सलमान खुर्शीद ने Rahul Gandhi के बयान का किया समर्थन, Foreign Policy पर उठाए सवाल

Salman Khurshid
ANI
अंकित सिंह । Oct 23 2026 5:10PM

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने विदेश नीति पर राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत किसी भी देश का पिछलग्गू नहीं बन सकता। उन्होंने व्यापार समझौते, एच-1बी वीजा और भारतीयों के निर्वासन का हवाला देकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। खुर्शीद ने जोर दिया कि कूटनीतिक मामलों को कॉलेज डिबेट की तरह नहीं लेना चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार को भारत की विदेश नीति पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत किसी भी देश का अधीनस्थ अनुयायी नहीं बन सकता—चाहे वह देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो या भारत की जरूरतें कुछ भी क्यों न हों।

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ANI से बात करते हुए, खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी ने राजनयिक प्रतीकों के महत्व, अन्य देशों के साथ भारत के जुड़ाव, और देश की गरिमा व आत्म-सम्मान की रक्षा करने की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की विदेश नीति के नतीजों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने व्यापार समझौते के न होने, H-1B वीजा को लेकर चिंताओं और भारतीयों को हथकड़ी लगाकर वापस भेजे जाने (निर्वासन) का जिक्र किया। खुर्शीद ने कहा कि विदेश नीति के मामले गंभीर होते हैं। इन्हें कॉलेज की किसी डिबेट प्रतियोगिता की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी की बातों को पलटकर सवाल पूछने के बजाय, उनके सही संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

राजनयिक संबंधों में किसी देश की राजधानी के महत्व को समझाते हुए, खुर्शीद ने कहा कि राजधानी उस देश की व्यापक राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि अगर आप सच में किसी देश को गंभीरता से लेते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि उसकी राजधानी उसकी पूरी व्यवस्था का प्रतीक होती है। उन्होंने आगे कहा कि भले ही किसी देश में आने वाले लोगों की रुचियां और गंतव्य अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन व्यापक संदर्भ को समझने के लिए उन्हें अंततः उस देश के राजनीतिक केंद्र से जुड़ना ही होगा।

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दिल्ली को छोड़कर जामनगर या मुंबई जाने का उदाहरण देते हुए, खुर्शीद ने कहा कि इस तरह के रवैये से यह धारणा बन सकती है कि देश की राजधानी और राष्ट्रीय व्यवस्था को वह गंभीरता नहीं दी जा रही है, जिसकी वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह जुड़ाव केवल कुछ खास और सीमित हितों से प्रेरित है। राहुल गांधी जी ने बहुत गंभीरता से विचार करने के बाद ही यह बात उठाई है। खुर्शीद ने लोगों से आग्रह किया कि वे राहुल गांधी की बातों के पीछे के इरादे को समझें और उठाए गए मुद्दों पर ध्यान दें, न कि पलटकर सवाल पूछकर चर्चा का रुख ही बदल दें।
 

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