West Asia Crisis | जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता, ऊर्जा सुरक्षा पर जोर | India-US Relations

जयशंकर और रुबियो की बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई सीमा को पांच दिनों के लिए बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित खतरों के बीच, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से फोन पर विस्तृत चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान द्वारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का डर बना हुआ है।
जयशंकर और रुबियो की बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई सीमा को पांच दिनों के लिए बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। विदेशमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ने कहा कि उनकी रूबियो के साथ फोन कॉल पर विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें प्रमुख रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की गई।
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उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चर्चा पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर केंद्रित थी। हमने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बात की। संपर्क में रहने पर सहमति बनी।’’ अमेरिका के विदेश मंत्रालय द्वारा वाशिंगटन में जारी बयान के मुताबिक रूबियो और जयशंकर आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमत हुए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने बताया कि विदेश मंत्री रुबियो ने आज भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। उन्होंने बताया कि दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
पिगोट ने कहा कि रुबियो और जयशंकर इस बात पर सहमत हुए कि आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित एक अन्य घटनाक्रम में जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों के राजदूतों से मुलाकात की और हालात पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने जीसीसी सदस्य छह देशों के राजदूतों से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया। क्षेत्र में भारतीय समुदाय को उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।’’
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इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों ने हिस्सा लिया। समझा जाता है कि इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं पर चर्चा हुई। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।
इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है। जयशंकर ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष विजेता हेराथ से भी बातचीत की। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के परिणामों पर चर्चा की। भारत ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ और ‘विजन महासागर’ के प्रति प्रतिबद्ध है।
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