पाकिस्तान में लश्कर के टॉप आतंकी आमिर हमजा पर Unknown गनमैन का अटैक, गंभीर रूप से घायल हुआ हाफिज सईद का राइट हैंड

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अभिनय आकाश । Apr 16 2026 12:55PM

आमिर हमज़ा अफ़ग़ान मुजाहिदीन का एक अनुभवी सदस्य है। अपने जोशीले भाषणों और विपुल लेखन के लिए जाने जाने वाला हमजा कभी LeT के आधिकारिक प्रकाशन का संपादक था और उसने कई किताबें लिखी है, जिनमें 2002 में प्रकाशित 'काफ़िला दावत और शहादत' (धर्म-प्रचार और शहादत का कारवां) भी शामिल है।

लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में से एक आतंकवादी आमिर हमज़ा को लाहौर में कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी और फ़िलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ अज्ञात हमलावरों ने लाहौर में एक न्यूज़ चैनल के दफ़्तर के बाहर हमज़ा पर गोलियाँ चलाईं। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं और उसे तुरंत एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई है। आमिर हमज़ा ने आतंकवादी हाफ़िज़ सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना की थी। उनका नाम कई आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है, जिनमें भारत में हुए कई हमले भी शामिल हैं। आमिर हमज़ा अफ़ग़ान मुजाहिदीन का एक अनुभवी सदस्य है। अपने जोशीले भाषणों और विपुल लेखन के लिए जाने जाने वाला हमजा कभी LeT के आधिकारिक प्रकाशन का संपादक था और उसने कई किताबें लिखी है, जिनमें 2002 में प्रकाशित 'काफ़िला दावत और शहादत' (धर्म-प्रचार और शहादत का कारवां) भी शामिल है।

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संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने लश्कर-ए-तैयबा को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है और आमिर हमज़ा को प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची में शामिल किया है। माना जाता है कि उन्होंने LeT की केंद्रीय समिति में काम किया है और धन जुटाने, भर्ती करने तथा हिरासत में लिए गए आतंकवादियों की रिहाई के लिए बातचीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसने लश्कर की पत्रिका "मजल्लाह अल-दावा" के संस्थापक संपादक के तौर पर काम किया और 2002 में "काफिला दावत और शहादत" नाम की एक किताब लिखी, जिसमें चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था। 2018 में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा LeT से जुड़ी चैरिटी संस्थाओं जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर की गई वित्तीय कार्रवाई के बाद, बताया जाता है कि हमज़ा ने खुद को लश्कर से अलग कर लिया था। 

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इसके बाद उन्होंने "जैश-ए-मनकफा" नाम का एक अलग गुट बनाया, जिसका मकसद कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर समेत अन्य जगहों पर आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखना था। भारतीय मीडिया के अनुसार, यह गुट पाकिस्तान के भीतर बेरोकटोक काम कर रहा है और हमज़ा अभी भी LeT के नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में हैं।

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