Madhya Pradesh बना अव्वल, दो साल में नष्ट की गई 2.74 लाख किलोग्राम ड्रग्स

राज्य स्तरीय नारकोटिक्स समन्वय केंद्र की बैठक में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश में शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त अभियान चलाने के साथ ही अवैध नेटवर्क को खत्म करने की योजना बनाई गई है।
मध्यप्रदेश दो साल में 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट करने के साथ इस संबंध में देश में पहले स्थान पर रहा। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में नशा विरोधी समितियां भी गठित करेगी।
इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा एवं सामाजिक न्याय विभागों के प्रतिनिधि और पुलिसकर्मी शामिल होंगे। संबंधित स्थानीय थाने का बीट प्रभारी समिति का नोडल अधिकारी होगा। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने यहां मंत्रालय में राज्य स्तरीय नारकोटिक्स समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस संबंध में निर्देश दिए।
वर्णवाल ने सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने मादक पदार्थों से संबंधित जानकारी देने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य लोगों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। मुख्य सचिव ने मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों के पूरे अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए तीन साल का समन्वित अभियान चलाने का आह्वान किया।
उन्होंने इसकी तुलना राज्य में नक्सलवाद के खात्मे के लिए किए गए प्रयासों से की। उन्होंने संबंधित विभागों को अभियान के लिए आंतरिक लक्ष्य निर्धारित करने और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया तंत्र मजबूत करने तथा नारकोटिक्स इकाई, विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय बेहतर बनाने पर जोर दिया।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 2025 में 2,073 मामलों में अफीम, मॉर्फिन और कोडीन सहित 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर तक 2,756 मामलों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस साल 30 सितंबर तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया।
मुख्य सचिव ने लोगों को मादक पदार्थों से संबंधित जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की मानस हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। सामाजिक न्याय विभाग को उन जिलों से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त करने को कहा गया है, जहां नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं। मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में नशामुक्ति केंद्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के तहत 31 और स्वास्थ्य विभाग के तहत 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। वर्णवाल ने नशामुक्ति अभियान में मध्यप्रदेश के देश के शीर्ष दो राज्यों में शामिल होने पर प्रसन्नता जताई और संबंधित विभागों के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि 2025 और 2026 में मानस पोर्टल एवं हेल्पलाइन के माध्यम से राज्य में 811 शिकायतें प्राप्त हुईं।
इस दौरान राज्य पुलिस, एनसीबी, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने मादक पदार्थों की 18 अवैध प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया। एनडीपीएस मामलों में 446 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी कुर्क की गईं। इनमें 2025 में 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये और 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्तियां शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सितंबर 2026 तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष श्रेणी के 201 मुकदमों की निगरानी की जा रही है। इसी अवधि में अदालतों में लंबित आठ मामलों में दोषसिद्धि हुई। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को केंद्र के साथ समन्वय कर कोडीन-आधारित कफ सिरप के उत्पादन और वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटाने तथा उनकी आपूर्ति एवं वितरण की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
वर्णवाल ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली में सुधार की योजना बनाने को कहा। उन्होंने कोडीन-आधारित दवाओं की लाइसेंस प्रक्रिया को एकीकृत करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया।
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