Nirav Modi को London Court से झटका! Bank of India को 100 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश, सरकारी बैंक की बड़ी जीत

 Nirav Modi
ANI
रेनू तिवारी । Jun 24 2026 10:34AM

लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में फ़ैसला सुनाते हुए जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा, 'मिस्टर मोदी बैंक को पर्सनल गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर (लगभग 38.9 करोड़ रुपये) की मूल बकाया रकम चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हैं।

भारत से फरार चल रहे हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लंदन हाई कोर्ट (London High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) को 10.7 मिलियन डॉलर (100 करोड़ रुपये से अधिक) की बकाया राशि चुकानी होगी। यह आदेश नीरव मोदी की एक कंपनी को दिए गए कर्ज (Loan) के एवज में उनके द्वारा दी गई 'पर्सनल गारंटी' (Personal Guarantee) के तहत जारी किया गया है। वर्तमान में लंदन की वांड्सवर्थ जेल में बंद नीरव मोदी के खिलाफ इसे भारतीय सरकारी बैंक के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी और आर्थिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

मंगलवार को लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में फ़ैसला सुनाते हुए जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा, "मिस्टर मोदी बैंक को पर्सनल गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर (लगभग 38.9 करोड़ रुपये) की मूल बकाया रकम चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हैं। इसमें बैंक द्वारा तय आधार पर कैलकुलेट किया गया ब्याज भी जोड़ा जाएगा। मिस्टर मोदी ने ऐसा कोई बचाव पेश नहीं किया जिससे यह पता चले कि बैंक उस रकम का हकदार क्यों नहीं था।"

मामला क्या था?

यह विवाद 2012 में बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दुबई की कंपनी 'फायरस्टार डायमंड FZE' को दिए गए लोन से जुड़ा है। एक साल बाद, नीरव मोदी ने पर्सनल गारंटी पर साइन किए, जिसमें उन्होंने लोन न चुका पाने की स्थिति में खुद ज़िम्मेदारी ली।

2018 में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद, बैंक ने लोन वापस मांगा और कंपनी व मोदी दोनों से भुगतान की मांग की। कोर्ट के मुताबिक, इन मांगों का कोई जवाब नहीं दिया गया।

कोर्ट ने नीरव मोदी की दलीलें खारिज कीं

सुनवाई के दौरान, मोदी ने तर्क दिया कि पर्सनल गारंटी को लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें बैंक से भुगतान के लिए सही नोटिस नहीं मिले और लोन एग्रीमेंट खत्म करने के बैंक के फ़ैसले पर सवाल उठाए।

हालांकि, जस्टिस साइमन टिंकलर ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि बैंक ऑफ़ इंडिया बकाया रकम वसूलने का हकदार है। कोर्ट ने कहा कि मोदी ऐसा कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर पाए जिससे यह पता चले कि बैंक को गारंटी के तहत बकाया पैसा क्यों नहीं मिलना चाहिए।

इस मामले में एक अहम मुद्दा यह था कि क्या मोदी को बैंक द्वारा भेजे गए भुगतान के नोटिस मिले थे। मोदी ने कुछ नोटिस मिलने से इनकार किया और दावा किया कि जब वे भेजे गए थे, तब वे भारत में नहीं थे। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि नोटिस सही तरीके से पहुंचा दिए गए थे। फ़ैसले में बताया गया कि एक नोटिस उस लंदन जेल में भेजा गया था जहाँ मोदी अभी बंद हैं, जबकि दूसरा नोटिस पहले ही उनकी कानूनी टीम को दिया जा चुका था।

PNB धोखाधड़ी के असर पर भी विचार किया गया

अदालत ने कथित PNB धोखाधड़ी का फ़ायरस्टार ग्रुप पर पड़े असर का भी ज़िक्र किया। जस्टिस टिंकलर ने कहा कि 2018 में धोखाधड़ी के आरोप सामने आने के बाद, यह मानना ​​उचित था कि फ़ायरस्टार कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है, जिससे उधार देने वालों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

फ़ैसले में फ़रवरी 2018 में मोदी के भेजे गए एक ईमेल का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने माना था कि इस स्थिति ने ग्रुप की अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ पूरी करने की क्षमता पर असर डाला है।

अपने अंतिम फ़ैसले में, अदालत ने नीरव मोदी की साइन की हुई पर्सनल गारंटी को सही ठहराया और पुष्टि की कि बैंक ऑफ़ इंडिया मूल रक़म के साथ-साथ लागू ब्याज भी वसूलने का हकदार है।

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