Vanakkam Poorvottar: Meghalaya में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सड़कों पर उतरा लोगों का हुजूम, सरकार पर साधा निशाना

Shillong protest
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नानग्रीमगिमिन अचिक डोल के अध्यक्ष डेविड मराक ने कहा कि अवैध घुसपैठ के कारण गारो पहाड़ क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई बाहरी लोग आजीविका के अवसरों का लाभ उठा रहे हैं और कुछ मामलों में बिना उचित निगरानी के मकान बनाकर बेनामी गतिविधियां भी चला रहे हैं।

मेघालय की राजधानी शिलांग में अवैध घुसपैठ के मुद्दे को लेकर व्यापक जनाक्रोश देखने को मिल रहा है। हम आपको बता दें कि मोटफ्रान क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा में विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। इस सभा का आयोजन मेघालय सामाजिक संगठन महासंघ ने किया था, जिसमें गारो पहाड़ क्षेत्र के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई।

सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “गो बैक बांग्लादेशी” जैसे नारे लगाए और आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठ की समस्या ने राज्य के जनजातीय समाज, भूमि अधिकार और राजनीतिक अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थानीय समुदायों की पहचान और अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है।

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इस जनसभा में गारो पहाड़ से कई सामाजिक संगठनों और नेताओं ने भाग लिया। बड़ी संख्या में छात्र भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभा में वक्ताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार जनजातीय समुदायों के हितों की रक्षा करने में असफल रही है।

नानग्रीमगिमिन अचिक डोल के अध्यक्ष डेविड मराक ने कहा कि अवैध घुसपैठ के कारण गारो पहाड़ क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई बाहरी लोग आजीविका के अवसरों का लाभ उठा रहे हैं और कुछ मामलों में बिना उचित निगरानी के मकान बनाकर बेनामी गतिविधियां भी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पिछले नेताओं की लापरवाही का परिणाम है जिन्होंने संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों की रक्षा नहीं की।

वहीं मेघालय सामाजिक संगठन महासंघ के अध्यक्ष राय कुपर सिनरेम ने गारो पहाड़ के लोगों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि हिन्युट्रेप समुदाय अचिक समाज के साथ खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गारो पहाड़ स्वायत्त जिला परिषद चुनाव को स्थगित करने का निर्णय जनता को भ्रमित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सरकार को पता है कि जनता आगामी चुनाव में सत्ताधारी दल के पक्ष में मतदान नहीं करेगी।

सिनरेम ने सरकार से अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और राज्य की भूमि तथा संसाधनों की रक्षा की जाए।

इसके अलावा, हिटो के अध्यक्ष डोनबोक खार ने कहा कि चुनाव स्थगित होना गारो पहाड़ के लोगों की एक उपलब्धि है क्योंकि इससे उनकी आवाज को बल मिला है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वह मिलकर अपनी भूमि और अधिकारों की रक्षा करें।

सभा में खनम के कार्यकारी अध्यक्ष थामस पासाह ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति यह संकेत देती है कि जनजातीय समुदायों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने असम और मेघालय स्वायत्त जिला परिषद नियम 1951 के कुछ प्रावधानों में संशोधन की मांग की ताकि जनजातीय क्षेत्रों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

वहीं जैन्तिया राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष सामबोर्मी लिंगदो ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की दिशा किसी और के हाथों में प्रतीत होती है, जबकि शासन की बागडोर स्वयं सरकार के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव के समय अवैध घुसपैठिये स्थानीय समुदायों को चुनौती दे रहे हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई तख्तियां भी उठाई थीं जिन पर जनजातीय अधिकारों की रक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने की मांग लिखी हुई थी। खराब मौसम के बावजूद सैकड़ों लोग इस जनसभा में शामिल हुए।

हम आपको बता दें कि सभा से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और मोटफ्रान तथा आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था। कई दुकानदारों ने भी एहतियात के तौर पर अपनी दुकानें बंद रखीं। हम आपको बता दें कि गारो पहाड़ क्षेत्र में हाल के दिनों में तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत होने की खबर भी सामने आई है। ऐसे में यह जनसभा राज्य की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर उठती चिंता का प्रतीक बनकर उभरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध घुसपैठ और जनजातीय अधिकारों का मुद्दा मेघालय की राजनीति में आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण बन सकता है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती तो जन असंतोष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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