के संबंध में हमारी पिछली पोस्ट के बाद, बैंक ने उन सभी ग्राहकों को ईमेल और/या व्हाट्सएप के जरिए अलग-अलग सूचित कर दिया है, जिनका डेटा इस घटना में शामिल पाया गया था। हम फिर से स्पष्ट करते हैं कि आपके खाते का बैलेंस और फंड हमारे पास सुरक्षित हैं। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग तरीकों का पालन करें और ऑनलाइन लेनदेन करते समय सतर्क रहें। SBI ने आगे कहा कि अपना OTP, PIN या पासवर्ड कभी भी किसी के साथ साझा न करें, और संदिग्ध कॉल, संदेशों तथा ईमेल को लेकर सावधान रहें।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-probes-alleged-leak-of-customer-records-on-dark-web" target="_blank" rel="noopener">SBI के 3,897 ग्राहकों का डेटा Dark Web पर उजागर होने की आशंका, बैंक ने शुरू की जांच</a></h3><h2><br>लगभग 3,900 ग्राहकों के रिकॉर्ड उजागर हुए</h2><p><br>यह अपडेट तब आया है जब SBI ने खुलासा किया कि एक साइबर हमले में 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड उजागर हो गए हैं। इन रिकॉर्ड्स में ग्राहकों की निजी जानकारी (PIF) शामिल थी, जैसे कि नाम, ईमेल, फोन नंबर और लोन से जुड़ी जानकारी। 'सिरियसिम' (Siriusim) नाम के एक हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने SBI के सिस्टम को हैक किया है और इस डेटा को डार्क वेब पर बिक्री के लिए डाल दिया है। हालांकि, SBI ने इस हमले के स्रोत का नाम नहीं बताया है।</p><p>SBI को 16 अक्टूबर को अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से संभावित डेटा एक्सपोज़र के बारे में अलर्ट मिले। इससे पहले एक बयान में, SBI ने स्पष्ट किया कि इस हमले का उसके IT सिस्टम, मुख्य व्यावसायिक कार्यों, वित्तीय प्रदर्शन या कामकाज की निरंतरता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। बैंक ने कहा, "हम फिर दोहराते हैं कि हमारे ग्राहकों की वित्तीय संपत्ति और डेटा की सुरक्षा, तथा हम पर उनका भरोसा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैंक के अनुसार, इस घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। हैकर समूह ने शुरुआत में दावा किया था कि उनके पास CSV फॉर्मेट में 3.75 लाख डेटा रोज़ (rows) और 2,722 PDF फाइलें हैं, जिनमें संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी भी शामिल है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:43:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/state-bank-of-india-informs-affected-customers-following-cyber-attack</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Haryana में 40000 बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गहराया संकट, Anil Vij ने दिए बातचीत के संकेत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/haryana-electricity-strike-continues-over-private-distribution-license-talks-offered]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण कंपनी को मंजूरी देने के विरोध में शुरू हुई बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हालांकि, राज्य के बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया है और कुछ घंटे में हड़ताल समाप्त हो जाने की उम्मीद है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।</p><p>यह हड़ताल राज्य विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के हाल के फैसले के विरोध में बुलाई गई है। एचईआरसी ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में मौजूदा सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के साथ बिजली आपूर्ति करने का लाइसेंस दिया है। बृहस्पतिवार को करीब 40,000 बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से गुरुग्राम और चंडीगढ़ सहित पूरे हरियाणा में बिजली आपूर्ति, जल सेवाएं, औद्योगिक उत्पादन और कई आवश्यक गतिविधियां प्रभावित हुईं।</p><p>इस संदर्भ में पूछे जाने पर हरियाणा के बिजली मंत्री विज ने पंचकूला में संवाददाताओं से कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। इसमें बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा लगभग सुलझ गया है।</p><p>मैं पहले दिन से ही कर्मचारी संगठनों के नेताओं से कह रहा हूं कि हड़ताल इस समस्या का समाधान नहीं है। आज भी मैंने उनसे बात की है और सरकार के साथ बातचीत करने को कहा है।”
विज ने कहा कि कर्मचारियों की ओर से एचईआरसी के आदेश को रद्द करने के लिए बिजली अधिनियम की धारा 108 का इस्तेमाल करने की मांग आई थी। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी बात की है।</p><p>उन्होंने उम्मीद जताई कि हड़ताल कुछ घंटे में समाप्त हो जाएगी। मुख्यमंत्री सैनी और विज ने बुधवार को कहा था कि राज्य सरकार एचईआरसी के आदेश के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष मजबूती से रखेगी। इस हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।</p><p>गुरुग्राम के कई इलाकों में 30 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं आने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली संकट से परेशान लोगों ने कुछ इलाकों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और रास्ते बाधित कर दिए। बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर पानी की उपलब्धता पर भी पड़ा।</p><p>बिजली नहीं होने से जल आपूर्ति के लिए लगे पंप और बूस्टिंग स्टेशन प्रभावित हुए। कई आवासीय इलाकों में इन्वर्टर और बिजली के वैकल्पिक इंतजाम भी कुछ घंटे में जवाब दे गए। हड़ताल का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ा।</p><p>गुरुग्राम के सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटोला सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों का उत्पादन प्रभावित होने की खबर है। बिजली कर्मचारियों ने निजी कंपनी को वितरण की जिम्मेदारी सौंपे जाने का विरोध करते हुए आशंका जताई है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किसानों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बिजली महंगी हो सकती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/haryana-electricity-strike-continues-over-private-distribution-license-talks-offered</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chirag Paswan ने Rice Export में मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता सुधार पर दिया जोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/chirag-paswan-urges-shift-to-value-addition-in-rice-exports]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि देश ने चावल उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब चुनौती मात्रा से हटकर मूल्य पर ध्यान देने की है। पासवान ने भारतीय चावल निर्यातक परिसंघ (आईआरईएफ) और अपीडा द्वारा आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि धान की खेती से लेकर खाने की मेज तक चावल की मूल्य शृंखला को मजबूत करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण अनुकूल तरीकों, गुणवत्ता प्रमाणन, अनुसंधान, नवोन्मेष और प्रसंस्कृत चावल उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।</p><p>पासवान ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता के बाद दशकों तक देश की प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा और अधिक उत्पादन थी।...हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न की कमी से उबरने में मदद की। आज, मजबूत उत्पादन क्षमता के साथ हमें प्रसंस्करण, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, स्थिरता और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देना चाहिए। पासवान ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हासिल करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।</p><p>उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्र अपनी विकास क्षमता की सीमा के करीब पहुंच रहे हैं, जबकि खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं, जिनका अभी पूरा उपयोग नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री का लक्ष्य भारत को दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान देने वाला देश बनाना है। इसके तहत भारत न केवल अपनी खाद्य जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p><p>उन्होंने कहा, इस महत्वाकांक्षा के केंद्र में चावल होगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने और मूल्य वर्धित निर्यात का विस्तार करने के लिए अपनी योजनाओं के माध्यम से काम कर रहा है। पासवान ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में से एक है, जिसकी वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा, यह भारत को एक बड़ी जिम्मेदारी और एक बड़ा अवसर दोनों देता है।</p><p>उन्होंने यह सवाल उठाया कि भागीदार देशों के साथ भारत की ताकत साझा करते हुए निर्यात को कैसे मजबूत किया जाए, गुणवत्ता में सुधार कैसे किया जाए और वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों को कैसे अपनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में राष्ट्रीय विकास के लिए रेखांकित की गई सप्तधारा या ताकत की सात धाराओं को याद करते हुए पासवान ने कहा कि विनिर्माण और कृषि विशेष रूप से चावल क्षेत्र के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि चावल मूल्य शृंखला के लिए अधिक से अधिक मशीनरी, उपकरण और तकनीक को घरेलू स्तर पर तैयार करना चाहिए।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:24:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/chirag-paswan-urges-shift-to-value-addition-in-rice-exports</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sensex और Nifty में 1% से ज्यादा की गिरावट, सेंसेक्स 730 अंक टूटकर 72,519 पर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-and-nifty-fall-1-percent-erasing-early-gains-in-afternoon-trade]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घरेलू बाजारों में सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में शुरुआती बढ़त गंवाकर एक प्रतिशत टूट गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी पूंजी की निकासी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। बीएसई सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, लेकिन दोपहर के कारोबार में 730.30 अंक यानी एक प्रतिशत फिसलकर 72,519.09 पर आ गया। इसी तरह, एनएसई निफ्टी ने भी शुरुआती बढ़त गंवा दी और 260.75 अंक यानी 1.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,426.90 पर आ गया। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाटा स्टील का शेयर पांच प्रतिशत से अधिक टूटकर सबसे ज्यादा नुकसान में रहा।&nbsp;</p><p>अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडिगो, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस के शेयर में भी गिरावट रही। वहीं इटर्नल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और एचडीएफसी बैंक के शेयर बढ़त में रहे। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव करीब एक प्रतिशत बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एशियाई बाजार शुरुआती गिरावट से उबरकर ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए।</p><p>&nbsp;चीन का एसएसई कम्पोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, जापान का निक्की 225 सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार में गिरावट रही। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार बृहस्पतिवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।</p><p>&nbsp;शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,891.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। बीएसई सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 460.30 अंक की गिरावट और एनएसई निफ्टी 123.70 अंक टूटकर बंद हुआ था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:36:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-and-nifty-fall-1-percent-erasing-early-gains-in-afternoon-trade</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jio Platforms IPO ने रचा इतिहास, 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन पाने वाला बना दुनिया का पहला निर्गम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/jio-platforms-ipo-becomes-first-in-world-to-get-1-crore-applications]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अक्टूबर जियो प्लेटफॉर्म्स का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) दुनिया में एक करोड़ से अधिक आवेदन पाने वाला पहला सार्वजनिक निर्गम बन गया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह आंकड़ा इससे पहले वारी एनर्जीज के नाम दर्ज करीब 97 लाख आवेदनों के वैश्विक रिकॉर्ड से अधिक है। इसने बजाज हाउसिंग फाइनेंस जैसी भारतीय रिकॉर्ड बनाने वाली कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। सूत्रों ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ दुनिया में एक करोड़ से अधिक आवेदन पाने वाला पहला सार्वजनिक निर्गम बन गया है, जबकि निर्गम बंद होने में अभी पांच घंटे बाकी हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेशकों की गहरी रुचि को दर्शाती है।&nbsp;</p><p>शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर तीन मिनट तक जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को 19.75 करोड़ पेशकश वाले शेयर के मुकाबले 136.32 करोड़ शेयर के लिए बोलियां मिली थीं। इस तरह निर्गम को कुल मिलाकर करीब सात गुना अभिदान मिला। संस्थागत निवेशकों की मांग सबसे आगे है। पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) ने उनके लिए आरक्षित 4.90 करोड़ शेयर के मुकाबले 70.85 करोड़ शेयर के लिए बोलियां लगाईं, जो 14.46 गुना अभिदान है। घरेलू वित्तीय संस्थानों (बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बीमा कंपनियों) ने 34.51 करोड़ शेयर के लिए, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 26.95 करोड़ शेयर के लिए बोलियां लगाईं। हालांकि म्यूचुअल फंड की 4.40 करोड़ शेयर बोलियां काफी कम रहीं। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी को 9.45 गुना अभिदान मिला। खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों ने उनके लिए पेश किए गए 8.50 करोड़ शेयर के मुकाबले 17.19 करोड़ शेयर के लिए बोलियां लगाईं, यानी इस श्रेणी को 2.02 गुना अभिदान मिला। शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को 5.68 गुना, जबकि कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को 2.48 गुना अभिदान मिला। आईपीओ पूरी तरह 27 करोड़ नए शेयर जारी करने का निर्गम है।&nbsp;</p><p>मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर जियो प्लेटफॉर्म्स करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी और इसका मूल्यांकन लगभग 108 अरब अमेरिकी डॉलर होगा। इस निर्गम में मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड या उसके अन्य मौजूदा शेयरधारक कोई शेयर नहीं बेच रहे हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने 19 अक्टूबर को 212 बड़े (एंकर) निवेशकों से पहले ही करीब 8,110 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्हें मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए। ‘एंकर बुक’ के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिली थीं, जो उपलब्ध आवंटन से 30 गुना से भी ज्यादा थीं।&nbsp;</p><p>निवेशकों में ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधक और संप्रभु संपत्ति कोष शामिल थे। जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना निर्गम से प्राप्त राशि में से 27,500 करोड़ रुपये तक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करने की है। शेष राशि का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय तथा कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।&nbsp;</p><p>उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक निर्गम शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद हो रहा है। इसी दिन आकाश अंबानी का जन्मदिन भी है। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने हाल ही में कहा था कि कंपनी की प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और क्लाउड क्षेत्र में विस्तार की योजनाएं दूरसंचार कारोबार से आगे उसकी वृद्धि को गति देंगी।&nbsp;</p><p>उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस इकाई को देश के अबतक के सबसे बड़े आईपीओ से पहले एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश किया। अंबानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘जियो में ऐसा नहीं है कि हमें दोनों में से किसी एक को चुनना है। हमारा नेटवर्क ही हमारी प्रौद्योगिकी है।’’</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/jio-platforms-ipo-becomes-first-in-world-to-get-1-crore-applications</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भारत और Poland के बीच तकनीक और AI में बने Joint Venture: डोनाल्ड टस्क]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/poland-pm-donald-tusk-calls-for-joint-ventures-with-india-in-tech-ai]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने शुक्रवार को कहा कि भारत तथा पोलैंड को पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और वैमानिकी के क्षेत्र में सहयोग गहरा करना चाहिए, ताकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो सकें। टस्क ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को संयुक्त उद्यमों (जेवी) में बदलना चाहिए। यहां भारत-पोलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए टस्क ने कहा, ‘‘अब इन घोषणाओं को संयुक्त उद्यमों में बदलने का समय आ गया है।’’
उन्होंने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों तक उनकी पहुंच बनाने में मदद के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक सहयोग का आह्वान किया।</p><p>प्रधानमंत्री टस्क ने वैश्विक प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के रूप में बेंगलुरु की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘यह जगह (बेंगलुरु) दिखाती है कि लोगों, ज्ञान और उद्यमशीलता में निवेश किस तरह पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिति बदल सकता है।’’
अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान भारत और पोलैंड के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने का जिक्र करते हुए टस्क ने कहा कि कार्ययोजना में प्रौद्योगिकी सहयोग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र शामिल थे। उन्होंने कहा, ‘‘अब इन घोषणाओं को संयुक्त उद्यमों में बदलने का समय आ गया है।’’
टस्क ने कहा कि सहयोग से दोनों अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होनी चाहिए और उन्हें वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलनी चाहिए।</p><p>सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटलीकरण के क्षेत्र में पोलैंड के नेता ने भारत के बड़े आईटी सेवा क्षेत्र को अपने देश की सॉफ्टवेयर, क्लाउड समाधान, स्वचालन और साइबर सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञता के साथ जोड़ने वाली साझेदारियों का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पोलैंड की कंपनियां विशेष समाधान और यूरोपीय बाजारों का अनुभव उपलब्ध करा सकती हैं, जबकि भारतीय भागीदार उत्पादन एवं सेवाओं का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं। टस्क ने डिजिटल सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और पोलैंड की ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तथा ‘एमओबायवाटेल’ डिजिटल पहचान ऐप से दोनों देश एक-दूसरे का अनुभव साझा कर सकते हैं।</p><p>उन्होंने कहा, ‘‘हम मिलकर ऐसे सुरक्षित समाधान विकसित कर सकते हैं, जो नागरिकों और कारोबारियों के रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाएं।’’
उन्होंने जोर दिया कि डिजिटलीकरण से उत्पादकता बढ़नी चाहिए, लागत कम होनी चाहिए और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होनी चाहिए। टस्क ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग में कृत्रिम मेधा (एआई) को विशेष स्थान मिलना चाहिए। औद्योगिक स्वचालन, डेटा विश्लेषण, निदान और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए इसके अनुप्रयोग विकसित करने के अवसर हैं।</p><p>उन्होंने छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए उपकरण विकसित करने तथा मशीन लर्निंग और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए साइबर सुरक्षा, सूचना संरक्षण और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती एक साझा चुनौती होने के साथ-साथ नए कारोबारी अवसरों का क्षेत्र भी है।’’
सहयोग के दूसरे प्रमुख स्तंभ के रूप में वैमानिकी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री टस्क ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन का जिक्र किया, जो अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा था। उन्होंने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) में पोलैंड की भागीदारी का भी जिक्र किया।</p><p>प्रधानमंत्री टस्क ने कहा कि पोलैंड की कंपनियों और अनुसंधान केंद्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिकल प्रणालियों, सॉफ्टवेयर, वैज्ञानिक उपकरणों और उपग्रह डेटा के विश्लेषण में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने इन पूरक क्षमताओं का संयुक्त रूप से इस्तेमाल करने का आह्वान किया। पोलैंड की अंतरिक्ष कंपनियां पहले से ही उपग्रह के कलपुर्जों, पृथ्वी के अवलोकन, नेविगेशन सॉफ्टवेयर, डेटा विश्लेषण, अंतरिक्ष सुरक्षा और दोहरे उपयोग वाले समाधानों के क्षेत्र में भारतीय भागीदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं।</p><p>उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम मिलकर किसी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन में भाग ले सकते हैं, तो हमें यहां पृथ्वी पर भी विशिष्ट औद्योगिक परियोजनाएं विकसित करनी चाहिए।’’
पोलैंड के प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा कि दोनों देशों के स्टार्टअप और अनुसंधान दलों को निवेशकों तथा ग्राहकों तक पहुंच की जरूरत है। उन्होंने 2025 में ‘बेंगलुरु टेक समिट’ में पोलैंड की भागीदारी का उल्लेख किया और कहा कि उनका देश इस साल नवंबर में होने वाले आयोजन में फिर शामिल होगा। उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सिर्फ भविष्य की प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल न करें, बल्कि उन्हें मिलकर विकसित करें और वैश्विक बाजारों में भी मिलकर पेश करें।’’</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:13:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/poland-pm-donald-tusk-calls-for-joint-ventures-with-india-in-tech-ai</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Tonbo Imaging के शेयर की 66 फीसदी प्रीमियम पर लिस्टिंग, BSE पर 1,162 रुपये पर खुला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/tonbo-imaging-shares-list-at-66-percent-premium-bse-nse-debut]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली कंपनी टोनबो इमेजिंग इंडिया लिमिटेड का शेयर अपने 700 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले 66 प्रतिशत की बढ़त के साथ शुक्रवार को बाजार में सूचीबद्ध हुआ। बीएसई पर शेयर 1,162 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ जो निर्गम मूल्य से 66 प्रतिशत अधिक है। बाद में यह 1,059.05 रुपये पर कारोबार करने लगा जो सूचीबद्धता के स्तर से 8.86 प्रतिशत कम है।</p><p>हालांकि, यह अब भी निर्गम मूल्य से 51.28 प्रतिशत अधिक रहा। एनएसई पर शेयर निर्गम मूल्य से 65.71 प्रतिशत अधिक 1,160 रुपये पर खुला। बाद में यह 1,058.30 रुपये पर आ गया जो शुरुआती स्तर से 3.64 प्रतिशत नीचे, लेकिन निर्गम मूल्य से 51.18 प्रतिशत अधिक रहा।</p><p>सूचीबद्धता के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण बीएसई पर 6,191.91 करोड़ रुपये और एनएसई पर 6,060.45 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के 852.18 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को सोमवार को बोली के अंतिम दिन करीब 136 गुना अभिदान मिला था। आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 665-700 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।</p><p>बेंगलुरु स्थित टोनबो इमेजिंग निगरानी, टोही, लक्ष्य निर्धारण एवं नियंत्रण संबंधी कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सेंसर, प्रोसेसिंग, संचार और मार्गदर्शन प्रणालियों का डिजाइन एवं विनिर्माण करती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/tonbo-imaging-shares-list-at-66-percent-premium-bse-nse-debut</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सूक्ष्म व छोटे Exporters के प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार: Piyush Goyal]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-govt-to-bear-certification-cost-for-small-exporters]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(फाइल फोटो के साथ)
(राजेश राय)
बर्लिन, 23 अक्टूबर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के तहत सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के महंगे प्रमाणन का पूरा खर्च उठाने को तैयार है। उन्होंने मौजूदा और नए निर्यातकों से वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय से संपर्क करने का आग्रह किया। सरकार ने पिछले साल नवंबर में छह वित्त वर्षों के लिए 25,060 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस मिशन को मंजूरी दी थी।</p><p>इस मिशन को दो उप-योजनाओं के जरिये लागू किया जा रहा है। इनमें ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के लिए 10,401 करोड़ रुपये और ‘निर्यात दिशा’ के लिए 14,659 करोड़ रुपये का प्रावधान है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस मिशन के तहत हम दुनिया में कहीं भी निर्यात करने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति की मदद करने को तैयार हैं।</p><p>हम उन्हें सहायता देंगे। सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के मामले में हम प्रमाणन का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, यदि कोई प्रमाणन या प्रक्रिया बहुत महंगी है, तो उसका खर्च भी हम उठाने को तैयार हैं।’’
गोयल ने सभी उत्पाद श्रेणियों और क्षेत्रों के मौजूदा तथा नए निर्यातकों से प्रमाणन संबंधी सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से संपर्क करने का आग्रह किया।</p><p>उन्होंने कहा कि सरकार पूरा खर्च वहन करेगी। मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ के नियमों का अनुपालन करने की लागत (जिसमें कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) और यूरोपीय संघ का वनोन्मूलन विनियमन (ईयूडीआर) शामिल हैं) सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों के लिए सरकार उठाएगी, जबकि अन्य कारोबारों को उनकी श्रेणी के अनुसार सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम पुराने एवं नए दोनों भारतीय निर्यातकों से इसका लाभ उठाने का आग्रह करते हैं, ताकि अधिक लोगों को नए उत्पादों तथा नए बाजारों में जाने के लिए प्रोत्साहन मिले और इस कारोबार में नए निर्यातकों को बढ़ावा मिले।’’
मंत्री की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने यूरोपीय नियमों का अनुपालन करने की ऊंची लागत को लेकर चिंता जताई है।</p><p>भारत का यूरोपीय संघ के देशों को निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 4.57 प्रतिशत घटकर 72.4 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर था। पिछले वित्त वर्ष में भारत के कुल वस्तु निर्यात में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, इन देशों से आयात वित्त वर्ष 2025-26 में नौ प्रतिशत बढ़कर 66.18 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर था।</p><p>पिछले वित्त वर्ष में भारत के कुल वस्तु आयात में इन देशों की हिस्सेदारी करीब नौ प्रतिशत थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:23:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-govt-to-bear-certification-cost-for-small-exporters</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[European car कंपनियां भारत में तलाश रहीं Manufacturing अवसर, Piyush Goyal ने दी जानकारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-european-car-makers-exploring-manufacturing-in-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(राजेश राय)
बर्लिन, 23 अक्टूबर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि कई यूरोपीय कंपनियों ने भारत में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है और इनमें से कई कार कंपनियां देश में विनिर्माण के अवसर तलाश रही हैं। आधिकारिक यात्रा पर यहां आए मंत्री ने कहा कि जर्मनी की कंपनियां स्वास्थ्य सेवा, औषधि और अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश करने में रुचि रखती हैं। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यूरोपीय संघ (ईयू) अपने ऊपर जिस तरह के नियामकीय बोझ बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र को ऐसे भरोसेमंद साझेदार देशों की तलाश करनी होगी, जहां कम से कम उन कई चीजों का उत्पादन किया जा सके, जो यूरोप में बहुत महंगी होती जा रही हैं।</p><p>इसलिए मुझे भारत के लिए अपार संभावनाएं और यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद दिखती है।’’
यूरोपीय संघ कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) और वनों की कटाई से संबंधित नियमों सहित कई नियमन लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग हरित इस्पात में भारी निवेश कर रहा है और देश में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। गोयल ने कहा, ‘‘यहां की कई वाहन कंपनियां भी भारत में विनिर्माण पर विचार कर रही हैं।’’
उन्होंने कहा कि यूरोपीय कंपनियां इंजीनियरिंग, वैमानिकी, रक्षा, जहाज निर्माण और जहाजों की मरम्मत जैसे क्षेत्रों में भी भारत में कारोबारी अवसर तलाश रही हैं।</p><p>यूरोप की कई वाहन विनिर्माता कंपनियों ने भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए हैं और घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों की जरूरतें पूरी करने के लिए देश को आधार बनाया है। जर्मनी की फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कार कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं, जबकि चेक गणराज्य की कार कंपनी स्कोडा की भी देश में मौजूदगी है। गोयल ने कहा, ‘‘हम भारत से करीब 10 लाख कारों का निर्यात करते हैं।</p><p>जल्द ही आप देखेंगे कि भारत में बनी कारें यूरोप में भी पहुंचने लगेंगी। इसलिए मेरा मानना है कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में भारत की भागीदारी बढ़ रही है।’’
उन्होंने कहा कि जर्मनी की कंपनियों ने उनके साथ द्विपक्षीय बैठकों के दौरान भारत में बड़े निवेश की योजनाओं के बारे में बताया है। किसी कंपनी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि भारत में करीब चार अरब यूरो का कारोबार करने वाली एक कंपनी इसे बढ़ाकर 10 अरब यूरो करने की योजना बना रही है।</p><p>इस संवाददाता सम्मेलन में जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने कहा कि पिछले ढाई साल में जर्मनी की कंपनियों ने भारत में 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। गोयल ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता दोनों पक्षों के कारोबारियों को व्यापार और निवेश बढ़ाने के बड़े अवसर उपलब्ध कराएगा। मंत्री ने कहा कि भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते से वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही और सुगम होगी।</p><p>इस समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और 2027 की पहली तिमाही में इसके लागू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ आयात शुल्क दरों में कटौती, रियायती शुल्क दरों या बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के बारे में नहीं है। यह निश्चितता, निरंतरता और पूर्वानुमान की क्षमता का प्रतीक है।</p><p>इससे यह भरोसा मिलता है कि आपूर्ति श्रृंखलाएं खुली रहेंगी। उन्होंने मुक्त व्यापार समझौते को भविष्य के लिए एक व्यापक साझेदारी बताया। गोयल ने कहा, ‘‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच मेरा मानना है कि भरोसेमंद साझेदारियां भविष्य तय करेंगी।</p><p>विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं और व्यापारिक संबंधों में विश्वसनीयता की क्षमता महत्वपूर्ण हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत की व्यापक उत्पादन क्षमता और यूरोप की प्रौद्योगिकी मिलकर ऐसा संयोजन बनाएंगे, जिसका मुकाबला करना मुश्किल होगा। भारत में लालफीताशाही कम करने के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि सरकार कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और करीब 40,000 अनुपालन संबंधी बोझ हटाने या कम करने जैसे कई कदम उठा रही है। बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना आर. ने दोनों देशों को द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने और लालफीताशाही कम करने पर विचार करने का सुझाव दिया था।</p><p>वहीं सीबीएएम के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यूरोप के व्यापक भविष्य के बारे में बात कर रहा था। सवाल भारत या भारत पर सीबीएएम के प्रभाव के बारे में नहीं था।</p><p>भारत पर इसका असर ठीक रहेगा। हम खुद अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से कार्बन उत्सर्जन से मुक्त कर रहे हैं। इससे हमें वास्तव में लाभ होगा, क्योंकि हमारे प्रतिस्पर्धियों को सीबीएएम की लागत का सामना करना पड़ेगा।’’
गोयल ने कहा कि भारत, यूरोप को निर्यात करने वाले उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की प्रक्रिया तेज करने में मदद करेगा।</p><p>वहीं, यूरोप भी भारतीय उद्योगों को तेजी से कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायता देगा। जर्मनी में भारतीयों के लिए रोजगार के अवसरों के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि वहां बड़े पैमाने पर अवसर हैं और जर्मन कंपनियां हजारों लोगों को नौकरी पर रखने की इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी में काम करने की आकांक्षा रखने वाले भारतीय विद्यार्थियों को जर्मन भाषा सीखनी चाहिए और वहां की संस्कृति से परिचित होना चाहिए।</p><p>गोयल ने कहा कि विदेश मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मिलकर जर्मन भाषा सिखाने के लिए अधिक केंद्र स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में जर्मनी की 2,000 से अधिक कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं। जर्मनी, भारत में 10वां सबसे बड़ा निवेशक है।</p><p>वित्त वर्ष 2025-26 में देश को इससे 49.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला था। अप्रैल 2000 से जून 2026 के बीच भारत को जर्मनी से 15.84 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:14:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-says-european-car-makers-exploring-manufacturing-in-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Piyush Goyal ने Berlin में Bayer और Fresenius के अधिकारियों संग की निवेश बैठकें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-discusses-investment-opportunities-with-bayer-fresenius-in-berlin]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत में निवेश के अवसरों पर चर्चा करने के लिए दवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बायर और स्वास्थ्य सेवा समूह फ्रेसेनियस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। बायर के दवा प्रभाग के अध्यक्ष स्टीफन ओलरिच के साथ बैठक के दौरान गोयल ने कहा कि उन्होंने भारत में बायर की विस्तार योजनाओं और अधिक निवेश, नवाचार तथा सहयोग के जरिये देश के मजबूत स्वास्थ्य सेवा तंत्र के साथ कंपनी की भागीदारी बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। गोयल ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी, ‘‘फ्रेसेनियस समूह के सीईओ माइकल सेन के साथ सार्थक बैठक हुई।</p><p>भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा समाधानों की बढ़ती मांग तथा मजबूत विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाकर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।’’
उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि समूह घरेलू और वैश्विक, दोनों बाजारों की जरूरतें पूरी करने के लिए भारत के कुशल प्रतिभाशाली लोगों का किस तरह लाभ उठा सकता है। नॉफ समूह के ‘जनरल पार्टनर’ (वैश्विक) मुरात अकिलीज के साथ बैठक में गोयल ने भारत में कंपनी के बढ़ते विनिर्माण परिचालन और टिकाऊ निर्माण सामग्री तथा बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/piyush-goyal-discusses-investment-opportunities-with-bayer-fresenius-in-berlin</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[10 लाख टन Raw Sugar के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की मियाद 31 दिसंबर तक बढ़ी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/govt-extends-duty-free-raw-sugar-import-deadline-december]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सरकार ने त्योहारों के दौरान घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, आयात की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दी गई है। सरकार ने 20 अगस्त को 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी।</p><p>उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 2.6 लाख टन चीनी का आयात किया गया है। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि कीमतों में समानता नहीं होने के कारण आयात सीमित रहा है। समयसीमा बढ़ाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय कीमतें इतनी कम हों कि आयात व्यावहारिक हो सके, तब आपूर्ति हासिल की जा सके।</p><p>आयात की अनुमति देने के अलावा, सरकार ने पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपलब्धता कम होने के बीच कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए व्यापारियों पर भंडार रखने की सीमा लागू करने जैसे कई कदम उठाए हैं। विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी उत्पादन का अनुमान अब घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है, जबकि पहले यह 343 लाख टन था। घरेलू मांग सालाना 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 10:20:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/govt-extends-duty-free-raw-sugar-import-deadline-december</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[eMudhra ने SSL और TLS सर्टिफिकेट कारोबार छोड़ा, शेयर 20 प्रतिशत टूटा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/emudhra-exits-ssl-tls-certificate-business-share-price-falls-20-percent]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>डिजिटल प्रमाणीकरण सेवाएं देने वाली कंपनी ईमुद्रा ने अपने प्रमाणन प्राधिकरणों की ओर से जारी सुरक्षा कुंजियों में खामी सामने आने के बाद सुरक्षित सॉकेट लेयर (एसएसएल) और ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (टीएलएस) प्रमाणपत्र कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। एसएसएल और टीएलएस ऐसे सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं, जो इंटरनेट पर वेबसाइट और उपयोगकर्ता के ब्राउजर के बीच भेजी जाने वाली जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।</p><p>इनका इस्तेमाल करने वाली वेबसाइट के पते की शुरुआत ‘एचटीटीपीएस’ से होती है। इस खबर के बीच कंपनी का शेयर बृहस्पतिवार को बीएसई में 20 प्रतिशत टूटकर 345.25 रुपये के निचले सर्किट पर आ गया। कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘वैश्विक डिजिटल ट्रस्ट कंपनी ईमुद्रा लिमिटेड के निदेशक मंडल ने वैश्विक एसएसएल/टीएलएस प्रमाणपत्र कारोबार से स्वेच्छा से बाहर निकलने का फैसला किया है।’’
ईमुद्रा डिजिटल हस्ताक्षर और वेबसाइट सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करती है, जो इंटरनेट ब्राउजर और वेबसाइट के बीच सुरक्षित कनेक्शन स्थापित करने में मदद करते हैं।</p><p>कंपनी के आठ प्रमाणन प्राधिकरणों (सीए) में निर्धारित मानकों के मुकाबले कमजोर सुरक्षा कुंजियों का इस्तेमाल किया गया था। साइबर अपराधी इन सुरक्षा कुंजियों का दुरुपयोग कर किसी वैध भुगतान कंपनी की नकल करने वाली फर्जी वेबसाइट बना सकते थे। इसके जरिये लोगों को भुगतान करने या अपनी निजी जानकारी साझा करने के लिए गुमराह किया जा सकता था।</p><p>एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता ने एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला को इस खामी की जानकारी दी थी। शोधकर्ता के मुताबिक, ईमुद्रा के प्रमाणन प्राधिकरणों की ओर से जारी कुछ कमजोर सुरक्षा कुंजियों का कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से विश्लेषण कर उनका गुप्त स्वरूप निकाला जा सकता था। इस मामले का संज्ञान लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने ईमुद्रा में सुरक्षा संबंधी घटना की जांच के लिए एक विशेष दल गठित किया है।</p><p>ईमुद्रा के चेयरमैन वी. श्रीनिवासन ने वैश्विक एसएसएल/टीएलएस प्रमाणपत्र कारोबार से जुड़ी हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी ने इस मामले को जिम्मेदारी से संभाला। उन्होंने कहा कि खामी का पता चलने के 14 घंटे के भीतर प्रभावित प्रमाणन प्राधिकरणों को निरस्त कर दिया गया और मामले की जानकारी भी समय पर सार्वजनिक की गई। कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘प्रभावित प्रमाणन प्राधिकरणों से अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया था।</p><p>कंपनी के बुनियादी ढांचे से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई और न ही कोई डेटा चोरी हुआ। सभी भौतिक और डिजिटल सुरक्षा नियंत्रण बरकरार रहे।’’
श्रीनिवासन ने कहा कि वैश्विक एसएसएल/टीएलएस प्रमाणपत्र कारोबार से कंपनी के कुल वैश्विक राजस्व का करीब एक प्रतिशत ही आता है। कंपनी ने कहा कि डेटा संप्रभुता और अनुपालन संबंधी बढ़ती जरूरतों के कारण इस कारोबार की जटिलता और लागत लगातार बढ़ रही है।</p><p>साथ ही, कुछ बड़ी कंपनियां एसएसएल/टीएलएस प्रमाणपत्र मुफ्त में उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में कंपनी के कुल राजस्व के मुकाबले इस कारोबार में निवेश पर प्रतिफल और व्यावसायिक संभावनाएं सीमित हो गई हैं। ईमुद्रा ने कहा कि एसएसएल/टीएलएस कारोबार उसके व्यापक डिजिटल समाधान पोर्टफोलियो का एक हिस्सा है।</p><p>कंपनी अब अपने मुख्य उद्यम समाधान और एसएसएल/टीएलएस से इतर डिजिटल ट्रस्ट सेवाओं पर अधिक ध्यान देगी, जहां वह ग्राहकों के लिए अधिक मूल्य सृजित कर सकती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 21:33:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/emudhra-exits-ssl-tls-certificate-business-share-price-falls-20-percent</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Adani Group ने Vizhinjam Port की हिस्सेदारी बिक्री के लिए सरकार से मांगी अनुमति: केरल विधानसभा में जानकारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/adani-group-seeks-kerala-government-nod-for-vizhinjam-port-stake-sale]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा है कि अदाणी समूह ने विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का संचालन करने वाली कंपनी एवीपीपीएल में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार की पूर्व-अनुमति के बिना हस्तांतरित करने की कोशिश नहीं की। सतीशन ने हाल में राज्य विधानसभा में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में कहा कि अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) ने अपनी मौजूदा 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के प्रस्तावित हस्तांतरण के लिए मंजूरी लेने के वास्ते राज्य सरकार के समक्ष आवेदन दिया था। उन्होंने कहा कि रियायत समझौते के प्रावधानों के तहत बंदरगाह की संचालक कंपनी के स्वामित्व में शेयर हस्तांतरण के जरिये किसी भी बदलाव के लिए राज्य सरकार की पूर्व-मंजूरी होना जरूरी है।</p><p>इस समझौते के तहत मंजूरी देने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकार-प्राप्त समिति प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण, इससे संबंधित सूचनाओं और रियायत समझौते के अन्य प्रासंगिक पहलुओं की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापक समीक्षा के बाद समिति की सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p><p>उनका यह जवाब एवीपीपीएल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की कंपनी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) को बेचने की प्रस्तावित योजना के बीच आया है। दुनिया की सबसे बड़ी जहाजरानी एवं लॉजिस्टिक कंपनियों में शामिल एमएससी के साथ इस सौदे की घोषणा अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन (एपीएसईजेड) ने इस साल जून में की थी। सौदे का मूल्य करीब 1.4 अरब डॉलर बताया गया था।</p><p>इस हिस्सेदारी बिक्री प्रस्ताव को लेकर केरल में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। सतीशन ने एक जुलाई को विधानसभा में कहा था कि राज्य सरकार को इस प्रस्तावित सौदे की जानकारी मीडिया खबरों से मिली थी और एपीएसईजेड की ओर से उसे कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार सौदे की गहन जांच करेगी और बंदरगाह की रियायतधारक कंपनी के स्वामित्व में राज्य की पूर्व-अनुमति के बगैर बदलाव नहीं किया जा सकता।</p><p>विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का निर्माण पांच दिसंबर, 2015 को तत्कालीन ओमन चांडी सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इसका पहला चरण पूरा होने के बाद तीन दिसंबर, 2024 को वाणिज्यिक परिचालन शुरू हुआ था। सतीशन ने कहा कि समझौते के तहत बंदरगाह के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण का विस्तार 31 दिसंबर, 2028 तक पूरा किया जाना है।</p><p>विस्तार कार्यों के लिए पर्यावरण मंजूरी 10 मार्च, 2025 को मिली और निर्माण उसी साल सितंबर में शुरू हो गया था। अगस्त, 2026 तक विस्तार कार्यों में 12.4 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 20:03:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/adani-group-seeks-kerala-government-nod-for-vizhinjam-port-stake-sale</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कच्चे तेल में तेजी के बीच Sensex 460 अंक फिसला, Nifty भी 124 अंक टूटा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/bse-sensex-drops-460-points-nse-nifty-falls-crude-oil-surge]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>कच्चे तेल के दाम में तेजी के बीच घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला बृहस्पतिवार को लगातार तीसरे दिन जारी रहा और मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 460 अंक लुढ़क गया। वहीं एनएसई निफ्टी 124 अंक के नुकसान में रहा। विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल के दाम चढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।</p><p>इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख के बीच दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी), बिजली और आईटी शेयरों समेत चौतरफा बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार नुकसान में रहे। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 704.58 अंक तक टूटकर 73,005.11 अंक के निचले स्तर पर आ गया था।</p><p>एनएसई निफ्टी भी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.65 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 256.5 अंक टूटकर 22,554.85 अंक पर आ गया था। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, इटर्नल, एचडीएफसी बैंक, पावरग्रिड, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, आईटीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि., महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और लार्सन एंड टुब्रो में प्रमुख रूप से गिरावट रही।</p><p>वहीं, लाभ में रहने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मास्युटिकल्स, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और बजाज फिनसर्व शामिल हैं। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है।</p><p>रुपये में भी तेजी का रुख जाता रहा और कारोबार के दौरान यह लगातार कमजोर होता गया, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। बैंक शेयरों की अगुवाई में प्रमुख सूचकांकों ने उबरने की कोशिश की, लेकिन ऊंचे स्तर पर यह तेजी कायम नहीं रह सकी।’’
उन्होंने कहा कि घरेलू बॉण्ड प्रतिफल के हाल के उच्च स्तर पर लौटने से शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन की फिर से समीक्षा होने लगी और लगभग सभी क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। नायर ने कहा, ‘‘जापान के महंगाई के आंकड़े आने से पहले वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा और अंत में इसमें गिरावट दर्ज की गई।</p><p>मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी कंपनियों के शेयरों के मुकाबले अधिक गिरावट रही।’’
छोटी कंपनियों से जुड़े बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक में 0.94 प्रतिशत और मझोली कंपनियों के मिडकैप सेलेक्ट में 0.74 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई के क्षेत्रवार सूचकांकों में एफएमसीजी में सबसे अधिक 1.63 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके बाद बीमा (1.44 प्रतिशत), पूंजीगत सामान (1.43 प्रतिशत), फोकस्ड आईटी (1.30 प्रतिशत), आवास वित्त (1.23 प्रतिशत), आईटी (1.20 प्रतिशत), बिजली (1.06 प्रतिशत), औद्योगिक (1.04 प्रतिशत) और टिकाऊ उपभोक्ता सामान (0.97 प्रतिशत) का स्थान रहा।</p><p>जियो प्लेटफॉर्म्स लि. के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को बृहस्पतिवार को बोली के दूसरे दिन 5.36 गुना बोलियां मिलीं। इनक्रेड मार्केट्स में उपाध्यक्ष (शोध) विंध्याचल प्रसाद ने कहा, “सेंसेक्स के साप्ताहिक वायदा एवं विकल्प सौदों की समाप्ति से कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बढ़ा, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक स्तर पर नकदी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी के बाजार से नकदी निकालने और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जारी बिकवाली से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है। बीएसई में सूचीबद्ध कुल शेयरों में से 2,965 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 1,388 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।</p><p>212 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, हांगकांग का हैंग सेंग, जापान का निक्की और चीन में शंघाई कम्पोजिट में तेज गिरावट आई। यूरोप के प्रमुख बाजारों में बृहस्पतिवार को दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख था।</p><p>वहीं, अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का भाव तीन प्रतिशत चढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,022.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।</p><p>घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 1,614.32 करोड़ रुपये के शेयरों की लिवाली की। सेंसेक्स बुधवार को 143.21 अंक टूटकर 73,709.69 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 77.60 अंक की गिरावट के साथ 22,811.35 अंक पर रहा था।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 19:23:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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