Karur Stampede Case: TVK मंत्री पर गवाहों को धमकाने का आरोप, Supreme Court करेगा तत्काल सुनवाई

सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने मामले की गंभीरता और जल्द सुनवाई की ज़रूरत बताते हुए कहा कि भले ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच चल रही है, लेकिन आरोपी—जो अब तमिलनाडु सरकार में मंत्री हैं गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को उठाने वाली याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ मामले में गवाहों को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोपों वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने पर सहमति जताई। इस मामले में 2025 में एक राजनीतिक रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी। सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने मामले की गंभीरता और जल्द सुनवाई की ज़रूरत बताते हुए कहा कि भले ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच चल रही है, लेकिन आरोपी—जो अब तमिलनाडु सरकार में मंत्री हैं गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को उठाने वाली याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है।
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यह मामला 27 सितंबर, 2025 को करूर में 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) द्वारा आयोजित जन-संपर्क कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ से जुड़ा है। कार्यक्रम में अचानक भीड़ बढ़ने से जानलेवा भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई और इसने पूरे देश में चिंता पैदा कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले की जांच राज्य की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से CBI को सौंप दी थी, क्योंकि कोर्ट का मानना था कि इस घटना की जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होनी चाहिए। जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली एक सुपरवाइजरी कमेटी भी बनाई गई थी। तब से CBI इस घटना से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही है, जैसे भीड़ को संभालने के इंतज़ाम, रैली के लिए मंज़ूरी और उस दिन हुई घटनाओं का क्रम। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तय समय के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK अध्यक्ष विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने में कथित तौर पर सात घंटे की देरी हुई; अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि भीड़ के जमा होने पर इसका क्या असर पड़ा होगा।
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अधिकारी इस कार्यक्रम के लिए संगठनात्मक ज़िम्मेदारी की भी समीक्षा कर रहे हैं, जिसमें यह शामिल है कि करूर में कार्यक्रम स्थल को मंज़ूरी किसने दी, पार्टी के ढांचे के भीतर रैली की योजना कैसे बनाई गई, और विजय को कब सूचित किया गया। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या ज़िला अधिकारियों के साथ समन्वय में सुरक्षा के पर्याप्त उपाय, जैसे कि प्रवेश-निकास मार्ग, पीने के पानी की व्यवस्था और जोखिम का आकलन, मौजूद थे। अभिनेता और TVK प्रमुख विजय हाल ही में जांच के सिलसिले में दिल्ली में CBI के सामने पेश हुए थे और एजेंसी के मुख्यालय में लगभग सात घंटे बिताए थे।
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इसके अलावा, DMK ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और विजय सहित TVK नेताओं को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने के निर्देश देने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि ऐसी टिप्पणियों से चल रही जांच प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने तमिलनाडु के एक मंत्री के बयानों का भी ज़िक्र किया है और इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
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