Bikaner House विवाद: Shashi Tharoor ने Raihan Vadra की प्रदर्शनी से फोटो हटाने पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी नो आइडिया इज़ फाइनल से तस्वीरें हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे कई स्तरों पर शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह की सेंसरशिप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भारत की वैश्विक लोकतांत्रिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि इस घटना से एक ऐसे लोकतंत्र के रूप में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँच सकता है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। साथ ही, इससे कलात्मक अभिव्यक्ति की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं पैदा हो सकती हैं। 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में, थरूर ने इस घटना को "कई स्तरों पर शर्मनाक" बताया। उन्होंने तर्क दिया कि विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली तस्वीरें केवल घटनाओं को दिखाती हैं, न कि जरूरी तौर पर किसी राजनीतिक रुख को।
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थरूर ने कहा कि यह कई स्तरों पर शर्मनाक है। उन्होंने 'नो आइडिया इज़ फाइनल' (No Idea Is Final) नामक प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाने के फैसले पर अपनी आपत्तियां जताईं। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों में ऐसी घटनाएं दिखाई गई थीं, जिन पर पहले ही जनता और मीडिया का काफी ध्यान जा चुका था। उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों को सिर्फ इसलिए 'राजनीतिक सामग्री' क्यों माना जाए, क्योंकि वे प्रदर्शनों को दर्शाती हैं?
थरूर ने कहा कि ये तस्वीरें उन घटनाओं की हैं जो पहले ही लोगों के ज़हन में बस चुकी हैं। इनमें से कई तस्वीरें ऐसी हैं जो लोगों ने पहले ही मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों में देखी होंगी। उन्होंने आगे कहा कि भले ही बीकानेर हाउस के पास राजनीतिक रुख के खिलाफ अपनी नीति रखने की छूट है, लेकिन विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें तो बस एक घटना को दर्शाती हैं, वे अपने आप में राजनीतिक नहीं हैं। अगर यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे के तौर पर अदालत में जाता, तो ये तस्वीरें निश्चित रूप से वहां स्वीकार कर ली जातीं।
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कांग्रेस सांसद ने कहा कि और सबसे बुरी बात यह है कि इस सेंसरशिप ने एक स्वतंत्र लोकतंत्र के रूप में भारत की वैश्विक छवि को और भी गहरा आघात पहुँचाया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस विवाद की वजह से रेहान वाड्रा के फोटोग्राफी के काम पर काफी ध्यान गया, जिससे शायद उन तक उतने लोग पहुँच गए, जितने शायद खुद प्रदर्शनी में भी नहीं आते।
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