Dravidian Architecture का बेजोड़ नमूना है Chamundeshwari Temple, शिखर पर हैं 7 स्वर्ण कलश

Chamundeshwari Temple
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कर्नाटक के मैसूरु में चामुंडी पहाड़ी पर स्थित श्री चामुंडेश्वरी मंदिर एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यहां देवी पार्वती के उग्र रूप चामुंडी ने महिषासुर का वध किया था। द्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर का साल 1827 में महाराजा कृष्णा राजा वोडेयार ने जीर्णोद्धार कराया और भव्य सात मंजिला गोपुरम का निर्माण करवाया था।

मैसूर की 3489 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है। यह मंदिर न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहां पर भक्त अपनी मनोकामना लेकर दूर-दूर से पहुंचते हैं। यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक हैं। खासकर नवरात्रि के पावन मौके पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यहां पर दर्शन का अनुभव साधारण नहीं बल्कि आत्मा को छू जाने वाला होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चामुंडेश्वरी देवी और मंदिर के रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं।

चामुंडेश्वरी देवी

श्री चामुंडेश्वरी देवी को चामुंडी भी कहा जाता है। यह मां दुर्गा की शक्ति का उग्र रूप हैं। देवी चामुंडी भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती का अवतार हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक पहाड़ी पर आतंक मचाने वाले राक्षस महिषासुर का चामुंडी देवी ने वध किया था। जिस कारण उनको 'महिषासुर मर्दिनी' के रूप में भी जाना जाता है।

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श्री चामुंडेश्वरी मंदिर

कर्नाटक के मैसूरु के चामुंडी पहाड़ियों पर लगभग समुद्र तल से 3,489 फीट की ऊंचाई पर चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है। स्कंद पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में आठ पहाड़ियों से घिरे 'त्रिमुता क्षेत्र' नाम के पवित्र स्थान का वर्णन मिलता है। इन 8 पहाड़ियों में से एक पश्चिमी भाग में चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है, जोकि पहाड़ी पर स्थित सबसे प्राचीन मंदिर है। इसके अलावा पहाड़ी पर महाबलेश्वर मंदिर भी स्थापित है।

इतिहास

बता दें कि मैसूरु के राजपरिवार का श्री चामुंडेश्वरी मंदिर के वर्तमान स्वरूप और इसकी भव्यता के पीछे बड़ा योगदान रहा है। महाराजा कृष्णा राजा वोडेयार देवी मां के परम भक्त थे। उन्होंने साल 1827 में इस मंदिर का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार कराया था। वहीं मंदिर के प्रवेश द्वार पर वर्तमान सात मंजिला सुंदर गोपुरम बनवाया था। राजा द्वारा भेंट किए गए इन ऐतिहासिक रथों का उपयोग आज भी विशेष त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर निकलने वाले जुलूसों के लिए किया जाता है।

द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला

श्रीचामुंडेश्वरी मंदिर की बनावट आध्यात्मिकता और कला का बेजोड़ नमूना है। यह मुख्य रूप से एक चतुर्भुजाकार संरचना है, जिसको पारंपरिक द्रविड़ वास्तुकला वाली शैली में तैयार किया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक भव्य सात मंजिला गोपुरम है।

इस मंदिर के शिखर के सबसे ऊपरी हिस्से पर सात स्वर्ण कलश स्थापित हैं। जोकि दूर से ही चमकते हुए दिखते हैं। मंदिर परिसर के अंदर नवरंग हॉल, प्राकार, अंतर्ला मंडप और मुख्य गर्भगृह शामिल है। मुख्य गर्भगृह के ठीक ऊपर एक छोटा और सुंदर सा 'विमान' भी बना हुआ है।

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